<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/13572/russia-ukraine-war" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Russia ukraine war - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/13572/rss</link>
                <description>Russia ukraine war RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बढ़ती कीमतों से बिगड़ी मध्यवर्गीय सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180351/middle-class-socio-economic-system-deteriorated-due-to-rising-prices"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(1)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने लगभग प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने विशेष रूप से भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक संरचना को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल केवल वाहन चलाने के साधन नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ हैं। परिवहन, कृषि, उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र लगभग सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पर निर्भर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डीजल की कीमतों में वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। देश में अधिकांश माल ढुलाई ट्रकों के माध्यम से होती है। जब डीजल महंगा होता है, तो परिवहन लागत बढ़ जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि खाद्यान्न, फल-सब्जियां, दूध, दालें, निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें स्वतः बढ़ने लगती हैं। व्यापारी अतिरिक्त लागत का भार अंततः उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं। इस प्रकार महंगाई का एक ऐसा चक्र प्रारंभ हो जाता है, जिससे सामान्य नागरिक बच नहीं पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय मध्यम वर्ग पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने उसकी मासिक आय और व्यय के संतुलन को और बिगाड़ दिया है। जिन परिवारों के पास निजी वाहन हैं, उनके लिए कार्यालय, विद्यालय और अन्य आवश्यक यात्राओं का खर्च बढ़ गया है। वहीं रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बजट को प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप परिवारों को अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच समझौता करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महंगाई का सामाजिक प्रभाव भी कम गंभीर नहीं है। जब आय स्थिर हो और खर्च लगातार बढ़ता जाए, तो परिवारों में तनाव बढ़ने लगता है। आर्थिक दबाव पारिवारिक संबंधों, सामाजिक सहभागिता और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। मध्यम वर्ग, जो समाज की स्थिरता और विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, स्वयं असुरक्षा और भविष्य की चिंताओं से घिर जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि क्षेत्र भी इससे प्रभावित हुआ है। डीजल से चलने वाले पंप, ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की लागत बढ़ने से खेती महंगी हो गई है। उत्पादन लागत बढ़ने पर किसान अपनी उपज का उचित मूल्य चाहते हैं, जिससे बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस प्रकार महंगाई का प्रभाव खेत से लेकर थाली तक दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्थशास्त्री लंबे समय से कहते रहे हैं कि ऊर्जा की कीमतें किसी भी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने अनेक अवसरों पर ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया था। वहीं अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने भी विकास को केवल आय वृद्धि नहीं बल्कि जीवन-स्तर की गुणवत्ता से जोड़कर देखा है। यदि बढ़ती महंगाई लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं को प्रभावित करती है, तो विकास का वास्तविक लाभ समाज तक नहीं पहुंच पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्ष की राजनीति के स्थान पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में और अधिक प्रयास करने होंगे। सौर ऊर्जा, जैव ईंधन और विद्युत वाहनों को बढ़ावा देकर पेट्रोलियम पर निर्भरता कम की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती