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                <title>नरेंद्र मोदी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>नरेंद्र मोदी RSS Feed</description>
                
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                <title>स्लोवाकिया से फ्रांस तक भारत की कूटनीतिक शक्ति का विस्तार और वैश्विक मंच पर बढ़ता प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा भारत की सक्रिय और बहुआयामी विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से भारत ने यूरोप के साथ अपने राजनीतिक आर्थिक तकनीकी और सामरिक संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत जिस प्रकार विश्व राजनीति के केंद्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है वह इस दौरे से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।</div>
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<div>स्लोवाकिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक स्लोवाक रीति से ब्रेड और नमक भेंट कर स्वागत किया गया। यह वहां</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181204/indias-diplomatic-power-expanding-from-slovakia-to-france-and-growing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/42.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा भारत की सक्रिय और बहुआयामी विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से भारत ने यूरोप के साथ अपने राजनीतिक आर्थिक तकनीकी और सामरिक संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत जिस प्रकार विश्व राजनीति के केंद्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है वह इस दौरे से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।</div>
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<div>स्लोवाकिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक स्लोवाक रीति से ब्रेड और नमक भेंट कर स्वागत किया गया। यह वहां सम्मान आतिथ्य और मित्रता का प्रतीक माना जाता है। राजधानी ब्रातिस्लावा में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ उनकी मुलाकात ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की। प्रधानमंत्री मोदी ने फिको को भारत आने का निमंत्रण दिया और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और स्लोवाकिया के बीच आर्थिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं तथा दोनों देश नई संभावनाओं की तलाश में हैं।</div>
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<div>स्लोवाकिया मध्य यूरोप का एक महत्वपूर्ण देश है जिसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से औद्योगिक उत्पादन पर आधारित है। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में उसकी पहचान पूरे यूरोप में है। वोक्सवैगन किआ जगुआर लैंड रोवर और वोल्वो जैसी कंपनियों की उत्पादन इकाइयां वहां स्थित हैं। भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत से मोबाइल फोन वस्त्र ऑटोमोबाइल पुर्जे और अन्य तकनीकी उत्पादों का निर्यात किया जाता है जबकि भारत स्लोवाकिया से मशीनरी वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का आयात करता है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच लगभग सत्रह हजार करोड़ रुपये का व्यापार इस बढ़ते आर्थिक सहयोग का प्रमाण है।</div>
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<div>स्लोवाकिया में नौ हजार से अधिक भारतीयों की उपस्थिति भी दोनों देशों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। सूचना प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय पेशेवर वहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं। श्रमशक्ति की कमी से जूझ रहे स्लोवाकिया के लिए भारतीय कुशल मानव संसाधन एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर भी संबंध मजबूत हो रहे हैं।</div>
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<div>फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई वार्ता ने भारत फ्रांस संबंधों को और अधिक व्यापक बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में रक्षा व्यापार प्रौद्योगिकी शिक्षा अंतरिक्ष और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों के बीच तेरह प्रमुख समझौते हुए जो आने वाले वर्षों में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं।</div>
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<div>भारत और फ्रांस के संबंध लंबे समय से विश्वास और सहयोग पर आधारित रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने अक्सर भारत का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन से लेकर न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप में भारत के प्रवेश तक फ्रांस लगातार भारत के पक्ष में खड़ा रहा है। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं।</div>
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<div>रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग विशेष महत्व रखता है। राफेल लड़ाकू विमान और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों जैसे महत्वपूर्ण रक्षा समझौते इस साझेदारी की मजबूती को दर्शाते हैं। अब दोनों देशों ने सैन्य उपकरणों के सह डिजाइन सह विकास और सह उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। इससे भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति को भी मजबूती मिलेगी।</div>
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<div>तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी भारत और फ्रांस के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। नीस में आयोजित भारत इनोवेट्स 2026 कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के स्टार्टअप उद्यमियों निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस का रिश्ता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि साझा दृष्टिकोण और साझा भविष्य पर आधारित है। उन्होंने भारत को दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप केंद्रों में से एक बताते हुए कहा कि भारतीय युवा नवाचार के माध्यम से वैश्विक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं।</div>
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<div>राष्ट्रपति मैक्रों ने भी भारत की नवाचार क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज दुनिया भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में खुले और सहयोगात्मक मॉडल का समर्थन किया तथा भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भारत केवल एक बाजार नहीं बल्कि तकनीकी विकास का वैश्विक भागीदार बनने जा रहा है।</div>
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<div>दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्वांटम कंप्यूटिंग जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। एआई गवर्नेंस के लिए संयुक्त कार्य समूह का गठन और डिजिटल विज्ञान केंद्र की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे भारत और फ्रांस वैश्विक तकनीकी परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।</div>
<div>शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी नए अवसर खुल रहे हैं। फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर स्थापित करने का निमंत्रण दिया गया है जबकि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए फ्रांस में नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच ज्ञान और कौशल का आदान प्रदान बढ़ेगा।</div>
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<div>प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। रूस यूक्रेन युद्ध मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी नई चुनौतियां विश्व व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में भारत एक जिम्मेदार और संतुलित वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत की विदेश नीति का उद्देश्य संवाद सहयोग और विकास को बढ़ावा देना है और यही संदेश इस यात्रा के माध्यम से भी सामने आया है।</div>
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<div>फ्रांस में आयोजित होने वाली जी सेवन शिखर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी भी विशेष महत्व रखती है। यद्यपि भारत जी सेवन का सदस्य नहीं है फिर भी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। जी सेवन देशों के साथ भारत का संवाद यह दर्शाता है कि विश्व समुदाय आज भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक सुरक्षा आर्थिक सहयोग ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भारत की राय को गंभीरता से सुना जा रहा है।</div>
