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                <title>होली - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>होली RSS Feed</description>
                
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                <title>रंग-बिरंगी होली सबको कर देती इक रंग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत पर्वों और उत्सवों की पावन धरती है। यहाँ वर्ष का कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता जब जीवन में उत्साह का कोई न कोई अवसर उपस्थित न हो। इन्हीं उत्सवों में होली एक ऐसा पर्व है जो केवल रंगों का खेल भर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर और बाहर जमी हुई गंदगी को जलाकर जीवन को नवचेतना से भर देने का संदेश देता है। दीपावली जहाँ प्रकाश का पर्व है, वहीं होली रंगों और उमंगों का उत्सव है। यह वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत है, खेतों में पकती हुई रबी की फसलों की खुशी है और समाज में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171884/colorful-holi-brings-color-to-everyone"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/images16.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत पर्वों और उत्सवों की पावन धरती है। यहाँ वर्ष का कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता जब जीवन में उत्साह का कोई न कोई अवसर उपस्थित न हो। इन्हीं उत्सवों में होली एक ऐसा पर्व है जो केवल रंगों का खेल भर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर और बाहर जमी हुई गंदगी को जलाकर जीवन को नवचेतना से भर देने का संदेश देता है। दीपावली जहाँ प्रकाश का पर्व है, वहीं होली रंगों और उमंगों का उत्सव है। यह वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत है, खेतों में पकती हुई रबी की फसलों की खुशी है और समाज में प्रेम व समानता का उद्घोष है। फाल्गुन की पूर्णिमा से जुड़ा यह पर्व प्रकृति और मानव हृदय दोनों को एक साथ रंग देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली की शुरुआत माघ मास से ही हो जाती है जब पारंपरिक स्थान पर लकड़ी और कंडे एकत्र किए जाते हैं। फाल्गुनी पूर्णिमा की रात्रि को शुभ मुहूर्त में होलिका दहन होता है। यह दहन केवल लकड़ियों का दहन नहीं, बल्कि बुराइयों, अहंकार, वैरभाव और दुराचार का प्रतीकात्मक अंत है। अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। लोग गुलाल लगाकर गले मिलते हैं, आपसी मनमुटाव भूलते हैं और प्रेम का संकल्प लेते हैं। होली का यह बाहरी रूप जितना आकर्षक है, उसका भीतरी अर्थ उससे कहीं अधिक गहरा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली के साथ जुड़ी पौराणिक कथा में प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप का प्रसंग आता है। भक्त प्रह्लाद सत्य और भक्ति के प्रतीक थे, जबकि हिरण्यकश्यप अहंकार और अत्याचार का प्रतीक। होलिका दहन की कथा हमें बताती है कि दुराचार और अत्याचार चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न प्रतीत हों, अंततः सत्य और श्रद्धा की ही विजय होती है। इसी प्रसंग में भगवान नृसिंह का अवतार अन्याय के विनाश का संदेश देता है। यह कथा हमें अपने भीतर छिपे साहस को जगाने और असत्य के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जैन परंपरा में भी होली से जुड़ी एक कथा मिलती है जो मानव जीवन के उत्थान और पतन की वास्तविकता को सामने लाती है। इसमें चरित्रहीनता और अहंकार के कारण पतन तथा पश्चाताप के माध्यम से आत्मशुद्धि का मार्ग बताया गया है। इस दृष्टि से होली केवल बाहरी उत्सव नहीं, बल्कि आत्मविश्लेषण और आत्मशुद्धि का अवसर है। यह पर्व हमें बताता है कि यदि मनुष्य अपनी भूलों को स्वीकार कर सुधार का मार्ग अपनाए, तो वह पुनः ऊँचाइयों को छू सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है, परंतु रंगों का अर्थ केवल लाल, पीला या हरा नहीं है। रंग का एक लाक्षणिक अर्थ भी है, जो प्रभाव और भावना से जुड़ा है। जब कहा जाता है कि किसी पर प्रेम का रंग चढ़ गया, तो उसका आशय है कि वह व्यक्ति प्रेम और सद्भाव से भर गया। होली पर रंग और गुलाल लगाने की परंपरा इसी भाव को प्रकट करती