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                <title>Kejriwal - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Kejriwal RSS Feed</description>
                
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                <title>केजरीवाल के विरुद्ध  'फंड के दुरुपयोग' पर कोर्ट ने दिया एफआईआर का आदेश ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ एक अहम फ़ैसला सुनाया। कोर्ट ने द्वारका में होर्डिंग्स लगाने के लिए कथित तौर पर सरकारी पैसे के दुरुपयोग के मामले में उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने पुलिस को दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 2007 की धारा 3 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की सजा) के तहत मामला दर्ज करने और अन्य संभावित अपराधों की जांच करने का निर्देश दिया। यह मामला एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149821/the-court-ordered-an-fir-on-misuse-of-funds-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(1)2.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ एक अहम फ़ैसला सुनाया। कोर्ट ने द्वारका में होर्डिंग्स लगाने के लिए कथित तौर पर सरकारी पैसे के दुरुपयोग के मामले में उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने पुलिस को दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 2007 की धारा 3 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की सजा) के तहत मामला दर्ज करने और अन्य संभावित अपराधों की जांच करने का निर्देश दिया। यह मामला एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कानूनी कार्रवाई है या राजनीतिक प्रतिशोध?</div>
<div> </div>
<div>यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है, जब अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी पहले से ही कई कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पिछले साल शराब नीति घोटाले में उनकी गिरफ्तारी और जमानत के बाद अब यह नया मामला उनके लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। बीजेपी इसे आप की कथित भ्रष्ट नीतियों का सबूत बता सकती है। वहीं, आप इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है। पार्टी के समर्थकों का कहना है कि 2019 का मामला अब उठाना सत्ताधारी दलों की साजिश है, ताकि केजरीवाल की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।</div>
<div> </div>
<div>यह पूरा मामला शिव कुमार सक्सेना नाम के एक शख्स की शिकायत से शुरू हुआ। उन्होंने कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। सक्सेना ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने 2019 में द्वारका में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगवाकर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया। उनका दावा था कि ये होर्डिंग्स सरकारी खजाने से राजनीतिक प्रचार के लिए लगाए गए, जो गैरकानूनी है। सक्सेना ने इसकी जांच के लिए FIR की मांग की थी।</div>
<div> </div>
<div>इससे पहले 15 सितंबर 2022 को द्वारका की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सक्सेना की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने रिवीजन याचिका दायर की। 21 जनवरी 2025 को रिवीजन कोर्ट ने मामले को फिर से मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेजा और नए सिरे से फ़ैसले का निर्देश दिया। अब एसीजेएम नेहा मित्तल ने इस मामले में FIR का आदेश देते हुए जांच को ज़रूरी बताया।</div>
<div> </div>
<div>2022 में द्वारका साउथ पुलिस स्टेशन के एसएचओ ने एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें कहा गया कि 2019 की शिकायत के समय बताए गए स्थान पर अब (2022 में) कोई होर्डिंग्स नहीं मिले, इसलिए कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। लेकिन एसीजेएम मित्तल ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि समय बीतने और प्रिंटिंग प्रेस की जानकारी न होने के कारण सबूत जुटाना असंभव है, यह कहना ग़लत है। कोर्ट ने जोर दिया कि वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के इस दौर में जांच को मौका दिए बिना इसे बेकार मान लेना ठीक नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। जज ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि एसएचओ की रिपोर्ट में इस पहलू पर कोई जानकारी नहीं दी गई कि शिकायत में बताए गए समय और स्थान पर होर्डिंग्स थे या नहीं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि बार-बार निर्देशों के बावजूद पुलिस ने एक्शन टेकेन रिपोर्ट समय पर दाखिल नहीं की, जिसके चलते मामले में देरी हुई।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के तहत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उसका दुरुपयोग करने की सजा में जुर्माना और कारावास दोनों शामिल हो सकते हैं। अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि होर्डिंग्स के लिए सरकारी फंड का ग़लत इस्तेमाल हुआ, तो केजरीवाल के ख़िलाफ़ बड़ा मामला बन सकता है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह मामला सिर्फ तकनीकी उल्लंघन है, या इसके पीछे गहरे राजनीतिक मक़सद हैं?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Mar 2025 16:27:13 +0530</pubDate>
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                <title>  नही चाहिए आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[<div>आज नेताओं में जल्द से जल्द प्रसिद्धी पाने की ललक ने राजनीति के स्तर को बहुत नीचे गिरा दिया है। आज इंटरनेट के जमाने में बात में सच्चाई हो या ना हो बस खबर ट्रेंडिंग होते ही राई का पहाड़ बनने में देर नही लगती। आज हर नेता ट्रेंडिंग न्यूज में रहना चाहता है। किसी भी झूठ को सनसनीखेज और रहस्यमय तरीके से दुनिया के सामने पेश करना आज की राजनीति में आम बात हो गई है। राजनीति मे पहले भी झूठ और फरेब का सहारा ले अपने विपक्षी को बदनाम किया जाता था परन्तु इतना नही जितना आज यह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148783/%C2%A0%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/rajneeti3.jpg" alt=""></a><br /><div>आज नेताओं में जल्द से जल्द प्रसिद्धी पाने की ललक ने राजनीति के स्तर को बहुत नीचे गिरा दिया है। आज इंटरनेट के जमाने में बात में सच्चाई हो या ना हो बस खबर ट्रेंडिंग होते ही राई का पहाड़ बनने में देर नही लगती। आज हर नेता ट्रेंडिंग न्यूज में रहना चाहता है। किसी भी झूठ को सनसनीखेज और रहस्यमय तरीके से दुनिया के सामने पेश करना आज की राजनीति में आम बात हो गई है। राजनीति मे पहले भी झूठ और फरेब का सहारा ले अपने विपक्षी को बदनाम किया जाता था परन्तु इतना नही जितना आज यह चलन बढ़ गया है। इस तरह की सनसनीखेज छाप राजनीति का जनक मैं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मानता हूं।</div><div><br /></div><div> याद किजिए केजरीवाल की वो तस्वीरें जिसमें वो बड़े-बड़े राजनेताओं के नाम की फाइलें प्रैस कांफ्रेस में टी.वी कैमरा के सामने लहरा बड़े बड़े दावा करते हुए कहते थे कि इन फाइलों में बंद है जी इन नेताओं के काले कारनामों के सबूत, बस एक बार जनता मुझे इलेक्शन जिता दे जी सब को जेल में डाल दूंगा जी। इलेक्शन भी जीत लिया, सीटे कम पड़ी तो सिद्धांतों और नैतिकता को ताक पे रख उन्ही नेताओं के समर्थन से मुख्यमंत्री बन सरकार भी बनाई। समर्थन वाली सरकार नही चला पाए तो अपने दम पर भी प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई, एक नही दो-दो बार सरकार बनाई पर उन फाइलों में बंद सबूत कभी सामने नही आए और ना ही उन तथाकथित सबूतों के आधार पर किसी को जेल ही भेजा गया बल्कि इसी तरह की राजनीति का शिकार बन अपने मंत्रियों सहित जेल की हवा जरूर खाई और दिल्ली की सत्ता से बाहर भी हो गए। </div><div><br /></div><div>आज के नेता खुद का नाम जल्द से जल्द चमकाने के चक्कर में सनसनीखेज खुलासों की वीडियो यू-ट्यूब,फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपलोड कर देते हैं बिना झूठ या सच की पड़ताल किए। अगर ताजा मामले की बात करे तो एक वीडियो दिल्ली की पटपड़गंज विधानसभा से नवनिर्वाचित तेज तरार भाजपा के युवा नेता रविंद्र नेगी की तेजी से वायरल हो रही वीडियो का है। इस वीडियो में वो पटपड़गंज विधायक कैंप आफिस में सरकारी सामान चोरी होने की सनसनीखेज खबर को सार्वजनिक कर रहे हैं और इस चोरी का इल्जाम पटपड़गंज के निवर्तमान विधायक आप के नेता मनीष सिसोदिया पर लगा रहे हैं।