<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/13581/election-commission" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Election Commission - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/13581/rss</link>
                <description>Election Commission RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पार्टियों की टूट व टूटता भरोसा: लोकतंत्र में सबसे बड़ा नुकसान यही है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181509/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया जाता है - "सिद्धांतों से समझौता", "जनता के हित में फैसला"। लेकिन नतीजा एक ही निकलता है - वोटर का भरोसा टूटना।</p><p style="text-align:justify;"><br />टूट क्यों रही हैं पार्टियां? इस पर हमारी सोच वही है जो लगभग सभी की होती है। सत्ता और पद का गणित- पार्टी टूटने का 80% कारण विधायकों और सांसदों की टिकट और मंत्री पद की भूख है। जब हाईकमान टिकट काटता है या किसी और को आगे बढ़ाता है, तो नाराज नेता दूसरी पार्टी या नई पार्टी बना लेते हैं। परिवारवाद और हाईकमान कल्चर-<br />कई क्षेत्रीय पार्टियां एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। जब दूसरी पीढ़ी तैयार होती है, तो पुराने नेता खुद को साइडलाइन महसूस करते हैं और बगावत करते हैं।</p><p style="text-align:justify;"><br />विचारधारा का कमजोर होना- पहले पार्टियों की पहचान किसी विचारधारा से होती थी। अब ज्यादातर पार्टियां "पावर ब्लॉक" बन गई हैं। विचारधारा बदलते देर नहीं लगती, क्योंकि एजेंडा सत्ता है। वोटर का भरोसा कैसे टूटता है?- जब तुमने 2019 में किसी पार्टी को वोट दिया था, तुमने उसके घोषणापत्र, नेता और विचारधारा पर भरोसा किया था। 2023 में वही विधायक दूसरी पार्टी में चला जाए और 2024 में तीसरी पार्टी में, तो सवाल उठता है। मैंने वोट किसको दिया था? व्यक्ति को, सिंबल को, या पार्टी को?</p><p style="text-align:justify;"><br />क्या मेरा वोट मायने रखता है? अगर चुनाव के बाद गठबंधन बदल जाए तो जनादेश का मतलब क्या रहा? सब एक जैसे हैं- ये सनक नहीं, टूटे भरोसे की उपज है। 2023 के कर्नाटक और महाराष्ट्र चुनाव के बाद CSDS के सर्वे में 47% लोगों ने कहा कि "दलबदल से लोकतंत्र कमजोर होता है"। इसका असर कहां दिखता है? चुनावी राजनीति पर- लोग अब स्थानीय उम्मीदवार देखने लगे हैं, पार्टी नहीं। "पार्टी कोई भी हो, मेरा काम करे" वाला ट्रेंड बढ़ रहा है। नीति निर्माण पर- सरकारें अस्थिर हो जाती हैं। 5 साल का प्लान 2 साल में बदल जाता है क्योंकि गठबंधन बदल गया। युवा राजनीति से दूर हो रहे हैं- कॉलेज चुनावों में भी भागीदारी घट रही है। युवाओं को लगता है कि राजनीति सिर्फ सौदेबाजी है। नोटा का बढ़ना- 2019 के बाद से कई सीटों पर नोटा को मिले वोट 2-3% तक पहुंच गए हैं। ये विरोध का साइलेंट तरीका है।</p><p style="text-align:justify;"><br />               दलबदल कानून कहां फेल हुआ?- 1985 में 52वां संविधान संशोधन लाकर दलबदल विरोधी कानून बनाया गया। मकसद था कि विधायक पार्टी न बदलें। लेकिन कानून में एक खामी छोड़ दी गई - अगर 2/3 विधायक साथ छोड़ दें तो वो "विलय" कहलाता है और अयोग्यता नहीं लगती। इसी खामी का फायदा लेकर महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश में सरकारें गिरीं। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि स्पीकर का फैसला समय पर नहीं आता, जिससे कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है। क्या हो सकता है समाधान?- 2/3 वाली छूट हटाओ- अगर पार्टी टूटती है तो सबको अयोग्य ठहराओ। फिर जनता के पास जाओ और दोबारा चुनाव लड़ो।</p><p style="text-align:justify;"><br />फंडिंग में पारदर्शिता-  चुनाव आयोग को हर लेन-देन का हिसाब मिले ताकि नेताओं को खरीद-फरोख्त न हो सके। आंतरिक लोकतंत्र-  पार्टियों में चुनाव हों, युवा और कार्यकर्ताओं की सुनवाई हो। जब अंदर लोकतंत्र होगा तो बाहर टूट कम होगी। वोटर एजुकेशन-  लोगों को समझाना होगा कि वोट सिंबल को जाता है, व्यक्ति को नहीं। ये बात स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई जाए। स्थानीय मुद्दों पर वोट-  लोग अब पानी, सड़क, स्कूल को देखकर वोट कर रहे हैं, न कि बड़े नेता के नाम पर। सोशल मीडिया पर जवाबदेही- विधायक अगर पाला बदलता है तो अगले 6 महीने तक ट्रोल होता है। ये डर कुछ हद तक काम कर रहा है। नए विकल्प की तलाश AAP जैसे दल इसी भरोसे के संकट से पैदा हुए। पार्टियों का टूटना लोकतंत्र में स्वाभाविक है, लेकिन जब हर 2 साल में गठबंधन और दल बदल जाएं, तो जनता को लगता है कि उसका वोट सिर्फ सत्ता का सीढ़ी है।</p><p style="text-align:justify;"><br />लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं है, ये भरोसे का कॉन्ट्रैक्ट है। जब पार्टियां उस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ती हैं, तो नुकसान वोटर को होता है। और एक बार भरोसा टूट जाए, तो उसे दोबारा जोड़ने में 10 साल लग जाते हैं।<br />अगली बार जब कोई नेता पाला बदले, तो सवाल पूछो: "तुम पार्टी बदले, मेरी समस्या बदली क्या?"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181509/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181509/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:39:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/hindi-divas3.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कानपुर में एस आई आर : वोटर लिस्ट से पूरा ही गायब हंसपुर गांव , चुनाव आयोग और मुख्यमंत्री से कार्यवाही की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> सर्वाधिक सीटें देकर केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में सदैव अहम भूमिका निभाने में अग्रणी कानपुर में एस आई आर की जारी कार्यवाही ने अपने दायरे से बाहर करके यहां के क्षत्रिय बाहुल्य हंसपुर गांव में हड़कंप हाहाकार मचा दिया है। लोकसभा और विधानसभा सहित अबतक के सभी चुनाव में मतदान करने में अग्रणी प्राचीनतम गांवों में सुमार हंसपुर गांव 2003 की वोटर लिस्ट से पूरा का पूरा गायब है। मतलब हंसपुर गांव की एक भी निवासी का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है। यही कारण है कि यहां एस आई आर की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163613/hanspur-village-completely-missing-from-sir-voter-list-in-kanpur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/1001463569.