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                <title>Mayawati BSP supremo - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Mayawati BSP supremo RSS Feed</description>
                
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                <title>गठबंधन टूटने को लेकर सपा और बसपा में छिड़ा टि्वटर वार </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>इस समय उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के बीच गठबंधन को लेकर जुबानी जंग चल रही बहस इस बात को लेकर हो रही है कि आखिरकार गठबंधन किस की वजह से टूटा। मुद्दा यह भी है कि दोनों पार्टियों के वोट का एक  वर्ग एक ही है और दोनों चाहते हैं कि वो हमेशा दूर नहीं हो, और वह है मुस्लिम समुदाय का वोट जो कहीं सपा कहीं बसपा और कहीं कांग्रेस की तरफ शिफ्ट होता रहा है।</strong></div>
<div><strong>  </strong></div>
<div>बात 2019 के लोकसभा चुनावों से शुरू होती है जब भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए उत्तर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144824/twitter-war-broke-out-between-sp-and-bsp-over-breaking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/img_20240915_133851.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>इस समय उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के बीच गठबंधन को लेकर जुबानी जंग चल रही बहस इस बात को लेकर हो रही है कि आखिरकार गठबंधन किस की वजह से टूटा। मुद्दा यह भी है कि दोनों पार्टियों के वोट का एक  वर्ग एक ही है और दोनों चाहते हैं कि वो हमेशा दूर नहीं हो, और वह है मुस्लिम समुदाय का वोट जो कहीं सपा कहीं बसपा और कहीं कांग्रेस की तरफ शिफ्ट होता रहा है।</strong></div>
<div><strong> </strong></div>
<div>बात 2019 के लोकसभा चुनावों से शुरू होती है जब भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन किया था। इस गठबंधन के बनने से यह लग रहा था कि शायद यह उत्तर प्रदेश का सबसे मजबूत गठबंधन होगा। लेकिन किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि इस गठबंधन से नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। पिछले कई दशकों से उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में गठबंधन की राजनीति चल रही है और इसका मुख्य कारण है कि छोटी छोटी जातिगत समीकरण साधने को लेकर नई पार्टियों का राजनीति में प्रवेश कर जाना। हालांकि कई प्रदेश ऐसे भी हैं जहां जातिगत क्षेत्रीय दलों को जनता पसंद नहीं करती है और वह केवल राष्ट्रीय दलों को ही वोट देना पसंद करती है। लेकिन ज्यादातर राज्यों में जातिगत राजनीति फ़ैल चुकी है और इसीलिए अब गठबंधन सभी की मजबूरी बन चुका है।</div>
<div> </div>
<div>हम बात कर रहे थे 2019 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के गठबंधन की। इस गठबंधन को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे यहां तक कि मीडिया और राजनैतिक विश्लेषक भी यह कहने लगे थे कि शायद यह गठबंधन सबसे मजबूत गठबंधन होगा और भारतीय जनता पार्टी को यह गठबंधन कम से कम उत्तर प्रदेश में साफ कर सकता है। लेकिन जब चुनाव परिणाम सामने आए तो इस गठबंधन की पोल खुल गई। शायद दोनों पार्टियों के वोटरों को यह गठबंधन पसंद नहीं आया। 2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम में बहुजन समाज पार्टी को दस सीटों पर विजय प्राप्त हुई। जब कि समाजवादी पार्टी को मात्र पांच सीटों पर ही जीत हासिल हुई वो भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव के परिवार के ही सदस्य थे। इस चुनाव का परिणाम आने के बाद भारतीय जनता पार्टी को यह कहते देर नहीं लगी कि हमने सपा को उनके परिवार तक ही सीमित कर दिया है।</div>
<div> </div>
<div>इस गठबंधन की दोनों पार्टियों को चुनाव परिणाम आने के बाद जबरदस्त धक्का लगा। और इसमें सबसे अधिक चिंता समाजवादी पार्टी को होने लगी थी। क्यों कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी कई दशकों से या तो सत्ता में रही है या फिर दूसरे नंबर की पार्टी बनकर रही है। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी तीसरे पायदान पर पहुंच गई। चुनाव परिणाम आने के बाद मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस की और उसमें उन्होंने सपा के साथ गठबंधन को तोड़ने की घोषणा कर दी। और आरोप यह लगाया कि समाजवादी पार्टी अपना वोट बसपा को ट्रांसफर कराने में असफल रही और इसीलिए बसपा को बहुत नुक्सान उठाना पड़ा। जब कि हकीकत कुछ और थी सपा का वोट यदि बसपा में ट्रांसफर नहीं होता तो बसपा को दस सीटों पर विजय नहीं मिलती। इसके विपरीत सत्य यह था कि बसपा के वोटरों ने सपा को वोट नहीं किया था। जहां पर सपा के कैंडीडेट खड़े थे वहां बसपा के वोटरों ने अपना वोट भारतीय जनता पार्टी को किया। और इसका जबरदस्त फायदा भारतीय जनता पार्टी को पहुंचा और उसने प्रदेश में अब तक की सर्वाधिक सीटों पर विजय हासिल की।</div>
<div> </div>
<div>2019 के लोकसभा चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए। इन विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा ने अलग-अलग रहकर चुनाव लड़ा। विधानसभा चुनाव का परिणाम सबके सामने था, सपा को 110 सीटों पर विजय प्राप्त हुई जबकि बसपा एक सीट पर ही सीमित रह गई। बसपा के लिए यह चिंतन का विषय था। लेकिन मायावती जो अपने सख्त मिजाज के लिए जानी जाती हैं उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में जब इंडिया गठबंधन बना उसमें भी शामिल होने से इंकार कर दिया। हालांकि उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन का मतलब केवल सपा और कुछ कांग्रेस तक ही सीमित था। 2024 के लोकसभा चुनावों के जब परिणाम आए तो समाजवादी पार्टी 37 सीटों के साथ प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभर कर सामने आई, भारतीय जनता पार्टी 33 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही जब कि कांग्रेस को छै सीटों पर विजय प्राप्त हुई और बहुजन समाज पार्टी शून्य पर रह कर अपने अस्तित्व की चिंता में रह गई। 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को उत्तर प्रदेश में 62 सीटें मिलीं थीं। और किसी ने नहीं सोचा था कि वह बिल्कुल आधे 33 सीटों पर सिमट जाएगी।</div>
<div> </div>
<div>इन चुनावों के बाद अब उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के बीच गठबंधन तोड़ने को लेकर ट्विटर वार छिड़ गया है। बसपा का आरोप है कि 2019 के चुनाव चुनाव के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मायावती सहित बसपा के तमाम वरिष्ठ नेताओं के फोन उठाना बंद कर दिए थे और इसलिए अपने स्वाभिमान के लिए बसपा ने गठबंधन तोड़ा था। वहीं अखिलेश यादव का कहना है कि जिस समय बसपा ने गठबंधन तोड़ा था तब वह एक सभा में थे और उनको यह खबर वहीं मिली कि बसपा ने गठबंधन तोड़ दिया है। अखिलेश का कहना था कि उनके नेताओं ने सच्चाई का पता लगाने के लिए बसपा से संपर्क साधा कि आखिर ऐसा क्या हुआ क्यों कि सभा के बाद पत्रकार मुझसे पूछेंगे और मुझे पत्रकारों की बातों का जबाब देना होगा लेकिन बसपा की तरफ से मुझे कोई भी सूचना नहीं मिली।</div>