</div><div><br /></div><div> वीडियो में खुद नेगी पूरे आफिस में घूम-घूम के चोरी हुई एक-एक चीज के बारे में बता रहे हैं। इसी दौरान वो एक हाॅल(बड़ा कमरा) में आते हैं और एक दीवार की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि इस दीवार पर 2-3 लाख रूपये का टी.वी लगा हुआ था, वो टी.वी भी उतार कर ले गए बस उस टी.वी का फरेम छोड़ गए हैं। इस वीडियो में दीवार पर टी.वी का फरेम यानि टी.वी को टांगने का स्टैंड लगा दिखाई दे रहा है। </div><div><br /></div><div>वहीं एक दूसरी वीडियो जो रिपब्लिक भारत टी.वी चैनल की है उसमे रिपोर्टर उसी जगह आफिस के केयर टेकर से बात-चीत कर रहा है तो उस वीडियो में केयर टेकर उसी दीवार की ओर इशारा कर बता रहा है कि वहां एलईडी टी.वी लगा हुआ था, टी.वी ले गए और टी.वी का स्टैंड भी ले गए ताकि किसी को पता ना चले की यहां टी.वी लगा हुआ था। इस वीडियो में टी.वी का स्टैंड उस दीवार से गायब है। वहीं इंडिया टी.वी की पड़ताल में एक पत्रकार बता रहा है कि उसकी पी.डब्ल्यू.डी डिपार्टमेंट के जे.ई वेदप्रकाश से इस बारे में बात हुई, उन्होने चोरी होने से साफ इंकार किया है और बताया कि इस आफिस को कोई सरकारी सामान नही दिया गया था।</div><div><br /></div><div> जो भी सामान आफिस में था ए.सी वगैरह वो सब किराए पे था और कुर्सी आदि लोगो की पर्सनल थी, जिनकी की थी वे ले गए। नेगी ने एक अन्य वीडियो में एक और इल्जाम लगाया कि उसी कैंप आफिस से चार कंम्प्यूटर और डाटा भी चुराया गया। अब सोचने वाली बात यह है कि इलेक्शन रिजल्ट्स के तुरंत बाद दिल्ली एल.जी वी.के.सक्सेना ने आदेश जारी कर दिए थे कि दिल्ली सचिवालय और एम.एल.ए कैंप आफिस से फाइल तक बाहर नही जाएगी। एल.जी के आदेशों की पालना करवाना लाॅ एण्ड आर्डर का विषय है और यह जिम्मेदारी केंद्रीय गृहमंत्रालय के अंतर्गत आती है। अगर आफिस से कंप्यूटर और डाटा गायब हुआ है तो यह तो पूरी तरह गृहमंत्रालय की नाकामी है और गृहमंत्रालय भाजपा के पास है।</div><div><br /></div><div>यह एक गंभीर विषय है। नेगी शायद मामले को सनसनीखेज बनाने के चक्कर में भूल गए कि अगर तुम किसी पर एक उंगली उठाते हो तो चार उंगलियाँ तुम्हारी तरफ भी उठती हैं। यदि सच में चोरी हुई है तो पुलिस थाने में एफआईआर करवाए। पुलिस जांच करेगी और सामान बरामद करने की कोशिश करेगा। दिल्ली की जनता पिछले 10-11 साल से आरोप प्रत्यारोप की राजनीति झेल रही है जिससे दिल्ली का विकास और दिल्ली का हित बहुत पीछे छूट गया है। भाजपा दिल्ली में 27 साल का वनवास काट कर लौटी है। ऐसे में दिल्ली के लोगों की समस्याओ को हल करना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। </div><div><br /></div><div>दिल्ली में रेखा गुप्ता का आज राजतिलक हो गया है। 20 फरवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में रेखा गुप्ता और उनके मंत्री मंडल के सहयोगीयों ने शपथ ली। उम्मीद यही है कि भाजपा उन्हें अगले 5 साल तक मुख्यमंत्री के पद पर बिठाए रखेगी। आज दिल्ली की जनता को काम चाहिए, आरोपों का खेल बहुत देख चुके हैं लोग, आज केंद्र में भाजपा सरकार है, दिल्ली लेफ्टिनेंट गवर्नर भाजपा के हैं, आज दिल्ली मुख्यमंत्री भी भाजपा के हैं। अब दिल्ली के विकास कार्यों में रोड़े अटकाने वाला कोई नही है। बहुत उम्मीद से लोगों ने भाजपा को चुना है। </div><div><br /></div><div>अब भाजपा के पास सुनहरी मौका है विकसित दिल्ली विकसित राजधानी बनाने का, उम्मीद करते हैं दिल्ली मे अब आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति बंद होगी और नई सरकार का पूरा ध्यान दिल्ली के सुनहरे कल को संवारने पर रहेगा। निसंदेह जिन्होने  अपने कार्यकाल के दौरान चोरी, धांधली, घोटाले किए हैं उन पर कार्यवाही हो परन्तु इंटरनेट ट्रेंडिंग झूठी-सच्ची वीडियो के माध्यम से नही पुलिस, कानून और सविंधान के माध्यम से।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Feb 2025 17:44:41 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली के नतीजे में क्षेत्रीय दलों के लिए संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना आंदोलन से जन्मी आम आदमी पार्टी का दिल्ली विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन ने उस सपने को भी चकनाचूर कर दिया,जिसमें देश की जनता ने कभी साफ-सुथरी राजनीति की उम्मीद देखी थी।अन्ना आंदोलन के वक्त देश के लोगो को लगा कि एक नया प्रयोग है और वैकल्पिक राजनीति की धारा बहेगी।इसी लिए लोग अपने काम धंधे छोड़ कर इससे जुड़े।बच्चों ने अपने गुल्लक तोड़ कर इसे बढ़ाने के लिए चंदा दिया।लेकिन आप के गठन के बाद से 2025 तक वह अपने वास्तविक उद्देश्य को भूलने के साथ ही प्रचलित राजनीति का हिस्सा बन गई।</div>
<div>  </div>
<div>शराब घोटाला</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148607/message-to-regional-parties-in-delhi-result"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(2)2.jpg" alt=""></a><br /><div>भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना आंदोलन से जन्मी आम आदमी पार्टी का दिल्ली विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन ने उस सपने को भी चकनाचूर कर दिया,जिसमें देश की जनता ने कभी साफ-सुथरी राजनीति की उम्मीद देखी थी।अन्ना आंदोलन के वक्त देश के लोगो को लगा कि एक नया प्रयोग है और वैकल्पिक राजनीति की धारा बहेगी।इसी लिए लोग अपने काम धंधे छोड़ कर इससे जुड़े।बच्चों ने अपने गुल्लक तोड़ कर इसे बढ़ाने के लिए चंदा दिया।लेकिन आप के गठन के बाद से 2025 तक वह अपने वास्तविक उद्देश्य को भूलने के साथ ही प्रचलित राजनीति का हिस्सा बन गई।</div>
<div> </div>
<div>शराब घोटाला और शीश महल में रहने की बात छोड़ भी दिया जाए तो भी अरविंद केजरीवाल उस किसी मानदंड पर खरे नहीं उतरे,जो उन्होंने रामलीला मैदान में महात्मा गांधी की फोटो के नीचे तय किए थे।केजरीवाल का आम आदमी झुग्गी झोपड़ी वालों, रेहड़ी पटरी वालों,आटो ड्राइवर और दलितों के लिए वजूद में आया था।उनके आम आदमी ने वादा किया था कि धर्म की राजनीति से उसका कोई वास्ता नहीं रहेगा।</div>
<div> </div>
<div>सरकारी सुविधाएं नहीं लेंगे,जो बाद में उन्होंने दूसरों से ज्यादा ली।उनका आम आदमी जल्दी ही मजहबी हो गया।धार्मिक स्थल उसके ऐजेंडा में शामिल हो गए।वह शिक्षा,चिकित्सा,विकास एवं बदलाव के मुद्दों को भूल कर वादों की खानापूर्ति पर उतर आया।आम आदमी पार्टी के और उसके नेताओं के दफ्तरों से बापू की तस्वीर ही उतर गई।अगर देखा जाए तो दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे सिर्फ भाजपा की सफलता की नहीं बल्कि यह उस पार्टी के पतन की भी कहानी कह रहे हैं जिसके आईने में लाखों लोगों ने बदलाव का सपना देखा था।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल बड़ा कड़वा सच है कि रेत की नींव पर राजनीतिक महल की उम्र कितनी होती है?आम जनता एक अच्छी सरकार और विकास चाहती है,लेकिन राजनीति की धुंध में विकास ऐसा शब्द है,जो हमेशा खो जाता है।स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पीने का साफ पानी जैसे मुद्दे राजनीतिक अखाड़े में दम तोड़ देते हैं।आपको याद होगा कि 2005 के आसपास सूचना के अधिकार पर अरविंद केजरीवाल सक्रिय थे।एक गंभीर लड़ाई लड़ रहे थे वह।तब सबने सोचना शुरू कर दिया कि काश,ऐसे लोग सक्रिय राजनीति में आ जाएं तो समाज, राज्य और देश की काया पलट सकती है।</div>
<div> </div>
<div>सूचना के अधिकार पर सक्रिय लोग कुछ वर्ष के बाद अन्ना हजारे के आंदोलन के साथ लोकपाल के लिए सक्रिय दिखे। नौकरी करने वाले ढेर सारे लोगों ने नौकरी छोड़ दी।कॉलेज के विद्यार्थी तक अपनी पॉकेट खर्च बचाकर उन्हें ऑनलाइन चंदा भेज रहे थे।तब सब कुछ साफ-साफ था।लेकिन क्या करें सत्ता का गणित कुछ ऐसा है कि उसमें सारी पारदर्शिता शून्य में बदल जाती है।आप पार्टी के प्रचंड बहुमत में दिल्ली कितनी सुखी और साफ-सुथरी हुई, इस पर बहस सालों से हो रही है।</div>
<div> </div>
<div>आगे भी होती रहेगी। बेहतर की उम्मीद में जनता ने एक नई पार्टी को मौका दिया था। ऐसी पार्टी, जिसका कोई राजनीतिक इतिहास न था।लेकिन आम जनता ने समझ लिया कि ईमानदार होने का दावा करना और ईमानदार होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार का गहरा असर अरविंद केजरीवाल की राजनीति पर पड़ेगा।चार हजार से अधिक वोटों से हारने वाले ये वही केजरीवाल हैं जिन्होंने मंच से कहा था,मेरे जिंदा रहते भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में कभी चुनाव नहीं जीत सकती।ये अहंकार.वो भी राजनीति में।हालांकि जनता में या कहिए समर्थकों को शुरू-शुरू में ये रास आया।केजरीवाल खुद को आंदोलन से उपजे नेता और कट्टर ईमानदार कहा करते थे।लेकिन अन्ना को दगा, राजनीति में न आने की कसम और मजबूत करीबियों का ‘विश्वास’ तो उन्होंने पहले ही खो दिया।</div>
