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                <title>  swatantra prabhat delhi news - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>38 देशों के साथ मजबूती की स्थिति में हुए FTA, PM मोदी बोले – बढ़ी आर्थिक ताकत से मजबूत हुआ भारत का पक्ष</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने कहा है कि भारत ने 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements – FTA) किसी दबाव में नहीं, बल्कि मजबूत और आत्मविश्वासपूर्ण स्थिति में किए हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की आर्थिक क्षमता, उत्पादन शक्ति और वैश्विक विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर व्यापार वार्ताओं में देखने को मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाचार एजेंसी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Press Trust of India</span></span> (PTI) को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी आर्थिक साझेदार के रूप</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169881/fta-pm-modi-in-a-position-of-strength-with-38"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/images-(1)26.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने कहा है कि भारत ने 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements – FTA) किसी दबाव में नहीं, बल्कि मजबूत और आत्मविश्वासपूर्ण स्थिति में किए हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की आर्थिक क्षमता, उत्पादन शक्ति और वैश्विक विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर व्यापार वार्ताओं में देखने को मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाचार एजेंसी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Press Trust of India</span></span> (PTI) को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>मजबूत आर्थिक आधार बना भारत की ताकत</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के कारण भारत में विनिर्माण को नई गति मिली है। इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल सप्लाई चेन) में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि भारत का सेवा क्षेत्र—जिसमें आईटी, फाइनेंस, हेल्थकेयर और प्रोफेशनल सेवाएं शामिल हैं—दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका है। इसी तरह MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनकर उभरा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के अनुसार, इन तीनों क्षेत्रों की मजबूती ने भारत को व्यापार वार्ताओं में बेहतर शर्तें तय करने का आत्मविश्वास दिया।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>व्यापार समझौतों से क्या होगा लाभ?</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों का उद्देश्य केवल आयात-निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों तक आसान पहुंच दिलाना है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>इन समझौतों से:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) में कमी आती है।</p>
</li>
<li>
<p>निर्यातकों को नए बाजार मिलते हैं।</p>
</li>
<li>
<p>विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलता है।</p>
</li>
<li>
<p>रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत ऐसे समझौते कर रहा है जिनमें घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>राजनीतिक स्थिरता और नीति स्पष्टता से बढ़ा भरोसा</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि देश में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों की स्पष्ट दिशा (पॉलिटिकल प्रेडिक्टेबिलिटी) ने निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब सरकार स्थिर हो और नीतियां स्पष्ट हों, तो निवेशकों को दीर्घकालिक योजना बनाने में सुविधा होती है। यही कारण है कि भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में वृद्धि दर्ज की गई है और वैश्विक कंपनियां भारत को निवेश के लिए एक सुरक्षित और संभावनाओं से भरा गंतव्य मान रही हैं।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>वैश्विक मंच पर मजबूत होती भारत की साख</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज भारत की आवाज वैश्विक मंचों पर पहले से अधिक प्रभावशाली हो गई है। भारत न केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था है, बल्कि वैश्विक विकास में भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके अनुसार, 38 देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब व्यापार वार्ताओं में शर्तें तय करने की स्थिति में है, न कि केवल उन्हें स्वीकार करने की।</p>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 20:09:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>केंद्र ने चुनाव दस्तावेजों तक पहुंच को प्रतिबंधित करने के लिए नियम में संशोधन किया।</title>
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                        <![CDATA[<div class="adn ads">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो। जेपी सिंह</strong></div>
<div>केंद्र सरकार ने चुनाव आचार संहिता में संशोधन करके चुनाव दस्तावेजों के एक हिस्से तक आम जनता की पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया है। चुनाव आयोग की सिफारिश के बाद शुक्रवार को विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से इसे लागू कर दिया गया। आदर्श आचार संहिता अवधि के दौरान सीसीटीवी कैमरा फुटेज, वेबकास्टिंग फुटेज और उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज चुनाव संचालन नियमों के अंतर्गत नहीं आते हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी नियमों में बदलाव करते हुए कहा है कि मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज उम्मीदवारों और आम जनता</div></div></div></div></div></div></div>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147135/center-amended-the-rule-to-restrict-access-to-election-documents"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-12/केंद्र-ने-चुनाव-दस्तावेजों-तक-पहुंच-को-प्रतिबंधित-करने-के-लिए-नियम-में-संशोधन-किया।.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो। जेपी सिंह</strong></div>
<div>केंद्र सरकार ने चुनाव आचार संहिता में संशोधन करके चुनाव दस्तावेजों के एक हिस्से तक आम जनता की पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया है। चुनाव आयोग की सिफारिश के बाद शुक्रवार को विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से इसे लागू कर दिया गया। आदर्श आचार संहिता अवधि के दौरान सीसीटीवी कैमरा फुटेज, वेबकास्टिंग फुटेज और उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज चुनाव संचालन नियमों के अंतर्गत नहीं आते हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी नियमों में बदलाव करते हुए कहा है कि मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज उम्मीदवारों और आम जनता को नहीं दी जा सकती हैं। इसने कहा है कि ये फुटेज उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजों की श्रेणी में नहीं आती है। कहा जा रहा है कि हाल में किए गए संशोधन के बाद फुटेज को देने पर रोक लगा दी गई है। हालाँकि, चुनाव आयोग इस संशोधन को स्पष्टीकरण बता रहा है।</div>
<div> </div>
<div>इस संशोधन से पहले चुनाव संचालन नियमों की धारा 93(2) के तहत प्रावधान था कि चुनाव से संबंधित अन्य सभी कागजात अदालत की अनुमति से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जा सकेंगे। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में चुनाव आयोग को हरियाणा विधानसभा चुनाव से संबंधित ज़रूरी दस्तावेजों की प्रतियां अधिवक्ता महमूद प्राचा को उपलब्ध कराने का निर्देश दिए जाने के बाद ये बदलाव किए गए। उन्होंने वीडियोग्राफी, सीसीटीवी कैमरा फुटेज और चुनाव संचालन से संबंधित फॉर्म 17-सी भाग I और II की प्रतियों की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।</div>
<div> </div>
<div>चुनाव आयोग ने कहा कि यह मतदाताओं की गोपनीयता की रक्षा और उनकी सुरक्षा के लिए किया गया। लेकिन कांग्रेस ने इन बदलावों को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया है। इसने इसके माध्यम से चुनाव आयोग की पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाने और चुनावी प्रक्रिया की निष्ठा को ख़त्म करने का आरोप लगाया है।</div>
<div> </div>
<div>मौजूदा नियमों में चुनाव आयोग के लिए जनता को कोई वीडियोग्राफिक रिकॉर्ड या सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की कोई विशेष बाध्यता नहीं है। विस्तृत नियमों में रिकॉर्ड की एक सूची है जिसे अदालत के निर्देश के बाद सार्वजनिक किया जा सकता है। शुक्रवार के संशोधन में एक पंक्ति जोड़ी गई है। इसमें धारा 93 की उपधारा (2) के खंड (ए) में 'कागजात' शब्द के बाद इस लाइन को जोड़कर चुनाव आयोग ने यह साफ़ कर दिया है कि 'कागजात' में ऐसे कोई दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल नहीं होंगे, जिन्हें नियमों में साफ़-साफ़ लिखा नहीं गया है। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा है कि उनकी पार्टी इस संशोधन को अदालतों में चुनौती देगी। उन्होंने कहा, 'अगर हाल के दिनों में चुनाव आयोग की चुनावी प्रक्रिया की निष्ठा को ख़त्म करने के हमारे दावे की कभी पुष्टि हुई है, तो वह यही है।'</div>
