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                <title>lok sabha election - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>नरेंद्र मोदी के नाम दर्ज होने जा रहा एक नया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>2026</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180808/a-new-record-is-going-to-be-registered-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/178054939444.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का दिन इसी कारण राजनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे रिकॉर्ड के साथ चर्चा के केंद्र में होंगे जो भारतीय राजनीति में उनके लंबे और प्रभावशाली सफर का प्रतीक माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नरेंद्र मोदी ने पहली बार </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था। यह जीत इसलिए ऐतिहासिक थी क्योंकि लगभग </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों बाद किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिला था। उस दौर में देश भ्रष्टाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक सुस्ती और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों से जूझ रहा था। जनता एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में थी जो निर्णायक दिखाई दे और देश को नई दिशा दे सके। नरेंद्र मोदी ने विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन और मजबूत नेतृत्व के नारों के साथ चुनाव अभियान चलाया और जनता ने उन्हें भारी समर्थन दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत केवल एक चुनावी विजय नहीं थी बल्कि भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत थी। लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाली कांग्रेस पार्टी पहली बार इतनी कमजोर स्थिति में पहुँच गई। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी। नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व इस परिवर्तन का मुख्य केंद्र बन गया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहचान पहले से ही एक विकासवादी नेता की बन चुकी थी और उसी छवि को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बाद </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> का लोकसभा चुनाव आया। सामान्यतः किसी सरकार के </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों के बाद सत्ता विरोधी लहर देखी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पहले से भी अधिक सीटें जीत लीं। इस विजय ने यह स्पष्ट कर दिया कि मोदी केवल एक लोकप्रिय नेता नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुके हैं। </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद </span>370<span lang="hi" xml:lang="hi"> हटाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीन तलाक कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिनका व्यापक राजनीतिक प्रभाव पड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। लगातार तीन बार सत्ता में लौटना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आसान नहीं होता। इसके लिए केवल चुनावी रणनीति ही नहीं बल्कि व्यापक जनसमर्थन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत संगठन और प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि मोदी की तीसरी पारी को भारतीय राजनीति के बड़े घटनाक्रमों में गिना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन को लेकर चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि वे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री बने रहने वाले नेताओं की सूची में और अधिक मजबूत स्थिति प्राप्त करेंगे। भारतीय राजनीति में लंबे कार्यकाल का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि लोकतंत्र में जनता हर चुनाव में सरकार को बदलने का अधिकार रखती है। ऐसे में यदि कोई नेता लगातार वर्षों तक जनता का समर्थन बनाए रखता है तो यह उसकी राजनीतिक क्षमता और जनस्वीकार्यता को दर्शाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू लगभग </span>16<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष </span>286<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन तक लगातार प्रधानमंत्री रहे। यह रिकॉर्ड आज भी सबसे लंबा लगातार प्रधानमंत्रित्व माना जाता है। नेहरू ने </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> से लेकर </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>1964<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक देश का नेतृत्व किया। उनके सामने विभाजन की त्रासदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थाओं के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय पहचान जैसी अनेक चुनौतियाँ थीं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव मजबूत करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक क्षेत्र के विकास और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया। आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर नरेंद्र मोदी ऐसे समय में प्रधानमंत्री बने जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था। उनके सामने चुनौती थी कि भारत को आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामरिक और तकनीकी दृष्टि से और अधिक शक्तिशाली बनाया जाए। मोदी ने राष्ट्रवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक पहचान और मजबूत नेतृत्व को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। उन्होंने विदेश नीति में भी सक्रियता दिखाई। अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को नई गति मिली। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली दिखाई देने लगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार के दौरान अनेक कल्याणकारी योजनाएँ भी शुरू की गईं। जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। आयुष्मान योजना के जरिए गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का प्रयास हुआ। स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। कोरोना महामारी के दौरान मुफ्त राशन योजना ने करोड़ों लोगों को राहत दी। इन योजनाओं ने गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के बीच मोदी सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना भी करता रहा है। बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि संकट और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराना आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे कठिन कार्यों में से एक होगा। किसान आंदोलन ने भी यह दिखाया कि बड़े जनसमूह सरकार की नीतियों का विरोध कर सकते हैं। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद नरेंद्र मोदी की राजनीतिक लोकप्रियता लंबे समय तक बनी रही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक शक्ति भी मोदी की सफलता का एक बड़ा कारण रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का विशाल कार्यकर्ता तंत्र बूथ स्तर तक सक्रिय रहता है। चुनाव प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रचार अभियान और मतदाताओं तक सीधा संपर्क भाजपा की विशेषता बन चुके हैं। इसके अलावा विपक्ष की एकजुटता की कमी ने भी भाजपा को लाभ पहुँचाया। कई राज्यों में विपक्षी दल आपसी मतभेदों के कारण मजबूत चुनौती प्रस्तुत नहीं कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक राजनीति में संचार माध्यमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं और नए मतदाताओं से सीधे जोड़ने में सहायता की। रेडियो कार्यक्रमों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो संदेशों और विशाल जनसभाओं के माध्यम से उन्होंने लगातार जनता के साथ संवाद बनाए रखा। यह शैली पहले के प्रधानमंत्रियों से अलग मानी जाती है। नेहरू के समय में संचार के साधन सीमित थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आज राजनीति का बड़ा हिस्सा डिजिटल मंचों पर भी संचालित होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास केवल आँकड़ों से नहीं बनता बल्कि जनमानस की स्मृतियों से भी बनता है। जवाहर लाल नेहरू को आधुनिक भारत की संस्थाओं के निर्माण के लिए याद किया जाता है। इंदिरा गांधी को निर्णायक नेतृत्व और राजनीतिक साहस के लिए जाना जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी को संवाद और सहमति की राजनीति का प्रतीक माना जाता है। नरेंद्र मोदी की छवि एक ऐसे नेता की बनी है जिसने भारतीय राजनीति को अत्यधिक केंद्रीकृत नेतृत्व की दिशा दी और राष्ट्रवाद को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में स्थापित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह दिन भारतीय राजनीति में नेतृत्व की निरंतरता और बदलते जनादेश दोनों का प्रतीक बन रहा है। लोकतंत्र में लंबे समय तक सत्ता में बने रहना असाधारण उपलब्धि माना जाता है। यह केवल चुनावी जीत नहीं बल्कि जनता के विश्वास का संकेत भी होता है। नरेंद्र मोदी के समर्थक इसे मजबूत नेतृत्व की विजय मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आलोचक इसे भारतीय राजनीति में व्यक्तित्व आधारित