<div> </div>
<div>इससे पहले सत्ता के लिए कांग्रेस से हाथ मिला ही चुके थे।वो भी तब जब राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार ने कांग्रेस पर लगे दागों की संख्या बढ़ा दी थी।फिर दूसरे टर्म शराब घोटाला,लो फ्लोर बस,मोहल्ला क्लिनिक,जल बोर्ड के घपले सामने आए।मतलब वैकल्पिक राजनीति के अगुआ और उनकी पूरी टीम कठघरे में खड़ी हो गई।फिर आम आदमी सोचने लगा कि परम्परागत राजनीति और केजरीवाल की वैकल्पिक राजनीति में क्या फर्क है।बड़े दावे करने वाले केजरीवाल जांच एजेंसी को अपनी ईमानदारी का सबूत नहीं पेश कर सके।जिससे उनको जेल की हवा खानी पड़ी।</div>
<div> </div>
<div>यानी जिस भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर केजरीवाल का आम आदमी अस्तित्व में आया था,वह खुद उसी भ्रष्टाचार के दलदल में गहरे तक धंस गया।।दूसरी तरफ मोदी मार्का राजनीति आप के हर दावे को झूठ बताकर तार तार कर रही थी।पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में कहीं भी मोदी गारंटी का जिक्र नहीं किया।लेकिन उन्होंने दिल्ली चुनाव के प्रचार में बार बार मोदी गारंटी का जिक्र किया।एक चुनावी सभा में तो उन्होंने एक दर्जन बार से विधायक मोदी गारंटी का जिक्र किया।शायद यही वजह रही कि चुनाव मतदान तक मोदी बनाम केजरीवाल हो गया।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली की सड़कों की हालत,हवा में घुलता जहर आम आदमी पर सीधा असर डाल रहा था।वहीं बिना रोजगार दिए मुफ्त बिजली-पानी केजरीवाल के बेस वोटर यानी मिडल क्लास और स्लम के युवाओं को भी नागवार गुजरा।भाजपा ने दांव खेला और केजरीवाल की मुफ्त योजनाओं को जारी रखते हुए उसका टाप अप प्लान पेश कर दिया।हालांकि हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस की गारंटी फेल हो चुकी थी।क्यों कि जो पार्टी सत्ता में हो उसी की गारंटी पर भरोसा ज्यादा रहा है।ये झारखंड में भी हुआ जहां हेमंत सोरेन की गारंटी पर ही जनता ने भरोसा जताया।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के अहंकार, उन पर भ्रष्टाचार के लगे आरोपों के देख कर जनता ने तय कर लिया वो यहां अब ऐसा नहीं होने देगी।अरविंद केजरीवाल की पार्टी भ्रष्टाचार आंदोलन से निकलकर आई थी,लेकिन 10 साल बाद ही पार्टी के बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे।अरविंद केजरीवाल,मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को तो शराब घोटाले में जेल तक जाना पड़ गया।आप पर जो गंभीर आरोप लगे,उसके नैरेटिव को पार्टी खत्म नहीं कर पाई।इसके अलावा कैग की रिपोर्ट में भी आप पर हॉस्पिटल निर्माण आदि में भ्रष्टाचार के आरोप लगे।</div>
<div> </div>
<div>आप ने कैग की रिपोर्ट पर बहस कराने की बजाय इसे इग्नोर करने की कोशिश की। पूरे चुनाव में भ्रष्टाचार के मुद्दे की गूंज रही।वहीं केजरीवाल सिर्फ लाभार्थी वोटरों के भरोसे थे।केजरीवाल पिछले दो चुनाव से फ्री बिजली और पानी के जरिए अपनी राजनीति को आगे बढ़ा रहे थे।इसका ज्यादा फायदा उठाने वाला वर्ग मिडिल और लोअर क्लास के थे।दिल्ली के दंगल से पहले बीजेपी ने इन वोटरों को साध लिया।पार्टी ने 12 लाख तक टैक्स फ्री कर अरविंद केजरीवाल का खेल कर दिया।वहीं आम आदमी पार्टी को पिछले 2 चुनावों में मुस्लिम और दलित बहुल इलाकों में बड़ी जीत मिली थी,लेकिन इस बार दोनों ही इलाकों में आप से ये वोटर्स छिटकते नजर आए।</div>
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<div>दरअसल,दिल्ली में जब भी मुसलमानों पर संकट आया,आप मुखर होने की बजाय खामोश हो गई।इसके अलावा केजरीवाल ने बीच में कुछ ऐसे बयान भी दिए जो मुसलमानों को नागवार लगे।इसी लिए भाजपा के आने की सम्भावना के बाद भी चुनाव में मुसलमानों ने एकतरफा आप को सपोर्ट नहीं किया,जिसके कारण आप नजदीकी मुकाबले में पिछड़ गई।कांग्रेस से गठबंधन न करके भी आप ने बड़ी भूल की।दिल्ली में कांग्रेस भले ही कोई सीट जीतने में कामयाब न हुई हो और कई सीटों पर उसके उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके।लेकिन 14 सीटें ऐसी थी जहां कांग्रेस को मिले वोट आप की हार के अंतर से कहीं ज्यादा था।</div>
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<div>इसमें से कई सीटें मुस्लिम बाहुल्य थी,जहां मुसलमानों ने आप के बदले कांग्रेस को वोट कर दिया।अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की हार की वजह भी इन सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार ही थे।यहां तक की दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी भी हारते हारते बची।दरअसल हरियाणा में आम आदमी पार्टी चाहती थी कि कांग्रेस से गठबंधन हो लेकिन राहुल गांधी तैयार नहीं हुए थे।दिल्ली में कांग्रेस चाहती थी कि आम आदमी पार्टी से गठबंधन हो लेकिन अरविंद केजरीवाल तैयार नहीं हुए थे।</div>
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<div>आंकड़े बताते हैं कि अगर गठबंधन होता तो दिल्ली की तस्वीर कुछ और हो सकती थी।जहां बीजेपी को 45.56 फ़ीसदी वोट मिले वहीं आम आदमी पार्टी को 43.57 फ़ीसदी वोट मिले।यहां तीसरे खे़मे के रूप में कांग्रेस थी जिसका वोट प्रतिशत 6.34 फ़ीसदी रहा।ये 2020 के चुनावों में उसके प्रदर्शन से बेहतर था, जब उसे 4.63 फ़ीसदी वोट मिले थे।साफ जाहिर है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे का संदेश दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहेगा।इसका असर समूचे देश की राजनीति पर पड़ने वाला है।</div>
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<div>इससे इंडिया गठबंधन भी गहरे तक प्रभावित होगा।दिल्ली के नतीजों ने ये भी साबित कर दिया है कि देश की जनता को भाजपा के हिंदुत्व के अलावा और किसी का हिंदुत्व पसंद नहीं है।जब उसे हिंदुत्व के मुद्दे पर ही अपनी सरकार चुन्नी है तो फिर भाजपा में क्या बुराई है जो खुल कर अपने को सनातन धर्म की रक्षक बताती है।देश में हिन्दुत्व की राजनीती में भाजपा अब इकलौती खिलाड़ी है,यहाँ तक कि उसने शिवसेना को भी बाहर कर दिया।कांग्रेस और अखिलेश यादव साफ्ट हिंदुत्व का प्रयोग कई बार कर चुके हैं लेकिन सफल नहीं हुए।केजरीवाल ने भी ऐसा ही प्रयोग कर रहे थे।</div>
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<div>दिल्ली में केजरीवाल की हार ये भी बता रही है कि देश में देश में क्षेत्रीय पार्टियों की पकड़ कमज़ोर हुई है।ओडिशा में नवीन पटनायक को बीजेपी ने पटखनी दी,बिहार में जेडीयू को जूनियर पार्टनर बना चुकी है, महाराष्ट्र में शिवसेना को कमज़ोर कर चुकी है,हरियाणा से आईएनएलडी निष्प्रभावी हो गया है,तेलंगाना में बीआरएस कमज़ोर हो चुकी है।उत्तर प्रदेश और बिहार के कई प्रभावशाली छोटे दल पहले ही भाजपा के पाले में हैं।</div>
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<div>मज़ेदार बात ये है कि ये छोटे दल बड़े क्षेत्र में वोट बैंक रखते हैं लेकिन वह चुनावी जीत में इसे तभी बदल पाते हैं जब उनको भाजपा का साथ मिलता है।इस लिए वह भाजपा से सीटों की परफेक्ट सौदेबाजी नहीं कर पाते हैं।अब कांग्रेस के पास मौका है कि वह दिल्ली और पंजाब में अपनी खोई हुई जमीन को फिर से वापस लेने की कोशिश करें।अरविंद केजरीवाल को मिली हार के बाद अब राहुल गांधी खुद को विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे के रूप में आगे कर सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div>केजरीवाल की हार ने राहुल गांधी के लिए खुद को इंडिया ब्लॉक के स्वाभाविक नेता के रूप में स्थापित करने का रास्ता खोल दिया है।वहीं केजरीवाल के भविष्य को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का दौर अभी से शुरू हो गया है।तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।लेकिन ऐसा लगता नहीं कि बड़ी हार के बाद केजरीवाल पंजाब या फिर राज्यसभा का रूख करेंगे।वह दिल्ली में ही रह कर पार्टी के लिए मंथन करेंगे।लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि केजरीवाल अपनी लगभग खोई हुई,धूमिल हो चुकी छवि को कैसे सुधारेंगे। दरअसल जब आम आदमी पार्टी अगर खड़ी हुई थी,तो उसके पीछे अरविंद केजरीवाल की साख थी,जो उस समय किसी दूसरे राजनीतिज्ञों के पास नहीं थी।</div>
<div> </div>
<div>एक मजबूत लीडरश‍िप थी।कट्टर ईमानदारी और इंसानियत का तमगा भी उनके पास था।अरविंद केजरीवाल ने इसी के दम पर द‍िल्‍ली से लेकर पंजाब तक राज क‍िया। फिर गुजरात में भी ताकत बढ़ाई।लेकिन अब उनकी इसी ताकत पर सवाल है।मॉडल स्‍टेट का सपना चकनाचूर हो गया है।वह मोदी के गुजरात माडल का जवाब नहीं दे सके।वे खुद अपनी सीट हार गए हैं।इसी लिए अब उनके सामने बड़ी चुनौती पंजाब,गोवा, गुजरात से लेकर अन्य राज्यों तक पार्टी को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 17:41:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>क्या दिल्ली में सत्ता के साथ व्यवस्था बदलेगी</title>
