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                <title>rashtriya Swayamsevak Sangh - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>rashtriya Swayamsevak Sangh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महती भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180815/important-role-of-rashtriya-swayamsevak-sangh-in-indias-development-journey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/rss-shatabdi-varsh-jan-sampark-abhiyaan-history.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में संघ का योगदान अचरज भरा भी लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान को यह देश कभी भुला नहीं पाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस वक्त को याद कर कल्पना करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ तथाकथित सत्ता-स्वार्थी राजनेताओं की हुक्मरान बनने की चाहत के चलते जिस देश की आजादी धर्म के नाम पर की गई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ कितना खून-खराबा अपनों का अपनों के ही हाथों हुआ होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान के उदय के साथ ही लाहौर से लेकर कराची तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वी-पश्चिमी सीमाओं तक बसने वाले हिंदुओं के कत्लेआम की जो दास्तां देश ने देखी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी कल्पना मात्र से आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी से पहले भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखंड भारत की कल्पना को साकार करने की अलख जगाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहा था। कई मौकों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जन्मदाता और तत्कालीन प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ ने भी देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सभी बड़े तत्कालीन नेताओं से अखंड भारत बनाए रखने की लड़ाई लड़ने की बात कही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन संघ विरोधी मानसिकता वाले कुछ लोगों ने हर बार संघ की बातों को नजरअंदाज करते हुए मुस्लिम लीग के जिन्ना की जिद के आगे नतमस्तक होकर आखिरकार अखंड भारत को धर्म के नाम पर टुकड़ों में बांट दिया था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्ना की मुस्लिम लीग के समर्थक गुंडों और पाकिस्तानी फौजी सिपाहियों ने पाकिस्तान के हर हिस्से में रह रहे हिंदुओं को वहाँ से भागने के लिए उन पर रक्तरंजित अत्याचार ही नहीं किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हिंदू बेटियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहुओं और माताओं की अस्मिता को भी सरेआम लूटकर तार-तार किया था। पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में हिंदुओं की लाशों के ढेर इस बात के सबूत थे कि हिंदुओं के प्रति जिन्ना और उसके गुंडों ने सत्ता की लालच में लोगों के बीच कितना जहर भरा था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस रक्तरंजित दौर में पाकिस्तान में सबसे पहले हिंदू माँ-बहनों और बेटियों की अस्मिता को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ही आगे आए और जिन्ना के गुंडों तथा उसके सिपाहियों से अपनी जान की बाजी लगाकर जितना हो सकता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतने हिंदुओं को बचाने का भरसक प्रयास भी किया था। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विभाजन की त्रासदी से अपनी ही जमीन से बेदखल किए गए हिंदुओं की मदद हेतु जगह-जगह राहत शिविर खोलकर पाकिस्तान से बेदखल और प्रताड़ित किए गए हिंदुओं तथा उनके परिजनों को न केवल सुरक्षा दी</span>,</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयंसेवकों ने बिना सरकारी मदद के अपने दम पर महीनों तक उन हिंदुओं के भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी और स्वास्थ्य की भी व्यवस्था की थी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह तो देश जानता है कि विभाजन के उस कठिन दौर में कैसे आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं को बचाया था। आजादी के दौर के बहुत से लोगों का मानना है कि यदि आजादी के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हिंदुओं को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी नहीं लगाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जिन्ना के गुंडे और गुंडागर्दी पर उतारू उसकी सेना नफरत की आग में पाकिस्तान से समूची हिंदू कौम का ही सर्वनाश कर देते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आजादी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीयों में एकजुटता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस महान उद्देश्य को लेकर बिना प्रचार-प्रसार के अपने कार्यकर्ताओं के बूते अलख जगाए रखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी परिणति यह है कि भारत आज दुनिया की महाशक्तियों को अपने आगे झुकाने वाला देश बन गया है। देश में जब-जब भी विपदाएँ आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब-तब सरकार से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से अपनी जान की परवाह किए बिना विपदाओं में उम्मीदों का सहारा बनकर खड़े हुए हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा किए गए कार्यों की विपक्ष के नेता तक खुले मन से प्रशंसा करते रहे हैं। देश में जब भी कहीं भीषण बाढ़ आई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखा पड़ा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूकंप की त्रासदी हुई हो या फिर कोई गंभीर बीमारी ही क्यों न फैली हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकर्ता देश में आई हर विपदा में सबसे पहले सहारा बनकर खड़ा हो जाता है और बिना जाति-धर्म पूछे अपनी जान की बाजी लगाकर सेवा कार्यों में जुट जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस देश को जोड़ने और मजबूती प्रदान करने वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बिना जाति-धर्म का भेद किए देश के हर वर्ग और समाज के विकास में सहयोग प्रदान करता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस का दायरा समूचा देश और देश में रहने वाले सभी जाति-धर्मों के लोगों के बीच मानवीय प्रेम और राष्ट्रीय एकता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी महान उद्देश्य को लेकर दिन-रात उसके स्वयंसेवक कार्य करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र ऐसा संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने किए गए कार्यों का कभी दिखावा नहीं करता और न कभी अपना बखान करता है। देश की सेहत देखकर ही संघ की सक्रियता समझी जा सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश यदि आज दुनिया में सिरमौर बन रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसमें आरएसएस की भूमिका को भी खुले मन से स्वीकारना होगा। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रहित को समर्पित संगठन आरएसएस के करोड़ों कार्यकर्ता बेहद अनुशासित तरीके से अपने सरसंघचालक के हर शब्द को अपना सर्वस्व त्याग कर निस्वार्थ भाव से पूर्ण करते हैं। यह संघ के सरसंघचालक के तपोबल का ही परिणाम है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री मोहन भागवत छठे सरसंघचालक हैं। इससे पूर्व डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुकर दत्तात्रेय देवरस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भैया’ और के. एस. सुदर्शन जी के त्याग और अनुशासन से संघ दुनिया भर के देशों में अपनी जड़ें मजबूती से जमाए हुए मानवीय सेवा के कार्यों हेतु समर्पित है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति के कुछ अवसरवादी सत्ता-स्वार्थी नेताओं ने अपने वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में आरएसएस को देश-विरोधी संगठन बताने से भी गुरेज नहीं किया है। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ राजनीतिक दलों ने सत्ता में आने के बाद जाति-धर्म के वोट बैंक के सहारे सत्ता में बने रहने की चाहत में अपने-अपने राज्यों में आरएसएस पर प्रतिबंध भी लगा दिया था और आरएसएस से संबंध रखने वाले भारतीयों को प्रताड़ित भी किया जाता था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कुछ राज्यों में आज भी आरएसएस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर बंदिशें लगाई गई हैं। वर्तमान में राजनीति से जुड़े कुछ लोगों ने एक विशेष वर्ग के वोट बैंक पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए आरएसएस को केवल हिंदुओं का संगठन बता कर उसके खिलाफ आए दिन जहर उगला है। बेशक आरएसएस एक हिंदुत्ववादी विचारधारा वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका महान उद्देश्य सभी धर्मों और जातियों के लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र को एकजुट और मजबूत बनाना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की विचारधारा के विरोधी जो भी लोग आज राजनीति में मौजूद होकर जात-पात की राजनीति करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जी से सीखना चाहिए कि उन्होंने देशहित के कार्यों में आरएसएस की दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समय-समय पर प्रशंसा भी की है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघचालक श्री मोहन भागवत देश के सभी वर्गों और धर्मों के प्रमुखों के साथ मिलकर संघ के प्रति राजनीतिक दलों द्वारा जो दूषित धारणाएँ फैलाई गई थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें बहुत हद तक दूर कर संघ के सच्चे राष्ट्र हित के उद्देश्य से परिचित करवाकर अन्य धर्मों को भी संघ की विचारधारा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश इस वर्ष विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस की स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के मार्गदर्शन में देशभर में संघ के कार्यों से देश की नई पीढ़ी को अवगत कराने के कार्यक्रम जारी हैं। आरएसएस एक ऐसा सामाजिक संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जाति-धर्म के नाम पर टुकड़ों में बंटे और बिखरे लोगों को एकजुट करता है तथा उनमें अपने राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा के लिए व्यक्ति निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण तक का पाठ सिखाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की स्थापना भी सन </span>1925 <span lang="hi" xml:lang="hi">में विजयादशमी के दिन डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा इसी महान उद्देश्य को लेकर की गई थी। अपने सौ वर्षों के सफर में आरएसएस अपने कार्यकर्ताओं के समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग और अनुशासन के बल पर आज एक वटवृक्ष बनकर दुनिया के अस्सी से ज्यादा देशों में फैल चुका है।</span>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक श्री मोहन भागवत की अगुवाई में संघ अपना सौवां जन्मोत्सव पिछली विजयादशमी को मनाया गया उस ऐतिहासिक पल का समूचा दे साक्षी बना!  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को पूरे वर्ष देशभर में हर्षोल्लास से मनाएगा और कार्यक्रमों के माध्यम से देश के विकास में संघ की भूमिका से उसके त्याग बलिदान और कर्तव्य निष्ठा से नवपीढ़ी को परिचित भी करवाएगा।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:29:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केवल संगठन नहीं एक परिवार है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज शताब्दी वर्ष मना रहा है संघ को जो लोग समाचार पत्रों से टेलीविजन से एवं अन्यान्य लोगों से सुनते और समझते हैं उन्हें संघ केवल एक हिन्दुओं का संगठन समझ में आता होगा लेकिन जब आप संघ में आकर, जुड़कर साथ मिलकर काम करेंगे तो ध्यान में आएगा कि मैं एक संगठन से ही नहीं बल्कि एक परिवार से भी जुड़े हैं। इस विषय में मैं अपना स्वयं का अनुभव भी साझा कर रहा हूं - मेरी संघ आयु लगभग 20 वर्ष हो रही है मैं संघ में सामान्य स्वयंसेवक, गटनायक, गणशिक्षक, मुख्य शिक्षक से लेकर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159116/rashtriya-swayamsevak-sangh-is-not-just-an-organization-but-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/राष्ट्रीय-स्वयंसेवक-संघ-केवल-संगठन-नहीं-एक-परिवार-है1.jpg" alt=""></a><br /><p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज शताब्दी वर्ष मना रहा है संघ को जो लोग समाचार पत्रों से टेलीविजन से एवं अन्यान्य लोगों से सुनते और समझते हैं उन्हें संघ केवल एक हिन्दुओं का संगठन समझ में आता होगा लेकिन जब आप संघ में आकर, जुड़कर साथ मिलकर काम करेंगे तो ध्यान में आएगा कि मैं एक संगठन से ही नहीं बल्कि एक परिवार से भी जुड़े हैं। इस विषय में मैं अपना स्वयं का अनुभव भी साझा कर रहा हूं - मेरी संघ आयु लगभग 20 वर्ष हो रही है मैं संघ में सामान्य स्वयंसेवक, गटनायक, गणशिक्षक, मुख्य शिक्षक से लेकर विस्तारक और जिला प्रचारक तक के सघन दायित्वों का निर्वहन करते हुए आज भी सक्रिय दायित्व में रहकर काम कर रहा हूं। हमको जब कभी जहां संघ का कार्य करने का अवसर मिला, नए - नए क्षेत्रों में गया, नए - नए स्वयंसेवकों से मिला हमे सभी जगह अपनापन मिला, एक परिवार जैसा भाव मिला।</p>
