<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/12941/beti-bachao-beti-padhao" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>beti bachao beti padhao - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/12941/rss</link>
                <description>beti bachao beti padhao RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल में मनाया कन्या जन्मोत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong> जनपद में बेटियों के सम्मान एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज गोण्डा के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के प्रसव विंग एवं वार्ड में एक भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  ग्राम बेसिया चैन निवासी श्रीमती पूनम देवी, पत्नी श्री दिनेश कुमार, के प्रसव के शुभ अवसर पर जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन स्वयं अस्पताल पहुंचीं और परिवारजनों के साथ मिलकर केक काटकर कन्या जन्मोत्सव मनाया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने नवजात कन्या के जन्म पर परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि बेटियां परिवार, समाज और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183206/district-magistrate-celebrated-girls-birth-anniversary-in-medical-college-district"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1007877399.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong> जनपद में बेटियों के सम्मान एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज गोण्डा के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के प्रसव विंग एवं वार्ड में एक भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  ग्राम बेसिया चैन निवासी श्रीमती पूनम देवी, पत्नी श्री दिनेश कुमार, के प्रसव के शुभ अवसर पर जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन स्वयं अस्पताल पहुंचीं और परिवारजनों के साथ मिलकर केक काटकर कन्या जन्मोत्सव मनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने नवजात कन्या के जन्म पर परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि बेटियां परिवार, समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों को समान अवसर, बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने परिवारजनों से नवजात बच्ची के बेहतर पालन-पोषण एवं शिक्षा के लिए संकल्पित रहने का आह्वान किया।कार्यक्रम के दौरान परिवारजनों के आग्रह पर जिलाधिकारी ने नवजात कन्या का नाम 'अनुग्रहिता' रखा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह नाम सुनकर परिवारजनों ने प्रसन्नता व्यक्त की और जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने नवजात शिशु के लिए शुभकामना स्वरूप चांदी की कटोरी एवं चम्मच भेंट की। साथ ही बच्ची की माता श्रीमती पूनम देवी को सहायता राशि भी प्रदान की, जिससे परिवार के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता एवं सहयोग की भावना का परिचय मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कन्या जन्मोत्सव के दौरान अस्पताल परिसर में उत्साह एवं हर्ष का वातावरण रहा। उपस्थित चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों तथा अधिकारियों ने भी परिवार को शुभकामनाएं दीं और नवजात के स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' तथा कन्या सम्मान की भावना को और अधिक सशक्त बनाने का संदेश दिया।सभी ने नवजात कन्या के जन्म पर परिवार को बधाई देते हुए बेटियों के सम्मान और उनके सर्वांगीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह आयोजन समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने तथा कन्या जन्म को उत्सव के रूप में मनाने की प्रेरणा देने वाला रहा। इस अवसर पर प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, सीएमएस जिला अस्पताल डॉ. अनिल तिवारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी गौरव मिश्र सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183206/district-magistrate-celebrated-girls-birth-anniversary-in-medical-college-district</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/183206/district-magistrate-celebrated-girls-birth-anniversary-in-medical-college-district</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:19:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/1007877399.jpg"                         length="108727"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री ने 384 करोड़ रुपए से अधिक 111 परियोजनाओं का लोकार्पण शिलान्यास की दी सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विधानसभा सदर तथा विधानसभा विश्वनाथगंज अन्तर्गत 384.71 करोड़ की 111 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास बटन दबाकर किया, जिनमें प्रतापगढ़ सदर की 42 व विश्वनाथगंज की 13 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं प्रतापगढ़ सदर की 45 एवं विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्र की 11 परियोजनाओं का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि जनपद प्रतापगढ़ आंवला उत्पादन का विशिष्ट क्षेत्र होने के कारण आंवला नगरी के नाम से जाना जाता है।प्रतापगढ़ की इस पुण्य भूमि को जगतगुरू धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज एवं जगतगुरू कृपालु जी महाराज जैसे महान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182870/chief-minister-inaugurated-and-laid-the-foundation-stone-of-111"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260707-wa0055.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विधानसभा सदर तथा विधानसभा विश्वनाथगंज अन्तर्गत 384.71 करोड़ की 111 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास बटन दबाकर किया, जिनमें प्रतापगढ़ सदर की 42 व विश्वनाथगंज की 13 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं प्रतापगढ़ सदर की 45 एवं विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्र की 11 परियोजनाओं का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि जनपद प्रतापगढ़ आंवला उत्पादन का विशिष्ट क्षेत्र होने के कारण आंवला नगरी के नाम से जाना जाता है।प्रतापगढ़ की इस पुण्य भूमि को जगतगुरू धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज एवं जगतगुरू कृपालु जी महाराज जैसे महान संतो की पुण्य भूमि का गौरव प्राप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img-20260707-wa0055.jpg" alt="मुख्यमंत्री ने 384 करोड़ रुपए से अधिक 111 परियोजनाओं का लोकार्पण शिलान्यास की दी सौगात" width="497" height="331"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि जनपद प्रतापगढ़ पौराणिक काल से लेकर आधुनिक काल तक अपनी आध्यात्मिक संस्कृति के लिये जाना जाता है। माँ बेल्हा देवी धाम, माँ चन्द्रिका देवी धाम, भयहरणनाथधाम, घुसमेश्वरनाथ धाम का आर्शीवाद इस जिले के निवासियों को प्राप्त है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में यहां के बाबू गुलाब सिंह ने शंखनाद किया था। भारत के संविधान सभा के सदस्य के रूप में पंडित मुनीश्वरदत्त उपाध्याय, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल तथा प्रसिद्ध साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन की जन्म भूमि का गौरव इस जिले को प्राप्त है। जनप्रतिनिधियों के समर्पण और सेवा भावना से क्षेत्र का विकास होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि प्रतापगढ़ में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय सोनेलाल पटेल के नाम से स्थापित हुआ जिसमें नर्सिंग कालेज की स्थापना की गयी है जिसमें जनपद के युवा  युवतियों को सुनहरा अवसरा मिला है।