                                    <description><![CDATA[<div>अन्ना हजारे के नेतृत्व और उनके आमरण अनशन के साथ 2011 के अगस्त महीने में भ्रष्टाचार और लोकपाल के मुद्दे पर दिल्ली के रामलीला मैदान से एक देशव्यापी आंदोलन का आरंभ हुआ। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना की इस मुहिम में अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, बाबा रामदेव एवं अन्य अनेक प्रसिद्ध समाजसेवी शामिल हुए। इस आंदोलन ने तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस सरकार और दिल्ली कांग्रेस सरकार की जड़े हिला कर रख दी।</div>
<div>  </div>
<div>इसी अन्ना आंदोलन से सुर्खियों में आए अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन से जुड़े कुछ सहयोगियों की मदद से परन्तु अन्ना की रजामंदी के बगैर एक राजनीतिक दल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148433/will-the-system-change-with-power-in-delhi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(25).jpg" alt=""></a><br /><div>अन्ना हजारे के नेतृत्व और उनके आमरण अनशन के साथ 2011 के अगस्त महीने में भ्रष्टाचार और लोकपाल के मुद्दे पर दिल्ली के रामलीला मैदान से एक देशव्यापी आंदोलन का आरंभ हुआ। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना की इस मुहिम में अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, बाबा रामदेव एवं अन्य अनेक प्रसिद्ध समाजसेवी शामिल हुए। इस आंदोलन ने तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस सरकार और दिल्ली कांग्रेस सरकार की जड़े हिला कर रख दी।</div>
<div> </div>
<div>इसी अन्ना आंदोलन से सुर्खियों में आए अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन से जुड़े कुछ सहयोगियों की मदद से परन्तु अन्ना की रजामंदी के बगैर एक राजनीतिक दल 26 नवम्बर 2012 को आम आदमी पार्टी के नाम से बनाया। भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना दिखा, ना घर लूंगा ना गाड़ी लूंगा ना सिक्योरिटी लूंगा का नारा बुलंद कर कट्टर ईमानदार की छवि के साथ अरविंद केजरीवाल एण्ड पार्टी ने चुनाव लड़ा और अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में झाड़ू चुनाव चिन्ह के साथ  28 सीटों पर कब्जा कर लिया। कोई दल सरकार बनाने की स्थिति में नही था।</div>
<div> </div>
<div>कांग्रेस के समर्थन के साथ आप ने सरकार बनाई। लेकिन 49 दिनों के बाद कांग्रेस पर असहयोग के आरोप लगा केजरीवाल की सरकार ने त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद अन्ना आंदोलन से उठा यह हवा का झोंका तूफान में बदल गया। देश में मोदी लहर चल रही थी परन्तु 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में फ्री बिजली, फ्री पानी, स्वास्थ्य सुविधाए, अच्छे स्कूलों का वादा कर केजरीवाल की आप ने कुल 70 विधानसभा सीटों में से 67 सीटें जीत सभी पार्टियों का सूपड़ा साफ कर पूरे 5 साल सरकार चलाई।</div>
<div> </div>
<div>देश में मोदी और भाजपा की लहर प्रचण्ड हो गई थी। बड़े-बड़े सूरमा धराशाई हो रहे थे। भाजपा ज्यादातर राज्यों में विधानसभा चुनाव जीत रही थी। कांग्रेस बिल्कुल हाशिए पर चली गई। उस समय में भी 2019 के दिल्ली व‍िधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आप ने नरेंद्र मोदी की भाजपा को जबरदस्त पटखनी दी और दिल्ली की 70 में से 62 सीटों पर कब्जा कर के अपना दम दिखाया था। पूरे देश में केजरीवाल का नाम गूंजने लगा। दिल्ली के बाहर भी पार्टी चुनाव लड़ने लगी और कुछ राज्यों में कुछ सीटें भी जीती।</div>
<div> </div>
<div>पंजाब व‍िधानसभा चुनावों में आप ने अन्य दलों को जड़ से उखाड फैंका और दिल्ली की तरह वहां भी एकतरफा जीत के साथ सरकार बनाई। इस जीत ने केजरीवाल को एक ब्रांड दिया। आप को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला परन्तु शायद यह केजरीवाल की किस्मत मे आखिरी खुशी की तरह था। इसके बाद उनके बुरे दौर की शुरूआत हुई। एल.जी से टकराव, सहयोगीयों और केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के इल्जामों व ईडी के शिकंजे ने केजरीवाल सहित आप के प्रमुख नेताओं को जेल के पीछे पहुंचा दिया।</div>
<div> </div>
<div>साथ ही साथ मुख्यमंत्री के अलीशान शीशमहल का मुद्दा गर्मा गया। लोगों को लगने लगा आम आदमी बन कर जो सत्ता में आया था वो आज महाराजा वाला शाही जीवन जी रहा है। दिल्ली में केजरीवाल सरकार विकास कर नही पा रही थी। बस मामला फ्री बिजली-पानी, स्कूलों तक रह गया था। मोहल्ला क्लीनिक बदहाल हो गए थे। प्रदूषित हवा, पानी, बरसातों में डूबती दिल्ली, रोज के सड़कों पर जाम और अन्य समस्याओ ने दिल्ली सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा भर दिया।</div>
<div> </div>
<div>केंद्र की भाजपा सरकार भी लोगों का यह गुस्सा भड़काने में अहम भूमिका एल.जी के हस्तक्षेप द्वारा निभाती रही। केंद्र की एजेंसियों के हत्थे चढ़ने के बाद केजरीवाल बहुत कुछ गंवा बैठे। भ्रष्टाचार के इल्जामों ने ‘ब्रांड केजरीवाल' के साथ जुड़े तमाम चमकदार विशेषणों को बेरंगत कर दिया। दो बार ठसक और धमक के साथ दिल्ली की सत्ता पर काबिज हो 2025 के व‍िधानसभा चुनाव में  केजरीवाल मुंह के बल गिरे। पार्टी के सभी धुरंधर चुनाव हार गए। खुद केजरीवाल अपना चुनाव हार गए। बीजेपी 27 वर्ष बाद दिल्ली की सत्ता में वापिस आई है।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली विधानसभा के पुनर्गठन के बाद हुए पहले 1993 के चुनाव में भाजपा की सरकार बनी थी, तब 5 साल के कार्यकाल में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी के कारण सरकार बनने के बाद दो बार मुख्यमंत्री को बदला गया। इस सरकार का गठन मदनलाल खुराना को मुख्यमंत्री बना कर हुआ। फिर कुछ सालों बाद खुराना को हटा साहिब सिंह वर्मा को मुख्यमंत्री बनाया गया। वर्मा को भी कुछ समय बाद हटना पड़ा और उनकी जगह पदभार संभाला सुषमा स्वराज ने, अब दिल्ली की जनता की बहुत उम्मीद भाजपा सरकार से है। अब जबकि दिल्ली में आप साफ हो गई तो आने वाले समय में आईएनडीआईए की राजनीति पर इसका क्या असर होगा यह विपक्ष के लिए विचारणीय होगा।</div>
<div> </div>
<div>आप का विस्तार पहले से ही ठहरा हुआ था, विस्तार की संभावना अब और कम हो जाएगी। अब अगले 5 साल केजरीवाल देश की जगह दिल्ली में अपने वजूद को वापिस पाने पर फोकस करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। ऐसा हुआ तो दूसरे राज्यों में पार्टी के विस्तार की संभावनाएं और कम हो जाएंगी। बमुश्किल आठ महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आप दिल्ली में साझीदार थे। खुद नेहरू गांधी परिवार ने आप के उम्मीदवार को वोट किया था परन्तु अब आईएनडीआईए की एकजुटता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।</div>
<div> </div>
<div>बेशक बिहार में केजरीवाल का कोई वजूद नही है परन्तु दिल्ली के नतीजों के बाद बीजेपी विरोधी पार्टियों के बीच जो आपसी खिंचातान शुरू होगी, उसका असर बिहार चुनाव में महागठबंधन की राजनीति पर पड़े बिना नहीं रहेगा। कांग्रेस पर दिल्ली में आप का खेल बिगाड़ने के आरोप लगेंगे। यदि यह सब हुआ तो बिहार में महागठबंधन की चुनावी संभावनाओं को नुकसान जरूर पहुंच सकता है। भाजपा के लिए दिल्ली में अब कुछ कर दिखाने का समय है। अब देखना होगा दिल्ली में सत्ता के साथ व्यवस्था भी बदलती है या नही। प्रदूषण मुक्त, ट्रैफिक जाम मुक्त, यमुना को साफ कर एवंम अन्य समस्याओ से छुटकारा दिला भाजपा दिल्ली को अन्य प्रदेशों की जनता के सामने उदाहरण बना पेश कर सकती है। </div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Feb 2025 16:46:59 +0530</pubDate>
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                <title>छोटे अहंकार की  बड़े अहंकार  से मात</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली जीतने के लिए भाजपा नेतृत्व को हार्दिक बधाई।  ब्धाई दे रहा हूँ क्योंकि ये बधाई बनती है।  मै  भाजपा की तरह न ' तंग-दिल ' हूँ और न 'संग-दिल 'इसलिए तमाम असहमतियों के रहते हुए मुझे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी को बधाई देने में कोई संकोच नहीं है।  मोदी की भाजपा ने 27  साल की लम्बी तपस्या का फल हासिल कर लिया है। अब बड़ी दिल्ली और छोटी दिल्ली दोनों भाजपा के हाथ में हैं।  भाजपा ने बड़ी ही हिकमत  अमली से केजरीवाल से उनकी दिल्ली छीन ली है।</p>
<p>  दिल्ली विधानसभा चुनावों को लेकर</p>