<div> </div>
<div>1961 के चुनाव संचालन नियमों के नियम 93(2)(ए) में पहले कहा गया था कि “चुनाव से संबंधित सभी अन्य कागजात सार्वजनिक निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे”। संशोधन के बाद, अब यह लिखा गया है, “इन नियमों में चुनाव से संबंधित निर्दिष्ट सभी अन्य कागजात सार्वजनिक निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे।”</div>
<div>यह कदम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा चुनाव आयोग को हाल ही में दिए गए निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें हरियाणा विधानसभा चुनाव से संबंधित सभी दस्तावेज साझा करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें सीसीटीवी फुटेज को भी चुनाव संचालन नियमों के नियम 93(2) के तहत स्वीकार्य माना गया था, तथा यह निर्देश महमूद प्राचा नामक याचिकाकर्ता के साथ साझा किया गया था।</div>
<div> </div>
<div>चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "नियम में चुनाव पत्रों का उल्लेख किया गया है। चुनाव पत्र और दस्तावेज विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का उल्लेख नहीं करते हैं। इस अस्पष्टता को दूर करने और मतदान की गोपनीयता के उल्लंघन और एक व्यक्ति द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके मतदान केंद्र के अंदर के सीसीटीवी फुटेज के संभावित दुरुपयोग के गंभीर मुद्दे पर विचार करने के लिए, मतदान केंद्र के अंदर के सीसीटीवी फुटेज के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियम में संशोधन किया गया है।"</div>
<div>उन्होंने कहा, "सीसीटीवी फुटेज साझा करने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं, खासकर जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों आदि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में, जहां गोपनीयता महत्वपूर्ण है। मतदाताओं की जान भी जोखिम में पड़ सकती है। सभी चुनावी कागजात और दस्तावेज वैसे भी जनता के निरीक्षण के लिए उपलब्ध हैं।"</div>
<div> </div>
<div>अधिकारी ने कहा, "किसी भी मामले में उम्मीदवारों के पास सभी दस्तावेजों, कागजात और रिकॉर्ड तक पहुंच होती है। यहां तक कि श्री प्राचा भी अपने निर्वाचन क्षेत्र से सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड के हकदार थे, जब उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।" उन्होंने कहा कि इस संबंध में नियमों में कोई संशोधन नहीं किया गया है। हालांकि, आरटीआई कार्यकर्ताओं ने इस कदम को पारदर्शिता के लिए झटका बताया। पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने कहा, "पारदर्शिता के लिए बहुत बड़ा झटका! मोदी सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव संबंधी रिकॉर्ड तक लोगों के पहुँच के अधिकार को प्रतिबंधित करने के लिए चुनाव संचालन नियम के नियम 93(2) में संशोधन किया है! फॉर्म 17सी की प्रतियों के लिए हमने नियम 93(2) के तहत मई 2024 में जो आवेदन दायर किए थे, वे अभी भी लंबित हैं।"</div>
<div> </div>
<div>कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के निदेशक वेंकटेश नायक ने द हिंदू को बताया , "प्रारंभिक जांच से ऐसा प्रतीत होता है कि संशोधन का उद्देश्य संसदीय और राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान बनाए गए बड़ी संख्या में दस्तावेजों तक नागरिक-मतदाताओं की पहुंच को प्रतिबंधित करना है, जिनमें से कई का चुनाव नियमों के संचालन में विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया है; इसके बजाय, उनका उल्लेख समय-समय पर चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित पुस्तिकाओं और मैनुअल में किया गया है।" इनमें से कुछ रिकार्ड चुनाव पर्यवेक्षकों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट, मतदान के बाद रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट और परिणामों की घोषणा के बाद भारत निर्वाचन आयोग को भेजे गए इंडेक्स कार्ड हैं, जिनमें चुनाव से संबंधित विस्तृत आंकड़े शामिल हैं।</div>
<div> </div>
<div>नायक ने कहा कि हाल ही में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत को लेकर उठे विवाद को देखते हुए, पीठासीन अधिकारियों की डायरियों तक पहुँच का उल्लेख चुनाव नियमों में नहीं किया गया है, जिसमें मतदान के दिन अलग-अलग समय पर मतदान प्रतिशत का विस्तृत डेटा होता है और मतदान समाप्ति के समय कतार में लगे मतदाताओं को उनके द्वारा वितरित किए गए टोकन की संख्या का भी उल्लेख किया गया है। "फिर भी, चुनावों की निष्पक्षता का आकलन करने के लिए ऐसे दस्तावेजों तक पहुँच बहुत महत्वपूर्ण है। संशोधन का उद्देश्य ऐसे दस्तावेजों और कई अन्य रिपोर्टों और रिटर्न तक पहुँच को रोकना है जो विभिन्न चुनाव अधिकारियों द्वारा दायर किए जाते हैं।"</div>
<div> </div>
<div>विपक्षी कांग्रेस ने दावा किया कि चुनाव संचालन संबंधी नियमों में बदलाव, उनके इस दावे को पुष्ट करता है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रबंधित चुनावी प्रक्रिया की सत्यनिष्ठा तेजी से खत्म हो रही है।कांग्रेस संचार प्रमुख जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "अगर हाल के दिनों में भारत के चुनाव आयोग द्वारा प्रबंधित चुनावी प्रक्रिया की तेज़ी से कम होती अखंडता के बारे में हमारे दावों की पुष्टि हुई है, तो यह वही है। सूरज की रोशनी सबसे अच्छा कीटाणुनाशक है, और जानकारी प्रक्रिया में विश्वास बहाल करेगी - एक तर्क जिससे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय सहमत था जब उसने ईसीआई को निर्देश दिया कि वह सभी जानकारी साझा करे जो कानूनी रूप से जनता के साथ साझा करना आवश्यक है।"</div>
<div>उन्होंने कहा, "फिर भी चुनाव आयोग ने फैसले का पालन करने के बजाय, साझा की जा सकने वाली चीज़ों की सूची को छोटा करने के लिए कानून में संशोधन करने की जल्दीबाज़ी की। चुनाव आयोग पारदर्शिता से इतना क्यों डरता है? चुनाव आयोग के इस कदम को तुरंत कानूनी तौर पर चुनौती दी जाएगी।"</div>
</div>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 17:32:22 +0530</pubDate>
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                <title>आईसीआईएडीआर-2024  वैश्विक विशेषज्ञता और राष्ट्रीय प्रतिभा के बीच एक केंद्र बिंदु बनेगा: प्रो. वी.  रविचंद्रन कुलपति</title>
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                        <![CDATA[<div>दिल्ली फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (डीपीएसआरयू), डीपीएसआरयू इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन फाउंडेशन (डीआईआईएफ) के सहयोग से, 9 और 10 दिसंबर, 2024 को एडवांस्ड ड्रग रिसर्च (आईसीआईएडीआर-2024) में नवाचारों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए तैयार हो रही है। कार्यक्रम जी.के. नारायणन ऑडिटोरियम, डीपीएसआरयू परिसर, नई दिल्ली में होगा  यह प्रयास अकादमिक अनुसंधान को वास्तविक दुनिया के समाधानों में बदलने में मदद करने के लिए शिक्षाविदों, उद्यमियों और उद्योग विशेषज्ञों को एक साथ लाने के लिए तैयार किया गया है।</div>
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<div>डीपीएसआरयू भारत का पहला फार्मेसी विश्वविद्यालय है, जिसे 2015 में दिल्ली सरकार द्वारा स्थापित किया गया था, और इसे</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146830/iciadr-2024-will-be-a-focal-point-between-global-expertise-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-12/प्रो.-वी. -रविचंद्रन-कुलपति.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (डीपीएसआरयू), डीपीएसआरयू इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन फाउंडेशन (डीआईआईएफ) के सहयोग से, 9 और 10 दिसंबर, 2024 को एडवांस्ड ड्रग रिसर्च (आईसीआईएडीआर-2024) में नवाचारों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए तैयार हो रही है। कार्यक्रम जी.के. नारायणन ऑडिटोरियम, डीपीएसआरयू परिसर, नई दिल्ली में होगा  यह प्रयास अकादमिक अनुसंधान को वास्तविक दुनिया के समाधानों में बदलने में मदद करने के लिए शिक्षाविदों, उद्यमियों और उद्योग विशेषज्ञों को एक साथ लाने के लिए तैयार किया गया है।</div>
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<div>डीपीएसआरयू भारत का पहला फार्मेसी विश्वविद्यालय है, जिसे 2015 में दिल्ली सरकार द्वारा स्थापित किया गया था, और इसे फार्मास्युटिकल शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है। डीपीएसआरयू के पास अकादमिक उत्कृष्टता और अभूतपूर्व अनुसंधान की विरासत है। डीपीएसआरयू इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन फाउंडेशन (डीआईआईएफ) हेल्थकेयर स्टार्टअप और सहयोग को बढ़ावा देने का केंद्र बन गया है। अपनी अत्याधुनिक सुविधाओं और वैश्विक साझेदारियों के साथ, डीपीएसआरयू फार्मास्युटिकल और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उद्यमशीलता में तेजी ला रहा है।</div>