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> सर्वाधिक सीटें देकर केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में सदैव अहम भूमिका निभाने में अग्रणी कानपुर में एस आई आर की जारी कार्यवाही ने अपने दायरे से बाहर करके यहां के क्षत्रिय बाहुल्य हंसपुर गांव में हड़कंप हाहाकार मचा दिया है। लोकसभा और विधानसभा सहित अबतक के सभी चुनाव में मतदान करने में अग्रणी प्राचीनतम गांवों में सुमार हंसपुर गांव 2003 की वोटर लिस्ट से पूरा का पूरा गायब है। मतलब हंसपुर गांव की एक भी निवासी का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है। यही कारण है कि यहां एस आई आर की प्रक्रिया संपादित ही नहीं हो पा रही है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में हजारों की सदस्य संख्या वाले भारतीय प्रधान संगठन और क्षत्रिय जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष एस के सिंह और सुधीर सिंह कछवाह ने बताया कि खास बात यह है कि सूचित करने के बाद भी प्रशासन के अधिकारियों ने भी हंसपुर गांव के बारे में अब तक ऐसा कुछ नहीं किया है, जिससे मताधिकार के साथ ही भारतीय नागरिकता को प्रमाणित करने  वाली एस आई आर की प्रक्रिया हंसपुर गांव में भी पूरी की जा सके। </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय प्रधान संगठन और क्षत्रिय जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष एस के सिंह और इस बारे में समस्या के निदान के लिए अधिकारियों से लगातार गुजारिश कर रहे सुधीर सिंह कछवाह ने बताया कि लगभग 4000 की आबादी वाले हंसपुर गांवमें मतदाताओं की संख्या भी1800 2000 के आसपास है, लेकिन इनमें से हंसपुर गांव के किसी भी व्यक्ति का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं शामिल है ,जिसे एस आई आर का आधार बनाया गया है। यही कारण है कि पूरा हंसपुर गांव एस ए आर की प्रक्रिया से अभी तक वंचित है। जिसको लेकर गांव का हर नागरिक बहुत परेशान और चिंतित है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> समाजसेवी अध्यक्ष एसके सिंह के मुताबिक इसकी सूचना संबंधित प्रशासन के अधिकारियों को भी दी जा चुकी है लेकिन इसके बाद भी एस आई आर से संबंधित कोई भी कार्रवाई हंसपुर गांव में नहीं शुरू होने से लोग परेशान है। उन्होंने इसके लिए भारत के चुनाव आयोग ,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कानपुर के जिलाधिकारी से भी जल्द प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की है, ताकि एस आई आर की प्रक्रिया से अबतक वंचित हंसपुर गांव को इसका लाभ मिल सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163613/hanspur-village-completely-missing-from-sir-voter-list-in-kanpur</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/163613/hanspur-village-completely-missing-from-sir-voter-list-in-kanpur</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 17:00:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/1001463569.jpg"                         length="309856"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए निर्वाचन आयोग और बीजेपी के बीच मिलीभगत'</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोलकाता में सोमवार रात उस समय नाटकीय घटनाक्रम हुआ जब बीजेपी कार्यकर्ताओं के एक समूह का पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सामने बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के एक फोरम के प्रदर्शनकारी सदस्यों से आमना-सामना हो गया। इस दौरान पुलिस ने बीच-बचाव किया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">बीएलओ अधिकार रक्षा समिति’ के कई सदस्य सोमवार को दोपहर से ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे और उनका आरोप था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उन पर ‘‘काम</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161682/collusion-between-election-commission-and-bjp-to-remove-names-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/बंगाल-में-वास्तविक-मतदाताओं-के-नाम-हटाने-के-लिए-निर्वाचन-आयोग-और बीजेपी के-बीच-मिलीभगत&#039;.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोलकाता में सोमवार रात उस समय नाटकीय घटनाक्रम हुआ जब बीजेपी कार्यकर्ताओं के एक समूह का पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सामने बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के एक फोरम के प्रदर्शनकारी सदस्यों से आमना-सामना हो गया। इस दौरान पुलिस ने बीच-बचाव किया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">बीएलओ अधिकार रक्षा समिति’ के कई सदस्य सोमवार को दोपहर से ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे और उनका आरोप था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उन पर ‘‘काम का अत्यधिक बोझ’’ है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मामला तब बिगड़ गया जब कोलकाता नगर निगम (केएमसी) पार्षद सजल घोष के नेतृत्व में लगभग </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> बीजेपी कार्यकर्ता रात </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे मौके पर पहुंचे और सीईओ कार्यालय में बंद चुनाव आयोग के अधिकारियों को डराकर एसआईआर प्रक्रिया को रोकने के तृणमूल कांग्रेस के कथित प्रयास के खिलाफ नारे लगाने लगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी बीएलओ ने जवाबी नारे लगाए और बीजेपी पर ‘‘पश्चिम बंगाल में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए निर्वाचन आयोग के साथ मिलीभगत’’ से काम करने का आरोप लगाया।