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                <title>jal sankat - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>jal sankat RSS Feed</description>
                
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                <title>आग उगलती भीषण गर्मी में प्यासे कंठों की कौन सुने दास्तां</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177391/who-will-listen-to-the-tales-of-thirsty-throats-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/download2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों के जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पानी प्रकृति के समस्त जीवों की मूलभूत और अनिवार्य आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विडंबना यह है कि जब यही आवश्यकता पूरी नहीं हो पा रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जीवों के अस्तित्व पर संकट गहराना स्वाभाविक है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्वीकार करना होगा कि आजादी के साढ़े सात दशक बाद भी देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में यह कल्पना करना कठिन नहीं कि वन्यजीव अपनी प्यास बुझाने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करते होंगे। मानव जीवन के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु केंद्र और राज्य सरकारें हर वर्ष अनेक प्रयास करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी स्तर पर ये प्रयास अभी भी अपर्याप्त सिद्ध हो रहे हैं। विशेषकर सुदूर ग्रामीण अंचलों में पेयजल व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ‘नल-जल योजना’ एक महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी पहल है। बावजूद इसके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई स्थानों पर जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अनेक गाँवों में बनी पानी की टंकियाँ केवल दिखावा बनकर रह गई हैं। ये टंकियाँ प्यासे कंठों को राहत देने के बजाय व्यवस्था की खामियों का प्रतीक बनती जा रही हैं।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पानी हर जीव की मूलभूत आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यदि इसी आवश्यकता की पूर्ति में कमी रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह न केवल गंभीर लापरवाही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अक्षम्य अपराध के समान है। भीषण गर्मी में जब लोग घर से बाहर निकलने से बचते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग मीलों दूर से पानी लाने को विवश होते हैं। जल संकट के कारण मूक पशु-पक्षियों का जीवन बचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति-विनाश के चलते बढ़ती गर्मी और अस्तित्व बचाने के लिए भटकते वन्यजीव—ये दोनों ही हमारी सामूहिक जिम्मेदारी हैं। ऐसे में सरकार और समाज को मिलकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम छोर तक मानव और वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यदि इस दिशा में ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो देश के हर कोने में सभी जीवों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जा सकता है। अन्यथा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर वर्ष की भाँति आग उगलती गर्मी में प्यासे मूक प्राणियों की दास्तां अधूरी ही रह जाएगी।</span></p><p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ़्लोरोसिस प्रभावित कोन क्षेत्र में जल संकट गहराया हर घर नल योजना बनी अभिशाप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कोन/सोनभद्र- </strong>उत्तर प्रदेश सोनभद्र जिले के विकास खंड कोन में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल योजना (जल जीवन मिशन) धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। विशेषकर फ़्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण शुद्ध पेयजल के अभाव में फ्लोराइड युक्त दूषित पानी पीने को विवश