राजनीति के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखते हैं। लेकिन दोनों पक्ष इस बात से सहमत दिखाई देते हैं कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय राजनीति का केंद्र नरेंद्र मोदी ही रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य में इतिहास नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का मूल्यांकन कई आधारों पर करेगा। आर्थिक विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक समरसता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश नीति की उपलब्धियाँ और आम नागरिक के जीवन में आए बदलाव इन सबके आधार पर उनके शासन को परखा जाएगा। यदि आने वाले वर्षों में भारत आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में और मजबूत होता है तो मोदी के कार्यकाल को विशेष महत्व दिया जाएगा। वहीं यदि बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई और सामाजिक असंतोष जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं तो आलोचनाएँ भी तेज होंगी। यही लोकतंत्र की विशेषता है कि किसी भी नेता का अंतिम मूल्यांकन इतिहास और जनता दोनों मिलकर करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल एक तारीख नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर का प्रतीक बनने जा रही है। यह दिन उस राजनीतिक यात्रा की याद दिलाता है जिसमें एक साधारण परिवार से निकला व्यक्ति देश का सबसे प्रभावशाली नेता बनता है और लगातार वर्षों तक सत्ता में बना रहता है। नेहरू से मोदी तक की यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र की शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनता के बदलते विश्वास और नेतृत्व की निरंतर बदलती परिभाषा को भी दर्शाती है। भारतीय राजनीति में रिकॉर्ड बनते और टूटते रहेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज हो जाते हैं। </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर चल रही चर्चा भी भारतीय लोकतंत्र के ऐसे ही एक ऐतिहासिक क्षण की ओर संकेत करती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:18:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>काशी में पीएम मोदी और योगी के रोड शो से लोगों की उमड़ी भीड़ </title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मौजूदा सांसद और वाराणसी से उम्मीदवार ने अपने रोड शो की पूर्व संध्या पर पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह तब हुआ पीएम मोदी मंगलवार को चल रहे लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए वाराणसी में भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक एकत्र हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के लंका चौक से अपना रोड शो शुरू किया। उनके साथ उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद हैं। </p>
<p>पीएम मोदी वाराणसी से मौजूदा सांसद और उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141233/crowd-of-people-gathered-due-to-pm-modi-and-yogis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/pm-modi_large_1724_8.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मौजूदा सांसद और वाराणसी से उम्मीदवार ने अपने रोड शो की पूर्व संध्या पर पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह तब हुआ पीएम मोदी मंगलवार को चल रहे लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए वाराणसी में भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक एकत्र हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के लंका चौक से अपना रोड शो शुरू किया। उनके साथ उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद हैं। </p>
<p>पीएम मोदी वाराणसी से मौजूदा सांसद और उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने यूपी पार्टी प्रमुख अजय राय को वाराणसी से मैदान में उतारा है। प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद नरेन्द्र मोदी 14 मई को तीसरी बार वाराणसी से नामांकन करेंगे। यहां से उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, बस देखना यह होगा कि जीत का अंतर कितना बड़ा होता है।</p>
<p>वाराणसी लोकसभा चुनाव की खास बात जहां प्रधानमंत्री मोदी की उम्मीदवारी है तो चर्चा इस बात की भी है कि पूरे देश में घूम-घूम कर मोदी को गाली देने वाले नेताओं की फौज में क्या कोई ऐसा नेता मौजूद नहीं हैं जो वाराणसी में आकर मोदी को चुनौती दे सके। </p>
