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                <title>होलिका दहन - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>होलिका दहन RSS Feed</description>
                
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                <title>कहीं श्मशान की राख कहीं फूलों से खेली जाती है होली!</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समूचे देश समेत विशेषकर उत्तर भारत में मनाया जाने वाला होली पर्व आस्था विश्वास ऋतु परिवर्तन और सामाजिक एकता का लोकपर्व है। होली के दिन समूचा समाज सवर्ण असवर्ण गरीब अमीर सबल निर्बल राजा प्रजा ऊंच नीच के दायरे से बाहर आकर एक दूसरे को रंग गुलाल लगा कर सामाजिक समरसता व सौहार्द का सूत्रपात करता है यह लोकपर्व इतना सजीव व सामाजिक वैज्ञानिक आधार से जुड़ा है कि इस की प्रासंगिकता कभी खत्म नहीं हो सकती है। इस लोकपर्व के संबंध में प्रहलाद और होलिका की कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है। पुराने समय में हिरण्यकश्यपु का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172340/holi-is-played-with-ashes-of-crematorium-and-flowers-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/कहीं-श्मशान-की-राख-कहीं-फूलों-से-खेली-जाती-है-होली!.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समूचे देश समेत विशेषकर उत्तर भारत में मनाया जाने वाला होली पर्व आस्था विश्वास ऋतु परिवर्तन और सामाजिक एकता का लोकपर्व है। होली के दिन समूचा समाज सवर्ण असवर्ण गरीब अमीर सबल निर्बल राजा प्रजा ऊंच नीच के दायरे से बाहर आकर एक दूसरे को रंग गुलाल लगा कर सामाजिक समरसता व सौहार्द का सूत्रपात करता है यह लोकपर्व इतना सजीव व सामाजिक वैज्ञानिक आधार से जुड़ा है कि इस की प्रासंगिकता कभी खत्म नहीं हो सकती है। इस लोकपर्व के संबंध में प्रहलाद और होलिका की कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है। पुराने समय में हिरण्यकश्यपु का पुत्र प्रहलाद विष्णु जी का परम भक्त था। ये बात हिरण्यकश्यपु को पसंद नहीं थी। इस वजह से वह प्रहलाद को मारना चाहता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असुर राज हिरण्यकश्यपु ने बहुत कोशिश की, लेकिन प्रहलाद को मार नहीं सका। तब असुरराज की बहन होलिका प्रहलाद को लेकर आग में बैठ गई। होलिका को आग में न जलना का वरदान मिला हुआ था, लेकिन भगवान विष्णु जी की कृपा से होलिका जल गई और प्रहलाद बच गया। तभी से सत्य और धर्म की जीत के रूप में होली दहन का पर्व मनाया जाता है।।युगों पहले जिस तरह भक्त प्रहलाद के सकुशल बच जाने पर लोगों ने रंग गुलाल लगा कर खुशी मनाई थी आज भी उसी तरह खुशी मनाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>गालियों से होली</strong></div>
<div style="text-align:justify;">होली के गीतों में वैसे भी गालियां पिरोई होती हैं. शब्दों का प्रयोग कुछ इस प्रकार किया गया होता है कि लोग उसे सुन कर मस्ती करते हैं और उन्हें भीतर तक गुदगुदी होती है. वाराणसी, मिथिलांचल, कुमाऊं, राजस्थान, हरियाणा में होली पर गाली की अनोखी परंररा है। होली एक ऐसा त्योहार है, जो रंगों की मस्ती के साथ-साथ गालियों और गुदगुदाते गीतों के लिए भी खूब जाना जाता है. इसीलिए इस त्योहार को सबसे अनूठा कहते हैं. साल भर लोगों को इसका इंतजार रहता है. लोग गालियों और गीतों के जरिए अपनी भड़ास निकालते हैं. जैसा प्रदेश, वैसे गीत और वैसी ही वहां की गालियां. बहुरंगी होली की ये छटा दुनिया भर में निराली है। काशी की परंपराएं इसलिए अनूठी हैं क्योंकि यहां होली पर गालियों का भी अपना एक अलग संस्कार देखने को मिलता है. दूसरे शहरों में गाली देने पर मार हो जाए, लेकिन यहां होली पर गालियां मनभावन लगती हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तलवारबाजी से होली</strong> </div>