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ता ‘‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बीएलओ को आतंकित करने और भड़काने की कोशिश कर रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल सीईओ से मिलना चाहते थे।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घोष ने दावा किया</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदर्शनकारी बीएलओ नहीं हैं। वे तृणमूल समर्थित संगठनों के नेता हैं।’’बीएलओ फोरम के सदस्यों ने आरोपों को खारिज कर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब दोनों समूह मीडियाकर्मियों के सामने एक-दूसरे पर कटाक्ष कर रहे थे तभी उपायुक्त (मध्य) इंदिरा मुखर्जी के नेतृत्व में एक पुलिस बल उनके बीच खड़ा हो गया ताकि वे टकराव होने से रोक सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल रात करीब </span>11.40<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे अपने कार्यालय से बाहर निकले। वे बीएलओ के धरने के कारण कार्यालय में ही थे।उन्होंने देर रात के घटनाक्रम पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन तनाव उस समय कम हो गया जब उन्हें और निर्वाचन आयोग के अन्य अधिकारियों को पुलिस ने उनके आवासों तक पहुंचाया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161682/collusion-between-election-commission-and-bjp-to-remove-names-of</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/161682/collusion-between-election-commission-and-bjp-to-remove-names-of</guid>
                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 21:22:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%94%E0%A4%B0%C2%A0%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A5%80%C2%A0%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%A4%27.webp"                         length="69292"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीएलओ का बीमा करवाये - निर्वाचन आयोग </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के बारह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की समय-सीमा के चलते कार्य की अधिकता के कारण मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से बीएलओ की आत्महत्या की खबरें आना वाकई बेहद दुखद है! एस आई आर कार्य के चलते बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की खबर भारत निर्वाचन आयोग के कानों तक पहुँची</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आयोग द्वारा तत्काल राज्यों से बीएलओ के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई। निश्चय ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यों से बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद बीएलओ के हितार्थ कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय भी लिया जा सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत</span></p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161623/get-blo-insured-election-commission"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download12.jpg" alt=""></a><br /><div>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के बारह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की समय-सीमा के चलते कार्य की अधिकता के कारण मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से बीएलओ की आत्महत्या की खबरें आना वाकई बेहद दुखद है! एस आई आर कार्य के चलते बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की खबर भारत निर्वाचन आयोग के कानों तक पहुँची</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आयोग द्वारा तत्काल राज्यों से बीएलओ के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई। निश्चय ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यों से बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद बीएलओ के हितार्थ कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय भी लिया जा सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत निर्वाचन आयोग से एक निवेदन एवं सुझाव है कि वह निर्वाचन कार्य में संलग्न देशभर के बीएलओ का बीमा करवाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी भी बीएलओ के साथ यदि कभी कोई घटना घटती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके परिवार को उसके नहीं रहने पर आर्थिक रूप से मजबूर नहीं होना पड़े। आज देशभर में अधिकांश बीएलओ शिक्षक हैं या फिर अन्य विभागों के तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें कुछ राज्य सरकार बीमा और पेंशन तक की सुविधा उचित रूप से नहीं दे पा रही हैं। फिर भी कर्मचारी सरकार के सभी कार्यों का पालन ईमानदारी से करते हैं ।</span> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के हर राज्य में सरकारी कर्मचारी अपनी क्षमता से अधिक कार्य करके सरकार की योजनाओं को जमीनी धरातल पर उतारते हैं। कुछ दो–पांच प्रतिशत कर्मचारी भले राजनीतिक शह के चलते अपने कार्य से बच जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह याद रखना चाहिए कि कर्मचारियों के बूते ही नौकरशाही चलती है। पिछले कुछ वर्षों से एक चलन बन गया है कि अव्वल आने की चाहत में कुछ जिलाधीश राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के हाथों पुरस्कृत होने की इच्छा में अपने कर्मचारियों पर क्षमता से कहीं अधिक कार्य करने का दबाव डालते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी मंशानुरूप कार्य नहीं कर पाने वाले कर्मचारियों का या तो वेतन रोक लिया जाता है या फिर निलंबन किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निचले स्तर के कर्मचारियों पर अपने ही अधिकारियों का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है और कर्मचारी परेशान होकर आत्महत्या तक को मजबूर हो जाते हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में बीएलओ की आत्महत्या के पीछे मुख्यतः यही कारण है कि जिले के एसी चेंबर में बैठने वाले और एसी गाड़ियों में घूमने वाले कुछ अधिकारी जमीन पर चलने वाले बीएलओ की मजबूरी नहीं समझ पाते और अनावश्यक कार्य का दबाव डालते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कर्मचारी आत्महत्या को मजबूर होते हैं ।