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<div>प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा इस बात का प्रमाण है कि भारत आज केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला राष्ट्र बन चुका है। यूरोप के साथ मजबूत होते संबंध भारत को नई आर्थिक तकनीकी और सामरिक संभावनाएं प्रदान कर रहे हैं। वहीं भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण निर्णयों में उसकी भूमिका और अधिक प्रभावशाली होगी। यह दौरा भारत की उसी उभरती वैश्विक पहचान का सशक्त प्रतीक है।</div>
<div>        <strong>   *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:15:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>नरेंद्र मोदी के नाम दर्ज होने जा रहा एक नया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>2026</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180808/a-new-record-is-going-to-be-registered-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/178054939444.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का दिन इसी कारण राजनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे रिकॉर्ड के साथ चर्चा के केंद्र में होंगे जो भारतीय राजनीति में उनके लंबे और प्रभावशाली सफर का प्रतीक माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नरेंद्र मोदी ने पहली बार </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था। यह जीत इसलिए ऐतिहासिक थी क्योंकि लगभग </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों बाद किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिला था। उस दौर में देश भ्रष्टाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक सुस्ती और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों से जूझ रहा था। जनता एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में थी जो निर्णायक दिखाई दे और देश को नई दिशा दे सके। नरेंद्र मोदी ने विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन और मजबूत नेतृत्व के नारों के साथ चुनाव अभियान चलाया और जनता ने उन्हें भारी समर्थन दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत केवल एक चुनावी विजय नहीं थी बल्कि भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत थी। लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाली कांग्रेस पार्टी पहली बार इतनी कमजोर स्थिति में पहुँच गई। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी। नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व इस परिवर्तन का मुख्य केंद्र बन गया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहचान पहले से ही एक विकासवादी नेता की बन चुकी थी और उसी छवि को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बाद </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> का लोकसभा चुनाव आया। सामान्यतः किसी सरकार के </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों के बाद सत्ता विरोधी लहर देखी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पहले से भी अधिक सीटें जीत लीं। इस विजय ने यह स्पष्ट कर दिया कि मोदी केवल एक लोकप्रिय नेता नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुके हैं। </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद </span>370<span lang="hi" xml:lang="hi"> हटाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीन तलाक कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिनका व्यापक राजनीतिक प्रभाव पड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। लगातार तीन बार सत्ता में लौटना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आसान नहीं होता। इसके लिए केवल चुनावी रणनीति ही नहीं बल्कि व्यापक जनसमर्थन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत संगठन और प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि मोदी की तीसरी पारी को भारतीय राजनीति के बड़े घटनाक्रमों में गिना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन को लेकर चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि वे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री बने रहने वाले नेताओं की सूची में और अधिक मजबूत स्थिति प्राप्त करेंगे। भारतीय राजनीति में लंबे कार्यकाल का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि लोकतंत्र में जनता हर चुनाव में सरकार को बदलने का अधिकार रखती है। ऐसे में यदि कोई नेता लगातार वर्षों तक जनता का समर्थन बनाए रखता है तो यह उसकी राजनीतिक क्षमता और जनस्वीकार्यता को दर्शाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू लगभग </span>16<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष </span>286<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन तक लगातार प्रधानमंत्री रहे। यह रिकॉर्ड आज भी सबसे लंबा लगातार प्रधानमंत्रित्व माना जाता है। नेहरू ने </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> से लेकर </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>1964<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक देश का नेतृत्व किया। उनके सामने विभाजन की त्रासदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थाओं के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय पहचान जैसी अनेक चुनौतियाँ थीं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव मजबूत करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक क्षेत्र के विकास और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया। आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर नरेंद्र मोदी ऐसे समय में प्रधानमंत्री बने जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था। उनके सामने चुनौती थी कि भारत को आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामरिक और तकनीकी दृष्टि से और अधिक शक्तिशाली बनाया जाए। मोदी ने राष्ट्रवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक पहचान और मजबूत नेतृत्व को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। उन्होंने विदेश नीति में भी सक्रियता दिखाई। अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को नई गति मिली। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली दिखाई देने लगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार के दौरान अनेक कल्याणकारी योजनाएँ भी शुरू की गईं। जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। आयुष्मान योजना के जरिए गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का प्रयास हुआ। स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। कोरोना महामारी के दौरान मुफ्त राशन योजना ने करोड़ों लोगों को राहत दी। इन योजनाओं ने गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के बीच मोदी सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना भी करता रहा है। बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि संकट और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराना आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे कठिन कार्यों में से एक होगा। किसान आंदोलन ने भी यह दिखाया कि बड़े जनसमूह सरकार की नीतियों का विरोध कर सकते हैं। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद नरेंद्र मोदी की राजनीतिक लोकप्रियता लंबे समय तक बनी रही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक शक्ति भी मोदी की सफलता का एक बड़ा कारण रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का विशाल कार्यकर्ता तंत्र बूथ स्तर तक सक्रिय रहता है। चुनाव प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रचार अभियान और मतदाताओं तक सीधा संपर्क भाजपा की विशेषता बन चुके हैं। इसके अलावा विपक्ष की एकजुटता की कमी ने भी भाजपा को लाभ पहुँचाया। कई राज्यों में विपक्षी दल आपसी मतभेदों के कारण मजबूत चुनौती प्रस्तुत नहीं कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक राजनीति में संचार माध्यमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं और नए मतदाताओं से सीधे जोड़ने में सहायता की। रेडियो कार्यक्रमों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो संदेशों और विशाल जनसभाओं के माध्यम से उन्होंने लगातार जनता के साथ संवाद बनाए रखा। यह शैली पहले के प्रधानमंत्रियों से अलग मानी जाती है। नेहरू के समय में संचार के साधन सीमित थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आज राजनीति का बड़ा हिस्सा डिजिटल मंचों पर भी संचालित होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास केवल आँकड़ों से नहीं बनता बल्कि जनमानस की स्मृतियों से भी बनता है। जवाहर लाल नेहरू को आधुनिक भारत की संस्थाओं के निर्माण के लिए