<div style="text-align:justify;">पंजाब में सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा शुरू की गई यह होलीवीर रस से भरी होती है। इसमें निहंग सिख पारंपरिक पोशाक पहनकर तलवारबाजी और घुड़सवारी (गतका) का प्रदर्शन करते हैं। पश्चिमी बंगाल व ओडिशा में यहाँ होली को डोल जात्रा के रूप में मनाया जाता हैजिसमें राधा-कृष्ण की मूर्तियों को झूलों (डोल) पर रखकर जुलूस निकाला जाता है और रंगों से पूजा की जाती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लठ्ठमार होली</strong> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से करीब 50 किमी दूर बरसाना की होली बहुत खास होती है। बरसाना में कई दिनों तक लट्ठमार होली खेली जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा से पहले ही लोग यहां होली खेलना शुरू कर देते हैं। पास के नंदगांव के पुरुष बरसाना आते हैं और बरसाना के पुरुष नंदगांव जाते हैं। इन गांवों की महिलाएं पुरुषों को लट्ठ मारती हैं और पुरुष ढाल से बचने की कोशिश करते हैं। ये होली देखने देश-विदेश से लाखों लोग यहां आते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>फूलों से होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">मान्यता है कि मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ होली खेली थी। इसी वजह से इन जगहों पर होली की अच्छी खासी धूम होती है। मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण के भक्त बड़ी संख्या में होली खेलने पहुंचते हैं। यहां के मंदिरों में फूलों से होली खेली जाती है।बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली अवर्णनीय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लड्डूमार होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">बरसाना के राधा रानी मंदिर में लड्डू मार होली खेली जाती हैजहाँ एक-दूसरे पर लड्डू फेंके जाते हैं और उन्हें प्रसाद के रूप में खाया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मसाने की होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">वाराणसी(काशी) के मणिकर्णिका घाट पर खेली जाने वाली होली विश्व प्रसिद्ध है। यहां शमशान की राख से होली खेली जाती है। मान्यता है कि शिव जी ने यहां अपने गणों के साथ चिता की राख से होली खेली थी। इसी मान्यता की वजह से आज भी शिव भक्त यहां मसाने की होली खेलते है। देश दुनिया में यह एकमात्र ऐसी होली है जिसमें चिता भस्म को रंग गुलाल की तरह इस्तेमाल करते हुए होली खेलते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अंगारों में होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">एक ऐसी भी होली है जहां जलती होली की लपटों के बीच पंडा नंगे पांव निकल जाता है लेकिन खरोंच तक नहीं आती है। मथुरा से करीब 50 किमी दूर एक गांव है फालैन। इसे प्रहलाद का गांव भी कहते हैं। फालैन गांव की होली की खास बात ये है कि यहां जलती हुई होली के बीच में से एक पंडा चलकर गुजरता है। होली ऊंची-ऊंची लपटों से निकलने के बाद भी पंडे का बाल तक नहीं जलता है। ये चमत्कार देखने के लिए देश-दुनिया से काफी लोग यहां पहुंचते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>गीतों की होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">उत्तराखंड में होली संगीत और गायन के साथ मनाई जाती हैजिसे 'बैठकी होली' कहा जाता हैजहाँ शास्त्रीय और पारंपरिक गीतों का गायन होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>हल्दी से होली</strong></div>
<div style="text-align:justify;">केरल के कोंकणी और कुडुंबी समुदाय के लोग इस दिन रंगों के बजाय हल्दी (मंजल) मिले पानी का उपयोग करते हैंजो शुद्धिकरण का प्रतीक है</div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र और गोवा में यहाँ होली को रंग पंचमी या शिग्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है जो बसंत पंचमी से शुरू होता है </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>हम्पी होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">कर्नाटक के हम्पी की होली भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। ये जगह यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल है। इस जगह का संबंध त्रेतायुग की वानर सेना से है। मान्यता है कि सुग्रीव अपनी वानर सेना के साथ इसी क्षेत्र में रहते थे। यहां होली पर बड़ा आयोजन होता है। हजारों लोग यहां होली खेलने आते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>शाही होली</strong></div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान की होली उदयपुर और पुष्कर में आज भी शाही तौर तरीकों से होली खेली जाती है। इस मौके पर राजपुताना आन बान शान देखने को मिलती है।