<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/14556/supreme-court-of-india" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>supreme court of india - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/14556/rss</link>
                <description>supreme court of india RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डीएनए टेस्ट में पिता न होने पर भरण-पोषण नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने मां की अपील खारिज की</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने कहा है कि यदि डीएनए परीक्षण से यह साबित हो जाए कि कोई व्यक्ति बच्चे का जैविक पिता नहीं है, तो उसे भरण-पोषण देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, भले ही बच्चा वैवाहिक संबंध के दौरान जन्मा हो। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने मां द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पक्षकारों की शादी 2016 में हुई थी। बाद में विवाद उत्पन्न होने पर महिला ने घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत अपने और बच्चे के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177023/no-maintenance-if-father-is-not-found-in-dna-test"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/untitled-design-2026-04-22t211803.878.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने कहा है कि यदि डीएनए परीक्षण से यह साबित हो जाए कि कोई व्यक्ति बच्चे का जैविक पिता नहीं है, तो उसे भरण-पोषण देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, भले ही बच्चा वैवाहिक संबंध के दौरान जन्मा हो। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने मां द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पक्षकारों की शादी 2016 में हुई थी। बाद में विवाद उत्पन्न होने पर महिला ने घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत अपने और बच्चे के लिए अंतरिम भरण-पोषण की मांग की।  सुनवाई के दौरान पति की मांग पर डीएनए परीक्षण कराया गया, जिसमें यह सामने आया कि वह बच्चे का जैविक पिता नहीं है। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने बच्चे के लिए भरण-पोषण देने से इनकार कर दिया, जिसे अपीलीय अदालत और हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्यतः कानून के तहत विवाह के दौरान जन्मे बच्चे को वैध माना जाता है, लेकिन जब डीएनए टेस्ट जैसी वैज्ञानिक जांच से पितृत्व स्पष्ट रूप से खारिज हो जाए और उस रिपोर्ट को चुनौती भी न दी गई हो, तो ऐसे साक्ष्य को प्राथमिकता दी जाएगी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, कोर्ट ने बच्चे के कल्याण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिया कि वह बच्चे की स्थिति—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण—का आकलन करे और आवश्यक होने पर सहायता सुनिश्चित करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण के मामलों में जैविक संबंध महत्वपूर्ण है और वैज्ञानिक साक्ष्य के सामने पारंपरिक कानूनी धारणा टिक नहीं सकती। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177023/no-maintenance-if-father-is-not-found-in-dna-test</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177023/no-maintenance-if-father-is-not-found-in-dna-test</guid>
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:14:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/untitled-design-2026-04-22t211803.878.webp"                         length="74780"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धाकड़ अधिवक्ता रवि भूषण चौबे की बेटी रीतिका भी कठिन परिश्रम के साथ बनी सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;">बिहार के बक्सर ज़िले की प्रतिभाशाली बेटी रीतिका ने अपने अथक परिश्रम, अटूट विश्वास और परिवार के मजबूत सहयोग से आज एक नई पहचान स्थापित की है—एडवोकेट रीतिका के रूप में।