है कि हम अपने मन को प्रेम, सौहार्द और समानता के रंग में रंगें। तन पर लगा रंग कुछ समय में धुल जाता है, परंतु मन पर चढ़ा प्रेम का रंग जीवनभर साथ रहता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धूल और कीचड़ उछालने की परंपरा को भी प्रतीकात्मक रूप में समझना चाहिए। धूल और कीचड़ मनुष्य के भीतर जमा बुराइयों के प्रतीक हैं। वर्षभर जो मनमुटाव, ईर्ष्या, द्वेष और कटुता हमारे भीतर जमा हो जाते हैं, उन्हें बाहर निकालकर समाप्त करने का संदेश होली देती है। किंतु जब यह परंपरा मर्यादा की सीमा लांघकर अशिष्टता और अभद्रता में बदल जाती है, तब उसका स्वरूप विकृत हो जाता है। होली का वास्तविक उद्देश्य किसी को अपमानित करना या असुविधा पहुँचाना नहीं, बल्कि हृदयों को जोड़ना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ब्रज क्षेत्र की लठामार होली इसका एक अनूठा उदाहरण है। नंदगाँव और बरसाना में खेली जाने वाली यह परंपरा हँसी-ठिठोली और सांस्कृतिक आनंद का प्रतीक है। यहाँ महिलाएँ पुरुषों पर लाठी से प्रहार करती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं, परंतु इस पूरे आयोजन में द्वेष का लेशमात्र भी नहीं होता। यह परंपरा दर्शाती है कि होली का खेल प्रेम और सांस्कृतिक उत्साह का माध्यम है, न कि अशिष्ट व्यवहार का।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक समानता है। इस दिन ऊँच-नीच, अमीर-गरीब, जाति और वर्ग के भेदभाव को भुलाकर सभी एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह त्योहार मानवता को एक सूत्र में बाँधने का कार्य करता है। समाज में जो कृत्रिम दीवारें खड़ी हो जाती हैं, होली उन्हें गिराने का अवसर देती है। एक-दूसरे के घर जाकर मिठाई बाँटना और शुभकामनाएँ देना सामाजिक एकता को मजबूत करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली में कूड़ा-कचरा और झाड़-झंखाड़ इकट्ठा कर जलाने की परंपरा भी गहरा संदेश देती है। यह केवल बाहरी सफाई नहीं, बल्कि भीतरी शुद्धि का संकेत है। जिस प्रकार हम अपने आसपास की गंदगी को हटाकर आग में भस्म कर देते हैं, उसी प्रकार हमें अपने भीतर की बुराइयों, संकीर्णताओं और स्वार्थ को भी समाप्त करना चाहिए। यह सामूहिक प्रयास का पर्व है, क्योंकि समाज की सफाई अकेले संभव नहीं। सब मिलकर ही वातावरण को स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कच्चे रंगों का प्रयोग भी जीवन का दर्शन सिखाता है। कच्चा रंग स्थायी नहीं होता, वह कुछ समय बाद धुल जाता है। इसी प्रकार जीवन में आए कटु अनुभव, अपमान या दुख भी स्थायी नहीं होने चाहिए। यदि हम उन्हें मन पर स्थायी रंग की तरह जमा कर लेंगे, तो जीवन की प्रसन्नता फीकी पड़ जाएगी। होली हमें सिखाती है कि कटु स्मृतियों को भुलाकर आगे बढ़ें और नए उत्साह के साथ जीवन को रंगीन बनाएँ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता है कि होली को विवेक और मर्यादा के साथ मनाया जाए। मदिरापान, अभद्र भाषा और हिंसा इस पर्व की आत्मा के विरुद्ध हैं। यदि होली प्रेम और सौहार्द का संदेश देती है, तो हमें उसी भावना के साथ इसे मनाना चाहिए। पर्व तभी सार्थक होता है जब वह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए।अंततः होली केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हमें सिखाती है कि असत्य और दुराचार का दहन करें, सत्य और सदाचार को अपनाएँ, वैमनस्य की धूल झाड़कर प्रेम के रंग में रंग जाएँ। जब हम अपने भीतर की बुराइयों को जलाकर मन को निर्मल बनाते हैं, तभी होली का वास्तविक आनंद मिलता है। यही इस पावन पर्व का संदेश है कि हम सब मिलकर जीवन को सदाचार, समानता और प्रेम के रंगों से रंग दें और समाज को एक सुंदर, समरस और जागरूक दिशा की ओर अग्रसर करें।</div>