उन्होने कहा कि प्रतापगढ़ प्रगति की ओर अग्रसर होगा तो प्रदेश भी प्रगति की ओर अग्रसर होगा। उन्होने कहा कि चाहे लोक सेवा आयोग हो अथवा अधीनस्थ चयन सेवा आयोग, शिक्षा आयोग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतापगढ़ के युवक एवं युवतियों का नाम देखकर मुझे बड़ी प्रसन्नता होती है कि प्रतापगढ़ का युवा वर्ग सभी क्षेत्रों में नाम रोशन कर रहा है। उन्होने कहा कि 15 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन प्रदान किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश में 10 करोड़ लोगो को आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत लाभ दिया जा रहा है। उन्होने कहा कि प्रदेश में 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों को 5 लाख रूपये तक की निःशुल्क चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध करायी जा रही है। उज्ज्वला योजना अन्तर्गत फ्री गैस सिलेण्डर एवं 65 लाख परिवारो को आवास की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। उन्होने कहा कि पिछली सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया दिया था, हमारी सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कालेज एवं वन प्रोडक्ट दिया है।आज की अयोध्या प्रभु श्रीराम के समय का स्मरण कराती है। आज अयोध्या में चतुर्दिक रोड की कनेक्टिविटी है। महर्षि बाल्मीकि के नाम से इण्टरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अन्तर्गत बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित बी0पी0एस0सी0 परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली श्रद्धा पाण्डेय को आई पैड, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) के लाभार्थी शिवम् यादव व मीनू कुमारी को स्वीकृति पत्र, मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभार्थी हेमलता सरोज व रीना देवी को स्वीकृति पत्र, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत आर0एफ0/सी0आई0एफ व कैडर मानदेय से सम्बन्धित पूजा मिश्रा व रुक्मणी सिंह को रूपये 25.63 करोड़ का डेमो चेक एवं अन्य कई लाभार्थियों को लाभान्वित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में जनपद के प्रभारी मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य, विधायक सदर राजेन्द्र कुमार मौर्य, विधायक विश्वनाथगंज जीत लाल पटेल, शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद बेल्हा प्रेमलता सिंह, पूर्व मंत्री राजेन्द्र प्रताप सिंह ‘मोती सिंह’, पूर्व सांसद विनोद सोनकर, पूर्व मंत्री शिवकान्त ओझा, भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव, पूर्व विधायक अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा, प्रदेश प्रवक्ता भाजपा दिनेश प्रताप सिंह, अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक राजीव प्रताप सिंह ‘नन्दन’, भाजपा नेता राजा अनिल प्रताप सिंह, अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज जोन ज्योति नारायण, मण्डलायुक्त प्रयागराज सौम्या अग्रवाल, पुलिस महानिरीक्षक प्रयागराज परिक्षेत्र अजय कुमार मिश्रा, जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर, मुख्य विकास अधिकारी डा0 राममोहन मीना, अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) आदित्य प्रजापति सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, पार्टी पदाधिकारी, जनपद स्तरीय अधिकारीगण, मीडिया बन्धु, लाभार्थी व आम जनमानस उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182870/chief-minister-inaugurated-and-laid-the-foundation-stone-of-111</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182870/chief-minister-inaugurated-and-laid-the-foundation-stone-of-111</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:52:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img-20260707-wa0055.jpg"                         length="228599"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमाणु शक्ति संपन्न भारत में कब होगी बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181062/when-will-girls-education-be-100-in-nuclear-power-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/4.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज में ऐसे कर्मचारियों का वर्ग तैयार करना था जो अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक कार्यों को संचालित कर सके। आधुनिक विज्ञान और अंग्रेजी भाषा के प्रसार में इस शिक्षा प्रणाली का योगदान रहा, किंतु इसने भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा और कौशल आधारित शिक्षण को काफी हद तक हाशिए पर पहुंचा दिया। उस समय महिलाओं की शिक्षा लगभग नगण्य थी। समाज में बाल विवाह, पर्दा प्रथा और लैंगिक असमानता जैसी कुरीतियां लड़कियों की शिक्षा में बड़ी बाधा थीं।<br />समाज सुधारकों का योगदान</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">+<br />ऐसे कठिन समय में सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले ने बालिका शिक्षा की अलख जगाई। 1848 में उन्होंने लड़कियों के लिए पहला आधुनिक विद्यालय प्रारंभ किया।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने महिला शिक्षा और सामाजिक सुधारों को नई दिशा दी। बाद में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना।<br />डॉ. अंबेडकर का प्रसिद्ध संदेश</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।"<br />स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की साक्षरता दर लगभग 18 प्रतिशत थी। महिलाओं की साक्षरता तो 10 प्रतिशत से भी कम थी। संविधान निर्माताओं ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />समय-समय पर कोठारी आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986, सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा नई शिक्षा नीति 2020 जैसे प्रयास किए गए। इन प्रयासों से शिक्षा का दायरा बढ़ा और लड़कियों की विद्यालयों तक पहुंच बेहतर हुई।.आज भारत की साक्षरता दर 77 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि महिला साक्षरता दर 70 प्रतिशत से अधिक है। यह प्रगति उत्साहजनक है, किंतु अभी भी पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता में अंतर बना हुआ है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व के सर्वाधिक शिक्षित देशों से सीख<br />विश्व में फिनलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान और नॉर्वे जैसे देशों की शिक्षा व्यवस्था विश्व में आदर्श मानी जाती है। फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />फिनलैंड में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन कौशल विकसित करना है। वहां बच्चों पर अनावश्यक परीक्षा का दबाव नहीं होता। शिक्षकों को अत्यंत सम्मान और स्वायत्तता प्राप्त है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> बालिका और बालक के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। सिंगापुर ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा साधन बनाया। वहां विज्ञान, गणित, तकनीक और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता है। शिक्षा को उद्योगों और रोजगार से जोड़ा गया है।<br />जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अनुशासन, नैतिकता, समयबद्धता और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। परिणामस्वरूप ये देश सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आर्थिक महाशक्ति बन गए।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत में प्रतिभा की कोई कमी कभी भी नहीं रही है, किंतु शिक्षा व्यवस्था अभी भी परीक्षा-केंद्रित बनी हुई है। रटंत प्रणाली, विद्यालयों की असमान गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव आज भी चुनौतियां हैं।नई शिक्षा नीति 2020 ने इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षण और बहुविषयक अध्ययन पर बल दिया गया है। किंतु इसके वास्तविक लाभ तभी मिलेंगे जब इसका प्रभावी क्रियान्वयन हो। बालिका शिक्षा का सत प्रतिशत होना इसलिए भी आवश्यक है कि शिक्षित बेटी, समृद्ध परिवार</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />एक शिक्षित महिला अपने परिवार को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कार प्रदान करती है। वह अगली पीढ़ी की प्रथम शिक्षिका होती है।सामाजिक कुरीतियों का अंत भी।बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं को समाप्त करने में शिक्षा सबसे प्रभावी साधन है</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व बैंक सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा में निवेश किसी भी देश के आर्थिक विकास को तीव्र गति देता है। यदि भारत की प्रत्येक बेटी शिक्षित होगी तो देश की उत्पादकता और आर्थिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य, पोषण और परिवार नियोजन के प्रति अधिक जागरूक होती हैं। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।<br />आज महिलाएं विज्ञान, अंतरिक्ष, प्रशासन, राजनीति, सेना और उद्यमिता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। शिक्षा उन्हें नेतृत्व और नवाचार की शक्ति प्रदान करती है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />महापुरुषों की दृष्टि में नारी शिक्षा<br />स्वामी विवेकानंद ने कहा</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"राष्ट्र की प्रगति का सबसे अच्छा मापदंड वहां की महिलाओं की स्थिति है।"डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का मत था कि<br />"महिलाओं का सशक्तिकरण और शिक्षा किसी राष्ट्र के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है।"पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था<br />"एक महिला को शिक्षित करना एक पीढ़ी को शिक्षित करना है।"</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />इक्कीसवीं सदी ज्ञान, विज्ञान और नवाचार की सदी है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की प्रत्येक बेटी शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगी। शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक चेतना, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय विकास का आधार है। मैकाले की शिक्षा प्रणाली से लेकर नई शिक्षा नीति तक भारत ने लंबी यात्रा तय की है, किंतु अभी मंजिल दूर है। यदि सरकार, समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर बालिका शिक्षा को शत-प्रतिशत अनिवार्य बनाने का संकल्प लें, तो भारत न केवल विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति बनेगा, बल्कि सबसे विकसित और ज्ञानवान राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ा होगा।<br />क्योंकि किसी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों में नहीं, बल्कि उसकी शिक्षित बेटियों की आंखों में स्वप्न बनकर पलता है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक, स्तंभकार, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,<div>कविता,</div><div>संजीव-नी।<br />शिक्षा का कवच।<br /><br />शिक्षा का कवच।<br />कुछ देना ही तो आइये,<br />नन्हीं बालिकाओं को<br />स्वर्ण के गहने नहीं,<br />शिक्षा का कवच दें।<br />उनकी हथेलियों में<br />रोटी के साथ-साथ<br />कुछ अक्षर भी रख दें,<br />जो भूख से जुझतीं<br />उन्हें ज्ञान की कुंजी दें<br />अँधेरे बंद कमरों में<br />रोशन-दान बनती,<br />ज्ञान की रोशनी के लिए<br />बंद रास्तों पर<br />एक नया आकाश फैला देती,<br />उनकी आँखों में<br />सिर्फ़ स्वप्न ना रखें ,<br />उन तक पहुँचने के पंख भी दें।<br />उन्हें ज्ञान दें कि<br />अपने हिस्से की धूप<br />खुद चुन सकें।<br />किताबें जब उनके हांथों में होंगी,<br />तो सदियों के कई बोझ<br />आप उतर जाएँगे।<br />कलम उँगलियों से चलेंगीं<br />तक़दीर की कविता भी<br />लिखी जाएगी।<br />शिक्षित बालिका<br />अपना जीवन ही नहीं संवारती,<br />आने वाली पीढ़ियों के लिए<br />उजला दीप बन जाती।<br />आइये,<br />बेटी को शिक्षा का रक्षा-कवच दें,<br />ताकि वह<br />अपने सपनों, अपने अधिकारों<br />अपने अस्तित्व की रक्षा<br />स्वयं कर सके।<br /><br />संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181062/when-will-girls-education-be-100-in-nuclear-power-india</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181062/when-will-girls-education-be-100-in-nuclear-power-india</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:57:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/4.jpg"                         length="239353"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब यह तस्वीर बदलनी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नसमय बदला, तकनीक बदली, जीवन-शैली बदली, बाजार बदला और फैशन भी बदल गया। महिलाओं को उपभोक्तावादी संस्कृति ने विज्ञापनों और प्रदर्शन की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने के नए-नए तरीके खोज लिए। किंतु दुखद प्रश्न यह है कि क्या समाज की मूलभूत सोच बदली? क्या बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत हो गई? क्या दहेज प्रथा समाप्त हो गई? क्या स्त्री उत्पीड़न इतिहास बन गया?</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से इन प्रश्नों का उत्तर आज भी नकारात्मक है। अनेक समस्याएँ आज भी यथावत बनी हुई हैं, बल्कि कई मामलों में उन्होंने और अधिक विकराल रूप धारण कर लिया है। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180674/now-this-picture-should-be-changed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नसमय बदला, तकनीक बदली, जीवन-शैली बदली, बाजार बदला और फैशन भी बदल गया। महिलाओं को उपभोक्तावादी संस्कृति ने विज्ञापनों और प्रदर्शन की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने के नए-नए तरीके खोज लिए। किंतु दुखद प्रश्न यह है कि क्या समाज की मूलभूत सोच बदली? क्या बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत हो गई? क्या दहेज प्रथा समाप्त हो गई? क्या स्त्री उत्पीड़न इतिहास बन गया?</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से इन प्रश्नों का उत्तर आज भी नकारात्मक है। अनेक समस्याएँ आज भी यथावत बनी हुई हैं, बल्कि कई मामलों में उन्होंने और अधिक विकराल रूप धारण कर लिया है। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में महिलाओं की स्थिति अभी भी अपेक्षित सम्मान और अवसरों से काफी दूर दिखाई देती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में सुधार तो हुआ है, किंतु वह इतना व्यापक नहीं है कि समाज को संतोष हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे बुजुर्ग कहा करते थे कि शिक्षा का प्रसार होगा तो समाज की कुरीतियाँ स्वतः समाप्त हो जाएँगी। स्त्रियाँ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ेंगी और बेटी को बोझ नहीं, अवसर माना जाएगा। कुछ क्षेत्रों में प्रगति अवश्य हुई है, किंतु धरातल पर तस्वीर अभी भी अधूरी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण  के अनुसार देश में 10 वर्ष या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर लगभग 46.4 प्रतिशत तक पहुँचा है, जो पहले 41 प्रतिशत था।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सुधार उत्साहजनक है, किंतु इसका अर्थ यह भी है कि आधी से अधिक महिलाएँ अभी भी दस वर्ष की बुनियादी शिक्षा से वंचित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय छोड़ने वाली बालिकाओं की संख्या आज भी चिंता का विषय बनी हुई है।  शिक्षा के क्षेत्र में असमानता का एक कारण बाल विवाह, गरीबी, सामाजिक रूढ़ियाँ तथा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी हैं। अनेक परिवार आज भी पुत्र की शिक्षा को निवेश और पुत्री की शिक्षा को व्यय मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही सोच आगे चलकर दहेज जैसी कुप्रथा को जन्म देती और इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि शिक्षा और आधुनिकता के दावों के बीच दहेज का दानव आज भी जीवित है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में दहेज निषेध अधिनियम के अंतर्गत 15,489 मामले दर्ज किए गए तथा दहेज से संबंधित घटनाओं में 6,156 महिलाओं की मृत्यु हुई। अर्थात प्रतिदिन लगभग 17 महिलाओं ने दहेज की कीमत अपने जीवन से चुकाई। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की व्यापक तस्वीर भी चिंता उत्पन्न करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2023 में देशभर में महिलाओं के विरुद्ध लगभग 4.48 लाख अपराध दर्ज किए गए। इनमें सबसे बड़ी संख्या पति अथवा रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के मामलों की रही, जो कुल अपराधों का लगभग 30 प्रतिशत है। यह स्थिति केवल आँकड़ों की कहानी नहीं है; यह उन लाखों बेटियों, बहनों और माताओं की पीड़ा का दस्तावेज है जो आज भी भेदभाव, हिंसा और असमानता का सामना कर रही हैं। समाज सुधारिका सावित्रीबाई फुले ने कहा था यदि तुम शिक्षित हो जाओगे तो तुम्हें अपने अधिकारों का ज्ञान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं डॉ. भीमराव आंबेडकर का प्रसिद्ध कथन है कि किसी समाज की प्रगति का आकलन उसकी महिलाओं की प्रगति से किया जाना चाहिए। महात्मा गांधी ने भी कहा था यदि आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं तो केवल एक व्यक्ति शिक्षित होता है, किंतु यदि आप एक स्त्री को शिक्षित करते हैं तो पूरा परिवार शिक्षित होता है। इसी प्रकार स्वामी विवेकानंद का मानना था कि जिस राष्ट्र ने अपनी स्त्रियों का सम्मान करना नहीं सीखा, वह कभी महान नहीं बन सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है; आवश्यक यह है कि बालिका शिक्षा को सामाजिक सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और समान अवसरों से जोड़ा जाए। जब तक बेटी को परिवार की उत्तराधिकारी नहीं माना जाएगा, जब तक विवाह को आर्थिक लेन-देन का माध्यम समझा जाएगा, तब तक दहेज की मानसिकता समाप्त नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि एक ओर हम महिला सशक्तिकरण के नारे लगाते हैं, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाते हैं, महिलाओं की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं, दूसरी ओर कन्या के जन्म पर चिंता और विवाह के समय दहेज की चर्चा अभी भी अनेक घरों में सामान्य बात मानी जाती है। यह दोहरा सामाजिक चरित्र हमारी सबसे बड़ी चुनौती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज आवश्यकता केवल कानूनों की नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की है। विद्यालयों में लैंगिक समानता के संस्कार, परिवारों में बेटियों के प्रति समान व्यवहार, महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, दहेज लेने-देने वालों का सामाजिक बहिष्कार तथा पंचायत स्तर तक जनजागरण अभियान ही वास्तविक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। यदि हम सचमुच विकसित भारत का स्वप्न देखते हैं तो हमें यह स्वीकार करना होगा कि बालिका शिक्षा, स्त्री सम्मान और दहेज उन्मूलन केवल महिला मुद्दे नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रश्न हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस दिन हर बेटी निर्भय होकर शिक्षा प्राप्त करेगी, अपने जीवन के निर्णय स्वयं ले सकेगी और विवाह दहेज नहीं बल्कि समानता, सम्मान और प्रेम पर आधारित होगा, उसी दिन हम सच्चे अर्थों में आधुनिक, प्रगतिशील और सभ्य समाज कहलाने के अधिकारी होंगे। अब समय की आवश्यकता यह है  कि हम केवल परिवर्तन की प्रतीक्षा न करें, बल्कि स्वयं परिवर्तन बनें। क्योंकि बेटी का सम्मान ही समाज का सम्मान है, और स्त्री की प्रगति ही राष्ट्र की वास्तविक प्रगति है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180674/now-this-picture-should-be-changed</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180674/now-this-picture-should-be-changed</guid>
                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:49:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/images.jpg"                         length="123026"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ में एजुकेट गर्ल्स ने मनाया 18वाँ स्थापना दिवस।</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">एजुकेट गर्ल्स, जिसे 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, ने 25 मार्च 2026 को लखनऊ में अपना 18वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस पुरस्कार को व्यापक रूप से एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें टीम बालिका स्वयंसेवक, फील्ड स्टाफ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सिविल सोसाइटी साझेदार और शिक्षा क्षेत्र के हितधारक शामिल थे। इस अवसर पर संस्था की यात्रा पर विचार किया गया और भारत भर में बालिका शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174518/educate-girls-celebrated-its-18th-foundation-day-in-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260327-wa00631.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">एजुकेट गर्ल्स, जिसे 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, ने 25 मार्च 2026 को लखनऊ में अपना 18वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस पुरस्कार को व्यापक रूप से एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें टीम बालिका स्वयंसेवक, फील्ड स्टाफ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सिविल सोसाइटी साझेदार और शिक्षा क्षेत्र के हितधारक शामिल थे। इस अवसर पर संस्था की यात्रा पर विचार किया गया और भारत भर में बालिका शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुख्य संबोधन दिया और राज्य में प्रत्येक बालिका के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार के सतत प्रयासों को रेखांकित किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “देशव्यापी पहलों जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर उत्तर प्रदेश में एजुकेट गर्ल्स जैसे साझेदारों के माध्यम से निरंतर प्रयासों तक, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। वर्ष 2017 के बाद से राज्य में बुनियादी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिनमें बेहतर बुनियादी ढाँचा, संसाधनों में वृद्धि और ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए केंद्रित प्रयास शामिल हैं। कायाकल्प योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार जैसी सरकारी योजनाओं ने बालिकाओं को स्कूल में वापस लाने और उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज अधिकांश बालिकाएँ कक्षाओं में हैं और ड्रॉपआउट दर लगातार घट रही है।।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री पाठक ने कहा मिशन शक्ति के माध्यम से हम बालिकाओं को गरिमा, अवसर और समानता के साथ जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम एजुकेट गर्ल्स के साथ मिलकर बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के हर प्रयास में दृढ़ता से साथ खड़े हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय ने राज्यभर में सामुदायिक भागीदारी और पुनःसमावेशन प्रयासों के माध्यम से हासिल की गई प्रगति को रेखांकित किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “लगातार प्रयासों के माध्यम से हम लगभग 23 जिलों में बालिकाओं की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में सफल हुए हैं, साथ ही जोखिमग्रस्त छात्रों को विद्यालय में बनाए रखने में भी सहयोग किया है। विद्या कार्यक्रम के अंतर्गत टीम बालिका स्वयंसेवक गाँव-गाँव जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं और सामाजिक या आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं के लिए ओपन स्कूलिंग के माध्यम से निरंतरता सुनिश्चित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किशोर बालिकाओं को पुनः मुख्यधारा में लाना एक जटिल चुनौती बनी हुई है, लेकिन एजुकेट गर्ल्स ने मजबूत सामुदायिक जुड़ाव और साझेदारियों के माध्यम से इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके जमीनी अनुभवों ने हमारी योजना और क्रियान्वयन को मजबूत किया है, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि कोई भी बालिका पीछे न रह जाए। हम इस सहयोग और एजुकेट गर्ल्स, टीम बालिका तथा सभी साझेदारों की बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने की निरंतर प्रतिबद्धता को अत्यंत महत्व देते हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने संस्था की जमीनी पहल से राष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तनकारी शक्ति बनने की यात्रा पर प्रकाश डाला और 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार का श्रेय अग्रिम पंक्ति में कार्यरत स्वयंसेवकों और फील्ड टीमों के सामूहिक साहस को दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “एजुकेट गर्ल्स यह दर्शाता है कि मजबूत साझेदारियाँ किस प्रकार बड़े स्तर पर सार्थक परिवर्तन ला सकती हैं। ज्ञान का पिटारा जैसे हमारे रेमेडियल लर्निंग कार्यक्रमों के माध्यम से हम सबसे वंचित बालिकाओं तक पहुँचते हैं, उन्हें स्कूल में वापस लाने और सीखने की राह पर बनाए रखने में सहयोग करते हैं। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, जिसे एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है हमारी टीम बालिका स्वयंसेवकों, फील्ड टीमों और साझेदारों के सामूहिक प्रयासों को मान्यता देता है और सेवा, ईमानदारी तथा जमीनी नेतृत्व की उस भावना को दर्शाता है, जो हमारे कार्य को आगे बढ़ाती है। । हम अपने कार्य में निरंतर सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;"> बिहार की प्रगति टीम से जुड़ी शिक्षार्थी हलीमा सादिया भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। संचालन निदेशक विक्रम सिंह सोलंकी द्वारा संचालित टीम बालिका पैनल चर्चा में 55,000 से अधिक स्वयंसेवकों के प्रभाव को दर्शाया गया, जो घर-घर जाकर समुदायों में परिवर्तन ला रहे हैं और बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियों तथा सामाजिक मान्यताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जो अक्सर बालिकाओं के स्कूल छोड़ने का कारण बनती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं में से बदायूं की सोनम ने साझा किया कि पिछले दो वर्षों में एजुकेट गर्ल्स के साथ उनकी यात्रा ने उन्हें अधिक आत्मविश्वासी बनाया है और शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को समझने में मदद की है। सोनभद्र की प्रांचल गुप्ता ने बताया कि ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ना उन्हें अपार खुशी और उद्देश्य देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंकित मौर्य ने अपने गाँव में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को साझा किया, जहाँ वे सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवारों को, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करते हैं। निर्मला यादव की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक रही। कम उम्र में विवाह और विरोध का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी, यहाँ तक कि उनकी किताबें नष्ट कर दी गईं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और बीए तथा एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूर्ण की, जिससे वे कई लोगों के लिए प्रेरणा बनीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174518/educate-girls-celebrated-its-18th-foundation-day-in-lucknow</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/174518/educate-girls-celebrated-its-18th-foundation-day-in-lucknow</guid>
                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 23:06:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/img-20260327-wa00631.jpg"                         length="116073"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने कन्या पूजन कर मनाया नवमी पर्व, उपहार देकर उत्साहवर्धन किया </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा नवरात्रि के पावन अवसर पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के अंतर्गत विकास खंड नौगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्र, साड़ी प्रथम में कन्या पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने पारंपरिक विधि-विधान से कन्याओं का पूजन कर उनके प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने कन्याओं के चरण धोकर, तिलक लगाकर तथा पुष्प अर्पित कर उन्हें प्रसाद वितरित किया। साथ ही, सभी कन्याओं  को उपहार भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व नारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174346/district-magistrate-celebrated-navami-festival-by-worshiping-the-girl-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1774532849622.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा नवरात्रि के पावन अवसर पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के अंतर्गत विकास खंड नौगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्र, साड़ी प्रथम में कन्या पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने पारंपरिक विधि-विधान से कन्याओं का पूजन कर उनके प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने कन्याओं के चरण धोकर, तिलक लगाकर तथा पुष्प अर्पित कर उन्हें प्रसाद वितरित किया। साथ ही, सभी कन्याओं  को उपहार भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व नारी शक्ति के सम्मान और उनकी महत्ता को दर्शाने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान का उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना तथा उनके शिक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करना है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों को दी जा रही पोषण सेवाओं, शिक्षण सामग्री एवं साफ-सफाई की स्थिति की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के समग्र विकास का आधार हैं, इसलिए यहां की व्यवस्थाएं सुदृढ़ और प्रभावी होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी विनय कुमार सिंह एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी साहब यादव भी उपस्थित रहे कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं तथा ग्रामीण भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम का समापन कन्याओं को प्रसाद एवं उपहार वितरण के साथ हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण के संदेश को भी प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुंचाने में सफल रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174346/district-magistrate-celebrated-navami-festival-by-worshiping-the-girl-and</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/174346/district-magistrate-celebrated-navami-festival-by-worshiping-the-girl-and</guid>
                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 20:29:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1774532849622.jpg"                         length="146251"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आधी आबादी का पूरा आकाश: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का वैश्विक परिप्रेक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं की उपलब्धियों का उत्सव है और लैंगिक समानता की दिशा में संघर्ष का प्रतीक। यह दिन केवल एक तारीख नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक वैश्विक आंदोलन का प्रतीक है जो सदियों से चली आ रही असमानताओं को चुनौती देता है। 1908 में अमेरिका की 15,000 महिलाओं ने न्यूयॉर्क की सड़कों पर उतरकर बेहतर कामकाजी परिस्थितियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वोट का अधिकार और सम्मानजनक वेतन की मांग की थी। उस आंदोलन ने जन्म लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज दुनिया भर में लाखों महिलाओं को प्रेरित करता है। संयुक्त</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172598/half-the-population-the-whole-sky-global-perspective-of-international"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1582877879-851.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं की उपलब्धियों का उत्सव है और लैंगिक समानता की दिशा में संघर्ष का प्रतीक। यह दिन केवल एक तारीख नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक वैश्विक आंदोलन का प्रतीक है जो सदियों से चली आ रही असमानताओं को चुनौती देता है। 