हैं। इसी गंभीर समस्या को लेकर, कचनरवा और कुड़वा ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और संबंधित कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय समाजसेवी बिहारी प्रसाद यादव की अगुवाई में ग्राम पंचायत कचनरवा में ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। उनका स्पष्ट आरोप है कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161291/in-which-areas-affected-by-fluorosis-water-crisis-deepens-every"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/3--+++++----+++-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कोन/सोनभद्र- </strong>उत्तर प्रदेश सोनभद्र जिले के विकास खंड कोन में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल योजना (जल जीवन मिशन) धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। विशेषकर फ़्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण शुद्ध पेयजल के अभाव में फ्लोराइड युक्त दूषित पानी पीने को विवश हैं। इसी गंभीर समस्या को लेकर, कचनरवा और कुड़वा ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और संबंधित कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय समाजसेवी बिहारी प्रसाद यादव की अगुवाई में ग्राम पंचायत कचनरवा में ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। उनका स्पष्ट आरोप है कि लगभग छह</div>
<div style="text-align:justify;">महीनों से फ्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप्प है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वरिष्ठ समाजसेवी बिहारी प्रसाद यादव ने दुख व्यक्त करते हुए कहा क्षेत्र में आज भी लोग नदी-नालों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके भयावह परिणाम सामने आ रहे हैं। जवान भी बूढ़े दिखने लगे हैं, बच्चों के दांत पीले पड़ रहे हैं, और आए दिन लोग फ्लोरोसिस की चपेट में आकर काल के मुँह में समा रहे हैं। हर घर नल योजना यहाँ के लोगों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। इसके अतिरिक्त, गंगा प्रसाद की अगुवाई में ग्राम पंचायत कुड़वा के ग्रामीणों ने भी प्रदर्शन कर नियमित पानी आपूर्ति की मांग की। प्रदर्शन में दुःखी, अखिलेश, भरत, कलावती, मानवासी, देवंति देवी आदि शामिल रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पूरी तरह से सवालों के घेरे में है कई ग्राम पंचायतों में नल कनेक्शन का कार्य पूरा नहीं हुआ है, लेकिन संस्था द्वारा इसे कागजों पर पूर्ण दिखा दिया गया है, जो जाँच का विषय है। पाइपलाइन की गहराई मानक के अनुरूप नहीं है, और इस्तेमाल किए गए पाइपों की गुणवत्ता भी घटिया है, जिसके कारण हल्की बरसात में ही पाइपलाइन जगह-जगह ध्वस्त हो जा रही है। सोन नदी में स्थापित इंटेक का जलस्तर अभी से ही कम है, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की आपूर्ति पर गंभीर संकट आने का अंदाजा लगाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों के आधार कार्ड पर कनेक्शन तो दिए गए, लेकिन कई महीनों से नलों से एक बूंद पानी नहीं आ रहा है। संस्था के कर्मचारी चंद मिनटों के लिए सड़क किनारे पानी चलवाकर फोटो और वीडियो बनाते हैं और लोगों को झूठी दिलासा देकर कागजी कोरम पूरा कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कोन क्षेत्र के कई गाँव, जिनमें कचनरवा, असनाबांध लिंक रोड, बड़ाप, बागेसोती सिंगा, डुबवा, धौरवादामर, सेमरवादामर, गोबरदाहा, डीलवाहा, शिवाखाड़ी, धीचोरवा, बिछमरवा, केवाल, खरौंधी, चांचीकला, और नकतवार शामिल हैं, पानी की आपूर्ति से वंचित हैं। टंकी से सटा गाँव बड़ाप भी इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहाँ लोग प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अनेक गाँवों, जैसे चांचीकला, चांची खुर्द, नकतवार, मिश्री, बहुआरा, डोमा, खरौंधी, रगरम आदि में तो आज तक लोगों को नल कनेक्शन तक नहीं मिल सका है। वहीं, जहाँ कनेक्शन है, वहाँ महीनों से पानी नहीं मिल रहा है।स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।