<div> </div>
<div>सपा बसपा गठबंधन को लेकर बात यहीं तक सीमित नहीं है। बात और आगे बढ़ चुकी है और मायावती को सपा से राजनैतिक खतरा दिखाई दे रहा है। अभी लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को बड़ी संख्या में दलित वोट मिला है। यहां तक कि अयोध्या जैसी सीट पर सपा के दलित प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने जीत हासिल की है। अब इह गठबंधन में नफा नुकसान देखा जा रहा है। दलित सपा के हर प्रत्याशी को वोट नहीं कर रहा है बल्कि सपा के दलित प्रत्याशी को वही दलित पूरी तरह से सपोर्ट करता दिखाई दे रहा है। शायद अब समाजवादी पार्टी नहीं चाहेगी कि बसपा के साथ उसका गठबंधन हो। क्यों कि बसपा कम सीटों पर तैयार नहीं होगी वहीं उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस का गठबंधन हिट हुआ है और समाजवादी पार्टी इससे गदगद है क्योंकि 2027 में आने वाले विधानसभा चुनाव में उसको उम्मीद जागी है। </div>
<div> </div>
<div><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Sep 2024 17:15:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अपने वोटरों को नहीं सम्हाल पा रही है बसपा  </title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr"><strong>बहुजन समाज पार्टी  का वोट शेयर उत्तर प्रदेश में हाल के चुनावों में काफी घटा है। 2</strong><strong>017 के विधानसभा चुनाव</strong><strong>  बसपा का वोट शेयर 22.2% था और उसको 19 सीटें मिली थीं। </strong><strong>2022 विधानसभा चुनाव में </strong><strong>  बसपा का वोट शेयर गिरकर 12.88% रह गया और उसे मात्र एक सीट ही विधानसभा चुनाव में मिली। </strong><span style="font-family:arial, verdana, geneva, helvetica, sans-serif;"><strong>2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी  का वोट शेयर 9.39% रहा, जो कि पिछले चुनावों की तुलना में काफी कम है। इस बार बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई । 2014 और 2019 में बसपा का वोट शेयर लगभग</strong></span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144237/bsp-is-not-able-to-handle-its-voters%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/6617acc956309-20240411-112631809-16x9.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>बहुजन समाज पार्टी  का वोट शेयर उत्तर प्रदेश में हाल के चुनावों में काफी घटा है। 2</strong><strong>017 के विधानसभा चुनाव</strong><strong> बसपा का वोट शेयर 22.2% था और उसको 19 सीटें मिली थीं। </strong><strong>2022 विधानसभा चुनाव में </strong><strong> बसपा का वोट शेयर गिरकर 12.88% रह गया और उसे मात्र एक सीट ही विधानसभा चुनाव में मिली। </strong><span style="font-family:arial, verdana, geneva, helvetica, sans-serif;"><strong>2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी  का वोट शेयर 9.39% रहा, जो कि पिछले चुनावों की तुलना में काफी कम है। इस बार बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई । 2014 और 2019 में बसपा का वोट शेयर लगभग 19% के आसपास था, लेकिन 2024 में यह 10.38% तक गिर गया, जिससे पार्टी की स्थिति और भी कमजोर हो गई है </strong></span><strong>बसपा की प्रमुख मायावती का वोट बैंक, विशेषकर जाटव और अन्य दलित समुदायों के बीच, धीरे-धीरे खिसक रहा है। 2024 के चुनावों में यह साफ दिखाई दिया कि बसपा का जनाधार कमजोर हो चुका है, और पार्टी को अपनी रणनीति पर गंभीरता से विचार करना पड़  रहा है क्योंकि उसे आगामी चुनावों में अपनी स्थिति को सुधारना  है। </strong><strong>इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि 2017 से 2022 के बीच बसपा का वोट शेयर लगभग 10% कम हो गया है। इस गिरावट ने बसपा की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया है, जिससे पार्टी को अपने पुराने जनाधार को फिर से प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। </strong></p>
<p dir="ltr">बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एससी-एसटी आरक्षण के वर्गीकरण और क्रीमीलेयर पर सपा, कांग्रेस, इंडिया गठबंधन और भाजपा पर भी निशाना साधा है। बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पिछले दिनों यह स्पष्ट कह दिया था कि वह अब सबसे ज्यादा अपना ध्यान अपने कोर वोट यानि कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति पर ही देंगी। कुछ ही दिनों में कई सारे ट्वीट करते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा है कि सपा और कांग्रेस एससी-एसटी आरक्षण के समर्थन में तो अपने स्वार्थ व मजबूरी में बोलते हैं। लेकिन दोनों ही पार्टियां सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह इनकी आरक्षण विरोधी सोच है। मायावती ने यह आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस दोनों का ही चरित्र एससी-एसटी विरोधी रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जनता की भावना को देखते हुए केंद्र सरकार ने कोई भी क़दम नहीं उठाया है।</p>
<p dir="ltr">मायावती ने यह भी कहा है कि "भाजपा का एससी-एसटी आरक्षण विरोधी रवैया पूरी ताक़त के साथ बरक़रार है और इस मामले में इंडिया गठबंधन की चुप्पी भी उतनी ही घातक है। "मायावती और उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी  का उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। खासकर दलितों के बीच उनकी पकड़ मजबूत रही है। लेकिन पिछले कुछ सालों में बसपा के जनाधार में गिरावट आई है। यह गिरावट कई कारणों से हो रही है, और मायावती अपनी पार्टी को उसी पुरानी ताकत के साथ खड़ा करने में संघर्ष करतीं नजर आ रही हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि पिछले कुछ चुनावों ने दूसरी पार्टियों ने बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाई है और यही कारण है कि बसपा आज एससी-एसटी आरक्षण मामले में इंडिया गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी दोनों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही है।</p>
<p dir="ltr">दूसरी पार्टियों का उभरने के कारण विशेष कर उत्तर प्रदेश में बसपा शिखर से शून्य पर पहुंच गई है। इसका एक बहुत बड़ा कारण यह भी है कि एक तो पिछले लोकसभा चुनाव को बहुजन समाज पार्टी ने गंभीरता से नहीं लड़ा और दूसरा कारण यह है कि देश में अब गठबंधन की राजनीति चल रही है जो कि काफी असरकारक है। भारतीय जनता पार्टी जैसी बड़ी पार्टी उत्तर प्रदेश में छोटे छोटे दलों से गठबंधन किये हुए है।उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी  और भारतीय जनता पार्टी  ने अपने जनाधार को बढ़ाया है। बीजेपी ने दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति बनाई, जिससे  का परंपरागत वोट बैंक कमजोर हुआ है। नेतृत्व की कमी और पार्टी के भीतर असंतोष भी एक बहुत बड़ा कारण है पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता बसपा से जा चुके हैं ।</p>