<p>भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नामांकन के लिए चार प्रस्तावकों के नाम तय कर लिए हैं। इसमें सर्व प्रमुख नाम गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ का है। आचार्य गणेश्वर शास्त्री ने ही अयोध्या श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का मुहुर्त निकाला था। प्राण प्रतिष्ठा में मुख्य पुजारी भी थे।</p>
<p>पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके अलावा दूसरा प्रस्तावक माझी समाज से तो एक पद्म अलंकृत विभूति को भी शामिल किया गया है। इसमें पद्मश्री डा. राजेश्वर आचार्य के नाम की चर्चा है। इसके अलावा प्रस्तावकों में एक महिला भी होंगी। इस दृष्टि से पद्मश्री डा. सोमा घोष का नाम भी सूची में माना जा रहा है। वैसे पूर्व कुलपति और पद्मश्री डा. सरोज चूड़ामणि गोपाल का नाम भी प्रमुखता में है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 May 2024 17:33:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कतार में खड़े मतदाता को YSRCP विधायक ने शरेआम मारा चाटा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तेनाली। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के एक विधायक ने सोमवार को यहां एक मतदान केंद्र पर मतदान के लिए कतार में खड़े एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया। हालांकि उक्त व्यक्ति ने भी इसके जवाब में विधायक को थप्पड़ जड़ दिया।</p>
<p>विधायक ने थप्पड़ उस व्यक्ति को मारा जिसने उनके कतार तोड़ने पर सवाल किया था। यह घटना गुंटूर जिले के तेनाली में तब हुई जब वाईएसआरसीपी के स्थानीय विधायक ए. शिव कुमार ने कतार तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया और मतदाताओं में से एक ने इसे लेकर उनसे सवाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141232/ysrcp-mla-openly-licked-voter-standing-in-queue"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/ysrcp-mla-slaps-voter_large_1720_154.webp" alt=""></a><br /><p>तेनाली। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के एक विधायक ने सोमवार को यहां एक मतदान केंद्र पर मतदान के लिए कतार में खड़े एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया। हालांकि उक्त व्यक्ति ने भी इसके जवाब में विधायक को थप्पड़ जड़ दिया।</p>
<p>विधायक ने थप्पड़ उस व्यक्ति को मारा जिसने उनके कतार तोड़ने पर सवाल किया था। यह घटना गुंटूर जिले के तेनाली में तब हुई जब वाईएसआरसीपी के स्थानीय विधायक ए. शिव कुमार ने कतार तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया और मतदाताओं में से एक ने इसे लेकर उनसे सवाल कर दिया। </p>
<p>पुलिस ने बताया कि इसको लेकर गुस्साये विधायक ने व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया, हालांकि उक्त व्यक्ति ने भी इसके जवाब में विधायक को थप्पड़ जड़ दिया। विधायक को थप्पड़ मारे जाने से नाराज उनके समर्थकों ने उक्त व्यक्ति पर अपना गुस्सा निकाला। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया जिसके परिणाम स्वरूप यह झड़प हुई। उन्होंने कहा, ‘‘वह (वाईएसआरसीपी विधायक) मतदान करने जा रहे थे और वह कतार तोड़कर आगे बढ़े लेकिन किसी (मतदाता) ने इस पर आपत्ति जतायी।’’ </p>
<p>पुलिस ने बताया कि विधायक और मतदाता के बीच पहले कहा-सुनी हुई और उसके बाद विधायक ने उसे थप्पड़ मार दिया। पुलिस ने बताया कि मतदाता के पलटवार करने के बाद विधायक के समर्थकों ने उसकी पिटायी कर दी और उस पर घूंसे बरसाये। हालांकि बाद में पुलिस और अन्य मतदाताओं ने बाद में उन्हें रोका।</p>
<p>तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) ने इस घटना को लेकर निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया में है। राज्य में लोकसभा की 25 सीट और विधानसभा की 175 सीट के लिए सोमवार को एकसाथ चुनाव हुआ।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 May 2024 17:27:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विपक्षी दलों को चुनावी कार्यक्रम लम्बा होने से होता है नुकसान: सीताराम येचुरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>National: </strong>नयी दिल्ली। इस बार का आम चुनाव भारत में अब तक का दूसरा सबसे लंबा चुनाव कार्यक्रम होने पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि इससे विपक्षी दलों को नुकसान होता है।</p>