पेट्रोलियम कीमतें केवल आर्थिक समस्या नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक स्थिरता और जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ी हुई हैं। युद्धों और वैश्विक तनावों की कीमत अंततः आम नागरिक चुकाता है। इसलिए विश्व शांति, ऊर्जा सुरक्षा और संतुलित आर्थिक नीतियां ही मध्यम वर्ग को राहत प्रदान कर सकती हैं। जब तक पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक महंगाई का दबाव भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करता रहेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180351/middle-class-socio-economic-system-deteriorated-due-to-rising-prices</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180351/middle-class-socio-economic-system-deteriorated-due-to-rising-prices</guid>
                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:43:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/images-%281%292.jpg"                         length="78036"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युद्ध का वास्तविक चेहरा मानवता पर भीषण प्रहार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">युद्ध का उन्माद मानव सभ्यता के इतिहास का सबसे त्रासद अध्याय रहा है, जहाँ शक्ति, प्रभुत्व और स्वार्थ की अंधी दौड़ में मनुष्य अपने ही अस्तित्व को दांव पर लगा देता है। जब राष्ट्रवाद की आग विवेक पर भारी पड़ती है, तब युद्ध केवल सीमाओं का संघर्ष नहीं रह जाता, वह मनुष्यता के मूल्यों का भी विध्वंस बन जाता है। युद्ध चाहे किसी भी काल में हुआ हो, उसका परिणाम सदैव एक-सा ही रहा है विनाश, पीड़ा और पश्चाताप। दो विश्व युद्धों की विभीषिका ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंसा से किसी भी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177778/the-real-face-of-war-a-terrible-attack-on-humanity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20250331-wa01632.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">युद्ध का उन्माद मानव सभ्यता के इतिहास का सबसे त्रासद अध्याय रहा है, जहाँ शक्ति, प्रभुत्व और स्वार्थ की अंधी दौड़ में मनुष्य अपने ही अस्तित्व को दांव पर लगा देता है। जब राष्ट्रवाद की आग विवेक पर भारी पड़ती है, तब युद्ध केवल सीमाओं का संघर्ष नहीं रह जाता, वह मनुष्यता के मूल्यों का भी विध्वंस बन जाता है। युद्ध चाहे किसी भी काल में हुआ हो, उसका परिणाम सदैव एक-सा ही रहा है विनाश, पीड़ा और पश्चाताप। दो विश्व युद्धों की विभीषिका ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंसा से किसी भी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है, बल्कि यह नई समस्याओं और घावों को जन्म देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">युद्ध के मैदान में केवल सैनिक ही नहीं मरते, बल्कि उनके साथ असंख्य निर्दोष नागरिक भी अपनी जान गंवाते हैं, जिनका उस संघर्ष से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता। उनके सपने, उनकी आशाएँ और उनका भविष्य सब कुछ एक पल में राख हो जाता है। जब कोई माँ अपने बेटे को खोती है, जब कोई बच्चा अपने पिता की लाश देखता है, तब राष्ट्र की जीत का कोई अर्थ नहीं रह जाता, केवल एक गहरी शून्यता और असहनीय पीड़ा शेष रह जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही वह क्षण होता है जब मनुष्य को आत्मज्ञान का बोध होता है कि उसने क्या खो दिया और किस कीमत पर। युद्ध का वास्तविक चेहरा तब सामने आता है जब शहरों के खंडहर, जली हुई फसलें, उजड़े हुए घर और रोते हुए लोग उसकी गवाही देते हैं। आधुनिक समय में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है, चाहे वह रूस-यूक्रेन का संघर्ष हो, इजरायल-फिलिस्तीन का विवाद हो या अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव हर जगह एक समान पीड़ा और विनाश का दृश्य देखने को मिलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन संघर्षों में सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के निर्णयों का भार आम नागरिकों को उठाना पड़ता है, जो अपनी जान देकर उन महत्वाकांक्षाओं को पूरा करते हैं जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं होता। युद्ध केवल मानव जीवन को ही नहीं, बल्कि आर्थिक व्यवस्था को भी गहरे संकट में डाल देता है। उद्योग धंधे ठप हो जाते हैं, महंगाई आसमान छूने लगती है, बेरोजगारी बढ़ती है और विकास की गति रुक जाती है। एक देश को वर्षों पीछे धकेल देने वाला यह विनाश केवल भौतिक नहीं होता, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी गहरा असर छोड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">युद्ध के बाद बचता है तो केवल एक टूटा हुआ समाज, जिसमें अविश्वास, भय और असुरक्षा की भावना घर कर जाती है। यही कारण है कि इतिहास हमें बार-बार यह सिखाने का प्रयास करता है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह समस्याओं को और जटिल बना देता है। आत्मज्ञानी व्यक्ति और संवेदनशील समाज इस सत्य को समझते हैं कि शांति ही वह मार्ग है जो मानवता को आगे बढ़ा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">युद्ध के बाद जब धूल बैठती है और लोग अपने खोए हुए प्रियजनों की याद में रोते हैं, तब उन्हें यह अहसास होता है कि उन्होंने क्या खोया है और क्या पाया है। उस समय कोई भी जीत सार्थक नहीं लगती, क्योंकि जीत की कीमत बहुत अधिक होती है। युद्ध की राख से उठने वाली यह चेतना ही आत्मज्ञान का वास्तविक रूप है, जो हमें यह समझाती है कि हिंसा और घृणा के मार्ग पर चलकर हम केवल विनाश ही प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि मानवता को बचाना है, तो हमें संवाद, सहिष्णुता और प्रेम का मार्ग अपनाना होगा। युद्ध का उन्माद क्षणिक हो सकता है, लेकिन उसके परिणाम पीढ़ियों तक महसूस किए जाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम इतिहास से सीख लें और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए शांति का मार्ग चुनें, क्योंकि अंततः वही मार्ग हमें सच्चे अर्थों में मानव बनाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177778/the-real-face-of-war-a-terrible-attack-on-humanity</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177778/the-real-face-of-war-a-terrible-attack-on-humanity</guid>
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 16:50:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img-20250331-wa01632.jpg"                         length="154899"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युद्ध विराम के लिए भारत होगा संभावित विकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। विशेषकर तब जब दुनिया लगातार संघर्षों की आग में झुलस रही है, रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष और अब  अमेरिका-इजरायल-ईरान महायुद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक शांति स्थापित करने वाली संस्थाएं अपेक्षित प्रभाव खोती जा रही हैं। कभी विश्व राजनीति का केंद्र माने जाने वाला यह संयुक्त राष्ट्र संघ अब कई बार केवल औपचारिक बयानबाजी तक सीमित दिखाई देता है, युद्धविराम के प्रयास या तो बहुत देर से होते हैं।</p><p style="text-align:justify;"> या फिर प्रभावहीन सिद्ध होते हैं, यही कारण है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173811/india-will-be-a-possible-option-for-ceasefire"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/india-name-change-to-bharat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। विशेषकर तब जब दुनिया लगातार संघर्षों की आग में झुलस रही है, रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष और अब  अमेरिका-इजरायल-ईरान महायुद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक शांति स्थापित करने वाली संस्थाएं अपेक्षित प्रभाव खोती जा रही हैं। कभी विश्व राजनीति का केंद्र माने जाने वाला यह संयुक्त राष्ट्र संघ अब कई बार केवल औपचारिक बयानबाजी तक सीमित दिखाई देता है, युद्धविराम के प्रयास या तो बहुत देर से होते हैं।</p><p style="text-align:justify;"> या फिर प्रभावहीन सिद्ध होते हैं, यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना और कार्यप्रणाली आज के समय के अनुरूप है भी या नहीं, क्योंकि स्थायी सदस्यों के वीटो अधिकार ने कई बार निर्णय प्रक्रिया को जकड़ कर रख दिया है। परिणामस्वरूप शक्तिशाली देशों के हितों के आगे सामूहिक शांति प्रयास कमजोर पड़ जाते हैं, इस संदर्भ में यह धारणा भी बलवती हुई है कि संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रभाव इस संस्था पर अत्यधिक है उसे अमेरिका का पिछलग्गु कहा जाता है जिससे निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं।<br /></p><p style="text-align:justify;">ऐसे जटिल वैश्विक समीकरणों के बीच भारत एक संतुलित और विश्वसनीय शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है। भारत की विदेश नीति का मूल आधार “वसुधैव कुटुम्बकम” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे सिद्धांत रहे हैं, यही कारण है कि भारत ने कभी भी किसी एक ध्रुव का समर्थन करने के बजाय संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी है। चाहे संबंध अमेरिका से हों या रूस से, चाहे इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी हो या ईरान के साथ ऊर्जा और सांस्कृतिक रिश्ते, भारत ने हर दिशा में संतुलन बनाए रखा है, यही संतुलन आज उसे वैश्विक मध्यस्थ की भूमिका के लिए उपयुक्त व बेहतर विकल्प बनाता है। </p><p style="text-align:justify;">वर्तमान परिस्थिति में जब पश्चिमी देश एक तरफ खड़े दिखाई देते हैं और कई इस्लामी देश दूसरी तरफ, तब भारत एक ऐसे राष्ट्र के रूप में सामने आता है जिसके पास सभी पक्षों से संवाद करने की क्षमता और विश्वास दोनों हैं, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब तथा अन्य अरब देशों के साथ भारत के मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक संबंध हैं, वहीं फ्रांस और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशों के साथ भी भारत की साझेदारी मजबूत है, इसके अतिरिक्त अफ्रीकी देशों के साथ भारत का ऐतिहासिक सहयोग और विकासात्मक भागीदारी उसे एक व्यापक वैश्विक प्रतिनिधि बनाती है, </p><p style="text-align:justify;">यही कारण है कि आज जब संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठ रहे हैं तब भारत को एक संभावित विकल्प या कम से कम एक प्रभावी पूरक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि यह भी समझना आवश्यक है कि किसी एक देश के लिए पूरी दुनिया में शांति स्थापित करना आसान नहीं है, भारत की अपनी सीमाएं हैं, उसकी प्राथमिकताएं हैं और उसकी आंतरिक चुनौतियां भी हैं, फिर भी भारत ने समय-समय पर शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाई है, चाहे वह शांति सैनिकों की तैनाती हो या मानवीय सहायता, भारत हमेशा अग्रणी रहा है, वर्तमान संकट में भारत यदि सक्रिय कूटनीतिक पहल करता है, तो वह संवाद के नए रास्ते खोल सकता है।</p><p style="text-align:justify;">बैक-चैनल वार्ता, बहुपक्षीय बैठकें और क्षेत्रीय शांति सम्मेलन जैसे उपाय भारत के माध्यम से संभव हो सकते हैं, इसके साथ ही भारत का जी-20 जैसे मंचों पर नेतृत्व अनुभव भी उसे वैश्विक सहमति बनाने में मदद करता है, लेकिन यह अपेक्षा करना कि भारत पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र संघ का विकल्प बन जाएगा, शायद व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की संरचना, वैधता और वैश्विक स्वीकृति अभी भी अद्वितीय है, आवश्यकता इस बात की है कि भारत जैसे उभरते शक्तिशाली राष्ट्र इस संस्था में सुधार की दिशा में नेतृत्व करें, सुरक्षा परिषद का विस्तार, वीटो प्रणाली में बदलाव और विकासशील देशों की अधिक भागीदारी जैसे कदम इस संस्था को पुनः प्रासंगिक बना सकते हैं, अंततः यह कहा जा सकता है कि आज की दुनिया एक नए संतुलन की तलाश में है, जहां पुरानी संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं और नई शक्तियां उभर रही हैं।<br /></p><p style="text-align:justify;">इस संक्रमण काल में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, वह न केवल एक मध्यस्थ बन सकता है बल्कि एक नैतिक मार्गदर्शक भी बन सकता है, यदि भारत अपनी कूटनीतिक सूझबूझ, संतुलित नीति और वैश्विक विश्वास को सही दिशा में उपयोग करता है तो वह न केवल वर्तमान युद्ध को रोकने में योगदान दे सकता है बल्कि भविष्य के लिए एक अधिक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था की नींव भी रख सकता है, यही समय है जब भारत को अपनी “विश्वगुरु” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप में सिद्ध करना होगा और दुनिया को यह दिखाना होगा कि शक्ति केवल सैन्य बल में नहीं बल्कि संवाद, संयम और समन्वय में भी निहित होती है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173811/india-will-be-a-possible-option-for-ceasefire</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173811/india-will-be-a-possible-option-for-ceasefire</guid>