<p dir="ltr">मायावती की पार्टी में कई वरिष्ठ नेता  छोड़ चुके हैं या निष्क्रिय हो चुके हैं। यह नेतृत्व की कमी और पार्टी के भीतर असंतोष का संकेत है, जिससे पार्टी का संगठन कमजोर हुआ है। युवा वोटरों के बीच आकर्षण की कमी भी बसपा में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।  बसपा को युवाओं के बीच वह समर्थन नहीं मिल रहा जो कभी उसे मिलता था। इसके पीछे पार्टी की पुरानी शैली की राजनीति और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर उचित ध्यान न देना हो सकता है। मायावती की व्यक्तिगत छवि को भी विपक्षी दलों ने रोक दिया है। लेकिन आज भी पुराने लोग मायावती के शासन की तारीफ करते हैं। मायावती की छवि एक सख्त और अनुशासनप्रिय नेता की है, लेकिन यह छवि अब उनके विरोधियों द्वारा "संवेदनहीन" और "अभिजात्य" के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। इसका भी असर उनके जनाधार पर पड़ा है।</p>
<p dir="ltr">जातिगत समीकरण में बदलाव एक बहुत बड़ी वजह मानी जा रही है  उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरणों में बदलाव हो रहा है। जहां एक समय में दलित वोट बैंक पूरी तरह बसपा के साथ था, वहीं अब इस वर्ग में भी अन्य दलों के प्रति झुकाव देखने को मिल रहा है। संघर्ष और आंदोलन की कमी भी पार्टी में साफ दिखाई दे रही है।  बसपा ने पहले आंदोलन और संघर्ष के माध्यम से दलितों के मुद्दों को प्रमुखता दी थी। पर अब पार्टी इस तरह के आंदोलनों में उतनी सक्रिय नहीं दिखती। इससे भी पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है।   मायावती के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी पुरानी रणनीतियों को नए सिरे से परखें और समय के साथ कदमताल मिलाते हुए अपने संगठन और जनाधार को फिर से मजबूत करें। खासकर युवाओं और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के साथ नए सिरे से संवाद स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा।</p>
<p dir="ltr">इस स्थिति को बदलने के लिए मायावती को नए नेतृत्व और नई रणनीतियों के साथ आगे आना होगा। पार्टी को खुद को एक बार फिर से मजबूत और प्रासंगिक बनाने के लिए संगठनात्मक ढांचे में सुधार और नए सिरे से जनाधार को खींचने के प्रयास करने होंगे। मुलायम सिंह यादव ने समय रहते अखिलेश यादव को आगे कर दिया था। और आज अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में 37 लोकसभा सीट जीतकर मुलायम सिंह यादव को भी पीछे छोड़ दिया है। इसी तरह मायावती को भी आकाश आनंद को आगे लाना होगा। क्यों कि आकाश आनंद में वो तेवर, संघर्ष की झलक दिखाई देती है जो बसपा को पुनर्जीवित कर सकती है। आकाश आनंद युवा पीढ़ी को बसपा के साथ ला सकते हैं।</p>
<p dir="ltr"><strong>जितेन्द्र</strong> <strong>सिंह</strong> <strong>पत्रकार</strong> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Aug 2024 16:55:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अयोध्या रेप केस मामले में सियासत गरमाई, अखिलेश यादव ने मांग की DNA टेस्ट की, मायावती भड़कीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>अयोध्या रेप केस मामले में सियासत तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने डीएनए टेस्ट की मांग कर दी। वहीं, अखिलेश के इस मांग पर मायावती भड़क गई हैं। अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट में लिखा कि कुकृत्य के मामले में जिन पर भी आरोप लगा है उनका DNA TEST कराकर इंसाफ़ का रास्ता निकाला जाए न कि केवल आरोप लगाकर सियासत की जाए। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी हो उसे क़ानून के हिसाब से पूरी सज़ा दी जाए, लेकिन अगर DNA TEST के बाद आरोप झूठे साबित हों तो सरकार के संलिप्त अधिकारियों को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143781/politics-heats-up-in-ayodhya-rape-case-akhilesh-yadav-demands"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/अयोध्या-रेप-केस-मामले-में-सियासत-गरमाई,-अखिलेश-यादव-ने-मांग-की-dna-टेस्ट-की,-मायावती-भड़कीं.png" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p>अयोध्या रेप केस मामले में सियासत तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने डीएनए टेस्ट की मांग कर दी। वहीं, अखिलेश के इस मांग पर मायावती भड़क गई हैं। अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट में लिखा कि कुकृत्य के मामले में जिन पर भी आरोप लगा है उनका DNA TEST कराकर इंसाफ़ का रास्ता निकाला जाए न कि केवल आरोप लगाकर सियासत की जाए। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी हो उसे क़ानून के हिसाब से पूरी सज़ा दी जाए, लेकिन अगर DNA TEST के बाद आरोप झूठे साबित हों तो सरकार के संलिप्त अधिकारियों को भी न बख्शा जाए। यही न्याय की माँग है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने एक्स पर कहा, ''मैंने अयोध्या जिले के बीकापुर निर्वाचन क्षेत्र के विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान के साथ अयोध्या के पीड़ित परिवार के सदस्यों से मुलाकात की।'' उन्होंने मुलाकात की एक तस्वीर साझा की, जिसमें परिवार के सदस्यों के चेहरे धुंधले थे। उन्होंने हिंदी में पोस्ट किया, "दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, (और) उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हम लड़की को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" </p>
<p>वहीं, मायावती ने लिखा कि यूपी सरकार द्वारा अयोध्या गैंगरेप केस में आरोपी के विरुद्ध की जा रही सख्त कार्रवाई उचित, लेकिन सपा द्वारा यह कहना कि आरोपी का DNA टेस्ट होना चाहिये, इसे क्या समझा जाए। जबकि सपा को यह भी बताना चाहिए कि उनकी सरकार में ऐसे आरोपियों के खिलाफ कितने DNA टेस्ट हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि साथ ही, यूपी में अपराध नियंत्रण व कानून-व्यवस्था में भी ख़ासकर महिला सुरक्षा व उत्पीड़न आदि को लेकर बढ़ती चिन्ताओं के बीच अयोध्या व लखनऊ आदि की घटनाएं अति-दुखद व चिन्तित करने वाली। सरकार इनके निवारण के लिए जाति-बिरादरी एवं राजनीति से ऊपर उठकर सख़्त कदम उठाए तो बेहतर। </p>
<p>राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद और यूपी सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप के नेतृत्व में भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल 12 वर्षीय लड़की के परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए रविवार को अयोध्या पहुंचेगा, जिसके साथ समाजवादी पार्टी के एक सदस्य सहित दो लोगों द्वारा कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। वे पूरे मामले की रिपोर्ट भी पार्टी नेतृत्व को सौंपेंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। </p>
