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                <title>bharat ki rajnitee - Swatantra Prabhat</title>
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                <title> संकट के बादलों में फंसे सुखबीर  बादल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष पद से सुखबीर बादल के इस्तीफे की ख़ास चर्चा  नहीं  हुई क्योंकि इस समय ये क्षेत्रीय दल पंजाब और देश की राजनीति मेंपहले की तरह प्रासंगिक नहीं रहा। देश में भी इस समय सुर्ख़ियों में महाराष्ट्र और झारखण्ड के विधान सभा चुनावों का भी जोर है। लेकिन अकालियों की राजनीति में आज भी यही एक ऐसा क्षेत्रीय दल है जिसे पंजाबियों का अलमबरदार कहा जा सकता है। अपनी स्थापना के 104  साल पूरे करने वाले इस दल के सबसे बुरे दिन शायद आजकल ही हैं। खबर आई है कि अकाल तख्त की ओर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146404/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/ संकट-के-बादलों-में-फंसे-सुखबीर-बादल.jpg" alt=""></a><br /><p>पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष पद से सुखबीर बादल के इस्तीफे की ख़ास चर्चा  नहीं  हुई क्योंकि इस समय ये क्षेत्रीय दल पंजाब और देश की राजनीति मेंपहले की तरह प्रासंगिक नहीं रहा। देश में भी इस समय सुर्ख़ियों में महाराष्ट्र और झारखण्ड के विधान सभा चुनावों का भी जोर है। लेकिन अकालियों की राजनीति में आज भी यही एक ऐसा क्षेत्रीय दल है जिसे पंजाबियों का अलमबरदार कहा जा सकता है। अपनी स्थापना के 104  साल पूरे करने वाले इस दल के सबसे बुरे दिन शायद आजकल ही हैं। खबर आई है कि अकाल तख्त की ओर से 'तनखैया'  घोषित किए जाने के करीब 2 महीने बाद पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल  ने शिरोमणि अकाली दल  के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।</p>
<p>पार्टी के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि बादल ने पार्टी की कार्यसमिति को अपना इस्तीफा सौंप दिया।  बादल के इस्तीफे से नए पार्टी प्रमुख के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। मजे की बात ये है कि पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से कुछ दिन पहले बादल ने खुद अकाल तख्त के जत्थेदार से धार्मिक कदाचार के आरोपों में उन्हें सजा सुनाने का आग्रह किया था।  सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने 2007 से 2017 तक अकाली दल और उसकी सरकार की ओर से की गई 'गलतियों' के लिए बादल को 30 अगस्त को 'तनखैया' घोषित किया था। सुखबीर बादल पर आरोप है कि बादल की कथित गलतियां  'पंथ की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाने और सिख हितों को नुकसान पहुंचाने' वाली थीं।  इसमें 2015 की बेअदबी की घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करने में विफलता और 2007 के ईशनिंदा मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को माफ करना शामिल है।</p>
<p>पंजाब में  शिरोमणि अकाली दल पर  1996 से ही बादल परिवार  काबिज है। पहले सुखबीर सिंह बादल के पिता स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल दल के अध्यक्ष हुआ करते थे ,वर्तमान में पार्टी के अध्यक्ष पद .पर सुखबीर सिंह बादल थे।  बादल को अपने नेतृत्व के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पार्टी का चुनावी प्रभाव तेजी से कम हो रहा है. साल 2022 से विधानसभा चुनावों में यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जब पार्टी पंजाब में सिर्फ तीन सीटें ही जीत पाई. इस साल हुए लोकसभा चुनाव में अकाली दल का वोट प्रतिशत  घटकर 13.4 प्रतिशत रह गया, जो 2019 में 27.5 प्रतिशत था।  साथ ही अकाली दल राज्य की 13 लोकसभा सीटों में से सिर्फ एक पर जीत हासिल कर पाया । आज पंजाब में शिरोमणि अकालीदल कि हैसियत  उत्तर प्रदेश में बसपा कि हैसियत जैसी  हो चुकी है।</p>
<p>आमतौर पर ये माना जाता है कि सुखबीर सिंह बादल, उनके पिता प्रकाश सिंह बादल और यहां तक कि सुखबीर के दादा का भी सिस्टम से लड़ने का इतिहास रहा है।  सुखबीर के कार्यकाल में राज्य में सड़क नेटवर्क, अतिरिक्त बिजली आदि के मामले में उल्लेखनीय विकास हुआ।  जब 2012 में अकाली-भाजपा गठबंधन ने पंजाब में दोबारा अपना कार्यकाल पूरा करके इतिहास रचा, तो इसका सारा श्रेय सुखबीर को ही दिया गया।  सुखबीर सिंह बादल को राजनीती विरासत में मिली है। सुखबीर के पिता प्रकाश सिंह बादल शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के मुख्यमंत्री भी रहे।</p>
<p> वे जनता शासन में केंद्र में मंत्री भी रहे। प्रकाश सिंह बादल ने अपना पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1957 में जीता था। 1969 में वह दोबारा विधानसभा चुनाव में जीत गए। वर्ष 1969-1970 तक उन्होंने सामुदायिक विकास, पंचायती राज, पशुपालन, डेरी आदि से संबंधित मंत्रालयों में कार्यकारी मंत्री के रूप में कार्य किया। प्रकाश सिंह बादल 1970–71, 1977–80, 1997–2002 में पंजाब के मुख्यमंत्री और 1972, 1980 और 2002 में नेता विपक्ष रह चुके थे। मोरारजी देसाई के शासन काल में वह सांसद बने। उन्हें केन्द्रीय मंत्री के तौर पर कृषि और सिंचाई मंत्रालय का उत्तरदायित्व सौंपा गया था। इनका कार्यकाल 1 मार्च 2007 से 2017 तक रहा है</p>
