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                <title>Mamata Banerjee - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Mamata Banerjee RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एफसीआरए और परिसीमन विधेयक पर अखिलेश का सरकार पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">नई दिल्ली।</blockquote>
<p style="text-align:left;">  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर एफसीआरए विधेयक और परिसीमन विधेयक को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी दोनों विधेयकों का विरोध कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार एफसीआरए के माध्यम से ऐसी संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, जो विदेश से प्राप्त धन के माध्यम से सामाजिक और जनहित के कार्य संचालित करती हैं।</p>
<p style="text-align:left;">सोमवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार एफसीआरए विधेयक के माध्यम से संस्थाओं को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185022/akhileshs-attack-on-the-government-on-fcra-and-delimitation-bill"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/whatsapp-image-2026-08-10-at-6.28.26-pm.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">नई दिल्ली।</blockquote>
<p style="text-align:left;"> समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर एफसीआरए विधेयक और परिसीमन विधेयक को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी दोनों विधेयकों का विरोध कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार एफसीआरए के माध्यम से ऐसी संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, जो विदेश से प्राप्त धन के माध्यम से सामाजिक और जनहित के कार्य संचालित करती हैं।</p>
<p style="text-align:left;">सोमवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार एफसीआरए विधेयक के माध्यम से संस्थाओं को डराने का काम कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन संस्थाओं को अच्छे कार्यों के संचालन के लिए विदेश से आर्थिक सहायता मिलती है, उन्हें सरकार के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस कानून के माध्यम से संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:left;"><strong>‘संस्थाओं पर कब्जे की कोशिश कर रही सरकार’</strong></p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कई संस्थाएं अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं और उनमें से कुछ पर राजनीतिक प्रभाव के जरिए कब्जा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के एक बड़े शहर में भाजपा के एक मंत्री द्वारा एक संस्था पर कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है।</p>
<p style="text-align:left;">उन्होंने भाजपा पर भूमाफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर जमीनों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। उनके मुताबिक, जहां भी खाली जमीन या तालाब दिखाई देता है, वहां कब्जा करने की कोशिश की जाती है।</p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव ने अयोध्या का उल्लेख करते हुए भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या जैसी धार्मिक आस्था से जुड़ी भूमि पर भी जमीनों की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर खेल हुआ है। उन्होंने दावा किया कि कुछ जमीनों के दाम कम समय में कई गुना बढ़ाकर बेचे गए। हालांकि इन आरोपों पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है।</p>
<p style="text-align:left;"><strong>‘विदेशी धन पर रोक, देश का पैसा बाहर जाने पर क्या कार्रवाई?’</strong></p>
<p style="text-align:left;">समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले देश से बाहर गया काला धन वापस लाने और देश का पैसा लेकर भागने वालों के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया था।</p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग बैंकों का पैसा लेकर देश से बाहर चले गए। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की और देश का पैसा बाहर जाने से रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/whatsapp-image-2026-08-10-at-6.28.27-pm.jpeg" alt="एफसीआरए और परिसीमन विधेयक पर अखिलेश का सरकार पर हमला" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:left;">उन्होंने कहा कि यदि सरकार विदेश से भारत में आने वाले धन पर नियंत्रण और पाबंदी की बात करती है तो उसे भारत से बाहर जाने वाले धन को लेकर भी स्पष्ट नीति बतानी चाहिए। उन्होंने भाजपा सरकार को उसके पुराने चुनावी नारों की याद दिलाते हुए कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि देश का पैसा लेकर विदेश भागने वालों के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।</p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में ‘पैसे वालों के अच्छे दिन’ आए हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि कानूनी अथवा गैर-कानूनी तरीके से देश से बाहर जाने वाले धन पर प्रभावी रोक कब लगेगी।</p>
<p style="text-align:left;"><strong>‘लोकतंत्र में विपक्ष का काम सवाल पूछना’</strong></p>
<p style="text-align:left;">सपा अध्यक्ष ने सरकार पर विपक्ष के सवालों से बचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर संसद में भेजती है और विपक्ष का प्रमुख दायित्व सरकार से सवाल पूछना तथा जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना है।</p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार सवालों का जवाब देने से बच रही है। उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े आंदोलनों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दिल्ली में छात्रों और नौजवानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लाठीचार्ज किया गया और कई लोगों को चोटें आईं।</p>
<p style="text-align:left;">उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में छात्र अस्पताल में भर्ती हुए। प्रयागराज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी बच्चों और युवाओं पर मुकदमे दर्ज किए गए। उनके अनुसार, कुछ ऐसे बच्चों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए जो आंदोलन में शामिल नहीं थे।</p>
<p style="text-align:left;">सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की ओर से पहले यह आश्वासन दिया गया था कि आंदोलन में शामिल लोगों पर मुकदमे नहीं किए जाएंगे और किसी को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन बाद में सरकार अपने वादे से पीछे हट गई। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में जनता और विपक्ष अपने सवालों के जवाब किससे मांगे।</p>
<p style="text-align:left;"><strong>परिसीमन विधेयक पर भी सरकार को घेरा</strong></p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव ने परिसीमन विधेयक को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार परिसीमन विधेयक के माध्यम से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव करना चाहती है, लेकिन उसे देश की वास्तविक सीमाओं और क्षेत्रफल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:left;">उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि वर्ष 2014 में देश का क्षेत्रफल और सीमाएं क्या थीं और वर्तमान में स्थिति क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को बदलने की बात कर रही है, लेकिन देश की सीमाओं की सुरक्षा और स्थिति पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रही।</p>
<p style="text-align:left;">सपा अध्यक्ष ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा एक गंभीर राष्ट्रीय विषय है और सरकार को इस पर देश के सामने पूरी जानकारी रखनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:left;"><strong>ममता बनर्जी पर हमले को बताया दुखद</strong></p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ कथित हमले की घटना पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने इसे बेहद दुखद और निंदनीय बताया।</p>
<p style="text-align:left;">उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं। यदि किसी सरकार की ओर से उनके खिलाफ हमला कराया जा रहा है तो यह गंभीर और निंदनीय विषय है। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन किसी वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।</p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:left;"><strong>विपक्ष के तेवर से संसद में बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी</strong></p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव के इन बयानों से साफ है कि समाजवादी पार्टी आगामी राजनीतिक मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाए हुए है। एफसीआरए विधेयक, परिसीमन, छात्रों से जुड़े आंदोलन, देश से बाहर जाने वाले धन और संस्थाओं पर कथित नियंत्रण जैसे मुद्दों को लेकर सपा सरकार को घेरने की तैयारी में है।</p>
<p style="text-align:left;">दूसरी ओर, केंद्र सरकार और भाजपा की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। संसद में विधेयकों और नीतिगत फैसलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं।</p>