<p>संघ में एक व्यवस्था के नाते कोई अधिकारी है तो कोई सामान्य कार्यकर्ता बस वास्तव में है तो सभी भाई साहब ही। संघ में प्रत्येक स्वयंसेवक की संभाल व देखरेख, शारीरिक और बौद्धिक , चारित्रिक प्रशिक्षण परिवार भावना से किया जाता है। मेरा आठ वर्ष का प्रचारक जीवन रहा है मै नए स्थानों पर काम करने गया। नए पुराने स्वयंसेवकों से मिला सभी ने मुझे पुत्रवत, भातृत्व स्नेह दिया, कभी यह नहीं लगा कि हम अपने परिवार से दूर हैं। संघ में अधिकारी और स्वयंसेवक के बीच कोई अंतर नहीं रहता बस यही लगता है कि भाई साहब हमारे परिवार के मुखिया हैं। स्वयंसेवक का परिवार बिल्कुल अपना परिवार जैसा ही लगता है।</p>
<p>मैं यहां एक घटना की भी चर्चा करूंगा - इसी लखनऊ पश्चिम भाग में मै मालवीय नगर में विस्तारक था एक दिन शाम को शाखा के बाद रात्रि भोजन पर नगर कार्यवाह श्री विनय जी के यहां भोजन पर गया उसी समय मुझे तेज बुखार आ गया, भोजन करना भी कठिन हो गया तुरन्त नगर कार्यवाह जी ने बुखार नापा और दवाई दी अपने यहां ही रुकने का आग्रह किया मैने कहा कि कार्यालय ही रुकेंगे उन्होंने रात में ही कार्यालय भारती भवन राजेन्द्र नगर में छोड़ गए और प्रातः ही आकर फिर हाल चाल लिया व दवाई इत्यादि की व्यवस्था की। अब यह भाव केवल संघ में ही देखने को मिलते हैं।  सन २०२० में प्रचारक जीवन से वापस लौट आने के बाद भी हमारे सभी स्वयंसेक परिवारिक वातावरण के साथ आज भी मिलते हैं।</p>
<p>हम जब बाहर के अन्य संगठनों को देखते हैं तो वहां कहीं न कहीं स्वार्थ, राजनैतिक महत्वाकांक्षा, पद का मोह दिखाई पड़ता है लेकिन संघ विशुद्ध पारिवारिक संगठन है। अभी ९ माह पूर्व मेरी मेरी धर्म पत्नी शिविल हॉस्पिटल लखनऊ में एडमिट थी मैने संकोच बस किसी को नहीं बताया कि सभी परेशान होंगे, लेकिन किसी तरह हमारे स्वयंसेवकों को पता चला तो सभी कार्यकर्ताओं ने हाथों हांथ लिया। भोजन आदि की व्यवस्था भी किया रोज कोई न कोई स्वयंसेवक दोनों समय का भोजन हॉस्पिटल पहुंचा जाता।</p>
<p>अब यही भाव ही परिवार भाव है। संघ में हम लोग गीत भी गाते हैं कि शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है..... मेरा समाज के लोगों से आग्रह है कि संघ को साहित्य से पढ़कर नहीं समझा जा सकता संघ जानना है तो शाखा में आइए। संघ जैसा दुनियां में कोई नहीं.... संघ के अपने अनुभव को शब्दों में लिख पाना बहुत मुश्किल है। अबिगत- गति कछु कहत न आवै। ज्यों गूँगे मीठे फल कौ रस अंतरगत ही भावै।।</p>
<p><strong>बालभास्कर मिश्र</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Nov 2025 18:05:42 +0530</pubDate>
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                <title>'पंच प्रण' को समर्पित रा. स्व. संघ का शताब्दी वर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<div>दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना काल विजयादशमी १९२५ से अबतक निरंतर कार्य करते हुए सौवें वर्ष में प्रवेश करने वाला है। आने वाली विजयादशमी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष मनाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी इस अबाध यात्रा में समाज जागरण, देशभक्ति के अप्रतिम कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आज देश जानता है कि नि:स्वार्थ भाव से राष्ट्र व समाज की सेवा करने वाला एक मात्र संगठन यही है। संघ जातिभेद, प्रांत भेद, भाषा भेद, पंथभेद से ऊपर उठकर राष्ट्रधर्म के कार्य करता आ रहा है। संघ की प्रतिज्ञा में भी इसी बात का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146642/centenary-year-of-ra-swa-sangh-dedicated-to-panch-pran"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/hindi-divas28.jpg" alt=""></a><br /><div>दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना काल विजयादशमी १९२५ से अबतक निरंतर कार्य करते हुए सौवें वर्ष में प्रवेश करने वाला है। आने वाली विजयादशमी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष मनाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी इस अबाध यात्रा में समाज जागरण, देशभक्ति के अप्रतिम कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आज देश जानता है कि नि:स्वार्थ भाव से राष्ट्र व समाज की सेवा करने वाला एक मात्र संगठन यही है। संघ जातिभेद, प्रांत भेद, भाषा भेद, पंथभेद से ऊपर उठकर राष्ट्रधर्म के कार्य करता आ रहा है। संघ की प्रतिज्ञा में भी इसी बात का उल्लेख किया गया है कि पवित्र हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति तथा हिन्दू समाज का संरक्षण और हिन्दू राष्ट्र की सर्वांगीय उन्नति करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं यहां हिन्दू शब्द का अर्थ सीमित नही है अपितु अति विस्तृत है। संघ अपने विस्तृत विचार दृष्टिकोण से मानता है कि हिन्दुत्व ही राष्ट्रीत्व है।</div>