</span>           </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">       भारत सरकार और भारत निर्वाचन आयोग को चाहिए कि वर्षभर चलने वाले निर्वाचन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में संलग्न रहने वाले जमीनी स्तर के सभी बीएलओ कर्मचारियों का बीमा करवाया जाए और उनकी पदस्थ संस्था में राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान उनके कार्य का बोझ कम किया जाए। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिले की अफसरशाही को भी भौगोलिक स्थितियों के आधार पर अपने कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने की बजाय बढ़ाकर कार्य करने की नसीहत देना होगी। तभी बीएलओ और अन्य कर्मचारी निर्भीक होकर अपने कार्य को अधिक कुशलता से संपन्न करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आत्महत्या जैसी घटनाएँ नहीं होंगी और शासकीय विभागों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न नहीं लगेगा ।अतएव निर्वाचन कार्य में संलग्न देश के बीएलओ का निर्वाचन आयोग को बीमा करवाने पर विचार करना चाहिए।</span></p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161623/get-blo-insured-election-commission</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/161623/get-blo-insured-election-commission</guid>
                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 16:39:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/download12.jpg"                         length="12721"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड चुनाव आयोग पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया, कांग्रेस बोली- वोट चोरी पर अदालती मुहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उतराखंड चुनाव आयोग को दो या ज्यादा मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की याचिका खारिज कर दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उतराखंड चुनाव आयोग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए आयोग से पूछा कि आप वैधानिक प्रावधान के विपरीत आदेश कैसे दे सकते हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल उत्तराखंड चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने से</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156030/supreme-court-imposed-a-fine-of-two-lakh-rupees-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/supream-court1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उतराखंड चुनाव आयोग को दो या ज्यादा मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की याचिका खारिज कर दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उतराखंड चुनाव आयोग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए आयोग से पूछा कि आप वैधानिक प्रावधान के विपरीत आदेश कैसे दे सकते हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल उत्तराखंड चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने से इनकार कर दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका नाम दो या ज़्यादा जगह वोटर लिस्ट में शामिल था। आयोग का यह फैसला उत्तराखंड हाकोर्ट के आदेश के खिलाफ था। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को वैधानिक प्रावधान मानने के लिए कहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चुनाव आयोग ने ऐसा नहीं किया। राज्य चुनाव आयोग ने एक सर्कुलर जारी कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया था कि जिन उम्मीदवारों के नाम कई मतदाता सूचियों में दर्ज हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं। हाईकोर्ट ने आयोग के उस सर्कुलर पर रोक लगा दिया था। राज्य चुनाव आयोग ने इसी आदेश को चुनौती दी थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आज राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को कानून के उल्लंघन पर 2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश पारित किया। जस्टिस नाथ ने आयोग के वकील से सवाल किया कि आप कैसे वैधानिक प्रावधान के विपरीत निर्णय ले सकते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया गया था कि कई मामलों में ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जा रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में शामिल थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस फैसले पर कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि उत्तराखंड में वोट चोरी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई है। सप्पल ने कहा कि सवाल है कि चुनाव आयोग ने ऐसा किया क्यों</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल जनवरी में उत्तराखंड में अर्बन लोकल बॉडी यानी म्युनिसिपल चुनाव हुए। चुनाव में बीजेपी ने अपने लोगों को गांव से शहर की वोटर लिस्ट में शिफ्ट कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि फर्जी वोटिंग से वो चुनाव जीत सकें। चुनाव पूरे होने के बाद बीजेपी ने अपने लोगों को वापस गांव की वोटर लिस्ट में शिफ्ट करना शुरू किया ताकि मई-जून में होने वाले पंचायत चुनाव में वोटिंग में नाजायज फायदा ले सके। हमने इसे पकड़ लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सप्पल ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने चुनाव आयोग को बार-बार लिखा कि ऐसा नहीं किया जा सकता। हमने चुनाव आयोग को याद दिलाया कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए कम से कम 6 महीने उसी पते पर रहने का नियम है। 