<div style="text-align:justify;">     *कांतिलाल मांडोत*</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 18:13:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मर्यादा लांघकर त्योहार को न करें बदनाम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बिका कुशवाहा ‘अम्बी’</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">होली भारतीय संस्कृति का पारिवारिक प्रेम एवं सामाजिक सौहार्द का त्योहार है, जो वसंत, प्रेम और नई शुरुआत का प्रतीक है। होली का उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का माध्यम भी है। पौराणिक कथाओं में होली होलिका दहन से जुड़ी है, जहाँ भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाएँ होली को प्रेम और भक्ति का उत्सव बनाती हैं। भारतीय परंपरा में होली परिवार और समाज को एक सूत्र में बाँधने वाला पर्व है, जहाँ रिश्तों की मिठास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171880/do-not-defame-the-festival-by-crossing-limits"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas50.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अम्बिका कुशवाहा ‘अम्बी’</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली भारतीय संस्कृति का पारिवारिक प्रेम एवं सामाजिक सौहार्द का त्योहार है, जो वसंत, प्रेम और नई शुरुआत का प्रतीक है। होली का उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का माध्यम भी है। पौराणिक कथाओं में होली होलिका दहन से जुड़ी है, जहाँ भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाएँ होली को प्रेम और भक्ति का उत्सव बनाती हैं। भारतीय परंपरा में होली परिवार और समाज को एक सूत्र में बाँधने वाला पर्व है, जहाँ रिश्तों की मिठास बढ़ती है और वैमनस्य दूर होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन आधुनिक समय में इसकी नैतिक और मर्यादित छवि धूमिल होती जा रही है। अश्लील भोजपुरी एवं द्विअर्थी गीत, तेज डीजे, जबरन छूना और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार ने इसे विवादास्पद बना दिया है। अक्सर देखा जाता है कि जीजा–साली तथा भाभी–देवर जैसे रिश्तों की मर्यादा भंग करने वाली हरकतें निंदनीय हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भोजपुरी होली गीत ऐसे परोसे जा रहे हैं, जिनमें रिश्तों को यौनिकता के चश्मे से देखा जाता है। इससे परिवारों में शर्मिंदगी फैलती है और भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति की बदनामी भी होती है, जो एक बड़ी क्षति है। भोजपुरी में होली के लोकगीतों और होलिका-गायन की मधुर एवं समृद्ध परंपरा रही है, जो अब धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय परंपरा में कुछ रिश्ते हास्य-व्यंग्य और हल्की छेड़छाड़ वाले माने जाते हैं, किंतु यह सब हमेशा सीमित और सम्मानजनक होना चाहिए। भोजपुरी या हिंदी होली गीतों में जीजा–साली या भाभी–देवर के संबंधों को द्विअर्थी, अश्लील और यौनिक संदर्भों में प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे गीतों का परिवार में तथा सड़कों पर बजना शर्मिंदगी का कारण बनता है और महिलाएँ असहज महसूस करती हैं। इन दिनों महिलाएँ कहीं भी यात्रा करने से डरती हैं, क्योंकि वे अपने ही समाज में असुरक्षित महसूस करती हैं। होली के बहाने जबरन छूना, अनचाहा गले लगना, शारीरिक छेड़छाड़ या अश्लील टिप्पणी करना घोर निंदनीय है। कई मामलों में यह यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज सोशल मीडिया भी अश्लील सामग्री परोसकर युवाओं को भड़काने और रिश्तों की मर्यादा लांघने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है, जो हमारे पवित्र त्योहार को बदरंग बना रही है। दूसरी ओर, शहरीकरण और पश्चिमी प्रभाव से पारंपरिक मूल्यों का क्षरण बढ़ रहा है। जहाँ पहले परिवार में सामूहिक रूप से होली खेली जाती थी, वहीं अब यह कई स्थानों पर सार्वजनिक हुड़दंग और अराजकता का रूप ले लेती है। इन गलत प्रवृत्तियों का प्रभाव बच्चों पर भी पड़ रहा है। बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं; वे जो देखते और सुनते हैं, वही सीखते हैं। अश्लील गीत और हिंसक व्यवहार उन्हें गलत मूल्य सिखाते हैं, जो भविष्य में समाज के लिए घातक हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली की इस विकृति का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। महिलाओं की असुरक्षा सबसे बड़ी समस्या बन गई है। अश्लील गीतों और “बुरा न मानो, होली है” जैसे नारों का प्रयोग असहमति की अनदेखी करने का बहाना बन गया है, जो कई बार यौन उत्पीड़न की सीमा पार कर जाता है। लैंगिक वर्चस्व का प्रदर्शन और मर्यादा का उल्लंघन होली जैसे उत्सव की भावना को सबसे अधिक