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                <title>  swatantra prabhat international news - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>व्हाइट हाउस में ममदानी से मिले ट्रंप, भारत-पाकिस्तान शांति में भूमिका का दावा दोहराया-लेकिन हकीकत क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन/नई दिल्ली </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में उनकी प्रशासन ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। व्हाइट हाउस में न्यूयॉर्क शहर के नवनिर्वाचित मेयर ज़ोहरान ममदानी से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने “भारत–पाकिस्तान सहित आठ देशों के साथ शांति समझौते किए,” और “मई में दोनों देशों के बीच हुए गतिरोध को नियंत्रित करने में अहम योगदान दिया।” हालाँकि भारत ने हमेशा की तरह एक बार फिर इस प्रकार के किसी भी <strong>तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को खारिज</strong> किया है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161322/trump-meets-mamdani-at-white-house-reiterates-claim-of-role"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/व्हाइट-हाउस-में-ममदानी-से-मिले-ट्रंप,-भारत-पाकिस्तान-शांति-में-भूमिका-का-दावा-दोहराया.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन/नई दिल्ली </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में उनकी प्रशासन ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। व्हाइट हाउस में न्यूयॉर्क शहर के नवनिर्वाचित मेयर ज़ोहरान ममदानी से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने “भारत–पाकिस्तान सहित आठ देशों के साथ शांति समझौते किए,” और “मई में दोनों देशों के बीच हुए गतिरोध को नियंत्रित करने में अहम योगदान दिया।” हालाँकि भारत ने हमेशा की तरह एक बार फिर इस प्रकार के किसी भी <strong>तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को खारिज</strong> किया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ओवल ऑफिस में ट्रंप–ममदानी मुलाकात</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">विजय के बाद पहली औपचारिक बातचीत के लिए मेयर ममदानी व्हाइट हाउस पहुंचे, जहाँ ओवल ऑफिस में हुई मुलाकात को ट्रंप ने “शानदार” बताया। इसी दौरान उन्होंने भारत–पाकिस्तान तनाव पर अपने पिछले दावे दोहराए।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा कि मई में दोनों देशों के बीच शत्रुता बढ़ने पर उनके प्रशासन ने शांति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों को चेतावनी दी थी कि यदि वे संघर्ष नहीं रोकते, तो अमेरिका 350% तक के भारी टैरिफ लगा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>मई के संघर्ष का ज़िक्र फिर छेड़ा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि <strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया था—“हम युद्ध नहीं करेंगे।”</strong><br />10 मई को सोशल मीडिया पर ट्रंप ने दावा किया था कि वाशिंगटन की मध्यस्थता में लंबी रात की बातचीत के बाद दोनों देश “पूर्ण और तत्काल युद्धविराम” पर सहमत हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद से अब तक ट्रंप <strong>60 से अधिक बार</strong> यह बयान दे चुके हैं कि भारत–पाकिस्तान तनाव को “उन्होंने समाधान कराया।”</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत का जवाब: ‘कोई मध्यस्थता नहीं हुई’</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत ने इन बयानों के विपरीत एक स्पष्ट रुख बनाए रखा है।<br />नई दिल्ली के अनुसार—</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>मई का तनाव पूरी तरह द्विपक्षीय प्रक्रिया से नियंत्रित हुआ</p>
</li>
<li>
<p>किसी भी प्रकार की अमेरिकी मध्यस्थता का प्रश्न ही नहीं उठता</p>
</li>
<li>
<p>भारत किसी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देता</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">भारत के रुख को और भी स्पष्ट करने वाले तथ्य हैं <strong>ऑपरेशन सिंदूर</strong>, जिसे भारत ने 7 मई को शुरू किया था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के प्रतिशोध में की गई थी, जिसमें 26 नागरिकों की हत्या हुई थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ऑपरेशन सिंदूर: भारत की कार्रवाई के बाद वार्ता</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस ऑपरेशन के तहत भारत ने:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ढाँचे को निशाना बनाया</p>
</li>
<li>
<p>4 दिनों तक ड्रोन और मिसाइल हमले चलाए</p>
</li>
<li>
<p>आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक सैन्य दबाव बनाया</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद दोनों देशों ने 10 मई को शत्रुता समाप्त करने पर सहमति जताई—लेकिन नई दिल्ली के अनुसार यह समझौता <strong>भारत–पाकिस्तान की सीधी बातचीत</strong> का परिणाम था, न कि किसी “बाहरी मध्यस्थता” का।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ट्रंप के दावों की टाइमिंग</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप के ये बयान ऐसे समय आ रहे हैं जब उन्होंने हाल ही में कई मुद्दों पर अपनी कूटनीतिक उपलब्धियों को रेखांकित करना शुरू किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाज़ी घरेलू राजनीतिक संदर्भ में भी देखी जा सकती है, क्योंकि ट्रंप खुद को एक “पीसमेकर” के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 21:15:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल में फिर बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल: Gen Z युवाओं का उग्र प्रदर्शन, KP शर्मा ओली समर्थकों से सड़क पर भिड़ंत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल एक बार फिर गंभीर राजनीतिक संकट और सामाजिक असंतोष के दौर से गुजर रहा है। बारा जिले के सिमरा में भड़की हिंसा और इसके बाद काठमांडू तक पहुंचे टकराव ने साबित कर दिया है कि देश में युवाओं, खासकर <em>जेन ज़ेड</em> पीढ़ी का गुस्सा अब उबाल पर है। यह वही पीढ़ी है जो पारंपरिक राजनीति की कठोर संरचना और पुरानी शैली के नेतृत्व को पूरी तरह खारिज करती दिख रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>सिमरा में हिंसक झड़प से शुरू हुआ तनाव</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">दो दिन पहले सिमरा में जेन ज़ेड युवाओं और सीपीएन-यूएमएल कार्यकर्ताओं के बीच मामूली बहस पलभर में हिंसा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161196/big-political-turmoil-again-in-nepal-fierce-demonstration-of-gen"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/नेपाल-में-फिर-बड़ी-राजनीतिक-उथल-पुथल--gen-z-युवाओं-का-उग्र-प्रदर्शन.