<p>अपने पिता के सामने ही  साल 1996 में  सुखबीर ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी, जब वे फरीदकोट से सांसद चुने गए थे। 1999 में वे इस सीट से हार गए और 2001 में राज्यसभा सांसद के रूप में संसद गए।  उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में काम किया।  2004 में सुखबीर सिंह बाद ने फरीदकोट से फिर जीत दर्ज की। पांच साल बाद वे जलालाबाद उपचुनाव जीतकर राज्य की राजनीति में वापस आए और अगस्त 2009 से मार्च 2017 तक पंजाब के उपमुख्यमंत्री रहे  अकाली दल के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान अकाली दल और भाजपा गठबंधन ने 2012 के चुनावों में जीत हासिल की, लेकिन बाद में दोनों दलों का गठबंधन टूट गया।</p>
<p>अकाली दल के चुनावी ग्राफ में गिरावट के साथ उन्हें अपने नेतृत्व के लिए लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा और पार्टी में कई विभाजन हुए। साल 1920  में गठित अकाली दल इस समय अपने सबसे बुरे दौर में है। अकाली दल की दुर्दशा के लिए केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को भी जिम्मेदार माना जाता है। भाजपा ने जिस किसी क्षेत्रीय दल के साथ सत्ता में भागीदारी की उसे बाद में बहुत नुक्सान भी पहुंचाया।  राज्य की सत्ता इस समय आम आदमी पार्टी के पास है। अब देखना है कि क्या ये दल एक बार फिर अपने पांवों पर खड़ा हो सकता है या हमेशा के लिए इतिहास बनकर रह जाएगा ?</p>
<p><strong>राकेश अचल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 17:24:59 +0530</pubDate>
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                <title>इंडिया गठबंधन प्रत्यासी रमेश चंद्र बिंद ने किया जन संपर्क</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>जमुई, मीरजापुर।</strong> इंडिया गठबंधन के प्रत्यासी रमेश चंद्र बिंद शनिवार को चुनार विधान सभा में जन संपर्क किया। जन संपर्क में सभी तबके के प्रताणित लोग भारी जनसंख्या में लोकप्रिय सांसद रमेश बिंद  को सुनने के लिए कड़कड़ाती धूप में जुटे रहे। समर्थको में छात्र किसान मजदूर गृहणी सभी मौजूद थे। जनता केंद्र सरकार और वर्तमान सांसद अनुप्रिया से नाराज हैं ।सभी का कहना था अपने वर्तमान सांसद को  कि जब चुनाव आता है तभी दिखाई देती है उसके बाद जनता किस समस्या में है कभी सुनने तक नहीं आती। हम लोग के साथ केवल छलाव किया जाता रहा हैं</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141465/india-alliance-candidate-ramesh-chandra-bind-did-public-relations"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/6...,...,,.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>जमुई, मीरजापुर।</strong> इंडिया गठबंधन के प्रत्यासी रमेश चंद्र बिंद शनिवार को चुनार विधान सभा में जन संपर्क किया। जन संपर्क में सभी तबके के प्रताणित लोग भारी जनसंख्या में लोकप्रिय सांसद रमेश बिंद  को सुनने के लिए कड़कड़ाती धूप में जुटे रहे। समर्थको में छात्र किसान मजदूर गृहणी सभी मौजूद थे। जनता केंद्र सरकार और वर्तमान सांसद अनुप्रिया से नाराज हैं ।सभी का कहना था अपने वर्तमान सांसद को  कि जब चुनाव आता है तभी दिखाई देती है उसके बाद जनता किस समस्या में है कभी सुनने तक नहीं आती। हम लोग के साथ केवल छलाव किया जाता रहा हैं और हमारे मूलभूत सुविधाओं से हम लोग को वंचित रक्खा जा रहा हैं।</div>
<div> </div>
<div>गृहण का कहना था कि आज रसोई गैस भरवाना हम गृहणी के बजट में नही बच्चो के शिक्षा के लिए कापि किताब पर भी जीएसटी देना पड़ रहा है। वही किसान को अपने फसल की उचित मूल्य नहीं मिल पा रही हैं। छात्र सरकार पर करारी प्रहार करते हुए कहा ऐसी सरकार आज तक नही देखा। खुद पेपर लीक कराती हैं और बोलती हैं कि कानून लायेंगे ऐसे में हम छात्रों को इस सरकार में नौकरी मिलना असंभव प्रतीत होता है।मजदूर कल्लू राम ने कहा कि चुनार का पत्थर आराड़ जब चालू था तब केवल पत्थर की पटिया को इधर से उधर लगाकर दिन भर में कम से कम 400-500 कमा लेते थे और परिवार चल जाता था। वर्तमान सांसद का कभी इस पर ध्यान नहीं गया।</div>
<div> </div>
<div>और हम मजदूर एक एक दाना के लिए रोज यहा वहा भटक रहे हैं परिवार चलाना मुस्किल हो गया है इन 10 साल में जिस तरह महंगाई बढ़ी है कि हम लोग मर भी नहीं सकते और जी भी नहीं सकते। सुनील सिंह पटेल ने कहा कि आज विपक्ष विकाश गिनवाती हैं मेडिकल कालेज बनवाया में पूछता हूं की यहां गरीब प्राइमरी में पढ़ा नही पा रहे हैं इस महंगाई से तो मेडिकल कालेज में क्या पढ़ा पाएंगे ये सब अमीरों की सरकार है केवल अमीरों के लिए कर रही हैं। सुनील कुमार पटेल ने वर्तमान सांसद पर टिप्पणी करते हुए कहा 69000 हजार टीचर भर्ती में हमारे अन्य पिछड़ा वर्ग के 18000 सीट जनरल वर्ग को  दिया गया और ये चुप रही। कुर्मी समाज से आने वाली केवल कुर्मी वोट से मतलब है इन्हे समाज से नही।चुनार के लिए 10 सालो में कुछ नहीं किया गया।</div>
<div> </div>