<p>येचुरी ने  लंबी अवधि के चुनाव कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग को चुनाव की तारीखों पर फैसला लेने का अधिकार है। चुनाव कार्यक्रम की 82 दिन की अवधि के बारे में पूछे जाने पर माकपा नेता ने कहा कि यह ‘‘चिंता का विषय’’ है। चुनाव की प्रक्रिया 16 मार्च को चुनावों की घोषणा के साथ शुरू</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139725/opposition-parties-suffer-losses-due-to-prolonged-election-schedule-sitaram"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/sitaram-yechury_large_1848_154.webp" alt=""></a><br /><p><strong>National: </strong>नयी दिल्ली। इस बार का आम चुनाव भारत में अब तक का दूसरा सबसे लंबा चुनाव कार्यक्रम होने पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि इससे विपक्षी दलों को नुकसान होता है।</p>
<p>येचुरी ने  लंबी अवधि के चुनाव कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग को चुनाव की तारीखों पर फैसला लेने का अधिकार है। चुनाव कार्यक्रम की 82 दिन की अवधि के बारे में पूछे जाने पर माकपा नेता ने कहा कि यह ‘‘चिंता का विषय’’ है। चुनाव की प्रक्रिया 16 मार्च को चुनावों की घोषणा के साथ शुरू हुई और 4 जून को परिणाम घोषित होने पर समाप्त होगी। </p>
<p>येचुरी ने कहा, ‘‘यह चिंता का विषय है। हम जानते हैं कि संविधान इन मामलों में निर्वाचन आयोग को संपूर्ण अधिकार, एकमात्र अधिकार देता है। संविधान द्वारा सिर्फ उसे ही यह अधिकार मिला है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम इसके विवेक पर सवाल उठाते हैं।</p>
<p>’’ माकपा नेता ने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ चुनाव कराने में लगने वाला समय घटना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके बजाय, यह समय बढ़ गया है। उन्होंने कहा, ‘‘1952 को छोड़कर पहली बार आप इतना लंबा चुनाव देख रहे हैं। आजादी के बाद पहले चुनाव में बहुत सी चीजों को समायोजित करना था...अब यह सबसे लंबा चुनाव है। तकनीक के साथ यह अवधि कम होनी चाहिए लेकिन यह बढ़ गई है।’’ </p>
<p>विपक्षी दलों के पास धन या पहुंच के मामले में आगामी चुनावों में समान अवसर नहीं होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब प्रत्यक्ष रूप से प्रचार की बात आती है तो लंबी अवधि के चुनाव कार्यक्रम से नुकसान होता है। माकपा विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ का हिस्सा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘एक चरण में मतदान चलता है और दूसरे चरण में चुनाव प्रचार चल रहा होता है। प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दल के नेता रैली, सभाओं में जो कहते हैं, उसका सीधा प्रसारण उन स्थानों पर होता है जहां मतदान हो रहा होता है।’’ </p>
<p>येचुरी ने कहा कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कमजोर है और जहां उसके पास पर्याप्त कैडर नहीं है, सात चरण उन्हें कैडर को दूसरी जगह भेजने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा इन सबसे सत्तारूढ़ दल को लाभ होता है। माकपा नेता ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>
<p>सभी को समान अवसर मिलना चाहिए...।’’ इस साल लोकसभा चुनावों के लिए मतदान कार्यक्रम की अवधि 44 दिनों की है। 1951-52 के पहले संसदीय चुनावों के बाद यह दूसरा सबसे लंबा चुनाव कार्यक्रम होगा। पहले आम चुनाव का कार्यक्रम चार महीने से अधिक समय में संपन्न हुआ था। लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल से सात चरणों में होंगे। मतगणना चार जून को होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Mar 2024 18:59:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>“ मैं आज जगतियाल और शिवमोगा में रैलियों को संबोधित करूंगा: PM Modi </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Nation:</strong> दक्षिण भारत में अपने कई कार्यक्रमों से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दक्षिण भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में असाधारण उत्साह है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी लोकसभा चुनावों में अहम लाभ हासिल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री सोमवार को कर्नाटक के शिवमोगा और तेलंगाना के जगतियाल में रैलियों को संबोधित करेंगे जबकि तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक रोड शो करेंगे। </p>
<p>मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “ मैं आज जगतियाल और शिवमोगा में रैलियों को संबोधित करूंगा। बाद में शाम को कोयंबटूर में रोड शो में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139518/65f7ed4a80a36"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/pm-modi_large_1251_154.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Nation:</strong> दक्षिण भारत में अपने कई कार्यक्रमों से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दक्षिण भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में असाधारण उत्साह है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी लोकसभा चुनावों में अहम लाभ हासिल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री सोमवार को कर्नाटक के शिवमोगा और तेलंगाना के जगतियाल में रैलियों को संबोधित करेंगे जबकि तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक रोड शो करेंगे। </p>