<p style="text-align:left;">अखिलेश यादव के बयानों से यह भी संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से जुड़े सवालों को भी संसद में प्रमुखता से उठाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। परिसीमन का मुद्दा विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:left;">फिलहाल, एफसीआरए विधेयक और परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्ष की आपत्तियों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 19:06:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टूटती तृणमूल कांग्रेस और ममता: संगठनात्मक कमजोरी और जनविश्वास का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181935/disintegrating-trinamool-congress-and-mamta-organizational-weakness-and-crisis-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(4).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे की कमी को दर्शाता है। नीचे के स्तर पर भी ब्लॉक और पंचायत स्तर पर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है।</p>
<p><br />नियोग, कोयला, गोरू तस्करी और राशन घोटाले जैसे मामलों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए। ED और CBI की कार्रवाई ने संगठन की साख को नुकसान पहुंचाया। आम लोगों में यह धारणा मजबूत हुई है कि सत्ता के साथ भ्रष्टाचार भी जड़ें जमा चुका है। इससे जमीनी कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं और मतदाता का एक हिस्सा विकल्प तलाश रहा है।<br />                  टीएमसी आज भी पूरी तरह ममता बनर्जी के व्यक्तित्व पर टिकी है। पार्टी का ढांचा संस्थागत कम, परिवार और करीबी नेताओं के इर्द-गिर्द ज्यादा केंद्रित है। अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद ने भी पुराने नेताओं में असहजता पैदा की है। जब कोई संगठन एक व्यक्ति पर निर्भर हो जाता है, तो उस व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और राजनीतिक रणनीति ही पार्टी का भविष्य तय करने लगती है। फिलहाल ताजा खबर यह है कि टीएमसी एक और बड़ी टूट की कगार पर खड़ी है और यह निश्चित हो गया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब टीएमसी को उभरने का मौका शायद ही मिल सके। कल सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी उपस्थित नज़र आईं तो वहीं दावा है कि उनकी पार्टी के 20 सांसदो ने बगावत कर दी है। सूचना है कि पार्टी के कई सांसद भाजपा नेताओं से मिलकर बगावत की रणनीति बना रहे थे।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर सोमवार को ही टीएमसी के कई सांसदों ने मुलाकात के बाद अलग गुट बनाने का दावा किया है। पता चला है कि इस बैठक में टीएमसी के पांच सांसद मौजूद रहे। इनमें शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश बसुनिया, कालिपद सोरेन व अनूप चक्रवर्ती शामिल हैं। टीएमसी के लोकसभा में 28 व राज्यसभा में 12 सांसद हैं। सूत्र बताते हैं कि बागी सांसदों ने रविवार को एक बैठक की थी, और उसी वक्त अलग गुट बनाने का ऐलान कर टीएमसी को झटका दिया जाने पर विचार हुआ है।</p>
<p>जब विधायक दल में टूट हुई थी तो सांसदों के बग़ावत की चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया था। ऐसा बताया जा रहा है कि बाग़ी सांसद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भी संपर्क में हैं और बहुत ही जल्द एक नये गुट का ऐलान हो सकता है। टीएमसी की सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि बागी सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है और लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। कोई भी पार्टी जब चुनाव हारती है तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है</p>
<p>अपनी पार्टी को टूट से बचाने की क्यों कि हर कोई सत्ता के लड्डू खाना चाहता है, बेकार में विपक्ष में अब कोई बैठना नहीं चाहता है। इसके लिए केंद्र में कांग्रेस में टूट, दिल्ली में आप में टूट उत्तर प्रदेश में सपा में टूट और महाराष्ट्र का उदाहरण देखा जा सकता है। यही संकट अब इस समय टीएमसी के ऊपर मंडरा रहा है। अब देखना यह है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को टूटने से कितना बचा पातीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC के बैंक खातों में रखे 440 करोड़ रुपये फ्रीज; बागी विधायकों की शिकायत पर कार्रवाई।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी बगावत का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में रखे गए क़रीब </span>440<span lang="hi" xml:lang="hi">  करोड़ रुपये की निकासी पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई पार्टी के बागी विधायकों की शिकायत पर हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने इन पैसों के स्रोत की जाँच की मांग की थी। पहले से ही बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी को अब इस कार्रवाई से एक और बड़ा झटका लगा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस ताज़ घटना से पार्टी में पैसे के लेन देन पर नियंत्रण को लेकर चल रही आंतरिक लड़ाई और भी तेज हो गई है। ऋतब्रत बनर्जी का</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181815/action-on-the-complaint-of-rebel-mlas-to-freeze-rs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas18.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी बगावत का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में रखे गए क़रीब </span>440<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये की निकासी पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई पार्टी के बागी विधायकों की शिकायत पर हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने इन पैसों के स्रोत की जाँच की मांग की थी। पहले से ही बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी को अब इस कार्रवाई से एक और बड़ा झटका लगा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस ताज़ घटना से पार्टी में पैसे के लेन देन पर नियंत्रण को लेकर चल रही आंतरिक लड़ाई और भी तेज हो गई है। ऋतब्रत बनर्जी का गुट अब पार्टी के लेन देन में गड़बड़ी का आरोप लगा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्राइवेट सेक्टर के एक बैंक में रखे गए इन तीन खातों पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डेबिट फ्रीज</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">लगा दिया गया है। इसका मतलब है कि इन खातों से पैसे निकाले या बाहर ट्रांसफर नहीं किए जा सकते हैं। हालााँकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन खातों में पैसे जमा किए जा सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कार्रवाई हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी में चल रही टूट-फूट के बीच हुई है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में क़रीब </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> विधायकों ने बगवात की है। अब पार्टी के संगठन और पैसे पर नियंत्रण की कोशिश चल रही है। ऋतब्रत बनर्जी गुट के </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें एफआईआर दर्ज करने तथा पूरी जांच कराने की मांग की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायत में इन बागी विधायकों ने पूछा है कि इन खातों में जमा इतना बड़ा पैसा कहाँ से आया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने जाँच एजेंसियों से यह पता लगाने को कहा है कि क्या यह पैसा वैध स्रोतों से आया या कट-मनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घोटालों आदि गैरकानूनी गतिविधियों से जमा किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बागियों की शिकायत की कॉपी में कहा गया है कि विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि गैरकानूनी गतिविधियों से पैसा जमा किया गया हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें प्रभाव का दुरुपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेईमानी से वित्तीय लेन-देन और अवैध वसूली शामिल है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाग़ी विधायकों की शिकायत से कुछ दिन पहले ही वरिष्ठ टीएमसी नेता अरूप विश्वास ने बैंक को चिट्ठी लिखकर खातों की सुरक्षा और ट्रांजेक्शन रोकने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी के </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये से ज़्यादा के जमा को तब तक किसी को ऑपरेट नहीं करने देना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक पार्टी में नेतृत्व विवाद सुलझ न जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">बिस्वास ने खातों के मैनेजमेंट और कंट्रोल को लेकर चिंता जताते हुए उन्हें फ्रीज़ करने की मांग की थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं बागी विधायकों ने अब फंड के सोर्स की आपराधिक जांच की मांग की है। खास बात यह है कि ये शिकायतें उसी साइबर क्राइम थाने में की गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां पहले अरूप विश्वास के ख़िलाफ़ लियोनेल मेसी के कोलकाता दौरे वाले विवाद में केस चल रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 19:20:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुरुक्षेत्र: राहुल को प्रतिरोध का नारा बनाएगा विपक्ष का चेहरा, 2029 में PM मोदी और नेता विपक्ष का सीधा मुकाबला।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181388/kurukshetra-will-make-rahul-a-slogan-of-resistance-face-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/43.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल गांधी के बीच ही सीधा मुकाबला होगा।