कई दूसरे एशियाई देशों में भी होली के प्रतिरूप रंगों का पर्व मनाया जाता है लेकिन भारतीय होली यकीनन आज भी अनूठी मस्ती से भरी है यह समाज को एक सूत्र में पिरो कर उमंग व उत्साह का संचार करती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:13:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होलिका स्तोत्र  यह स्तोत्र को तीन परिक्रमा करने के बाद दोनों हाथो से नमस्कार करके होलिका स्तोत्र पढ़ना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">होली जलाते समय या होली जलाने के बाद और तीन या पांच परिक्रमा करने के पश्चात होलिका को दोनों हाथो से नमस्कार करके यह स्तोत्र बोलने से होलिका मनुष्य के सभी पापो को हर लेती है, सभी सन्तापों को हर लेती है, और सभी प्रकार से कल्याण करती है होलिका जगन्माता बनके सर्वसिद्धियाँ प्रदान करती है सुखशान्ति प्रदान करती है।<br /><br />यह स्तोत्र को तीन परिक्रमा करने के बाद दोनों हाथो से नमस्कार करके होलिका स्तोत्र पढ़ना चाहिए</p>
<p style="text-align:justify;"><br />  <strong>   होलिका स्तोत्र   </strong><br />ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्निः प्रचोदयात्।<br />(अर्थ --ॐ, मैं उस महान् ज्योति का, अग्निदेव का ध्यान करता हूँ। वह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172141/holika-stotra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/sddefault.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">होली जलाते समय या होली जलाने के बाद और तीन या पांच परिक्रमा करने के पश्चात होलिका को दोनों हाथो से नमस्कार करके यह स्तोत्र बोलने से होलिका मनुष्य के सभी पापो को हर लेती है, सभी सन्तापों को हर लेती है, और सभी प्रकार से कल्याण करती है होलिका जगन्माता बनके सर्वसिद्धियाँ प्रदान करती है सुखशान्ति प्रदान करती है।<br /><br />यह स्तोत्र को तीन परिक्रमा करने के बाद दोनों हाथो से नमस्कार करके होलिका स्तोत्र पढ़ना चाहिए</p>
<p style="text-align:justify;"><br /> <strong>  होलिका स्तोत्र   </strong><br />ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्निः प्रचोदयात्।<br />(अर्थ --ॐ, मैं उस महान् ज्योति का, अग्निदेव का ध्यान करता हूँ। वह (शुभ) अग्नि हमें (समृद्धि और कल्याण की ओर) प्रेरित करे।)<br />पापं तापं च दहनं कुरु कल्याणकारिणि | <br />होलिके त्वं जगद्धात्री होलिकायै नमो नमः || <br />होलिके त्वं जगन्माता सर्वसिद्धिप्रदायिनी | <br />ज्वालामुखी दारूणा त्वं सुखशान्तिप्रदा भव || <br />वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च । <br />अतस्त्वं पाहिनो देवि भूते भूतिप्रदा भव || <br />अस्माभिर्भय सन्त्रस्तैः कृत्वा त्वं होलि बालिशैः |<br />अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव ||<br />त्वदग्नि त्रिः परिक्रम्य गायन्तु च हसंतु च ।<br />होलिके त्वं जगद्धात्री होलिकायै नमो नमः || <br />होलिके त्वं जगन्माता सर्वसिद्धिप्रदायिनी | <br />ज्वालामुखी दारूणा त्वं सुखशान्तिप्रदा भव ||<br />वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च | <br />अतस्त्वं पाहिनो देवि भूते भूतिप्रदा भव || <br />अस्माभिर्भय सन्त्रस्तैः कृत्वा त्वं होलि बालिशैः | <br />अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव || <br />त्वदग्नि त्रिः परिक्रम्य गायन्तु च हसंतु च | <br />जल्पन्तु स्वेछ्या लोकाः निःशङ्का यस्य यन्मतम्<br />ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय महाचक्राय महाज्वालाय दीप्तिरूपाय सर्वतो रक्ष रक्ष मां महाबलाय नमः।<br />ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परम पुरूषाय परमात्मने परकर्म मंत्र यंत्र औषध अस्त्र शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ओम नमो भगवते सुदर्शनाय दीप्ते ज्वालादित्याय ,सर्वदिक् क्षोभण कराय हूं फट् ब्रहणे परं ज्योतिषे नमः।<br />.