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल एक बार फिर गंभीर राजनीतिक संकट और सामाजिक असंतोष के दौर से गुजर रहा है। बारा जिले के सिमरा में भड़की हिंसा और इसके बाद काठमांडू तक पहुंचे टकराव ने साबित कर दिया है कि देश में युवाओं, खासकर <em>जेन ज़ेड</em> पीढ़ी का गुस्सा अब उबाल पर है। यह वही पीढ़ी है जो पारंपरिक राजनीति की कठोर संरचना और पुरानी शैली के नेतृत्व को पूरी तरह खारिज करती दिख रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>सिमरा में हिंसक झड़प से शुरू हुआ तनाव</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">दो दिन पहले सिमरा में जेन ज़ेड युवाओं और सीपीएन-यूएमएल कार्यकर्ताओं के बीच मामूली बहस पलभर में हिंसा में बदल गई। UML नेताओं शंकर पोखरेल और महेश बसनेत के कार्यक्रम में शामिल होने से पहले ही माहौल बिगड़ चुका था।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>कई लोग घायल हुए,</p>
</li>
<li>
<p>सड़कों पर टायर जलाए गए,</p>
</li>
<li>
<p>और हवाई अड्डे पर तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आईं।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">युवा प्रदर्शनकारियों ने तब तक बातचीत से इंकार कर दिया, जब तक पुलिस उनके ऊपर हमले के आरोप में छह लोगों की गिरफ्तारी नहीं करती। बढ़ते दबाव के बीच तीन UML नेताओं की गिरफ्तारी ने स्थिति को कुछ हद तक शांत किया और युवाओं को यह संदेश गया कि प्रशासन उनकी शिकायतों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>काठमांडू में फिर तनाव, ओली के खिलाफ प्रदर्शन</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">कर्फ्यू हटने के बाद बारा में हालात सामान्य होने लगे थे, लेकिन राजधानी काठमांडू में तनाव फिर लौट आया। माइतीघर मंडला में घायल जेन ज़ेड युवा पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ धरना देने पहुंचे थे। इसी दौरान पास में UML की रैली में ओली ने “नेशनल वॉलंटियर्स फोर्स” बनाने की घोषणा कर दी—एक ऐसा बयान जिसे कई विश्लेषक युवा असंतोष को दबाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले से ही युवा आरोप लगा रहे हैं कि <strong>8 सितंबर को छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई, जिसमें 76 लोगों की मौत हुई थी, उसकी ज़िम्मेदारी ओली पर है</strong>। यही आरोप इस पीढ़ी के आक्रोश को और प्रज्वलित कर रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">9 सितंबर को भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ व्यापक प्रदर्शनों के चलते ओली को इस्तीफा देना पड़ा था। अब अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व में नया प्रशासन काम कर रहा है और <strong>5 मार्च को आम चुनाव की घोषणा</strong> हो चुकी है।<br />लेकिन UML चुनावों का विरोध करते हुए:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>संसद बहाल करने,</p>
</li>
<li>
<p>और कार्की के इस्तीफे<br />की मांग कर रही है।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, नेपाली कांग्रेस और अन्य दल इन चुनावों को राजनीतिक समाधान का रास्ता बताते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थिति की गंभीरता इसी से स्पष्ट है कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने चुनावों के दौरान <strong>सेना तैनात करने</strong> की सिफारिश की है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>जेन ज़ेड: नेपाल की राजनीति का नया दबदबा</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">नेपाल में अस्थिरता के इस दौर में सबसे महत्वपूर्ण तत्व है युवा पीढ़ी का उभार—वह पीढ़ी जो:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>डिजिटल युग में पली-बढ़ी है,</p>
</li>
<li>
<p>पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की आज़ादी चाहती है,</p>
</li>
<li>
<p>और टकराव को समाधान की जगह समस्या मानती है।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">ये युवा न तो किसी दल की मोहरा बनना चाहते हैं और न ही केवल विरोध के लिए विरोध कर रहे हैं। वे उस सिस्टम से जवाब मांग रहे हैं जो वर्षों से भ्रष्टाचार, कमजोर नेतृत्व और अधिकारवादी प्रवृत्तियों से ग्रसित रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>क्या नेपाल एक नए राजनीतिक मोड़ पर है?</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">सिमरा और काठमांडू की घटनाएँ सिर्फ स्थानीय झड़पें नहीं हैं। ये नेपाल के राजनीतिक संक्रमण के भीतर गहरे असंतोष और पीढ़ीगत संघर्ष को उजागर करती हैं।<br />स्पष्ट है कि अगर युवा असंतोष को सिर्फ बल से दबाने की कोशिश की गई, तो यह संकट और गहराएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल को अब ऐसी नेतृत्व-शैली की आवश्यकता है जो:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>संवाद को प्राथमिकता दे,</p>
</li>
<li>
<p>युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाए,</p>
</li>
<li>
<p>और देश को स्थिरता की ओर ले जाने की क्षमता रखती हो।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">जेन ज़ेड केवल एक विरोध करने वाला समूह नहीं—यही भविष्य में नेपाल की नेतृत्वकारी पीढ़ी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 20:29:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश में बड़ा फैसला आने वाला- शेख हसीना के खिलाफ मौत की सजा की मांग, 17 नवंबर को सुनाया जाएगा निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ढाका। </strong>बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री <strong>शेख हसीना</strong> के खिलाफ चल रहे अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) के ऐतिहासिक मामले में अब फैसला आने वाला है। अदालत <strong>सोमवार, 17 नवंबर 2025</strong> को अपना निर्णय सुनाएगी। यह मामला पिछले वर्ष ढाका में हुए <strong>विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों</strong> से जुड़ा है, जिनमें <strong>लगभग 1,400 लोगों की मौत</strong> हुई थी।</p>
<hr />
<h3><strong>हसीना के खिलाफ पाँच गंभीर आरोप</strong></h3>