कलंकित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए इस होली को उत्साहपूर्वक मनाइए, किंतु मर्यादा की सीमाओं में रहकर। शोर-शराबा, जबरदस्ती रंग लगाना या किसी को असुविधा पहुँचाना त्योहार की भावना के विपरीत है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भावनाओं का विशेष ध्यान रखें। बिहार पुलिस और महिला आयोग ने इस वर्ष अश्लील गीतों पर प्राथमिकी दर्ज करने तथा ड्रोन निगरानी तक की व्यवस्था की है, जो एक सकारात्मक कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली का वास्तविक रंग प्रेम, एकता और पवित्रता में है। इसे विकृतियों से मुक्त रखकर हम न केवल त्योहार की मिठास बचाएँगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर समाज का निर्माण भी करेंगे। इस प्रकार होली की पवित्रता, बंधुत्व और मिठास बनाए रखें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 18:03:47 +0530</pubDate>
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                <title>ओबरा, सोनभद्र में विजय शंकर यादव ने दी होली की शुभकामनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजीत सिंह ( वीरेंद्र कुमार) ब्यूरो रिपोर्ट</em></strong></p>
<p><strong><em>ओबरा,/सोनभद्र-</em></strong>अहिंसा सेवा पार्टी के अध्यक्ष और जनसेवक विजय शंकर यादव ने सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने युवाओं द्वारा एक-दूसरे की खुशियों का ख्याल रखते हुए होली मनाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और उनके शुभकामना संदेश के लिए धन्यवाद दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">विजय शंकर यादव ने कहा कि होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, जो हमें प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि हमें एक-दूसरे की खुशियों का सम्मान करना चाहिए और मिलकर खुशियां मनानी चाहिए। होली लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149882/vijay-shankar-yadav-wished-holi-in-obra-sonbhadra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img_20250314_160532.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजीत सिंह ( वीरेंद्र कुमार) ब्यूरो रिपोर्ट</em></strong></p>
<p><strong><em>ओबरा,/सोनभद्र-</em></strong>अहिंसा सेवा पार्टी के अध्यक्ष और जनसेवक विजय शंकर यादव ने सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने युवाओं द्वारा एक-दूसरे की खुशियों का ख्याल रखते हुए होली मनाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और उनके शुभकामना संदेश के लिए धन्यवाद दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">विजय शंकर यादव ने कहा कि होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, जो हमें प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि हमें एक-दूसरे की खुशियों का सम्मान करना चाहिए और मिलकर खुशियां मनानी चाहिए। होली लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है और पुरानी दुश्मनी और मतभेदों को भुलाने में मदद करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह त्योहार हमें सभी के साथ मिलजुल कर रहने और समानता और एकता का भाव बढ़ाने की शिक्षा देता है। होली का त्यौहार सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के अशांत और मतभेदों से भरे समय में, होली का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह हमें शांति और सद्भाव से रहने की याद दिलाता है। विजय शंकर यादव ने सभी से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से होली मनाने की अपील की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Mar 2025 20:15:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेणुकूट, सोनभद्र में विजय प्रताप सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने दी होली की शुभकामनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजीत सिंह ( ब्यूरो) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/उत्तर प्रदेश-</em></strong><strong><em>रेणुकूट-</em></strong>समाजसेवी विजय प्रताप सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने युवाओं द्वारा