<p><strong>मायावती ने सपा पर उठाया सवाल</strong><br />बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा यूपी सरकार के द्वारा अयोध्या गैंगरेप केस में आरोपी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करना बिल्कुल सही है. सपा का यह कहना कि आरोपी का DNA टेस्ट होना चाहिए, इससे क्या समझा जाए. सपा को यह भी बताना चाहिए कि उनकी सरकार जब यूपी में थी तो ऐसे आरोपियों के खिलाफ कितने DNA टेस्ट हुए थे . इसके साथ ही उन्होंने यूपी में अपराध नियंत्रण व कानून-व्यवस्था में अपनी चिंता व्यक्त की औक कहा कि सरकार इनके निवारण के लिए जाति-बिरादरी और राजनीति से ऊपर उठकर सख्त कदम उठाए तो बेहतर होगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Aug 2024 17:09:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>वर्तमान में अपने आप से ही लड़ रही है बसपा </title>
                                    <description><![CDATA[<div>बहुजन समाज पार्टी एक ऐसी पार्टी थी जिसके लिए कहा जाता था कि दुनिया उलट पलट हो जाए लेकिन बसपा का कोर वोट कहीं और नहीं जा सकता। लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में बसपा की जो दुर्गति हुई है वह शायद पहले कभी नहीं हुई। पिछले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव बसपा ने अकेले दम पर लड़ा और केवल एक प्रत्याशी जीता। वर्तमान में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में बसपा ने सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए लेकिन उनको सफलता नहीं मिली और वह न सिर्फ शून्य पर सिमट गई बल्कि उनका वोट प्रतिशत भी एक दम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142952/currently-bsp-is-fighting-with-itself%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/mayawati-bsp-sixteen_nine.jpg" alt=""></a><br /><div>बहुजन समाज पार्टी एक ऐसी पार्टी थी जिसके लिए कहा जाता था कि दुनिया उलट पलट हो जाए लेकिन बसपा का कोर वोट कहीं और नहीं जा सकता। लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में बसपा की जो दुर्गति हुई है वह शायद पहले कभी नहीं हुई। पिछले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव बसपा ने अकेले दम पर लड़ा और केवल एक प्रत्याशी जीता। वर्तमान में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में बसपा ने सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए लेकिन उनको सफलता नहीं मिली और वह न सिर्फ शून्य पर सिमट गई बल्कि उनका वोट प्रतिशत भी एक दम नीचे आ गया। मायावती ने हमेशा आक्रामक राजनीति की है और वह जो निर्णय ले लेती हैं उससे पीछे नहीं हटती। लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव में ऐसा क्या हो गया था कि मानो बसपा जबरदस्ती से चुनाव लड़ रही है उसका चुनाव लड़ने का मन नहीं है। लोकसभा चुनाव के प्रारंभ में बसपा ने अपने भतीजे आकाश आनंद का प्रजेंटेशन किया था उन्हें अपना उत्तराधिकारी भी घोषित किया था। आकाश आनंद ने भी राजनीतिक शुरुआत अपनी बुआ के पदचिन्हों पर की थी वही तेवर वही दलितों के हक में बोलना वही सरकार को कटघरे में खड़ा करना। लेकिन वह सरकार के विरोध में कुछ ज्यादा ही बोल गए। नतीजा यह हुआ कि भाजपा कार्यकर्ताओं की तरफ से उन पर एफआईआर दर्ज करा दी गई। मायावती ने तुरंत ही आकाश आनंद से पार्टी के सभी अधिकार वापस ले लिया और तब मामला रफा-दफा हुआ।  मायावती नहीं चाहतीं थीं कि वह अपने राजनैतिक कैरियर की शुरुआत में ही किसी पचड़े में पड़ जाएं। फिलहाल लोकसभा चुनाव के बाद आकाश आनंद की पुनः वापसी हो चुकी है उनके पद बहाल कर दिए गए हैं।</div>
<div>                 </div>
<div>मायावती के शासन काल को कौन नहीं जानता अफसरों की जिस तरह वो क्लास लगातीं थीं लोग आज तक उसको याद करते हैं। उनके एक निरीक्षण में दर्जन भर अधिकारी सस्पेंड हो जाते थे प्रशासनिक अधिकारी इतने खौफ में थे कि प्रशासन बहुत ही अच्छी तरह से चल रहा था। लेकिन अब ऐसा लगता है कि मायावती का वोटर ही मायावती के कब्जे में नहीं है। और यही कारण है कि उनका ग्राफ लगातार नीचे आता चला आ रहा है। उत्तर प्रदेश की सत्ता पर चार बार काबिज रहने वाली मायावती आज एक एक सीट के लिए संघर्ष करतीं दिखाई दे रहीं हैं। आज की स्थिति यह है कि लोकसभा में उनका रिप्रजेंटेशन नहीं है। और उत्तर प्रदेश विधानसभा सभा में भी नाम मात्र ही है। कौन भूल सकता है मायावती की सोशल इंजीनियरिंग को जिसने सपा भाजपा जैसी पार्टियों को परास्त करके पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उस समय उन्होंने दलित ब्रह्मण और मुस्लिम का एक प्रयोग किया था जो कि सफ़ल रहा था। लेकिन उसके बाद लगातार बहिन जी हांसिए पर आती चलीं गईं। पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी का समाजवादी पार्टी से गठबंधन था। उस गठबंधन के सहारे उन्होंने लोकसभा की दस सीटों पर कब्जा किया था जब कि समाजवादी पार्टी पांच की संख्या में सिमट कर रह गई थी। इसके बाद मायावती ने यह कहकर गठबंधन तोड़ दिया था कि समाजवादी पार्टी अपना वोट बसपा को ट्रांसफर कराने में नाकामयाब रही जिससे बहुजन समाज पार्टी का नुक़सान हुआ इस लिए हम यह गठबंधन समाप्त कर रहे हैं। जब कि हुआ इसका उल्टा था। उस चुनाव में बसपा का वोट सपा में ट्रांसफर नहीं हो सका था और इसीलिए समाजवादी पार्टी केवल पांच सीटों पर सिमट कर रह गई थी।</div>
<div> </div>
<div>एक समय था कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम अपनी एक विजय के लिए जद्दोजहद कर रहे थे लेकिन वह शोषित और वंचित समाज की लड़ाई लड़ रहे थे इसलिए मुलायम सिंह यादव ने उन्हें इटावा से चुनाव लड़वाया और वह चुनाव जीत गए। इस चुनाव में उन्होंने अपने प्रत्याशी रामसिंह शाक्य को बैठा दिया था जिससे रामसिंह शाक्य नाराज भी हो गए थे और उन्होंने समाजवादी पार्टी से त्यागपत्र दे दिया था। कांशीराम के बाद जैसे ही बसपा की बागडोर मायावती ने सम्हाली उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कई वर्षों तक सपा और बसपा की ही सरकारें बनतीं रहीं। भाजपा और कांग्रेस के लिए उस समय यहां कुछ भी नहीं था। लेकिन तभी भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर और हिंदुत्व का ऐसा मुद्दा पकड़ा जिससे पार पाना किसी के बस में नहीं था।‌ आज भी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रचंड बहुमत के साथ चल रही है। लेकिन अभी संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बाजी पलट दी है और प्रदेश में 80 में से 37 लोकसभा सीटें जीत कर। उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी के रुप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उत्तर प्रदेश में देखा जाए तो अब यहां सीधे सपा और भाजपा की आमने सामने की लड़ाई रह गई है। और मायावती अपना कोर वोट बचाने के लिए संघर्ष कर रहीं हैं। मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी ने कभी भी उपचुनाव नहीं लड़ा है और न ही उपचुनाव को कभी गंभीरता से लिया है। लेकिन इस बार वह पूरी तरह से तैयार होकर उत्तर प्रदेश के दस सीटों पर होने वाले लोकसभा उपचुनाव की तैयारियों में लग गईं हैं।</div>
<div> </div>