<p>हसीना पर <strong>मानवता के खिलाफ अपराधों के पाँच आरोप</strong> हैं। अभियोजन पक्ष ने उनके लिए <strong>मौत की सजा</strong> की मांग की है। छात्रों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों पर की गई कठोर कार्रवाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160083/big-decision-coming-in-bangladesh-demand-for-death-penalty"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/बांग्लादेश-में-बड़ा-फैसला-आने-वाला--शेख-हसीना-के-खिलाफ-मौत-की-सजा-की-मांग.webp" alt=""></a><br /><p><strong>ढाका। </strong>बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री <strong>शेख हसीना</strong> के खिलाफ चल रहे अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) के ऐतिहासिक मामले में अब फैसला आने वाला है। अदालत <strong>सोमवार, 17 नवंबर 2025</strong> को अपना निर्णय सुनाएगी। यह मामला पिछले वर्ष ढाका में हुए <strong>विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों</strong> से जुड़ा है, जिनमें <strong>लगभग 1,400 लोगों की मौत</strong> हुई थी।</p>
<hr />
<h3><strong>हसीना के खिलाफ पाँच गंभीर आरोप</strong></h3>
<p>हसीना पर <strong>मानवता के खिलाफ अपराधों के पाँच आरोप</strong> हैं। अभियोजन पक्ष ने उनके लिए <strong>मौत की सजा</strong> की मांग की है। छात्रों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों पर की गई कठोर कार्रवाई के कारण उन्हें सत्ता से <strong>अपदस्थ कर दिया गया</strong> था, जिसके बाद वे <strong>भारत भाग आईं</strong>।</p>
<p>मामले में पूर्व गृह मंत्री <strong>असदुज्जमां खान कमाल</strong> और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक <strong>चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून</strong> पर भी मुकदमा चलाया जा रहा है। अदालत ने दोनों को “<strong>भगोड़ा</strong>” घोषित किया है और अनुपस्थिति में मुकदमे की सुनवाई जारी रखी है।</p>
<hr />
<h3><strong>1,400 मौतों पर न्याय की मांग</strong></h3>
<p>संयुक्त राष्ट्र की फरवरी 2025 की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले साल ढाका में हुई हिंसा में <strong>लगभग 1,400 लोगों की जान गई</strong>, जबकि बांग्लादेश के स्वास्थ्य सलाहकार के अनुसार <strong>800 से अधिक लोग मारे गए और 14,000 घायल हुए</strong>।</p>
<p>मुख्य अभियोजक <strong>मोहम्मद ताजुल इस्लाम</strong> ने कहा —</p>
<blockquote>
<p>“अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना 1,400 मौतों की जिम्मेदार हैं। उन्हें वही सज़ा मिलनी चाहिए जो उन्होंने दूसरों पर थोपी। चूँकि सभी दोषियों को दंड देना संभव नहीं है, इसलिए हम कम से कम एक सज़ा की मांग करते हैं।”</p>
</blockquote>
<hr />
<h3><strong>भारत में शरण और राजनीतिक असर</strong></h3>
<p>शेख हसीना वर्तमान में <strong>भारत में शरण लिए हुए</strong> हैं। अगर बांग्लादेश की अदालत उन्हें <strong>मौत की सजा</strong> सुनाती है, तो यह न केवल <strong>अवामी लीग की राजनीतिक विरासत</strong> बल्कि <strong>भारत-बांग्लादेश संबंधों</strong> पर भी गहरा असर डाल सकता है।</p>
<p>17 नवंबर का फैसला बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक <strong>निर्णायक मोड़</strong> साबित हो सकता है। यह तय करेगा कि देश न्याय के पथ पर आगे बढ़ेगा या फिर एक नए राजनीतिक संकट में प्रवेश करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 21:40:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीएनए की संरचना के खोजकर्ता जेम्स वॉटसन का निधन</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता सचिन बाजपेई</strong></div>
<div>  </div>
<div>विज्ञान जगत के लिए एक गहरा आघात देने वाली खबर सामने आई है। डीएनए की संरचना (Structure of DNA) की खोज करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता जेम्स वॉटसन का 6 नवंबर 2025 को निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे।</div>
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<div>जेम्स वॉटसन ने ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक के साथ वर्ष 1953 में मिलकर डीएनए की डबल हेलिक्स (Double Helix) संरचना की पहचान की थी। यह खोज 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। इसने यह स्पष्ट किया कि डीएनए ही वह आनुवंशिक पदार्थ है जो</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159465/james-watson-discoverer-of-the-structure-of-dna-passes-away"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/images---2025-11-09t150227.604.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता सचिन बाजपेई</strong></div>
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<div>विज्ञान जगत के लिए एक गहरा आघात देने वाली खबर सामने आई है। डीएनए की संरचना (Structure of DNA) की खोज करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता जेम्स वॉटसन का 6 नवंबर 2025 को निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे।</div>
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<div>जेम्स वॉटसन ने ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक के साथ वर्ष 1953 में मिलकर डीएनए की डबल हेलिक्स (Double Helix) संरचना की पहचान की थी। यह खोज 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। इसने यह स्पष्ट किया कि डीएनए ही वह आनुवंशिक पदार्थ है जो जीवों में वंशानुगत जानकारी को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाता है।</div>
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<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/h4000039.jpg" alt="h4000039" width="1032" height="1033"></img></div>
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<div>वॉटसन और क्रिक को इस अद्वितीय खोज के लिए वर्ष 1962 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस खोज में वैज्ञानिक रोज़ालिंड फ्रैंकलिन के एक्स-रे डिफ्रैक्शन कार्य का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसने डीएनए की आकृति को समझने में अहम भूमिका निभाई।</div>
<div> </div>
<div>वॉटसन ने अपने लंबे वैज्ञानिक जीवन में आनुवंशिकी, बायोटेक्नोलॉजी और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उनके निधन से विज्ञान समुदाय में शोक की लहर है। दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने उन्हें उस प्रतिभाशाली व्यक्ति के रूप में याद किया है, जिसने जीवन के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में मानवता को नई रोशनी दी।</div>
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                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Nov 2025 17:52:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन पर 10% टैरिफ ट्रंप-शी की बैठक के बाद घटा, उम्मीद है व्यापार युद्ध थमने की </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="nev7se">