याद किया जाता है। इंदिरा गांधी को निर्णायक नेतृत्व और राजनीतिक साहस के लिए जाना जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी को संवाद और सहमति की राजनीति का प्रतीक माना जाता है। नरेंद्र मोदी की छवि एक ऐसे नेता की बनी है जिसने भारतीय राजनीति को अत्यधिक केंद्रीकृत नेतृत्व की दिशा दी और राष्ट्रवाद को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में स्थापित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह दिन भारतीय राजनीति में नेतृत्व की निरंतरता और बदलते जनादेश दोनों का प्रतीक बन रहा है। लोकतंत्र में लंबे समय तक सत्ता में बने रहना असाधारण उपलब्धि माना जाता है। यह केवल चुनावी जीत नहीं बल्कि जनता के विश्वास का संकेत भी होता है। नरेंद्र मोदी के समर्थक इसे मजबूत नेतृत्व की विजय मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आलोचक इसे भारतीय राजनीति में व्यक्तित्व आधारित राजनीति के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखते हैं। लेकिन दोनों पक्ष इस बात से सहमत दिखाई देते हैं कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय राजनीति का केंद्र नरेंद्र मोदी ही रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य में इतिहास नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का मूल्यांकन कई आधारों पर करेगा। आर्थिक विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक समरसता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश नीति की उपलब्धियाँ और आम नागरिक के जीवन में आए बदलाव इन सबके आधार पर उनके शासन को परखा जाएगा। यदि आने वाले वर्षों में भारत आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में और मजबूत होता है तो मोदी के कार्यकाल को विशेष महत्व दिया जाएगा। वहीं यदि बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई और सामाजिक असंतोष जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं तो आलोचनाएँ भी तेज होंगी। यही लोकतंत्र की विशेषता है कि किसी भी नेता का अंतिम मूल्यांकन इतिहास और जनता दोनों मिलकर करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल एक तारीख नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर का प्रतीक बनने जा रही है। यह दिन उस राजनीतिक यात्रा की याद दिलाता है जिसमें एक साधारण परिवार से निकला व्यक्ति देश का सबसे प्रभावशाली नेता बनता है और लगातार वर्षों तक सत्ता में बना रहता है। नेहरू से मोदी तक की यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र की शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनता के बदलते विश्वास और नेतृत्व की निरंतर बदलती परिभाषा को भी दर्शाती है। भारतीय राजनीति में रिकॉर्ड बनते और टूटते रहेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज हो जाते हैं। </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर चल रही चर्चा भी भारतीय लोकतंत्र के ऐसे ही एक ऐतिहासिक क्षण की ओर संकेत करती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:18:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर में जवानों की सेवा कर 11 वर्षीय श्रवण सिंह बना देशभक्ति, समर्पण और साहस का अद्भुत प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">जब किसी देश की सीमाओं पर सैनिक दिन-रात पहरा दे रहे होते हैं, तब पूरा राष्ट्र उनके साहस और त्याग के भरोसे निश्चिंत होकर जीवन जीता है। लेकिन कभी-कभी इसी देश की मिट्टी से ऐसे अनमोल रत्न जन्म लेते हैं, जो छोटी-सी उम्र में ही राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर देते हैं कि पूरा देश गर्व से भर उठता है। पंजाब के फिरोजपुर जिले के ‘चक तारा वाली’ गांव का 11 वर्षीय श्रवण सिंह ऐसा ही एक अद्भुत बालक है, जिसकी देशभक्ति और समर्पण की भावना ने करोड़ों भारतीयों का हृदय जीत लिया है। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178865/11-year-old-shravan-singh-became-a-wonderful-symbol-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/4488d7a01b06f10315418667501c682d17484130177341201_original.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">जब किसी देश की सीमाओं पर सैनिक दिन-रात पहरा दे रहे होते हैं, तब पूरा राष्ट्र उनके साहस और त्याग के भरोसे निश्चिंत होकर जीवन जीता है। लेकिन कभी-कभी इसी देश की मिट्टी से ऐसे अनमोल रत्न जन्म लेते हैं, जो छोटी-सी उम्र में ही राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर देते हैं कि पूरा देश गर्व से भर उठता है। पंजाब के फिरोजपुर जिले के ‘चक तारा वाली’ गांव का 11 वर्षीय श्रवण सिंह ऐसा ही एक अद्भुत बालक है, जिसकी देशभक्ति और समर्पण की भावना ने करोड़ों भारतीयों का हृदय जीत लिया है। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों और खेलों में खोए रहते हैं, उस उम्र में श्रवण सिंह भारतीय सेना के जवानों की सेवा में स्वयं को समर्पित कर चुका था। उसका हर कदम राष्ट्रभक्ति की उस पवित्र भावना से प्रेरित था, जो किसी साधारण बच्चे में नहीं, बल्कि किसी असाधारण आत्मा में ही दिखाई देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारतीय सेना सीमा पर पूरी मुस्तैदी से डटी हुई थी, तब श्रवण सिंह बिना किसी भय और संकोच के जवानों के बीच पहुंचता रहा। सुबह होते ही वह चाय लेकर खेतों और कच्चे रास्तों से गुजरता हुआ सेना के कैंप तक पहुंच जाता। दोपहर की भीषण गर्मी में वह जवानों के लिए बर्फ लेकर जाता ताकि देश की रक्षा में लगे सैनिकों को थोड़ी राहत मिल सके। शाम के समय वह दूध और लस्सी लेकर फिर कैंप में पहुंच जाता। उसके मन में न कोई डर था, न कोई स्वार्थ। उसके भीतर केवल एक ही भावना थी—देश के वीर जवानों की सेवा करना। यह भावना किसी किताब से नहीं आती, यह राष्ट्रप्रेम की वह आग होती है जो आत्मा में जन्म लेती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह जब जवानों के बीच जाता था तो उनके साथ बड़े गर्व से घूमता और उनकी बंदूक हाथ में लेकर कहता, “मैं भी बड़ा होकर सैनिक बनूंगा।” यह केवल एक मासूम इच्छा नहीं थी, बल्कि उस बालक के हृदय में धधकती देशभक्ति की लौ थी। उसकी आंखों में सेना की वर्दी के प्रति जो सम्मान था, वह बताता है कि भारत की नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम की भावना कितनी गहरी है। श्रवण के भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने का जो जज्बा दिखाई देता है, वह वास्तव में करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है।</div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय सेना भी इस नन्हे सिपाही के समर्पण और सेवा भावना से अत्यंत प्रभावित हुई। सेना ने श्रवण को केवल सम्मान ही नहीं दिया, बल्कि उसे अपने परिवार का हिस्सा मानते हुए “गोद” ले लिया। यह किसी भी बच्चे के लिए बहुत बड़ा सम्मान है। सेना ने उसकी शिक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठाई। जब जवानों को पता चला कि श्रवण डायबिटीज जैसी बीमारी से जूझ रहा है, तब उन्होंने तुरंत उसकी चिकित्सा की व्यवस्था की। उसकी बेहतर पढ़ाई के लिए प्राइवेट स्कूल में दाखिला कराया गया और आगे की शिक्षा के लिए कपूरथला भेजने का निर्णय लिया गया। यह केवल सहायता नहीं, बल्कि उस देशभक्त बालक के प्रति सेना का प्रेम और सम्मान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह की कहानी यह सिद्ध करती है कि देशभक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती। केवल 11 वर्ष की उम्र में उसने जो कार्य किया, वह बड़े-बड़े लोगों के लिए भी प्रेरणा बन गया। वह न किसी पुरस्कार के लिए काम कर रहा था, न किसी प्रसिद्धि के लिए। उसके मन में केवल भारत माता के प्रति प्रेम था। यही कारण है कि उसकी सेवा भावना को पूरे देश ने सलाम किया और उसे प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रवण सिंह की खुलकर प्रशंसा की। बाल पुरस्कार समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने उसके जज्बे को याद करते हुए कहा था कि जिन कपड़ों और चप्पलों में यह बच्चा देश सेवा कर रहा था, उन्हें संभालकर रखा जाए क्योंकि वे इतिहास का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री के ये शब्द केवल तारीफ नहीं थे, बल्कि उस बालक के राष्ट्रप्रेम को दिया गया सर्वोच्च सम्मान थे। देश के प्रधानमंत्री का किसी छोटे बच्चे के समर्पण को इस प्रकार सम्मान देना यह दर्शाता है कि श्रवण का कार्य कितना असाधारण था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह को देशभर की अनेक संस्थाओं ने सम्मानित किया। कश्मीर से लेकर इंदौर तक उसे बुलाकर सम्मान दिया गया। उसे पहली बार हवाई जहाज में बैठाकर इंदौर ले जाया गया। यह सब उस बच्चे के लिए किसी सपने जैसा था, लेकिन इन सब उपलब्धियों के बाद भी श्रवण के स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया। वह आज भी उसी सादगी और विनम्रता के साथ अपने गांव में