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                <title>ashwani upadhdhay - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>फर्जी मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन: अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सरकारों को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">झूठी शिकायतों और फर्जी आपराधिक मुकदमों के बढ़ते मामलों पर <strong>Supreme Court of India</strong> ने गहरी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का दुरुपयोग रोकना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे निर्दोष लोगों का उत्पीड़न होता है और अदालतों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए अदालत के सामने आया है, जिसमें झूठी शिकायतों, फर्जी गवाही और मनगढ़ंत सबूतों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह न्याय व्यवस्था के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171470/supreme-court-issues-strict-notice-to-center-and-states-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/supream-court6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">झूठी शिकायतों और फर्जी आपराधिक मुकदमों के बढ़ते मामलों पर <strong>Supreme Court of India</strong> ने गहरी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का दुरुपयोग रोकना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे निर्दोष लोगों का उत्पीड़न होता है और अदालतों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए अदालत के सामने आया है, जिसमें झूठी शिकायतों, फर्जी गवाही और मनगढ़ंत सबूतों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी, भले ही इसके लिए उसकी आलोचना क्यों न हो।</p>
<hr />
<h2 style="text-align:justify;"><strong>किसने दायर की याचिका</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">यह जनहित याचिका अधिवक्ता और भाजपा नेता <strong>Ashwini Kumar Upadhyay</strong> द्वारा दायर की गई है। उन्होंने स्वयं अदालत में अपने पक्ष की पैरवी करते हुए कहा कि फर्जी मुकदमों के कारण ईमानदार लोग भय के माहौल में जी रहे हैं और न्याय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में कहा गया है कि कई बार सिविल विवादों को जानबूझकर आपराधिक मामलों में बदल दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर, जमीन विवाद जैसे मामलों को गंभीर आपराधिक धाराओं में बदल दिया जाता है या महिलाओं के माध्यम से छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसे झूठे आरोप लगाए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/tIg7W2MTblw" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
<hr />
<h2 style="text-align:justify;"><strong>कोर्ट की कड़ी टिप्पणी</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश <strong>Surya Kant</strong> की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि समाज में ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है।</p>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>अदालत ने कहा:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>कई बार शिकायतकर्ता को पता ही नहीं होता कि उसके नाम से शिकायत दर्ज कर दी गई है।</p>
</li>
<li>
<p>प्रभावशाली लोग गरीबों के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर शिकायतें दर्ज करा देते हैं।</p>
</li>
<li>
<p>आपराधिक प्रक्रिया का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।</p>
</li>
</ul>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने यह भी कहा कि एक जागरूक समाज का निर्माण जरूरी है, जहां लोग एक-दूसरे के मौलिक अधिकारों का सम्मान करें और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दें।</p>
<hr />
<h2 style="text-align:justify;"><strong>कोर्ट ने दिया उदाहरण</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान अदालत ने एक हालिया मामले का उदाहरण दिया, जिसमें एक महिला ने खुद अदालत में आकर कहा कि एक राजनीतिक नेता का उसके केस से कोई संबंध नहीं है। महिला के नाम से नेता के खिलाफ फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई थी।</p>