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<div>उम्मीद है कि आईसीआईएडीआर-2024 स्वास्थ्य सेवा नवाचार में नए मानक स्थापित करेगा, जिससे वैश्विक विशेषज्ञता और राष्ट्रीय प्रतिभा के बीच एक केंद्र बिंदु बनेगा डीपीएसआरयू के कुलपति और डीआईआईएफ के अध्यक्ष प्रो. वी.रविचंद्रन द्वारा आयोजित और डीआईआईएफ की निदेशक प्रो. हरविंदर पोपली सह-संयोजक द्वारा शिक्षा जगत, उद्योग और स्टार्टअप के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया है।  मुख्य विषयों में अनुवाद संबंधी अनुसंधान और व्यावसायीकरण, स्वास्थ्य देखभाल उद्यमिता और नवाचार, फार्मास्युटिकल प्रौद्योगिकी, सटीक चिकित्सा और टिकाऊ स्वास्थ्य देखभाल समाधान शामिल हैं।</div>
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<div>मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ0 मधु गुप्ता ने ब्यूरो चीफ़ विजय गौड़ को बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य उपस्थित लोगों को अपने नवीन विचारों को व्यावहारिक, बाजार-तैयार समाधानों में बदलने के लिए प्रोत्साहित करना है। दो दिवसीय सम्मेलन में वक्ताओं की एक विशिष्ट श्रृंखला शामिल है, जिसमें प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित शिक्षाविद और उद्योग के नेता डॉ. राजीव रघुवंशी, भारत के औषधि महानियंत्रक, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।</div>
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<div>डॉ. मनीष दीवान, मिशन निदेशक, मेक इन इंडिया बायोटेक सेक्टर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग मुख्य भाषण देंगे। एमएसएमई विकास संगठन के संयुक्त निदेशक डॉ. आरके भारती विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में डॉ. राज के. शिरुमल्ला, मिशन निदेशक, प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट - नेशनल बायोफार्मा मिशन, बीआईआरएसी, नई दिल्ली की भी मेजबानी की जाएगी, जो डॉ. सी.एन. के साथ एक विशेष अतिथि के रूप में स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर चर्चा करेंगे। सम्मानित अतिथि के रूप में मैगजीनोम टेक्नोलॉजीज के सीईओ रामचंद।सम्मेलन में ऑबर्न विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं की एक प्रभावशाली श्रृंखला शामिल होगी,</div>
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<div>जिसमें डॉ. जयचंद्र बाबू रामपुरम, डॉ. एलिजाबेथ लिपके, डॉ. टिमोथी मूर, डॉ. राजेश अमीन, डॉ. मीनाक्षी सिंह जैसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो अभूतपूर्व शोध साझा करेंगे। कंप्यूटर-सहायता प्राप्त दवा डिजाइन, अल्जाइमर के लिए नवीन उपचार, 3डी प्रिंटिंग तकनीक और उन्नत बायोमटेरियल्स जैसे क्षेत्र। इन अकादमिक अंतर्दृष्टि को लागू करते हुए, यह कार्यक्रम सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के डॉ. आशीष अरोड़ा और अकुम्स ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की सुश्री अरुशी जैन जैसे उद्योग जगत के नेताओं की मेजबानी करेगा, जो अनुसंधान और व्यावसायीकरण को जोड़ने पर कार्रवाई योग्य दृष्टिकोण प्रदान करेंगे।</div>
<div>साथ में, ये वक्ता खोज से लेकर बाजार कार्यान्वयन तक नवाचार के व्यापक दृष्टिकोण का वादा करते हैं। सह संयोजक के मार्गदर्शन में आयोजन किया गया</div>
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<div>डीआईआईएफ के निदेशक प्रोफेसर हरविंदर पोपली और प्रोफेसर पी.के. साहू, डीपीएसआरयू के रजिस्ट्रार, आईसीआईएडीआर-2024 उभरती प्रौद्योगिकियों, उद्यमशीलता रणनीतियों और महत्व उद्योग-अकादमिक टीम वर्क पर सत्र आयोजित करेंगे। सम्मेलन की एक अनूठी विशेषता युवा शोधकर्ताओं को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करना और योग्य उद्यमियों को धन उपलब्ध कराने में मदद करना है। 33 से अधिक स्टार्टअप को समर्थन देने के लिए प्रसिद्ध डीआईआईएफ उन प्रतिभागियों को सलाह और इनक्यूबेशन सहायता प्रदान करेगा, जिनका लक्ष्य अपने शोध का व्यावसायीकरण करना है।सम्मेलन समन्वयक डॉ. मिनाक्षी गर्ग और सुश्री रुचि सिंह नीखरा ने प्रारंभिक चरण के नवप्रवर्तकों को संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान करने के महत्व पर जोर दिया।</div>
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<div>यह सम्मेलन हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल अनुसंधान और रुझानों में नवाचार, हेल्थकेयर नवाचारों के विपणन और व्यावसायीकरण, ड्रग तंत्र और वैयक्तिकृत हेल्थकेयर जैसे विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला पर पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। सर्वश्रेष्ठ पोस्टरों के लिए पुरस्कार दिये जायेंगे। सम्मेलन को पंजीकरण के लिए पहले से ही जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, समय सीमा से पहले ही स्थान भर गए हैं, जो इस अद्वितीय आयोजन के लिए वैश्विक वैज्ञानिक और औद्योगिक समुदाय के बीच उत्साह और उत्साह को दर्शाता है।</div>]]>
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                                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 16:59:10 +0530</pubDate>
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                <title>ईडी की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट का अंकुश। अधिकारियों पर मुकदमे के लिए पूर्व मंजूरी ज़रूरी।</title>
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<div><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी को झटका दिया है। इसने कहा है कि लोक सेवकों के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुक़दमा चलाने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेना ज़रूरी है। तेलंगाना के दो अधिकारियों के ख़िलाफ़ ईडी की कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि सीआरपीसी की धारा 197 (1) की तरह ही पीएमएलए के तहत ईडी द्वारा दायर अभियोजन की शिकायत (चार्जशीट) का संज्ञान लेने के लिए मंजूरी लेना ट्रायल कोर्ट के लिए अनिवार्य है। जस्टिस ओका और जस्टिस मसीह ने</div></div></div></div></div></div></div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146053/supreme-court-curbs-the-arbitrariness-of-ed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/ईडी-की-मनमानी-पर-सुप्रीम-कोर्ट-का-अंकुश।-अधिकारियों-पर-मुकदमे-के-लिए-पूर्व-मंजूरी-ज़रूरी।.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी को झटका दिया है। इसने कहा है कि लोक सेवकों के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुक़दमा चलाने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेना ज़रूरी है। तेलंगाना के दो अधिकारियों के ख़िलाफ़ ईडी की कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि सीआरपीसी की धारा 197 (1) की तरह ही पीएमएलए के तहत ईडी द्वारा दायर अभियोजन की शिकायत (चार्जशीट) का संज्ञान लेने के लिए मंजूरी लेना ट्रायल कोर्ट के लिए अनिवार्य है। जस्टिस ओका और जस्टिस मसीह ने यह फ़ैसला दिया है। अब तक ईडी द्वारा दायर सभी चार्जशीट अभियोजन मंजूरी के बिना हैं और कई मामलों में ट्रायल कोर्ट ने उन चार्जशीटों का संज्ञान लिया है। इस फैसले का अब परिणाम यह होगा कि ईडी की इन कार्रवाइयों को चुनौती दी जाएगी।</div>
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<div>उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197(1), जो यह प्रावधान करती है कि सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान कथित अपराधों के लिए लोक सेवकों और न्यायाधीशों पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है, धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामलों पर भी लागू होगी। न्यायमूर्ति अभय ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें पूर्व मंजूरी के अभाव के आधार पर एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया गया था।</div>
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<div>" अपील खारिज कर दी गई। हमने माना है कि धारा 197(1) सीआरपीसी के प्रावधान पीएमएलए पर लागू होंगे ", न्यायमूर्ति ओका ने फैसला सुनाया। (प्रवर्तन निदेशालय इत्यादि बनाम बिभु प्रसाद आचार्यसीआरएल.ए. नं. 4314-4316/2024) सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह माना कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी की धारा 197 (1) जो लोक सेवक के ख़िलाफ़ अपराध का संज्ञान लेने के लिए सरकार से पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य करती है, वह मनी लॉन्ड्रिंग यानी पीएमएलए के मामले में भी लागू होती है।</div>
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<div>द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह कहते हुए जस्टिस ए एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मासीह की पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। इसने आईएएस अधिकारियों बिभु प्रसाद आचार्य और आदित्यनाथ दास के खिलाफ शिकायत का संज्ञान लेते हुए एक ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। आँध्र प्रदेश के पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी के साथ ही दोनों अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था।</div>
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<div>ट्रायल कोर्ट के आदेश को तेलंगाना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो हाईकोर्ट ने ईडी के ख़िलाफ़ फ़ैसला दिया था। हाईकोर्ट के इसी फ़ैसले के ख़िलाफ़ ईडी ने चुनौती देने वाली अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। ईडी ने कहा कि आचार्य सीआरपीसी की धारा 197 (1) के तहत एक लोक सेवक नहीं थे, क्योंकि यह नहीं कहा जा सकता है कि उक्त पद को धारण करते समय वह पद से हटाने योग्य नहीं थे।</div>