रहता है। यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आईपीएल में पंजाब किंग्स की मालकिन और प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी श्रवण को मोहाली आमंत्रित किया। वहां उसने उनके साथ बैठकर क्रिकेट मैच देखा। लेकिन श्रवण के लिए सबसे बड़ा गौरव क्रिकेट मैच देखना नहीं, बल्कि भारतीय सेना के जवानों के बीच रहना था। उसके लिए सैनिकों की वर्दी किसी हीरो से कम नहीं थी। यही कारण है कि वह हर समय सेना के प्रति सम्मान और प्रेम से भरा दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत साधारण है। उसके पिता सोना सिंह एक छोटे किसान हैं और मां आंगनवाड़ी में काम करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इस परिवार ने अपने बेटे में देशभक्ति और संस्कारों की जो भावना जगाई, वह वास्तव में अनुकरणीय है। श्रवण के माता-पिता को भी यह अंदाजा नहीं था कि उनका छोटा-सा बेटा एक दिन पूरे देश के लिए प्रेरणा बन जाएगा। लेकिन सच्चाई यही है कि महानता कभी साधनों से नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं से जन्म लेती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब समाज में स्वार्थ और व्यक्तिगत लाभ की भावना बढ़ती दिखाई देती है, तब श्रवण सिंह जैसे बच्चे आशा की किरण बनकर सामने आते हैं। वह बताता है कि सच्चा देशप्रेम क्या होता है। देशभक्ति केवल नारों और भाषणों से सिद्ध नहीं होती, बल्कि सेवा, त्याग और समर्पण से प्रकट होती है। श्रवण ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में राष्ट्र के प्रति प्रेम हो तो छोटी उम्र भी बड़े कार्य करने से नहीं रोक सकती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह वास्तव में भारत माता का वह वीर पुत्र है, जिसकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। उसकी आंखों में सैनिक बनने का सपना केवल उसका व्यक्तिगत सपना नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव का सपना है। वह करोड़ों बच्चों के लिए उदाहरण है कि देश के प्रति प्रेम और सम्मान बचपन से ही जीवन का सबसे बड़ा संस्कार होना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह नन्हा सिपाही केवल पंजाब का नहीं, बल्कि पूरे भारत का गौरव बन चुका है। उसकी देशभक्ति, निस्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम की नई ऊर्जा भरती है। श्रवण सिंह जैसे बच्चे ही भारत के भविष्य की असली ताकत हैं, जिनके कारण यह विश्वास और मजबूत होता है कि भारत की आत्मा आज भी देशभक्ति और बलिदान की भावना से ओतप्रोत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div>  <strong>    *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 15:59:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राष्ट्रहित और जनहित के कार्य करने वालों को ही जनादेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में हाल ही में पाँच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों की यदि ईमानदारी से व्याख्या की जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि जनता ने उन्हीं दलों और नेताओं को जनादेश दिया है जिनकी छवि साफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ और ईमानदार रही है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी को बिहार के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो व्यापक जनसमर्थन मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके पीछे केंद्र की</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा  की नरेंद्र मोदी  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार की राष्ट्रहित और जनहित में कार्य करने वाली नीतियों की बड़ी भूमिका रही है। इन नीतियों के कारण देश न केवल आंतरिक रूप से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178740/mandate-only-for-those-working-in-national-interest-and-public"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में हाल ही में पाँच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों की यदि ईमानदारी से व्याख्या की जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि जनता ने उन्हीं दलों और नेताओं को जनादेश दिया है जिनकी छवि साफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ और ईमानदार रही है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी को बिहार के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो व्यापक जनसमर्थन मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके पीछे केंद्र की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा  की नरेंद्र मोदी  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार की राष्ट्रहित और जनहित में कार्य करने वाली नीतियों की बड़ी भूमिका रही है। इन नीतियों के कारण देश न केवल आंतरिक रूप से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अधिक मजबूत और सशक्त हुआ है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विधानसभा चुनावों के परिणाम देश के राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि इक्कीसवीं सदी के आधुनिक और जागरूक भारत में जात-पात और धर्म के नाम पर राजनीति कर सत्ता प्राप्त करना अब आसान नहीं रहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का मतदाता पंच से लेकर प्रधानमंत्री तक के चुनाव में विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और सुशासन की गारंटी चाहता है। वह उसी व्यक्ति और दल को अपना समर्थन देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसकी अपेक्षाओं पर खरा उतरता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में डेढ़-दो दशक पहले तक कई राज्यों में जातिवाद और धर्म आधारित राजनीति के सहारे सरकारें बनती रही हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि प्राकृतिक संसाधनों और व्यापारिक संभावनाओं से सम्पन्न कई राज्य भी भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूख और भ्रष्टाचार के प्रतीक बनकर रह गए।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र में प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नरेंद्र मोदी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद देश की राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। जाति और धर्म की राजनीति करने वाले दलों का जनाधार लगातार कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और उनकी व्यक्तिगत ईमानदार छवि के कारण भारत आज विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर अधिक सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्षम और आत्मनिर्भर बनता जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज यदि देश के दो दर्जन के आसपास राज्यों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अथवा उसके सहयोगी दलों की सरकारें है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसके पीछे केंद्र सरकार की विश्वसनीय और जनहितकारी छवि का महत्वपूर्ण योगदान है। इस नेतृत्व ने देशवासियों के मन में व्याप्त भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूख और भ्रष्टाचार के वातावरण को कम करने का प्रयास किया है तथा विकसित और सुरक्षित भारत का विश्वास जगाया है। लगातार आ रहे विधानसभा चुनावों के परिणाम विपक्षी दलों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश हैं। यदि उन्हें राजनीति में प्रासंगिक बने रहना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जात-पात और धर्म की संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और जनकल्याण जैसे मुद्दों पर जनता का विश्वास जीतना होगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज देश का मतदाता स्वार्थ और तुष्टिकरण की राजनीति से अधिक राष्ट्रहित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और सुशासन को महत्व देने लगा है। यही कारण है कि केवल सत्ता प्राप्ति के उद्देश्य से की जाने वाली राजनीति को जनता लगातार नकारती जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:58:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नए भारत का स्वर्णिम अध्याय: नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में विकास, शक्ति और वैश्विक प्रतिष्ठा की गाथा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">वर्ष 2014 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है, जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली। उस समय भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और उसकी जीडीपी लगभग 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी। आज, एक दशक के भीतर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय का लगभग दोगुना हो जाना इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी केवल आंकड़ों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178327/the-golden-chapter-of-new-india-the-story-of-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa01634.