उनके पिता रवि भूषण चौबे जो कि सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता होने के साथ-साथ Ravi Babita Support Foundation के संस्थापक हैं एवं निदेशक हैं, और माता श्रीमती बबीता कुमारी चौबे जो एक समाजसेवी एवं उसी संस्था की निदेशक है दोनों ने सदैव अपनी बेटी को न्याय के क्षेत्र में ऊँचाइयों तक पहुँचते देखने का सपना संजोया इस सफर में उनके भाई शिवांग जो B.A. LL.B के छात्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176921/ritika-daughter-of-powerful-advocate-ravi-bhushan-choubey-also-became"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260422-wa0010.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;">बिहार के बक्सर ज़िले की प्रतिभाशाली बेटी रीतिका ने अपने अथक परिश्रम, अटूट विश्वास और परिवार के मजबूत सहयोग से आज एक नई पहचान स्थापित की है—एडवोकेट रीतिका के रूप में।उनके पिता रवि भूषण चौबे जो कि सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता होने के साथ-साथ Ravi Babita Support Foundation के संस्थापक हैं एवं निदेशक हैं, और माता श्रीमती बबीता कुमारी चौबे जो एक समाजसेवी एवं उसी संस्था की निदेशक है दोनों ने सदैव अपनी बेटी को न्याय के क्षेत्र में ऊँचाइयों तक पहुँचते देखने का सपना संजोया इस सफर में उनके भाई शिवांग जो B.A. LL.B के छात्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और छोटे भाई शौर्य कात्यायन का भरपूर सहयोग रहा परिवार के इस अटूट विश्वास और समर्थन ने रीतिका के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई दिनांक 20 अप्रैल 2026 को, Bar Council of Delhi में नामांकन के पश्चात सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित चैंबर नंबर 108 D-ब्लॉक में एक गौरवपूर्ण क्षण साकार हुआ, जब वरिष्ठ अधिवक्ता भी,पी यादव ने रीतिका को एडवोकेट बैंड पहनाकर न्याय के पथ पर अग्रसर होने का आशीर्वाद प्रदान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं दूसरी तरफ इस शुभ अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित अधिवक्ता मनोज कुमार चौबे , दीपक कुमार चौबे तथा अन्य कई सम्मानित अधिवक्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए रीतिका को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं इस दौरान, चैंबर से लेकर सुप्रीम कोर्ट के Advocates’ Sitting Room और Lounge तक बार-बार शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हुआ जो इस उपलब्धि की गरिमा और उत्साह को और भी बढ़ा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज रीतिका न केवल अपने गृह जनपद बक्सर बिहार का, बल्कि बलजीत नगर नई दिल्ली और सबौली, सोनीपत हरियाणा का नाम भी गर्व से रोशन कर रही हैं। यह उपलब्धि हर उस बेटी के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करने का साहस रखती है अंत में एडवोकेट रीतिका एवं उनके पिता रवि भूषण चौबे ने वरिष्ठ अधिवक्ता बी. पी. यादव अधिवक्ता मनोज कुमार चौधरी तथा सभी सम्मानित अधिवक्ता साथियों  और शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। रवि भूषण चौबे एडवोकेट का सम्पूर्ण समाज के माता-पिता व बेटीयां को संदेश जब परिवार का साथ और खुद पर विश्वास हो तो हर बेटीयों का हौसला अफजाई हो सकता है।</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176921/ritika-daughter-of-powerful-advocate-ravi-bhushan-choubey-also-became</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/176921/ritika-daughter-of-powerful-advocate-ravi-bhushan-choubey-also-became</guid>
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:52:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img-20260422-wa0010.jpg"                         length="57824"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुकदमों की पेंडिंग लिस्ट बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जजों की संख्या है.।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट में केवल 110 जज हैं. इन जजों के भरोसे ये 12 लाख पेंडिंग केस हैं. केस निपटाने को लेकर जजों पर प्रेशर भी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत केसों की पेंडिंसि खत्म करनी है.</p>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं दबावों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी का बयान भी चर्चा में है. हाल ही में जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने एक सुनवाई के दौरान कहा था-मुझे भूख लग रही है, थकान महसूस हो रही है और मैं शारीरिक रूप से निर्णय देने में असमर्थ हूं. इसलिए फैसले की सुरक्षित रखा जाता है.