<div> </div>
<div>ईडी ने यह भी कहा कि पीएमएलए की धारा 71 के मद्देनजर इसके प्रावधानों को सीआरपीसी सहित अन्य क़ानूनों के प्रावधानों पर अधिक तरजीह मिलती है। प्रतिवादी बिभु प्रसाद आचार्य के खिलाफ़ आरोपों में भूमि आवंटन में आधिकारिक पद का दुरुपयोग, संपत्तियों का कम मूल्यांकन और अनधिकृत रियायतें शामिल थीं, जिनसे कथित तौर पर आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी से जुड़ी निजी कंपनियों को फ़ायदा पहुँचा, जबकि सरकार को काफ़ी वित्तीय नुकसान हुआ। ईडी ने आरोप लगाया कि आचार्य ने इन लेन-देन को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रमुख हस्तियों के साथ साजिश रची।</div>
<div> </div>
<div>उच्च न्यायालय के समक्ष आचार्य ने तर्क दिया कि उन्होंने आधिकारिक क्षमता के अंतर्गत कार्य किया है तथा अभियोजन के लिए सीआरपीसी की धारा 197 के तहत सरकार की पूर्व मंजूरी आवश्यक है।</div>
<div>ईडी ने तर्क दिया कि पीएमएलए एक विशेष क़ानून है जिसमें धारा 65 और 71 के तहत अधिभावी प्रावधान हैं, इसलिए इसके लिए ऐसी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है। ईडी ने कहा कि आरोपों में निजी लाभ के लिए आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग शामिल है, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 21 जनवरी, 2019 को पीएमएलए के तहत कार्यवाही में विशेष न्यायाधीश द्वारा जारी किए गए संज्ञान आदेशों को रद्द करते हुए निरस्तीकरण याचिका को अनुमति दे दी। उच्च न्यायालय ने माना कि सीआरपीसी की धारा 197 के तहत आवश्यक पूर्व मंजूरी की कमी ने संज्ञान आदेशों को अस्थिर बना दिया।</div>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Nov 2024 16:37:58 +0530</pubDate>
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                <title>पराली जलाने के मामले में  पंजाब-हरियाणा को सुप्रीम कोर्ट की फटकार।</title>
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                        <![CDATA[<div><strong>ब्यूरो नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर गलतबयानी के लिए पंजाब और हरियाणा सरकार की जमकर खिंचाई की। अदालत ने कहा कि दोनों राज्यों ने पराली जलाने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। अदालत ने कहा कि अगर ये सरकारें सच में कानून को लागू करने में रुचि रखती हैं तो कम से कम एक अभियोजन जरूर होगा।</div>
<div>  </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव से कहा कि करीब 1080 उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन आपने सिर्फ 473 लोगों से मामूली जुर्माना वसूला है। आप 600 या उससे ज्यादा लोगों को बख्श रहे</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145738/draft-add-your-title-supreme-court-reprimands-punjab-haryana-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/पराली-जलाने-के-मामले-में -पंजाब-हरियाणा-को-सुप्रीम-कोर्ट-की-फटकार।.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>ब्यूरो नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर गलतबयानी के लिए पंजाब और हरियाणा सरकार की जमकर खिंचाई की। अदालत ने कहा कि दोनों राज्यों ने पराली जलाने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। अदालत ने कहा कि अगर ये सरकारें सच में कानून को लागू करने में रुचि रखती हैं तो कम से कम एक अभियोजन जरूर होगा।</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव से कहा कि करीब 1080 उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन आपने सिर्फ 473 लोगों से मामूली जुर्माना वसूला है। आप 600 या उससे ज्यादा लोगों को बख्श रहे हैं। हम आपको साफ-साफ बता दें कि आप उल्लंघनकर्ताओं को यह संकेत दे रहे हैं कि उनके खिलाफ कुछ नहीं किया जाएगा। यह पिछले तीन सालों से हो रहा है।</div>
<div> </div>
<div>हरियाणा के मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 400 फसल जलाने की घटनाएं हुईं। साथ ही राज्य में 32 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पराली जलाने वालों के आंकड़ों के बारे में झूठ बोला जा रहा है। आंकड़े हर मिनट बदल रहे हैं।</div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हरियाणा लोगों का चयन कर रहा है। उसके अनुसार कुछ लोगों से मुआवजा लिया जा रहा और कुछ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। पीठ ने कहा, 'हम कुछ पर एफआईआर दर्ज करने और कुछ पर मामूली जुर्माना लगाने को लेकर चिंतित हैं।'</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव से पूछा, पराली के बारे में क्या किया जा रहा है और क्या किसानों को कुछ प्रदान किया गया है? इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि पराली के निस्तारण के लिए करीब एक लाख मशीनें दी गई हैं, जिससे पराली जलाने में कमी आई है।</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और पंजाब तथा हरियाणा राज्यों को यह याद दिलाने का समय आ गया है कि प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। वायु प्रदूषण के मामले को दिवाली के बाद स्थगित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दिल्ली में परिवहन से उत्पन्न प्रदूषण, शहर में भारी ट्रकों के प्रवेश और खुले में कूड़ा जलाने के मुद्दों पर विचार करेगा।</div>]]>
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                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Oct 2024 17:33:22 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली नगर निगम उड़ा रही जनता के खून पसीने की कमाई धुएं में</title>
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                        <![CDATA[<div><strong>नई दिल्ली:</strong> देश में बदलते मौसम से विभिन्न संस्कृति, रीति रिवाज आदि जुड़े है तो वही कुछ मौसम के बदलाव से जनता को कुछ परेशानियों से भी दो चार होना पड़ता है ऐसा ही गर्मी के बाद और सर्दी का मौसम शुरू होने से पहले बरसात का मौसम होता है जिससे कई फायदे है तो कई प्रकार की बीमारियां एवं महामारियां भी फैलती है जो कि ज्यादातर मच्छरों से होती है। इस मौसम में मच्छर बहुत ज्यादा हो जाते है तब मच्छरों से जानता को बचाने के लिए ही तीनों दिल्ली नगर निगम द्वारा फ्यूमिगेशन (धुएं का प्रयोग) कर इसकी</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145548/delhi-municipal-corporation-is-wasting-peoples-hard-earned-money-up-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/img-20241015-wa0080.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली:</strong> देश में बदलते मौसम से विभिन्न संस्कृति, रीति रिवाज आदि जुड़े है तो वही कुछ मौसम के बदलाव से जनता को कुछ परेशानियों से भी दो चार होना पड़ता है ऐसा ही गर्मी के बाद और सर्दी का मौसम शुरू होने से पहले बरसात का मौसम होता है जिससे कई फायदे है तो कई प्रकार की बीमारियां एवं महामारियां भी फैलती है जो कि ज्यादातर मच्छरों से होती है। इस मौसम में मच्छर बहुत ज्यादा हो जाते है तब मच्छरों से जानता को बचाने के लिए ही तीनों दिल्ली नगर निगम द्वारा फ्यूमिगेशन (धुएं का प्रयोग) कर इसकी रोकथाम करती है।</div>
<div> </div>
<div>उपरोक्त संदर्भ पर विख्यात समाजसेवी, फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रीक्ट वेलफेयर फोरम सचिव एवं राष्ट्रीय युवा चेतना मंच भारत के राष्ट्रीय महासचिव महेश मिश्रा ने बताया कि आजकल नगर निगम मच्छरों पर रोकथाम के लिए जो फ्यूमिगेशन कराती है वोह दिन में कराती है ओर वह भी सिर्फ घरों के अंदर जबकि अगर हम वर्षों पहले की बात करे तो यही फ्यूमिगेशन गाड़ी द्वारा रात लगभग 7 से 8 बजे के आसपास गली, मोहल्ले व सड़को पर कराया जाता था जिससे वही धुआं घर में भी आ जाता था और मच्छरों से ज्यादातर निजात भी मिलती थी मगर आजकल यह कार्य एक अच्छी खासी टीम को हाथों में फ्यूमिगेशन यंत्र पकड़ा दिन में घरों में कराया जाता है</div>
<div> </div>
<div>जिससे मच्छर तो नहीं भागते लेकिन जनता के से एकत्रित टैक्स के पैसों में धुआं जरूर लगाया जा रहा है क्योंकि मच्छर शाम को अधिक सक्रिय होते है और धुआं करने का सही समय भी शाम को ही है लेकिन दिन में घरों में धुआं किया जाता है जिससे घर में अगर गलती से एक आधा मच्छर हो भी तो अपने बचाव के लिए बाहर भाग जाते हे और रात में जनता के खून चूसने के लिए तत्पर हो कार्य करते है यहां तक दिन में इस कार्य को करने वाले कर्मचारियों इस बात को स्वीकारते है तथा उन्होंने स्वयं कहा कि दिन में इस करवाई का कोई औचित्य नहीं होता लेकिन हमे अधिकारियो द्वारा मिले निर्देशों का निर्वाह करना होता है मिश्रा ने आगे बताया कि जहां पहले के अधिकारी इन बातों को समझते थे और उचित समय पर फ्यूमिगेशन कराते थे वहीं आजकल के दिल्ली नगर निगम के अधिकारी जनता के खून पसीने की कमाई को दिन धुएं में उड़ाती है</div>
<div> </div>