1908 में अमेरिका की 15,000 महिलाओं ने न्यूयॉर्क की सड़कों पर उतरकर बेहतर कामकाजी परिस्थितियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वोट का अधिकार और सम्मानजनक वेतन की मांग की थी। उस आंदोलन ने जन्म लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज दुनिया भर में लाखों महिलाओं को प्रेरित करता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और तब से यह दिन महिलाओं के अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी नेतृत्व क्षमता और सामाजिक न्याय की मांग का केंद्र बन गया है। भारत जैसे देश में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां महिलाएं प्राचीन काल से देवी के रूप में पूजित होती आई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी वास्तविकता में उन्हें समान अवसरों से वंचित रखा जाता रहा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि समानता का स्वप्न अधूरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक हर महिला को शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और सुरक्षा न मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारतीय महिलाओं का प्रतिरोध और नेतृत्व कभी थमा नहीं। प्राचीन काल में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियों ने शास्त्रार्थ में अपनी बौद्धिक श्रेष्ठता सिद्ध की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मध्यकाल में रानी लक्ष्मीबाई ने अठारह सौ सत्तावन के संग्राम में अपनी वीरता से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी। आधुनिक भारत की नींव रखने में सावित्रीबाई फुले का योगदान अविस्मरणीय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने वर्ष 1848 में पुणे में प्रथम बालिका विद्यालय की स्थापना की। उस समय जब समाज लड़कियों की शिक्षा को अधर्म मानता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सावित्रीबाई पर पत्थर और कीचड़ फेंके जाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु उन्होंने हार नहीं मानी। इसी संघर्ष की परिणति थी कि आज भारत की बेटियां अंतरिक्ष से लेकर ओलंपिक के मैदान तक अपना परचम लहरा रही हैं। स्वतंत्रता संग्राम में सरोजिनी नायडू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अरुणा आसफ अली और भीखाजी कामा जैसी महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि राष्ट्र की मुक्ति का मार्ग स्त्री की सहभागिता के बिना संभव नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के पश्चात भारतीय संविधान ने अनुच्छेद चौदह और पंद्रह के माध्यम से लैंगिक समानता को मौलिक अधिकार के रूप में प्रतिष्ठित किया। राजनीतिक पटल पर भारत ने विश्व को राह दिखाई जब इंदिरा गांधी देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनीं और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से वैश्विक भूगोल को बदल दिया। वर्तमान समय में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सर्वोच्च पद पर आसीन होना इस बात का प्रतीक है कि एक साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाली महिला भी अपनी योग्यता से शिखर तक पहुँच सकती है। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का एक सशक्त उदाहरण पंचायती राज व्यवस्था है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ तैंतीस से पचास प्रतिशत आरक्षण के कारण आज लगभग चौदह लाख से अधिक महिलाएं सरपंच और पार्षद के रूप में ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संसद और विधानसभाओं में उनकी हिस्सेदारी अभी भी लगभग चौदह प्रतिशत के आसपास सिमटी हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए निरंतर प्रयास और विधायी समर्थन की आवश्यकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक मोर्चे पर महिलाओं की स्थिति और उनकी भागीदारी विकास के मापदंडों को निर्धारित करती है। वैश्विक आर्थिक मंच की वर्ष 2023 की रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत लैंगिक अंतराल सूचकांक में 146 देशों के बीच 127वें स्थान पर खड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह दर्शाता है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभी लंबी दूरी तय करनी है। भारत मं  महिला श्रम बल भागीदारी दर वर्तमान में लगभग सैंतीस प्रतिशत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा छिहत्तर प्रतिशत से अधिक है। इस अंतर का मुख्य कारण घरेलू उत्तरदायित्वों का असंतुलित बोझ और कार्यस्थलों पर सुरक्षा की कमी है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत अभी भी पूर्णतः धरातल पर नहीं उतरा है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में लगभग बीस प्रतिशत कम पारिश्रमिक प्राप्त होता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टार्टअप और उद्यमशीलता के क्षेत्र में बदलाव की लहर देखी जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ दस में से लगभग दो उद्यम महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की प्रगति के आधार स्तंभ होते हैं। राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के पांचवें चरण के आंकड़े बताते हैं कि भारत में महिला साक्षरता दर में सुधार हुआ है और यह सत्तर प्रतिशत के पार पहुँच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी पैंसठ प्रतिशत महिलाएं साक्षरता से वंचित हैं। लड़कियों के विद्यालय छोड़ने की दर अभी भी चिंता का विषय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मुख्य कारण सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन की कमी और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं का अभाव है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रति लाख जीवित जन्मों पर संतानबे तक पहुँच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुपोषण और रक्ताल्पता (एनीमिया) अभी भी एक बड़ी चुनौती है। भारत की लगभग संतावन प्रतिशत महिलाएं रक्ताल्पता से पीड़ित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उनके कार्यबल और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान और खेल जगत में भारतीय महिलाओं ने उन रूढ़ियों को तोड़ा है जो उन्हें केवल घर की चारदीवारी तक सीमित मानती थीं। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मिसाइल वुमन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के नाम से विख्यात टेस्सी थॉमस ने अग्नि मिसाइल परियोजना का नेतृत्व कर यह सिद्ध किया कि तकनीकी कौशल किसी लिंग का मोहताज नहीं है। खेल के मैदान में पीटी उषा की उड़ान से शुरू हुआ सफर आज मैरी कॉम के छह विश्व स्वर्ण पदकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीवी सिंधु के ओलंपिक पदकों और मिताली राज के क्रिकेट कीर्तिमानों तक पहुँच चुका है। ये उपलब्धियां केवल पदक नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन करोड़ों लड़कियों के लिए आशा की किरण हैं जो समाज के बंधनों को तोड़कर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यद्यपि उपलब्धियां गौरवशाली हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु सामाजिक सुरक्षा और अपराध के आंकड़े एक भयावह तस्वीर भी प्रस्तुत करते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में निरंतर वृद्धि देखी गई है। प्रति घंटे दो से अधिक महिलाओं के साथ होने वाली यौन हिंसा और घरेलू उत्पीड़न के मामले यह बताते हैं कि केवल कानून का निर्माण पर्याप्त नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज की चेतना में परिवर्तन अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में बाल विवाह की दर अभी भी चुनौतीपूर्ण स्तर पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लड़कियों के बचपन और उनके भविष्य को अंधकारमय बना देती है। निर्भया कांड के पश्चात कानून को और अधिक कठोर बनाया गया और त्वरित अदालतों की स्थापना की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु न्याय की धीमी प्रक्रिया और सामाजिक लोकलाज अभी भी पीड़ितों के मार्ग की बाधा बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी योजनाओं ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में उत्प्रेरक का कार्य किया है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">अभियान ने लिंगानुपात में सुधार लाने और कन्या शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी प्रकार </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">उज्ज्वला योजना</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के अंतर्गत दस करोड़ से अधिक महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान कर उन्हें धुएं से होने वाली बीमारियों से मुक्ति दिलाई गई है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मुद्रा योजना</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत वितरित ऋणों में लगभग सत्तर प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सूक्ष्म और लघु स्तर पर आर्थिक