एक-दूसरे की खुशियों का ख्याल रखते हुए होली मनाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और उनके शुभकामना संदेश के लिए धन्यवाद दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">डब्लू सिंह ने कहा कि होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, जो हमें प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि हमें एक-दूसरे की खुशियों का सम्मान करना चाहिए और मिलकर खुशियां मनानी चाहिए। होली लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है और पुरानी दुश्मनी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149881/vijay-pratap-singh-alias-w-singh-wished-holi-in-renukoot"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img_20250314_155751.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजीत सिंह ( ब्यूरो) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/उत्तर प्रदेश-</em></strong><strong><em>रेणुकूट-</em></strong>समाजसेवी विजय प्रताप सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने युवाओं द्वारा एक-दूसरे की खुशियों का ख्याल रखते हुए होली मनाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और उनके शुभकामना संदेश के लिए धन्यवाद दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">डब्लू सिंह ने कहा कि होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, जो हमें प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि हमें एक-दूसरे की खुशियों का सम्मान करना चाहिए और मिलकर खुशियां मनानी चाहिए। होली लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है और पुरानी दुश्मनी और मतभेदों को भुलाने में मदद करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह त्योहार हमें सभी के साथ मिलजुल कर रहने और समानता और एकता का भाव बढ़ाने की शिक्षा देता है। होली का त्यौहार सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के अशांत और मतभेदों से भरे समय में, होली का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह हमें शांति और सद्भाव से रहने की याद दिलाता है। डब्लू सिंह ने सभी से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से होली मनाने की अपील की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Mar 2025 20:15:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वनिता मण्डल ओबरा ने फूलों की होली से मनाई गोपियों संग होली</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजीत सिंह ( वीरेंद्र कुमार) ब्यूरो रिपोर्ट</em></strong></p>
<p><strong><em>ओबरा/ सोनभद्र- </em></strong>वनिता मण्डल ओबरा ने होली के पावन अवसर पर ऑफिसर्स क्लब में "फूलों की होली गोपियों संग खेली" नामक एक मनमोहक कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वनिता मण्डल की अध्यक्षा नूतन अग्रवाल और विशिष्ट अतिथि के रूप में नीलिमा गुप्ता, माधुरी गुप्ता और रितु सिंघल उपस्थित थीं।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके बाद वनिता मण्डल की सदस्याओं ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने एक से बढ़कर एक होली गीत और नृत्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के नाम के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149874/vanita-mandal-obra-celebrated-holi-with-gopis-with-holi-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250313-wa0025.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजीत सिंह ( वीरेंद्र कुमार) ब्यूरो रिपोर्ट</em></strong></p>
<p><strong><em>ओबरा/ सोनभद्र- </em></strong>वनिता मण्डल ओबरा ने होली के पावन अवसर पर ऑफिसर्स क्लब में "फूलों की होली गोपियों संग खेली" नामक एक मनमोहक कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वनिता मण्डल की अध्यक्षा नूतन अग्रवाल और विशिष्ट अतिथि के रूप में नीलिमा गुप्ता, माधुरी गुप्ता और रितु सिंघल उपस्थित थीं।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके बाद वनिता मण्डल की सदस्याओं ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने एक से बढ़कर एक होली गीत और नृत्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के नाम के अनुरूप, सभी सदस्याएं गोपियों की वेशभूषा में सजी हुई थीं और उन्होंने एक-दूसरे पर फूलों की वर्षा करके फूलों की होली का आनंद लिया।कार्यक्रम में वनिता मण्डल की सदस्याओं के बच्चों ने भी होली के गीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए।</p>