<div>फिर शाम को वोही मच्छर उसी जनता का खून चूसते उनके स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते है जिससे अच्छा खासा प्रत्यक्ष और और अप्रत्यक्ष टैक्स भरने के बाद बची कुची कमाई का हिस्सा वह अस्पताल/डाक्टरों के पास भरते है मगर बात यही खत्म नहीं होती कई बार मच्छरों का हमला इतना खतरनाक होता है कि कइयों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ता है।इसलिए हम दिल्ली नगर निगम के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व निगमायुक्त से निवेदन करते है कि फ्यूमिगेशन का समय शाम को निर्धारित किया जाए व फ्यूमिगेशन पूरे क्षेत्र में किया जाए न कि कुछ घरों में जैसा कि दशकों पहले से होता आ रहा था</div>
<div> </div>
<div>तथा इसको बदलने वाले अधिकारियो से रिपोर्ट ली जाए कि समय बदल कर जनता के खून पसीने की कमाई के टैक्स का पैसा तथा उसके बाद उनकी बची हुई कमाई और उस सबसे भी बढ़कर उनकी जान माल की हानि को बढ़ावा देने वाली प्रक्रिया किस आधार पर शुरू की गई उपरोक्त विषय पर अगर आप के कार्यक्षेत्र में नहीं आता है तो कृपया इस विज्ञप्ति को संबधित संवाददाता को भेज दे और हमे भी उनका परिचय भेज दे। धन्यवाद</div>]]>
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                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2024 16:31:02 +0530</pubDate>
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                <title>लैंड फॉर जॉब में तेजस्वी, तेजप्रताप और लालू यादव तीनों को जमानत मिली।</title>
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                        <![CDATA[<div class="adn ads">
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<div><strong>नई दिल्ली। जेपी सिंह।</strong></div>
<div>लैंड फॉर जॉब मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटों और पार्टी नेताओं तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को जमानत दे दी है। उन्हें 1-1 लाख रुपये के जमानत बांड पर जमानत दी गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने‘नौकरी के बदले जमीन’ से जुड़े धनशोधन मामले में सोमवार को जमानत दी गई। अगली सुनवाई की तारीख 25 अक्टूबर है।</div>
<div>  </div>
<div>विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देते हुए कहा कि जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया</div></div></div></div></div></div></div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145422/tejashwi-tej-pratap-and-lalu-yadav-got-bail-in-land"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/लैंड-फॉर-जॉब-में-तेजस्वी,-तेजप्रताप-और-लालू-यादव-तीनों-को-जमानत-मिली।.webp" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div><strong>नई दिल्ली। जेपी सिंह।</strong></div>
<div>लैंड फॉर जॉब मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटों और पार्टी नेताओं तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को जमानत दे दी है। उन्हें 1-1 लाख रुपये के जमानत बांड पर जमानत दी गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने‘नौकरी के बदले जमीन’ से जुड़े धनशोधन मामले में सोमवार को जमानत दी गई। अगली सुनवाई की तारीख 25 अक्टूबर है।</div>
<div> </div>
<div>विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देते हुए कहा कि जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था। अदालत द्वारा पहले जारी किए गए समन के अनुपालन के तहत आरोपी उसके समक्ष पेश हुए।न्यायाधीश ने आरोपियों के खिलाफ दाखिल पूरक आरोप पत्र का संज्ञान लेने के बाद समन जारी किए थे।</div>
<div> </div>
<div> प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छह अगस्त को अदालत के समक्ष अंतिम रिपोर्ट दायर की थी। ईडी ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर अपना मामला दायर किया।</div>
<div>जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला 2004 से 2009 तक रेल मंत्री के रूप में लालू के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में रेलवे के पश्चिम-मध्य जोन में ग्रुप-डी में हुई भर्तियों से जुड़ा है। आरोप है कि रेलवे में भर्ती होने वाले लोगों ने नौकरी के बदले लालू के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों को उपहार स्वरूप जमीन दी थी।</div>
<div> </div>
<div>सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत से कहा कि राबड़ी देवी, हेमा यादव और मीसा यादव को जमानत देने के पिछले आदेश की तरह ही डायरेक्शन दिये जा सकते हैं। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को अपने पासपोर्ट अदालत में जमा करने का निर्देश दिया।आरोप तय करने पर जिरह से पहले चार्जशीट और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच यानी स्क्रूटनी की कानूनी प्रकिया का पालन किया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>ईडी ने चार्जशीट में तेजप्रताप यादव को आरोपी नहीं बनाया था, लेकिन कोर्ट ने तेज प्रताप यादव को समन जारी करते हुए कहा था तेज प्रताप यादव भी लालू यादव परिवार के सदस्य हैं और मनी लांड्रिंग में इनकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा था कि बड़ी तादाद में जमीन के टुकड़ों और संपत्तियों का ट्रासंफर हुआ है। यादव परिवार ने पद का दुरुपयोग किया है. कोर्ट ने कहा था कि यादव परिवार के नाम पर भूखंड ट्रांसफर हुए हैं।</div>
<div> </div>
<div>लालू, तेजस्वी, तेजप्रताप के साथ मीसा भारती भी हैं। लेकिन मीसा भारती को ईडी मामले में पहले ही समन जारी हो चुका है और उनको जमानत मिली हुई है। आज के समन के हिसाब से मीसा भारती को पेश होने की जरूरत नहीं थी।</div>
<div> </div>
<div>मामले में तेजस्वी यादव ने कहा,'राजनीतिक प्रतिशोध के हिसाब से केस किया गया है।एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। हमें न्यायलय पर पूरा भरोसा है। ये लोग (बीजेपी) बार-बार राजनीतिक षड्यंत्र करते रहते हैं, एजेंसियों का दुरूपयोग करते हैं।इस केस में कहीं भी दम नहीं है. हमारी जीत तय है।</div>
<div>लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में सुनवाई के लिए ईडी  की पूरक चार्जशीट के आधार पर कोर्ट ने आरोपियों को समन किया था। तेजप्रताप यादव इस मामले में पहली बार कोर्ट में पेश हुए।पेशी के लिए लालू यादव अपनी बेटियों मीसा भारती और रोहिणी आचार्य के साथ रविवार रात को ही पटना से दिल्ली पहुंच गये थे। वहीं, पेशी के लिए तेजस्वी यादव भी विदेश दौरे से दिल्ली लौट आये थे।</div>
<div> </div>
<div>आरोप है कि 2004 से 2009 तक भारतीय रेलवे के अलग-अलग जोन में ग्रुप डी पदों पर कई लोगों को नियुक्त किया गया था और बदले में इन लोगों ने अपनी जमीनें तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे संबंधित कंपनी एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित कर दी थी।</div>
<div>लैंड फॉर जॉब' कथित घोटाला उस समय का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे. आरोप के मुताबिक लालू यादव ने रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे में लोगों को नौकरी देने के बदले उनसे जमीन ली थी।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली की अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी और उनकी बेटी मीसा भारती के खिलाफ 28 फरवरी 2023 को भी समन जारी किया था। इस मामले में 10 अक्टूबर 2022 को सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जुलाई 2022 में ही सीबीआई ने भोला यादव को गिरफ्तार किया था, जो लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए उनके ओएसडी थे. सीबीआई का कहना है कि पटना में लालू यादव के परिवार ने 1.05 लाख वर्ग फीट जमीन पर कथित तौर पर कब्जा कर रखा है। इन जमीनों का सौदा नकद में हुआ था. यानी, लालू परिवार ने नकद देकर इन जमीनों को खरीदा था।</div>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 16:57:52 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Office Desk Lucknow]]>
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                <title>'जेल मैनुअल में जाति-आधारित भेदभावपूर्ण प्रथाओं से संबंधित प्रावधान असंवैधानिक': ।सुप्रीम कोर्ट।</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div><strong>नई दिल्ली। </strong>सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि देश भर की जेलों में जाति आधारित भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस मुद्दे की निगरानी के लिए स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया गया( सुकन्या शांता बनाम भारत संघ और अन्य डब्ल्यू.पी.(सी) नंबर 1404/2023 )।सुप्रीम कोर्ट सुकन्या शांता द्वारा दायर जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जेल मैनुअल को संशोधित करने का निर्देश दिया। </div>
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<div>न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि उत्पीड़ित जातियों के कैदियों को केवल इसलिए नीच, अपमानजनक या अमानवीय कार्य नहीं सौंपा जा सकता क्योंकि वे</div>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145303/provisions-relating-to-caste-based-discriminatory-practices-in-jail-manual-held"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/सुप्रीम-कोर्ट।.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली। </strong>सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि देश भर की जेलों में जाति आधारित भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस मुद्दे की निगरानी के लिए स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया गया( सुकन्या शांता बनाम भारत संघ और अन्य डब्ल्यू.पी.(सी) नंबर 1404/2023 )।सुप्रीम कोर्ट सुकन्या शांता द्वारा दायर जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जेल मैनुअल को संशोधित करने का निर्देश दिया। </div>