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<pre class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" dir="ltr"><strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">International Desk </span></strong></pre>
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<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि दक्षिण कोरिया के बुसान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अद्भुत बैठक के बाद चीनी वस्तुओं पर टैरिफ 57 प्रतिशत से घटाकर 47 प्रतिशत कर दिया जाएगा। बातचीत के बाद, ट्रंप ने कहा कि कई निर्णय लिए गए और दोनों पक्षों ने व्यापार एवं सहयोग पर कई महत्वपूर्ण समझौते किए। </p>
<p>बुसान में शी जिनपिंग के साथ दो घंटे से ज़्यादा समय तक बंद कमरे में चली बातचीत के बाद, ट्रंप ने कहा कि कई निर्णय लिए गए और बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर निष्कर्ष जल्द ही घोषित किए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158298/68fd2246c1bbe"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/चीन-पर-टैरिफ-ट्रंप-शी-की-बैठक-के-बाद-घटा.jpg" alt=""></a><br /><div class="nev7se">
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<pre class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" dir="ltr"><strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">International Desk </span></strong></pre>
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<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि दक्षिण कोरिया के बुसान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अद्भुत बैठक के बाद चीनी वस्तुओं पर टैरिफ 57 प्रतिशत से घटाकर 47 प्रतिशत कर दिया जाएगा। बातचीत के बाद, ट्रंप ने कहा कि कई निर्णय लिए गए और दोनों पक्षों ने व्यापार एवं सहयोग पर कई महत्वपूर्ण समझौते किए। </p>
<p>बुसान में शी जिनपिंग के साथ दो घंटे से ज़्यादा समय तक बंद कमरे में चली बातचीत के बाद, ट्रंप ने कहा कि कई निर्णय लिए गए और बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर निष्कर्ष जल्द ही घोषित किए जाएँगे। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा मैं यह नहीं कहूँगा कि हर बात पर चर्चा हुई। लेकिन यह एक अद्भुत बैठक थी। हम इस बात पर सहमत हुए कि राष्ट्रपति शी फेंटेनाइल को रोकने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे, सोयाबीन की खरीद तुरंत शुरू होगी, और चीन पर टैरिफ 57 प्रतिशत से घटाकर 47 प्रतिशत कर दिया जाएगा।" </p>
<p>सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक दुर्लभ मृदा खनिजों से संबंधित था, जो उच्च तकनीक निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों में उपयोग किए जाने वाले महत्वपूर्ण खनिज हैं। ट्रंप ने कहा, "दुर्लभ मृदा से संबंधित सभी मुद्दे सुलझा लिए गए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिका को चीनी निर्यात को प्रभावित करने वाली "कोई और बाधा" नहीं होगी।</p>
<p>ट्रंप और शी जिनपिंग छह साल बाद दक्षिण कोरिया के बुसान में मिले। ट्रंप ने शी जिनपिंग को एक "कठोर वार्ताकार" बताया और कहा कि उन्हें व्यापार और शुल्कों पर बातचीत के दौरान एक "शानदार समझौते" की उम्मीद है। चीनी राष्ट्रपति ने भी इसी तरह की आशा व्यक्त की और कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टकराव होना सामान्य बात है, लेकिन चीन और अमेरिका को एक स्थिर आधार बनाना चाहिए और एक-दूसरे की प्रगति का समर्थन करना चाहिए।</p>
<p>ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि बीजिंग एक साल की व्यवस्था के तहत अमेरिका को दुर्लभ मृदा खनिजों का निर्यात जारी रखने पर सहमत हो गया है, जिसे दोनों पक्ष नवीनीकृत करने की उम्मीद कर रहे हैं। इस समझौते से आपूर्ति श्रृंखला संबंधी उन चिंताओं में कमी आने की संभावना है जो हाल के महीनों में अमेरिकी प्रौद्योगिकी और रक्षा कंपनियों को परेशान कर रही थीं।</p>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 15:02:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>50% टैरिफ़ के झटके के बाद आज रात अमेरिकी मुख्य वार्ताकार सुलह की उम्मीद! भारत पहुंचेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>भारत और अमेरिका के बीच मंगलवार को व्यापार वार्ता होने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी एएनआई ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच, जो ट्रंप के सहयोगी और दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हैं, व्यापार वार्ता के लिए आज रात भारत पहुँचेंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। ट्रंप प्रशासन रूसी तेल खरीदने के लिए भारत की लगातार आलोचना करता रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155089/draft-add-your-titlea50-after-the-shock-of-tariff"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/दक्षिण-अफ्रीका-के-राष्ट्रपति-भारत-के-दोस्त-ने-भी-बिगाड़ा-ट्रंप-का-खेल-कहा-...आपसे-नहीं-डरते-हैं.png" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p>भारत और अमेरिका के बीच मंगलवार को व्यापार वार्ता होने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी एएनआई ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच, जो ट्रंप के सहयोगी और दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हैं, व्यापार वार्ता के लिए आज रात भारत पहुँचेंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। ट्रंप प्रशासन रूसी तेल खरीदने के लिए भारत की लगातार आलोचना करता रहा है और आरोप लगाता रहा है कि यह यूक्रेन में युद्ध को बढ़ावा दे रहा है।</p>
<p>शुरुआत में, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। बाद में, उसने 25 प्रतिशत टैरिफ और बढ़ा दिए, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया। ये अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो गए। हालांकि, पिछले हफ्ते, ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना 'अच्छा दोस्त' बताते हुए कहा कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखेंगे।</p>
<p>ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, "मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और अमेरिका दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं... मैं आने वाले हफ्तों में अपने बहुत अच्छे दोस्त, प्रधानमंत्री मोदी से बात करने के लिए उत्सुक हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे दोनों महान देशों के लिए एक सफल निष्कर्ष पर पहुँचने में कोई कठिनाई नहीं होगी!"</p>