नतीजतन राहुल गांधी खुद खुलकर मैदान में आ गये हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में कहा कि अब देश में चुनावों की परंपरागत राजनीति से आगे प्रतिरोध की राजनीति का युग आ गया है। प्रतिरोध की राजनीति से राहुल गांधी का सीधा मतलब है कि मोदी सरकार को संसद के साथ-साथ विपक्ष अब सड़क पर भी घेरेगा। राहुल ने कहा कि सभी संस्थाएं सरकार के कब्जे में हैं और चुनावों का कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए कांग्रेस को प्रतिरोध की राजनीति के अपने पुराने दौर में लौटना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल ने सिर्फ एलान ही नहीं किया बल्कि उन्होंने प्रतिरोध की राजनीति की शुरुआत करते हुए सबसे पहले युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद करने के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है।इसकी शुरुआत वह कोटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पटना और दिल्ली में छात्र युवा सम्मेलन से कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा और एनडीए तो 2014 से ही चाहे लोकसभा हो या विधानसभा का चुनाव नरेंद्र मोदी को आगे करके उनके नाम पर ही हर चुनाव लड़ रहा है। सत्ता पक्ष के लिए नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और नाम चुनावों में जीत का सबसे बड़ा मंत्र है जबकि इसके विपरीत कांग्रेस मोदी के मुकाबले अपने किसी भी नेता को आगे करके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी तरह 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी इंडिया गठबंधन भी मोदी के मुकाबले बिना कोई चेहरा आगे लाए ही मैदान में उतरा था। लेकिन अब कांग्रेस जिस राह पर चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे यह साफ है कि अब उसे नरेंद्र मोदी के मुकाबले राहुल गांधी को आगे करने में कोई गुरेज नहीं है। अब राहुल गांधी खुद आगे बढ़कर सरकार के खिलाफ होने वाली लड़ाई की कमान संसद के साथ सड़क पर भी संभालने के लिए तैयार हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उधर विपक्षी खेमे की तस्वीर अब खासी बदल गई है। हाल ही में हुए पांच विधानसभा चुनावों में प.बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन के किले ढह गए और इसके पहले बिहार में तेजस्वी यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे भाजपा के हाथों हार चुके हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस भी 2024 के बाद हरियाणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र और असम में भाजपा से हारी है लेकिन केरल में उसकी जीत और तमिलनाडु में डीएमके को छोड़कर टीवीके सरकार में शामिल होने से पार्टी को फिर आक्सीजन मिल गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए अब मामला कांग्रेस और क्षत्रपों के बीच बराबरी का हो गया है और अब कोई भी क्षत्रप कांग्रेस को यह उलाहना नहीं दे सकता कि भाजपा का मुकाबला क्षेत्रीय दल ही सफलता पूर्वक कर पाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षत्रपों में अब झारखंड में हेमंत सोरेन अकेले ऐसे नेता हैं जो दो बार लगातार भाजपा को चुनावी मात दे चुके हैं और कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन है जबकि 2014</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2017</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2019 और 2022 में लगातार भाजपा के हाथों चुनावी हार झेल चुके अखिलेश यादव ने 2024 में लोकसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी देकर फिर से 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए खम ठोंक रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब 2027 में उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां चुनाव में भाजपा का सपा से मुकाबला होगा और कांग्रेस उसकी सहयोगी पार्टी होगी। वहीं पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का सीधा मुकाबला होगा क्योंकि यहां भाजपा अभी अपनी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है और अकाली दल के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले सारे राज्यों उत्तराखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिमाचल प्रदेश</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला होगा। वहीं तेलंगाना में कांग्रेस बीआरएस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। यहां भी कांग्रेस मुख्य किरदार होगी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong></p>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्ता जाते ही ममता के अपने ही बागी हो गए! </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आपने एक पुरानी कहावत तो जरूर सुनी होगी कंगाली में आटा गीला। यह ममता बनर्जी के साथ बिल्कुल खरी साबित हो रही है एक ओर वह सत्ता से बाहर हो गयीं हैं दूसरे ओर उनके अपने ही उनके खिलाफ मुखर हो गएं हैं। आपको बता दें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक और कानूनी परेशानियां मई 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद से लगातार बढ़ रही हैं। पार्टी के भीतर बड़ी बगावत और कानूनी मुकदमों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ममता बनर्जी की बढ़ती परेशानियों की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180755/as-soon-as-she-lost-power-mamatas-own-people-became"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/6a1fc76a46895-mamata-banerjee-031916703-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपने एक पुरानी कहावत तो जरूर सुनी होगी कंगाली में आटा गीला। यह ममता बनर्जी के साथ बिल्कुल खरी साबित हो रही है एक ओर वह सत्ता से बाहर हो गयीं हैं दूसरे ओर उनके अपने ही उनके खिलाफ मुखर हो गएं हैं। आपको बता दें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक और कानूनी परेशानियां मई 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद से लगातार बढ़ रही हैं। पार्टी के भीतर बड़ी बगावत और कानूनी मुकदमों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ममता बनर्जी की बढ़ती परेशानियों की वजह ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस  अपने 28 साल के इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही है। पार्टी के 58 विधायकों ने बागी रुख अपनाते हुए निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष  चुन लिया है, जिसे विधानसभा स्पीकर ने मंजूरी भी दे दी है। इसके साथ ही, लगभग 20 से अधिक टीएमसी सांसदों के भी भाजपा  के संपर्क में होने की खबरें सामने आ रही हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पार्टी पर पकड़ ढीली होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संकट के बीच ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई हाई-लेवल बैठक में 80 में से केवल 8 विधायक और 41 में से सिर्फ 6 सांसद ही शामिल हुए। ज्यादातर निर्वाचित प्रतिनिधियों ने इस बैठक से दूरी बना ली, जो उनके नेतृत्व को एक सीधा चैलेंज माना जा रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक मोर्चे के साथ-साथ ममता बनर्जी अब कानूनी पचड़े में भी फंस गई हैं। चुनाव के दौरान दिए गए उनके बयानों और "बांग्लादेश में हुई राजनीतिक हत्या के मामले को केंद्र सरकार से जोड़ने" को लेकर उनके खिलाफ सिलीगुड़ी और कोलकाता में राजद्रोह  और हेट स्पीच की शिकायतें व पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराई गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने इसे देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सत्ता हाथ से जाने के बाद जमीनी स्तर पर भी भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण भगदड़ मची हुई है। उनके बेहद करीबी माने जाने वाले कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम और बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा राज्यभर में 100 से ज्यादा टीएमसी पार्षदों और स्थानीय नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ममता बनर्जी को अपने ही गढ़ भवानीपुर सीट से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के हाथों 15,105 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। राज्य में 15 साल पुराने टीएमसी शासन का अंत हो गया है और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की नई सरकार का गठन हो चुका है।  ममता बनर्जी इन सभी विपरीत हालातों के खिलाफ सड़कों से लेकर हाइकोर्ट तक कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको पता है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के परिणाम एक माह पूर्व 4 मई को सामने आए थे। इनमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को निराशा का मुंह देखना पड़ा था। 294 सीटों वाली इस विधानसभा में उसे 80 सीटें ही मिली थीं। इस तरह 15 वर्ष तक प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं ममता का शासन खत्म हो गया था। ममता ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लम्बी अवधि तक वह इसके साथ जुड़ी रहीं, परन्तु 28 वर्ष पूर्व 1998 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस (टी.एम.