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<div>न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि उत्पीड़ित जातियों के कैदियों को केवल इसलिए नीच, अपमानजनक या अमानवीय कार्य नहीं सौंपा जा सकता क्योंकि वे हाशिए पर पड़ी जातियों से हैं।' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जेल मैनुअल में जाति-आधारित भेदभावपूर्ण प्रथाओं से संबंधित प्रावधान असंवैधानिक' है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई)  डीवाई चंद्रचूड़,  न्यायमूर्ति  जेबी पारदीवाला  और  न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने राज्यों को चेतावनी दी कि यदि जेलों में किसी भी प्रकार का जाति आधारित भेदभाव पाया गया तो इसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div> न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उत्पीड़ित जातियों के कैदियों को केवल इसलिए नीच, अपमानजनक या अमानवीय काम नहीं सौंपा जा सकता क्योंकि वे हाशिए की जातियों से आते हैं। इसलिए न्यायालय ने कुछ राज्यों की जेल नियमावलियों से ऐसी प्रथाओं को सक्षम करने वाले नियमों को निरस्त कर दिया।</div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (3 अक्टूबर) को जेल मैनुअल में जाति-आधारित भेदभावपूर्ण प्रथाओं से संबंधित प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जेल मैनुअल को संशोधित करने का निर्देश दिया।</div>
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<div>भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह भी फैसला सुनाया कि जेल मैनुअल में आदतन अपराधियों के संदर्भ को असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए और यदि राज्य में इसकी कोई संशोधित परिभाषा नहीं है, तो राज्य को एक परिभाषा बनानी चाहिए। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आवश्यक बदलाव करने का निर्देश दिया।अदालत भारतीय जेलों में राज्य द्वारा स्वीकृत जाति-आधारित भेदभाव और अलगाव पर अपने खोजी कार्य के सुकन्या शांता द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।फैसला पढ़ते हुए मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि कैदियों के बीच, जाति को अलगाव के आधार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है और इससे दुश्मनी पैदा होगी।</div>
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<div>सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (3 अक्टूबर) को कहा कि फ़ैसला दो भागों में विभाजित किया गया है - (1) आपराधिक कानूनों को पूर्व-औपनिवेशिक या औपनिवेशिक दर्शन का समर्थन नहीं करना चाहिए और (2) समानता और सम्मान की मुक्ति का संविधान। फैसले में कहा गया है  कि (जेल) मैनुअल उच्च जातियों को खाना बनाने और पकाने के लिए कहकर सीधे भेदभाव करते हैं जबकि निचली जातियों को सफाई का काम करने के लिए कहते हैं। भले ही जाति का अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख किया गया हो, लेकिन 'नीच' और 'आदी' जैसे वाक्यांश समूहों के बीच भेदभाव करते हैं।</div>
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<div>न्यायालय ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश के जेल मैनुअल में कहा गया है कि साधारण कारावास की सजा काट रहा कोई भी व्यक्ति नीच काम नहीं करेगा “ जब तक कि उसकी जाति ऐसे काम करने के लिए इस्तेमाल न की गई हो ।” पीठ ने ऐसे प्रावधानों की आलोचना करते हुए कहा:कि  हमारा मानना है कि कोई भी समूह मैला ढोने वाले वर्ग के रूप में पैदा नहीं होता है या नीच काम करने या न करने के लिए नहीं होता है। कौन खाना बना सकता है और कौन नहीं, यह वर्ग अस्पृश्यता के पहलू हैं, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। जब विमुक्त जनजाति के सदस्यों को जन्म से ही अपराधी और बेईमान माना जाता है, तो वर्ग-आधारित पूर्वाग्रह कायम रहता है। हमने जाति आधारित भेदभाव को दूर करने के अधिकार पर एक खंड के साथ अनुच्छेद 21 की फिर से कल्पना की है।कोई भी समूह मैला ढोने वाले वर्ग के रूप में या नीच काम करने या न करने के लिए पैदा नहीं होता है।</div>
<div> </div>
<div>न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जाति-आधारित कार्य आवंटन को समाप्त करने के लिए अपने जेल मैनुअल को संशोधित करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने केंद्र सरकार को जाति-आधारित अलगाव को संबोधित करने के लिए अपने मॉडल जेल नियमों में आवश्यक बदलाव करने का भी निर्देश दिया। न्यायालय ने आगे निर्देश दिया कि जेल मैनुअल में आदतन अपराधियों का संदर्भ विधायी परिभाषाओं के अनुसार होना चाहिए, उनकी जाति या जनजाति के संदर्भ के बिना।</div>
<div> </div>
<div>क्स्क्स सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि " ऐसे सभी प्रावधान (जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाले) असंवैधानिक माने जाते हैं। सभी राज्यों को निर्णय के अनुसार परिवर्तन करने का निर्देश दिया जाता है। आदतन अपराधियों का संदर्भ आदतन अपराधी विधानों के संदर्भ में होगा और राज्य जेल मैनुअल में आदतन अपराधियों के ऐसे सभी संदर्भों को असंवैधानिक घोषित किया जाता है। दोषी या विचाराधीन कैदियों के रजिस्ट्रार में जाति का कॉलम हटा दिया जाएगा। यह न्यायालय जेलों के अंदर भेदभाव का स्वतः संज्ञान लेता है और रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह तीन महीने के बाद जेलों के अंदर भेदभाव के संबंध में सूची बनाए और राज्य न्यायालय के समक्ष इस निर्णय के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करें । "</div>
<div> </div>
<div>यह याचिका पत्रकार-सुकन्या शांता द्वारा भारत के कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की जेलों में हो रही भेदभावपूर्ण प्रथाओं को उजागर करते हुए दायर की गई थी। उदाहरण के तौर पर स्पष्ट करने के लिए, उन्होंने उल्लेख किया कि पुराने उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल, 1941 में कैदियों के जातिगत पूर्वाग्रहों को बनाए रखने और जाति के आधार पर सफाई, संरक्षण और झाड़ू लगाने का काम करने का प्रावधान था। हालांकि, 2022 में इसे मॉडल मैनुअल के साथ जोड़कर संशोधन किया गया और जाति के आधार पर काम आवंटित करने के प्रावधानों को हटा दिया गया। इस बदलाव के बावजूद, 2022 मैनुअल ने जातिगत पूर्वाग्रह के संरक्षण और आदतन अपराधियों के अलगाव से संबंधित नियम को बरकरार रखा। याचिका में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली, पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र आदि सहित 13 प्रमुख राज्यों के राज्य जेल मैनुअल के भीतर समान भेदभावपूर्ण कानूनों पर प्रकाश डाला गया है।</div>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Oct 2024 16:32:28 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
                    </dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्व विभाग उत्तरी जिले की नरेला सब डिविजन ने बरवाला गांव के समुदाय भवन में पैतृक कृषि भूमि की विरासत म्युटेशन चढ़वाने के लिए लगाया विशेष शिविर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div>स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता </div>
<div>दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग उत्तरी जिले की नरेला सब डिविजन ने बरवाला गांव के समुदाय भवन में आज पैतृक कृषि भूमि की विरासत (म्युटेशन) चढ़वाने के लिए बरवाला , प्रहलादपुर बांगर, पंसाली ओर सुल्तानपुर डबास गांव के किसानों के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में उपस्थित दिल्ली मूल ग्रामीण पंचायत के उपाध्यक्ष प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी शिक्षाविद् डॉ.दयानंद वत्स ने बताया कि प्रातः 11बजे से शुरू हुए इस शिविर में दोपहर तीन बजे तक 17 किसानों के परिवारों ने शिरकत की।</div>
<div>  </div>
<div>आठ किसानों की फाईलें जमा हुई, जिनके सभी दस्तावेज पूरे</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145302/revenue-department-narela-sub-division-of-northern-district-organized-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/img-20241004-wa0124.jpg" alt=""></a><br /><div>स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता </div>
<div>दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग उत्तरी जिले की नरेला सब डिविजन ने बरवाला गांव के समुदाय भवन में आज पैतृक कृषि भूमि की विरासत (म्युटेशन) चढ़वाने के लिए बरवाला , प्रहलादपुर बांगर, पंसाली ओर सुल्तानपुर डबास गांव के किसानों के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में उपस्थित दिल्ली मूल ग्रामीण पंचायत के उपाध्यक्ष प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी शिक्षाविद् डॉ.दयानंद वत्स ने बताया कि प्रातः 11बजे से शुरू हुए इस शिविर में दोपहर तीन बजे तक 17 किसानों के परिवारों ने शिरकत की।</div>
<div> </div>