<p>मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “ मैं आज जगतियाल और शिवमोगा में रैलियों को संबोधित करूंगा। बाद में शाम को कोयंबटूर में रोड शो में शामिल होऊंगा। चाहे तेलंगाना हो, कर्नाटक हो या तमिलनाडु, राजग के पक्ष में असाधारण उत्साह है।” कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य बीएस येदियुरप्पा के गृह क्षेत्र शिवमोगा में प्रधानमंत्री की रैली ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी के असंतुष्ट नेता केएस ईश्वरप्पा ने शिमोगा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की योजना की घोषणा की है, क्योंकि उनके बेटे को हावेरी सीट से पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। </p>
<p>भाजपा ने येदियुरप्पा के बड़े बेटे बी.वाई राघवेंद्र को शिमोगा से मैदान में उतारा है। मोदी की तेलंगाना में निजामाबाद लोकसभा क्षेत्र के जगतियाल में होने वाली रैली का असर पड़ोसी करीमनगर लोकसभा सीट पर भी पड़ सकता है। निवर्तमान लोकसभा में निजामाबाद और करीमनगर दोनों सीटों पर भाजपा का ही कब्जा है। भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में तेलंगाना की 17 लोकसभा सीट में से चार पर जीत हासिल की थी। </p>
<p>कोयंबटूर में मोदी का रोड शो मद्रास उच्च न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद हो रहा है। पुलिस ने ‘सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील’ इलाका होने और परीक्षाओं होने का कारण बताकर रोड शो की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। जिले ने अतीत में भाजपा का समर्थन किया है। यहां से 1990 के दशक में सीपी राधाकृष्णन भाजपा के टिकट पर दो बार लोकसभा पहुंचे थे जो फिलहाल झारखंड के राज्यपाल हैं। वहीं, 2021 के तमिलनाडु विधानसभा पार्टी की महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वी.श्रीनिवासन ने जीत दर्ज की थी। </p>
<p>प्रधानमंत्री के तीन कार्यक्रम संकेत करते हैं कि भाजपा लोकसभा चुनाव में 400 सीटें जीतने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक तौर पर पैठ बनाने की कोशिश में है। पार्टी का लक्ष्य पांच दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के अलावा केंद्र शासित पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी अच्छी बढ़त हासिल करना है। निवर्तमान सदन में, भाजपा का केरल और तमिलनाडु से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जहां क्रमशः 20 और 39 लोकसभा सीट हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Mar 2024 13:04:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आजमगढ़ में होगा धर्मेंद्र यादव और दिनेश लाल यादव निरहुआ का दमदार मुक़ाबला </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> समाजवादी पार्टी (सपा) ने शनिवार को लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश के छह उम्मीदवारों की सूची जारी की जिसमें उसने धर्मेंद्र यादव को आजमगढ़ लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्‍स’ पर यह जानकारी दी। सपा ने उत्तर प्रदेश से लोकसभा चुनाव के लिए छह उम्मीदवारों की घोषणा की, जिनमें आजमगढ़ लोकसभा सीट से धर्मेंद्र यादव का नाम शामिल है। </p>
<p>सपा प्रमुख अखिलेश यादव के 2022 के विधानसभा चुनाव में विधायक चुने जाने पर सांसद पद से इस्तीफे के बाद आजमगढ़ में हुए उपचुनाव में उनके चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव आजमगढ़</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139459/there-will-be-a-strong-contest-between-dharmendra-yadav-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/rajneeti3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ।</strong> समाजवादी पार्टी (सपा) ने शनिवार को लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश के छह उम्मीदवारों की सूची जारी की जिसमें उसने धर्मेंद्र यादव को आजमगढ़ लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्‍स’ पर यह जानकारी दी। सपा ने उत्तर प्रदेश से लोकसभा चुनाव के लिए छह उम्मीदवारों की घोषणा की, जिनमें आजमगढ़ लोकसभा सीट से धर्मेंद्र यादव का नाम शामिल है। </p>