<p>बाद में, प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप की टिप्पणी का स्वागत करते हुए कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति की भावनाओं की "गहरी सराहना करते हैं और पूरी तरह से उनका समर्थन करते हैं।" प्रधानमंत्री मोदी ने एक 'X' (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों के सकारात्मक आकलन की मैं गहराई से सराहना करता हूँ और पूरी तरह से उनका समर्थन करता हूँ। भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत ही सकारात्मक और दूरदर्शी व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है।"</p>
<div class="article-body">
<p class="pf0"><strong><span class="cf0">आज भारत आ रहे हैं अमेरिकी अधिकारी</span></strong></p>
</div>
<div class="article-body">
<p class="pf0"><span class="cf1">जानकारी के मुताबिक, दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के </span><span class="cf1">असिस्टेंट ट्रेड रेप्रेसेंटेटिव</span><span class="cf1"> ब्रेंडन लिंच मंगलवार (16 सितंबर) को भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल से मुलाकात करेंगे।</span> <span class="cf1">भारत और अमेरिका के बीच ट्रंप के टैरिफ के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ गए हैं। ट्रंप अब तक भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगा चुके हैं। यह ऐसा मुद्दा बन गया है जो दोनों देशों की कूटनीति के साथ ही साथ राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप भी मान चुके हैं कि टैरिफ की वजह से भारत के साथ दरार पैदा हुई है।</span></p>
</div>
<div class="article-body">
<p class="pf0"><strong>अमेरिका ने दी थी ये चेतावनी </strong></p>
</div>
<div>
<div class="article-body">
<p class="pf0"><span class="cf3">विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने बिना ज्यादा जानकारी साझा किए यह पुष्टि की कि भारत और अमेरिका अपनी व्यापार वार्ताओं की गति बढ़ाएंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिकी अधिकारी ब्रेंडन लिंच नई दिल्ली की एक दिन की यात्रा पर आ रहे हैं।</span> <span class="cf3">हालांकि अमेरिकी <span class="cf0">सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स </span>हॉवर्ड लुटनिक ने चेतावनी दी थी कि अगर भारत रूसी कच्चा तेल खरीदना बंद नहीं करता तो बातचीत मुश्किल हो सकती है, लेकिन लिंच का दौरा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब तक ये वार्ताए</span><span class="cf3">ं</span><span class="cf3"> भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्रों को खोलने में हिचकिचाहट के चलते अटकी हुई थीं।</span></p>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 19:08:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति भारत के दोस्त ने भी बिगाड़ा ट्रंप का खेल कहा ...आपसे नहीं डरते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="news-description my-2">
<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>अमेरिका टैरिफ के जरिए अन्य देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उसकी ये रणनीति अब कमोजर पड़ती दिखाई दे रही है। पहले भारत ने इस दबाव का मजबूती से सामना किया और अपने हितों की रक्षा की। अब भारत के बाद दक्षिण अफ्रीका ने भी कुछ ऐसा कदम उठाया है।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफोसा ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता पर एक कड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका को बताया कि अफ्रीका को धमकाया नहीं जा सकता है। रामाफोसा ने कहा है कि हमारी कोशिश है कि हम अमेरिका को ज्यादा से</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155049/68c7e407de676"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/दक्षिण-अफ्रीका-के-राष्ट्रपति-भारत-के-दोस्त-ने-भी-बिगाड़ा-ट्रंप-का-खेल-कहा-...आपसे-नहीं-डरते-हैं.webp" alt=""></a><br /><div class="news-description my-2">
<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>अमेरिका टैरिफ के जरिए अन्य देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उसकी ये रणनीति अब कमोजर पड़ती दिखाई दे रही है। पहले भारत ने इस दबाव का मजबूती से सामना किया और अपने हितों की रक्षा की। अब भारत के बाद दक्षिण अफ्रीका ने भी कुछ ऐसा कदम उठाया है।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफोसा ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता पर एक कड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका को बताया कि अफ्रीका को धमकाया नहीं जा सकता है। रामाफोसा ने कहा है कि हमारी कोशिश है कि हम अमेरिका को ज्यादा से ज्यादा चीजें निर्यात करते रहें। साथ ही हमारी कंपनियां अमेरिका में निवेश कर सकें और अमेरिका की कंपनियां भी हमारे देश में आकर पैसा लगाएं। </p>
</div>
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<p style="text-align:left;"><strong>हमारे पास ये खास खनिज है और उन्हें प्रोसेस करने की क्षमता है</strong></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हमारे पास बातचीत में ताकत है। ये ताकत हमारे देश में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और खास खनिजों से आती है। जिनकी अमेरिका को बहुत जरूरत है। हमारे पास ये खास खनिज है और उन्हें प्रोसेस करने की क्षमता भी है। इसके अलावा हमारे पास ऊर्जा की भी बहुत अच्छी सुविधा है। </p>
<p style="text-align:justify;">जो बहुत से देशों के पास नहीं है। यही चीजें हम बातचीत में अपनी तरफ से रखते हैं। हमने बातचीत के लिए एक साफ रणनीति अपनाई है। हम सीधे सम्मान के साथ बात करते हैं। हम अमेरिका से डरते नहीं हैं और ना ही कभी घुटनों पर बैठे हैं। हमने साफ कह दिया कि हमें धमकाया नहीं जा सकता। </p>
<div class="news-description my-2" style="text-align:justify;">
<p><strong>रामाफोसा का ये बयान ट्रंप के लिए बड़ा झटका</strong></p>
<p>रामाफोसा ने कहा कि हम एक आजाद देश हैं और अपनी शर्तों पर बातचीत करेंगे। ताकी दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे अच्छा समझौता कर सके। रामाफोसा का ये बयान ट्रंप के लिए बड़ा झटका है। रामाफोसा ने अमेरिका को अपना संदेश दे दिया है।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका अमेरिका से नहीं डरता और न ही दक्षिण अफ्रीका को धमकाया जा सकता है। आपको बता दें कि ट्रंप लगातार दूसरे देशों पर टैरिफ के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ट्रंप की ये नीति कहीं भी काम नहीं आ रही है। ट्रंप ने भी भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया। अमेरिका के इस बड़े रवैये का सामना भारत ने डटकर किया और भारत ने अपना रुख स्पष्ट रखा। </p>