<div>मिर्जापुर को मिर्जापुर का लाल चाहिए तभी विकास हो पाएगा। बाहरी क्या समझे मिर्जापुर की जनता की समस्या उनको केवल अपनी जेब भरनी है। सांसद रमेश चंद्र बिंद ने आश्वासन दिया कि हम आपके बेटे है और अपने बेटे को आशीर्वाद दीजिए माई चाचा दादा ताऊ मैं अपने मिर्जापुर की धरती के लिए आपके विकाश के लिए आपके साथ दिन रात खड़ा रहूंगा और आप सभी को आपके हो रहे हनन को संसद में उठाएंगे और आपका हक जरूर दिलवाएंगे। छोटे लाल पटेल,गिरधारी पटेल,अंशु राज पटेल, नील सिंह पटेल,राकेश कुमार बिंद, दिवाकर दुबे, संकठा चौबे, हजारों समर्थक डटे रहे।</div>
<div> </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 17:41:24 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मतदान का दिन, नहीं है अवकाश का दिन, मतदान अवश्य करें :- अश्वनी जैन</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>सिरसागंज:- </strong>विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के अंतर्गत जिला विज्ञान क्लब, फिरोजाबाद के तत्वावधान में सन्त नाथ बाबा इंटर कॉलेज, सेवापुर सिरसागंज में विद्यालय के प्रधानाचार्य राघवेन्द्र सिंह व जिला समन्वयक एवं प्रवक्ता अश्वनी कुमार जैन के संयोजन में मतदान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मतदान का संदेश प्रदान करते हुए जिला समन्वयक अश्वनी कुमार जैन ने ग्रामीणों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को मतदान की शपथ  ग्रहण कराई कि हम भारत के नागरिक, लोकतंत्र में अपनी पूर्ण आस्था रखते हुए यह शपथ लेते हैं कि हम अपने देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं की मर्यादा को बनाए रखेंगे तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140805/voting-day-is-not-a-holiday-do-vote-ashwani"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/2.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>सिरसागंज:- </strong>विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के अंतर्गत जिला विज्ञान क्लब, फिरोजाबाद के तत्वावधान में सन्त नाथ बाबा इंटर कॉलेज, सेवापुर सिरसागंज में विद्यालय के प्रधानाचार्य राघवेन्द्र सिंह व जिला समन्वयक एवं प्रवक्ता अश्वनी कुमार जैन के संयोजन में मतदान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मतदान का संदेश प्रदान करते हुए जिला समन्वयक अश्वनी कुमार जैन ने ग्रामीणों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को मतदान की शपथ  ग्रहण कराई कि हम भारत के नागरिक, लोकतंत्र में अपनी पूर्ण आस्था रखते हुए यह शपथ लेते हैं कि हम अपने देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं की मर्यादा को बनाए रखेंगे तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण निर्वाचन की गरिमा को अक्षुण्ण रखते हुए, निर्भीक होकर, धर्म, वर्ग, जाति, समुदाय, भाषा अथवा अन्य किसी भी प्रलोभन से प्रभावित हुए बिना सभी निर्वाचनों में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने सभी को जागरूक करते हुए बताया कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व मतदान एवं लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति मत है। यह लोकतंत्र का पर्व, देश का पर्व है, मतदान अवश्य करें। प्रत्येक मत महत्वपूर्ण है, इसलिए कोई भी मत छूटना नहीं चाहिए। सभी मतदाताओं के लिए नारा प्रदान करते हुए कि मतदान का दिन, नहीं है अवकाश का दिन, मतदान अवश्य करें। विद्यालय के प्रधानाचार्य राघवेन्द्र सिंह ने सभी विद्यार्थियों को अपने जनपद फिरोजाबाद में 07 मई 2024 को होने वाले लोकसभा निर्वाचन में मत डालने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता पिता, रिश्तेदारों, ग्रामवासी, नगरवासियों को मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया। शपथ में विद्यार्थियों के साथ श्री एम डी जैन इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य हेमचन्द्र जैन, सुरेन्द्र गुप्ता, दिव्यांशी यादव, मोनल यादव, जब्बार खान, आरिफ खान, अहिबरन सिंह एवं समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।</div>
</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 May 2024 17:56:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अब दल-बदल ही हमारा राजधर्म</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इस युग में यानि कलियुग में आप कह सकते हैं कि मोदी युग में जितने भी राजधर्म होंगे उनमने दल-बदल सबसे बड़ा राजधर्म माना जाएगा। ये भविष्यवाणी करना शायद भगवान भूल गए थे।  गलती इंसान से ही नहीं भगवान से भी होती है। दल-बदल को लोकतंत्र का सबसे बड़ा अपराध मानकर कांग्रेस की तत्कालीन सरकार के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दल-बदल के खिलाफ क़ानून की नींव रखी। और संयोग देखिये कि  आज यही दल-बदल कांग्रेस के लिए अभिशाप और भाजपा के लिए वरदान बन गया है। भविष्य में मुमकिन है कि  यदि भाजपा सत्ता में आयी तो इस वरदान को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140696/now-defection-is-our-state-religion"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-04/17_08_2019-dalbadlu_neta_19493855.jpg" alt=""></a><br /><p>इस युग में यानि कलियुग में आप कह सकते हैं कि मोदी युग में जितने भी राजधर्म होंगे उनमने दल-बदल सबसे बड़ा राजधर्म माना जाएगा। ये भविष्यवाणी करना शायद भगवान भूल गए थे।  गलती इंसान से ही नहीं भगवान से भी होती है। दल-बदल को लोकतंत्र का सबसे बड़ा अपराध मानकर कांग्रेस की तत्कालीन सरकार के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दल-बदल के खिलाफ क़ानून की नींव रखी। और संयोग देखिये कि  आज यही दल-बदल कांग्रेस के लिए अभिशाप और भाजपा के लिए वरदान बन गया है। भविष्य में मुमकिन है कि  यदि भाजपा सत्ता में आयी तो इस वरदान को स्थाई बनाने के लिए कोई नया क़ानून ले आये। क्योंकि दल-बदल राष्ट्रहित में किया जाने वाला सबसे बड़ा सद्कर्म है।</p>
