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                <title>बिहार में एनडीए को प्रचंड बहुमत पर सिद्धार्थनगर में भाजपाइयों ने मिठाई बाँटकर मनाया जश्न</title>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत पर सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय पर खुशी का माहौल रहा। भाजपाइयों  ने मिठाई बांटकर और पटाखे फोड़कर जश्न मनाया। भाजपा के नेताओं ने  समर्थकों को मिठाई खिलाई। सदर विधायक प्रतिनिधि  सत्य प्रकाश राही ने इसे विकास और स्थिरता की जीत बताया। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत की खुशी सिद्धार्थनगर में  जोरदार तरीके से दिखी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परिणाम घोषित होने के बाद स्थानीय समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाईयाँ दी। जिला मुख्यालय  के सड़कों पर बड़ी संख्या में जुटे समर्थकों ने पटाखे फोड़ कर जीत का जश्न मनाया।</div></div></div></div></div></div></div></div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160209/bjp-workers-celebrated-ndas-massive-majority-in-bihar-by-distributing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/1763126735671.jpg" alt=""></a><br /><div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत पर सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय पर खुशी का माहौल रहा। भाजपाइयों  ने मिठाई बांटकर और पटाखे फोड़कर जश्न मनाया। भाजपा के नेताओं ने  समर्थकों को मिठाई खिलाई। सदर विधायक प्रतिनिधि  सत्य प्रकाश राही ने इसे विकास और स्थिरता की जीत बताया। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत की खुशी सिद्धार्थनगर में  जोरदार तरीके से दिखी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिणाम घोषित होने के बाद स्थानीय समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाईयाँ दी। जिला मुख्यालय  के सड़कों पर बड़ी संख्या में जुटे समर्थकों ने पटाखे फोड़ कर जीत का जश्न मनाया। इस दौरान नीतेश पाण्डेय ने समर्थको को मिठाई खिलाकर जीत का जश्न मनाया। जीत पर बच्चों और युवाओं मे जमकर जोश दिखा। इस मौके पर  उन्होंने  कहा कि यह विकास और स्थिरता की जीत है, उन्होंने कहा कि सरकार से सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद है।</div>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 19:36:49 +0530</pubDate>
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                <title>लोकप्रिय चेहरों के पर्दे में छुपे विकास के सवाल</title>
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                        <![CDATA[चमक और मुद्दों के बीच फंसा बिहार: जनता किसे चुनेगी?]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/157745/questions-of-development-hidden-behind-the-veil-of-popular-faces"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/hindi-divas12.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गंगा के किनारे बिहार की मिट्टी में सियासत का बीज बोया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस बार बीज में चमकते सितारों की धूल झोंक दी गई है—भोजपुरी ठुमरियों की लहरों से लेकर आइटम डांस की चकाचौंध तक। कल्पना कीजिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विधानसभा का मंच अब सिल्वर स्क्रीन का विस्तार बन गया है—एक तरफ लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सीमा सिंह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोजपुरी सिनेमा की </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">क्वीन ऑफ आइटम</span>', <span lang="hi" xml:lang="hi">मढ़ौरा की धूल भरी सड़कों पर उतर रही हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी तरफ भाजपा की मैथिली ठाकुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिथिला के मधुर स्वरों की धनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलीनगर के जातिगत जाल में फँसने को तैयार।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये नाम न सिर्फ टिकटों की सूची में चमक रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे चुनावी परिदृश्य को हिला रहे हैं। एनडीए की </span>243<span lang="hi" xml:lang="hi"> सीटों की पूरी सूची</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi"> भाजपा-जेडीयू को </span>101-101, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलजेएपी (आरवी) को </span>29,<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ये चेहरे सांस्कृतिक हथियार के रूप में उभरे हैं। विपक्ष महागठबंधन अभी सीटों की बाजीगरी में उलझा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन एनडीए की यह चाल साफ संकेत दे रही