                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:26:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/india-name-change-to-bharat.jpg"                         length="34344"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युद्ध की विभीषिका से त्रासदीपूर्ण मानवीय जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">दुनिया में किसी भी देश के लिए चाहे वह सत्य के लिए लड़ रहा हो या असत्य के लिए लड़ रहा हो, युद्ध की विभीषिकाएँ कभी भी किसी भी देश के मानवीय जीवन के लिए वरदान साबित नहीं हुई हैं। धर्म और अधर्म के नाम पर दुनिया को महाभारत काल में रक्तरंजित कर लाखों शूरवीरों को लीलने वाला कौरव-पांडवों का दिल दहला देने वाला दारुण युद्ध दुनिया के देशों के सामने सबसे बड़ा उदाहरण है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। आज एक बार फिर दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़ी है। आज दुनिया का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173413/tragedy-of-human-life-due-to-the-horrors-of-war"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया में किसी भी देश के लिए चाहे वह सत्य के लिए लड़ रहा हो या असत्य के लिए लड़ रहा हो, युद्ध की विभीषिकाएँ कभी भी किसी भी देश के मानवीय जीवन के लिए वरदान साबित नहीं हुई हैं। धर्म और अधर्म के नाम पर दुनिया को महाभारत काल में रक्तरंजित कर लाखों शूरवीरों को लीलने वाला कौरव-पांडवों का दिल दहला देने वाला दारुण युद्ध दुनिया के देशों के सामने सबसे बड़ा उदाहरण है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। आज एक बार फिर दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़ी है। आज दुनिया का हर देश एक-दूसरे की संप्रभुता पर कब्जा कर अपना दबदबा कायम करना चाहता है। ऐसे में विश्व में चारों ओर युद्ध की स्थिति निर्मित हो चुकी है। दुनिया में रूस-यूक्रेन युद्ध वर्षों से बिना नतीजे के अब तक जारी है और हाल ही में डेढ़ सप्ताह से ईरान-इजराइल और अमेरिकी युद्ध छिड़ जाने से एक बार फिर तीसरे महायुद्ध के बादल मंडराने लग गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">युद्ध की विभीषिका से मध्य पूर्व के देशों की हालत बेहद खराब हो रही है। ईरान में कट्टरपंथी शासन का खात्मा आज का हर आधुनिक सोच का नागरिक चाहता है, लेकिन कट्टरपंथी ताकतों की जड़ें इतनी गहरी जमी हुई हैं कि उसे उखाड़ फेंकने में शूरवीरों और मासूम लोगों की जिंदगी दांव पर लग जाती है। मध्यपूर्व के खाड़ी देशों में तेल के असीम भंडार हैं। दुनिया के देशों की सर्वाधिक तेल आपूर्ति भी खाड़ी देशों से ही होती है। अमेरिका की शुरू से ही तेल भंडारों पर अपना कब्जा जमाए रखने की नीति रही है, इसलिए वह कई खाड़ी देशों में अपने धनबल और बाहुबल के आसरे तेल पर कब्जा किए हुए है । ईरान एक प्रमुख तेल उत्पादक देश होने के साथ समुद्री मार्ग से सटा हुआ है। वर्तमान में इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान के कट्टरपंथी शासन का अंत करने हेतु युद्ध का बिगुल फूंके हुए हैं, जिससे दुनिया भर के देशों में कच्चे तेल और गैस की कमी आना स्वाभाविक है।</p>
<p style="text-align:justify;">    बेशक भारत एक बहुत बड़ा देश है और ईरान युद्ध का भारत पर भी गैस और तेल को लेकर प्रभाव पड़ना सहज है। भारत सरकार द्वारा गैस और तेल की पर्याप्त व्यवस्था के बाद भी देशभर में गैस की किल्लत से जूझते लोग इस बात का प्रतीक हैं कि दूसरे देशों के युद्ध का असर कैसे दुनिया के अन्य देशों के जीवन को प्रभावित करता है। युद्ध की विभीषिका नैतिक पतन, अमानवीयता और अंधी सत्ता-लालसा से उत्पन्न घोर त्रासदीपूर्ण स्थिति होती है, जिसका भय वर्षों बाद भी लोगों के जेहन से जाता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">युद्ध न सिर्फ दो देशों या दो राष्ट्राध्यक्षों के बीच लड़ा जाता है, बल्कि युद्ध में