</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी बात कहने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173065/the-biggest-reason-for-increasing-the-pending-list-of-cases"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/allahabad-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट में केवल 110 जज हैं. इन जजों के भरोसे ये 12 लाख पेंडिंग केस हैं. केस निपटाने को लेकर जजों पर प्रेशर भी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत केसों की पेंडिंसि खत्म करनी है.</p>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं दबावों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी का बयान भी चर्चा में है. हाल ही में जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने एक सुनवाई के दौरान कहा था-मुझे भूख लग रही है, थकान महसूस हो रही है और मैं शारीरिक रूप से निर्णय देने में असमर्थ हूं. इसलिए फैसले की सुरक्षित रखा जाता है.</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी बात कहने के पीछ जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की मजबूरी यह थी कि 24 फरवरी को ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) के एक आदेश के खिलाफ सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने तत्काल आदेश पारित करने के बजाय, टिप्पणी के साथ फैसला सुरक्षित रख लिया.</p>
<p style="text-align:justify;">24 फरवरी का दिन जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की अदालत के लिए बेहद व्यस्त रहा. उनकी लिस्ट में कुल 235 मामले लगे थे. इनमें 92 नए केस, 101 नियमित मामले, 39 विविध आवेदन और 3 एडिशनल लिस्ट के मामले शामिल थे. दोपहर 4:15 बजे तक जस्टिस विद्यार्थी केवल 29 नए मामलों की ही सुनवाई कर पाए थे.</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच उन्हें सूचित किया गया कि अगला मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिमांड (वापस भेजा गया) किया गया है और इसकी समय सीमा 24 फरवरी को ही समाप्त हो रही है. इसके बाद जस्टिस विद्यार्थी ने इस विशेष मामले की सुनवाई शुरू की, जो लगातार शाम 7 बजे तक चली.</p>
<p style="text-align:justify;">जज की इस टिप्पणी ने एक नई बहस छेड़ दी है. यह वाकया दर्शाता है कि भारतीय अदालतों में जजों पर काम का कितना दबाव है. एक ही दिन में 200 से अधिक केस लिस्ट होना और फिर देर शाम तक सुनवाई करना किसी भी व्यक्ति के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है.</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल  सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक केस की बड़ी पेंडेंसी है. वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लगभग 92800 मामले पेंडिंग हैं. जिनमें से 72000 मामले सिविल के हैं और 20800 मामले अपराधिक (फौजदारी) के हैं. पिछले एक साल में सुप्रीम कोर्ट में 10000 से अधिक पेंडेंसी बढ़ी है.</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे देश में सबसे ज्यादा पेंडेंसी इलाहाबाद हाईकोर्ट में है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में लगभग 12 लाख केस पेंडिंग हैं. बड़ी बात यह है कि पूरे देश में हाईकोर्ट में जितने केस पेंडिंग हैं उसका 20% यानी की पांचवां हिस्सा अकेले इलाहाबाद हाईकोर्ट में है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में 22265 मामले पेंडिंग हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में जजों के 34 पद हैं, जिनमें से 33 पदों पर वर्तमान में नियुक्तियां हैं, एक पद खाली है. निर्धारित पदों के सापेक्ष जजों की नियुक्ति होने के बावजूद भी पेंडेंसी 92828 है, जो यह दर्शाती है कि कोर्ट में आने वाले केसों की रफ्तार काफी तेज है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की बात करें तो कुल 160 जजों के पद हैं, जिनमें से 110 पदों पर नियुक्ति है. 