सी.) का गठन किया था और कम्युनिस्ट पार्टियों के तीन दशकों से भी अधिक प्रदेश में चले आ रहे लम्बे शासन को खत्म करने के लिए बड़ी दिलेरी और दृढ़ता से उसका मुकाबला किया था। इस समय लोकसभा में इनके 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं, परन्तु विगत लम्बी अवधि से इस पार्टी के भीतर ममता की तानाशाही और टकराव वाली नीतियों के कारण असंतोष और असहमति चल रही थी, परन्तु उनकी प्रशासन पर सख्त पकड़ और कठोर फैसलों से यह बग़ावत अंदर-अंदर ही सुलगती रही थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ममता ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अपने साथ राजनीति में लाकर उसे अधिक शक्तियां दे दी थीं। बनर्जी के काम करने के ढंग-तरीके से भी पार्टी गलियारों में असंतोष था, जिसके संबंध में ममता को लगातार उनकी पार्टी के नेताओं द्वारा अवगत करवाया जाता रहा था परन्तु ममता ने इस बात की ओर ध्यान नहीं दिया। अपनी ताकत के दम पर उन्होंने बड़ी राष्ट्रीय नेता होने का भ्रम भी पाल लिया था, जिस कारण राष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों ही पार्टियों द्वारा बनाए गए 'इंडिया गठबंधन' की वह सदस्य ज़रूर बनी रही थीं, परन्तु इसमें शामिल अलग-अलग पार्टियों के सभी नेताओं से ऊंचा कद होने का भ्रम उन्होंने पाल रखा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपनी किसी भी सहयोगी पार्टी के साथ गठबंधन करने से इन्कार कर दिया था। उनके शासन के समय प्रदेश की आर्थिकता भी बेहद कमज़ोर हो गई थी और यह पूरी तरह कर्ज में डूब चुका था। केन्द्र के साथ लगातार टकराव रहने के कारण और उद्योग को समर्थन न मिलने के कारण प्रदेश की आर्थिकता डावांडोल हो गई थी। इसके साथ ही बेरोज़गारी की दर भी बढ़ चुकी थी, परन्तु पिछला पूरा समय केन्द्र और अन्य पार्टियों के साथ टकराव बने रहने के कारण भी उनकी प्रशासनिक तौर पर पकड़ ढीली पड़ चुकी थी। ऐसी स्थिति लोगों के भीतर निराशा में बदलती गई। लगातार सरकार विरोधी भावनाओं के बढ़ने का अनुमान लगाने में वह असमर्थ रहीं और न ही वह दीवार पर लिखे को पढ़ सकीं, जिस कारण उन्हें चुनाव में निराशा का मुंह देखना पड़ा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हार के बाद भी उन्होंने खुले मन से आत्म-मंथन करने की बजाए अपनी पार्टी के भीतर असंतोष को अनदेखा किए रखा जो अंत में उनके लिए हानिकारक सिद्ध हुई। आंतरिक यह चिंगारी उस समय लपटें बन गई, जब उन्होंने ज्यादातर पार्टी नेताओं को अनदेखा करके अभिषेक बनर्जी के कहने पर विधानसभा में विपक्ष के नेता के लिए सैमन देव का नाम स्पीकर को भेज दिया, परन्तु ज्यादातर विधायक इस पद के लिए रिताव्रता बनर्जी के पक्ष में थे, परन्तु ममता ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और इस पद के लिए स्पीकर को विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भेज दिया, जिस कारण ज्यादातर नेताओं ने बग़ावत का मार्ग अपना लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले को लेकर ही बुधवार को पार्टी के 80 विधायकों में से 59 विधायकों ने विधानसभा के स्पीकर से सम्पर्क किया। अपने हस्ताक्षरों वाला पत्र उन्हें सौंपा और अपने गुट को असली तृणमूल कांग्रेस बताया। पार्टी के 28 वर्ष के के इतिहास में ममता पर पहली बार इतना बड़ा हमला हुआ है। इसकी उदाहरण महाराष्ट्र से मिलती है, जब 20 जून, 2022 को वहां शिव सेना के 55 में से 40 विधायकों ने एकनाथ शिंदे का उस समय साथ दिया था, जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे। उसके सप्ताह भर बाद ही शिंदे वहां भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए थे। अब दो तिहाई सदस्यों के एकजुट होने से विधानसभा में ममता के समर्थक सदस्य 2 दर्जन से भी कम रह गए हैं, जिससे उनकी राजनीतिक हालत और भी दयनीय हो गई प्रतीत होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी तरफ भाजपा को बड़ी जीत प्राप्त होने के कारण उसके नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस के बागियों के साथ कोई भी समझौता करने से इंकार कर दिया है। रिताव्रता बनर्जी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वामपंथी विद्यार्थी संगठन से की थी। 34 वर्ष की उम्र में वह राज्यसभा के सदस्य बन गए थे और बाद में वह टी.एम.सी. में शामिल हो गए थे। ममता ने ही उन्हें वर्ष 2024 में राज्यसभा में भेजा था। विधानसभा चुनाव में वह उलबेरिया सीट से विधायक चुने गए हैं। चाहे ममता ने इस बड़ी चुनौती के समक्ष भी अपना हौसला कायम रखते हुए इन बागियों और भाजपा को ललकारा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही उन्होंने भाजपा विरोधी पार्टियों से सम्पर्क करने की बात भी की है, परन्तु अब यह देखना शेष होगा, कि वह निकट भविष्य में प्रदेश और देश की राजनीति में किस तरह विचरण करेंगी।स्पष्ट है कि आज की राजनीति में साम दाम दंड भेद सब का चलन बढ़ गया है सत्ता में सबको समेट रखने की ताकत है लेकिन सत्ता से बाहर होते ही अपने सगे साथियों की हकीकत सामने आ जाती है कि उनके दिल में कितना खार छुपाए बैठे थे यह बदलते दौर की राजनीति की नंगी तस्वीर है इस को स्वीकार करना ही होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:53:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: अभिषेक बनर्जी के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला, सिर पर लगी चोट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोका। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद पर कथित रूप से हमला हुआ है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180387/tmc-mp-kalyan-banerjee-attacked-after-west-bengal-abhishek-banerjee"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/attack-on-kalyan-banerjee-1780211370965.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोका। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद पर कथित रूप से हमला हुआ है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोकते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए। तस्वीरों में नजर आया कि कल्याण बनर्जी भीड़ का सामना कर रहे थे। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। इस दौरान सुरक्षाबलों को स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए भी देखा गया। वहीं, टीएमसी समर्थकों ने कल्याण बनर्जी को संभाला और उन्हें भीड़ से दूर ले जाने का प्रयास किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं अकेला आ रहा था। मेरे साथ कोई नहीं था। बीजेपी सदस्यों ने गाली-गलौज की और मेरे सिर पर बॉल से मारा। मेरे सिर से खून बह रहा है।" उन्होंने कहा, "अब लोग तय करेंगे कि यह सही है या गलत कि सांसदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले, शनिवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। वे चुनाव के बाद शनिवार को हिंसा में मारे गए एक तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार से मिलने सोनारपुर गए थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनका विरोध किया। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उनके काफिले पर अंडे व ईंट के टुकड़े फेंके और नारे लगाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले में अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को लेकर बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, "फिलहाल इलाज घर पर ही किया जाएगा। जितनी जरूरत होगी, सलाइन और ऑक्सीजन घर पर ही दी जाएगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो अभिषेक को इलाज के लिए हैदराबाद ले जाया जाएगा।"पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि हमले के बाद अभिषेक बनर्जी के सीने में ब्लड क्लॉट जम गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उस समय अभिषेक के सिर पर हेलमेट नहीं होता, तो घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 19:06:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल में नए युग की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय बाद ऐसा परिवर्तन देखने को मिला है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब राज्य में नई सरकार बनने जा रही है और सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद उनके नाम पर औपचारिक मुहर लगने की चर्चा तेज है। राज्य में दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बदलाव को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बंगाल की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178733/beginning-of-new-era-in-bengal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(12)3.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय बाद ऐसा परिवर्तन देखने को मिला है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब राज्य में नई सरकार बनने जा रही है और सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद उनके नाम पर औपचारिक मुहर लगने की चर्चा तेज है। राज्य में दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बदलाव को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बंगाल की राजनीतिक संस्कृति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल लंबे समय से राजनीतिक हिंसा आरोप-प्रत्यारोप और वैचारिक संघर्ष का केंद्र रहा है। चुनाव के दौरान भी राज्य में हिंसा और तनाव की कई घटनाएं सामने आईं। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप रहा कि पिछले कई वर्षों में राज्य में कानून व्यवस्था कमजोर हुई और राजनीतिक विरोधियों पर हमले बढ़े। अब भाजपा समर्थकों को उम्मीद है कि नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सख्त और जवाबदेह बनेगी। सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने की संभावना के साथ यह संदेश दिया जा रहा है कि राज्य में कानून का राज स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी काफी संघर्षपूर्ण रहा है। कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे सुवेंदु ने बाद में भाजपा का दामन थामा और नंदीग्राम में ममता बनर्जी को चुनौती देकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। लगातार दूसरी बार नंदीग्राम से जीत और भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने की चर्चा ने उन्हें भाजपा के सबसे प्रभावशाली बंगाली नेताओं में शामिल कर दिया। भाजपा के भीतर भी उन्हें मजबूत संगठनकर्ता और आक्रामक नेता के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नई सरकार के गठन को भाजपा समर्थक बंगाल में परिवर्तन की शुरुआत के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब राज्य में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हिंसा और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाएगा। भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि पिछले शासनकाल में कई योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में भ्रष्टाचार फैला हुआ था। शिक्षक भर्ती घोटाले से लेकर स्थानीय निकायों में अनियमितताओं तक कई मामलों ने राज्य सरकार की छवि को प्रभावित किया। भाजपा का दावा है कि अब भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और प्रशासन को पारदर्शी बनाया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज्य में हिंदू समुदाय के एक वर्ग के भीतर लंबे समय से यह भावना भी दिखाई देती रही है कि उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं की पर्याप्त सुरक्षा नहीं हो रही थी। भाजपा ने चुनाव के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और कहा कि वह सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार और न्याय सुनिश्चित करेगी। पार्टी का नारा “सबका साथ सबका विकास” बंगाल चुनाव में भी प्रमुख रूप से सामने आया। भाजपा नेताओं का कहना है कि नई सरकार किसी एक वर्ग की नहीं बल्कि पूरे राज्य की सरकार होगी और विकास योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव हर व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल जैसे सांस्कृतिक और बौद्धिक रूप से समृद्ध राज्य में विकास की अपार संभावनाएं हैं। उद्योगों के पलायन बेरोजगारी और निवेश की कमी लंबे समय से बड़ी चुनौती रहे हैं। नई सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह राज्य में निवेश को बढ़ावा देगी और रोजगार के नए अवसर तैयार करेगी। भाजपा नेतृत्व बार-बार यह कहता रहा है कि केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने से विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी। सड़क रेल बंदरगाह और औद्योगिक ढांचे के विस्तार से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का प्रयास किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुवेंदु अधिकारी के गृह मंत्रालय अपने पास रखने की चर्चा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। भाजपा नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान कई बार कहा था कि राज्य में भय और हिंसा का माहौल समाप्त किया जाएगा। ऐसे में गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास रहने का मतलब प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करना माना जा रहा है। भाजपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे राजनीतिक हिंसा पर रोक लगाने और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना पैदा करने में मदद मिलेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा की जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बंगाल की राजनीति में वैचारिक बदलाव का संकेत भी है। लंबे समय तक वामपंथ और बाद में तृणमूल कांग्रेस के प्रभुत्व वाले राज्य में भाजपा का उभरना सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में बड़े परिवर्तन को दर्शाता है। भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों आदिवासी इलाकों और सीमावर्ती जिलों में अपनी पकड़ मजबूत की है। यही कारण है कि पार्टी को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि नई सरकार के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी गहरा है और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास और प्रशासनिक सुधार के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों की भी रक्षा हो। विपक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी क्योंकि मजबूत लोकतंत्र के लिए स्वस्थ राजनीतिक संवाद आवश्यक होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फिर भी भाजपा समर्थकों के बीच इस समय उत्साह का माहौल है। कोलकाता में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां तेज हैं और पूरे राज्य में कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि नई सरकार बंगाल को हिंसा और भ्रष्टाचार से मुक्त कर विकास और सुशासन की नई दिशा देगी। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार से बड़ी अपेक्षाएं जुड़ी हुई हैं। आने वाला समय बताएगा कि ये उम्मीदें किस हद तक वास्तविकता में बदल पाती हैं लेकिन फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:47:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अखिलेश यादव का हमला, कहा- बीजेपी और निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव में किए गए ‘ट्रायल’ को पश्चिम बंगाल में लागू किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव कराने के लिए एक समानांतर व्यवस्था स्थापित करने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग ने मिलकर साढ़े तीन साल पहले उत्तर प्रदेश के रामपुर उपचुनाव में जो ‘ट्रायल’ किया था, उसे हू-ब-हू बंगाल में लागू कर दिया।अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में केंद्रीय बलों के दखल के बारे में पूछे गए एक सवाल पर कहा कि उत्तर प्रदेश में जब 2022 में रामपुर लोकसभा और विधानसभा का उपचुनाव</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178174/akhilesh-yadavs-attack-said-bjp-and-election-commission-implemented-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/download.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव कराने के लिए एक समानांतर व्यवस्था स्थापित करने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग ने मिलकर साढ़े तीन साल पहले उत्तर प्रदेश के रामपुर उपचुनाव में जो ‘ट्रायल’ किया था, उसे हू-ब-हू बंगाल में लागू कर दिया।अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में केंद्रीय बलों के दखल के बारे में पूछे गए एक सवाल पर कहा कि उत्तर प्रदेश में जब 2022 में रामपुर लोकसभा और विधानसभा का उपचुनाव हुआ था, तब सबने देखा कि किस तरीके से वहां चुनाव अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “शायद भारतीय जनता पार्टी ने आयोग के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में एक ‘ट्रायल’ किया था और उसे हू-ब-हू बंगाल में उतार दिया। मुझे जानकारी मिली है कि उन्होंने केंद्रीय बलों और अर्धसैनिक बलों का एक समानांतर ढांचा बना दिया था। इसके अलावा पुलिस व्यवस्था के समानांतर भी एक व्यवस्था बना दी गई थी।”समाजवादी पार्टी प्रमुख ने हालांकि पश्चिम बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी की अगुवाई में सरकार बनने का विश्वास जताते हुए कहा, “दीदी थी, दीदी रहेंगी। वह लड़ेंगी भी और जीतेंगी भी।”उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए एक बार फिर कहा कि अगर स्मार्ट मीटर में बेईमानी हो सकती है तो ईवीएम में क्यों नहीं हो सकती?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने समाजवादी विधायक प्रभु नारायण की आशंका का जिक्र करते हुए कहा कि वह प्रदेश की जनता को सावधान करना चाहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ लोग कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर झगड़ा कराएंगे। उन्होंने कहा कि विधायक प्रभु नारायण का कहना है कि चुनाव के दौरान भाजपा के लोग गांव-गांव में खूब डीजे बजवाएंगे जिससे नफरत फैले और झगड़ा हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी के लोग बड़े पैमाने पर जगह-जगह डीजे बजवाकर झगड़ा करवाने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन सपा ने जनता को पहले ही सावधान कर दिया है। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि यह पार्टी ‘झूठ की सोन पापड़ी’ बनाती है और वह झूठ की एक परत के ऊपर असत्य की दूसरी परत चढ़ा देती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 21:58:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में भाजपा—तो मुख्यमंत्री कौन </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  देश के इतिहास में पहली बार</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में विधानसभा चुनाव के दौरान </span>92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक रिकॉर्ड मतदान ने सभी पूर्वानुमानों और एग्जिट पोल को नई दिशा दे दी है। अधिकांश सर्वेक्षणों में प्रमुख विपक्षी दल</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के राज्य में पहली बार सरकार बनाने के दावे सामने आ रहे हैं। यह परिदृश्य न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राज्य की बदलती जन-चेतना का भी संकेत देता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चुनाव पूर्व मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ममता बनर्जी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और न्यायिक चुनौतियाँ भी पेश कीं। हालांकि</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178003/bjp-in-west-bengal-%E2%80%93-then-who-is-the-chief"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/abhinav-shukla.webp" alt=""></a><br /><p> </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> देश के