<p>दिल्ली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148363/beat-with-big-ego-of-small-ego"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली जीतने के लिए भाजपा नेतृत्व को हार्दिक बधाई।  ब्धाई दे रहा हूँ क्योंकि ये बधाई बनती है।  मै  भाजपा की तरह न ' तंग-दिल ' हूँ और न 'संग-दिल 'इसलिए तमाम असहमतियों के रहते हुए मुझे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी को बधाई देने में कोई संकोच नहीं है।  मोदी की भाजपा ने 27  साल की लम्बी तपस्या का फल हासिल कर लिया है। अब बड़ी दिल्ली और छोटी दिल्ली दोनों भाजपा के हाथ में हैं।  भाजपा ने बड़ी ही हिकमत  अमली से केजरीवाल से उनकी दिल्ली छीन ली है।</p>
<p> दिल्ली विधानसभा चुनावों को लेकर आपने तमाम मीमांसाएँ,समीक्षाएं,विश्लेषण देखे और पढ़े होंगे ,लेकिन मैंने शरू से कहा था कि इस बार दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ठीक उसी तरह घेरे जा चुके हैं जैसे 2019  के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश   में अजेय सिंधिया ज्योतिरादित्य को घेरकर हराया गया था।  सिंधिया ने पराजय के बाद भाजपा में शामिल होकर दोबारा से जय हासिल कर ली किन्तु अरविंद केजरीवाल की किस्मत में ये भी मुमकिन नहीं है , क्योंकि वे देश केप्रधानमंत्री को ' चौथी पास राजा ' कह चुके हैं और उस विधानसभा में कह चुके हैं जिसके रिकार्ड को विलोपित करना भाजपा के लिए भी आसान नहीं है ,भले ही उसे 27  साल बाद दिल्ली में प्रचंड,अखंड या ' बम्पर ' बहुमत मिला है।</p>
<p>दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की हार नहीं है ,ये नीतियों की भी हार नहीं है ,ये ईमानदारी और बेईमानी की भी हार नहीं है। ये हार दरअसल अहंकार की हार है। दुर्भाग्य ये कि दिल्ली का छोटा अहंकार देश  के बड़े अहंकार से हार गय। अर्थात दिल्ली को अभी भी अहंकार  से निजात नहीं मिली है। यदि दिल्ली में कुशासन हारा है तो दुशासन से हारा है। सुशासन   के लिए तो कहीं कोई जगह है ही नहीं आज की राजनीति में।  सुशासन कहीं दुबका हुआ बैठा होगा। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की नाव वहां डूबी है जहां पानी कोई कोई कमी नहीं थी ,कमी थी तो विनम्रता की।  आम आदमी पार्टी ने अपने खिलाफ एक साथ दो शत्रु खड़े  कर लिए थे।</p>
<p>आप मानकर चलिए कि दिल्ली के विधानसभा चुनाव जिस कड़वे माहौल में हुए हैं उसके फलस्वरूप दिल्ली की सियासत में कोई सुधा बरसने वाली नहीं है। आने वाले दिन आम आदमी पार्टी के आम कार्यकर्ता के साथ ख़ास नेताओं तक के लिए भरी पड़ने वाले हैं ,क्योंकि भाजपा है कमान आम आदमी पार्टी के आमो-खास को मुआफ करने वाली नहीं है ।  भाजपा की केंद्रीय और अब दिल्ली की सरकार चुन-चुनकर केजरीवाल ऐंड कम्पनी से बदला लेगी। केजरीवाल से लेकर मनीष सिसौदिया को एक बार फिर से जेल-यात्राएं   करना होंगी।  अदालतें भी शायद उनकी मदद न कर पाएं।</p>
<p>ये विधानसभा चुनाव क्षेत्रीय दलों के लिए अपशकुन हैं तो क्षेत्रीय दलों के लिए एक संकेत भी। कि वे अकेले किसी भी सूरत में भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकते । उन्हें कांग्रेस   के साथ चलना ही होगा। दिल्ली के चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए भी एक नयी चुनौती हैं।  भाजपा का इतिहास रहा है कि उसने अपने तमाम समर्थकों और विरोधियों को निर्ममता के साथ समाप्त किया है।  भाजपा के नेतृत्व ने पार्टी के भीतर जब विरोधियों को नहीं बख्शा तो बाहर के विरोधियों को बख्शने का सवाल ही नहीं उठता।  </p>
<p>जैसा कि माननीय मोदी जी के विजयोत्स्व के भाषण से साफ़ है कि अब केवल बंगाल की तृण मूल कांग्रेस ही नहीं अपितु बिहार की उनकी अपनी सहयोगी जेडीयू भी भाजपा के निशाने पर है।  भाजपा अब टीडीपी को भी कोई उड़ान नहीं भरने देगी।  गोबर पट्टी में विजय पताकाएं   फहराते हुए आगे बढ़ रही भाजपा अब दक्षिण और पूरब की और रुख करेगी और 2028  से पहले अपने अखिल भारत विजय के अभियान को पूरा करना चाहेगी।<br />संदर्भ के लिए याद दिला दूँ कि भाजपा ने जब अपनी पुरानी सहयोगी उड़ीसा की बीजद  को नहीं छोड़ा तो आम आदमी पार्टी को वो कैसे छोड़ देती ?</p>
<p>भाजपा अपने तमाम  सहयोगी दलों की या तो बलि ले चुकी है या फिर उन्हें दो-फांक   कर अपने साथ खड़ा कर चुकी  है। अकाली हों या शिवसेना वाले कोई भाजपा की मार से बचे नही।  एक आंकड़ा बताता है कि भाजपा के मौजूदा नेतृव ने पिछले 10  साल में अपने 24  छोटे-बड़े सहयोगी दलों की निर्मम हत्या की है। आम आदमी  पार्टी के संस्थापक को जीतकर भाजपा ने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को भी संकेत दे दिए हैं की वे किसी गफलत में न रहें। गफलत में देश को भी नहीं रहना चाहिए और कांग्रेस को भी। भाजपा की अक्षोहणी सेना  हर चुनाव में पूरी तैयारी के साथ उतरती है।  भाजपा ने यदि झारखण्ड ,तेलंगाना और कर्नाटक नहीं जीत पाया तो ये नहीं समझा जाना चाहिए कि भाजपा की जीतने कोई भूख मर गयी है। भाजपा चौबीस   घंटे युद्धरत रहती है।</p>
<p>दिल्ली के विधानसभा चुनाव ये संकेत दे चुके हैं की क्षेत्रीय  दलों को निगलने के बाद उसका अगला और अंतिम निशाना कांग्रेस ही है। कांग्रेस चूंकि ' हप्पा ' नहीं है इसलिए उसे निगलने में भाजपा को वक्त लगेगा ,लेकिन भाजपा हार मानकर बैठने वाली नहीं है।  उसकी नफरत की आंधी और अदावत के तूफ़ान भारतीय राजनीति को हलकान किये रहेंगे। इसलिए मेरा मश्विरा है कि स्थितिप्रज्ञ होकर फ़िलहाल ' तेल देखिये और तेल की धार देखिये '</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Feb 2025 16:52:10 +0530</pubDate>
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                <title>बेचारा आप का केजरीवाल?</title>
                                    <description><![CDATA[<div>दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल चुनावी समर के बीच एक बार फिर से अपनी 'बेचारा' वाली छवि जनता के सामने उभारने की कोशिश में लग गए हैं। केजरीवाल ने रविवार को बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आप स्वयंसेवकों और समर्थकों को धमकाने और उन पर हमला करने का आरोप लगाया है। कुछ दिन पहले आप ने केजरीवाल की गाड़ी पर पत्थर से हमले का दावा करते हुए इसे बीजेपी की साजिश बताया था। केजरीवाल पर पानी फेंके जाने पर उसे तेजाब बता जनता की सहानुभूति लूटने की कोशिश सब ने टीवी पर देखी ही थी।</div>
<div>  </div>
<div>आप विधायक और रिठाला से आप</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148122/poor-aap-ke-kejriwal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल चुनावी समर के बीच एक बार फिर से अपनी 'बेचारा' वाली छवि जनता के सामने उभारने की कोशिश में लग गए हैं। केजरीवाल ने रविवार को बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आप स्वयंसेवकों और समर्थकों को धमकाने और उन पर हमला करने का आरोप लगाया है। कुछ दिन पहले आप ने केजरीवाल की गाड़ी पर पत्थर से हमले का दावा करते हुए इसे बीजेपी की साजिश बताया था। केजरीवाल पर पानी फेंके जाने पर उसे तेजाब बता जनता की सहानुभूति लूटने की कोशिश सब ने टीवी पर देखी ही थी।</div>
<div> </div>
<div>आप विधायक और रिठाला से आप के प्रत्याशी मोहिंदर गोयल के साथ जनसभा में मारपीट हुई। इसके कुछ समय बाद मोहिंदर गोयल पट्टी और प्लास्टर बांधे व्हीलचेयर पर  रिठाला में अरविंद केजरीवाल की जनसभा में शामिल हुए और स्टेज पर केजरीवाल के साथ नजर आए। केजरीवाल ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मोहिंदर गोयल की यह हालत देखकर मुझे रोना आ रहा है। दिल्ली की जनता इस तरह की गुंडागर्दी का समर्थन नहीं करती।</div>
<div> </div>
<div>बीजेपी हिंसा कर रही है और पुलिस उन्हें बचा रही है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनावों में निर्णायक जीत की ओर बढ़ रही है। जिससे बीजेपी नेता खासतौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह परेशान और हताश हैं। दिल्ली चुनावों के लिए प्रचार कर रहे आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दिल्ली चुनावों में लगातार चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो रहा है लेकिन चुनाव आयोग कोई एक्शन नहीं ले रहा है।</div>
<div> </div>