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<div>इसी विचार के साथ संघ भारतवर्ष की सम्पूर्ण उन्नति करने के लिए देशभक्त स्वयंसेवक तैयार करता है जो समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आज कार्य करते हुए दिखते हैं। संघ ने अपनी इस यात्रा में समाज में कई सकारात्मक परिणाम स्थापित किया है उसमें से एक है सामाजिक समरसता। संघ के जन्मकाल से ही इस विषय को हम देखते हैं आज परिणाम यह है कि भारत में जातीय विभेदता कम हुई है फिर भी अभी और कार्य करने की आवश्यकता है। राष्ट्र कार्य की इसी शृंखला में संघ ने अपने इस शताब्दी वर्ष में समाज में गुणात्मक परिवर्तन की दृष्टि से पंच प्रण का आवाह्न किया है। इसी भावना को दृष्टिगत करते हुए संघ के पूजनीय सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत और माननीय सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने देश के समक्ष ‘पंच परिवर्तन’ की संकल्पना प्रस्तुत की है।</div>
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<div>संघ ने अपने स्वयंसेवकों तथा अपने समविचारी विविध संगठनों से भी आग्रह किया है कि वे इन पांचों बिंदुओं के अनुसार कार्ययोजना बनाते हुए देश के सामाजिक परिवर्तन के सक्रिय संवाहक बनें। समाज में गुणात्मक परिवर्तन लाने के लिए निर्धारित किए गए ये ‘पंच परिवर्तन’ हैं- सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व का भाव, नागरिक कर्तव्यों का पालन और पर्यावरण संरक्षण। इन पांच आयामों को ‘पंच प्रण’ भी इसी अपेक्षा से कहा गया है कि भारत के उत्थान की कामना करने वाले सभी लोग संकल्पपूर्वक इनका पालन करें। उपरोक्त पांचों बिंदु भारत के उत्थान में नींव का पत्थर बनने वाले साबित होंगे। भारत को जिस परमवैभव पर ले जाने का जो स्वयंसेवकों का संकल्प है वह इसी से पूरा होने वाला है। यह पांचों बिंदु पर विस्तार से समाज के आम नागरिकों में पहुंचाने की आवश्यकता है। पंच परिवर्तन का प्रथम बिंदु है-</div>
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<div>सामाजिक समरसता- आज भी भारत में यह समस्या यदा कदा - देखने को मिल जाती है विदेशी आक्रमणकारी मुगलों और अंग्रेजों ने जातीय भावना का विद्वेष पैदा किया था जिस कारण हमारी हानि हुई स्वतन्त्रता के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी यह समस्या बनी हुई है आज समाज को इस कुरीति को दूर करना होगा। विश्वहिंदू परिषद ने बहुत वर्षों पूर्व धर्म संसद में कहा था कि सभी हिन्दू सगे भाई है कोई भी ऊंच नीच नहीं है।  कुटुंब प्रबोधन- समृद्ध भारत की सबसे छोटी इकाई है परिवार। भारत की परिवार व्यवस्था आज पाश्चात्य देशों का शोध का विषय बनी हुई है। परिवार हमारे संस्कारों की पहली पाठशाला है। कुटुंब या परिवार व्यक्ति और समाज के बीच की सर्वाधिक महत्वपूर्ण कड़ी है। समाज का लघुतम स्वरूप हम परिवार में अनुभव करते हैं। जिसके आचार्य एवं शिक्षक-प्रशिक्षक, माता-पिता और परिवार के बड़े लोग होते हैं।</div>
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<div>व्यक्ति के समाजगत आचार-विचार-व्यवहार का प्रशिक्षण और प्रबोधन परिवार के ही माध्यम से होता है। बाल्यकाल से ही अनुकूल संस्कारों के आधान और प्रतिकूल संस्कारों के विसर्जन में परिवार की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्व का भाव - स्वाधीनता के ७५ वीं वर्षगांठ पर स्व के विषय को लेकर बहुत सारे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए स्व हमारे स्वाभिमान को जागृत करता है। मनुष्य की चेतना का जागरण उसके भीतर स्थित, उसका ‘स्व’ है हमको अपने जीवन में स्व के मानबिन्दुओं को स्थापित करना चाहिए जैसे स्वभाषा, स्वदेशी, स्व संस्कृति इत्यादि। व्यक्ति की चेतना पर पड़े हुए औपनिवेशिक गुलामी के आवरण को स्वदेशी आचरण से ही दूर किया जा सकता है।</div>