क्रांति का नेतृत्व कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वे सामाजिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान समय में डिजिटल क्रांति ने महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल इंडिया</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं ई-कॉमर्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑनलाइन बैंकिंग और शिक्षा से जुड़ रही हैं। कोविड महामारी के दौरान जब दुनिया ठहर गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब आशा कार्यकर्ताओं के रूप में नौ लाख से अधिक महिलाओं ने अग्रिम पंक्ति में रहकर टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा संभाला। यह उनके अदम्य साहस और समर्पण का ही परिणाम था कि भारत इतनी बड़ी आपदा का सामना कर सका। आज तकनीक के युग में महिलाएं कोडिंग से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्कर्षतः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक प्रतिज्ञा है। यह संकल्प है उस समाज के निर्माण का जहाँ किसी व्यक्ति की क्षमता का आकलन उसके लिंग के आधार पर न होकर उसकी योग्यता के आधार पर हो। महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल महिलाओं को अधिकार देना नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें एक ऐसा वातावरण प्रदान करना है जहाँ वे अपनी इच्छाओं और सपनों को बिना किसी भय के जी सकें। जैसा कि मलाला यूसुफजई ने कहा था कि हम तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक हमारी आधी आबादी को पीछे रखा जाएगा। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्वप्न तभी साकार होगा जब देश की प्रत्येक महिला शिक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होगी। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक समानता का अधिकार केवल कागजों तक सीमित न रहकर हर घर और हर दिल की हकीकत न बन जाए। आज हमें यह प्रण लेना होगा कि हम अपनी बेटियों को केवल पढ़ाएंगे ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें गगन चूमने के लिए पंख भी देंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172598/half-the-population-the-whole-sky-global-perspective-of-international</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172598/half-the-population-the-whole-sky-global-perspective-of-international</guid>
                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 18:47:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1582877879-851.webp"                         length="48456"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का नारा बुलंद कर रही लेकिन बेटियां परीक्षा देने से रह जा रही वंचित इमरान बंटी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>जौनपुर-</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">खेतासराय स्थित सर्वोदय इंटर कालेज में हाई स्कूल प्रथम पाली की परीक्षा में मॉडर्न कान्वेंट स्कूल की चार छात्रा परीक्षा देने से वंचित रह गई।इस प्रकरण को लेकर एआईएमआईएम जिला कार्यालय पर जिलाध्यक्ष इमरान बंटी की अध्यक्षता में एक बैठक संपन्न हुई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में समस्त पदाधिकारियों ने एक सुर में इस प्रकरण पर निंदा व्यक्त की बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष इमरान बंटी ने कहा कि जहां सरकार बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का नारा बुलंद कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं बेटियां परीक्षा देने से वंचित रह जा रही हैं।उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल छात्राओं के ब्यान के मुताबिक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149084/the-government-is-raising-the-slogan-of-beti-padhao-beti-bachao"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/unnamed-(4)3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>जौनपुर-</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खेतासराय स्थित सर्वोदय इंटर कालेज में हाई स्कूल प्रथम पाली की परीक्षा में मॉडर्न कान्वेंट स्कूल की चार छात्रा परीक्षा देने से वंचित रह गई।इस प्रकरण को लेकर एआईएमआईएम जिला कार्यालय पर जिलाध्यक्ष इमरान बंटी की अध्यक्षता में एक बैठक संपन्न हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में समस्त पदाधिकारियों ने एक सुर में इस प्रकरण पर निंदा व्यक्त की बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष इमरान बंटी ने कहा कि जहां सरकार बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का नारा बुलंद कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं बेटियां परीक्षा देने से वंचित रह जा रही हैं।उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल छात्राओं के ब्यान के मुताबिक वो अपना फेस वैरिफिकेशन के लिए तय्यार थी।परन्तु कालेज प्रशासन नकाब उतरवाने को लेकर अड़ा रहा। जिस कारण छात्राएं परीक्षा देने से वंचित रह गई! </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> बैठक के माध्यम से उन्होंने जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश मध्यमिक शिक्षा परिषद के गाइडलाइन के अनुसार इस प्रकरण की जांच करवा कर उचित कारवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगर अध्यक्ष जावेद अज़ीम ने जिला प्रशासन से अनुरोध करते हुए कहा कि इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उचित कारवाई करे। तथा जनपद के समस्त बोर्ड सेंटर पर भविष्य में ऐसी कोई घटना घटित ना हो,इसको लेकर मध्यमिक शिक्षा परिषद की गाइडलाइन को समाचार पत्रों के माध्यम से प्रकाशित करवाया जाए! </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला महासचिव शाहनेयाज़ अहमद,जिला सचिव कामरान अहमद, जिला कार्यकारी सदस्य अतीक अहमद, जिला संयुक्त सचिव शाहंशाह आलम, शाहगंज विधानसभा अध्यक्ष मोहम्मद कैश, मुंगरा विधानसभा अध्यक्ष शाहआलम, ज़फ़राबाद विधानसभा अध्यक्ष मुस्ताक हाशमी, शाहगंज विधानसभा अध्यक्ष युवा कमलेश गौतम, सदर विधानसभा अध्यक्ष युवा हुजैफा, नगर अध्यक्ष युवा सलाहुद्दीन हाशमी मुख्य रूप से उपस्थित रहें !</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149084/the-government-is-raising-the-slogan-of-beti-padhao-beti-bachao</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/149084/the-government-is-raising-the-slogan-of-beti-padhao-beti-bachao</guid>
                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 19:44:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/unnamed-%284%293.jpg"                         length="225471"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेटियाँ समृद्ध होंगी तभी होगा देश खुशहाल: पोस्टमास्टर जनरल विवेक कुमार दक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[बेटियों के भविष्य को संवारने में सुकन्या समृद्धि खाते का अहम योगदान: पोस्टमास्टर जनरल विवेक कुमार दक्ष]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138871/the-country-will-be-happy-only-if-the-daughters-are"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/,,1,,,...,,.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>10 वर्ष से कम आयु और रू 250 रुपये में खाता खुलवाएं</strong></div>
<div> </div>
<div><strong>दर्जनों सुकन्या खाते खोले गए और बेटियों को भेंट किया गया सुकन्या उपहार</strong></div>
<div> </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div><strong>अम्बेडकरनगर। </strong>अकबरपुर ब्लाक के सेंट जेवियर्स स्कूल में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अन्तर्गत सुकन्या समृद्धि योजना का  कैम्प अयोध्या मण्डल के प्रवर अधीक्षक डाकघर एच के यादव की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।शिविर में बतौर मुख्य अतिथि लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल विवेक कुमार दक्ष, तथा विशिष्ट अतिथि नगर पालिका चेयरमैन चन्द्र प्रकाश वर्मा, सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रधानाचार्य विनय कुमार सिंह ने शिरकत किया ।</div>
<div> </div>