<div>मायावती ने कभी भी हालातों से समझौता नहीं किया। गेस्ट हाउस कांड के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी से हमेशा के लिए मुंह मोड़ लिया था। लेकिन जब कमान अखिलेश यादव के हाथ में आई तब उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया। इस गठबंधन को सपा को उस चुनाव में फायदा नहीं मिला लेकिन अभी हुए लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को दलित वोट भी बड़ी संख्या में मिला जो कि समाजवादी पार्टी को 37 सीटें जिताने में सहायक सिद्ध हुआ। मायावती अब केवल अपने दलित वोट को साधने में लगी हैं उन्होंने यह भी कह दिया है कि मुस्लिम समुदाय को अब वह काफी सोच समझ कर टिकट देंगी क्यों कि इससे पार्टी पर विपरीत असर पड़ रहा है। फिलहाल मायावती उत्तर प्रदेश के उप चुनाव और हरियाणा के विधानसभा चुनाव को लेकर व्यस्त हैं और हरियाणा में वह गठबंधन की तैयारी में हैं। बहुजन समाज पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी है लेकिन यदि हालात यही चलते रहे तो उनसे राष्ट्रीय पार्टी का तमगा छिन सकता है। बहुजन समाज पार्टी को हरियाणा के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में भी काफी वोट मिलता है और वहां उनके प्रत्याशी भी जीतते हैं। लेकिन आज मायावती की स्थिति किसी से छिपी नहीं है वह अपनी ही पार्टी का अस्तित्व बचाने में लगी हुई हैं।</div>
<div> </div>
<div> <strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jul 2024 16:02:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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                <title>बसपा का निरंतर घटता जा रहा है जनाधार </title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारतीय राजनीति में बहुजन समाज पार्टी देश की उन गिनी-चुनी पार्टियों में से एक है जिन्हे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल है। वर्तमान में बसपा की अध्यक्ष मायावती हैं। मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। बसपा  के मुख्य वोट बैंक में पिछड़ा वर्ग, अनसूचित जाति, अनसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक शामिल हैं। पार्टी के अनुसार उसकी विचारधारा भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी दर्शन के साथ ही बौद्ध दर्शन से प्रेरित है। पार्टी का गठन  14 अप्रैल 1984 को दलितों के करिश्माई नेता कांशीराम ने किया था। बसपा का चुनाव चिन्ह हाथी है और इस पार्टी का मुख्य रंग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141572/bsps-support-base-is-continuously-decreasing%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/gdfg.jpg" alt=""></a><br /><div>भारतीय राजनीति में बहुजन समाज पार्टी देश की उन गिनी-चुनी पार्टियों में से एक है जिन्हे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल है। वर्तमान में बसपा की अध्यक्ष मायावती हैं। मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। बसपा  के मुख्य वोट बैंक में पिछड़ा वर्ग, अनसूचित जाति, अनसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक शामिल हैं। पार्टी के अनुसार उसकी विचारधारा भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी दर्शन के साथ ही बौद्ध दर्शन से प्रेरित है। पार्टी का गठन  14 अप्रैल 1984 को दलितों के करिश्माई नेता कांशीराम ने किया था। बसपा का चुनाव चिन्ह हाथी है और इस पार्टी का मुख्य रंग नीला है। 13वीं लोकसभा में पार्टी के 14 सदस्य थे, 14वीं में 17 और 15वीं लोकसभा में 21 थे।</div>
<div> </div>
<div>बसपा का 16वीं लोकसभा के लिए इसका कोई उम्मीदवार नहीं जीत पाया था परन्तु मौजूदा लोकसभा यानि 17वीं लोकसभा में बसपा के 10 उम्मीदवार जीतकर संसद पहुंचे। राज्यस्तर की बात करें तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पंजाब, हरियाणा की विधानसभाओं में इसके सदस्य हैं। वैसे बसपा का मुख्य आधार वाला राज्य उत्तर प्रदेश है इसके बावजूद उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय पार्टी का केवल एक विधायक है। समय के साथ बसपा दलित, पिछड़े मतदाताओं के बीच अपने घटते जनाधार को रोकने में विफल रही और इसका फायदा बीजेपी को मिला जिसने बसपा की सियासी जमीन को हथिया लिया। इसके अलावा पार्टी ने धीरे-धीरे कई अन्य समूहों के बीच भी अपना समर्थन खो दिया।</div>
<div> </div>
<div>पिछले लोकसभा चुनावों में कुर्मी, कोइरी, राजभर, निषाद आदि जैसी कई पिछड़ी जातियां और मुसलमानों की दलित जातियां जो बड़ी संख्या में बसपा के पक्ष में आई थीं वो अब उसके पाले से छिटक गईं है। यदि उत्तर प्रदेश विधानसभा की बात करें तों बसपा ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2007 विधानसभा चुनाव में दिया। 2007 के विधान सभा चुनावों में बीएसपी ने उत्तर प्रदेश में कुल 403 सीटों में से 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी। ये माना जाता है कि इस चुनाव में बीएसपी की जीत की एक बड़ी वजह वो सोशल इंजीनियरिंग थी जिसके तहत पार्टी ब्राह्मण वोटरों को अपनी तरफ खींचने में कामयाब रही थी। उसके बाद के चुनावों में बसपा के वोटो में निरंतर गिरावट आई।</div>
<div> </div>
<div>2007 में पार्टी 310 सीटों पर या तो जीती या उपविजेता रही और यह संख्या 2012 में मामूली गिरावट के साथ 289 सीटों पर आ गई जिसमें 80 सीट वो जीती परन्तु 2017 के चुनावों में यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई जब बसपा सिर्फ 19 सीटों पर जीती और केवल 119 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। 2022 में तो बसपा का यूपी में लगभग पूर्ण सफाया हो गया वो मात्र 1 सीट ही जीत पाई।  2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों के बीच बसपा का वोट बैंक बड़ी तेजी से उसके पाले से खिसक पहले सपा फिर भाजपा के पाले में चला गया। बीएसपी को साल 2007 के विधानसभा चुनाव में 30.43 प्रतिशत वोट मिले थे, 2012 में यह आंकड़ा गिरकर 25.91 प्रतिशत और 2017 में 22.23 प्रतिशत हो गया था।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन 2022 में पार्टी को उत्तर प्रदेश में मिलने वाले वोट प्रतिशत में जबरदस्त गिरावट आई थी और यह गिरकर 12.8 प्रतिशत पर पहुंच गया था। 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनावों में इसे राज्य में 20 प्रतिशत से कुछ अधिक वोट मिले। 2019 में बसपा ने लोकसभा चुनावों के लिए सपा से गठबंधन किया और 19 प्रतिशत वोट पा उत्तर प्रदेश में 10 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही परन्तु इन चुनावों में यह साफ हो गया था कि पार्टी अपने बलबूते चुनाव नही जीत सकती थी। बसपा को इस चुनाव में सपा के आधार का भरपूर सहारा मिला और वो जीती। यदि हम यहां बसपा के घटते जनाधार की बात करे तो बेशक 2007 अगडे-पिछडे का गणित बैठा उसे सीटें मिली पर बसपा की राजनीतिक प्रचार की शैली पूरी तरह से जाति की पहचान के इर्द-गिर्द केंद्रित रही।</div>
<div> </div>