है— वोटों की जंग अब नीतियों से ज्यादा नाच-गाने की हो चुकी है। सवाल गूंज रहा है—क्या ये स्टार कैंडिडेट्स बिहार के जख्मदारों की आवाज बन पाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर चुनावी तमाशे का एक और अध्याय साबित होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ जीत के बाद चेहरे गायब हो जाते हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह ट्रेंड बिहार की राजनीति का नया अध्याय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पुरानी किताब का दोहराव है। पार्टियाँ ख्याति प्राप्त चेहरों को उतार रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका राजनीति से वास्तविक जुड़ाव कभी न के बराबर रहा। सीमा सिंह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी भोजपुरी फिल्मों में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चोली चिलाता चाहूं चाहूं</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे गाने लाखों दिलों पर छाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब मढ़ौरा से मैदान संभालेंगी। सारण जिले की यह सीट भोजपुरी संस्कृति का गढ़ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ युवा पीढ़ी सिनेमा से अपनी पहचान जोड़ती है। एलजेएपी का दावा है कि सीमा महिलाओं और नौजवानों को जोड़ेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला सशक्तिकरण और विकास के मुद्दों पर लड़ेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> लेकिन उनके राजनीतिक अनुभव का अभाव सवाल खड़ा करता है—क्या स्टेज की लाइट्स विधानसभा की बहसों में बदल पाएंगी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्टी ने चार महिलाओं को टिकट देकर लिंग समावेशिता का झंडा लहराया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी हकीकत क्या कहती है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी तरह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैथिली ठाकुर—जिन्होंने </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">राम भजन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे गीतों से पीएम मोदी का दिल जीता—भाजपा में एक दिन पहले शामिल होकर अलीनगर से टिकट पा लीं। दरभंगा का यह क्षेत्र मैथिली परंपराओं और जाति समीकरणों का केंद्र है। ठाकुर की सॉफ्ट इमेज से पार्टी मिथिला वोटबैंक को मजबूत करना चाहती है। भाजपा की स्टार कैंपेनर्स में पवन सिंह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निरहुआ जैसे भोजपुरी सितारे शामिल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रचार की आग को भड़काएंगे। महागठबंधन की ओर से खेसारी लाल यादव जैसे नामों की अफवाहें हैं। लेकिन यह सब उद्देश्यपूर्ण लगता है—सोशल मीडिया के दौर में एक वायरल वीडियो करोड़ों वोट जुटा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तर्क की नजर से देखें तो यह रणनीति सतही है। बिहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ बेरोजगारी दर </span>14.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाढ़ से हर साल </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से ज्यादा युवा पलायन पर मजबूर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ सांस्कृतिक अपील कितनी कारगर</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्टियाँ जानती हैं कि भोजपुरी सिनेमा राज्य की नसों में दौड़ता है—यह गरीबी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेम और संघर्ष की कहानियाँ बुनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जनता की भावनाओं से गहराई से जुड़ी हैं। सीमा सिंह जैसे कलाकार इन फिल्मों से करोड़ों तक पहुँचते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठाकुर मिथिला की लोककथाओं को जीवंत करती हैं। एनडीए का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार फर्स्ट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">नारा इसी सांस्कृतिक चमक से चमक रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए यह कितना न्यायोचित</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">वे वर्षों से गलियों में पसीना बहाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनसमस्याएँ सुलझाते हैं—बिजली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क के लिए घर-घर घूमते हैं। एक रात में स्टार कैंडिडेट टिकट लेकर आ जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। कार्यकर्ताओं में असंतोष है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">एक सर्वे बताता है कि </span>70<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत से ज्यादा मानते हैं कि सेलिब्रिटी टिकट पार्टी की एकता तोड़ते हैं। इतिहास गवाह है—</span>2010<span lang="hi" xml:lang="hi"> में शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नाम आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विधानसभा में स्थायी असर नहीं। प्रीतम शरणू या अन्य भोजपुरी कलाकार जीतकर भी क्षेत्र से गायब हो गए। </span>2020<span lang="hi" xml:lang="hi"> चुनावों में कई स्टार हारे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीतने वाले भी सुर्खियों से बाहर। उत्तर प्रदेश में गोविंदा की हार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र में रवीना टंडन का छोटा राजनीतिक सफर—ये उदाहरण चेतावनी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस रणनीति के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट है: पारंपरिक प्रचार से ऊबे मतदाताओं को ताजगी देना। युवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सिनेमा और संगीत से जुड़े हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वोटिंग में हिस्सा लेंगे। महिलाओं के टिकट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एनडीए के </span>35, <span lang="hi" xml:lang="hi">से लिंग समानता का संदेश जाता है। सोशल मीडिया पर ये चेहरे वायरल होकर पार्टी की रीच बढ़ाते हैं। लेकिन तर्कसंगत विश्लेषण में खामियाँ साफ हैं। पहला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकप्रियता अस्थायी—चुनाव बाद कैमरे बंद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाकार स्टूडियो लौट जाते हैं। विधायक का काम बजट पास करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास योजनाएँ लागू करना है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना अनुभव के यह कैसे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जातिगत जोखिम—अलीनगर में मुस्लिम-यादव वोटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठाकुर की मैथिली अपील कैसे काम करेगी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मढ़ौरा में यादव-रॉय समुदाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष आरजेडी इसका फायदा उठाएगा। तीसरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र की गुणवत्ता पर असर—जमीनी नेता स्थानीय मुद्दों से वाकिफ होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टार नहीं। यह अवसरवाद को बढ़ावा देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रष्टाचार को आमंत्रित करता है। जमीनी कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी अनदेखी से आधार कमजोर होता है। पार्टियों को चाहिए—स्टार्स को ट्रेनिंग दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुद्दों से जोड़ें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यकर्ताओं को महत्व दें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मक पहलू हैं। यह युवाओं को राजनीति से जोड़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक विविधता को मुख्यधारा में ला सकता है। बिहार का मतदाता अब जागरूक है—वह नाच-गाने पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वादों की सच्चाई पर वोट देगा। सड़कें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार ही असली मुद्दे हैं। अगर सीमा और मैथिली इन पर खरी उतरें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्रांति रचेंगी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वरना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चुनावी मंच की धूल बनेंगी। बिहार की सियासत को चाहिए संतुलन—चमक के साथ पदार्थ। जमीनी कार्यकर्ताओं की ताकत पहचानें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी लोकतंत्र मजबूत होगा। यह चुनाव बिहार के भविष्य का फैसला करेगा—चमक-दमक की कैद से निकलकर विकास की उड़ान भरे। जनता की नजरें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वह कभी धोखा नहीं खाती। बिहार जागेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नया सवेरा होगा।</span></p>]]>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/157745/questions-of-development-hidden-behind-the-veil-of-popular-faces</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Oct 2025 17:40:30 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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                <title>महागठबंधन और एनडीए-चुनाव आयोग गठजोड़ का मुकाबला !</title>