<p>आपकी आप जानें किन्तु मुझे शुरू से दल-बदलू पसंद नहीं हैं।  मै दल -बदल को प्रश्रय देने वालों के भी खिलाफ हू।  दल-बदल चाहे कोई भी दल करे या कराये मुझे देशद्रोही लगते है।  लेकिन मेरे लगने या न लगने से क्या होता है ? मै यानि आम जनता दल-बदल को मूकदर्शकों की तरह टुकुर-टुकुर देखने ,सहने के लिए अभिशप्त है। जब राजनीतक दल ही दल-बदल को सबसे बड़ी योग्यता मानते हों तो बेचारा आम आदमी इसके खिलाफ खड़ा होकर कर भी क्या सकता है। मै आपको दल-बदल के इतिहास में नहीं ले जाऊँगा। गूगल पर विकिपीडिया खंगालने के लिए भी नहीं कहूंगा। क्योंकि इससे दल -बदल की सेहत पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है।</p>
<p>दल -बदल एक अनवरत ,सतत,सनातन कार्य है। त्रेता से होता आ रहा है और कलियुग में तो दल-बदल इतना सुगम हो गया है जितना कि  दिल-बदलना । दल बदलने में दिल बदलने से भी कम समय लगता है।  इंदौर में कांग्रेस के प्रत्याशी किन्हीं बम साहब के दल-बदल ने ये प्रमाणित कर दिया है। लोग मेडिकल टूरिज्म के लिए दुनिया के कौन-कौन से भारत आते है।  मुझे लगता है कि  भविष्य में दुनिया के तमाम राजनीतिक दल अपने यहां दल-बदल करने के लिए गुरुदीक्षा लेने भारत आया करेंगे। भारत किसी  और मामले में विश्व गुरु हो या न हो किन्तु दल-बदल के मामले में तो ब्रम्हांड गुरु बन चुका है।</p>
<p>ये भारत में लोकतंत्र की सेहत के लिए दल-बदल एक अनिवार्य प्रक्रिया है। जो दल जितना जयादा दल-बदल कराएगा उसे उतना मजबूत और लोकतांत्रिक माना जाएगा। एक दल का दुष्ट  -पापी दूसरे दल में आते ही दुष्टता  और अपने पापों से मुक्त हो जाता है। अर्थात दल-बदल पाप मोचन का सबसे सरल,सुगम और सुबोध तरीका है। हमारे यहां बड़े-बड़े सूरमाओं ने राजे-महाराजों ने दल-बदल किये हैं ,बम  टाइप के साधारण लोग उनके सामने कहाँ लगते हैं।  आज मान्यता हो गयी है कि  जिसने अपने राजनीतिक जीवनकाल में दल-बदल नहीं किया उसने समझो की कुछ नहीं किया। दल के प्रति निष्ठावान बने रहने से क्या मिलता है आखिर ? दल-बदल कीजिये तो नगद नारायण के साथ ही टिकिट,मंत्री पद और न जाने क्या-क्या मिलता है।</p>
<p>मै अगर सत्ता में होता या तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रहा होता तो अपने चुनाव  घोषणा पत्र में दल-बदल को राजधर्म की मान्यता दिलाने के लिए दल-बदल क़ानून को ही समाप्त करने का वचन देता ।  वचन देता ही नहीं उसे प्राण-पण से निभाता भी।  आप सोचकर देखिये कि दल-बदल के फायदे कितने हैं और नुक्सान कितने ? गुणा-भाग करने के बाद आप जो हासिल पाएंगे वो लाभ ही निकलेगा ।  हानि नहीं। दल -बदल में सुविधा  ये है कि आप इसे जितनी बार करना चाहें कर सकते हैं। दल-बदल के लिए किसी शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं।  इसके लिए जरूरी है आपका  किसी  एक दल से ऊबना या किसी एक दल से मुक्ति पाना। मै अपने ऐसे कुछ मित्रों  को जानता हूँ जिन्होंने एक से ज्यादा बार दल बदल किया। दल -बदल का आध्यात्मिक पक्ष ये है कि  इसे घाट-घाट का पानी पीना कहते हैं।  </p>
<p>आप याद कीजिये कि ये देश पहली बार दल-बदल से नहीं गुजर रहा। देश में भक्तिकाल भी कोई पहली घटना नहीं है।  लंकापति रावण के भाई बिभीषनं  दल-बदल का आदर्श उदाहरण है।  वे दल-बदल न करते तो मुमकिन है कि कभी भी लंकापति नहीं बन पाते। बिभीषन ने समझदारी से होशियारी से हिकमत अमली से , काम लिया और सद्गति को प्राप्त हुए। आज भी दल-बदल करने वाला सबसे पहले बिभीषन जी का आभार प्रकट करता है। करना भी चाहिए ,क्योंकि यदि बिभीषन ने सत्ता-सुख पाने का ये आसान तरीका ईजाद न किया होता तो अधिकांश दलों में लोग चप्पलें घिसते-घिसते मर जाते लेकिन सत्ता सुख हासिल नहीं कर पाते।शरणागत को ही गति मिलती है।आजकल तो राजनीतिक दलों ने अपने-अपने यहां शरणार्थी शिविर खोल रखे हैं।  </p>
<p>दल -बदल का हासिल ये है कि ये महंगे चुनाव खर्च से मुक्ति दिलाता  है।  अब जैसे इंदौर में ,खजुराहो में या सूरत में कांग्रेस और सपा के प्रत्याशियों ने जिस साधुवाद  से दल बदल किया उसका कितना ज्यादा लाभ इस गरीब देश को हुआ ।  जनता चुनाव प्रचार की कांय-कांय से बची। सड़के बिद्रूप  होने  से बचीं  और केंद्रीय चुनाव आयोग का अमला चुनावी  इंतजाम करने से ,हल्दी लगी और न फिटकरी फिर भी रंग चोखा ही आया। यदि दल-बदल के जरिये देश में पंचाट से संसद स्तर तक के चुनाव कराये जाने की व्यवस्था कर दी जाये तो किसी सरकार को इलेक्टोरल बांड लेकर चुनाव के लिए धन उगाहने की जरूरत ही क्यों पड़े ? क्यों उसे सुप्रीम कोर्ट से खामखां लानत -मलानत का सामना करना पड़े ?</p>