6 महीने से कम समय में कोई भी वोटर दोबारा अपना नाम शिफ्ट नहीं कर सकता है। कांग्रेस के विरोध के कारण बीजेपी के लोग वापस ग्रामीण एरिया में अपना नाम शामिल नहीं करवा सके। तो उन्होंने क्या करना शुरू किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने नाम शिफ्ट करने की जगह नए सिरे से अपना नाम दूसरी जगह जुड़वा लिया। अब वो दो-दो जगह के वोटर हो गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गुरदीप सिंह सप्पल ने आगे कहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी के ऐसे लोगों को जब चुनाव में टिकट मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हमारे लोगों ने चुनाव आयोग से कहा कि ऐसे लोगों का नॉमिनेशन रद्द होना चाहिए। लेकिन चुनाव आयोग ने अपने ही नियम को मानने से मना कर दिया। इसीलिए लोग हाईकोर्ट में गए। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि उत्तराखंड पंचायती राज कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2016 की धारा 9(6) और 9(7) के अनुसार ऐसे उम्मीदवारों का नॉमिनेशन रद्द किया जाए। लेकिन उत्तराखंड चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट के निर्देश को ही मानने से मना कर दिया और बीजेपी के लोगों को दो-दो जगह वोटर होने के बावजूद चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी! इसीलिए आज सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर ही पेनल्टी लगा दी है। वोट चोरी की इस दास्तान पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपनी मुहर लगा दी है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/156030/supreme-court-imposed-a-fine-of-two-lakh-rupees-on</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/156030/supreme-court-imposed-a-fine-of-two-lakh-rupees-on</guid>
                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 18:21:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-09/supream-court1.jpg"                         length="113930"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूती के लिए राजनीतिक दलों के   नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong> प्रयागराज। </strong>निर्वाचन आयोग ने कानूनी ढांचे के भीतर चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूत करने के लिए राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया।</div>
<div>  </div>
<div>भारत निर्वाचन आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्यीय राजनीतिक दलों से 30 अप्रैल, 2025 तक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) या मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ), जैसा भी मामला हो, के स्तर पर किसी भी अनसुलझे मुद्दे के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं। आज राजनीतिक दलों को जारी एक व्यक्तिगत पत्र में, आयोग स्थापित कानून के अनुसार चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूत करने के लिए आपसी सहमति से निर्धारित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149806/election-commission-invited-leaders-of-political-parties-to-negotiate-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250311-wa0103.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> प्रयागराज। </strong>निर्वाचन आयोग ने कानूनी ढांचे के भीतर चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूत करने के लिए राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया।</div>
<div> </div>
<div>भारत निर्वाचन आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्यीय राजनीतिक दलों से 30 अप्रैल, 2025 तक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) या मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ), जैसा भी मामला हो, के स्तर पर किसी भी अनसुलझे मुद्दे के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं। आज राजनीतिक दलों को जारी एक व्यक्तिगत पत्र में, आयोग स्थापित कानून के अनुसार चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूत करने के लिए आपसी सहमति से निर्धारित सुविधाजनक समय पर राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और वरिष्ठ सदस्यों के साथ बातचीत करने पर भी विचार कर रहा है।</div>
<div> </div>
<div>इससे पहले, पिछले सप्ताह हुए सम्मेलन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक् ज्ञानेश कुमार ने सभी राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों के सीईओ, डीईओ और ईआरओ को राजनीतिक दलों के साथ नियमित बातचीत करने, ऐसी बैठकों में प्राप्त सुझावों को पहले से मौजूद कानूनी ढांचे के भीतर ही समाधान करने और आयोग को कार्रवाई रिपोर्ट 31 मार्च, 2025 तक प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। आयोग ने राजनीतिक दलों से विकेंद्रीकृत रूप से संबद्ध रखने के इस तंत्र का सक्रिय रूप से उपयोग करने का भी आग्रह किया।</div>
<div> </div>
<div>राजनीतिक दल संविधान और चुनावी प्रक्रियाओं के सभी पहलुओं को कवर करने वाले सांविधिक ढांचे के अनुसार आयोग द्वारा पहचाने गए 28 हितधारकों में से एक प्रमुख हितधारक हैं। आयोग ने राजनीतिक दलों को लिखे अपने पत्र में इस बात पर भी ध्यान दिलाया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951; निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960; निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961; माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों और आयोग द्वारा समय-समय पर जारी अनुदेशों, मैनुअलों और हैंडबुकों (आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध) से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए एक विकेंद्रीकृत, सुदृढ़ और पारदर्शी कानूनी ढांचे का निर्माण हुआ है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149806/election-commission-invited-leaders-of-political-parties-to-negotiate-to</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/149806/election-commission-invited-leaders-of-political-parties-to-negotiate-to</guid>