<p>सपा प्रमुख अखिलेश यादव के 2022 के विधानसभा चुनाव में विधायक चुने जाने पर सांसद पद से इस्तीफे के बाद आजमगढ़ में हुए उपचुनाव में उनके चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव आजमगढ़ से पार्टी के लोकसभा उम्मीदवार थे जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिनेश लाल यादव निरहुआ ने पराजित कर दिया था।</p>
<p>‘एक्स’ पर एक पोस्ट में सपा ने धर्मेंद्र यादव (आजमगढ़) के अलावा ने पांच अन्य संसदीय क्षेत्रों से भी उम्मीदवारों की घोषणा की। पार्टी की ओर से आज की सूची में डॉक्टर महेंद्र नागर (गौतमबुद्ध नगर), मनोज कुमार राजवंशी(मिश्रिख) भीम निषाद (सुल्तानपुर), जितेंद्र दोहरे (इटावा) और नारायण दास अहिरवार (जालौन) संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित किये गये हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Mar 2024 19:29:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;अधूरी हसरतों का इल्जाम&quot; EVM पर उठ रहे सवाल, काफी शायराना अंदाज़ में मिला जवाब </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Election:</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शनिवार को लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की निष्पक्षता के खिलाफ राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों के बारे में बात की। एक काव्यात्मक प्रतिक्रिया में राजीव कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि ईवीएम फुल-प्रूफ हैं और उन्होंने कई बार उन राजनीतिक दलों को सत्ता में लाया है जो उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं।</p>
<blockquote class="format2">
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अधूरी हसरतों का इल्जाम हर बार हम पर लगाना ठीक नहीं, </strong></span></p>
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>वफा खुद से नहीं होती खता ईवीएम की कहते हो।</strong></span></p>
</blockquote>
<p>चुनाव आयोग ने बताया कि लोकसभा चुनाव 19</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139458/%22accusation-of-unfulfilled-desires%22-questions-raised-on-evm-got-answers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/rajneeti2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Election:</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शनिवार को लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की निष्पक्षता के खिलाफ राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों के बारे में बात की। एक काव्यात्मक प्रतिक्रिया में राजीव कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि ईवीएम फुल-प्रूफ हैं और उन्होंने कई बार उन राजनीतिक दलों को सत्ता में लाया है जो उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं।</p>
<blockquote class="format2">
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अधूरी हसरतों का इल्जाम हर बार हम पर लगाना ठीक नहीं, </strong></span></p>
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>वफा खुद से नहीं होती खता ईवीएम की कहते हो।</strong></span></p>
</blockquote>
<p>चुनाव आयोग ने बताया कि लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल से 1 जून तक 7 चरणों में होंगे । वोटों की गिनती 4 जून को होगी। पहला चरण 19 अप्रैल, दूसरा चरण 26 अप्रैल, तीसरा चरण 7 मई, चौथा चरण 13 मई, पांचवां चरण 20 मई, छठा चरण 25 मई और सातवां चरण 1 जून को होगा। </p>
<p>इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पहले शुक्रवार को दो रिट याचिकाएं खारिज कर दीं, एक 19 लाख से अधिक ईवीएम के गायब होने की आशंका पर और दूसरी याचिका ईवीएम पर अपना विश्वास जताते हुए चुनाव कराने के लिए मतपत्र का उपयोग करने की मांग थी। 19 लाख गायब ईवीएम याचिका पर फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने आशंकाओं और आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया, जिससे मामला भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के पक्ष में बंद हो गया। </p>
<p>लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 61ए को अलग करते हुए मतपत्र का उपयोग करके चुनाव कराने के संबंध में एक अन्य याचिका पर भी विचार करने से इनकार करते हुए, न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि ईवीएम के कामकाज से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर 10 से अधिक मामलों की जांच की गई है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Mar 2024 18:51:46 +0530</pubDate>
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