दोनों देशों के लोगों और उनकी संपत्ति का भी विनाश होता है। दो देशों के युद्ध की परिणति से कई देशों के आर्थिक-व्यापारिक रिश्तों के साथ मानवीय जनजीवन भी बुरी तरह से प्रभावित होता है। युद्ध तो कुछ दिनों या महीनों में समाप्त होकर रह जाएगा, लेकिन उसकी विभीषिका पूरी एक पीढ़ी के जहन में जीवनभर भयावह खौफ की तरह छाई रह जाती है। युद्ध की विभीषिकाओं से उभरने और सामान्य जीवन जीने में लोगों को पूरी एक जिंदगी लग जाती है। अतः युद्ध किसी भी समस्या का अंतिम हल नहीं है, इसलिए युद्ध को टालना ही आज दुनिया के देशों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।</p>
<p style="text-align:justify;" align="center"><strong>अरविंद रावल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173413/tragedy-of-human-life-due-to-the-horrors-of-war</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173413/tragedy-of-human-life-due-to-the-horrors-of-war</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:45:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/images6.jpg"                         length="140456"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन रूस पर अब बैलेस्टिक मिसाइलों से करेगा हमला ? बाइडेन ने हारते ही जेलेंस्की को खुली छूट दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk </strong></p>
<p>रूस यूक्रेन के बीच 33 महीने से जंग जारी है। दोनों देशों के बीच के संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की मौत हुई है। जबकि लाखों लोग जख्मी हुए हैं। स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद 17 नवंबर की रात भर में यूक्रेन के कई क्षेत्रों में कम से कम सात लोग मारे गए और 19 घायल हो गए। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने हमलों को बड़े पैमाने पर संयुक्त हमले के रूप में वर्णित किया।</p>
<p>यूक्रेन की तरफ से दावा किया गया कि रूस की तरफ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146412/ukraine-will-now-attack-russia-with-ballistic-missiles-biden-gave"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/यूक्रेन-रूस-पर-अब-बैलेस्टिक-मिसाइलों-से-करेगा-हमला,-बाइडेन-ने-हारते-ही-जेलेंस्की-को-खुली-छूट-दी.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk </strong></p>
<p>रूस यूक्रेन के बीच 33 महीने से जंग जारी है। दोनों देशों के बीच के संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की मौत हुई है। जबकि लाखों लोग जख्मी हुए हैं। स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद 17 नवंबर की रात भर में यूक्रेन के कई क्षेत्रों में कम से कम सात लोग मारे गए और 19 घायल हो गए। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने हमलों को बड़े पैमाने पर संयुक्त हमले के रूप में वर्णित किया।</p>
<p>यूक्रेन की तरफ से दावा किया गया कि रूस की तरफ से किए गए अटैक में कम से कम 120 मिसाइलें और 90 ड्रोन शामिल थे। हमले का मकसद यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना था। स्टोरीफुल ने स्वतंत्र रूप से रूसी सेना द्वारा दागे गए ड्रोन और मिसाइलों की संख्या की पुष्टि नहीं की है। मायकोलाइव क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन द्वारा प्रकाशित फुटेज में शहर में कई क्षतिग्रस्त इमारतें दिखाई दे रही हैं। सैन्य प्रशासन ने कहा कि हमले के परिणामस्वरूप शहर में दो लोग मारे गए और सात घायल हो गए।</p>
<p>अमेरिकी ने पहले ऐसे हमलों की अनुमति देने से मना कर दिया था। उसे डर था कि इससे रूस यूक्रेन युद्ध ज्यादा बड़ा हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ये प्रमुख नीतिगत बदलाव डोनाल्ड ट्रंप को सत्ता सौंपने से दो महीने पहले किया है। यूक्रेन एक साल से अधिक समय से यूक्रेन के अंदर रूसी कब्ज़े वाले ठिकानों पर आर्मी टेक्टिकल मिसाइल सिस्टम यानि एटीएसीएमएस का इस्तेमाल कर रहा है। </p>