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                        <![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज।</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अभी से बमुश्किल एक माह के भीतर बिहार में नई विधानसभा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सरकार और शायद नया मुख्यमंत्री भी होगा। सभी की नजरें सीटों के लिए हो रही खींचतान पर थी कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं और ‘इंडिया’ या एनडीए में से कौन-सा गठबंधन ज्यादा उलझा लग रहा है। हकीकत तो यह है कि दोनों ही गठबंधनों को कई तरह की गांठें सुलझानी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। लगभग </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi">  साल से बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जमे नीतीश कुमार ने इस दौरान राजनीतिक</span>,</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/157724/competition-between-grand-alliance-and-nda-election-commission-alliance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/rajneeti1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज।</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अभी से बमुश्किल एक माह के भीतर बिहार में नई विधानसभा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सरकार और शायद नया मुख्यमंत्री भी होगा। सभी की नजरें सीटों के लिए हो रही खींचतान पर थी कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं और ‘इंडिया’ या एनडीए में से कौन-सा गठबंधन ज्यादा उलझा लग रहा है। हकीकत तो यह है कि दोनों ही गठबंधनों को कई तरह की गांठें सुलझानी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। लगभग </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल से बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जमे नीतीश कुमार ने इस दौरान राजनीतिक हवा का रुख भांपने की कमाल की काबिलियत दिखाई। इस बार मुद्दा उनकी खराब सेहत का है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस कारण उनकी अपनी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) पर उनकी कमजोर पकड़ से जुड़ी तरह-तरह की बातें हवा में तैर रही हैं। हाल ही में नीतीश के सार्वजनिक व्यवहार को ध्यान में रखते हुए बात करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यही कहा जा सकता है कि ये सिर्फ अफवाहें नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">16<span lang="hi" xml:lang="hi"> अक्तूबर को एक टीवी चैनल से बातचीत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह तो साफ कहा कि बिहार में </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> नवंबर को दो चरणों में होने वाला चुनाव एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मुख्यमंत्री कौन होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर उन्होंने कहा कि घटक दल चुनाव के बाद फैसला करेंगे। यह दो बातों का साफ संकेत है- पहला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कि बीजेपी अपने सहयोगी और उसके सबसे बड़े ‘चेहरे’ को कैसे आंक रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बिना आज भी वह बिहार में चल नहीं सकती और दूसरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेशक चुनाव तक उस व्यक्ति के साथ रहना उसकी बाध्यता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बाद में शायद वह उसकी पीठ में छुरा भोंक दे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में कितना दम-खम बचा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई नहीं जानता। कुछ विश्लेषक नीतीश की सत्ता में टिके रहने की काबिलियत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौका ताड़कर पाला बदलने की छवि और उनकी संदिग्ध वैचारिक प्रतिबद्धता के आधार पर भविष्यवाणी कर रहे हैं कि नीतीश सत्ता के शीर्ष पर बने रहेंगे। कुछ जानकार कह रहे हैं कि नीतीश की राजनीतिक पारी अंत के कगार पर है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> वह इसके लिए पार्टी में फैली गड़बड़ियों और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और ललन सिंह के नाम से जाने जाने वाले केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह की हरकतों को संकेत बता रहे हैं। ललन सिंह जुलाई </span>2021<span lang="hi" xml:lang="hi"> से दिसंबर </span>2023<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। उन्हें नीतीश विरोधियों के साथ हाथ मिला लेने के आरोपों में अध्यक्ष पद से हटाया गया था। ये दोनों नेता अब भी जेडीयू के साथ हैं लेकिन बीजेपी के करीबी माने जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस तरह की अफवाह है कि जेडीयू टूटने वाला है और पार्टी से खफा धड़े को चुनाव के बाद बीजेपी में जगह मिल जाएगी। पार्टी में नीतीश के वफादारों को इसका अंदाजा है और उनको डर है कि ऐसा न हो कि उनके पास मोलभाव करने का कोई रास्ता न रहे। एनडीए में सीटों के बंटवारे से पता चलता है कि नीतीश के कट्टर दुश्मन लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान को ऐसी सीटें दी गई हैं जिन पर जद(यू) का भी दावा है। इसी कारण नीतीश