<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/deccanherald_import_sites_dh_files_articleimages_2022_12_11_file7nzkdgc0kfd151r1fibf-1170562-1670695861-1-1170562-1670701358.jpg" alt="फर्जी मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन: अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सरकारों को नोटिस" width="723" height="452"></img>
<strong>फर्जी शिकायतों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कड़ा, अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई</strong>

<p> </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों से साफ है कि शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसे रोकने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं।</p>
<hr />
<h2 style="text-align:justify;"><strong>याचिका में दिए गए प्रमुख सुझाव</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के सामने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव रखे गए हैं:</p>
<ol style="text-align:justify;">
<li>
<blockquote class="format1">
<p><strong>सूचना बोर्ड लगाने की व्यवस्था</strong></p>
<ul>
<li>
<p>पुलिस थानों</p>
</li>
<li>
<p>अदालतों</p>
</li>
<li>
<p>पंचायत भवनों<br />में यह जानकारी प्रदर्शित की जाए कि झूठी शिकायत दर्ज कराने पर क्या सजा हो सकती है।</p>
</li>
</ul>
</blockquote>
</li>
<li>
<p><strong>अनिवार्य शपथ पत्र (Affidavit)</strong><br />शिकायत दर्ज करते समय शिकायतकर्ता से आरोपों की सत्यता की पुष्टि करने वाला शपथ पत्र लिया जाए।</p>
</li>
<li>
<blockquote class="format1">
<p><strong>कड़े कानूनी प्रावधान लागू हों</strong></p>
<ul>
<li>
<p>झूठी गवाही</p>
</li>
<li>
<p>फर्जी सबूत</p>
</li>
<li>
<p>मनगढ़ंत शिकायत<br />के मामलों में मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए।</p>
</li>
</ul>
</blockquote>
</li>
</ol>
<hr />
<h2 style="text-align:justify;"><strong>सरकार से मांगा जवाब</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि झूठी शिकायतों और फर्जी मुकदमों को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या योजना है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की अगली सुनवाई <strong>चार सप्ताह बाद</strong> निर्धारित की गई है।</p>
<hr />
<h2 style="text-align:justify;"><strong>क्यों महत्वपूर्ण है मामला</strong></h2>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अदालत इस मामले में सख्त दिशा-निर्देश जारी करती है, तो:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>फर्जी मुकदमों में कमी आ सकती है</p>
</li>
<li>
<p>निर्दोष लोगों को राहत मिल सकती है</p>
</li>
<li>
<p>अदालतों का बोझ घट सकता है</p>
</li>
<li>
<p>न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">यह मामला आने वाले समय में आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़े सुधार की दिशा तय कर सकता है।</p>
</blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 16:06:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आतंकवादियो , देशद्रोहीयो को मानव अधिकारों के नाम पर सुविधा लेकिन एक संत को जीवन रक्षा के लिए कोई राहत नहीं-अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br /><strong>विशेष संवाददाता  नई दिल्ली </strong></p>