इस बावत जल निगम के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार ने कहा कि उनकी तरफ से हरसंभव प्रयास किया जा रहा है कि लोगों को नियमित पानी मिले। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले दिन से पानी मिलना शुरू हो जाएगा।यह देखना होगा कि प्रशासनिक आश्वासन के बाद इन फ़्लोरोसिस प्रभावित गाँवों को दूषित जल पीने की मजबूरी से कब मुक्ति मिलती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 19:01:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फटी पाइपलाइन ने बुझाई ग्रामीणों की उम्मीदें, नवली गांव के 300 परिवार में शुद्ध जल का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>  गोला बाजार गोरखपुर- </strong>उत्तर प्रदेश सरकार भले ही जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल, हर घर जल का सपना दिखा रही हो, लेकिन गोरखपुर जिले के गोलाबाजार ब्लॉक के नवली गांव की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यहां दो महीने से एक फटी पाइपलाइन के चलते शुद्ध पेयजल खेतों में बह रहा है और गांव के 300 से अधिक परिवार बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।</div><div><br /></div><div><strong>  राजेश मौर्य के घर के सामने टूटी सप्लाई लाइन बना ग्रामीणों का सिरदर्द</strong></div><div>दो साल पहले करोड़ों की लागत से जल जीवन मिशन के तहत नवली में बोरिंग, ओवरहेड टैंक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152096/torn-pipeline-extinguished-villagers-hopes-of-pure-water-crisis-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/p--4-,.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> गोला बाजार गोरखपुर- </strong>उत्तर प्रदेश सरकार भले ही जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल, हर घर जल का सपना दिखा रही हो, लेकिन गोरखपुर जिले के गोलाबाजार ब्लॉक के नवली गांव की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यहां दो महीने से एक फटी पाइपलाइन के चलते शुद्ध पेयजल खेतों में बह रहा है और गांव के 300 से अधिक परिवार बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।</div><div><br /></div><div><strong> राजेश मौर्य के घर के सामने टूटी सप्लाई लाइन बना ग्रामीणों का सिरदर्द</strong></div><div>दो साल पहले करोड़ों की लागत से जल जीवन मिशन के तहत नवली में बोरिंग, ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन डाली गई थी। सबको उम्मीद थी कि अब पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। सपनों की यह तस्वीर तीन महीने पहले तब साकार हुई जब घर-घर नल से पानी आना शुरू हुआ। लेकिन जल्द ही यह सपना एक दुःस्वप्न में बदल गया। राजेश मौर्य के घर के पास फटा मुख्य पाइप बीते दो महीनों से खेतों को सींच रहा है, लेकिन ग्रामीणों के गले सूख रहे हैं। गांव की गलियों में कीचड़ का साम्राज्य है और गंदगी ने हालात और भी बदतर कर दिए हैं।</div><div><br /></div><div><strong>हैंडपंप भी हुए धोखा, गंदा पानी बन रहा बीमारी की वजह</strong></div><div>गांव के इंडिया मार्का हैंडपंप, जो कभी लोगों की प्यास बुझाते थे, अब खुद बीमार पड़ चुके हैं। कुछ पूरी तरह बंद हैं, तो कुछ गंदा और बदबूदार पानी उगल रहे हैं। लगभग 1500 की आबादी वाले इस गांव में शुद्ध पानी अब एक सपना बन चुका है।</div><div><br /></div><div><strong>शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, विभागीय लापरवाही चरम पर</strong></div><div>रामजी पांडेय, ब्रह्मानंद पांडेय, पवन पांडेय, सत्य नारायण मिश्रा, जयपाल मौर्य जैसे कई ग्रामीणों ने बताया कि विभाग को कई बार जानकारी दी गई, लेकिन दो महीने बीतने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय कर्मचारी अंशुमान सिंह ने निरीक्षण तो किया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात।</div><div><br /></div><div><strong>"अच्छी योजना पर विभाग ने फेर दिया पानी": ग्रामीणों में आक्रोश</strong></div><div>गांव के पवन पांडेय का कहना है, "सरकार की इतनी बड़ी योजना को विभाग की लापरवाही ने मजाक बना दिया है। हम लोग पीने के पानी के लिए भटक रहे हैं और अधिकारी कान में तेल डाले बैठे हैं।"