ने बागी तेवर अपना लिए हैं और चिराग की पार्टी को दी गई </span>29<span lang="hi" xml:lang="hi"> सीटों में से कुछ पर जेडीयू के उम्मीदवार उतार दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पासवान ने </span>2020<span lang="hi" xml:lang="hi"> का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा था। हालांकि वह सिर्फ एक ही विधानसभा सीट जीत पाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन माना जाता है कि उनकी पार्टी ने तब जेडीयू को अच्छा-खासा नुकसान पहुंचाया जिससे बीजेपी को गठबंधन और सरकार में तोलमोल की ज्यादा ताकत मिल गई। इस बात की मजबूत आशंकाओं को देखते हुए कि अगर एनडीए जीतता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नीतीश को मुख्यमंत्री पद से हटाया जा सकता है। उनके वफादारों ने बराबर मांग की है कि नीतीश को चुनाव के पहले ही मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए। लेकिन अब तक तो ऐसा नहीं हुआ है और आगे भी ऐसा होता नहीं दिख रहा। ऐसे में यह जानने के लिए इंतजार करना होगा कि क्या नीतीश के पास अब भी कोई तुरुप का इक्का है</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इंडिया ब्लॉक के सामने भी सीटों के तालमेल से जुड़ी अपनी चुनौतियां हैं। लेकिन अगर आप गोदी मीडिया के कोरस को सुनेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आपको इनका आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ऐसा मीडिया इंडिया ब्लॉक के घटक दलों में मतभेद का बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उदाहरण के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के मुकेश सहनी ज्यादा सीटें मांगने के कारण सुर्खियों में रहे। अफवाह तो यहां तक थी कि वह बीजेपी के ‘धनकुबेरों’ से तोलमोल कर रहे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस ने </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> सितंबर को राज्य के अति पिछड़ा समुदायों (ईबीसी) के लिए अपना </span>10-<span lang="hi" xml:lang="hi">बिंदुओं वाला घोषणापत्र ‘अति पिछड़ा न्याय संकल्प’ जारी किया। पार्टी के लिए ईबीसी की आवाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका प्रतिनिधित्व और उन्हें मजबूत करने की प्रतिबद्धता सिर्फ कहने की बात नहीं। ‘न्याय संकल्प’ उस नजरिये को जाहिर करने और नीतिगत इरादे का ऐलान है। कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के उसके साथी ईबीसी वोट की रणनीतिक कीमत समझते हैं। राज्य में इस समुदाय के वोटर एक तिहाई से ज्यादा हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह समझदारी मुकेश सहनी को अपने साथ रखने की कोशिशों में साफ दिखी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस आलेख को लिखे जाने तक इंडिया ब्लॉक ने सीटों पर तालमेल की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन साहनी ने राहुल गांधी को लिखे एक पत्र में गठबंधन के लिए अपनी प्रतिबद्धता जरूर जताई। उन्होंने साफ तौर पर लिखा कि मुद्दा यह नहीं था कि उनकी पार्टी को कितनी सीटें मिलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि “सांप्रदायिक और विभाजनकारी ताकतों से लड़ना” था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सीपीआई-एमएल नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने भी सहनी को साथ रखने की कोशिशों पर जोर देते हुए कहा कि बड़ी पार्टियों को गठबंधन की एकता बनाए रखने के लिए एक-दो सीटों को छोड़ना चाहिए और उनकी पार्टी भी ऐसा करने को तैयार है। कांग्रेस ने इस रुख का समर्थन किया। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के दखल के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरजेडी सहनी को </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> सीटें देने पर तैयार हो गया है। कुछ अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहनी को एक राज्यसभा सीट और दो एमएलसी देने की भी पेशकश की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दी फिल्मों में कभी सेट डिजाइनर के तौर पर काम करने वाले मुकेश सहनी ने </span>2015<span lang="hi" xml:lang="hi"> के विधानसभा चुनाव से पहले ‘निषाद विकास संघ’ बनाकर बीजेपी के लिए प्रचार किया था। लेकिन निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची से बाहर रखने के मामले में वह बीजेपी से अलग हो गए। </span>2018<span lang="hi" xml:lang="hi"> में उन्होंने ‘विकासशील इंसान पार्टी’ शुरू की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार में ईबीसी के तांती-तंतवा यानी पान समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले इंजीनियर इंद्र प्रकाश गुप्ता भी इंडिया ब्लॉक में शामिल हो गए हैं। एक वीडियो बयान में गुप्ता ने कहा कि उनकी इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) को