इतिहास में पहली बार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में विधानसभा चुनाव के दौरान </span>92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक रिकॉर्ड मतदान ने सभी पूर्वानुमानों और एग्जिट पोल को नई दिशा दे दी है। अधिकांश सर्वेक्षणों में प्रमुख विपक्षी दल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के राज्य में पहली बार सरकार बनाने के दावे सामने आ रहे हैं। यह परिदृश्य न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राज्य की बदलती जन-चेतना का भी संकेत देता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चुनाव पूर्व मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ममता बनर्जी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और न्यायिक चुनौतियाँ भी पेश कीं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वोच्च न्यायालय</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के हस्तक्षेप के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। अनुमान है कि लाखों ऐसे लोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने नागरिकता संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मतदान सूची से बाहर रह गए। इस पृष्ठभूमि में हुई बंपर वोटिंग को कई विश्लेषक मतदाता सूची के शुद्धिकरण का परिणाम मान रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सूची में शामिल मतदाताओं ने निर्भीक होकर मतदान किया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">     ऐतिहासिक रूप से देखें तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की कर्मभूमि और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्यामाप्रसाद मुखर्जी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की जन्मस्थली रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी यह विडंबना ही रही कि भाजपा को अब तक राज्य में सत्ता का अवसर नहीं मिला। </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद पार्टी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की और एक दशक के भीतर वाम दलों तथा कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए मुख्य विपक्षी दल बन गई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अगर मतगणना के नतीजे भाजपा के पक्ष में आते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सबसे बड़ा प्रश्न होगा—राज्य का पहला भाजपा मुख्यमंत्री कौन बनेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौड़ में कई नाम चर्चा में हैं। तृणमूल कांग्रेस से आए प्रभावशाली नेता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुवेंदु अधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदेश अध्यक्ष</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सामिक भट्टाचार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवा सांसद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशीथ प्रमाणिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और लोकप्रिय महिला चेहरा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लॉकेट चटर्जी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख दावेदारों के रूप में देखे जा रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">    हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा की कार्यशैली को देखते हुए किसी नए या अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरे को आगे लाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इतना निश्चित है कि यदि भाजपा सत्ता में आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मुख्यमंत्री का चेहरा ऐसा होगा जो बंगाल की माटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति और सामाजिक संरचना से गहराई से जुड़ा हो। पश्चिम बंगाल का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की संभावना भर नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह राज्य की राजनीतिक दिशा में संभावित बड़े बदलाव का संकेत भी है। अब सबकी निगाहें मतगणना पर टिकी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां यह तय होगा कि बंगाल की जनता किसे अपना नेतृत्व सौंपती है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>                                                                                             अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:16:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आज़ाद भारत का सर्वाधिक मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के चौथे सबसे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान सम्पन्न होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों पर अब सबकी निगाहें चार मई को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। बिहार से शुरू हुए मतदाता सूची के शुद्धिकरण (पुनरीक्षण) के बाद वहां हुई बंपर वोटिंग ने मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत दिया था। इसी क्रम में चुनाव आयोग ने विपक्ष के विरोध के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177669/highest-voter-turnout-of-independent-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(2)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के चौथे सबसे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान सम्पन्न होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों पर अब सबकी निगाहें चार मई को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। बिहार से शुरू हुए मतदाता सूची के शुद्धिकरण (पुनरीक्षण) के बाद वहां हुई बंपर वोटिंग ने मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत दिया था। इसी क्रम में चुनाव आयोग ने विपक्ष के विरोध के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में हजारों-लाखों मतदाता आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत न कर पाने के कारण सूची से बाहर हुए। इसके बावजूद इन पांचों राज्यों में रिकॉर्ड मतदान हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लोकतांत्रिक चेतना और नागरिक सहभागिता का मजबूत संकेत है। यह स्थिति राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ाने वाली है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल में इस बार लगभग </span>92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान दर्ज होना अपने आप में ऐतिहासिक है। यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जनादेश का सेहरा किसके सिर बंधता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता के बाद से पश्चिम बंगाल में कभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं बनी। यहां कांग्रेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वामपंथी दलों और पिछले डेढ़ दशक से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। इस बार का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके परिणाम राज्य ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि भाजपा इस चुनाव में सफलता प्राप्त करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह उसके लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी और विपक्षी दलों के लिए बड़ा झटका। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में लौटती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की सबसे मजबूत नेता के रूप में उभर सकती हैं। यह भी विचारणीय है कि बढ़ता मतदान प्रतिशत कहीं न कहीं मतदाताओं के बढ़ते विश्वास और लोकतंत्र में उनकी आस्था को दर्शाता है। चाहे इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक छवि और नेतृत्व का प्रभाव हो या स्थानीय मुद्दों की भूमिका एक बात स्पष्ट है कि देश का मतदाता अब पहले से अधिक जागरूक और सक्रिय हो चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">                                                                                                                                  <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">                                   अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:16:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नारी बन्दन बिल के सहारे  बीजेपी बंगाल जीतना चाहती थी या चीन मॉडल लागू करना चाहती थी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> देश में एक तरफचुनाव का वातावरण बना था पांच राज्यों में चुनाव हो रहा था ।तीन राज्यों का चुनाव भी एक चरण में पूरा होगया है ।दो मजबूत राज्यों बंगाल और तामिलनाडु में तीन चरणों में चुनाव होने वाला है।बंगाल के चुनाव में नब्बे लाख वैध मतदान का नाम चुनाव आयोग हटा दिया है । चुनाव आयोग के इस कृत्य को देश की जनता सब देख रही है। सुन रही जान रही पर मौन है।मौन जब तुटता है तो तूफ़ान  आ जाता है । भारत की जनता  कब अपना मौन तोड़ेगी यह समय बतायेगा।पर बंगाल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176611/bjp-wanted-to-win-bengal-with-the-help-of-nari"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img_20260417_2100471.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> देश में एक तरफचुनाव का वातावरण बना था पांच राज्यों में चुनाव हो रहा था ।तीन राज्यों का चुनाव भी एक चरण में पूरा होगया है ।दो मजबूत राज्यों बंगाल और तामिलनाडु में तीन चरणों में चुनाव होने वाला है।बंगाल के चुनाव में नब्बे लाख वैध मतदान का नाम चुनाव आयोग हटा दिया है । चुनाव आयोग के इस कृत्य को देश की जनता सब देख रही है। सुन रही जान रही पर मौन है।