</div><div>ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मरम्मत और जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।</div><div><br /></div><div><strong>अब सवाल सरकार से है</strong></div><div>क्या जल जीवन मिशन का वादा सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा? क्या नवली गांव के लोग यूं ही पानी के लिए तरसते रहेंगे? या प्रशासन अब जागेगा और इस विकराल समस्या का समाधान करेगा?</div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/152096/torn-pipeline-extinguished-villagers-hopes-of-pure-water-crisis-in</link>
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                <pubDate>Fri, 23 May 2025 18:02:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीषण जल संकट से जूझ रहे पाकुड़िया प्रखंड के ग्रामीण, प्रशासन से राहत की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>पाकुड़िया/पाकुड़/झारखंड:- </strong>गर्मियों की दस्तक के साथ ही पाकुड़िया प्रखंड के विभिन्न सुदूर ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है। कड़ी धूप और गिरते जलस्तर के कारण तालवा, धावाडंगाल, कचूवाबथान और अन्य गांवों में नलकूपों से पानी कम निकल रहा है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।</div>
<div>  </div>
<div><strong>  ग्रामीणों की मजबूरी: दूषित जल पीने को विवश </strong></div>
<div>कचूवाबथान के प्रधान टोला की ग्रामीण महिलाओं और प्रधान सुरेश टुडू ने बताया कि टोले में नलकूप तो हैं, लेकिन इन दिनों उनमें से पानी बहुत कम निकल रहा है, जिससे लोगों को विद्यालय परिसर से पानी लाना पड़ता है। स्थानीय महिलाओं ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149773/demand-for-relief-from-rural-administration-of-pakudia-block-struggling"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/news-3.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>पाकुड़िया/पाकुड़/झारखंड:- </strong>गर्मियों की दस्तक के साथ ही पाकुड़िया प्रखंड के विभिन्न सुदूर ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है। कड़ी धूप और गिरते जलस्तर के कारण तालवा, धावाडंगाल, कचूवाबथान और अन्य गांवों में नलकूपों से पानी कम निकल रहा है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong> ग्रामीणों की मजबूरी: दूषित जल पीने को विवश </strong></div>
<div>कचूवाबथान के प्रधान टोला की ग्रामीण महिलाओं और प्रधान सुरेश टुडू ने बताया कि टोले में नलकूप तो हैं, लेकिन इन दिनों उनमें से पानी बहुत कम निकल रहा है, जिससे लोगों को विद्यालय परिसर से पानी लाना पड़ता है। स्थानीय महिलाओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आज भी उन्हें बेहद पुराने कुएं से पानी भरने की मजबूरी है, जहां गिरी हुई सूखी पत्तियां और अन्य गंदगी पानी को दूषित कर रही है।</div>
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<div>धावाडंगाल के डुंगरी टोला और जोजो टोला के हालात भी चिंताजनक हैं। यहां के ग्रामीणों को पुराने जर्जर कुओं और बहियार से पानी लाना पड़ता है। तालवा के तोड़े टोला में वर्षों पहले बना कुआं अब जीर्ण-शीर्ण हो चुका है, लेकिन ग्रामीणों के पास कोई और विकल्प नहीं है।</div>
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<div><strong>मरम्मत से दूर हो सकती है समस्या</strong></div>
<div>सूत्रों के अनुसार, पाकुड़िया प्रखंड के विभिन्न इलाकों में सरकारी नलकूप तो मौजूद हैं, लेकिन उनकी मरम्मत और देखभाल के अभाव में वे बेकार पड़े हैं। यदि प्रशासन इन नलकूपों की उचित मरम्मत कराए, तो पेयजल संकट से काफी हद तक राहत मिल सकती है।</div>
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<div><strong>जल संकट के स्थायी समाधान की दरकार</strong></div>