तीन सीटें दी गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पर उनके उम्मीदवार पार्टी के ‘करणी’ चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा</span>, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">तीन से चार’ आरजेडी/कांग्रेस के चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने खुद सहरसा सीट से अपना नामंकन दाखिल किया है। यह याद रखा जाना चाहिए कि अप्रैल </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में गुप्ता ने पटना के गांधी मैदान में एक बड़ी ‘पान समाज अधिकार रैली’ आयोजित करके अपनी ताकत दिखाई थी। वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल कादिर का कहना है कि इंडिया ब्लॉक की रणनीति प्रतिनिधित्व के जरिये समावेशिता का संदेश देने की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह चुनाव बिहार में असली बदलाव की चाहत का भी टेस्ट हो सकता है। जहां आरजेडी नेता तेजस्वी यादव हर परिवार के लिए एक सरकारी नौकरी का वादा कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश कुमार चुनाव के ऐन पहले महिलाओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। </span>29<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त को महिला रोजगार योजना की घोषणा की गई और महिलाओं के बैंक खाते में सीधे </span>10,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये भेजना सबसे बड़ा आकर्षण है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मतदाता सूची की ‘सघन’ पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद जो अंतिम सूची तैयार की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें तमिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलुगु और कन्नड़ में रहस्यमयी एंट्री हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कई पते हैशटैग और अजीब कैरेक्टर में हैं। एक ही पते पर अब भी सैकड़ों वोटर रजिस्टर्ड हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि चुनाव आयोग की अपनी रूल बुक कहती है कि एक ही पते पर </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा वोटर होने पर उन्हें संदिग्ध मानकर उनका फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग ने रिपोर्टर्स कलेक्टिव के इस आरोप का जवाब देने की भी जहमत नहीं उठाई कि उसने बिहार की मतदाता सूची की ‘सफाई’ के लिए </span>2018<span lang="hi" xml:lang="hi"> से उसके पास उपलब्ध डी-डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल क्यों नहीं किया।</span></p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Oct 2025 17:04:23 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग में पढ़ाने हेतु विभिन्न विषय विशेषज्ञ करें 15 जून तक आवेदन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>भदोही  जून 2024ः- </strong>जिला समाज कल्याण अधिकारी डॉ0 एश्वर्य राजलक्ष्मी द्वारा पत्र के माध्यम से सभी को अवगत कराया गया कि शासनादेश के मुताबिक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र/छात्राओं को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना अन्तर्गत अनुभवी एवं योग्य विषय विशेषज्ञों हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किये जाते है। इच्छुक व्यक्ति अपना आवेदन पत्र सभी शैक्षिक एवं अनुभव के साथ मुख्यमंत्री निःशुल्क अभ्युदय कोचिंग केन्द्र-काशी नरेश राजकीय पी0जी0 कालेज ज्ञानपुर भदोही के ई-लाईब्ररी में किसी भी कार्यदिवस के अन्दर जून 2024 के अन्दर प्रस्तुत कर सकते है।</p>
<p>सिविल सेवा/राज्य सिविल सेवा हेतु विषय-इतिहास, भूगोल, राज्यव्यवस्था, अर्थव्यवस्था, एथिक्स, करेन्ट अफेयर्स, इनवायरमेंट, डिजास्टर</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142309/various-subject-experts-should-apply-till-june-15-to-teach"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/img-20240614-wa0837-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भदोही  जून 2024ः- </strong>जिला समाज कल्याण अधिकारी डॉ0 एश्वर्य राजलक्ष्मी द्वारा पत्र के माध्यम से सभी को अवगत कराया गया कि शासनादेश के मुताबिक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र/छात्राओं को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना अन्तर्गत अनुभवी एवं योग्य विषय विशेषज्ञों हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किये जाते है। इच्छुक व्यक्ति अपना आवेदन पत्र सभी शैक्षिक एवं अनुभव के साथ मुख्यमंत्री निःशुल्क अभ्युदय कोचिंग केन्द्र-काशी नरेश राजकीय पी0जी0 कालेज ज्ञानपुर भदोही के ई-लाईब्ररी में किसी भी कार्यदिवस के अन्दर जून 2024 के अन्दर प्रस्तुत कर सकते है।</p>