मौन जब तुटता है तो तूफ़ान  आ जाता है । भारत की जनता  कब अपना मौन तोड़ेगी यह समय बतायेगा।पर बंगाल के चुनाव में जो भी वोटर लिस्ट में धांधली हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">  यह एक लोकतांत्रिक देश के लिए शुभ संकेत नहीं है।  अपने ही नागरिकों का वोट का अधिकार छीन कर उनको विदेशी नागरिक कहना उचित नहीं है पर 2014से एक धर्म विशेष के लोगों को हर राज्य में नया नामकरण दिया गया घूसपैठिये और आज तक यानि 2014से अब तक कितने घुसपैठिए हर राज्य में मिले भारत सरकार जनता को चुनाव में नहीं बता पा रही है।  बस एक नरेटिव कि बंगाल में ममता चुनाव घुसपैठियों के वोट से जीत रही है एक धर्म के वोट से जीत रही  है उनको वोट के अधिकार से वंचित करना है । जो चुनाव आयोग सरकार का कठपुतली बन कर कर दिया। नब्बे लाख का नाम काट दिया।  अब चुनाव में वोट नहींदेगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष का आरोप सही कि देश की सभी सम्वैधानिक संस्थानों पर व  न्यायालय हो चुनाव आयोग हो ई डी सी बी आई हर पर एक पार्टी एक विचार धारा का कब्जा हो गया है।यह बात भारत के जनमानस के  साथ  विश्व के जनमानस में भी यही गुज रहा है कि 2014के बाद भारत में लोकतंत्र कमजोर होगया।  बस एक नेता एक पार्टी कीबात होनेलगी है विपक्ष कहीं जिन्दा नहीं  रहे।उसको संसद से सड़क तक लड़ने का अधिकार नहीं जब जब संसद से सड़क पर आया लड़ने उसको देशद्रोही पाक परस्त छदम सेकुलर अवसर वादी न जाने किन किन अलंकरणों से भारतीय मिडिया भाजपा का आईटी सेल सोशल मिडिया अलंकृत करता रहता है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल के चुनाव में एक और बात बहुत दिलचप्स  हो रही की कभी ममता के विधायक रहे हुमाऊ कबीर ममता को छोड़ कर भाजपा में गये फिर वहां से सौदे बाजी करके अलग पार्टी बनाया। भाजपा ने ममता को हराने के लिए एक हजार करोड़ और उपमुख्यमंत्री के पद पर समझौता किया यह बात एक स्टिंग ऑपरेशन करके किसी ने खुलासाकर दिया  विडियो बनाकर  सोशल मिडिया में चला रहा है। मैं यह नहीं कह सकता हूं दावे के साथ की यह विडियो सही या ग़लत  है।जो सोशल मिडिया पर चल रहा उसी की बात कर रहा हूं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सच क्या है जांच हो तो सब जनता जाने ।इसी विडियो से  परेशान होकर देश की सरकार  जो हर समय बस  चुनाव में रहती हैं परेशान हो ग ई जीत का सपना जो बंगाल में  देख रही थी  काबफूर होने लगा। तब वह  एक नया गेम प्लान लेकर आई कि बीच चुनाव में ही संसद का विशेष सत्र तीन दिन का बुला लिया कि अब देश की नारी आधी आबादी शायद बंगाल जीतादे।  जो  नारी शक्ति वन्दन बिल यानि महिला आरक्षण 2023मे पास हो चुका है और 2029के चुनाव में लागू होगा  जिसमें जनगणना और परिसीमन की बात थी ।उसको बदलने के लिए ही विशेष सत्र को बुलाया जो गलत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में संख्या बल का खेल है। तो सरकार सत्ता में संसद का विशेष सत्र बुला लिया।और तीन अलग अलग बिल पेश कर दिया। 16अप्रैल से बहस चल रही है 17शाम चार बजे के बाद वोटिंग होगी  इस में भी सरकारकिस नियम से वोटिंग करायेगी।इस महिला बिल का विपक्ष समर्थन कर रहा उनका कहना है महिलाओं को आरक्षण 545सासद के वर्तमान नम्बर में से कर दिया जाये।  लेकिन भाजपा कह रही हम देश में नये राजाओं की संख्या बढायेंगे वह 850करके उस संख्या में से महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने की बात कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन इस आरक्षण में भी एक खेल होगया अनुसुचित जाति और अनुसूचितजन जाति को तो लिया है परन्तु पिछड़ी जाति को आरक्षण में नहीं लिया है।विपक्ष का कहना है फिर परिसीमन  नहीं हो गा तबतक जब तक  जनगणना नही हो जायेगी जनगणना जातिय आधार पर होगी उसके बाद ही महिलाओं को आरक्षण और संसदों तथा प्रदेश में विधानसभा में विधायकों की संख्या बढ़ेगी। भाजपा परिसीमन को जनगणना से नहीं जोड़ना चाहती है भाजपा कि एक मंशा यह भी होगी कि परिसीमन बिल पास कराले। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न ई जनगणना में जातियों की गणना नहीं करायेगे यह आशंका है कि जातिय जनगणाना भाजपा नहीं करना चाहती है।अगर जातिय जन गणना देश की होगी तो बहुत कुछ देश में बदल जायेगा राजनिति का सन्तुलन भी गड़बड़ होगा फिर नारा वहीं चलेगा जिसकी जितनी सख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी ।इसी कारण से यह तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया।है या इस सत्र के परिणाम को जनता में ले जाकर सहानभूति लेने का राजनिति चाल  था।  बंगाल के चुनाव प्रचार में पता चलेगा बिल के पीछे का असली मकसद  क्या था या नकली चेहरा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी कारण भाजपा 2011या किसी भी जनगणना से किसी भी राज्य की संसदों की सख्या निर्धारित करने का एकाधिकार चाहती है। जो बहुत ग़लत है विपक्ष विरोध कर रहा यह तो निश्चित है जिस राज्य में जन संख्या कम होगी वहां सांसद कम होंगे इस बिल से उत्तर भारत में यूं पी बिहार राजस्थान  एम पी में सांसदों की संख्या बढ़ेगी और इन राज्यो  की तुलना में दक्षिण राज्यों में कम संख्या सांसदों की होगी पूर्वोत्तर राज्यों में भी कामोवेश यही होगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब एक न ई लड़ाई इस बिल से उत्तर भारत और दक्षिण भारत में शुरू होगया है यह सब एक सुनियोजित चाल से भारत में लोकतंत्र को चीनी लोकतंत्र में बदलने का कुचक्र  तो नहीं चल रहा है कि चुनाव में दो तिहाई बहुमत मिले सम्विधान बदले और चीनी राष्ट्रपति की प्रणाली बना कर  भाजपा सत्ता में सदा के लिए बनी रहे  अगर मंशा साफ होता तो  महिलाओं को आरक्षण  तो2024मे दे दिया होता। पर नारी के पीछे छिपकर देश में नया लोकतंत्र स्थापित करने की एक मंशा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु इस बिल में एक बात और है कि राज्य सभा कि सीट नहीं बढ़ाया जा रहा अनुपातिक तौर पर राज्य सभा में भी सीट बढ़े।  कारण अगर विधानसभा में हर राज्य में पचास प्रतिशत सीट बढ़ रही है तो राज्य सभा का क्योंनही बढ़ेगी। यह और तरह का खेल है कि अगर राज्य सभा में बहुमत नहीं होगा तो दोनों सदनों को मिलाकर कोई बिल‌विधेयक पास हो जायेगा विपक्ष यहां क्यौ मौन है राज्य  सभा में बढ़े पचास प्रतिशत।विपक्ष यह चाल भाजपा का समझ गया और या जाल मेंनही फंसा उस कबुतर की तरह । इस बिल से आभास हो रहा है नाम नारी शक्ति वन्दन पर खेल कुछ और है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब बंगाल का चुनाव बिल पास होगा तब भी नहीं पास होगा तब भी नारीशक्ति वन्दन के सहारे चलेगा सारा फोकस भाजपा का यही होगा  कि हम नारी सम्मान करतेहै  बिल आपके लिए शक्ति देगा नहीं पास हुआ तो  विपक्ष नारी विरोधी है यही गुंजेगा।परन्तु एक बात जो जनता को पूछना होगा अपने नेताओं से कि हम भारत के नागरिक इतने अमीर हो गये है कि 545राजा ससद के चार हजार विधानसभा के राजाओं  के ऐशो आराम के लिए जो अभी टैक्स दे रहे हैं। फिर 307सासदो और 2100 विधायको को जो बिल पास होने के बाद आयेंगे इनको पालने के लिए कितना और टैक्स देंगे लगभग हर वर्ष सभी राजाओं को पालने ऐशो आराम के लिए पन्द्रह हजार करोड़ लगेगा कहा से आयेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कैसे आयेगा क्या और टैक्स लगेगा कोई राजनेता संसद में यह बात नहीं कर रहा नहीं सत्ता पक्ष यह जनता को बता रहा हैं कि इन सभी राजाओं को पालने का खर्च किस मद से होगा बस नारी शक्ति वन्दन हो रहा है। इन राजाओं के साथ साथ देश की जनता पूर्व सांसदों विधायकों को भी पाल रही है।इनके लालनपालन पर हर वर्ष ग्यारह हजार करोड़ खर्च होता पेंशन और मुफ्त यात्रा में यह सब गरीब भारत की जनता है पांच किलो मुफ्त राशन वाले असृसी करोड़ भी इनके लालपाल में अपना योगदान दे रहे हैं।अब भारत इतना अमीर तो नहीं है कि हजारों राजाओं को अपने। जनता के टैक्स पर पाले जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के उस समय अटल की सरकार ने 2003मे सरकारी कर्मचारियों का पेंशन यह कह कर बन्द कर दिया कि देश की जीडीपी पेंशन के भार को नहीं उठा पायेगी परन्तु इन राजाओं का  पेंशन वेतन मुफ्त आवास चिकित्सा यात्रा भत्ता देश  उठा रहा है।पर हम जनता मौन है। अपने लड़कों के हक में नहीं बोल रहे हैं।यह बिल जो लाया गया है देश हित में नहीं है जितनी पहले सांसदों की सख्या है उसी में से महिलाओं को आरक्षण दिया जाये सांसदों और विधायकों की सख्या न बढ़ाई जाये नहीं तो जनता कभी भी सड़क पर आयेगी तो क्या दृश्य होगा इसकी कल्पना कोई राजनेता या ज्योतिषी नहीं कर सकता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि नये राजाओं की संख्या देश में बढ़ी तो शायद फिर देश में कोई नया गांधी सुभाष आजाद भगत बनकर जरूर आयेगा इन राज्यों से मुक्ति जनता को मिलेगी जैसे मुगलों से अग्रेजो से देशी राजाओं से मिला था उसी तरह फिर लड़ना होगा नये राजाओ को हटाने के लिए ।भाजपा का मकसद नारी के नाम को चुनाव में लेकर सत्ता तक पहुचना है। वह नारी सम्मान कितना किये है और करेंगे संसद में  दिये गये भाषण को जनता याद कर रही कि आज वही व्यक्ति नारी वन्दन कर रहा जो कभी किसी नारी को विधवा न जाने कैसे कैसे अलंकरणों से सुशोभित किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा के ऊपर जो तमाम आरोप लग रहे हैं उसी से जनता और महिलाओं के ध्यान को हटाने के लिए बंगाल तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए यह बिल लाया गया भाजपा को पता है बिल पास नहीं होगा फिर भी यह खेल किया कि चुनाव में विपक्ष को महिलाओं के विरोधी के रुप में स्थापित करके अपनी छबि को बचाने का नया कुचक्र  है।