                <pubDate>Wed, 12 Mar 2025 13:00:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/img-20250311-wa0103.jpg"                         length="364293"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनाव आयोग फँसा? एक से अधिक लोगों की वोटर आईडी कार्ड पर एक ही ईपीआईसी संख्या पर गंभीर सवाल उठा।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>चुनाव आयोग मतदाता पहचान कार्ड नंबर विवाद में फँस गया है। एक से अधिक लोगों की वोटर आईडी कार्ड यानी ईपीआईसी संख्या एक ही होने के आरोपों पर चुनाव आयोग की सफ़ाई के बाद और गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी ने दावा किया है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में धोखाधड़ी को छुपाने की कोशिश कर रहा है। टीएमसी ने चुनाव आयोग द्वारा दी गई सफ़ाई को चुनाव आयोग की ही गाइडलाइंस के आधार पर 'फ्रॉड' बता दिया है।</div>
<div>  </div>
<div>दरअसल ममता बनर्जी ने 27 फ़रवरी को आरोप लगाया था कि कई मतदाताओं के पास एक ही ईपीआईसी संख्या है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149451/election-commission-stuck-more-than-one-people-raised-serious-questions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(5)2.jpg" alt=""></a><br /><div>चुनाव आयोग मतदाता पहचान कार्ड नंबर विवाद में फँस गया है। एक से अधिक लोगों की वोटर आईडी कार्ड यानी ईपीआईसी संख्या एक ही होने के आरोपों पर चुनाव आयोग की सफ़ाई के बाद और गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी ने दावा किया है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में धोखाधड़ी को छुपाने की कोशिश कर रहा है। टीएमसी ने चुनाव आयोग द्वारा दी गई सफ़ाई को चुनाव आयोग की ही गाइडलाइंस के आधार पर 'फ्रॉड' बता दिया है।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल ममता बनर्जी ने 27 फ़रवरी को आरोप लगाया था कि कई मतदाताओं के पास एक ही ईपीआईसी संख्या है। इस पर चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर कहा कि ईपीआईसी संख्या में दोहराव का मतलब डुप्लिकेट या नकली मतदाता नहीं है। इसने कहा था कि 'मैनुअल त्रुटि' से दो राज्यों के मतदाताओं की ईपीआईसी संख्या एक हो गई। इसके बाद ही टीएमसी ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि यदि चुनाव आयोग 24 घंटे में गड़बड़ी को मानकर नहीं सुधारता है तो टीएमसी ऐसी ही गड़बड़ियों के और दस्तावेज मंगलवार को जारी करेगी। बहरहाल, टीएमसी ने मंगलवार को कहा है कि 'चुनाव आयोग की झूठी सफ़ाई' उनके अपने नियमों के ख़िलाफ़ है।</div>
<div> </div>
<div>इस मामले में टीएमसी के नेता साकेत गोखले ने कहा है कि चुनाव आयोग ने जो सफ़ाई दी है वो उनके अपने नियमों और दिशानिर्देशों से मेल नहीं खाती। उन्होंने वोटर आईडी कार्ड के रूप में जाने जाने वाले EPIC बनाए जाने की पूरी प्रक्रिया को समझाते हुए चुनाव आयोग की दलीलों को खारिज कर दिया। गोखले ने कहा है कि ईपीआईसी जारी करने की प्रक्रिया चुनाव आयोग की 'हैंडबुक फॉर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स' में लिखी है।</div>
<div> </div>
<div><strong>साकेत गोखले इसी के आधार पर चुनाव आयोग की 'सफ़ाई' में तीन झूठ बेनकाब करने का दावा किया है-</strong></div>
<div>चुनाव आयोग का दावा 1: उनका कहना है कि एक ही ईपीआईसी नंबर कई लोगों को इसलिए दे दिया गया क्योंकि कुछ राज्यों ने एक ही "अल्फान्यूमेरिक सीरीज" का इस्तेमाल किया।</div>
<div>सच: ईपीआईसी नंबर में 3 अक्षर और 7 नंबर होते हैं। हैंडबुक में साफ़ लिखा है कि ये 3 अक्षर फंक्शनल यूनिक सीरियल नंबर के नाम से जाने जाते हैं। ये 3 अक्षर हर विधानसभा क्षेत्र के लिए अलग होते हैं। मतलब, एक ही राज्य में भी दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के वोटर्स के ईपीआईसी के पहले 3 अक्षर एक जैसे नहीं हो सकते। तो फिर पश्चिम बंगाल के वोटर्स के ईपीआईसी नंबर हरियाणा, गुजरात और दूसरे राज्यों के लोगों को कैसे मिल गए?</div>
<div> </div>
<div>चुनाव आयोग का दावा 2: उनका कहना है कि अगर दो लोगों के पास एक ही ईपीआईसी नंबर है, तो भी वे अपने-अपने क्षेत्र में वोट डाल सकते हैं जहां उनका नाम दर्ज है।</div>
<div>सच : फोटो वाली मतदाता सूची में वोटर की तस्वीर ईपीआईसी नंबर से जुड़ी होती है। अगर बंगाल का कोई वोटर वोट डालने जाए और उसका ईपीआईसी नंबर किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति को भी दिया गया हो तो मतदाता सूची में उसकी तस्वीर अलग दिखेगी। इससे फोटो न मिलने की वजह से उसे वोट डालने से रोका जा सकता है। एक ही ईपीआईसी नंबर अलग-अलग राज्यों में देकर उन वोटर्स को वोटिंग से रोका जा सकता है जो बीजेपी के ख़िलाफ़ वोट दे सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div>चुनाव आयोग का दावा 3: उनका कहना है कि एक ही ईपीआईसी नंबर कई लोगों को ग़लती से दे दिया गया और इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।</div>
<div>सच: चुनाव आयोग के नियम कहते हैं कि ईपीआईसी नंबर देने के लिए जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होता है, वो हर इस्तेमाल और खाली नंबर का हिसाब रखता है ताकि एक ही नंबर दो लोगों को न मिले। ईपीआईसी नंबर वोटर की जानकारी और तस्वीर से जुड़ा होता है और इसे स्थायी यूनिक आईडी माना जाता है। तो ये कैसे मुमकिन है कि 'ग़लती' से एक ही ईपीआईसी नंबर अलग-अलग राज्यों के लोगों को दे दिया जाए? और अगर ईपीआईसी नंबर डुप्लिकेट है, तो वोट डालने से रोका जा सकता है। ये साफ़ तौर पर बीजेपी के पक्ष में मतदाताओं को रोकने की साज़िश लगती है, जिसमें गैर-बीजेपी इलाक़ों के वोटर्स को निशाना बनाया जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>साकेत गोखले ने आरोप लगाया है, 'ये सब चुनाव आयोग की कार्रवाई और विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े करता है। खासकर अब, जब चुनाव आयुक्तों को मोदी सरकार नियुक्त करती है। 3 सदस्यों वाली कमेटी में 2 लोग- प्रधानमंत्री और अमित शाह- बहुमत से फ़ैसला लेते हैं। अगर चुनाव आयोग बीजेपी के लिए काम कर रहा है, तो निष्पक्ष चुनाव की कोई उम्मीद नहीं है।'</div>