<p>सिविल सेवा/राज्य सिविल सेवा हेतु विषय-इतिहास, भूगोल, राज्यव्यवस्था, अर्थव्यवस्था, एथिक्स, करेन्ट अफेयर्स, इनवायरमेंट, डिजास्टर मैनेजमेंट, साईस इण्ड टेक्नोलॉजी, यूपी स्पेशल, कम्यूनिकेशन एण्ड इण्टर पर्सनल स्किल, बौद्धिक क्षमता, एलिमेन्टरी, मैथ, जनरल इंग्लिश, जनरल हिन्दी, पढ़ाने हेतु विषय विशषज्ञ आवेदन फार्म आवेदन के साथ आमंत्रित है। आईएएस, पीसीएस के लिए सम्बन्धित विषय में पी0जी0/नेट/पीएचडी अथवा सिविल/राज्य सिविल सेवा/प्रदेश न्यायिक सेवा  मुख्य परीक्षा में अवश्य प्रतिभाग किये हो।</p>
<p>एनडीए/सीडीएस हेतु विषय मैथ्स, इग्लिश, जनरल साईस, जी0के0, मेडिकल परीक्षा नीट, विषय-भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, इंजिनियरिंग परीक्षा जे0ई0ई0 विषय-मैथ्य से भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, को पढ़ाने हेतु विषय विशेषज्ञ सम्बन्धित विषय- पी0जी0/नेट/गेट/पीएचडी धारक हो।</p>
<p>उपरोक्त परीक्षाओं हेतु साक्षात कक्षाओं के संचालन हेतु योग्य एवं अनुभवी एवं प्रोफेशनल व्याख्याताओं की सेवाएं अतिथि व्याख्याता के रूप में ली जायेगी जो सम्बन्धित विषयक में उपर्युक अर्हता रखते हो। साथ ही प्रतिष्ठित कोचिंग में शिक्षण अनुभव को वरीयता दिया जायेगा। योग्य एवं अनुभवी व्याख्याताओं को जिला स्तर पर विशेषज्ञ चयन समिति की अनुशंसा से परीक्षण व्याख्यान ट्रायल लेंचर के उपरान्त परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्रो में सूचीबद्ध किया जायेगा।</p>
<p>व्याख्यान के लिए आमंत्रित किये जाने वाले विषय विशेषज्ञों/वार्ताकारों/व्याख्याताओं को प्रति व्याख्या दर 2000 अथवा कार्मिक विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत शासनादेश में निर्धारित प्राविधानों के अनुरूप मानदेय का भुगतान किया जायेगा। एक व्याख्यान की अवधि 90 मिनट होगी। एक अतिथि प्रवक्ता को प्रतिमाह अधिकतम 30 व्याख्यान अनुमन्य होगे। अधिक जानकारी के लिए कोर्स कोऑडिनेटर के मोबाइल नम्बर-9621347359 पर सम्पर्क कर सकते है।</p>]]>
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                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jun 2024 17:19:28 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
                    </dc:creator>
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                <title>मीरजापुर की राजनीति में भारी उलटफेर का दिन</title>
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                        <![CDATA[<div><strong>मीरजापुर।</strong> प्रसिद्ध उद्योगपति ओम प्रकाश चौरसिया जी की बेटी व राजेंद्र सिसोदिया की पुत्र वधु पूनम चौरसिया पूजा ने आज लगभग सैकड़ों समर्थकों के साथ मोदी जी की विचारधारा व भाजपा के कार्यों से प्रभावित हो भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया । भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा के जिला सम्मेलन में क्षेत्रीय उपाध्यक्ष काशी क्षेत्र एवं मीरजापुर की जिला प्रभारी सरोज कुशवाहा जी के नेतृत्व में मुख्य अतिथि,मुख्य वक्ता प्रदेश उपाध्यक्ष महिला मोर्चा कमलावती सिंह जी व विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय उपाध्यक्ष महिला मोर्चा कुसुम शर्मा जी की गरिमामई उपस्थिति में पूनम जी ने भाजपा का दामन थामा ।</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141464/a-day-of-huge-upheaval-in-the-politics-of-mirzapur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/4..,,,,,.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मीरजापुर।</strong> प्रसिद्ध उद्योगपति ओम प्रकाश चौरसिया जी की बेटी व राजेंद्र सिसोदिया की पुत्र वधु पूनम चौरसिया पूजा ने आज लगभग सैकड़ों समर्थकों के साथ मोदी जी की विचारधारा व भाजपा के कार्यों से प्रभावित हो भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया । भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा के जिला सम्मेलन में क्षेत्रीय उपाध्यक्ष काशी क्षेत्र एवं मीरजापुर की जिला प्रभारी सरोज कुशवाहा जी के नेतृत्व में मुख्य अतिथि,मुख्य वक्ता प्रदेश उपाध्यक्ष महिला मोर्चा कमलावती सिंह जी व विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय उपाध्यक्ष महिला मोर्चा कुसुम शर्मा जी की गरिमामई उपस्थिति में पूनम जी ने भाजपा का दामन थामा । महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष आभा पटेल की अध्यक्षता में यह सम्मेलन सम्पन्न हुआ।</div>
<div> </div>
<div>जिसमें NDA की संयुक्त सांसद प्रत्याशी अनुप्रिया पटेल भी मंचासीन रहीं। पूनम चौरसिया ने बताया कि आज भाजपा ने अपने विकास कार्यों और भविष्य की पुख्ता तैयारी से विपक्ष को मुद्दा विहीन कर दिया है । आज की जनता अब झूठे व कोरे आश्वासन से नहीं वरन राष्ट्रोपयोगी व विकास कार्यों को देखकर अपना चुनाव करती है । उन्होंने भरे मंच से सभी महिलाओं को मोदी जी की कल्याणकारी योजनाओं को गिनाया और बताया कि अब से पूर्व किसी भी प्रधानमंत्री ने केवल महिलाओं का प्रयोग वोट बैंक के रूप में ही किया था,पर आज हम समाज से लेकर सदन तक अपनी स्थिति देख सकते हैं ।</div>