<div>जिसके केंद्र में दलित वोटर थे जिससे सवर्ण जाति का उनसे मोहभंग जल्द हो गया। पिछले कुछ वर्षों के दौरान दलितों के बीच एक नया वर्ग उभरा है। जो आधुनिक सोच के साथ-साथ महत्वकांक्षी भी है। जो दलित युवा वर्ग है वो अन्य वर्गों की राजनीति की शैली को अधिक पसंद कर रहा है। वो अपनी पिछड़ी जाति की पहचान पर गर्व करता हैं, आर्थिक बदलाव की बात करता है। इसके अलावा बसपा जिस वर्ग के मुद्दों की राजनीति करती है। उन वर्गों के मुद्दे का झण्डा थाम और बहुत से छोटे राजनीतिक दल मैदान में उतर चुके हैं। जो विशुद्ध तौर पर दलितों के मुद्दों पर राजनीति कर रहे हैं। बसपा के आधार खोने का अन्य बड़े कारणों में भ्रष्टाचार के मामले, सत्ता के केंद्रीकरण और बसपा के वैचारिक संदेश के कमजोर होने के कारण मायावती की छवि धूमिल होना है।</div>
<div> </div>
<div>इसके अलावा बसपा या कहें मायावती ने अपनी संगठनात्मक मशीनरी को फिर से विकसित करने, नेतृत्व की दूसरी पंक्ति को प्रोत्साहित करने या एक विश्वसनीय राजनीतिक संदेश देने का कोई गंभीर प्रयास कभी नहीं किया है। हालांकि इसमें दोराय नही कि मायावती के नेतृत्व में पार्टी का इतना ज्यादा और इतना जल्दी विस्तार हुआ जिसकी कल्पना शायद पार्टी संस्थापक कांशीराम द्वारा भी नही की गई होगी परन्तु सत्ता की दौड में अव्वल रहने की चाह ने पार्टी को नुकसान भी पहुंचाया। बसपा ने खुद को एक सामाजिक आंदोलन से राजनीतिक पार्टी में बदल दिया। बसपा ने धीरे-धीरे खुद को एक सिद्धांतहीन राजनेताओं के एक समूह में बदल लिया। जो सत्ता के लिए किसी भी जाति और दल के साथ जा सकते हैं। जिस बसपा को दलित नायक कांशीराम ने बहुजन आंदोलन कह कर खड़ा किया था वो पार्टी अब वंशवाद की दलदल में धंस चुकी है।</div>
<div> </div>
<div>बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया है। जो अब पार्टी के अभियान का सबसे प्रमुख चेहरा बन चुका है। बसपा के अधिकांश शीर्ष नेताओं ने या तो पार्टी छोड़ दी है या उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। उत्तर प्रदेश में 2024 के चुनाव अभियान में बसपा की ओर से पूरी तरह आंनद ही छाए रहे हैं बाकि सब चेहरे साइडलाइन कर दिए गए हैं। मायावती के समर्थकों और विरोधियों के बीच यह भी चर्चा गर्म है कि मायावती काफी दबाव में हैं क्योंकि उन्हें कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य केंद्र सरकार एजेंसियों की कार्यवाई का डर है। इसी कारण से वो आईएनडीआईए गठबंधन में भी शामिल नही हुई</div>
<div><strong>नीरज शर्मा'भरथल'</strong></div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 17:01:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मायावती ने जन सभा को  किया संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[बसपा के लोकसभा प्रत्याशी मनीष त्रिपाठी ने हाथी का चिन्ह देकर मायावती से भेंट किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141543/mayawati-addressed-the-public-meeting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/6.....,,,.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>हलिया।</strong>  मड़िहान तहसील इलाके के देवरी गांव में आयोजित जनसभा में पहुंची बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बसपा सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने विरोधी दलों के बहकावे में न आने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के शासनकाल में अपर कास्ट ब्राह्मण समाज का उत्पीड़न किया जा रहा है। विभिन्न पार्टियां किस्म किस्म के हथकंडे अपना रही है। साम, दाम, दंड व भेद अपना कर सत्ता हथियाने में लगी है। कहा कि विरोधी पार्टी हवा बनाने के लिए मीडिया सर्वे, ओपिनियन पोल का सहारा ले रहे हैं  पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि विभिन्न पार्टियों के जारी किए गए हवा हवाई सर्वे और वादों के भ्रम में न आये।</div>
<div> </div>
<div>कहा कि यह पार्टिया चुनावी घोषणा पत्र तो जारी करती हैं पर उन पर काम नही करती। कहा कि चुनाव जीतने के बाद इनके वादों पर काम नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी कोई घोषणा पत्र जारी नहीं करती। हम कहने में नहीं करने में बसपा विश्वास करती है । जिसका नकल कुछ पार्टियों करते हैं। उन्होंने कहां की गरीबों को कुछ राशन दिया जा रहा है। जिससे उनका स्थाई रूप से भला होने वाला नहीं है। मुफ्त राशन की आड़ में वोट लेने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि राशन सरकार अपनी जेब से नहीं दे रही है। वह आपके टैक्स से राशन दिया जा रहा है। इसमें भाजपा व आरएसएस की कोई भूमिका नहीं है कहा कि गरीबी को दूर करने के लिए हर हाथ को कम देने का काम बसपा ने अपने चार बार के कार्यकाल में किया है।</div>
<div> </div>
<div>काफी वर्षों से बढ़ रही बेरोजगारी व महंगाई से जनता परेशान है। धर्म की आड़ में मुस्लिम समाज का शोषण व उत्पीड़न किया जा रहा है । जिसे बसपा की सरकार केंद्र में आने के बाद उसे रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि अन्य सरकारों की तरह समाज के लोगों को भत्ता न देकर रोजी-रोटी दिलाने का काम किया जाएगा उन्होंने समाज के लोगों को जारी हवा हवाई घोषणा पत्रों के भ्रम में नहीं आने को कहा। उन्होंने कहा कि हर हाल में विपक्षी पार्टियों को सत्ता में आने से रोकना है। जिन्हें वर्षों से आप आजमा चुके हैं। उन्होंने कहा कि बसपा केंद्र की सरकार में आती है तो पूरे देश में सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की भावना के साथ काम किया जाएगा। क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>सबके हितों का भी ध्यान रखा जाएगा। सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने महापुरुषों का नाम लेते हुए कहा कि उनके सपनों को पूरा करने का काम बसपा कर रही है । उन्होंने वोट वाले दिन बसपा के प्रत्याशियों को हाथी के सामने लगे बटन को दबाने का आह्वान किया। इस मीरजापुर लोकसभा प्रत्याशी मनीष त्रिपाठी, भदोही लोकसभा प्रत्याशी हरि शंकर सिंह और राबर्ट्सगंज सोनभद्र के प्रत्याशी धनेश्वर गौतम के समर्थन में वोट मांगा। बसपा के तमाम कार्यकर्ता मौजूद रहे।</div>
<div> </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 May 2024 17:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बसपा सुप्रीमो मायावती ने की चुनावी जनसभा।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती सोमवार को लखनऊ में जनसभा करने उतरीं। राजधानी के कल्ली पश्चिम मैदान में उन्होंने लखनऊ लोकसभा सीट से प्रत्याशी सरवर मलिक, मोहनलालगंज लोकसभा सीट से प्रत्याशी राजेश कुमार उर्फ मनोज प्रधान और रायबरेली से ठाकुर प्रसाद यादव के पक्ष में कार्यकर्ताओं से मतदान करने की अपील की। मायावती की रैली में लखनऊ और रायबरेली मंडल के कार्यकर्ता जुटे. बीएसपी मुखिया ने लखनऊ लोकसभा सीट से प्रत्याशी सरवर मलिक, मोहनलालगंज लोकसभा सीट से प्रत्याशी राजेश वर्मा उर्फ मनोज प्रधान, रायबरेली लोकसभा सीट से प्रत्याशी ठाकुर प्रसाद यादव, अमेठी लोकसभा सीट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141281/bsp-supremo-mayawati-held-an-election-public-meeting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/img_20240513_133658_654.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती सोमवार को लखनऊ में जनसभा करने उतरीं। राजधानी के कल्ली पश्चिम मैदान में उन्होंने लखनऊ लोकसभा सीट से प्रत्याशी सरवर मलिक, मोहनलालगंज लोकसभा सीट से प्रत्याशी राजेश कुमार उर्फ मनोज प्रधान और रायबरेली से ठाकुर प्रसाद यादव के पक्ष में कार्यकर्ताओं से मतदान करने की अपील की। मायावती की रैली में लखनऊ और रायबरेली मंडल के कार्यकर्ता जुटे. बीएसपी मुखिया ने लखनऊ लोकसभा सीट से प्रत्याशी सरवर मलिक, मोहनलालगंज लोकसभा सीट से प्रत्याशी राजेश वर्मा उर्फ मनोज प्रधान, रायबरेली लोकसभा सीट से प्रत्याशी ठाकुर प्रसाद यादव, अमेठी लोकसभा सीट से प्रत्याशी नन्हे सिंह चौहान और लखनऊ पूर्वी विधानसभा सीट से प्रत्याशी आलोक कुशवाहा के समर्थन में वोट करने की अपील की। बीएसपी मुखिया ने भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जमकर प्रहार किया।</div>