50 पद खाली हैंं. यानि इलाहाबाद हाईकोर्ट में 31% जजों के पद खाली हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">अगर पूरे देश के हाईकोर्ट की बात करें तो सभी 25 हाईकोर्ट में कुल 1114 पद सृजित हैं, जिनमें से 804 पदों पर जज नियुक्त हैं. पूरे देश में हाईकोर्ट के 310 पदों पर जजों की नियुक्ति नहीं है. इसका मतलब पूरे देश में हाईकोर्ट के 27.8 प्रतिशत जजों के पद खाली हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट ही नहीं जिला कोर्ट में भी केस की संख्या अधिक होने के चलते जज पर काम का प्रेशर होता है. वहीं पक्षकारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कोर्ट पर अधिक दबाव होने के चलते मुकदमे की सुनवाई समय से नहीं हो पाती है. एक दिन में अधिक मामले सुनाने पड़ते हैं जिसके चलते केस पर जज अधिक समय नहीं दे पाते और तारीख पर तारीख का खेल चलता रहता है.</p>
<p style="text-align:justify;">आपराधिक मामलों में कोर्ट पर ओवर बर्डन होने के चलते बेल मिलने में समस्या होती है. एक हियरिंग के लिए लिस्टिंग करने के बाद दूसरी हियरिंग की लिस्टिंग होने में महीनों का समय लग जाता है. ऐसे में अगर एक हियरिंग पर किन्ही कारणों से बेल रिजेक्ट होती है, तो दूसरी बेल का मौका मिलने में कई बार महीनों का समय लगता है.</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173065/the-biggest-reason-for-increasing-the-pending-list-of-cases</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173065/the-biggest-reason-for-increasing-the-pending-list-of-cases</guid>
                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 23:01:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/allahabad-high-court.jpg"                         length="163759"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जजों को भी नहीं पता कि कॉलेजियम कहाँ बैठता है: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></p><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने शनिवार को कॉलेजियम के कामकाज में पारदर्शिता न होने पर चिंता जताई, जो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों को अपॉइंट करता है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट आखिरकार जेंडर के आधार पर नंबरों के आधार पर नहीं, बल्कि मेरिट के आधार पर होने चाहिए।वह महिला दिवस मनाने के लिए इंडियन वीमेन इन लॉ (IWiL) द्वारा आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे।</p><p style="text-align:justify;">जस्टिस दत्ता ने कहा कि ट्रांसपेरेंसी की कमी इतनी है कि जजों को भी अक्सर इस बारे में बहुत कम क्लैरिटी होती है कि कॉलेजियम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173063/even-judges-do-not-know-where-the-collegium-sits-supreme"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/supreme-court-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></p><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने शनिवार को कॉलेजियम के कामकाज में पारदर्शिता न होने पर चिंता जताई, जो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों को अपॉइंट करता है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट आखिरकार जेंडर के आधार पर नंबरों के आधार पर नहीं, बल्कि मेरिट के आधार पर होने चाहिए।वह महिला दिवस मनाने के लिए इंडियन वीमेन इन लॉ (IWiL) द्वारा आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे।</p><p style="text-align:justify;">जस्टिस दत्ता ने कहा कि ट्रांसपेरेंसी की कमी इतनी है कि जजों को भी अक्सर इस बारे में बहुत कम क्लैरिटी होती है कि कॉलेजियम कैसे काम करता है और यह कहाँ मिलता है।उन्होंने कहा, "आपको यह जानकर हैरानी होगी कि न केवल हम जानते हैं कि क्या हो रहा है... हमें यह भी नहीं पता कि कॉलेजियम कहाँ बैठ रहा है।"</p><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट आखिरकार जेंडर के आधार पर नंबरों के आधार पर नहीं, बल्कि मेरिट के आधार पर होने चाहिए।वह महिला दिवस मनाने के लिए इंडियन वीमेन इन लॉ (IWiL) द्वारा आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे।</p><p style="text-align:justify;">जस्टिस दत्ता, जो पहले बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं, ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान, ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया की कमी का मतलब था कि जजों को अपने सामने पेश होने वाले वकीलों के अपने असेसमेंट पर निर्भर रहना पड़ता था।