ॐ नमो भगवते सुदर्शनाय वासुदेवाय, धन्वंतराय अमृतकलश हस्ताय, सकला भय विनाशाय, सर्व रोग निवारणाय त्रिलोक पतये, त्रिलोकीनाथाय ॐ श्री महाविष्णु स्वरूपाय ॐ श्रीं ह्मीं ऐं औषधि चक्र नारायणाय फट्!!<br />ॐ ऐं ऐं अपराजितायै क्लीं क्लीं नमः।<br />ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं हूं हूं त्रैलोक्यमोहन विष्णवे नमः।<br />ॐ त्रैलोक्यमोहनाय च विदमहे आदिकामदेवाय धीमहि <br />तन्नो विष्णु: प्रचोदयात्।<br />ॐ तेजोरूपाय च विदमहे विष्णु पत्न्यै धीमहि तन्नो;<br />श्री: प्रचोदयात्।<br />                <br />इस साल होलिका दहन 2 मार्च 2026 हैं । होलिका दहन के लिए लकड़ी और उपले आदि एकत्रित किए जाते हैं। होलिका दहन से पूर्व उसमें गुलाल समेत अन्य सामग्रियां डाली जाती हैं। होलिका की अग्नि को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि होलिका की अग्नि में कुछ विशेष चीजों को डालने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। जबकि होलिका में कोई भी अपवित्र चीज डालने की मनाही होती है। मान्यता है कि इसका जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। <br />जानें होलिका में क्या-क्या डालना चाहिए और क्या नहीं-<br />  होलिका में क्या-क्या डालना चाहिए- <br />1.होलिका दहन की आग में सूखा नारियल डालना चाहिए। इसके अलावा अक्षत और ताजे फूल होलिका की अग्नि में चढ़ाएं। होलिका को साबुत मूंग की दाल, हल्दी के टुकड़े, और गाय के सूखे गोबर से बनी माला अर्पित करें।<br />होलिका की अग्नि में सूखा नारियल डालना अत्यंत शुभ माना गया है।<br />2. होली की अग्नि में गेहूं की बालियां सेंककर घर लेकर आएं <br />बाद में इसके गेंहू के दानों को अन्न भंडार में मिला दें अथवा विसर्जित कर दें।<br />3. होलिका की अग्नि में नीम के पत्ते व कपूर का टुकड़ा अर्पित करना चाहिए।<br />4. होलिका की अग्नि में घी में भिगोए पान के पत्ते व बताशा अर्पित करना चाहिए।<br />5. होलिका दहन में चांदी या तांबे के कलश से जल और गुलाल अर्पित करना चाहिए।<br />6. होलिका की अग्नि में हल्दी व उपले अर्पित करने चाहिए।<br />7. होलिका दहन की अग्नि में अक्षत व ताजे फूल भी अर्पित करने चाहिए।<br />8.होली के दिन रंग खेलने के बाद घर में फिटकरी का पोछा लगाने से धन आपकी तरफ चुंबक की तरह चला आता है. एक बाल्टी में पानी लेकर उसके अंदर थोड़ा फिटकरी का पाउडर डाल दें और उससे पोंछा करें. <br />होली पर बहुत सी नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती है. <br />वह दूर होती है।<br />  होलिका की अग्नि में क्या नहीं डालना चाहिए <br />1. होलिका की अग्नि में पानी वाला नारियल नहीं चढ़ाना चाहिए। होलिका में हमेशा सूखा नारियल ही चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि पानी वाला नारियल अर्पित करने से जन्मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति खराब हो सकती है और जातक को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पानी वाला नारियल फोड़कर प्रसाद रूप में ले सकते हैं।<br />2. 2.होलिका की अग्नि में टूटा-फूटा सामान जैसेपलंग, सोफा आदि नहीं डालना चाहिए। अथवा घर का कचरा न डालें।<br />मान्यता है कि ऐसा करने से शनि, राहु व केतु अशुभ फल प्रदान करते हैं।       <br />3. होलिका की आग में सूखी हुई गेहूं की बालियां न डालें <br />बल्कि सेंककर घर लाए।<br />और सूखे फूल नहीं अर्पित करने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ज्योतिषी काजल उपाध्याय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 22:10:42 +0530</pubDate>
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                <title> 3 मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश घोषित, होली पर लगातार तीन दिन बंद रहेंगे कार्यालय</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने होलिका दहन (2 मार्च) और होली (4 मार्च) के पहले से घोषित अवकाश के अतिरिक्त 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171745/offices-will-remain-closed-for-three-consecutive-days-on-holi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ani-20260206499-0_1770721811049_1770721838428_1772199646397.