<div> </div>
<div>मुफ्त राशन को लेकर जनता को लुभा रही भारतीय जनता पार्टी से जनता को आगे किया कि यह राशन बीजेपी और आरएसएस का नहीं है। आपके टैक्स के पैसे का है इसलिए इस बहकावे में न आएं। अपनी तरफ से कार्यकर्ताओं में जोश भरने में उन्होंने कोई कमी नहीं छोड़ी। मंच से कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में मुझे सुनने के लिए आप इकट्ठा हुए मैं आप सभी का हार्दिक आभार प्रकट करती हूं। हमारी पार्टी बीजेपी, कांग्रेस, सपा या अन्य किसी भी विरोधी पार्टी से मिलकर चुनाव नहीं लड़ रही है, बल्कि अपने बलबूते पर ही चुनाव मैदान में है। मायावती ने कहा कि हमने चुनाव में सर्व समाज को उचित भागीदारी है। हमारे सभी कार्यकर्ता चुनाव में जी जान से लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी भी कांग्रेस की जातिवादी पूंजीवादी नीतियों पर ही चल रही है। कांग्रेस, बीजेपी और उनके अन्य सभी सहयोगी दलों के बारे में कहा कि आजादी के बाद केंद्र व देश के काफी राज्यों में भी ज्यादातर सत्ता कांग्रेस पार्टी के ही हाथों में रही है।</div>
<div> </div>
<div>गलत कार्यों की वजह से ही कांग्रेस को केंद्र समेत अन्य राज्यों में भी सत्ता से बाहर होना पड़ा है। हमारी रैलियों में जिस तरह से भीड़ जुट रही है उससे मुझे पूरी उम्मीद है कि बहुजन समाज पार्टी के हक में परिणाम आएंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हवा हवाई और कागजी गारंटी दे रही है। उनकी अभी तक कोई गारंटी धरातल पर पूरी नहीं हुई है। इस बार भारतीय जनता पार्टी भी केंद्र की सत्ता में आसानी से वापस आने वाली नहीं है। यह चुनाव इस बार अगर फेयर होता है तो अब इनके जुमले में देश की जनता आने वाली नहीं है। इन्हें अच्छे से समझ चुकी है। बसपा सुप्रीमो ने ईवीएम पर सवाल खड़े किए हैं। मायावती ने कहा कि बसपा जो संगठन चलाती है, चुनाव लड़ती है वह धन्नासेठों से पैसा लेकर कार्य नहीं करती है बल्कि अपनी पार्टी के ही कार्यकर्ताओं से पार्टी के ही सभी छोटे बड़े कार्यकर्ताओं से थोड़ा-थोड़ा धन इकट्ठा करके मेंबरशिप के जरिए चुनाव में थोड़ा-थोड़ा चंदा इकट्ठा करके हम संगठन चलाते हैं।</div>
<div> </div>
<div>चुनाव भी लड़ते हैं, लेकिन दूसरी पार्टियों की तरह हम लोग बड़े-बड़े पूंजीपतियों से कोई पैसा नहीं लेते हैं। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने इलेक्टोरल बांड से पैसा लिया है। सिर्फ बहुजन समाज पार्टी ही ऐसी पार्टी है जिसने किसी से पैसा नहीं लिया है। भाजपा, कांग्रेस चुनाव में पानी की तरह पैसा बहा रही है। पूंजीपति और धन्नासेठों को ही मालामाल और धनवान बनने में और हर स्तर पर छूट देने में और बढ़ाने में भारतीय जनता पार्टी लगी रही है। मायावती ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही हो या भारतीय जनता पार्टी की, सभी ने सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया है। बहुजन समाज पार्टी की चार बार सरकार रही और हमारी पार्टी ने किसानों नौजवानों गरीबों मजबूरों का पूरा ख्याल रखा है। अन्य किसी पार्टी ने सभी वर्गों का उत्थान नहीं किया है। बहुजन समाज पार्टी ने ही सभी जाति धर्म और वर्गों का उत्थान किया है। आरक्षण देने की कोई पार्टी बात न करे आरक्षण हमें डॉ0 भीमराव अंबेडकर ने दिया है।</div>
<div> </div>
<div>समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जब यूपी में सपा की सरकार थी तब अखिलेश यादव ने एससी/एसटी के पदोन्नति में आरक्षण बिल्कुल खत्म कर दिया। बीएसपी ने उस विधायक का विरोध किया था लेकिन अंदर-अंदर ही भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी मिल गई और इस विधेयक को पास करा लिया। उन्होंने कहा कि हमें सभी से सावधान रहना है। मीडिया में जो सर्वे दिखाए जा रहे हैं उनके बहकावे में बिल्कुल नहीं आना है। उन्होंने कहा कि देश में हो रहे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, बीजेपी और उनके अन्य सहयोगियों को केंद्र की सत्ता में आने से रोकना है। उन्होंने कहा कि जब पार्टियां पावर में रहती हैं तो गरीबों का ख्याल नहीं करती हैं, लेकिन जब सत्ता से बाहर होती हैं तो इन सभी वर्गों का ख्याल आने लगता है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व की आड़ में हो रही राजनीति चरम सीमा पर पहुंच चुकी है. अपर कास्ट समाज की स्थिति खास अच्छी नहीं बची है. गलत कृषि नीतियों के कारण किसान आंदोलित ही रहता है.</div>
<div> </div>
<div>आर्थिक नीतियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका काफी बुरा प्रभाव पड़ा है. गरीबों को फ्री में राशन देने पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि थोड़ा सा फ्री में राशन देने से गरीबों का काम नहीं चलता। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि अवध क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से डिमांड रही है कि अवध को अलग से राज्य बनाया जाए. हमारी सरकार आएगी तो अवध क्षेत्र को अलग राज्य बनाएंगे। इसमें लखनऊ भी आ जाएगा. हमने सभी को रोजी-रोटी के साधन उपलब्ध कराए थे। हमने अपनी सरकार में लखनऊ में बहुत विकास किया था। नई सड़क, नई जेल बनवाई, नए बड़े पार्क बनवाए। अब देश-विदेश से लोग आते हैं तो सबसे पहले यहां का विकास देखकर ही खुश हो जाते हैं। कानपुर में बसपा सुप्रीमो मायावती बोलीं- भाजपा के लोग विकास के नाम पर करते हैं केवल जुमलेबाजी-लोकसभा चुनाव 2024 में।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 16:24:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मायावती को इतना शांत कभी नहीं देखा</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div>देश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाली बहुजन समाज पार्टी की मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को पहले कभी इतना शांत नहीं देखा गया जितनी कि वो इस बार के लोकसभा चुनावों में हैं। सभी पार्टियों ने मतदान पूर्व की सारी प्रक्रियाएं लगभग पूर्ण कर लीं हैं। या फिर पूर्ण होने को हैं। तैयारियों में बहुजन समाज पार्टी भी लगी है लेकिन जिस तरह से शांत रहकर बहुजन समाज पार्टी काम कर रही है वह एक अलग तरह की रणनीति में दिखाई दे रही हैं। हालांकि बहुजन समाज पार्टी ने भी अपने स्टार प्रचारकों की घोषणा कर दी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140127/never-seen-mayawati-so-calm"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-04/mayawati.