</div>
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<div class="social-share" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/155049/68c7e407de676</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 18:54:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधि के बीच 18 दिसंबर को बीजिंग में वार्ता करेंगे : चीनी विदेश मंत्रालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के पीछे हटने के लिए 21 अक्टूबर को हुए समझौते के बाद द्विपक्षीय संबंधों की बहाली पर चर्चा के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि बुधवार को यहां मिलेंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने यहां बताया कि सहमति के अनुरूप केंद्रीय विदेश आयोग के कार्यालय के निदेशक वांग यी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 18 दिसंबर को बीजिंग में ‘चीन-भारत सीमा विवाद’ के लिए विशेष प्रतिनिधियों की 23वीं बैठक करेंगे।</p>
<p>दोनों देशों के बीच रिश्तों पर अप्रैल 2020 से ही बर्फ जमी थी, जब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147045/chinese-foreign-ministry-will-hold-talks-between-the-special-representatives"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-12/भारत-और-चीन-के-विशेष-प्रतिनिधि-के-बीच-18-दिसंबर-को-बीजिंग-में-वार्ता-करेंगे--चीनी-विदेश-मंत्रालय.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p>पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के पीछे हटने के लिए 21 अक्टूबर को हुए समझौते के बाद द्विपक्षीय संबंधों की बहाली पर चर्चा के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि बुधवार को यहां मिलेंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने यहां बताया कि सहमति के अनुरूप केंद्रीय विदेश आयोग के कार्यालय के निदेशक वांग यी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 18 दिसंबर को बीजिंग में ‘चीन-भारत सीमा विवाद’ के लिए विशेष प्रतिनिधियों की 23वीं बैठक करेंगे।</p>
<p>दोनों देशों के बीच रिश्तों पर अप्रैल 2020 से ही बर्फ जमी थी, जब चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की ओर बड़ी संख्या में सैनिकों को भेजा था, जिससे दोनों देशों के बीच सबसे लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 21 अक्टूबर को दिल्ली में कहा कि पिछले कई हफ्तों से चल रही बातचीत के बाद समझौते को अंतिम रूप दिया गया है और इससे 2020 में उठे मुद्दों का समाधान निकलेगा। इसके बाद, चीनी विदेश मंत्रालय ने 22 अक्टूबर को समझौते की पुष्टि करते हुए कहा, ‘‘दोनों पक्ष प्रासंगिक मामलों के समाधान तक पहुंच गए हैं। चीन इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए भारत के साथ काम करेगा।’’</p>
<p>ज्ञात सूत्रों के अनुसार, डोभाल महत्वपूर्ण वार्ता में भाग लेने के लिए मंगलवार को यहां पहुंचेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आगे बढ़ने का रास्ता मिलने की उम्मीद है। भारत-चीन सीमा विवाद को निपटाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के इस तंत्र ने पिछले कुछ वर्षों में 22 बार बैठकें की हैं। इस तंत्र का गठन 2003 में किया गया था। विशेष प्रतिनिधियों की यह बैठक पांच साल के अंतराल के बाद होगी। पिछली बैठक 2019 में हुई थी। हालांकि सीमा विवाद को सुलझाने में सफलता नहीं मिली, लेकिन दोनों पक्षों के अधिकारी इसे दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने में एक बहुत ही आशाजनक, उपयोगी और आसान उपकरण मानते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 24 अक्टूबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कजान में मुलाकात की, और इस दौरान उन्होंने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गश्त और पीछे हटने के समझौते का समर्थन किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने ब्राजील में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की, जिसके बाद चीन-भारत सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की बैठक हुई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/147045/chinese-foreign-ministry-will-hold-talks-between-the-special-representatives</link>
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                <pubDate>Tue, 17 Dec 2024 16:15:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मैक्रों ने फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बने रहने का संकल्प जताया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk </strong></p>
<p>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 2027 में अपने कार्यकाल के अंत तक पद पर बने रहने का संकल्प जताया और बृहस्पतिवार को घोषणा की कि वह कुछ दिन में एक नए प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा करेंगे। फ्रांस के दक्षिणपंथी और वामपंथी सांसदों ने बुधवार को बजट विवाद के कारण ऐतिहासिक अविश्वास प्रस्ताव पर एक साथ मिलकर मतदान किया, जिसके कारणबार्नियर और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को इस्तीफा देना पड़ा।</p>
<p>मैक्रों ने राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री माइकल बार्नियर की सरकार गिराने के लिए अपने दक्षिणपंथी विरोधियों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि वह कुछ ही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146838/macron-expressed-his-resolve-to-remain-in-office-until-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-12/मैक्रों-ने-फ्रांस-के-राष्ट्रपति-कार्यकाल-पूरा-होने-तक-पद-पर-बने-रहने-का-संकल्प-जताया.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk </strong></p>
<p>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 2027 में अपने कार्यकाल के अंत तक पद पर बने रहने का संकल्प जताया और बृहस्पतिवार को घोषणा की कि वह कुछ दिन में एक नए प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा करेंगे। फ्रांस के दक्षिणपंथी और वामपंथी सांसदों ने बुधवार को बजट विवाद के कारण ऐतिहासिक अविश्वास प्रस्ताव पर एक साथ मिलकर मतदान किया, जिसके कारणबार्नियर और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को इस्तीफा देना पड़ा।</p>