<p><br />जिन्होंने पूरी जिंदगी स्वदेशी को आगे बढ़ाया है उनको फोर्स किया जा रहा है कि तुम विदेशी इलाज करवाओ खूंखार अपराधियों को मानवता के आधार पर बिरयानी खाने का इबादत करने का अपनी पसंदीदा कपड़ा पहनने का त्यौहार मनाने का छुट्टी मिलती है जेल से पैरोल पर बड़े-बड़े माफिया को शादी विवाह में जाने के लिए माता-पिता से मिलने के लिए पत्नी से मिलने के लिए और बच्चा पैदा करने के लिए पैरोल पर जमानत मिलती है समान अपराधियों को नहीं बड़े-बड़े माफिया को आतंकवादियों को जिन्होंने करोड़ का हेरा फेरी किया ऐसे देश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140333/facilities-are-provided-to-terrorists-and-traitors-in-the-name"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-04/अश्विनी-कुमार-उपाध्याय.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br /><strong>विशेष संवाददाता  नई दिल्ली </strong></p>
<p><br />जिन्होंने पूरी जिंदगी स्वदेशी को आगे बढ़ाया है उनको फोर्स किया जा रहा है कि तुम विदेशी इलाज करवाओ खूंखार अपराधियों को मानवता के आधार पर बिरयानी खाने का इबादत करने का अपनी पसंदीदा कपड़ा पहनने का त्यौहार मनाने का छुट्टी मिलती है जेल से पैरोल पर बड़े-बड़े माफिया को शादी विवाह में जाने के लिए माता-पिता से मिलने के लिए पत्नी से मिलने के लिए और बच्चा पैदा करने के लिए पैरोल पर जमानत मिलती है समान अपराधियों को नहीं बड़े-बड़े माफिया को आतंकवादियों को जिन्होंने करोड़ का हेरा फेरी किया ऐसे देश सफेद पोस्ट अपराधियों को नशा तस्करों को किन-किन को जमानत मिल जाती है l</p>
<p>लेकिन आसाराम बापू को आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सा आयोग चिकित्सा से अपना इलाज करवाने के लिए छुट्टी नहीं मिल रही है यह कितने आश्चर्य की बात है कितने सफेद पोश नेता है सजाया हफ्ता है दोषी हैं और बाहर घूम रहे हैं पार्टी बनाकर पार्टी के अध्यक्ष बनाकर बैठे हुए हैं पार्टी चल रहे हैं चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन वहीं आसाराम जिन्होंने पूरी जिंदगी आदिवासियों के अभाव ग्रस्तों के क्षेत्र में जा जाकर धर्मांतरण को रोक घुसपैठ को रोका धर्मांतरित हो गए थे उनके घर वापसी कराई उन संत को यह दंड मिल रहा है अरे कम से कम उतनी राहत दे देते जितनी लालू प्रसाद यादव को मिली हुई है जितनी अजमल  कसाब को मिली हुई थी </p>
<p>घूसखोर नेताओं को करशाहों को कमीशन खोरी को दलालों को नशा तस्करों को मानव तस्करों को आतंकवादियों को अलगाववादियों को जिहादियों को पत्थर बाजों को मवादो को नक्सलियों को पैरोल पर जमानत मिल सकती है जो भारत के साथ गद्दारी करते हैं जासूसी करते हैं देशद्रोही करते हैं उनको भी अपनी पसंद का भोजन करने की परिवार से मिलने की त्यौहार मनाने की हर चीज के लिए मानवता के नाम पर छुट्टी मिलती है l</p>
<p>जेल से लेकिन आसाराम बापू ने क्या इतना बड़ा गुनाह कर दिया है कि बेटे से भी नहीं मिलने दिया जाएगा परिजनों से नहीं मिलने दिया जाएगा और बाकी तो छोड़ो इलाज भी नहीं करने दिया जाएगा उनके आयुर्वेद चिकित्सा के हिसाब से इलाज के लिए कहेंगे कि विदेशी इलाज कराओ एलोपैथी में स्वदेशी इलाज मत करो जिन्होंने पूरी जिंदगी स्वदेशी को आगे बढ़ाया उनको फोर्स किया जा रहा है कि तुम विदेशी इलाज करवाओ मैं जज साहब से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि क्या आसाराम जी अजमल कसाब से ज्यादा अपराध किया है क्या एक से बढ़कर एक घोटाले हुए किसी नेता को तो आज तक नहीं रोक कोर्ट ने, अपने परिवार से मिलने के लिए एक संत जो बायो वृद्धि हो चुके हैं </p>
<p>शरीर के स्वस्थ हैं और केवल इतनी मांग कर रहे हैं कि हमको आयुर्वेद से प्राकृतिक चिकित्सा से योग चिकित्सा से इलाज करने दो इन अवस्था में कोई भारत छोड़कर कहीं भाग नहीं जाएंगे ऐसा भी नहीं है कि वह किसी की हत्या कर देंगे कम से कम मानवता के आधार पर आसाराम बापू को बेल देनी चाहिए और आसाराम बापूके पुराने कार्यों को देख लीजिए उन्होंने लाखों लोगों की घर वापसी कराई है उनका धर्मांतरण होने से बचाया है आप दलित और आदिवासियों के बीच जाकर देखिए उनकी बात सुनिए तो आपको पता चलेगा कि उन्होंने क्या-क्या काम किया हुआ था</p>
<p> मैं हाथ जोड़ता हूं थोड़ी सी उनके ऊपर भी दया कीजिए आतंकवादियों के ऊपर मानवता की दुहाई देकर काम हो रहा है तो आसाराम को तो वास्तव में मानो अधिकार है उनका काम से कम इलाज तो करने के लिए बेल दे दीजिए l</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Apr 2024 21:32:29 +0530</pubDate>
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