उन्होंने कहा, “बॉम्बे हाई कोर्ट में, क्योंकि कोई ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया नहीं था, इसलिए हमने अपने सामने वकीलों के परफॉर्मेंस का असेसमेंट किया।”</p><p style="text-align:justify;">बाद में जज बनी महिलाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा:“जस्टिस शंपा सरकार, जस्टिस अमृता सिन्हा, जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य, जब मैं वहां (कलकत्ता हाई कोर्ट) था तो मैंने जिस तरह की पूछताछ की… अब मुझे यकीन है कि वे सभी वकीलों को संभाल सकती हैं।”जस्टिस दत्ता ने ज्यूडिशियरी में महिलाओं के रिप्रेजेंटेशन पर बातचीत को सिर्फ नंबरों तक सीमित करने के खिलाफ चेतावनी दी।</p><p style="text-align:justify;">“जब  समय का एक किस्सा भी सुनाया जब उन्होंने एक महिला वकील के प्रमोशन के सुझाव को मना कर दिया था।“एक जज ने मुझे फ़ोन किया और कहा कि छह लोगों के नाम रिकमेंड किए जा रहे हैं। महिला के नाम क्यों नहीं? मैंने उस जज से कहा नहीं। मैंने कहा कि वह वकील मेरे सामने पेश हुई और वह नासमझ है और मुझे उसे मैच्योर होने के लिए समय देना होगा।”</p><p style="text-align:justify;">जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने रविवार को खुलकर उन चुनौतियों के बारे में बात की जिनका सामना महिलाओं को ज्यूडिशियरी में आने और आगे बढ़ने में करना पड़ता है।</p><p style="text-align:justify;">सरकार ने कहा, "एक पुराना क्लाइंट आया और जब मैं आगे बढ़ी तो उसने कहा 'अरे यह सब लड़की दुल्हन मत दीजिए'। फिर एक पुरुष सहकर्मी उसके साथ चला गया। अगर मैंने तब आपत्ति जताई होती, तो यह खत्म हो गया होता।"</p><p style="text-align:justify;">सरकार ने आगे कहा कि महिला वकीलों को मेंटरशिप की कमी, सैलरी में अंतर और कोर्टरूम के अंदर के रवैये जैसी दूसरी रुकावटों का भी सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “मेंटरिंग की कमी है और उन्हें अच्छे सीनियर नहीं मिलते। फिर स्ट्रक्चरल पेमेंट का मुद्दा है। उनसे पूछा जाता है ‘कितना काम लेती हो? इतना तो पॉकेट मनी देंगे’। तो यह एक और मुद्दा है। फिर कोर्टरूम बायस आता है। जजों ने भी कई बार हमें गंभीरता से नहीं लिया है।”</p><h4 style="text-align:justify;"><strong> 12 लाख पेंडिंग केस, जज महज 110, 'भूखा और थका हूं' कहने वाले जज की क्या है मजबूरी</strong></h4><p style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट मुकदमों के बोझ तले दबा हुआ है. यहां नए-पुराने करीब 12 लाख केसेज पेंडिंग हैं. इनमें कई पुराने मुकदमे ऐसे हैं जिनका नए मुकदमों के बीच नंबर ही नहीं आ रहा है. मतलब साफ है न्याय के लिए लंबी वेटिंग चल रही है.<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173063/even-judges-do-not-know-where-the-collegium-sits-supreme</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173063/even-judges-do-not-know-where-the-collegium-sits-supreme</guid>
                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:57:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/supreme-court-4.jpg"                         length="208745"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केजरीवाल की जमानत से कौन खुश, कौन नाराज़ जाने अंदर की बात </title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को शराब घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने पर सभी राजनेताओं ने प्रतिक्रिया व्यक्त की। जबकि कुछ ने इसे एक उचित जीत के रूप में सराहा, दूसरों ने इसे एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा। किसने क्या कहा ये हम आपको बताते हैं।</p>
<p>समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि दिल्ली के लोकप्रिय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी की जमानत सत्य की एक और जीत है। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया गठबंधन’ की शक्ति और एकजुटता भाजपा के दुख-दर्द देनेवाले राज से भारत की जनता को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141073/who-is-happy-and-who-is-angry-with-kejriwals-bail"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/20240430084539_arvind-kejriwal.jpg" alt=""></a><br /><p>सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को शराब घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने पर सभी राजनेताओं ने प्रतिक्रिया व्यक्त की। जबकि कुछ ने इसे एक उचित जीत के रूप में सराहा, दूसरों ने इसे एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा। किसने क्या कहा ये हम आपको बताते हैं।</p>