<div> </div>
<div>टीएमसी नेता ने कहा है कि चुनाव आयोग को सच बताना चाहिए कि कितने ईपीआईसी कार्ड अभी सक्रिय हैं और उनमें से कितनों के नंबर एक जैसे हैं। गोखले ने कहा कि उन्हें ये दिखावा बंद करके डुप्लिकेट वोटर आईडी घोटाले पर साफ़ जवाब देना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>टीएमसी नेताओं ने दावा किया है कि उनके पास ऐसे कई दस्तावेज हैं, जो दिखाते हैं कि एक ही ईपीआईसी नंबर का इस्तेमाल एक ही निर्वाचन क्षेत्र और अलग-अलग राज्यों में किया जा रहा है। पार्टी की उपनेता सागरिका घोष ने कहा, 'हमारे पास सबूत हैं कि गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लोगों को बंगाल की मतदाता सूची में शामिल किया गया है। यह एक सुनियोजित साज़िश है।'</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149451/election-commission-stuck-more-than-one-people-raised-serious-questions</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/149451/election-commission-stuck-more-than-one-people-raised-serious-questions</guid>
                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 12:36:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/download-%285%292.jpg"                         length="11004"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;अधूरी हसरतों का इल्जाम&quot; EVM पर उठ रहे सवाल, काफी शायराना अंदाज़ में मिला जवाब </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Election:</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शनिवार को लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की निष्पक्षता के खिलाफ राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों के बारे में बात की। एक काव्यात्मक प्रतिक्रिया में राजीव कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि ईवीएम फुल-प्रूफ हैं और उन्होंने कई बार उन राजनीतिक दलों को सत्ता में लाया है जो उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं।</p>
<blockquote class="format2">
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अधूरी हसरतों का इल्जाम हर बार हम पर लगाना ठीक नहीं, </strong></span></p>
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>वफा खुद से नहीं होती खता ईवीएम की कहते हो।</strong></span></p>
</blockquote>
<p>चुनाव आयोग ने बताया कि लोकसभा चुनाव 19</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139458/%22accusation-of-unfulfilled-desires%22-questions-raised-on-evm-got-answers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/rajneeti2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Election:</strong> मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शनिवार को लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की निष्पक्षता के खिलाफ राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों के बारे में बात की। एक काव्यात्मक प्रतिक्रिया में राजीव कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि ईवीएम फुल-प्रूफ हैं और उन्होंने कई बार उन राजनीतिक दलों को सत्ता में लाया है जो उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं।</p>
<blockquote class="format2">
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अधूरी हसरतों का इल्जाम हर बार हम पर लगाना ठीक नहीं, </strong></span></p>
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>वफा खुद से नहीं होती खता ईवीएम की कहते हो।</strong></span></p>
</blockquote>
<p>चुनाव आयोग ने बताया कि लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल से 1 जून तक 7 चरणों में होंगे । वोटों की गिनती 4 जून को होगी। पहला चरण 19 अप्रैल, दूसरा चरण 26 अप्रैल, तीसरा चरण 7 मई, चौथा चरण 13 मई, पांचवां चरण 20 मई, छठा चरण 25 मई और सातवां चरण 1 जून को होगा। </p>
<p>इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पहले शुक्रवार को दो रिट याचिकाएं खारिज कर दीं, एक 19 लाख से अधिक ईवीएम के गायब होने की आशंका पर और दूसरी याचिका ईवीएम पर अपना विश्वास जताते हुए चुनाव कराने के लिए मतपत्र का उपयोग करने की मांग थी। 19 लाख गायब ईवीएम याचिका पर फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने आशंकाओं और आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया, जिससे मामला भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के पक्ष में बंद हो गया। </p>
<p>लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 61ए को अलग करते हुए मतपत्र का उपयोग करके चुनाव कराने के संबंध में एक अन्य याचिका पर भी विचार करने से इनकार करते हुए, न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि ईवीएम के कामकाज से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर 10 से अधिक मामलों की जांच की गई है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139458/%22accusation-of-unfulfilled-desires%22-questions-raised-on-evm-got-answers</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/139458/%22accusation-of-unfulfilled-desires%22-questions-raised-on-evm-got-answers</guid>
                <pubDate>Sat, 16 Mar 2024 18:51:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-03/rajneeti2.jpg"                         length="112166"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा चुनाव 2024 के होंगे सात चरण, जून 4 को होगी वोट काउंटिंग </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Election: </strong>चुनाव आयोग ने शनिवार को लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों का ऐलान कर दिया।  इसके साथ ही आयोग द्वारा ओडिशा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों की भी घोषणा की। आयोग ने शुक्रवार को शनिवार दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तारीखों का ऐलान किया।</p>