<div>आठ किसानों की फाईलें जमा हुई, जिनके सभी दस्तावेज पूरे थे। बाकी लोगों को बताया गया कि उन्हें कौन- कौन से दस्तावेज आवेदन पत्र के साथ लगाने हैं। शिविर में एसडीएम नरेला का स्टाफ मौजूद था जिसमें रीडर श्री रोहित व अन्य ने किसान परिवारों का अच्छी तरह से मार्गदर्शन किया ओर उन्हें फार्म उपलब्ध कराए। कुछ ग्रामीणों ने अपने आधार कार्ड भी अपडेट कराएं। वत्स ने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने दिल्ली के गांवों की कृषि भूमि के म्युटेशन अभी हाल ही में खोली है जिसके तहत पैतृक कृषि भूमि के दिवंगत मुखिया के कानूनी वारिस अपने सभी दस्तावेज लगाकर अपने नाम विरासत चढ़वा सकते हैं। दिल्ली मूल ग्रामीण पंचायत ने उपराज्यपाल द्वारा म्यूटेशन खोलने ओर गांवों में शिविर लगाने का स्वागत किया है।  </div>]]>
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                                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Oct 2024 16:25:17 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूएपीए में मंजूरी देने के लिए 14 दिन की समयसीमा अनिवार्य है: सुप्रीम कोर्ट।</title>
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                        <![CDATA[<div class="adn ads">
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<div><strong>नई दिल्ली: </strong> सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंध देने के लिए 14 दिन की समयसीमा अनिवार्य है, न कि विवेकाधीन। इससे केंद्र और राज्य सरकारों दोनों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में तेजी से कार्रवाई करना अनिवार्य हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समयसीमा के सख्त पालन के संबंध में उसका फैसला किसी भी पिछले फैसले को प्रभावित नहीं करेगा और यह भविष्य में भी लागू रहेगा।</div>
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<div>विभिन्न उच्च न्यायालयों की परस्पर विरोधी व्याख्याओं का निपटारा करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारों के लिए समय-सीमा का पालन</div></div></div></div></div></div></div>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145089/the-supreme-court-has-mandated-a-time-limit-of-14"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/supream-court21.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div><strong>नई दिल्ली: </strong> सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंध देने के लिए 14 दिन की समयसीमा अनिवार्य है, न कि विवेकाधीन। इससे केंद्र और राज्य सरकारों दोनों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में तेजी से कार्रवाई करना अनिवार्य हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समयसीमा के सख्त पालन के संबंध में उसका फैसला किसी भी पिछले फैसले को प्रभावित नहीं करेगा और यह भविष्य में भी लागू रहेगा।</div>
<div> </div>
<div>विभिन्न उच्च न्यायालयों की परस्पर विरोधी व्याख्याओं का निपटारा करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारों के लिए समय-सीमा का पालन करना अनिवार्य कर दिया, अन्यथा देरी के कारण आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने सहित गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।</div>
<div>न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने सरकार को यह कड़ा संदेश दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से निपटने में आत्मसंतुष्टि की कोई गुंजाइश नहीं है। समय पर निर्णय लेने की महत्वपूर्ण प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए पीठ ने कहा: "राष्ट्रीय सुरक्षा के संरक्षण के आदर्श को आगे बढ़ाने के लिए कार्यपालिका से यह अपेक्षा की जाती है कि वह तेजी और तत्परता से काम करेगी।"</div>
<div> </div>
<div>फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि प्रतिबंध प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी आतंकवाद विरोधी कानून के मूल उद्देश्य को कमजोर कर सकती है, जिसे आतंकवाद और गैरकानूनी गतिविधियों से दक्षता और जवाबदेही के साथ निपटने के लिए बनाया गया है। निश्चित रूप से, अदालत ने स्पष्ट किया कि समयसीमा के सख्त पालन के संबंध में उसका फैसला किसी भी पिछले फैसले को प्रभावित नहीं करेगा और यह फैसला भविष्य में लागू होगा।</div>
<div> </div>
<div>इसने यह भी रेखांकित किया कि वैधानिक समयसीमा का पालन न करना न केवल प्रक्रियागत आवश्यकताओं का उल्लंघन करता है, बल्कि अभियुक्तों के अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। अदालत ने कहा, "ऐसे मामलों में समयसीमा जाँच और संतुलन के आवश्यक पहलुओं के रूप में काम करती है और निश्चित रूप से, निस्संदेह महत्वपूर्ण है। ऐसी सीमाओं के बिना, सत्ता बेलगाम लोगों के दायरे में प्रवेश करेगी, जो एक लोकतांत्रिक समाज के लिए विरोधाभासी है।"</div>
<div> </div>
<div>अदालत ने कहा "यूएपीए एक दंडात्मक कानून है, इसलिए इसे सख्त रूप दिया जाना चाहिए। वैधानिक नियमों के माध्यम से लगाई गई समयसीमा कार्यकारी शक्ति पर नियंत्रण रखने का एक तरीका है, जो आरोपी व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक आवश्यक स्थिति है।" यह निर्णय यूएपीए के तहत प्रतिबंधों को संभालने के तरीके के लिए एक नया मानक स्थापित करता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि देरी अस्वीकार्य है और अभियुक्त के प्रक्रियात्मक अधिकारों का उल्लंघन है। समयसीमा की अनिवार्य प्रकृति की पुष्टि करके, निर्णय ने न केवल परस्पर विरोधी न्यायिक व्याख्याओं को हल किया है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में जवाबदेही और दक्षता के महत्व को भी मजबूत किया है।</div>
<div> </div>
<div>यूएपीए के तहत 2008 के नियमों की व्याख्या करते हुए, अदालत ने बताया कि नियम 3 और 4 में सिफारिश करने और मंजूरी देने के लिए एक विशिष्ट समय अवधि प्रदान करने में "करेगा" शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जो निर्धारित समय तक मंजूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक स्पष्ट विधायी इरादे को दर्शाता है।</div>
<div>यूएपीए के तहत, आतंकवाद के आरोपी व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है। इस स्वीकृति प्रक्रिया में दो चरण की समय-सीमा शामिल है। सबसे पहले, एक स्वतंत्र प्राधिकरण को जांचकर्ताओं द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्य की समीक्षा करनी चाहिए और सात कार्य दिवसों के भीतर सरकार को एक सिफारिश करनी चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>दूसरा, सरकार के पास प्राधिकरण की सिफारिश के आधार पर मंजूरी देने या न देने का फैसला करने के लिए अतिरिक्त सात कार्य दिवस होते हैं। हालांकि, इस बात पर उच्च न्यायालयों में एकमत नहीं था कि क्या ये समयसीमाएं केवल निर्देशात्मक थीं - यह सुझाव देते हुए कि देरी से प्रक्रिया अनिवार्य रूप से अमान्य नहीं होगी - या अनिवार्य, जिसका कड़ाई से अनुपालन आवश्यक है। बॉम्बे और झारखंड के उच्च न्यायालयों ने समयसीमाओं को निर्देशात्मक माना।</div>
<div> </div>
<div>झारखंड के एक मामले पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अनिश्चितता को समाप्त करते हुए कहा कि समयसीमा वास्तव में अनिवार्य है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा कि 14 दिन की अवधि केवल एक प्रक्रियात्मक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक सुरक्षा उपाय के रूप में कार्य करती है कि निर्णय उचित परिश्रम के साथ और बिना किसी अनावश्यक देरी के लिए जाएं।</div>
<div>न्यायमूर्ति करोल द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया, "विधायी मंशा स्पष्ट है। वैधानिक शक्तियों के आधार पर बनाए गए नियमों में अधिदेश और समय सीमा दोनों निर्धारित हैं।  इसका पालन किया जाना चाहिए... ऐसे कानून में दिए गए प्रतिबंधों के लिए प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए, अक्षरशः और भावना से। लिखित शब्दों से थोड़ा सा भी अंतर होने पर उससे उत्पन्न होने वाली कार्यवाही संदेह में पड़ सकती है।"</div>
<div> </div>
<div>निर्णय में कहा गया कि निर्धारित समय-सीमा का पालन करने में किसी भी प्रकार की विफलता के परिणामस्वरूप आपराधिक कार्यवाही रद्द हो सकती है, जिससे प्राधिकारियों और सरकारों पर निर्धारित अवधि के भीतर कार्रवाई करने का महत्वपूर्ण दायित्व आ जाता है।</div>
<div>पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि सत्ता के दुरुपयोग को रोकने और अभियोजन के साथ आगे बढ़ने से पहले सबूतों का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए समयसीमा महत्वपूर्ण है। पीठ ने कहा, "दोनों अधिकारियों को दिया गया एक सप्ताह का समय उन्हें स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करने में सक्षम बनाता है... यह जांच के उद्देश्य से नहीं है... कुछ सीमाएं होनी चाहिए जिसके भीतर सरकार के प्रशासनिक अधिकारी अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं।"</div>
<div> </div>
<div>निर्णय में यह भी कहा गया कि मंजूरी की वैधता को जल्द से जल्द उपलब्ध मामले में ट्रायल कोर्ट के समक्ष चुनौती दी जानी चाहिए। "यदि ऐसी चुनौती अपीलीय चरण में उठाई जाती है, तो चुनौती देने वाले व्यक्ति को देरी से इसे लाने के कारणों को उचित ठहराना होगा। ऐसे कारणों पर स्वतंत्र रूप से विचार करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्यवाही को रोकने या विलंबित करने के उद्देश्य से चुनौती के अधिकार का दुरुपयोग न हो," इसने कहा।</div>