<p>मैक्रों ने राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री माइकल बार्नियर की सरकार गिराने के लिए अपने दक्षिणपंथी विरोधियों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि वह कुछ ही दिन में नए प्रधानमंत्री का नाम घोषित करेंगे, लेकिन उन्होंने इस बात का कोई संकेत नहीं दिया कि नया प्रधानमंत्री कौन हो सकता है।</p>
<p><strong>मैक्रों ने कहा, ‘‘उन्होंने अव्यवस्था को चुना।’’</strong></p>
<p>राष्ट्रपति ने दोनों अति दक्षिणपंथी और अति वामपंथी दलों की इस बात के लिए आलोचना की कि वे एक साथ मिलकर "रिपब्लिकन विरोधी मोर्चा" बना रहे हैं। अपने संकल्प पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "मैं दूसरों की गैरजिम्मेदारी का बोझ नहीं उठाऊंगा।"</p>
<p>मैक्रों ने पुष्टि की कि वह कुछ ही दिनों में नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर देंगे, लेकिन उन्होंने संभावित उम्मीदवारों के बारे में कोई संकेत नहीं दिया।</p>
<p>अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर हमला करते हुए मैक्रों ने वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल में अपनी भूमिका को स्वीकार किया, जिसने वित्तीय बाजारों को अस्थिर कर दिया है।</p>
<p>जून में संसद को भंग करने के अपने फ़ैसले पर विचार करते हुए, जिसके कारण विधायी चुनाव हुए और परिणामस्वरूप संसद में बहुमत नहीं रहा, मैक्रों ने स्वीकार किया, "मैं मानता हूँ कि इस फ़ैसले को समझा नहीं गया। कई लोगों ने इसके लिए मेरी आलोचना की। मुझे पता है कि कई लोग इसके लिए मेरी आलोचना करना जारी रखेंगे।" हालाँकि, उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "मेरा मानना ​​है कि मतदाताओं को अपनी बात कहने का मौक़ा देना ज़रूरी था।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 17:42:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प के शपथ ग्रहण से पहले अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने विदेशी विद्यार्थियों से लौट आने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों ने अपने अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के साथ-साथ कर्मियों के लिए यात्रा परामर्श जारी करते हुए उनसे अगले साल जनवरी में होने वाले नवनिर्वाचित राष्ट्रपति निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले अमेरिका लौट आने की अपील की है। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि (अगला) ट्रंप प्रशासन यात्रा संबंधी कुछ प्रतिबंध लगा सकता है। ट्रंप 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि वह अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के पहले ही दिन अर्थव्यवस्था और आव्रजन के मुद्दों पर कई कार्यकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146752/before-trumps-inauguration-american-universities-appealed-to-foreign-students-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/अमेरिकी-विश्वविद्यालयों-ने-विदेशी-विद्यार्थियों-से-लौट-आने-की-अपील-की.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों ने अपने अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के साथ-साथ कर्मियों के लिए यात्रा परामर्श जारी करते हुए उनसे अगले साल जनवरी में होने वाले नवनिर्वाचित राष्ट्रपति निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले अमेरिका लौट आने की अपील की है। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि (अगला) ट्रंप प्रशासन यात्रा संबंधी कुछ प्रतिबंध लगा सकता है। ट्रंप 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि वह अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के पहले ही दिन अर्थव्यवस्था और आव्रजन के मुद्दों पर कई कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">‘मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के अंतर्राष्ट्रीय छात्र कार्यालय में एसोसिएट डीन और निदेशक डेविड एल्वेल ने विद्यार्थियों से आगामी शीतकालीन अवकाश पर अपनी यात्रा योजनाओं का आकलन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के तहत नए कार्यकारी आदेश यात्रा और वीज़ा प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान यात्रा संबंधी प्रतिबंधों के कारण होने वाली बाधाओं को लेकर चिंता के बीच, अमेरिका के कई शीर्ष विश्वविद्यालय अपने अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए यात्रा सलाह जारी कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक मामलों के ब्यूरो तथा अंतरराष्ट्रीय शिक्षा संस्थान के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में कुल अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों में से आधे से अधिक (54 प्रतिशत) भारत और चीन के हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Nov 2024 17:56:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए कमला हर्रिस ने लड़ते रहने का संकल्प जताया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन।</strong> रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रंप से राष्ट्रपति पद का चुनाव हारने के कुछ दिनों बाद, अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा है कि वह लोकतंत्र, कानून के शासन, समान न्याय और स्वतंत्रता के लिए लड़ाई जारी रखेंगी। हैरिस ने देश भर में अपने प्रमुख समर्थकों और धन जुटाने वालों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा भविष्य सुनिश्चित करने के लिए बहुत कुछ लड़ना है, जहां हर कोई अपने सपनों को पूरा कर सके और यह लड़ाई पांच नवंबर को समाप्त नहीं हुई है।</p><p>ये समर्थक और धन जुटाने वाले उनके राष्ट्रपति पद के चुनाव अभियान का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146661/kamala-harris-vows-to-keep-fighting-for-democracy-and-rule"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/लोकतंत्र-और-कानून-के-शासन-के-लिए-कमला-हर्रिस-ने-लड़ते-रहने-का-संकल्प-जताया.webp" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन।</strong> रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रंप से राष्ट्रपति पद का चुनाव हारने के कुछ दिनों बाद, अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा है कि वह लोकतंत्र, कानून के शासन, समान न्याय और स्वतंत्रता के लिए लड़ाई जारी रखेंगी। हैरिस ने देश भर में अपने प्रमुख समर्थकों और धन जुटाने वालों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा भविष्य सुनिश्चित करने के लिए बहुत कुछ लड़ना है, जहां हर कोई अपने सपनों को पूरा कर सके और यह लड़ाई पांच नवंबर को समाप्त नहीं हुई है।