<div>उधर मुख्य चुनाव आयोग का इस पर कहना है कि ज्यादातर मामलों में कोई लिखित शिकायत ही नहीं मिली है। दिल्ली के मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा केजरीवाल को लिखे गए एक पत्र में कहा गया कि आयोग आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन पर कानूनों और ईसीआई मानदंडों के अनुसार कार्रवाई करेगा और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ एक्शन लेगा। चीफ इलेक्शन कमिशनर के दफ्तर ने बताया है कि नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में सात जनवरी से अब तक 115 शिकायतों पर 100 मिनट के भीतर कार्रवाई की गई है।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में 642 एफएसटी और 633 एसएसटी तैनात किए गए हैं।केजरीवाल को लिखे पत्र में चुनाव आयोग के अधिकारी ने कहा है कि जहां तक स्वतंत्र पर्यवेक्षक के मुद्दे का सवाल है तो यह सूचित किया जाता है कि नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र सहित सभी निर्वाचन क्षेत्रों के लिए सामान्य पर्यवेक्षक, व्यय पर्यवेक्षक तथा पुलिस पर्यवेक्षक पहले ही तैनात किए जा चुके हैं। गौरतलब है कि आज ही केजरीवाल ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि बीजेपी कार्यकर्ता आप समर्थकों को धमका रहे हैं। केजरीवाल ने यह आरोप भी लगाया था कि चुनाव आयोग इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।</div>
<div> </div>
<div>केजरीवाल के आरोपों पर सीईओ ने कहा है कि कार्यालय में उपलब्ध रिकार्डों की जांच से पता चला है कि अधिकांश मामलों में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली। चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया कि जब भी किसी राजनीतिक दल से ऐसे आरोपों का हवाला देते हुए लिखित शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो ऐसे सभी मामलों की जांच अनिवार्य रूप से कानूनों और ईसीआई मानदंडों के अनुसार की जाती है और ऐसे सभी मामलों में ईसीआई मानदंडों के अनुसार उचित कार्रवाई या तो शुरू की जाती है या सिफारिश की जाती है।</div>
<div> </div>
<div>केजरीवाल ने चुनाव आयोग से नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की मांग की थी। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने भी केजरीवाल को कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है, क्योंकि केजरीवाल ने रविवार को शिकायत की थी कि कुछ लोगों ने आप के प्रचार वाहन को घेर लिया और पार्टी के पोस्टर फाड़ दिए। केजरीवाल के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए नई दिल्ली के डीसीपी ने दावा किया कि पुलिस स्टेशन में कोई पीसीआर कॉल या शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शीर्ष पुलिस अधिकारी ने औपचारिक शिकायत दर्ज होने के बाद सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया।</div>
<div> </div>
<div>केजरीवाल ने कहा कि आप कार्यकर्ताओं को बीजेपी कार्यकर्ताओं और दिल्ली पुलिस द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में यह भी लिखा था कि मैं चुनाव के दिन से पहले नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी कार्यकर्ताओं और दिल्ली पुलिस द्वारा हमारे जमीनी स्तर के स्वयंसेवकों को दी जा रही धमकी और उत्पीड़न पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। इन चुनावों में केजरीवाल कई मुद्दों पर बुरी तरह फंसे हुए दिखाई दे रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>केजरीवाल शीशमहल मामले में बुरी तरह घिरे हुए दिखाई दे रहे हैं। अपनी ही पार्टी की तत्कालीन राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की पिटाई उनके घर पर होने के मामले पर उनके पास कोई जबाव नही है। शीशमहल के मुद्दे के कारण उनका सुरक्षा और गाड़ी ना लेने का शुरूआती वादा उनके गले की हड्डी बन गया है। यमुना साफ नही हुई, दिल्ली की गंभीर समस्या पीने योग्य पानी लोगों तक वो अपने दो कार्यकाल में भी नही पहुंचा पाए। दिल्ली में हवा स्वच्छ करने का उनका वादा हवा हो गया।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली से कूडे के पहाड नही हटा पाए। दिल्ली की समस्या पानी भराव का वो कोई हल नही ढूंढ पाए। दिल्ली में ट्रैफिक जाम भयंकर समस्या है उसकी और उन्होने कोई ध्यान नही दिया। इनके अलावा और भी बहुत सी समस्याए हैं दिल्ली की जिनका वो कुछ हल नही दे पाए। अब इसी लिए केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने अपना पुराना हथियार पिटकर सहानुभूति लेना फिर से अपने तुनीर से निकाल लिया है। अब देखना होगा यह हथियार चुनावी रणभूमि में उनकी कितनी मदद करता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 16:35:55 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली में मोदी बनाम केजरीवाल बनाम राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली विधानसभा का चुनाव है तो मुंबई महापालिका से भी छोटा लेकिन इस चुनाव को जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियां आम आदमी पार्टी जैसे छोटे से दल से भिड़ गयीं है ।  इस चुनाव को अब दिल्ली वाले केजरीवाल बनाम मोदी बनाम राहुल होते देख रहे हैं।  सत्तारूढ़ होने की वजह से जहाँ भाजपा ये चुनाव जीतने के लिए साम-दाम-दंड और भेद का इस्तेमाल कर रही है ,वहीं कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी को आस्तीन का सांप मानकर कुचलने में जुटी हुई है।</p>
<p>सबसे पहले सत्तारूढ़ दल की  बात करते है।  इस चुनाव में दिल्ली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148066/modi-vs-kejriwal-vs-rahul-in-delhi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/dilli1.jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली विधानसभा का चुनाव है तो मुंबई महापालिका से भी छोटा लेकिन इस चुनाव को जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियां आम आदमी पार्टी जैसे छोटे से दल से भिड़ गयीं है ।  इस चुनाव को अब दिल्ली वाले केजरीवाल बनाम मोदी बनाम राहुल होते देख रहे हैं।  सत्तारूढ़ होने की वजह से जहाँ भाजपा ये चुनाव जीतने के लिए साम-दाम-दंड और भेद का इस्तेमाल कर रही है ,वहीं कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी को आस्तीन का सांप मानकर कुचलने में जुटी हुई है।</p>
<p>सबसे पहले सत्तारूढ़ दल की  बात करते है।  इस चुनाव में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के ऊपर  जितने भी हमले किये हैं उनका बचाव प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी और पार्टी  अध्यक्ष जेपी नड्ढा से लेकर पार्टी के हर छोटे बड़े नेता को करना पड़ रहा है। संख्याबल और अनुभव के हिसाब से देखें तो भाजपा के समाने आम आदमी पार्टी अभी भी शैशवकाल में है लेकिन उसका हौवा इतना है कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक को मैदान में उतरना पड़ा है।</p>
<p> पूरे   देश में भाजपा और डबल इंजिन की जितनी भी राज्य सरकारें हैं उनके मुख्यमंत्री भी दिल्ली जितने के लिए अपने -अपने कौशल का प्रदर्शन कर रहे है।  एक यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जरूर महाकुम्भ हादसे की वजह से दिल्ली नहीं जा पाए।</p>
<p>भाजपा ने दिल्ली जीतने के लिए अपने सभी आजमाए हुए फार्मूले दिल्ली में भी अपनाये है।  भाजपा ने केंद्रीय चुनाव आयोग का खुलकर दुरुपोग किया है।  पुलिस का इस्तेमाल किया है।  आम आदमी पार्टी पर दबाब बनाने के लिए दिल्ली स्थित  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के घर छापा मरने की कोशिश की है। आम आदमी पार्टी के 7  पूर्व विधायकों के असंतोष का फायदा उठाते हुए उन्हें पार्टी छोड़कर बाहर आने पर मजबूर कर दिया  है। अब ये सब भाजपा के लिए काम करेंगे।</p>
<p>आम आदमी पार्टी सरकार के मुखिया से लेकर पुराने केजरीवाल मंत्रिमंडल के तीन मंत्रियों को जेल की हवा पहले ही खिलाई जा चुकी है ,यहां तक की आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सदस्य संजय  सिंह को भी जेल यात्रा करना पड़ी है।</p>
<p>अब कांग्रेस की बात करते है।  कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के साथ इंडिया गठबंधन में तालमेल बनाये रखने की बहुत कोशिश की ,लेकिन आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का लिहाज न मप्र विधानसभा चुनाव में किया और न हरियाणा और महाराष्ट्र में। गुजरात में तो किया ही नहीं ,उलटे दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से अपने रिश्ते खराब और कर लिये ।</p>
<p> आम आदमी पार्टी ने भाजपा के भ्रष्ट नेताओं की सूची में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी जोड़ लिया।आम आदमी पार्टी की इस हरकत के बाद कांग्रेस ने भी आम आदमी पार्टी को आस्तीन का सांप मानकर उसका फन कुचलना शुरू कर दिया है।</p>