<p>समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि दिल्ली के लोकप्रिय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी की जमानत सत्य की एक और जीत है। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया गठबंधन’ की शक्ति और एकजुटता भाजपा के दुख-दर्द देनेवाले राज से भारत की जनता को मुक्ति दिलवाने जा रही है। एकजुट होकर मतदान का संकल्प लें! </p>
<blockquote class="format2">
<p>आप नेता राघव चड्ढा ने कहा कि हर देशवासी की आँखें ख़ुशी से नम हैं, उनके भाई उनके बेटे अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर आने वाले हैं। आज शाम जेल के ताले टूटेंगे, केजरीवाल छूटेंगे। लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का दिल की गहराइयों से आभार। इंक़लाब ज़िंदाबाद, अरविंद केजरीवाल ज़िंदाबाद !</p>
<p>उद्धव ठाकरे गुट के आदित्य ठाकरे ने कहा, “अरविंद केजरीवाल जी को देश में तानाशाही शासन के खिलाफ न्याय और राहत मिलना बदलाव की बयार का एक बड़ा संकेत है।”</p>
<p>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर कहा, "मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिल गई है।"</p>
<p>दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर एआईसीसी के दिल्ली और हरियाणा प्रभारी दीपक बाबरिया ने कहा कि अदालत का फैसला सही है। भाजपा ने उन्हें चुनाव प्रचार करने से रोकने का प्रयास किया था।</p>
<p>आप नेता आतिशी ने कहा कि यह सत्य की जीत है...मैं संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आने के लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देता हूं। अरविंद केजरीवाल आज शाम तिहाड़ जेल से बाहर आएंगे और मुझे यकीन है कि वह दिल्ली और देश के लोगों को संबोधित करेंगे।</p>
<p>सीपीआई(एम) नेता बृंदा करात ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं। SC का फैसला ED और केंद्र सरकार के चेहरे पर करारा तमाचा है। केंद्र सरकार ने ईडी को विपक्षी दल के खिलाफ एक राजनीतिक एजेंसी के रूप में इस्तेमाल किया है...जब आप एक निर्वाचित मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करते हैं तो यह किस तरह का समान अवसर है?</p>
<p>शिवसेना नेता संजय निपुरम ने कहा कि जेल या जमानत के बजाय पहले उन्हें सीएम पद से हटाया जाना चाहिए। कोई आरोपी जेल से सरकार कैसे चला सकता है?</p>
<p>कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि हम अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत करते हैं...हमें उम्मीद है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी उचित न्याय मिलेगा।</p>
</blockquote>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/141073/who-is-happy-and-who-is-angry-with-kejriwals-bail</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/141073/who-is-happy-and-who-is-angry-with-kejriwals-bail</guid>
                <pubDate>Fri, 10 May 2024 16:14:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-05/20240430084539_arvind-kejriwal.jpg"                         length="79455"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि उपज विपणन समिति द्वारा मॉल और फाइव स्टार होटल बनाना एक घोटाला है- सुप्रीम कोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div><strong>जेपी सिंह।</strong></div>
<div>  </div>
<div>  </div>
<div>व्यवसाय में सफलता अधिकांश गुजरातियों का अहंकार हो सकता है, लेकिन सूरत की कृषि उपज विपणन समिति( एपीएमसी) ने अपनी जमीन पर एक मॉल और एक पांच सितारा होटल का निर्माण करके इसे अगले स्तर पर ले लिया, जिसे 1960 के दशक में गुजरात सरकार ने किसानो के  लाभ के लिए अधिग्रहण कर लिया था। </div>
<div>  </div>