<p>भगवान करे कि भारत जैसे लोकतंत्र में दल-बदलुओं को हमेशा परम  पद की प्राप्ति हो। दलितों,पिछड़ों और अल्पसंख्यकों  कि बजाय दल-बदलुओं कि लिए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की जाये दल -बदलुओं को वे सारी सुविधाएं  और सम्मान मिलना चाहिए जो किसी परमवीर चक्रधारी या भारतरत्न का तमगा गले में लटकाने वाले को हासिल हैं। मै तो कहता हूँ कि तमाम दल-बदलुओं का  मृत्योपरांत अंतिम संस्कार  भी राजकीय सम्मान  कि साथ किया जाना चाहिए पार्टिनिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को आत्मचिंत कर पता  लगना  चाहिए कि उन्हें  उनकी  निष्ठा  कि बदले आखिर मिलता क्या है ? दल -बदलू वो सम्मान पल भर में हासिल कर लेता है जो एक निष्ठावान  कार्यकर्ता या नेता को पूरी  उम्र  किसी दल की सेवा  करने कि बाद भी नहीं मिल  पाता।</p>
<p>आपको बता दूँ   कि दल-बदल करना बेहद   आसान सद्कर्म है ।  बस   अपने गले में पड़ा  पुराना  गमछा  उतार  फेंकिए  और नया गमछा  डाल लीजिये ।  सामने वाले कि समाने कृतज्ञ भाव से झुकिए,गुलदस्ता लीजिये या दीजिये। एक ग्रुप  फोटो  खिंचवाइये  और बस  हो गया  दल बदल। दल-बदल कि साथ  ही आपको अपनी बल्दियत भी बदलना पड़ती है। घर   की बैठक   में लगीं   पुरानी  तस्वीरें  भी बदलना पड़तीं  हैं ।  लेकिन ये मंहगा सौदा  नहीं है। इसके लिए किंचित  बेशर्मी  की चादर  ओढ़ना पड़ती है और आपका चस्मा मय नंबर  और फ्रेम  के बदल जाता है।</p>
<p><strong>@ राकेश अचल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Apr 2024 16:19:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा में नयाब सैनी सरकार, मनोहर खट्टर बाहर अब एमपी का लडेगें चुनाव, या होंगे नड्डा पर सवार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p><strong> </strong>लोकसभा चुनाव से पहले अद्भुत तरीके से हालात बदलते नजर आ रहे हैं। मंगलवार  को अचानक से हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्यपाल को इस्तीफा दे दिया। उधर बीजेपी और जेजेपी में गठबंधन विच्छेद हो गया। वहीं तेजी से बदले घटनाक्रम में मनोहर लाल के स्थान पर दलित चेहरा नयाब सैनी को मुख्यमंत्री पद की शपथ  दिला दी गई है। शाम 5 बजे दलित ओबीसी समाज के नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद की गवर्नर ने शपथ दिलाई।  उनके साथ 5 और मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें मूलचंद शर्मा, रणजीत सिंह चौटाला,जय प्रकाश दलाल,डाॅ.बनवारी लाल ,कुंवरपाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139318/nayab-saini-government-in-haryana-manohar-khattar-will-now-contest"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/screenshot_20240312_165956_dailyhunt.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p><strong> </strong>लोकसभा चुनाव से पहले अद्भुत तरीके से हालात बदलते नजर आ रहे हैं। मंगलवार  को अचानक से हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्यपाल को इस्तीफा दे दिया। उधर बीजेपी और जेजेपी में गठबंधन विच्छेद हो गया। वहीं तेजी से बदले घटनाक्रम में मनोहर लाल के स्थान पर दलित चेहरा नयाब सैनी को मुख्यमंत्री पद की शपथ  दिला दी गई है। शाम 5 बजे दलित ओबीसी समाज के नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद की गवर्नर ने शपथ दिलाई।  उनके साथ 5 और मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें मूलचंद शर्मा, रणजीत सिंह चौटाला,जय प्रकाश दलाल,डाॅ.बनवारी लाल ,कुंवरपाल  है।</p>
<p>जातिगत समीकरण के तहत  एक स्वर्ण,  एक दलित, 3 जाट, और एक गुर्जर समाज से हैं। सभी बनाए  गए मंत्री खट्टर मंत्री मंडल में भी शामिल रहे हैं।पीछे की वजह में  दरअसल जेजेपी ने लोकसभा के लिए ज्यादा सीटों की मांग की थी। इसपर बीजेपी तैयार नहीं थी। इसी बंटवारे पर असहमति के चलते जेजेपी और बीजेपी के अलग-अलग रास्ते हो गए।  सूत्रों की जानकारी के मुताबिक पूर्व  सीएम मनोहर लाल खट्टर को करनाल से लोकसभा के लिए लडाया जा सकता है। या बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को हटाकर मनोहर लाल खट्टर को भाजपा अध्यक्ष पद की कमान सौपी जा सकती  हैं।</p>
<p>बता दें कि सोमवार को द्वारका एक्सप्रेसवे के उद्घाटन अवसर में मौजूद मनोहर लाल खट्टर की पीएम नरेंद्र मोदी ने खासी बढाई की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि मनोहर लाल और  हम दोनों बाइक पर हरियाणा मिशन के लिए घूमते रहते थे। हमने हरियाणा और पार्टी के लिए साथ-साथ बहुत काम किया है। और अगले ही दिन हरियाणा में सीएम खट्टर ने इस्तीफा दे दिया। इधर बीजेपी से अलग हुए जेजेपी के 10  में से आधे विधायक बीजेपी के साथ पिंगे बढाने के लिए फिर बेताब हैं।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि वर्तमान में बीजेपी की कुल सीट 41 निर्दलीय + 6+ एच एलपी1=48 वहीं कुल विधानसभा सीट हैं=90 बहुमत के लिए  चाहिए:46 इस हिसाब से बीजेपी बहुमत में  है। मंगलवार शाम 5 बजे बीजेपी हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष नायब सैनी को हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की बागडोर थमा दी है। संजय भाटिया को हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Mar 2024 16:47:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपीए की सरकार बनी तो प्रत्येक चौराहे पर लगेगी महाराजा सुहेलदेव राजभर जी की मूर्ति : महेन्द्र राजभर</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>रतनपुरा,मऊ।</strong> श्रावस्ती नरेश चक्रवर्ती सम्राट राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव जी के आदर्शों एवं पदचिन्हों पर चलकर ही देश एवं समाज का सर्वांगीण विकास संभव है। महाराजा सुहेलदेव जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व युगों युगों तक हम सभी के लिए प्रेरणा का कार्य करेंगे। उक्त बातें सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र राजभर ने मऊ जनपद के सदर विधानसभा के रतनपुरा में आयोजित महाराजा सुहेलदेव राजभर जयंती समारोह के अवसर पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।</div>