</p><p>ये समर्थक और धन जुटाने वाले उनके राष्ट्रपति पद के चुनाव अभियान का हिस्सा थे और मंगलवार को उनके एक आह्वान पर इकट्ठा हुए थे। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव पांच नवंबर को हुआ था। ट्रंप राष्ट्रपति जो बाइडन का स्थान लेंगे, जबकि हैरिस का स्थान जे डी वांस लेंगे। हैरिस ने कहा, ‘‘हम लड़ाई जारी रखेंगे। </p><p>हमें ऐसे भविष्य के लिए बहुत संघर्ष करना है, जहां हर कोई अपने सपनों, अपनी महत्वाकांक्षाओं और अपनी आकांक्षाओं को पूरा कर सके। हम महिलाओं के अपने शरीर के बारे में निर्णय लेने के अधिकार के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।’’ उन्होंने कहा कि हम अपने लोकतंत्र, कानून के शासन और समान न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह ‘‘अनिश्चितताओं से भरा’’ समय है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Nov 2024 17:07:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेशी सरकार ने अदालत से की 'इस्कॉन एक कट्टरपंथी संगठन है, इस पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने', की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International desk </strong></p>
<p>बांग्लादेशी सरकार ने बुधवार को इस्कॉन या इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस को एक "धार्मिक कट्टरपंथी संगठन" कहा, जो संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में दायर एक रिट याचिका के जवाब में था। यह घटनाक्रम हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की गिरफ्तारी और कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों द्वारा इस्कॉन और अन्य हिंदू मंदिरों को निशाना बनाए जाने को लेकर पूरे बांग्लादेश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच हुआ है।</p>
<p>बुधवार को एक वकील ने इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की। वकील ने अदालत का ध्यान इस बात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146658/bangladesh-government-asks-court-to-immediately-ban-iskcon-as-it"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/बांग्लादेशी-सरकार-ने-अदालत-से-की-&#039;इस्कॉन-एक-कट्टरपंथी-संगठन-है,-इस-पर-तत्काल-प्रतिबंध-लगाए.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International desk </strong></p>
<p>बांग्लादेशी सरकार ने बुधवार को इस्कॉन या इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस को एक "धार्मिक कट्टरपंथी संगठन" कहा, जो संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में दायर एक रिट याचिका के जवाब में था। यह घटनाक्रम हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की गिरफ्तारी और कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों द्वारा इस्कॉन और अन्य हिंदू मंदिरों को निशाना बनाए जाने को लेकर पूरे बांग्लादेश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच हुआ है।</p>
<p>बुधवार को एक वकील ने इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की। वकील ने अदालत का ध्यान इस बात की ओर भी दिलाया कि सहायक सरकारी अभियोजक सैफुल इस्लाम की सुरक्षा कर्मियों और हिंदू भिक्षु के अनुयायियों के बीच झड़प के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान, अदालत ने अटॉर्नी जनरल से इस्कॉन के बारे में और बांग्लादेश में इसकी स्थापना कैसे हुई, इसके बारे में जानना चाहा।</p>
<p><strong>'आशा है कि ट्रम्प के शपथ ग्रहण के बाद हालात सुधरेंगे'</strong></p>
<p>याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए, इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधा रमन दास ने विश्व नेताओं से इस मुद्दे पर बोलने का आग्रह किया और उम्मीद जताई कि 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण के बाद स्थिति बेहतर हो जाएगी।</p>
<p>दास ने इंडिया टुडे से कहा, "स्थिति नियंत्रण से बाहर है। अब हमारे नियंत्रण में नहीं है। हम 20 जनवरी का इंतजार करेंगे जब डोनाल्ड ट्रम्प पदभार संभालेंगे। उम्मीद है कि तब चीजें आगे बढ़ेंगी।" इस्कॉन नेता ने अटॉर्नी जनरल द्वारा कट्टरपंथी संगठन कहे जाने पर भी आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "बांग्लादेश में बाढ़ के दौरान भी हमने बहुत से लोगों की सेवा की। हमसे पूछा गया कि हमने ऐसा क्यों किया, फिर भी हमने ऐसा किया। इस्कॉन ने दुनिया भर में आठ अरब लोगों को खाना खिलाया है। और हमें एक कट्टरपंथी आतंकवादी संगठन कहा जा रहा है?"</p>
<p>जवाब में, अटॉर्नी जनरल, मोहम्मद असदुज्जमां ने कहा कि यह संगठन कोई राजनीतिक दल नहीं है। अटॉर्नी जनरल ने कहा, "यह एक धार्मिक कट्टरपंथी संगठन है। सरकार पहले से ही उनकी जांच कर रही है।" उच्च न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल को निर्देश दिया कि वे इस्कॉन पर सरकार की स्थिति और देश की समग्र कानून व्यवस्था की स्थिति पर गुरुवार सुबह तक रिपोर्ट दें। न्यायालय ने सरकार से कानून व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोकने को कहा। विशेष रूप से, कुछ सप्ताह पहले अटॉर्नी जनरल ने संविधान से "धर्मनिरपेक्ष" शब्द को हटाने का सुझाव दिया था, क्योंकि देश की 90% आबादी मुस्लिम है।</p>
<p><strong>हिंदू विरोध प्रदर्शन की क्या वजह है</strong></p>
<p>चिन्मय दास, जो पहले इस्कॉन के सदस्य थे, को इस सप्ताह की शुरुआत में हिंदू समुदाय की एक रैली के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का कथित रूप से अपमान करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी ने हिंदू समुदाय के लोगों में जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसने 5 अगस्त को शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के पतन के बाद से 200 से अधिक हमलों का सामना किया है।</p>
<p>बांग्लादेशी सरकार ने कहा है कि दास को किसी समुदाय के नेता के रूप में नहीं बल्कि देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। बांग्लादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता दास की गिरफ्तारी पर भारत की ओर से भी प्रतिक्रिया आई, जिसने इसे बेहद चिंताजनक बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा, "यह घटना बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों द्वारा हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर कई हमलों के बाद हुई है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
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                <pubDate>Wed, 27 Nov 2024 17:01:29 +0530</pubDate>
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