<div>मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जे बी पारदीवाला की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने किसानों के कल्याण के लिए दी गई जमीन को बर्बाद करने के लिए सूरत एपीएमसी को फटकार लगाई और कहा की “यह सर्वोच्च स्तर का घोटाला</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140427/building-malls-and-five-star-hotels-by-agricultural-produce-marketing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-04/supreme-court-of-india.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div><strong>जेपी सिंह।</strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>व्यवसाय में सफलता अधिकांश गुजरातियों का अहंकार हो सकता है, लेकिन सूरत की कृषि उपज विपणन समिति( एपीएमसी) ने अपनी जमीन पर एक मॉल और एक पांच सितारा होटल का निर्माण करके इसे अगले स्तर पर ले लिया, जिसे 1960 के दशक में गुजरात सरकार ने किसानो के  लाभ के लिए अधिग्रहण कर लिया था। </div>
<div> </div>
<div>मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जे बी पारदीवाला की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने किसानों के कल्याण के लिए दी गई जमीन को बर्बाद करने के लिए सूरत एपीएमसी को फटकार लगाई और कहा की “यह सर्वोच्च स्तर का घोटाला है। एपीएमसी अधिशेष भूमि का उपयोग मॉल और पांच सितारा होटल के लिए कैसे कर सकती थी? किस कानून ने इसे ऐसा निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया है?”</div>
<div> </div>
<div>एपीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह एपीएमसी की जमीन है और समिति राजस्व सृजन के लिए इसका उचित उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है। “गुजरात HC राज्य को एपीएमसी की ज़मीन और संपत्ति कब्ज़ा करने का निर्देश कैसे दे सकता है?” वरिष्ठ अधिवक्ता निधेश गुप्ता के माध्यम से होटल पट्टा धारक ने कहा कि होटल चलाने के लिए पट्टा देने में कोई अनियमितता नहीं हुई है।</div>
<div> </div>
<div>पीठ असहमत रही और कहा कि एचसी ने एक होटल और एक मॉल के लिए एपीएमसी भूमि के आवंटन में अनियमितता के स्तर को देखते हुए अत्यधिक आदेश पारित किया। इसने एपीएमसी और होटल के पट्टाधारक दोनों की अपील को खारिज कर दिया।</div>
<div> </div>
<div>सीजे सुनीता अग्रवाल और अनिरुद्ध माई की एचसी पीठ ने 27 मार्च को राज्य को मार्केट यार्ड की जमीन पर बने एपीएमसी के पांच सितारा होटल पर कब्जा करने का आदेश दिया था। इसने संपत्ति की सार्वजनिक नीलामी का भी आदेश दिया और अधिकारियों को राज्य के बाजार कोष में राशि जमा करने का निर्देश दिया।</div>
<div> </div>
<div>पीठ ने आलीशान होटल के निर्माण के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों और एपीएमसी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया, जिन्होंने मार्केट यार्ड के लक्ष्यों और उद्देश्यों का उल्लंघन किया, जिसके लिए सरकार ने लगभग 14,000 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण किया था।</div>
<div>एचसी ने कृषि, विपणन और ग्रामीण वित्त निदेशक को याचिकाकर्ता के आरोपों पर 'कृषि बाजार' का निरीक्षण करने का आदेश दिया कि मॉल में दुकानों को आभूषण और कपड़े जैसी वस्तुओं की बिक्री के लिए पट्टे पर दिया गया था। इसने मॉल में उन सभी गतिविधियों को बंद करने का आदेश दिया जो किसानों के कल्याण के लिए नहीं थीं।</div>
<div> </div>
<div>कृषि पर संसदीय स्थायी समिति की दिसंबर 2019 की रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के दृष्टिकोण को व्यापक स्वीकृति मिली। समिति ने यूपी और पंजाब को छोड़कर पूरे भारत में एपीएमसी के प्रबंधन के तरीके और किसानों के लाभ के लिए हानिकारक कार्य करने की कड़ी आलोचना की थी। इसने देश में एपीएमसी एक्ट में आमूल-चूल सुधार की सिफारिश की थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/140427/building-malls-and-five-star-hotels-by-agricultural-produce-marketing</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/140427/building-malls-and-five-star-hotels-by-agricultural-produce-marketing</guid>
                <pubDate>Sun, 21 Apr 2024 20:00:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-04/supreme-court-of-india.jpg"                         length="156373"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        