<div>  </div>
<div>श्री राजभर ने कहा कि हम सभी के आराध्य महाराजा सुहेलदेव राजभर जी ने देश एवं समाज की रक्षा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139306/draft-add-your-titleif-upa-government-is-formed-statue-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/img_20240312_152521.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>रतनपुरा,मऊ।</strong> श्रावस्ती नरेश चक्रवर्ती सम्राट राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव जी के आदर्शों एवं पदचिन्हों पर चलकर ही देश एवं समाज का सर्वांगीण विकास संभव है। महाराजा सुहेलदेव जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व युगों युगों तक हम सभी के लिए प्रेरणा का कार्य करेंगे। उक्त बातें सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र राजभर ने मऊ जनपद के सदर विधानसभा के रतनपुरा में आयोजित महाराजा सुहेलदेव राजभर जयंती समारोह के अवसर पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।</div>
<div> </div>
<div>श्री राजभर ने कहा कि हम सभी के आराध्य महाराजा सुहेलदेव राजभर जी ने देश एवं समाज की रक्षा के लिए ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी और विदेशी आक्रांताओं को भगाकर देश की रक्षा किया। उन्होंने कहा कि सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी महाराजा सुहेलदेव जी के पद चोन पर चलने का भरपूर प्रयास करेगी। कहा कि एक-एक कार्यकर्ता पार्टी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है और प्रत्येक निष्ठावान कार्यकर्ता का पार्टी में सम्मान है। हम सभी मिलकर प्रत्येक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता के स्वाभिमान की रक्षा हर हाल में करेंगे।</div>
<div> </div>
<div>     उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी की रीढ उसका मजबूत संगठन और उसके कार्यकर्ता होते हैं। इसलिए सभी लोग पूरी क्षमता से लगकर संगठन के विस्तार के लिए गांव-गांव घर-घर जाएं और सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी के नीतियों और सिद्धांतों से आम जनमानस को अवगत करायें तथा उन्हें पार्टी से जोड़ें। उन्होंने कहा कि यदि यूपीए की सरकार बनती है तो प्रत्येक चौराहे पर चक्रवर्ती सम्राट महाराजा सुहेलदेव राजभर जी की आदम का डी मूर्ति लगाई जाएगी साथ ही पाठ्यक्रम में महाराजा सुहेलदेव जी के कृतित्व को शामिल किया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>श्री राजभर ने कहा कि वर्तमान परिवेश में राजनीतिक अस्थिरता से समाज का हर व्यक्ति चिन्तित है। सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी का हर नेता एवं कार्यकर्ता राजनीतिक स्थायित्व का हिमायती है और साफ सुथरा राजनीति करने में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा कि सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी के कार्यकर्ता विरोधियों के मंसूबों को किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा की सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी की मित्रता समाजवादी पार्टी से हुई है और यह एक स्थाई मित्रता है।इस लोकसभा चुनाव में हम समाजवादी पार्टी से मिलकर चुनाव लड़ेंगे।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी पूरी क्षमता से बूथ स्तर तक के संगठन को खड़ा करने में लग जाए और साथ ही साथ गांव में चौपाल लगाने का भी कार्यक्रम जारी रखें। यदि हम सभी बिना दिग्भ्रमित हुए कार्य करते गए तो आने वाले दिनों में हमें सत्ता तक पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष अरविंद राजभर, लालजी राजभर, गुड्डू तिवारी, मनोज राजभर, रामनिवास राजभर, डॉ चिंतामणि राजभर, दुर्गेश राजभर, निसार अहमद सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे अध्यक्षता प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रशेखर राजभर एवं संचालन ग्राम प्रधान रामप्रवेश राजभर ने किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Mar 2024 15:54:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेठी सांसद स्मृति इरानी के नेतृत्व में अमेठी का हो रहा सर्वांगीण विकास -  जितेंद्र सिंह </title>
                                    <description><![CDATA[ केंद्रीय मंत्री ने विधानसभा संचालन समिति, कोर कमेटी एवं प्रबुद्ध जनों की बैठक को किया संबोधित ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139115/all-round-development-of-amethi-is-taking-place-under-the-leadership"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div>राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरी, जिला अध्यक्ष राम प्रसाद मिश्रा सहित हजारों कार्यकर्ता रहे मौजूद </div>