<p>सीईसी राजीव कुमार ने कहा कि आम चुनाव 7 चरणों में होगा, पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल को होगी. दूसरे चरण की वोटिंग 26 अप्रैल को होगी।</p>
<blockquote class="format2"><strong>क्या है चुनाव आयोग की मुख्य बातें....</strong></blockquote>
<p>1- देश में कुल 98.8 करोड़ मतदाता</p>
<p>2- लोकसभा चुनाव 2024 सात चरणों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139438/there-will-be-seven-phases-of-lok-sabha-elections-2024"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/99074895.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Election: </strong>चुनाव आयोग ने शनिवार को लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों का ऐलान कर दिया।  इसके साथ ही आयोग द्वारा ओडिशा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों की भी घोषणा की। आयोग ने शुक्रवार को शनिवार दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तारीखों का ऐलान किया।</p>
<p>सीईसी राजीव कुमार ने कहा कि आम चुनाव 7 चरणों में होगा, पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल को होगी. दूसरे चरण की वोटिंग 26 अप्रैल को होगी।</p>
<blockquote class="format2"><strong>क्या है चुनाव आयोग की मुख्य बातें....</strong></blockquote>
<p>1- देश में कुल 98.8 करोड़ मतदाता</p>
<p>2- लोकसभा चुनाव 2024 सात चरणों में होगा,  4 जून को होगी वोटों की गिनती</p>
<blockquote class="format1"><strong>19 अप्रैल से 7 चरणों में होंगे लोकसभा 2024 के चुनाव </strong></blockquote>
<p>1- पहला चरण 19 अप्रैल,</p>
<p>2- दूसरा चरण 26 अप्रैल,</p>
<p>3- तीसरा चरण 7 मई,</p>
<p>4- चौथा चरण 13 मई,</p>
<p>5- पांचवां चरण 20 मई,</p>
<p>6- छठा चरण 25 मई और सातवां चरण 1 जून को होगा</p>
<p>7- लोकसभा चुनाव 2024 में 55 लाख एवं होंगे प्रयोग</p>
<p>8-लोकसभा चुनाव में 10.5 लाख </p>
<p>9- चुनाव में हिंसा का कोई स्थान नहीं, इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाएंगे</p>
<p>10- 1.8 करोड़ युवा पहली बार वोट डालेंगे: मुख्य चुनाव आयुक्त</p>
<p>11- 98.8 करोड़ में 49.7 करोड़ पुरुष और 47.1 करोड़ महिला वोटर</p>
<p>12- चुनाव में हिंसा करने वालों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होगा</p>
<p>13- किसी भी वालंटियर या संविदा कर्मचारी की चुनाव में ड्यूटी नहीं लगेगी</p>
<p>14- दिव्यांग वोटर घर से डाल सकेंगे वोट</p>
<p>15- फेक न्यूज, नफरती भाषणों पर होगी सख्ती</p>
<p>16- जाति, धर्म के आधार पर प्रचार ना हो</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139438/there-will-be-seven-phases-of-lok-sabha-elections-2024</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/139438/there-will-be-seven-phases-of-lok-sabha-elections-2024</guid>
                <pubDate>Sat, 16 Mar 2024 16:39:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-03/99074895.webp"                         length="56520"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Lok Sabha Elections 2024 Alert: लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा कल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारतीय चुनाव आयोग ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा, ''आम चुनाव 2024 और कुछ राज्य विधानसभाओं के लिए कार्यक्रम की घोषणा करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कल यानी शनिवार, 16 मार्च को दोपहर 3 बजे होगी। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) शनिवार को लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा। </p>
<p>ईसीआई के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइवस्ट्रीम किया जाएगा। लोकसभा चुनाव के साथ-साथ ईसीआई ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित कुछ राज्य विधानसभाओं के चुनावों के कार्यक्रम की भी घोषणा करेगा। घोषणा के तुरंत बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139390/lok-sabha-elections-2024-alert-lok-sabha-election-dates-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/download.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय चुनाव आयोग ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा, ''आम चुनाव 2024 और कुछ राज्य विधानसभाओं के लिए कार्यक्रम की घोषणा करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कल यानी शनिवार, 16 मार्च को दोपहर 3 बजे होगी। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) शनिवार को लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा। </p>
<p>ईसीआई के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइवस्ट्रीम किया जाएगा। लोकसभा चुनाव के साथ-साथ ईसीआई ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित कुछ राज्य विधानसभाओं के चुनावों के कार्यक्रम की भी घोषणा करेगा। घोषणा के तुरंत बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। यह घोषणा दो नवनियुक्त चुनाव आयुक्तों ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के शुक्रवार को कार्यालय का कार्यभार संभालने के कुछ घंटों बाद आई है।</p>
<p>मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 16 जून को खत्म हो रहा है और उससे पहले नये सदन का गठन होना है। 2019 में, लोकसभा चुनाव की घोषणा 10 मार्च को की गई और 11 अप्रैल से सात चरणों में मतदान हुआ। वोटों की गिनती 23 मई को हुई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139390/lok-sabha-elections-2024-alert-lok-sabha-election-dates-will</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/139390/lok-sabha-elections-2024-alert-lok-sabha-election-dates-will</guid>
                <pubDate>Fri, 15 Mar 2024 15:10:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-03/download.jpg"                         length="6881"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        