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<div>नागरिक कर्तव्य - एक सभ्य समाज का आचरण ही उसके नागरिक कर्तव्य का बोध करता है। एक अनुशासित और सभ्य समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का पालना सुनिश्चित करे। यही राष्ट्रीय चेतना का मूल हेतु है। अपने-अपने कर्तव्यों के पालन में ही दूसरों के अधिकार संरक्षित होते हैं। राष्ट्र में सद्भावना, शांति और समृद्धि का यही मूलमंत्र है।</div>
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<div>पर्यावरण संरक्षण - संपूर्ण दुनिया आज बदलते जलवायु परिवर्तन से परेशान और चिंतित है भारत की संस्कृति के मूल में ही पर्यावरण का संरक्षण निहित है इसी लिए हमारे मनीषियों ने पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से धार्मिक भाव पैदा किया जिससे हमारी संस्कृति में नदियों की पूजा, पशुओं की पूजा, पहाड़ों की पूजा का विधान किया है हमने वायु, जल, पृथ्वी, आकाश, अग्नि को देवता की संज्ञा दी है। हम प्रकृति का दोहन करें शोषण न करें यहीं हमारा दर्शन है।</div>
<div>शताब्दी वर्ष में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान में सारे देशवासियों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। हम आप जहां कहीं हैं इसकी शुरुआत सर्वप्रथम अपने जीवन से करनी चाहिए और समाज को साथ लेकर जनजागरण के सार्थक प्रयास करें। वह दिन दूर नहीं भारत पुनः विश्वगुरु के स्थान को सुशोभित करेगा।</div>
<div> </div>
<div><strong>बालभास्कर मिश्र </strong></div>
<div><strong>स्तंभ लेखक, </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Nov 2024 16:17:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>संघ की केशव शाखा ने मनाया वार्षिकोत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>खन्ना ; महोबा ।<span style="color:#f44336;">  ब्यूरो रिपोर्ट-अनूप सिंह</span></strong></div>
<div>  </div>
<div>जनपद के खन्ना ग्राम में संघ की केशव शाखा में बड़े ही उत्साह के साथ वार्षिकोत्सव मनाया गया।</div>
<div>  </div>
<div>वार्षिकोत्सव में शाखा के सभी स्वयंसेवकों ने सामूहिक योग, सूर्य नमस्कार, व्यायाम, आसन किए। प्रारंभ में शाखा की दिनचर्या के अनुसार सभी कार्यक्रम हुए। इसके बाद जिला कार्यवाह प्रमोद कुमार ने बौद्धिक दिया। उन्होंने बताया कि संघ को समझना है तो केवल शाखा में आने पर ही जाना जा सकता है। संघ ने हमेशा संपूर्ण हिन्दू समाज को जोड़ने का कार्य किया है। समाज में समरसता हमेशा बनी रहे, इस पर जोर दिया है। उन्होंने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126649/sanghs-keshav-branch-celebrated-its-anniversary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/1.jpeg" alt=""></a><br /><div><strong>खन्ना ; महोबा ।<span style="color:#f44336;"> ब्यूरो रिपोर्ट-अनूप सिंह</span></strong></div>
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<div>जनपद के खन्ना ग्राम में संघ की केशव शाखा में बड़े ही उत्साह के साथ वार्षिकोत्सव मनाया गया।</div>
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<div>वार्षिकोत्सव में शाखा के सभी स्वयंसेवकों ने सामूहिक योग, सूर्य नमस्कार, व्यायाम, आसन किए। प्रारंभ में शाखा की दिनचर्या के अनुसार सभी कार्यक्रम हुए। इसके बाद जिला कार्यवाह प्रमोद कुमार ने बौद्धिक दिया। उन्होंने बताया कि संघ को समझना है तो केवल शाखा में आने पर ही जाना जा सकता है। संघ ने हमेशा संपूर्ण हिन्दू समाज को जोड़ने का कार्य किया है। समाज में समरसता हमेशा बनी रहे, इस पर जोर दिया है। उन्होंने वार्षिक उत्सव क्यों जरूरी है, इसका महत्व बताया कि जब बच्चा स्कूल में पढ़ता है और साल के अंत में परीक्षा देता है उसके बाद जब उसका परिणाम आता है तब उसको पता चलता है कि उसने क्या सीखा, क्या पढ़ा। इसी तरह शाखा का वार्षिक उत्सव होता है, जिस को पूरा समाज देखता है और देश सेवा की प्रेरणा लेता है।</div>
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<div>   वार्षिकोत्सव में कबरई खण्ड कार्यवाह अंकित , विपिन सम्पर्क प्रमुख , मनीष सह संपर्क प्रमुख , राकेश , जयेंद्र, गुड्डू , ,आशीष , ,अशोक सभी लोग उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2022 21:34:18 +0530</pubDate>
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