<div> </div>
<div><strong>गौरीगंज अमेठी। </strong>आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर विधानसभा संचालन समिति, कोर कमेटी एवं प्रबुद्ध जनों की बैठक आयोजित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष राम प्रसाद मिश्र ने की तथा कार्यक्रम का संचालन लोकसभा संयोजक दयाशंकर यादव ने किया, कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार अमेठी में भारतीय जनता पार्टी की पुनः  ऐतिहासिक विजय होगी। आप सभी कार्यकर्ताओं के बल पर भारतीय जनता पार्टी आज देश ही नहीं अपितु विश्व की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी बन गई है कार्यकर्ता संगठन की रीड की हड्डी है।</div>
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<div>उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार द्वारा कराए जा रहे अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने करोड़ों परिवारों को शौचालय मुहैया करा कर बहन बेटियों की आबरू को सुरक्षित किया, तथा स्वच्छता अपनाते हुए अनेक बीमारियों को भगाने का कार्य किया। महिलाओं को उज्जवला गैस प्रधान कर धुएं से छुटकारा दिलाने का कार्य किया, उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में आज भारत विश्व गुरु के पथ पर अग्रसर है।</div>
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<div>देश ही नहीं दुनिया में भारत का डंका बज रहा है, देश का सर्वांगीण विकास हो रहा है ऐसे में अमेठी की लोकप्रिय सांसद दीदी स्मृति जुबिन इरानी को पिछली बार की अपेक्षा कई गुना अधिक मतों से विजई बनाने के लिए आप सभी कार्यकर्ता कमर कस लें और जनता के बीच में जाते हुए जनता को सरकार की योजनाओं से अवगत कराएं उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों परिवार को प्रतिमाह मुफ्त अनाज मिल रहा है, अयोध्या में हम सभी के आराध्य सनातन धर्म के गौरव भगवान श्री राम का भव्य मंदिर बन चुका है, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की स्थापना हो चुकी है, जम्मू कश्मीर से धारा 370 समाप्त कर मोदी सरकार ने एक भारत अखंड भारत का संदेश दिया है।</div>
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<div>आज कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा लहरा रहा है नौजवानों को रोजगार देने का काम भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने किया है, महिलाओं को स्वालंबी बनाते हुए महिला सशक्तिकरण का कार्य भारतीय जनता पार्टी कर रही है युवाओं के लिए रोजगार के अनेक अवसर मोदी सरकार उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बाबा का बुलडोजर गरज रहा है अपराधी उत्तर प्रदेश की सीमा छोड़कर चले गए हैं उत्तर प्रदेश में राम राज्य स्थापित हो चुका है। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने परिवारवाद, जातिवाद और वंशवाद को नकार दिया है। जो कार्य राहुल गांधी ने 15 साल सांसद रहते हुए अमेठी में नहीं किया, उससे अधिक कार्य 5 साल में अमेठी सांसद एवं केंद्रीय मंत्री दीदी स्मृति जुबिन इरानी ने अमेठी में किया है।</div>
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<div>आज अमेठी नाम दारो के लिए नहीं बल्कि कामदारों के लिए जानी जाती है, आज अमेठी अपने विकास के लिए और स्मृति इरानी के लिए दुनिया में जानी जाती है। उन्होंने अमेठी, गौरीगंज, जगदीशपुर, तिलोई और सलोन सभी विधानसभाओं के संचालन समिति के सदस्यों तथा विधानसभाओं की कोर कमेटी के सदस्यों तथा क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार भारतीय जनता पार्टी 400 प्लस के साथ सरकार बनाएगी।</div>
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<div>ऐसे में सभी कार्यकर्ता अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए लोकसभा चुनाव के कार्य में लग जाए, इस दौरान प्रमुख रूप से जिला अध्यक्ष राम प्रसाद मिश्रा, लोकसभा संयोजक दया शंकर यादव, तिलोई विधायक राजा मयंकेश्वर शरण सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि, सुल्तानपुर लोकसभा के संयोजक दुर्गेश त्रिपाठी, पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी,जिला प्रवक्ता चंद्रमौली सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ ओंकार नाथ सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता पंडित राम उंजेरे शुक्ला, मिडिया विभाग जिला सहसंयोजक सुशील कुमार मिश्रा सहित हजारों की संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Mar 2024 16:54:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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                <title>' मरी हुई आत्माओं ' की ' अंतर आवाज '</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div>आत्मा अजर-अमर है। आत्मा निकाया है, लेकिन उसकी आवाज होती है। ये आवाज़ जीवित आत्माओं की मुखर होती है।इसे या तो ओझा सुन पाते हैं या नेता।आवाज सुनकर जो फैसले होते हैं, उन्हें ' क्रास बीड '  फैसला कहते हैं।इन फैसलों से जो भी होता है उसे वर्णसंकर कहा जाता रहा है।</div>
<div>  </div>