<p style="text-align:justify;">उपस्थित सभी लोगों ने कार्यक्रम की खूब सराहना की। कार्यक्रम के समापन पर, सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद, सभी ने साथ मिलकर स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया और एक-दूसरे को होली की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कामना की कि राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक यह पर्व सभी के जीवन में खुशियां लेकर आए।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम को सफल बनाने में वनिता मण्डल की सचिव मधुलिका राय, सह-सचिव शशिभा सिंह, मीनाक्षी जायसवाल, मांडवी वर्मा, शिप्रा श्रीवास्तव, आशा जायसवाल , पल्लवी गुप्ता और सृष्टि सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन मधुलिका राय ने किया।यह कार्यक्रम रंगों, संगीत और उल्लास का एक अद्भुत संगम था, जिसने सभी को होली के त्योहार की भावना में डूबो दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 21:25:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पडरौना : व्यापारियों ने खेली होली, नपाध्यक्ष विनय जायसवाल ने दिया बधाई </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>पडरौना नगर के मशीनरी मार्केट सुभाष चौक पर आज शुक्रवार को स्थानीय व्यापारी वर्ग द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पधारे नगरपालिका परिषद पडरौना के अध्यक्ष विनय जायसवाल ने सभी सम्मानित जनों से मिलकर एक दूसरे को रंगपर्व होली की बधाई दी। कार्यक्रम के बाद अपने सम्बोधन में उन्होने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में हर त्योहार के पीछे एक सामाजिक वैज्ञानिक उद्देश्य होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">रंगपर्व होली को समानता के रूप में परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व ऊँच नीच के भेद को मिटाते हुए सभी को एक रंग में रंगने और आगे बढ़ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139925/padrauna-traders-played-holi-municipal-president-vinay-jaiswal-congratulated"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/img-20240329-wa0012.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>पडरौना नगर के मशीनरी मार्केट सुभाष चौक पर आज शुक्रवार को स्थानीय व्यापारी वर्ग द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पधारे नगरपालिका परिषद पडरौना के अध्यक्ष विनय जायसवाल ने सभी सम्मानित जनों से मिलकर एक दूसरे को रंगपर्व होली की बधाई दी। कार्यक्रम के बाद अपने सम्बोधन में उन्होने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में हर त्योहार के पीछे एक सामाजिक वैज्ञानिक उद्देश्य होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">रंगपर्व होली को समानता के रूप में परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व ऊँच नीच के भेद को मिटाते हुए सभी को एक रंग में रंगने और आगे बढ़ने का त्योहार है। इसीके साथ आगामी आम चुनाव को लेकर सभी से अपील करते हुए कहा कि हम सभी का संयुक्त प्रयास होना चाहिए कि इस चुनाव कुशीनगर लोकसभा तीन चौथाई वोटिंग प्रतिशतता के आंकड़े को पार करेगी जिसमे व्यापारी समुदाय के सहयोग की नितांत आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान उनके साथ प्रमुख रूप से उनके प्रतिनिधि मनीष बुलबुल जायसवाल, जयप्रकाश चौरसिया, विद्यानन्द वर्मा, रामअधार विश्वकर्मा, प्रेमलाल वर्मा, सर्वेश जायसवाल, राजू गुप्ता, गणेश वर्मा, संजय गुप्ता, गंगेश विश्वकर्मा, आकाश, जगदम्बा गुड्डू वर्मा, छोटेलाल वर्मा, गोल्डन वर्मा, मोहित वर्मा, मुन्ना वर्मा, कन्हैयालाल वर्मा, चंदन वर्मा के अलावा अन्य व्यापारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Mar 2024 19:47:30 +0530</pubDate>
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