<p>रूस यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका ने बड़ा फैसला ले लिया है। खबरों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 19 जनवरी 2025 को पूरा होने वाले कार्यकाल से पहले ही यूक्रेन को रूस पर अटैक के लिए मिसाइल के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। बाइडेन प्रशासन ने यूक्रेन को बताया है कि वो रूस के अंदर सीमित हमलों के लिए अमेरिका के आर्मी टेक्टिकल मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल कर सकता है। आर्मी टेक्टिकल सिस्टम (एटीएसीएमएस) एक सुपरसॉनिक बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है और इसका निर्माण अमेरिकी डिफेंस कंपनी करती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/146412/ukraine-will-now-attack-russia-with-ballistic-missiles-biden-gave</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/146412/ukraine-will-now-attack-russia-with-ballistic-missiles-biden-gave</guid>
                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 18:00:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-11/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE%2C-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%9B%E0%A5%82%E0%A4%9F-%E0%A4%A6%E0%A5%80.jpg"                         length="7099"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस पर बड़ा एक्शन, अधिकारियों को यूक्रेन में नागरिकों पर हमला करने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी- अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>INTERNATIONAL DESK</strong></p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने मंगलवार को यूक्रेन में नागरिक ठिकानों पर हमला करने के लिए रूस के पूर्व रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू और उसके सैन्य प्रमुख जनरल वालेरी गेरासिमोव के खिलाफ युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया। यह ऐसे समय में हुआ है जब हाल के दिनों में मॉस्को और कीव के बीच तीव्र लड़ाई हुई है जिसमें कई लोग मारे गए हैं।</p>
<p>रूस, यूक्रेन की तरह आईसीसी का सदस्य नहीं है। उसने बार-बार कहा है कि यूक्रेन का ऊर्जा बुनियादी ढांचा एक वैध सैन्य लक्ष्य है और नागरिकों या नागरिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142493/big-action-on-russia-arrest-warrant-issued-to-officers-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/dfgdsfg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>INTERNATIONAL DESK</strong></p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने मंगलवार को यूक्रेन में नागरिक ठिकानों पर हमला करने के लिए रूस के पूर्व रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू और उसके सैन्य प्रमुख जनरल वालेरी गेरासिमोव के खिलाफ युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया। यह ऐसे समय में हुआ है जब हाल के दिनों में मॉस्को और कीव के बीच तीव्र लड़ाई हुई है जिसमें कई लोग मारे गए हैं।</p>
<p>रूस, यूक्रेन की तरह आईसीसी का सदस्य नहीं है। उसने बार-बार कहा है कि यूक्रेन का ऊर्जा बुनियादी ढांचा एक वैध सैन्य लक्ष्य है और नागरिकों या नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से इनकार करता है। हालाँकि, अदालत के पास गिरफ्तारी को लागू करने का कोई साधन नहीं है, और इसके पिछले कई फैसलों को अतीत में नजरअंदाज कर दिया गया है क्योंकि इसके पास अपनी कोई ताकत नहीं है।</p>
<p>एक एक आधिकारिक बयान मेंअदालत ने कहा कि "विश्वास करने के लिए उचित आधार हैं" कि दोनों अधिकारी नागरिक वस्तुओं पर हमलों का निर्देश देने और नागरिकों को अत्यधिक नुकसान पहुंचाने के युद्ध अपराध में शामिल हैं। वे कम से कम 10 अक्टूबर, 2022 से कम से कम 9 मार्च, 2023 तक यूक्रेनी विद्युत बुनियादी ढांचे के खिलाफ रूसी सशस्त्र बलों द्वारा किए गए मिसाइल हमलों की भी जिम्मेदारी लेते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/142493/big-action-on-russia-arrest-warrant-issued-to-officers-for</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/142493/big-action-on-russia-arrest-warrant-issued-to-officers-for</guid>