<div> </div>
<div>अदालत झारखंड के गुमला जिले के निवासी फुलेश्वर गोप की अपील पर फैसला सुना रही थी, जिन्हें जुलाई 2020 में प्रतिबंधित माओवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े आतंकी फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने 14 दिन की समयसीमा के उल्लंघन का हवाला देते हुए मंजूरी आदेश की वैधता को चुनौती दी, इसके अलावा तर्क दिया कि कोई स्वतंत्र समीक्षा नहीं हुई क्योंकि सिफारिश करने वाले और देने वाले दोनों अधिकारियों ने मंजूरी देने में केवल एक-एक दिन का समय लिया।</div>
<div> </div>
<div>हालांकि, पीठ ने उनकी अपील को खारिज कर दिया और कहा कि जांच जारी रहने के दौरान गोप को बाद में गिरफ्तार किया गया था। अदालत को इस दलील में भी कोई दम नहीं मिला कि सिर्फ इसलिए मंजूरी खराब थी क्योंकि दोनों अधिकारियों ने मामले को तय करने में एक-एक दिन का समय लिया। "केवल इस आधार पर कि लिया गया समय तुलनात्मक रूप से कम था या यहां तक कि अन्य आदेश भी इसी तरह के थे, मंजूरी की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है," इसने कहा।</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Sep 2024 17:24:59 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली में बनेगी बीजेपी की सरकार आदित्य झा </title>
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                        <![CDATA[<div><strong>राजधानी दिल्ली </strong>में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद अब राजनीति भी तेज होती हुई नजर आ रही है । ऐसे में आरोप प्रत्यारोप के  लगातार दौर जारी है। बुराड़ी विधानसभा के भाजपा नेता सीए आदित्य झा ने आम आदमी पार्टी पर तंज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार की निगाहों से सुप्रीम कोर्ट भी देख रहा है और साथ ही भाजपा के लगातार शराब घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर लगातार गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। जिसके चलते मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तमाम पावर्स सुप्रीम कोर्ट ने छीन ली है।</div>
<div>  </div>
<div>जमानत के बाद</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144951/aditya-jha-will-form-bjp-government-in-delhi%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/img-20240920-wa0053.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>राजधानी दिल्ली </strong>में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद अब राजनीति भी तेज होती हुई नजर आ रही है । ऐसे में आरोप प्रत्यारोप के  लगातार दौर जारी है। बुराड़ी विधानसभा के भाजपा नेता सीए आदित्य झा ने आम आदमी पार्टी पर तंज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार की निगाहों से सुप्रीम कोर्ट भी देख रहा है और साथ ही भाजपा के लगातार शराब घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर लगातार गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। जिसके चलते मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तमाम पावर्स सुप्रीम कोर्ट ने छीन ली है।</div>
<div> </div>
<div>जमानत के बाद वह अपने कार्यालय पर नहीं जा सकते और किसी प्रकार की फाइल पर वह सिग्नेचर नहीं कर सकते। जिसको देखते हुए उन्होंने खुद इस्तीफा देते हुए आम आदमी पार्टी की  नेता आतिशी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया। अतिशी के मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने खुद कहा है कि मुझे मुख्यमंत्री बनने की शुभकामनाएं ना दें क्योंकि वह बहुत ज्यादा दुखी हैं। उनकी दो बातों में यह साफ जाहिर हो रहा है कि आतिशी सिर्फ डम्मी मुख्यमंत्री के तौर पर रहेंगे बाकी सारा कार्यभार खुद अरविंद केजरीवाल करेंगे। जिसको लेकर आतिशी के चेहरे पर मुख्यमंत्री बनने की खुशी कहीं से कहीं तक नहीं झलक रही भाजपा नेता आदित्य झा ने कहा की 2014 के चुनाव के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनता के सामने इस्तीफा दिया।</div>
<div> </div>
<div>इस्तीफा देने के बाद दिल्ली की जनता की अनुभूति मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़ी और दोबारा चुनाव होने पर  बहुमत से आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में बनी औऱ एक बार फिर से खुद अरविंद केजरीवाल फिर से दिल्ली के मुख्यमंत्री बन बैठे जिन्होंने आज तक दिल्ली की जनता के साथ दुर्व्यवहार किया। आज एक बार फिर से वही दौर लाने और खुद अरविंद केजरीवाल आगामी चुनाव में बनने की रणनीति पर काम कर रहे ऒर फिर से दिल्ली की जनता का मत हासिल कर मुख्यमंत्री बनने का सपना देख  रहे है।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन इस बार राजधानी दिल्ली की जनता जान चुकी है जिसके चलते अब अरविंद केजरीवाल का पुनः मुख्यमंत्री बनना नामुमकिन है और इस बार राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार नहीं बल्कि भाजपा की सरकार बनेगी और फुल बहुमत से बीजेपी जीत कर आएगी और दिल्ली का मुख्यमंत्री भी भाजपा का ही होगा</div>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
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                <pubDate>Fri, 20 Sep 2024 16:52:44 +0530</pubDate>
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                <title>कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी में सिखों की अनुचित प्रस्तुति के खिलाफ महाराष्ट्र सिख एसोसिएशन की अपील फिल्म का बहिष्कार और प्रतिबंध लगाने की मांग</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता नई दिल्ली </strong></div>
<div>महाराष्ट्र सिख एसोसिएशन (MSA) को कंगना रनौत द्वारा निर्देशित और अभिनीत आगामी फिल्म "इमरजेंसी" के बारे में चिंताजनक जानकारी प्राप्त हुई है। यह हमारे ध्यान में आया है कि इस फिल्म में सिख समुदाय के प्रति गहरी आपत्तिजनक और अपमानजनक सामग्री है। फिल्म में सिख पात्रों का अनुचित चित्रण और ऐतिहासिक घटनाओं का विकृत प्रस्तुतीकरण न केवल गलत है बल्कि यह सिखों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है।सिख समुदाय ने हमेशा न्याय, समानता और सच्चाई के मूल्यों का पालन किया है। हमारे इतिहास को विकृत करने या हमारी संस्कृति का अपमान करने का</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144342/maharashtra-sikh-associations-appeal-against-inappropriate-presentation-of-sikhs-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/img-20240828-wa0215.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता नई दिल्ली </strong></div>
<div>महाराष्ट्र सिख एसोसिएशन (MSA) को कंगना रनौत द्वारा निर्देशित और अभिनीत आगामी फिल्म "इमरजेंसी" के बारे में चिंताजनक जानकारी प्राप्त हुई है। यह हमारे ध्यान में आया है कि इस फिल्म में सिख समुदाय के प्रति गहरी आपत्तिजनक और अपमानजनक सामग्री है। फिल्म में सिख पात्रों का अनुचित चित्रण और ऐतिहासिक घटनाओं का विकृत प्रस्तुतीकरण न केवल गलत है बल्कि यह सिखों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है।सिख समुदाय ने हमेशा न्याय, समानता और सच्चाई के मूल्यों का पालन किया है। हमारे इतिहास को विकृत करने या हमारी संस्कृति का अपमान करने का कोई भी प्रयास न केवल सिख समुदाय के लिए बल्कि उन सभी मूल्यों के लिए भी एक अपमान है जिनका हम सम्मान करते हैं।</div>
<div> </div>
<div>महाराष्ट्र सिख एसोसिएशन सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से जोरदार अपील करता है कि वे "इमरजेंसी" फिल्म की तुरंत समीक्षा करें और इसके रिलीज पर पुनर्विचार करें। हम बोर्ड से अनुरोध करते हैं कि ऐसी फिल्मों को प्रमाणन न दिया जाए, जिनकी सामग्री ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत करती है और नकारात्मक धारणाओं को बढ़ावा देती है।साथ ही, हम महाराष्ट्र और देशभर के सिख समुदाय के साथ-साथ सभी न्याय और सच्चाई के समर्थकों से **इस फिल्म का बहिष्कार** करने की अपील करते हैं।</div>
<div> </div>
<div>हमें ऐसे किसी भी मंच या माध्यम का समर्थन नहीं करना चाहिए जो हमारे धर्म के खिलाफ हानिकारक सामग्री का प्रचार करता हो।जबकि हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, यह आवश्यक है कि इस स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाए, विशेष रूप से ऐतिहासिक और धार्मिक विषयों के संदर्भ में। फिल्म निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे विषयों से सावधानी और ईमानदारी के साथ निपटें, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनका कार्य किसी को नुकसान या नकारात्मक भावनाएं पैदा न करे।</div>
<div> </div>
<div>यदि अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो महाराष्ट्र सिख एसोसिएशन हमारे समुदाय की गरिमा की रक्षा करने और ऐसी सामग्री को फैलने से रोकने के लिए सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगी।हम सभी सिख संगठनों, सामुदायिक नेताओं और सदस्यों से हमारे साथ इस अपील में एकजुट होने का आह्वान करते हैं। आइए हम मिलकर एक स्पष्ट संदेश दें कि सिख समुदाय हमारे धर्म की बदनामी या हमारे इतिहास की गलत प्रस्तुति को बर्दाश्त नहीं करेगा।
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                <pubDate>Wed, 28 Aug 2024 18:10:35 +0530</pubDate>
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