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ</strong>, 27 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने होली पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों को बड़ी राहत देते हुए <strong>3 मार्च 2026 (मंगलवार)</strong> को भी <strong>सार्वजनिक अवकाश</strong> घोषित कर दिया है। इससे पहले 2 मार्च को होलिका दहन तथा 4 मार्च को होली का अवकाश घोषित किया जा चुका था। अब तीनों दिन शासकीय कार्यालयों में अवकाश रहेगा।शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार होली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए 3 मार्च को भी अवकाश घोषित किया गया है। यह अतिरिक्त अवकाश <strong>Negotiable Instruments Act, 1881</strong> के अंतर्गत रखा गया है। इस अधिनियम के तहत घोषित अवकाश के कारण प्रदेश के समस्त कोषागार, उपकोषागार तथा बैंकिंग संस्थान भी बंद रहेंगे।सरकारी प्रवक्ता के अनुसार लगातार तीन दिन अवकाश रहने से कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को पर्व मनाने में सुविधा होगी। प्रशासन ने संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि अवकाश अवधि में आवश्यक सेवाओं का संचालन सुचारु रूप से जारी रहे।प्रदेश में होली का पर्व उल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। ऐसे में सरकार के इस निर्णय से कर्मचारियों और विद्यार्थियों में खुशी का माहौल है।उल्लेखनीय है कि इस निर्णय के बाद प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान तथा बैंक 2 मार्च से 4 मार्च तक बंद रहेंगे, जबकि आपातकालीन सेवाएं पूर्ववत संचालित होती रहेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 20:09:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Bajpai]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी  वार्डों में गोबर के उपले उपलब्ध कराए जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने इस वर्ष एक नई पहल की है। पहली बार होलिका दहन में लकड़ी की जगह गोबर के उपलों के उपयोग की तैयारी की गई है। इस अभियान के तहत एक लाख गोबर के उपले तैयार किए गए हैं। उपलों के वितरण की शुरुआत महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी द्वारा की जा रही है ।नगर निगम की योजना के अनुसार, नैनी क्षेत्र सहित नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी जोनों के वार्डों में गोबर के उपले उपलब्ध कराए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रत्येक वार्ड में निर्धारित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171413/cow-dung-cakes-will-be-made-available-in-all-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260225-wa0180.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने इस वर्ष एक नई पहल की है। पहली बार होलिका दहन में लकड़ी की जगह गोबर के उपलों के उपयोग की तैयारी की गई है। इस अभियान के तहत एक लाख गोबर के उपले तैयार किए गए हैं। उपलों के वितरण की शुरुआत महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी द्वारा की जा रही है ।नगर निगम की योजना के अनुसार, नैनी क्षेत्र सहित नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी जोनों के वार्डों में गोबर के उपले उपलब्ध कराए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रत्येक वार्ड में निर्धारित स्थानों पर उपले रखे जाएंगे, ताकि लोग होलिका दहन के दौरान उनका उपयोग कर सकें।हालांकि, इस पहल को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, हर वार्ड में केवल एक स्थान पर ही उपलों का वितरण किया जाएगा, जबकि अधिकांश वार्डों में चार से पांच स्थानों पर होलिका दहन की परंपरा रही है। ऐसे में अन्य स्थानों पर होने वाले होलिका दहन के लिए उपलों की व्यवस्था कैसे होगी, यह स्पष्ट नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परंपरागत रूप से वार्ड के मुख्य चौराहे पर होलिका दहन किया जाता है, लेकिन कई मोहल्लों में अलग-अलग स्थानों पर भी होलिका सजाई जाती है। ऐसे में नागरिकों का मानना है कि यदि सभी स्थानों पर उपलों की पर्याप्त व्यवस्था की जाए तो यह पहल अधिक प्रभावी और सफल साबित हो सकती है।नगर निगम की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि वितरण व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पर्यावरण–अनुकूल प्रयास से जुड़ सकें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 21:26:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रेम व सौहार्द के साथ मनाएं होली का त्यौहार-सी ओ सुनील सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="mail-message-content collapsible zoom-normal mail-show-images">