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">वर्ष 2014 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है, जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली। उस समय भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और उसकी जीडीपी लगभग 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी। आज, एक दशक के भीतर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय का लगभग दोगुना हो जाना इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक परिवर्तन का संकेत है। 2026 तक भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचने का अनुमान है और 7.4 से 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए हुए है। यह उपलब्धि सरकार की नीतियों, आर्थिक सुधारों और मजबूत नेतृत्व का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परिवर्तन में अमित शाह की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने संगठन को मजबूत करते हुए भाजपा को देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया। मोदी और शाह की जोड़ी ने राजनीति को केवल सत्ता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में जो बदलाव आया है, वह अभूतपूर्व है। सड़कों का विस्तार, हाईवे का निर्माण, रेलवे का आधुनिकीकरण और हवाई अड्डों की संख्या में वृद्धि—इन सभी ने भारत को एक नए युग में प्रवेश कराया है। आधुनिक ट्रेनों, विद्युतीकरण और सुरक्षा तकनीकों ने यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया है। गांवों तक सड़क और बिजली पहुंचाना विकास को समावेशी बनाने का प्रयास है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया है। यूपीआई जैसी व्यवस्था ने देश को डिजिटल भुगतान में अग्रणी बना दिया है। आज सरकारी सेवाएं मोबाइल पर उपलब्ध हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में वृद्धि हुई है। यह परिवर्तन आम नागरिक के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक कल्याण की योजनाओं ने भी करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहलों ने गरीब और वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा है। यह केवल योजनाएं नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का प्रयास हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेलवे क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ट्रैक का तेजी से विद्युतीकरण, आधुनिक ट्रेनों का संचालन, और सुरक्षा प्रणाली का विकास—इन सभी ने भारतीय रेलवे को नई पहचान दी है। पर्यावरण संरक्षण के लिए भी रेलवे ने सौर ऊर्जा, एलईडी लाइटिंग और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे कदम उठाए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का पुनर्विकास भी इस दौर की एक विशेष पहचान रहा है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे प्रोजेक्ट्स ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को नया जीवन दिया है। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानूनी और नीतिगत सुधारों ने भी देश की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तीन तलाक कानून, अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और नागरिकता संशोधन कानून जैसे फैसलों ने सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। इन निर्णयों को समर्थक जहां साहसिक कदम मानते हैं, वहीं आलोचक इनके प्रभावों पर चर्चा करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">विदेश नीति के क्षेत्र में भारत ने एक नई पहचान बनाई है। “भारत प्रथम” के सिद्धांत पर आधारित नीति ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। अमेरिका, रूस और अन्य प्रमुख देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखते हुए भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक दृष्टि से भी भाजपा का विस्तार अभूतपूर्व रहा है। देश के अधिकांश राज्यों में पार्टी की मजबूत उपस्थिति यह दर्शाती है कि संगठन और नेतृत्व दोनों स्तरों पर पार्टी ने प्रभावी कार्य किया है। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना इसकी सफलता का आधार रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, इस विकास यात्रा में चुनौतियां भी मौजूद हैं। रोजगार सृजन, आय असमानता और कृषि क्षेत्र की समस्याएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। लेकिन यह भी सच है कि सरकार इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए सुधार की दिशा में प्रयासरत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी का नेतृत्व केवल प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक दृष्टिकोण है—एक ऐसा दृष्टिकोण जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखता है। “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य इसी सोच का परिणाम है। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है, जिसे साकार करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमित शाह की रणनीतिक क्षमता और संगठनात्मक कौशल ने इस दृष्टिकोण को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पार्टी को मजबूत करते हुए उसे हर स्तर पर सशक्त बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां वह न केवल अपने अतीत पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य को लेकर भी आश्वस्त है। यह आत्मविश्वास पिछले कुछ वर्षों में हुए विकास का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भारत ने जिस गति से प्रगति की है, वह न केवल देशवासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि दुनिया के लिए भी एक उदाहरण है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यदि यही दिशा और प्रयास जारी रहे, तो भारत जल्द ही एक विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, यह दौर केवल राजनीतिक सफलता का नहीं, बल्कि एक युग निर्माण का दौर है, जिसमें भारत अपनी नई पहचान गढ़ रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">        <strong>*कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार*</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:22:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोले ए.के. शर्मा, महिलाओं के अधिकारों पर राजनीति नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong>नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने भदोही प्रवास के दौरान औराई ब्लॉक सभागार में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रेस वार्ता की। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में आयोजित जनआक्रोश मार्च में भी भागीदारी की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मंत्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों से समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कहा कि इसे पारित कराने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन विपक्ष के असहयोग के</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177456/ak-sharma-said-on-nari-shakti-vandan-act-there-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0027-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong>नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने भदोही प्रवास के दौरान औराई ब्लॉक सभागार में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रेस वार्ता की। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में आयोजित जनआक्रोश मार्च में भी भागीदारी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंत्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों से समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कहा कि इसे पारित कराने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन विपक्ष के असहयोग के कारण यह संभव नहीं हो सका। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में यह विधेयक अवश्य पारित होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने विपक्ष के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि महिला अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति करना स्वीकार्य नहीं है। सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में सांसद विनोद बिंद, विधायक दीनानाथ भास्कर, विधायक विपुल दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष प्रियंका जायसवाल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख पूनम मौर्या, कार्यकारिणी सदस्य रेनू पांडे सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 19:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहिनी सोलर में डीलर एवं उपभोक्ताओं की बैठक आयोजित ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज।</strong>राहिनी  सोलर के एडीए कॉलोनी स्थित कार्यालय में रविवार को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम सूर्य घर योजना' को लेकर सोलर कंपनी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिसमें विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते उपभोक्ताओं को हो रही बड़ी परेशानियों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। राहिनी सोलर के सीईओ विकास मिश्रा ने बताया कि सोलर कंपनी के डीलर पूरी तरह से परेशान हो चुके है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> कंपनी उपभोक्ताओं के घरों में सोलर इंस्टालेशन कराती है। लेकिन विद्युत विभाग को ओर से लगाए जा रहे स्मार्ट प्री पेड मीटर के चलते उन्हें बड़ी दिक्कतों का कामना करना</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177445/meeting-of-dealers-and-consumers-organized-in-rahini-solar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260426-wa0094.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज।</strong>राहिनी  सोलर के एडीए कॉलोनी स्थित कार्यालय में रविवार को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम सूर्य घर योजना' को लेकर सोलर कंपनी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिसमें विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते उपभोक्ताओं को हो रही बड़ी परेशानियों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। राहिनी सोलर के सीईओ विकास मिश्रा ने बताया कि सोलर कंपनी के डीलर पूरी तरह से परेशान हो चुके है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> कंपनी उपभोक्ताओं के घरों में सोलर इंस्टालेशन कराती है। लेकिन विद्युत विभाग को ओर से लगाए जा रहे स्मार्ट प्री पेड मीटर के चलते उन्हें बड़ी दिक्कतों का कामना करना पड़ रहा है। अचानक से विद्युत कनेक्शन काट दिया जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उनका रिचार्ज पेमेंट माइनस में बताता है। ऐसे में उन्हें भुगतान करने के बाद भी बिजली विभाग की तरफ से बिजली काट दी जा रही है। इस बैठक में 100 से अधिक डीलरों, इनवर्टर निर्माताओं और बैटरी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ उपभोक्ताओं ने अपनी समस्याओं को लेकर कहा कि विभाग में इस समस्या को लेकर जब बात की जाती है तो उन्हें आश्वासन दिया जाता है कि जल्दी ही कोई रास्ता निकाला जाएगा, लेकिन समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाई जा रही इस योजना के तहत हर घर को सोलर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। विद्युत विभाग की कमियों और लापरवाहियों से उपभोक्ताओं और सोलर कंपनियों को नुकसान हो रहा है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि प्री पेड मीटर में रिचार्ज नहीं होने पर कनेक्शन काट दिया जा रहा है। दोबारा रिचार्ज करने पर भी माइनस बैलेंस बताता है, ऐसे में उपभोक्ता अपने रिचार्ज को बढ़ाकर भी रख रहे है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें बिजली नहीं मिल पा रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राहिनी  सोलर के सीईओ विकास मिश्रा ने कहा कि हर महीने इस समस्या को लेकर स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठक की जाती है। उन्हें समस्याओं से अवगत भी कराया गया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> लेकिन आज तक इस समस्या  का निदान नहीं निकल पाया।उन्होंने यह भी कहा अब उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर इस समस्या का हल निकला जाएगा,इसके लिए विद्युत मंत्री से भी मुलाकात की जाएगी। समस्याओं का निराकरण न होने पर उपभोक्ताओं के साथ उच्चाधिकारियों का घेराव भी किया जाएगा।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 19:39:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी और नेतन्याहू क्या राजनीतिक रूप से नाकाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong>ईरान-अमेरिका सीज़फायर का असर इसराइल और भारत में नज़र आ रहा है। भारत और इसराइल के विपक्षी दलों ने अपने-अपने देशों के प्रधानमंत्रियों नेतन्याहू और नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को नेस्तानाबूद करने की धमकी दी थी लेकिन वो समझौते की टेबल पर आ गए। नेतन्याहू ने अमेरिका को इस युद्ध में जबरन ढकेला और जब ट्रंप ने सीज़फायर डील की घोषणा की तो नेतन्याहू की उसमें कोई भूमिका नहीं थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ईरान पर युद्ध थोपे जाने से तीन दिन पहले इसराइल गए थे। यह भी इसराइल का गेम था। वो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175578/are-modi-and-netanyahu-politically-unsuccessful"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/ap26057435017593.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong>ईरान-अमेरिका सीज़फायर का असर इसराइल और भारत में नज़र आ रहा है। भारत और इसराइल के विपक्षी दलों ने अपने-अपने देशों के प्रधानमंत्रियों नेतन्याहू और नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को नेस्तानाबूद करने की धमकी दी थी लेकिन वो समझौते की टेबल पर आ गए। नेतन्याहू ने अमेरिका को इस युद्ध में जबरन ढकेला और जब ट्रंप ने सीज़फायर डील की घोषणा की तो नेतन्याहू की उसमें कोई भूमिका नहीं थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ईरान पर युद्ध थोपे जाने से तीन दिन पहले इसराइल गए थे। यह भी इसराइल का गेम था। वो दुनिया को दिखाना चाहता था कि ईरान का सदियों पुराना दोस्त भारत आज उसके साथ खड़ा है। यानी ईरान पर युद्ध थोपे जाने की मोदी की मौन सहमति थी। मोदी ने आज तक ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या की निन्दा नहीं की। युद्ध के बीच में जब पाकिस्तान की भूमिका की बात कही जा रही थी तो भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान को दलाल देश बता रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के संचार प्रभारी और सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा- पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में एक तरफ यूएस और इसराइल और दूसरी तरफ ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष में लागू हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम का सावधानीपूर्वक स्वागत करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के शासन के शीर्ष नेतृत्व की टारगेटेड किलिंग के साथ शुरू हुआ था। यह घटनाएं प्रधानमंत्री मोदी की बहुचर्चित इसराइल यात्रा पूरी होने के ठीक दो दिन बाद शुरू हुई थीं। इस यात्रा ने भारत की वैश्विक साख और प्रतिष्ठा को कम किया। पीएम मोदी ने ग़ज़ा में इसराइल द्वारा किए जा रहे नरसंहार और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में उसकी आक्रामक विस्तारवादी नीतियों पर कुछ नहीं कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा- युद्धविराम कराने में पाकिस्तान की भूमिका, पीएम मोदी की अत्यधिक व्यक्तिनिष्ठ कूटनीति के सार और शैली-दोनों-के लिए एक गंभीर झटका है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जारी समर्थन के कारण पाकिस्तान को अलग-थलग करने और दुनिया को यह विश्वास दिलाने की नीति कि वह एक विफल राष्ट्र है, स्पष्ट रूप से सफल नहीं हुई है। जैसा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने मुंबई आतंकी हमलों के बाद कर दिखाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">यह तथ्य कि एक दिवालिया अर्थव्यवस्था (पाकिस्तान की), जो पूरी तरह बाहरी डोनर्स की मदद पर निर्भर है, और कई मायनों में एक टूटे हुए देश ने ऐसी भूमिका निभा ली, पीएम मोदी की कूटनीतिक रणनीति और नैरेटिव प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने या उनकी टीम ने यह भी कभी नहीं बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को 10 मई 2025 को अचानक और तत्काल क्यों रोक दिया गया। जिसकी पहली घोषणा अमेरिका के विदेश मंत्री ने की थी और जिसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति तब से लगभग सौ बार श्रेय ले चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा- हर जगह एक स्पष्ट राहत की भावना है। विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को दलाल कहकर खारिज किया था। लेकिन अब स्वयंभू विश्वगुरु पूरी तरह एक्सपोज हो चुके हैं। उनका स्वयं घोषित 56 इंच का सीना सिमटकर रह गया है। उनकी कायरता न केवल इसराइल की आक्रामकता पर, बल्कि व्हाइट हाउस में बैठे उनके करीबी मित्र द्वारा इस्तेमाल की जा रही पूरी तरह अस्वीकार्य और शर्मनाक भाषा पर भी उनकी चुप्पी से पता चलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 22:10:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज में प्रादेशिक सरस महोत्सव का भव्य शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">संगम नगरी में आयोजित प्रादेशिक सरस महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम एवं सांस्कृतिक संध्या में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आने वाले एक वर्ष में तीन करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और एक करोड़ “लखपति दीदी” तैयार करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। इस पहल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173308/grand-inauguration-of-regional-saras-mahotsav-in-prayagraj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260314-wa0181.