<div>राजनीति में सबसे पहले अंतरात्मा की आवाज कांग्रेस ने सुनी थी। वैसे कांग्रेस को पता था कि राजनीति में अधिकांश लोग अपनी आत्मा को मारकर आते हैं।जो जीवित आत्मा के साथ राजनीति के आंगन में कदम रखते हैं,उनकी आत्मा को सप्रयास मार दिया जाता है। राजनीति</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138983/inner-voice-of-dead-souls"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/65de10a9c63cd-rajya-sabha-274112342-16x9.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div>आत्मा अजर-अमर है। आत्मा निकाया है, लेकिन उसकी आवाज होती है। ये आवाज़ जीवित आत्माओं की मुखर होती है।इसे या तो ओझा सुन पाते हैं या नेता।आवाज सुनकर जो फैसले होते हैं, उन्हें ' क्रास बीड '  फैसला कहते हैं।इन फैसलों से जो भी होता है उसे वर्णसंकर कहा जाता रहा है।</div>
<div> </div>
<div>राजनीति में सबसे पहले अंतरात्मा की आवाज कांग्रेस ने सुनी थी। वैसे कांग्रेस को पता था कि राजनीति में अधिकांश लोग अपनी आत्मा को मारकर आते हैं।जो जीवित आत्मा के साथ राजनीति के आंगन में कदम रखते हैं,उनकी आत्मा को सप्रयास मार दिया जाता है। राजनीति में आत्मा की आवाज प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। अंततोगत्वा नेता को अपनी अंतरात्मा मारना पड़ती है।जो ऐसा नहीं कर पाते वे आत्मा और शरीर दोनों से हाथ धो बैठते हैं।</div>
<div> </div>
<div>आजादी से पहले नेता आत्मा के साथ राजनीति में आता था, इसीलिए उससे अंग्रेज हार गए। आत्मा से काम करने वालों को आज 75 साल बाद बेईमान, वंशवादी और राष्ट्रद्रोही कहा जाता है। राजनीति में आत्माएं तो पहले आम थी,उस जमाने में महात्मा भी होती थीं। गुजरात को मोहनदास करमचंद गांधी के पास महात्मा थी, हालांकि संघी ऐसा नहीं मानते।वे गोड़से को महात्मा कहते हैं। यानि महात्मा को भी भारतरत्न की तरह विवादास्पद बनाने की कोशिश जारी है।</div>
<div> </div>
<div>बात अंतरात्मा की आवाज की हो रही है। सबसे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अंतरात्मा की आवाज को पहचाना।आवाज दी। उसे जगाया।कमाल देखिए कि उस समय के नेताओं की अंतरात्मा जागी। नेताओं ने अपनी अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और इंदिरा गांधी की पसंद के प्रत्याशी को राष्ट्रपति चुन लिया था। अंतरात्मा की चौतरफा जय जय हुई। </div>
<div> </div>
<div>राजनीति में अंतरात्मा के साथ ही मृतात्मा जैसा ही व्यवहार किया जाता है। उन्हें भारतरत्न से अलंकृत किया जाता है।खास चुनाव के समय आत्माओं को सम्मानित करने का बड़ा फल मिलता है। अंतरात्मा पार्टी का व्हिप,सिप नहीं मानती।जो उसका आव्हान करता है, उसे आशीर्वाद दे देती है। दरअसल अंतरात्मा राजनीति से ऊपर उठकर फैसला करती है। लेकिन फैसला करने से पहले चढ़ौती देखती है।</div>
<div> </div>
<div>अंतरात्मा को जागृत करना,मुद्दई को उसकी आवाज सुनवाना बड़ा तकनीकी काम है। पहले इस विधा में कांग्रेसी दक्ष थे।अब ये दक्षता भाजपाई सीख गये हैं।वे हिमाचल हो या बिहार, किसी भी राज्य में किसी भी दल के विधायक, सांसद की मरी हुई आत्मा को जगाने की सुपारी ले लेते हैं।</div>
<div> </div>
<div>जिन नेताओं की आत्मा जीवित होती है, उन्हें चिन्हित कर उनकी आत्मा को मार देते है।मरी हुई आत्मा की आवाज सुनना किसी जीवित नेता की आत्मा की आवाज से ज्यादा मुखर होती है। निडर होती है।साफ सुनाई देती है।</div>
<div>अंतरात्मा को बुलवाने से पहले उसे जागृत करना पड़ता है। आत्मा काले तिल, काले वस्त्र, काले धन और पतंजलि के शुद्ध घानी के सरसों के तेल से खुश होती है।आप जितना काला धन अर्पण करेंगे, सोयी हुई,अंतरात्मा उतनी जल्दी जागेगी,बोलेगी। इतना तेज बोलेगी कि बहरा भी सुन ले।कान वाले तो सुन ही सकते हैं। इसमें किसी पंडित, पुजारी की जरूरत नहीं होती।छठे कान तक इसकी आवाज जाती ही नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>आत्माएं न मरें तो जनादेश का अपहरण असंभव है। भारत में जहां जहां बिना चुनाव के जनादेश बदला गया वहां पहले आत्माओं को मारा जाता है। आत्मा का कत्ल ही तो क्रास वोटिंग कहलाती है।क्रास वोटिंग दल बदल की सहोदर है। ये अजर अमर है। लेकिन ये मृत आत्माएं हैं। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।</div>
<div>दुनिया के लोकतांत्रिक देशों में हमारे देश की मरी हुई आत्माओं को लेकर कोई सानी नहीं है। हमें राजनीति में उलट फेर कराने वाली इन मरी हुई आत्माओं पर गर्व है।मरी हुई आत्माएं हमेशा लोकतंत्र के काम आती हैं।हमारा लोकतंत्र मरी हुई आत्माओं का लोकतंत्र है। हमारी लोक सभा, विधानसभाएं मरी हुई अंतरात्माओं से भरी पड़ी हैं।एक खोजिए,दस मिल सकती हैं। </div>
<div> </div>
<div>मेरी जीवित आत्मा मुझे हरदम धिक्कारने की कोशिश करती है। शुभचिंतक कहते हैं कि पंडित जी कुछ दिनों के लिए अपनी आत्मा को मरने के लिए तैयार कर लीजिए मालामाल हो जाएंगे।घर वालों की तमाम शिकायतें दूर हो जाएगी। कोई आपको कंगाल,अलाल होने का ताना नहीं मारेगा। लेकिन मैं हूं कि किसी जीवित आत्मा की सलाह नहीं मानता।</div>
<div><strong>@ राकेश अचल </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Feb 2024 16:08:56 +0530</pubDate>
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