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<div><strong>विशेष संवाददाता</strong></div>
<div>  <strong>अयोध्या। </strong>होली एवं रमजान के त्यौहार को शांति और सौहार्द से मनाने के लिए कुमारगंज थाना परिसर में पीस कमेटी की बैठक की गई ।बैठक में सभी धर्म और समुदाय के लोगों ने हिस्सा लेकर आपस में शांति और सौहार्द से होली मनाने की अपील की गयी।</div>
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<div><strong>होली व रमजान महीने को लेकर हुई पीस कमेटी की बैठक</strong></div>
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<div>बैठक की अध्यक्षता कर रहे पुलिस क्षेत्राधिकारी मिल्कीपुर सुनील सिंह ने होली पर्व को शांतिपूर्ण निपटाने के लिए लोगों से बातचीत भी की। उन्होंने सम्बोधित करते हुए कहा कि होली का पर्व आपसी भाईचारे का संदेश देता है। इससे लोगों</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139597/celebrate-the-festival-of-holi-with-love-and-harmony-co-sunil"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/img-20240319-wa00511.jpg" alt=""></a><br /><div class="mail-message-content collapsible zoom-normal mail-show-images">
<div class="clear">
<div>
<div><strong>विशेष संवाददाता</strong></div>
<div> <strong>अयोध्या। </strong>होली एवं रमजान के त्यौहार को शांति और सौहार्द से मनाने के लिए कुमारगंज थाना परिसर में पीस कमेटी की बैठक की गई ।बैठक में सभी धर्म और समुदाय के लोगों ने हिस्सा लेकर आपस में शांति और सौहार्द से होली मनाने की अपील की गयी।</div>
<div> </div>
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<div><strong>होली व रमजान महीने को लेकर हुई पीस कमेटी की बैठक</strong></div>
<div> </div>
</div>
<div>बैठक की अध्यक्षता कर रहे पुलिस क्षेत्राधिकारी मिल्कीपुर सुनील सिंह ने होली पर्व को शांतिपूर्ण निपटाने के लिए लोगों से बातचीत भी की। उन्होंने सम्बोधित करते हुए कहा कि होली का पर्व आपसी भाईचारे का संदेश देता है। इससे लोगों को सीख लेनी चहिए।रंग-गुलाल उड़ाते समय बवाल न करें ताकि होली का पर्व सुखमय तरीके से संपन्न हो।</div>
<div>थाना प्रभारी निरीक्षक रतन सिंह ने लोगों से अपील की डीजे पर अश्लील गाने ना बजे शराब पीकर हुड़दंग न मचाएं ,कहीं भी बवाल न हो इसके लिए पुलिस नजर रख रही है।अगर कहीं भी किसी व्यक्ति के द्वारा क्षेत्र में त्यौहार में खलल डालने की कोशिश की गई व शांति भंग करने की कोशिश की गई तो उसके ऊपर सख्त कार्रवाई की जाएगी। </div>
<div> </div>
<div><strong>एसडीएम बोले चिन्हित स्थान पर ही होलिका दहन कराये</strong></div>
<div> </div>
<div>एसडीएम मिल्कीपुर राजीव रत्न सिंह ने थाना क्षेत्र के ग्राम प्रधानों से अपील की चिन्हित स्थान पर ही होलिका दहन कराये,  गांव में बैठक कर वरिष्ठ लोगों की टीम बनाये जिससे शान्ति पूर्वक त्यौहार मनाया जाए। कोई समस्या हो तो थाने पर सूचना दे।</div>
<div>इस मौके पर चेयरमैन कुमारगंज विकास सिंह शीतला प्रसाद वाजपेई, दिनेश शुक्ला, मुस्लिम प्रधान,राजू कनौजिया,राजू पासी, विकास सिंह, कलीम, ह्रिदेश यादव,अमर कुमार, चौंकी प्रभारी चिलबिली रवीश कुमार यादव, अभिषेक त्रिपाठी, अरविंद पटेल, अर्जुन यादव सहित क्षेत्र के अन्य वरिष्ठ लोग मौजूद रहे।</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139597/celebrate-the-festival-of-holi-with-love-and-harmony-co-sunil</link>
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                <pubDate>Tue, 19 Mar 2024 17:09:13 +0530</pubDate>
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