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div>देश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाली बहुजन समाज पार्टी की मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को पहले कभी इतना शांत नहीं देखा गया जितनी कि वो इस बार के लोकसभा चुनावों में हैं। सभी पार्टियों ने मतदान पूर्व की सारी प्रक्रियाएं लगभग पूर्ण कर लीं हैं। या फिर पूर्ण होने को हैं। तैयारियों में बहुजन समाज पार्टी भी लगी है लेकिन जिस तरह से शांत रहकर बहुजन समाज पार्टी काम कर रही है वह एक अलग तरह की रणनीति में दिखाई दे रही हैं। हालांकि बहुजन समाज पार्टी ने भी अपने स्टार प्रचारकों की घोषणा कर दी है लेकिन सब जानते हैं कि बहुजन समाज पार्टी में मायावती से बढ़कर कोई बड़ा स्टार प्रचारक नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>देश के सबसे बड़े सूबे में चार बार सत्ता में काबिज रहने वाली मायावती एक बहुत ही परिपक्व नेता हैं। बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कांशीराम ने की थी लेकिन उसको इस मुकाम तक पहुंचाने का काम मायावती ने ही किया है। देश की राजनीति में इस समय उथल-पुथल मची है कांग्रेस के तमाम नेता कांग्रेस से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। जो कल तक भारतीय जनता पार्टी को जी भर कर कोसते थे आज वह उन्हीं के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। एक अनुमान यह है कि लगभग 450 छोटे बड़े नेता कांग्रेस पार्टी को कुछ ही समय में अलविदा कह चुके हैं।</div>
<div> </div>
<div>अब यह उनका व्यक्तिगत स्वार्थ हो या कांग्रेस की नीतियां। इसी तरह आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव से पूर्व बड़े ही पशोपेश में पड़ गई है पार्टी के बड़े नेता अरविंद केजरीवाल सहित जेल में हैं अभी केवल संजय सिंह को ही जमानत मिल सकी है। अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़कर जेल से ही सरकार चलाने का एलान किया है। वह कानूनन भी जेल से सरकार चला सकते हैं। और ऐसा ही एक फैसला उनके पक्ष में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी दे दिया है।</div>
<div> </div>
<div>हम बात कर रहे थे बसपा प्रमुख मायावती की तो इस बार मायावती ने जिस तरह से उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है उसे देखकर तो ऐसा प्रतीत होता है कि बसपा उम्मीदवार सपा का काम भारतीय जनता पार्टी का नुक़सान ज्यादा कर सकते हैं। मायावती मुस्लिम उम्मीदवारों को ज्यादा उतारने के लिए फेमस हैं लेकिन इस बार जितने मुस्लिम उम्मीदवारों को उन्होंने चुनाव मैदान में उतारा है वह सपा के गणित को फेल नहीं कर रहे हैं। लोगों का तो यहां तक मानना है कि अंदर ही अंदर मायावती और अखिलेश यादव में कोई डील हुई है। हालांकि यह बात केवल चर्चा में है इसका कोई ठोस सबूत नहीं है। लेकिन यह निश्चित है कि जिस तरह से मायावती इस बार का लोकसभा चुनाव जितनी शांति से लड़ रही हैं। इसमें कुछ न कुछ राज जरुर है। </div>
<div> </div>
<div> जब इंडिया गठबंधन बना था तो उसी समय मायावती ने घोषणा कर दी थी कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी, और अकेले दम पर ही चुनाव लड़ेंगी। उनका कहना था कि जब बसपा का गठबंधन किसी पार्टी से होता है तो बसपा के वोट तो दूसरी पार्टी में ट्रांसफर हो जाते हैं लेकिन दूसरी पार्टी के वोट बसपा को नहीं मिलते जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है। पिछले लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का उत्तर प्रदेश में गठबंधन था जिसमें समाजवादी पार्टी को पांच और बहुजन समाज पार्टी को दस सीटों पर विजय मिली थी। अगर देखा जाए तो मायावती का यह कहकर गठबंधन तोड़ देना कि सपा का वोट बसपा को नहीं मिल सका, सरासर ग़लत ही लगता है क्योंकि सपा केवल पांच सीटों पर और बसपा ने दस सीटों पर विजय हासिल की थी। तब लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद बसपा ने सपा से गठबंधन तोड़ लिया था।</div>
<div> </div>
<div>पिछले लोकसभा चुनाव के बाद हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बसपा अकेले दम पर चुनाव लड़ी और मात्र अपना एक प्रत्याशी ही जिता सकी जब कि समाजवादी पार्टी के 110 प्रत्याशी चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। फिर भी किसी के साथ गठबंधन न करना मायावती की मजबूरी है या दरियादिली यह तो चुनाव बाद ही पता चल सकेगा। मायावती राजनीति के सफर में अब आखिरी मुकाम पर हैं और इसीलिए उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद को राजनैतिक विरासत सौंपने का निर्णय लिया है। हालांकि उत्तर प्रदेश के चुनावों की कमान उन्होंने अभी अपने हाथों में ही रखी है। लेकिन इतना शांत मायावती को कभी नहीं देखा गया। और समाजवादी पार्टी से जिस तरह की तल्खी वो रखतीं थीं वो आज नरम दिखाई दे रही है। हो सकता है कि यह लोकसभा चुनाव एक प्रयोग हो और आगे आने वाले विधानसभा चुनाव में सपा बसपा फिर से एक मंच पर आ जाएं।</div>
<div> </div>
<div> उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय भारतीय जनता पार्टी का बोलबाला है लेकिन यदि मुस्लिम वोट एक जगह पड़ता है तो भारतीय जनता पार्टी को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यह बात भारतीय जनता पार्टी भी अच्छी तरह से जानती है,  और सपा बसपा भी तो उम्मीद भी यही लगाई जा रही है कि इस लोकसभा चुनाव में प्रयोग करके सपा बसपा एक मंच पर आ जाएं। जिससे कि मुस्लिम मतों का बिखराव ना हो। मायावती ने लोकसभा चुनाव को लेकर अभी तक एक भी रैली नहीं की है। जबकि भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने रैलियां शुरू कर दी हैं। कांग्रेस पहले ही अपनी भारत जोड़ो यात्रा उत्तर प्रदेश में निकाल चुकी है। मायावती की रैलियों की लिस्ट तैयार तो हो चुकी है लेकिन उनमें अभी देरी है। राजनैतिक जानकारों के मुताबिक सपा बसपा और कांग्रेस इस चुनाव को केवल एक प्रयोग के तौर पर देख रही है। </div>
<div> </div>
<div>पिछले लोकसभा चुनाव में सपा बसपा एक थीं जब कि विधानसभा चुनाव में सपा कांग्रेस मिल कर चुनाव लड़े थे। इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मिल कर चुनाव लड़ रही है और आगे यह भी हो सकता है कि जब उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव हों तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक हो जाएं। मायावती ने राजनैतिक तौर पर बड़े-बड़े महारथियों को टक्कर दी है। वह एक सशक्त महिला हैं जिनको काफी अधिक राजनैतिक अनुभव है। मायावती को यह भी अहसास है कि बहुजन समाज पार्टी का जनाधार पिछले चुनावों में लगातार कम हो रहा है। और वह नये सिरे से जनाधार बढ़ाने की कोशिश में लगी हैं। राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। इसलिए कई सवाल ऐसे हैं जो कि चर्चा का विषय बने हुए हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong> जितेन्द्र सिंह पत्रकार </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Apr 2024 17:06:07 +0530</pubDate>
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