विपक्ष जब मांग कर रहा था कि ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर बहस के लिए विशेष संसद का सत्र बुलाने की मांग नहीं माना और चर्चा नहीं हुआ वह ईरान पर मौन बस इजरायल अमेरिका के साथ खड़े हैं अब क्यों अमेरिका इजरायल के साथ है यह कूटनिती की कोई भाषा होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कल संसद में मोदी गारंटी दे रहे थे बिल की पर शायद वह हर चुनाव में गारंटी देते आरहे है क्यो पूरा नहीं हुआ दोकरोड रोजगार बिहार में उघोग सौ स्मार्ट सीटी सब कहां  है।अब तो बिल पास नहीं हुआ। यह जो बिल गिरा भारत बच गया अगर बिल पास होगया होता तो 2029मेका आखिरी चुनाव होता या 2027मे मध्यावधि चुनाव कराकर सम्विधान बदले देते की भारत में एक दलित प्रणाली ही होगी।पर विपक्ष की गजब की एक जुटता कल देखने को मिला बिल गिर गया देश बच गया।अब  पांच राज्योचुनाव परिणाम का इन्तजार करे वैसे महंगाई के लिए भी जनता कमर कस ले।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">29अप्रैल शाम पांच बजे देश का मौसम गुलाबी होगा जब तेल के दाम बढ़ेंगे यानही बढ़ेंगे  तब भी  भी मौसम गुलाबी रहेगा कारण पांच राज्यों का एक्जिट पोल पर बहस होगी कौन मुख्य मंत्री बनेगा तमाम बातें होंगी फिर लोग नारी शक्ति वन्दन भूल जायेंगे। इस माडल को हराने में दक्षिण के राज्य तृणमूल कांग्रेस के सहयोग की सराहना होनी चाहिए भाजपा समर्थक ससद दक्षिण के जो थे जनता उनसे हिसाब ले क्यों दक्षिण से धोखा किया।।अभी इसे जीत न माने न खुशी माने यह तो बस आरम्भ है।अभी सत्ता से विपक्ष को और लड़ना होगा जनता को भी  लड़ना होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 19:55:11 +0530</pubDate>
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                <title>परिसीमन की सियासत, अस्मिता का उभार और चुनावी हवा का बदलता रुख</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारतीय राजनीति में चुनाव केवल मतों का गणित नहीं होता, बल्कि यह भावनाओं, पहचान, रणनीतियों और समय-समय पर बदलते नैरेटिव का एक जटिल मिश्रण होता है। हाल के घटनाक्रमों में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल का संसद में गिरना और परिसीमन बिल का पेश न होना, दो ऐसे मोड़ साबित हुए हैं जिन्होंने चुनावी राजनीति की दिशा और भाषा दोनों को बदल दिया है। विशेषकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जहां सत्तारूढ़ और विपक्षी दल अपने-अपने हिसाब से नए मुद्दे गढ़ रहे हैं और पुराने विमर्शों को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176589/politics-of-delimitation-rise-of-identity-and-changing-direction-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img_20260417_2100471.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारतीय राजनीति में चुनाव केवल मतों का गणित नहीं होता, बल्कि यह भावनाओं, पहचान, रणनीतियों और समय-समय पर बदलते नैरेटिव का एक जटिल मिश्रण होता है। हाल के घटनाक्रमों में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल का संसद में गिरना और परिसीमन बिल का पेश न होना, दो ऐसे मोड़ साबित हुए हैं जिन्होंने चुनावी राजनीति की दिशा और भाषा दोनों को बदल दिया है। विशेषकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जहां सत्तारूढ़ और विपक्षी दल अपने-अपने हिसाब से नए मुद्दे गढ़ रहे हैं और पुराने विमर्शों को पीछे छोड़ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने जिस तेजी से अपनी चुनावी रणनीति को बदला है, वह उनकी राजनीतिक समझ और समय की नब्ज पकड़ने की क्षमता को दर्शाता है। महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद उन्होंने परिसीमन को केंद्र में रखकर एक नया आक्रामक अभियान शुरू किया है। पहले जहां एसआईआर जैसे मुद्दे को बंगाल की अस्मिता से जोड़ा जा रहा था, वहीं अब परिसीमन को “देश को तोड़ने की साजिश” के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यह बदलाव केवल भाषाई नहीं बल्कि पूरी राजनीतिक दिशा को बदलने वाला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर बंगाल, जहां भाजपा ने पिछली बार मजबूत प्रदर्शन किया था, अब इस नए नैरेटिव का केंद्र बन गया है। चाय बागानों में काम करने वाले लाखों मजदूरों तक पहुंचने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने घर-घर अभियान शुरू किया है। यहां अब रोजगार, मजदूरी और जमीन के अधिकार जैसे मुद्दों की जगह परिसीमन को लेकर भय और असुरक्षा का माहौल बनाया जा रहा है। ममता बनर्जी यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि यदि परिसीमन लागू होता, तो कई जिलों की पहचान ही खत्म हो जाती। यह एक ऐसा भावनात्मक तर्क है जो सीधे जनता के मन में अस्मिता के सवाल को जगाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर अभिषेक बनर्जी जैसे नेता इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि संसद में जो हुआ, वह केवल शुरुआत है और इसका असर राज्यों में भी दिखेगा। यह बयान न केवल आत्मविश्वास दर्शाता है बल्कि कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का प्रयास भी है।तमिलनाडु में स्थिति और भी रोचक है। यहां द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने बेहद तेजी से चुनावी हवा को अपने पक्ष में मोड़ने का काम किया है। तीन दिन पहले तक परिसीमन बिल सबसे बड़ा मुद्दा था, लेकिन अब “तमिल अस्मिता” चुनाव का केंद्रीय विषय बन चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एम. के. स्टालिन को इस पूरे घटनाक्रम में एक विजेता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, मानो उन्होंने केंद्र के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई जीत ली हो। डीएमके के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर “द्रविड़ गौरव” के पर्चे बांट रहे हैं और यह संदेश दे रहे हैं कि यह केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं बल्कि तमिल पहचान की रक्षा का प्रश्न है। इस रणनीति का असर यह हुआ है कि चुनावी विमर्श पूरी तरह बदल गया है। अब यह केवल सीटों के बंटवारे का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक और क्षेत्रीय अस्मिता का प्रश्न बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। के. अन्नामलाई लगातार यह कह रहे हैं कि परिसीमन से तमिलनाडु को कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन उनकी बात उतनी प्रभावी तरीके से जनता तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके विपरीत डीएमके का संदेश ज्यादा संगठित और भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है, जिससे वह ज्यादा असरदार साबित हो रहा है।एनडीए की सहयोगी एआईएडीएमके एक असमंजस की स्थिति में है। वह न तो खुलकर परिसीमन बिल के खिलाफ बोल पा रही है और न ही तमिल अस्मिता के मुद्दे पर पूरी तरह डीएमके का विरोध कर पा रही है। यह स्थिति उसे चुनावी मैदान में कमजोर बनाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प पहलू उभरकर सामने आया है, वह है नए चेहरों का उदय। अभिनेता विजय ने इस मुद्दे को एक अवसर के रूप में लिया है और अपनी पार्टी के जरिए “तमिलनाडु का हक” जैसे संदेशों को डिजिटल माध्यम से फैलाया है। यह दिखाता है कि कैसे बदलते राजनीतिक माहौल में नए खिलाड़ी भी अपनी जगह बना सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह पहली बार नहीं है जब चुनाव से ठीक पहले मुद्दों में इतना बड़ा बदलाव आया हो। पश्चिम बंगाल में 2011 में “परिवर्तन” का नारा और 2021 में “खेला होबे” जैसे अभियान यह साबित करते हैं कि सही समय पर सही नैरेटिव चुनाव की दिशा बदल सकता है। इसी तरह तमिलनाडु में 1967 और 2016 के चुनावों में भी आखिरी समय में मुद्दों के बदलने से परिणाम प्रभावित हुए थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बार भी वही पैटर्न दोहराया जा रहा है, लेकिन एक अंतर के साथ। इस बार मुद्दे केवल स्थानीय नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय नीतियों से जुड़े हुए हैं। परिसीमन जैसे विषय को लेकर क्षेत्रीय अस्मिता का उभार यह दिखाता है कि भारत की संघीय राजनीति में राज्य और केंद्र के बीच संतुलन का सवाल कितना संवेदनशील है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा की स्थिति भी दिलचस्प है। एक तरफ वह संसद में बिल गिरने के बावजूद इसे अपनी रणनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राज्यों में उसे नए नैरेटिव का सामना करना पड़ रहा है। यह विरोधाभास उसके लिए चुनौती बन सकता है। दूसरी ओर विपक्ष, जो इस घटनाक्रम से उत्साहित है, कहीं न कहीं आंतरिक असंतोष और भ्रम का भी शिकार दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह स्पष्ट है कि आने वाले चुनाव केवल नीतियों या वादों पर नहीं बल्कि भावनाओं, पहचान और धारणा की लड़ाई पर आधारित होंगे। परिसीमन का मुद्दा केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक हथियार बन चुका है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में जिस तरह से इसे अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया जा रहा है, वह भारतीय राजनीति की विविधता और जटिलता दोनों को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब सबकी नजर चुनावी परिणामों पर है। क्या भाजपा इस बदलती हवा के बावजूद अपनी पकड़ बनाए रख पाएगी, या विपक्ष की नई रणनीतियां उसे पीछे छोड़ देंगी—यह सवाल अभी खुला है। लेकिन इतना तय है कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श के नए स्वरूप का भी संकेत देगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 19:11:20 +0530</pubDate>
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