<div>ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि प्राथमिकता के आधार पर नलकूपों की मरम्मत कराई जाए और जरूरत पड़ने पर नए नलकूप खोदे जाएं, ताकि ग्रामीणों को दूषित पानी पीने की मजबूरी न हो। जल संकट की समस्या हर साल गर्मी के मौसम में विकराल रूप ले लेती है, ऐसे में प्रशासन को दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Mar 2025 14:11:05 +0530</pubDate>
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                <title>अवर अभियता की लापरवाही से जवाहर नगर में गहराया पेयजल संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><strong>बांदा। </strong>केंद्र व राज्य सरकार द्वारा हर घर नल जल परियोजना का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। जबकि शहर के कई मोहल्ले ऐसे हैं। जहां पीने को पानी नसीब नहीं हो पाता है। शहर का ऐसा ही अभागा जवाहर नगर मोहल्ला है। जहां कई वर्षों से पेयजल संकट बरकरार है। कई कई दिनों तक पानी की सप्लाई न होने से लोगों को बिना नहाए धोए ही अपने प्रतिष्ठान में जाना पड़ता है। इस बारे में विभागीय लोगों का कहना है कि वहां तो पानी की समस्या बनी ही रहती है। इसका निदान क्या है इसका किसी के पास</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139353/drinking-water-crisis-deepens-in-jawahar-nagar-due-to-negligence"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/afsf.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><strong>बांदा। </strong>केंद्र व राज्य सरकार द्वारा हर घर नल जल परियोजना का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। जबकि शहर के कई मोहल्ले ऐसे हैं। जहां पीने को पानी नसीब नहीं हो पाता है। शहर का ऐसा ही अभागा जवाहर नगर मोहल्ला है। जहां कई वर्षों से पेयजल संकट बरकरार है। कई कई दिनों तक पानी की सप्लाई न होने से लोगों को बिना नहाए धोए ही अपने प्रतिष्ठान में जाना पड़ता है। इस बारे में विभागीय लोगों का कहना है कि वहां तो पानी की समस्या बनी ही रहती है। इसका निदान क्या है इसका किसी के पास सटीक जवाब नहीं है।</p>
<p>शहर के इंदिरा नगर के सामने और चिल्ला पावर हाउस के ठीक पीछे इस मोहल्ले में पहले 2 इंची पाइपलाइन पड़ी हुई थी। जिसकी वजह से पानी की समस्या बनी रहती थी। घरों में लगे नल शो पीस बने रहते थे और जल संस्थान के टैंकर जगह-जगह खड़े रहते थे। पिछले वर्ष यहां पर 4 इंची पाइपलाइन डाल दी गई, जिससे थोड़ी बहुत पेयजल संकट से लोगों को राहत मिल गई। 4 इंची पाइपलाइन पड़ने के कारण ही जिन उपभोक्ताओं ने नल का कनेक्शन नहीं कराया था उन्होंने भी नल का कनेक्शन करा लिया। कुछ दिनों तक तो ठीक-ठाक रहा लेकिन अब फिर पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है।</p>
<p>मोहल्ले के लोगों का कहना है कि कभी 10 मिनट तो कभी 20 मिनट पानी आता है। जिससे पीने के पानी की समस्या तो दूर हो जाती है लेकिन इतने कम पानी में लोग नहा धो नहीं पाते हैं जिससे उन्हें बिना नहाए ही नौकरी या अपने प्रतिष्ठान में काम करने जाना पड़ता है। यह एक दिन की समस्या नहीं है, सप्ताह में तीन से चार दिन यह समस्या बनी रहती है। इसी समस्या से आजिज आकर मोहल्ले के करीब 70 प्रतिशत लोगों ने अपने-अपने घरों में निजी बोर करा लिया है। लेकिन जिन उपभोक्ताओं के पास निजी बोर कराने की क्षमता नहीं है, वह जल संस्थान की जलापूर्ति के भरोसे है।</p>
<p>एक तरफ तो सरकार हर घर नल जल परियोजना के तहत घर-घर जल सप्लाई करने की बात करती है। वही इस मोहल्ले के लोग बरसों से पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। लेकिन इस ओर न तो जनप्रतिनिधियों का ध्यान है और न ही जल संस्थान के अधिकारी ध्यान दे रहे हैं। मोहल्ले के राम सिंह पाल, स़तोष, संगीता, प्रियंका इत्यादि का कहना है। अभी जब गर्मी शुरू नहीं हुई तब जलापूर्ति बाधित है तो गर्मी में क्या होगा। यह सोचकर हम सब परेशान हैं। इस बार इस बारे में जल संस्थान के जेई राघवेंद्र कभी मोटर खराब होने, कभी पाइप लाइन टूटने और कभी बिजली न होने का रोना रोते हुए अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Mar 2024 16:36:18 +0530</pubDate>
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