                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 17:29:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-06/dfgdsfg.jpg"                         length="351731"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में India-China को लेकर क्या दावा किया गया, अब सबसे बड़ा युद्ध होने वाला है!</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p>मूल्यांकन में आगे कहा गया है कि चीन शक्ति दिखाने और विदेश में चीन के हितों की रक्षा करने के अपने प्रयास में श्रीलंका और पाकिस्तान सहित कई स्थानों पर विदेशी सैन्य अड्डे स्थापित करना चाहता है। अमेरिकी खुफिया समुदाय के वार्षिक खतरे के आकलन में कहा गया कि भारत और चीन के बीच साझा विवादित सीमा उनके द्विपक्षीय संबंधों पर तनाव बनी रहेगी।</p>
<p>लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी पर विवाद को लेकर अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एलएसी पर भारत और चीन के बीच सैन्य विवाद बढ़</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139366/what-was-claimed-in-americas-intelligence-report-regarding-india-china-now"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/asd.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p>मूल्यांकन में आगे कहा गया है कि चीन शक्ति दिखाने और विदेश में चीन के हितों की रक्षा करने के अपने प्रयास में श्रीलंका और पाकिस्तान सहित कई स्थानों पर विदेशी सैन्य अड्डे स्थापित करना चाहता है। अमेरिकी खुफिया समुदाय के वार्षिक खतरे के आकलन में कहा गया कि भारत और चीन के बीच साझा विवादित सीमा उनके द्विपक्षीय संबंधों पर तनाव बनी रहेगी।</p>
<p>लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी पर विवाद को लेकर अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एलएसी पर भारत और चीन के बीच सैन्य विवाद बढ़ सकता है। अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एलएसी पर छोटी-छोटी झड़प गंभीर रूप ले सकती है। भारत और चीन के बीच बड़ा युद्ध होने की भी आशंका जताई गई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के एक आकलन में दोनों पक्षों द्वारा बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती और उनकी सेनाओं के बीच छिटपुट मुठभेड़ों के बीच भारत और चीन के बीच संभावित सशस्त्र संघर्ष की चेतावनी दी गई है, साथ ही कहा गया है कि सीमा विवाद पड़ोसियों के बीच संबंधों को लेकर तनाव बना रहेगा। आकलन में आगे कहा गया है कि चीन कई स्थानों पर विदेशी सैन्य अड्डे स्थापित करना चाह रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में नाजुक वैश्विक व्यवस्था, चीन की सैन्य विस्तार योजना, उसके आक्रामक साइबर अभियान और 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने के संभावित प्रयास पर प्रकाश डाला गया है। इसमें इज़राइल-हमास युद्ध और रूस-यूक्रेन युद्ध सहित अन्य संघर्षों के बारे में भी बात की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश में 13,000 फीट की ऊंचाई पर बनी रणनीतिक सेला सुरंग का उद्घाटन किया, जो तवांग को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।</p>
<p>मूल्यांकन में आगे कहा गया है कि चीन शक्ति दिखाने और विदेश में चीन के हितों की रक्षा करने के अपने प्रयास में श्रीलंका और पाकिस्तान सहित कई स्थानों पर विदेशी सैन्य अड्डे स्थापित करना चाहता है। अमेरिकी खुफिया समुदाय के वार्षिक खतरे के आकलन में कहा गया कि भारत और चीन के बीच साझा विवादित सीमा उनके द्विपक्षीय संबंधों पर तनाव बनी रहेगी। जबकि दोनों पक्ष 2020 के बाद से महत्वपूर्ण सीमा पार झड़पों में शामिल नहीं हुए हैं, वे बड़ी सेना की तैनाती बनाए हुए हैं, और विरोधी ताकतों के बीच छिटपुट मुठभेड़ों से गलत आकलन और सशस्त्र संघर्ष में वृद्धि का जोखिम है। सोमवार को राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (डीएनआई) द्वारा, क्योंकि यह संभावित अंतर-राज्य संघर्षों के बारे में बात करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139366/what-was-claimed-in-americas-intelligence-report-regarding-india-china-now</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/139366/what-was-claimed-in-americas-intelligence-report-regarding-india-china-now</guid>
                <pubDate>Thu, 14 Mar 2024 17:47:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-03/asd.jpg"                         length="6933"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        