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संगम नगरी में आयोजित प्रादेशिक सरस महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम एवं सांस्कृतिक संध्या में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आने वाले एक वर्ष में तीन करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और एक करोड़ “लखपति दीदी” तैयार करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। इस पहल से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरस महोत्सव जैसे आयोजनों से महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार मिलता है और उनकी आय में वृद्धि होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण भी किया और महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंचाने के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर काम कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर गोरखपुर के सांसद व अभिनेता रवि किशन फूलपुर के सांसद प्रवीण पटेल, प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी जिला पंचायत अध्यक्ष वीके सिंह, विधान परिषद सदस्य केपी श्रीवास्तव और सुरेंद्र चौधरी भी मौजूद रहे। इसके अलावा विधायक दीपक पटेल और पियुष रंजन निषाद, भाजपा महानगर अध्यक्ष संजय गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला व निर्मला पासवान सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक कार्यक्रम में उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी लोगों का मन मोह लिया। प्रतिष्ठित कवयित्री एवं गायिका अनामिका जैन अंबर तथा प्रसिद्ध गायिका तृप्ति शाक्य ने अपने गीतों और प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सरस महोत्सव में विभिन्न जिलों से आए स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थ, परिधान और घरेलू उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। यह महोत्सव न केवल ग्रामीण उत्पादों को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि महिलाओं की उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को भी नई पहचान दे रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 21:19:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'खतरे में भारत की ऊर्जा सुरक्षा', राहुल गांधी बोले- अभी और खराब होंगे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले समय में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। भारत के कुल तेल आयात का 40% से अधिक हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है, ऐसे में इस इलाके में बढ़ता तनाव देश के लिए चिंता का विषय है। एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के मामले में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।स्थिति इसलिए भी संवेदनशील हो गई है क्योंकि संघर्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172568/indias-energy-security-in-danger-rahul-gandhi-said-situation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले समय में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। भारत के कुल तेल आयात का 40% से अधिक हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है, ऐसे में इस इलाके में बढ़ता तनाव देश के लिए चिंता का विषय है। एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के मामले में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।स्थिति इसलिए भी संवेदनशील हो गई है क्योंकि संघर्ष अब भारत के आसपास के क्षेत्र तक पहुंच गया है। हाल ही में हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने की खबर सामने आई है।</p>
<p>ऐसे समय में, जब हालात तेजी से बदल रहे हैं और क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है, देश को मजबूत और स्थिर नेतृत्व की जरूरत है। लेकिन आरोप लगाया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।मौजूदा हालात में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर भी असर पड़ सकता है और सरकार को इस पर स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172568/indias-energy-security-in-danger-rahul-gandhi-said-situation</link>
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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 22:34:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत कनाडा संबंधों का नया स्वर्णिम अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत और कनाडा के रिश्तों में हालिया उच्चस्तरीय वार्ता के बाद एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। इस मुलाकात में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, कृषि और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई और कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। विशेष रूप से सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर हुआ समझौता इस वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172347/new-golden-chapter-of-india-canada-relations"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/भारत-कनाडा-संबंधों-का-नया-स्वर्णिम-अध्याय.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत और कनाडा के रिश्तों में हालिया उच्चस्तरीय वार्ता के बाद एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। इस मुलाकात में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, कृषि और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई और कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। विशेष रूप से सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर हुआ समझौता इस वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक के रूप में महत्वपूर्ण रही। पिछले वर्षों में भारत और कनाडा के संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले थे, किंतु इस बैठक ने यह संकेत दिया कि दोनों देश परिपक्व कूटनीतिक दृष्टिकोण के साथ भविष्य की ओर बढ़ना चाहते हैं। बातचीत में पारस्परिक विश्वास, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने पर बल दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यूरेनियम आपूर्ति समझौता इस यात्रा का केंद्रीय बिंदु रहा। करीब 2.6 अरब डॉलर यानी लगभग 23,784 करोड़ रुपए के इस करार के तहत कनाडा अगले दस वर्षों तक भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। कनाडा विश्व के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में से एक है और भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम निर्णायक साबित हो सकता है। भारत पहले से ही 2013 में लागू हुए न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट के तहत कनाडा से यूरेनियम प्राप्त करता रहा है, किंतु इस नई दीर्घकालिक व्यवस्था से स्थिरता और भरोसे की नई नींव पड़ी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग केवल कच्चे यूरेनियम की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देशों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और उन्नत रिएक्टर तकनीकों के विकास में भी सहयोग की बात कही है। इससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तकनीकी लाभ मिलेगा और ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य साकार हो सकेगा। जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन में कमी की वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बीच यह सहयोग भारत की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी को नई गति देने का निर्णय लिया गया है। समुद्री क्षेत्र जागरूकता, रक्षा उद्योगों में सहयोग और सैन्य आदान-प्रदान जैसे पहलुओं पर सहमति जताई गई। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरता को मानवता के सामने गंभीर चुनौती बताते हुए दोनों नेताओं ने इनसे निपटने के लिए घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक दृष्टि से भी यह बैठक अहम रही। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। जनवरी से अक्टूबर 2025 के दौरान दोनों देशों के बीच लगभग 8 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जो भविष्य में और तेजी से बढ़ सकता है। भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और कनाडा प्राकृतिक संसाधनों, प्रौद्योगिकी और निवेश क्षमता के लिए जाना जाता है। ऐसे में दोनों की पूरक अर्थव्यवस्थाएं व्यापक अवसर पैदा कर सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बातचीत शुरू करने की घोषणा की गई है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो व्यापार और निवेश के नए द्वार खुलेंगे। भारतीय उद्योगों को कनाडाई बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी और कनाडाई कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार में अवसर प्राप्त होंगे। कृषि, कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में मूल्यवर्धन पर सहयोग से किसानों और कृषि उद्योग को लाभ हो सकता है। भारत में दालों की मांग को देखते हुए कनाडा के पल्स प्रोटीन क्षेत्र में सहयोग विशेष महत्व रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में क्रिकेट के टी20 प्रारूप का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे टी20 में त्वरित निर्णय और मजबूत साझेदारी से मैच जीते जाते हैं, वैसे ही भारत और कनाडा मिलकर भविष्य का निर्माण करेंगे। यह टिप्पणी केवल सांकेतिक नहीं थी, बल्कि इस बात का संकेत थी कि दोनों देश तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सक्रिय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों देशों की समान सोच सामने आई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि वह विश्व में शांति और स्थिरता चाहता है तथा हर समस्या का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। यह रुख भारत की पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप है, जो संतुलन और कूटनीतिक समाधान पर जोर देती है।द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 2008 के भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद भारत के लिए वैश्विक परमाणु व्यापार के रास्ते खुले थे। उसी क्रम में 2013 का भारत-कनाडा परमाणु सहयोग समझौता लागू हुआ। हालिया करार उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है, जिसने दोनों देशों के संबंधों को और गहराई दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर यह बैठक केवल एक आर्थिक समझौते तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने राजनीतिक विश्वास, रणनीतिक साझेदारी और दीर्घकालिक सहयोग की नई दिशा तय की है। ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार विस्तार और वैश्विक शांति के मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और कनाडा भविष्य में बहुआयामी संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह साझेदारी दोनों देशों के लिए अवसरों और स्थिरता का नया मार्ग प्रशस्त कर सकती </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:31:34 +0530</pubDate>
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                <title>पूरे देश में संदेश दो उत्तर प्रदेश भाजपा का गढ़ इसे कोई ढाह नहीं सकताःअमित शाह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो</p>
<p>धर्मेन्द्र राघव<br /><strong>अलीगढ़,।</strong></p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर हिंदू गौरव दिवस में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनता से आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 की 80 लोकसभा सीट बीजेपी को जिताने की अपील की।</p>
<p><br />उन्होंने कहा कि आज मैं सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, राम भक्त, पिछड़ों का कल्याण करने वाले कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने आया हूं। मैं देश के करोड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133845/give-a-message-to-the-whole-country-that-uttar-pradesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/rajneeti1.jpg" alt=""></a><br /><p>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो</p>
<p>धर्मेन्द्र राघव<br /><strong>अलीगढ़,।</strong></p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर हिंदू गौरव दिवस में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनता से आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 की 80 लोकसभा सीट बीजेपी को जिताने की अपील की।</p>
<p><br />उन्होंने कहा कि आज मैं सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, राम भक्त, पिछड़ों का कल्याण करने वाले कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने आया हूं। मैं देश के करोड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कुशल शासक के साथ-साथ पिछड़ों का कल्याण करने वाले थे। जब प्रधान मंत्री मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास किया था, तो मैंने स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को फोन किया।<br />उन्होंने कहा था कि आज मेरा जीवन धन्य हो गया। कल्याण सिंह गौपालक, श्री राम मंदिर आंदोलन को गति देने वाले, भारतीय जनता पार्टी के विचारों को जमीन पर उतारने वाले, समाज से जातिवाद खत्म कर पिछड़ों का कल्याण करने वाले थे। आज इन कार्यों को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।</p>
<p>गरीबों के घर में बिजली, शौचालय, गैस सिलेंडर, पीने का पानी, मुफ्त खाद्यान्न आदि की सुविधा देकर करीब कल्याण के लक्ष्य को पूरा करने का कार्य मोदी जी कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कभी जातिवाद की बात नहीं की थी, पर पिछड़ी जाति को बढ़ावा देने का कार्य किया। आज इसी कार्य को प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं। राष्ट्रीय पिछड़ी जाति आयोग, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया। जो पिछड़ा वर्ग के लिए स्वर्गीय मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने शुरुआत की थी, उसको आज नरेंद्र मोदी ने साकार किया है।</p>
<p><br />कांग्रेस पार्टी ने आजादी के बाद से राम जन्म भूमि के मसले को अटका रखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोर्ट का आदेश आते ही प्रभु राम के मंदिर का शिलान्यास करने का कार्य किया। उत्तर प्रदेश में राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर गोली चलाने की बात आई, तो पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह ने कारसेवकों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था और अपनी कुर्सी को त्याग दिया था।</p>
<p><br />2024 की शुरूआत में साढें 500 साल बाद रामलला अपने घर में स्थापित हो जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने 9 साल के अंदर पिछड़ों का सम्मान, गरीब कल्याण, राम मंदिर निर्माण का कार्य कर दिखाया है। अगस्त 2013 से बाबूजी ने दोनों समय फोन करके उत्तर प्रदेश चुनाव का हाल जाना और अपना मार्गदर्शन दिया। उनके मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में 2014 में 80 में से 73 सीट जीतकर भाजपा ने केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारी बहुमत की सरकार बनाई थी।</p>
<p>उत्तर प्रदेश की 80 पैसे 80 सीट जीतकर प्रधानमंत्री मोदी को पुनः प्रधानमंत्री बनाओ और पूरे देश में यह संदेश दो कि उत्तर प्रदेश भाजपा का गढ़ है, इसे कोई ढा नहीं सकता है।</p>
<h4><br /><strong>कल्याण सिंह ने श्रीराम के चरणों में अपनी राजगद्दी का किया त्यागः योगी आदित्यनाथ</strong></h4>
<p><br />पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की दूसरी पुण्यतिथि पर हिंदू गौरव दिवस में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सुरक्षा और शासन कैसे बनना चाहिए, यह 1991 में जब भारतीय जनता पार्टी की कल्याण सिंह के नेतृत्व में सरकार बनी, तब इस बात का एहसास हुआ। बाबूजी कल्याण सिंह ने 1991 में अलीगढ़ उधमियों को बढ़ावा देने के लिए ताला नगरी की स्थापना की थी। उन्होंने श्रीराम के चरणों में अपनी राजगद्दी त्याग दी थी।</p>
<p><br />आज कल्याण सिंह का सपना साकार हो रहा है, अयोध्या में भगवान  श्री राम का मंदिर तैयार हो रहा है। इससे स्वर्गीय मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की आत्मा को शांति मिल रही होगी। जहां अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है। वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर का भी विकास हो रहा है। बाबूजी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर कैंसर हॉस्पिटल का नाम बाबू कल्याण सिंह के नाम पर रखा गया। बुलंदशहर में बनने वाले हॉस्पिटल का नाम भी बाबू कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज रखने का काम उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है।</p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Aug 2023 15:42:06 +0530</pubDate>
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