<p>लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ही नहीं बल्कि उनकी बहन प्रियंका वाड्रा और पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी अब आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर लगातार हमले कर रहे हैं। कांग्रेस भी भाजपा की तर्ज पर केजरीवाल को महाभ्रष्ट बता रही है ।  मुख्यमंत्री आवास को शीशमहल बनाने और शराब घोटाले के आरोप लगा रही है । कांग्रेस  आम आदमी पार्टी को भाजपा की बी टीम बता रही है।  भाजपा ने जहाँ दिल्ली में हिन्दुओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की है ठीक वैसे ही कांग्रेस ने अल्पसंखयकों को अपने साथ रखने  का प्रयास किया  है।</p>
<p>दिल्ली में पहली बार विधानसभा का चुनाव साफ़ तौर पर त्रिकोणीय बना है।  दिल्ली में इस बार आम आदमी पार्टी स्पष्ट बहुमत से बहुत दूर खड़ी दिखाई दे रही है। ऐसे में स्थितियां ऐसी बन सकतीं हैं कि  आम आदमी पार्टी को सत्ता में बने रहने के लिए या तो एक बार फिर कांग्रेस के समाने समर्पण करना होगा या सचमुच में भाजपा की बी टीम बनकर रहना होगा।  ये भी हो सकता है कि  यही समस्या भाजपा और कांग्रेस के सामने भी आये। कुल जमा पशोपेश दिल्ली के मतदाता की है।</p>
<p>उसे तय करना है कि  वो कौन से भ्र्ष्ट दल की सरकार बनाती है ,क्योंकि आम आदमी पार्टी भाजपा और कांग्रेस को महाभ्रष्ट बता चुकी है ,वहीं कांग्रेस और भाजपा ने आम आदमी पार्टी को समवेत स्वर में महाभ्रष्ट   कहा है।  अर्थात दिल्ली में दूध का धुला कोई दल नहीं है ।</p>
<p>आगामी 5  फरवरी को दिल्ली में मतदान है। उसी दिन प्रधानमंत्री दिल्ली जीत की कामना लेकर प्रयागराज में आयोजित   महाकुम्भ में डुबकियां    लगाने  जायेंगे। उन्हें यूपी के मुख्यमंत्री को पापमुक्त करने के लिए भी डुबकी लगना है। रहल गाँधी या उनके परिवार ने अपने आपको महाकुम्भ से मुक्त रखा है। शायद उन्हें न मोक्ष की कामना   है और न पापों से मुक्ति की। मुमकिन है कि  वे अपने आपको पापी समझते ही न हों। कांग्रेस की सहयोगी समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने तो महाकुम्भ में डुबकी  लगा ली है। लेकिन पुण्य लाभ किसे मिलने वाला है इसका पता 8 फरवरी को ही चलेगा।  </p>
<p>आपको बता दें कि दिल्ली   भले ही पूर्ण राज्य नहीं है किन्तु यहां विधानसभा के चुनाव 1952  से ही हो रहे है।  यहाँ के पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस के चौधरी ब्रम्ह प्रकाश थे। फिर गुरुमुख निहाल सिंह  मुख्यमंत्री बने ।  दिल्ली में 1956  से 1993  तक विधानसभा के चुनाव नहीं हुए और जब 1993  में दोबारा विधानसभा के चुनाव हुए तो 1998  तक भाजपा ही सत्ता में रही ।  इस काल में भाजपा ने मदनलाल खुराना ,साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बनाया।</p>
<p>1998  से 2013  तक दिल्ली पर कांग्रेस की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का एकछत्र राज रहा। 2013  में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से सत्ता छीनी ,और तब से आजतक आम आदमी पार्टी ही दिल्ली की सत्ता में है।  हालाँकि इस बीच दो बार मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में आरोपी बनने के बाद पद छोड़ना पड़ा ।  इस समय दिल्ली में आतिशी मलना खड़ाऊ राज कर रहीं हैं। अब देखना ये है कि  आम आदमी पार्टी लगातार सत्ता में बने रहने का कीर्तिमान  बना पाती है या नहीं ?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 16:30:06 +0530</pubDate>
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                <title>जहरीली यमुना</title>
                                    <description><![CDATA[<div>दिल्ली के सियासी संग्राम में केजरीवाल के एक ब्यान ने तूफान ला दिया है। अरविंद केजरीवाल ने एक ब्यान में हरियाणा की भाजपा सरकार पर यमुना के पानी को जहरीला करने का आरोप लगाया। केजरीवाल ने कहा- दिल्ली के लोगों को पीने के लिए पानी हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मिलता है। भाजपा की हरियाणा सरकार ने यमुना के पानी को जहरीला कर दिया है। इस आरोप का विरोध करते हुए भाजपा ने इलेक्शन कमीशन में शिकायत दर्ज कराई।</div>
<div>  </div>
<div>इस मामले का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने केजरीवाल से सबूत पेश करने को कहा। चुनाव आयोग ने केजरीवाल से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148019/poisonous-yamuna"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/download-(1)6.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली के सियासी संग्राम में केजरीवाल के एक ब्यान ने तूफान ला दिया है। अरविंद केजरीवाल ने एक ब्यान में हरियाणा की भाजपा सरकार पर यमुना के पानी को जहरीला करने का आरोप लगाया। केजरीवाल ने कहा- दिल्ली के लोगों को पीने के लिए पानी हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मिलता है। भाजपा की हरियाणा सरकार ने यमुना के पानी को जहरीला कर दिया है। इस आरोप का विरोध करते हुए भाजपा ने इलेक्शन कमीशन में शिकायत दर्ज कराई।</div>
<div> </div>
<div>इस मामले का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने केजरीवाल से सबूत पेश करने को कहा। चुनाव आयोग ने केजरीवाल से उनके यमुना के पानी में जहर वाले दावे पर बुधवार यानी 29 जनवरी रात 8 बजे तक सबूत देने को कहा। भाजपा की तरफ से केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि केजरीवाल ने भाजपा की हरियाणा सरकार पर बहुत गंभीर आरोप लगाया, जिससे राज्यों के बीच नफरत पनप सकती है। केजरीवाल ने आयोग को दिए जवाब में दिल्ली जल बोर्ड की सीईओ की चिट्ठी का हवाला दिया है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने इस जवाब में दिल्ली जल बोर्ड की सीईओ शिल्पा शिंदे की ओर से दिल्ली के मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी का हवाला दिया है, जिसमें यमुना नदी में अमोनिया की बात कही गई थी। इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी भी बोले। दिल्ली में रैली के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हरियाणा का भेजा यही पानी दिल्ली में हमारे सारे जज, जस्टिस, सम्मानित सदस्य पीते हैं।</div>
<div> </div>
<div>आपका प्रधानमंत्री भी यही पानी पीता है। क्या कोई सोच सकता है कि मोदी को जहर देने के लिए हरियाणा ने जहर दिया होगा। यह वही केजरीवाल हैं जो पिछले दो बार के दिल्ली व‍िधानसभा चुनावों में जनता से पांच-पांच साल यमुना को साफ करने के नाम पर मांग चुके हैं। जिसमें वो यमुना साफ करने में असफल रहे। अब वो फिर जनता से यमुना साफ करने के लिए पांच साल मांग रहे हैं।</div>
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<div>देखना होगा इस बार जनता उन्हें मौका देते हैं या नही। आखिर वादा करके भी क्यों चूक गए अरविंद केजरीवाल, यमुना की सफाई का लक्ष्य पूरा करना क्या सच में असंभव सा है। वर्षों से यमुना की सफाई पर राजनीति चली आ रही है। यमुना की सफाई दिल्ली की राजनीति में हमेशा एक गर्मागर्म मुद्दा रही है। 2020 के चुनाव से पहले दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रदूषित यमुना को लंदन की टेम्स नदी की तरह साफ और पीने लायक बनाने का वादा किया था।</div>
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<div>लेकिन, यह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। केजरीवाल इस चुनाव में खुले तौर पर स्वीकार कर रहे हैं कि वो 2020 के चुनावों के वक्त दिल्ली की जनता से किया कि वो यमुना की सफाई का वादा पूरा नही कर पाए। केजरीवाल की इस स्वीकारोक्ति पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कटाक्ष किया। उन्होंने एक रैली में केजरीवाल का मजाक उड़ाते हुए कहा कि उन्होंने यमुना को शुद्ध करने और उसमें डुबकी लगाने का वादा किया था। दिल्लीवासी अभी भी उनकी विश्व प्रसिद्ध डुबकी का इंतजार कर रहे हैं।</div>
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<div>शाह ने आगे कहा कि केजरीवाल महाकुंभ में गंगा में डुबकी लगाकर अपने पाप धो सकते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी केजरीवाल पर यमुना को गंदा नाला बनाने का आरोप लगाया। यमुना के प्रदूषण का मुख्य कारण ज्यादा फेकल कोलीफॉर्म का स्रोत एसटीपी से अनुपचारित या अपर्याप्त रूप से उपचारित सीवेज, अनधिकृत कॉलोनियों से आने वाले खुले नालों के माध्यम से सीवेज का मिलना, फैक्टरियों का प्रदूषित पानी, सेप्टेज का घुसपैठ या मिश्रण, जानवरों का मल, आदि है।</div>
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<div>सितंबर-अक्टूबर में बेहद विषैली हो जाती है यमुना, हर वर्ष सितंबर-अक्तूबर महीने में यमुना नदी में जहरीले तत्व रिकॉर्ड तोड़ स्तर पर पहुंच जाते हैं। इस दौरान फेकल कोलीफॉर्म का स्तर बहुत ऊंचा हो जाता है। फेकल कोलीफॉर्म, पानी में गंदगी की मात्रा दिखाता है। अक्तूबर 2024 में यह स्तर 4,900,000 एमपीएन/100 मिलीलीटर तक पहुंच गया था।</div>