<div>शिविर का शुभारंभ करते हुए डाक कर्मियों ने को सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाने के लिए जागरूक किया । शिविर में मुख्य अतिथि लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल विवेक कुमार दक्ष कहा कि जब आज की बेटियाँ समृद्ध होंगी तभी होगा देश खुशहाल क्योंकि बेटियाँ देश का भविष्य है और राष्ट्र निर्माण में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। भारत सरकार के अभियान 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' के अन्तर्गत हम सभी लोगों का दायित्व है कि बेटियों के भविष्य को संवारने के लिए एक सार्थक कदम उठाएं। बेटियां ही 21वीं सदी में हमारे देश का भविष्य हैं।</div>
<div> </div>
<div>साथ ही यह भी कहा कि भारत सरकार द्वारा नारी सशक्तिकरण की दिशा में तमाम महत्वपूर्ण योजनाएँ चलायी जा रही हैं। इसी क्रम में डाकघरों में सुकन्या समृद्धि योजना में धन जमा करने से माँ-बाप अपनी बेटी के भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभायेंगे। इससे बेटियों को आर्थिक व सामाजिक रूप से भविष्य में मजबूत किया जा सकता है। नगर पालिका चेयरमैन श्री वर्मा ने 22 गरीब कन्याओं का सुकन्या खाता खुलवाते हुए कहा सुकन्या समृद्धि खाता खुलने से बेटियां मजबूत होंगी इससे कन्या भ्रूण हत्या रोकने, महिला सशक्तिकरण, उच्च शिक्षा में सुकन्या समृद्धि योजना राष्ट्र निर्माण में सहायक होगी। इस दौरान श्री दक्ष ने बेटियों को सुकन्या समृद्धि उपहार भेंट किया तथा दर्जनों उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत किया ।</div>
<div> </div>
<div>अन्त में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री यादव ने कहा कि डाकघर गरीब अमीर सभी वर्ग के साथ एक सामान व्यवहार करता है डाकघर के बचत खाते में छोटी छोटी रकम जमा करके अधिक धन एकत्र किया जा सकता है डाकघर की सभी योजनाएं जनता के लिए लाभकारी हैं । ग्रामीण डाक जीवन बीमा सभी बीमा कम्पनियों से सस्ता एवं फायदेमंद है इसे आमजन को अपनाने की भी अपील किया । इस दौरान सभासद राजकुमार वर्मा, डाक निरीक्षक हरिमोहन सिंह, अभिषेक तिवारी, गौरव सोनी, मुख्य विपणन अधिकारी सत्येन्द्र प्रताप सिंह, पोस्टमास्टर नूतन सिंह सहित सैकड़ों मौजूद रहे ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/138871/the-country-will-be-happy-only-if-the-daughters-are</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/138871/the-country-will-be-happy-only-if-the-daughters-are</guid>
                <pubDate>Sat, 24 Feb 2024 16:28:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-02/%2C%2C1%2C%2C%2C...%2C%2C.jpg"                         length="112203"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला कल्याण अधिकारी अनम द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत चलाया गया हस्ताक्षर अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात <br /></strong></div>
<div><strong>फिरोजाबाद-</strong>    महिला सशक्तिकरण को लेकर सर्व उत्थान उज्जवला समिति द्वारा एसआरके पीजी कॉलेज के कंप्यूटर साइंस एंड एजुकेशन स्ववित्त पोषित विंग परिसर में एक दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें, पीड़ित महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनका मार्ग दर्शन किया गया। इस दौरान सभी को शपथ दिलाई गई और महिला कल्याण अधिकारी द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत हस्ताक्षर अभियान चलाया गया और पैंपलेट वितरण कर व स्टीकर चिपकाकर महिलाओं एवं छात्राओं को जागरूक किया गया।</div>
<div>  </div>
<div>जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव व अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह, डीजीसी</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138834/signature-campaign-launched-by-women-welfare-officer-anam-under-beti"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/4.2.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात <br /></strong></div>
<div><strong>फिरोजाबाद-</strong>  महिला सशक्तिकरण को लेकर सर्व उत्थान उज्जवला समिति द्वारा एसआरके पीजी कॉलेज के कंप्यूटर साइंस एंड एजुकेशन स्ववित्त पोषित विंग परिसर में एक दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें, पीड़ित महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनका मार्ग दर्शन किया गया। इस दौरान सभी को शपथ दिलाई गई और महिला कल्याण अधिकारी द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत हस्ताक्षर अभियान चलाया गया और पैंपलेट वितरण कर व स्टीकर चिपकाकर महिलाओं एवं छात्राओं को जागरूक किया गया।</div>
<div> </div>
<div>जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव व अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह, डीजीसी राजीव कुमार, महिला कल्याण अधिकारी अनम अकाशा, स्वीप ब्रांड एंबेसडर सरिता द्विवेदी, समाज सेविका कल्पना राजौरिया, अधिवक्ता निशी शर्मा, मनोज कुमार व अन्य मंचासीन अधिकारियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित व माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।</div>
<div> </div>
<div>जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव व अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ हस्ताक्षर जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया और विधिक सेवाओं के साथ साथ महिलाओं को मुफ्त कानूनी सलाह एवं सरकारी वकील मुहैया कराने की प्रक्रिया के विषय में विस्तार से बताते हुए उन्हें, आत्मनिर्भर व साक्षर बनने के लिए प्रेरित किया और उनकी समस्याओं को एक एक कर सुन उनका मार्ग दर्शन किया।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि, महिलाओं में विधिक जागरूकता का बहुत अभाव है। उन्हें, न्याय प्रणाली की हर इकाई से वाकिफ होना चाहिए। ताकि, समस्याओं से वे निजात पा सके। यदि, किसी को भी विधिक सहायता या संबंधित जानकारियों की आवश्यकता है तो, वह न्यायालय परिसर स्थित कार्यालय विधिक सेवा प्राधिकरण में संपर्क कर सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div>डीजीसी राजीव कुमार ने महिलाओं को जागरूक करते हुए कहा कि, सभी को आत्मनिर्भर होना चाहिए। अपने घर को टूटने से बचाने के लिए विश्वास की डोर को मजबूत रखते हुए उन्हें भी उन महिलाओं से जो, आज भी सामूहिक परिवार चला रही हैं प्रेरणा लेते व सामंजस्य मानते हुए समझौता की पहल करनी चाहिए। ताकि, ऐसे हालात ही पैदा ही न हो और उन्हें, ऐसी समस्याओं से न गुजरना पड़े।</div>
<div> </div>
<div>महिला शक्ति केंद्र /हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ़ वूमेन से महिला कल्याण अधिकारी व जिला मिशन कोऑर्डिनेटर अनम अकाशा ने महिला संबंधी अधिनियमों पर चर्चा करते हुए कन्या सुमंगला योजना, विधवा पेंशन स्पॉन्सरशिप व सरकार की अन्य महत्वाकांक्षी योजनाओं के विषय में विस्तार से बताया एवं चाइल्ड हेल्प लाइन 1098, महिला हेल्प लाइन 1090, घरेलु हिंसा हेल्पलाइन 181, साइबर हेल्प लाइन 1930, पुलिस हेल्प लाइन 112, मुख्यमंत्री हेल्प लाइन 1076 के साथ साथ साइबर क्राइम, घरेलू हिंसा, सेल्फ डिफेंस, गुड टच बैड टच आदि के प्रति जागरूक किया और सखी वन स्टॉप सेंटर के कार्य व पीड़िताओं को दी जाने वाली सुविधाओं के विषय में विस्तार से बताया।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर मुख्य रूप से पूर्व डीजीसी विश्राम राठौर, एडीजीसी मनोज शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चंद्र जैन, निशी शर्मा एडवोकेट, समाजसेविका कल्पना राजौरिया, संस्था अध्यक्ष रश्मि जैन व पीड़िताओं सहित विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं और छात्राएं उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/138834/signature-campaign-launched-by-women-welfare-officer-anam-under-beti</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/138834/signature-campaign-launched-by-women-welfare-officer-anam-under-beti</guid>
                <pubDate>Wed, 21 Feb 2024 16:53:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-02/4.2.jpg"                         length="170037"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        