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<div>यह मानक 2,500 यूनिट से 1,959 गुना ज्यादा है जबकि वांछित सीमा 500 यूनिट से 9,800 गुना अधिक है। फरवरी 2022 के बाद से यमुना में इतना प्रदूषण नहीं देखा गया था। उस समय आगरा नहर (शहर में नदी के एक स्टेशन) पर फेकल स्तर 6,300,000 यूनिट तक पहुंच गया था। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने सितंबर महीने के लिए नदी में फेकल लेवल की जांच की थी। इसकी रिपोर्ट 4 अक्तूबर, 2024 को जारी हुई थी जबकि नमूने 4 सितंबर, 2024 को इकट्ठे किए गए थे।</div>
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<div>रिपोर्ट ऐसे समय में आई थी जब नदी के कुछ हिस्सों में झाग दिख रहा था। यह प्रदूषण का एक स्पष्ट संकेत है। जब सर्फेक्टेंट और फॉस्फेट जैसे प्रदूषक मिलते हैं तो झाग बनता है। मानकों के अनुसार, बीओडी 5 मिलीग्राम/लीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए और डीओ 5 मिलीग्राम/लीटर से कम नहीं होना चाहिए। डीओ नदी में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा होती है जिससे पता चलता है कि नदी में जीवन है या नहीं। वहीं बीओडी से पता चलता है कि पानी खुद को कितना साफ कर सकता है।</div>
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<div>यह पानी में मौजूद जैविक पदार्थों को साफ करने के लिए जरूरी ऑक्सीजन की मात्रा है। डीपीसीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पल्ला में जहां नदी शहर में प्रवेश करती है, डीओ का स्तर 8 मिलीग्राम/लीटर जबकि बीओडी 3 मिलीग्राम/लीटर और फेकल स्तर 1,600 यूनिट था। ये सभी मानकों के भीतर थे। लेकिन जैसे-जैसे नदी आगे बढ़ी, प्रदूषण बढ़ता गया।</div>
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<div>वजीराबाद पहुंचने तक डीओ और एफसी मानकों के भीतर थे, लेकिन बीओडी मानकों से ज्यादा हो गया था। डीपीसीसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि दिल्ली में 56% सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अगस्त में मानकों को पूरा करने में विफल रहे। यह जुलाई और जून के समान ही था। हालांकि, अगस्त में सबसे ज्यादा फेकल कोलीफॉर्म 9,20,000 यूनिट्स तक पहुंच गया था। </div>
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                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/148019/poisonous-yamuna</link>
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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 16:57:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>इण्डिया गठबंधन ने किया केजरीवाल की गिरफ्तारी का विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>मीरजापुर ।</strong> इण्डिया गठबंधन के बैनर तले सपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी ने कलेक्टेªट में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी व उनके गिरते हुये स्वास्थ्य को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा केजरीवाल को जल्द से जल्द रिहा नही किया गया तो इण्डिया गठबंधन के कार्यकर्ता सड़क से लेकर संसद तक प्रदर्शन करने के लिये बाध्य होंगे। इस मौके पर सपा जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार अरविन्द केजरीवाल की जल्द से जल्द रिहाई करें अन्यथा इसका परिणाम अत्यन्त भयंकर होगा। उन्होने कहा कि यह सरकार जनविरोधी है।</div>
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<div>जनता से किये</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143653/india-alliance-protested-against-kejriwals-arrest"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/11..,,,...,-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मीरजापुर ।</strong> इण्डिया गठबंधन के बैनर तले सपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी ने कलेक्टेªट में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी व उनके गिरते हुये स्वास्थ्य को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा केजरीवाल को जल्द से जल्द रिहा नही किया गया तो इण्डिया गठबंधन के कार्यकर्ता सड़क से लेकर संसद तक प्रदर्शन करने के लिये बाध्य होंगे। इस मौके पर सपा जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार अरविन्द केजरीवाल की जल्द से जल्द रिहाई करें अन्यथा इसका परिणाम अत्यन्त भयंकर होगा। उन्होने कहा कि यह सरकार जनविरोधी है।</div>
<div> </div>
<div>जनता से किये गये वादे चुनावी वादे होते है जो चुनाव बाद भाजपा भूल जाती है और आम जनमानस के भावनाओं से खिलवाड़ करती है।  पूर्व सांसद डा0 रमेश चन्द्र बिन्द ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर जेल में डाला गया है। आने वाले चुनाव में जनता इन्हे सबक सिखाकर सत्ता से हटाने में कोई कोर कसर नही छोड़ेगी। इस मौके पर आप पार्टी के जिलाध्यक्ष बबऊ सिंह, मुन्नी यादव, झल्लू यादव, रोहित शुक्ला ‘‘लल्लू‘‘, दामोदर मौर्या, अमिताभ पाण्डेय, सुनील पाण्डेय, राजन पाठक, बब्बू चमार, मेवालाल प्रजापति, परवीन बानो, अरशद, राजधर दूबे, दीना प्रजापति, राकेश यादव, मनोज चौहान, रामजी चौहान समेत सैकड़ो इण्डिया गठबंधन के कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jul 2024 16:27:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तिहाड़ जेल में अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की हुई मुलाकात </title>
                                    <description><![CDATA[<p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को तिहाड़ जेल में अपने दिल्ली समकक्ष अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। आप के वरिष्ठ नेता ने कहा कि केजरीवाल का स्वास्थ्य ठीक है, उन्हें इंसुलिन मिल रहा है और नियमित जांच हो रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने उनसे लोकसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवारों के लिए सक्रिय रूप से प्रचार करने के लिए कहा।</p>
<p>उन्होंने कहा, केजरीवाल ने लोगों से अपील की कि वे उनकी चिंता न करें और चुनाव के दौरान अपने मताधिकार का प्रयोग करें। एक पखवाड़े में पंजाब के मुख्यमंत्री की केजरीवाल से जेल में यह दूसरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140702/arvind-kejriwal-and-bhagwant-mann-met-in-tihar-jail"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-04/bhagwant-mann_large_1619_19.webp" alt=""></a><br /><p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को तिहाड़ जेल में अपने दिल्ली समकक्ष अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। आप के वरिष्ठ नेता ने कहा कि केजरीवाल का स्वास्थ्य ठीक है, उन्हें इंसुलिन मिल रहा है और नियमित जांच हो रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने उनसे लोकसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवारों के लिए सक्रिय रूप से प्रचार करने के लिए कहा।</p>
<p>उन्होंने कहा, केजरीवाल ने लोगों से अपील की कि वे उनकी चिंता न करें और चुनाव के दौरान अपने मताधिकार का प्रयोग करें। एक पखवाड़े में पंजाब के मुख्यमंत्री की केजरीवाल से जेल में यह दूसरी मुलाकात थी। मान ने पत्रकारों से कहा कि वह केजरीवाल से वैसे ही मिले जैसे पहली बार मिले थे।</p>
<p>मान ने कहा कि हमें एक लोहे की जाली से अलग किया गया था। यह उनकी नफरत की पराकाष्ठा हो सकती है। केजरीवाल ने मुझसे कहा है कि मैं लोगों से कहूं कि वे उनकी चिंता न करें और वोट करें। कृपया लोकतंत्र को बचाने के लिए वोट करें। पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केजरीवाल को बताया कि उन्होंने हाल ही में भरूच और भावनगर में पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने के लिए गुजरात का दौरा किया था।</p>
<p>मान ने कहा  कि पूरा देश कह रहा है कि केजरीवाल के साथ जो कुछ भी हुआ वह गलत था। मैं असम भी गया था। उन्होंने मुझसे दिल्ली आने और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और जहां भी मैं हूं वहां आई.एन.डी.आई. ब्लॉक के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने के लिए कहा। मुझे बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि ये चुनाव जीत या हार के बारे में नहीं हैं। यह संविधान और लोकतंत्र को बचाने के बारे में हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि केजरीवाल ने उनकी बेटी का हालचाल भी पूछा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Apr 2024 16:31:53 +0530</pubDate>
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