<div> </div>
<div>चाहे वह तीन तलाक से छुटकारा, अपना मकान, गैस, इज्जत घर, महिला थाना, उचित चिकित्सा के साथ – साथ स्वयं सहायता समूह आदि कितनी योजनाएं सीधे हम महिलाओं को मोदी जी द्वारा मिल रही हैं । हम सभी का कर्तव्य है कि मोदी जी को और मजबूत बनाएं व खुद भी मजबूत बनें। और इस बार पुनः मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाये । कार्यक्रम का संचालन जिला उपाध्यक्ष महिला मोर्चा सुनीता शर्मा ने किया।</div>
<div> </div>
<div>उक्त कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला प्रभारी महिला मोर्चा, जिला महामंत्री भाजपा हरिशंकर सिंह पटेल,  आयुषी श्रीमाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य महिला मोर्चा, जिला उपाध्यक्ष भाजपा निर्मल राय जी, महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पिंकी सिंह प्रेमशिला सिंह जी, डीसीएफ चेयरमैन विजय कुमार वर्मा जी के साथ सैकड़ो लोग उपस्थित रहे । उक्त जानकारी जिला मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाश दूबे ने दिया।</div>
<div> </div>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/141464/a-day-of-huge-upheaval-in-the-politics-of-mirzapur</link>
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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 17:35:03 +0530</pubDate>
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                <title>एनडीए में नीतीश का कद घटा,चिराग का बढ़ा</title>
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                        <![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>  (नीरज शर्मा'भरथल') </strong></div>
<div>बिहार में बीजेपी 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बीजेपी के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का नंबर आता है जिसे चुनाव लड़ने के लिए बिहार में 16 लोकसभा सीटें मिली हैं। चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (लोकतांत्रिक) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को एक-एक सीट मिली है। चिराग से बगावत कर केंद्र सरकार में मंत्री पद तक का सफर तय करने वाले पशुपति पारस सीट शेयरिंग में खाली हाथ रह गए</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139636/nitishs-stature-in-nda-increased-by-ghatachirag"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/asfsda.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong> (नीरज शर्मा'भरथल') </strong></div>
<div>बिहार में बीजेपी 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बीजेपी के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का नंबर आता है जिसे चुनाव लड़ने के लिए बिहार में 16 लोकसभा सीटें मिली हैं। चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (लोकतांत्रिक) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को एक-एक सीट मिली है। चिराग से बगावत कर केंद्र सरकार में मंत्री पद तक का सफर तय करने वाले पशुपति पारस सीट शेयरिंग में खाली हाथ रह गए हैं। एनडीए में बिहार का सीट शेयरिंग फॉर्मूला भले ही लोकसभा चुनाव के लिए है परन्तु इसमें भविष्य की राजनीति के भी बड़े संकेत छिपे हैं। </div>
<div> </div>
<div>बिहार में बीजेपी न सिर्फ इस लोकसभा चुनाव बल्कि आगे के विधानसभा चुनावों के लिए बिसात भी साथ-साथ बिछाती जा रही है। जिसमें नीतीश के साथ औऱ नीतीश के बिना बीजेपी खुद को अपने दम पर बिहार में राजनीति करने के लिए तैयार कर रही है? जदयू को काबू में रखने के लिए बीजेपी ने चिराग पासवान पर खुलकर दांव खेला है और जातिय समीकरण साधने के लिए ओबीसी समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी को नीतीश की नई सरकार में डिप्टी सीएम का पद दिया है। वहीं स्वर्ण तबके में बैलेंस बनाने के लिए विजय सिन्हा को दूसरा डिप्टी सीएम बनाया है। बिहार में एनडीए का सीट शेयरिंग फॉर्मूला बिहार में बीजेपी की बदलती भूमिका का, बदलते तेवरों का संकेत भी है। नीतीश कुमार के फिर से साथ आने, एनडीए सरकार में डिप्टी सीएम बनने के ठीक बाद बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने साफ कहा था कि हमारा लक्ष्य बिहार में बीजेपी की सरकार है।</div>
<div> </div>
<div>लोकसभा चुनाव के सीट शेयरिंग फॉर्मूले में इसकी झलक भी दिख रही है। बिहार की सियासत में अब तक जेडीयू ही एनडीए में बड़े हिस्सेदार की भूमिका में रही है। 2009 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने बिहार की 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 20 पर पार्टी जीती थी। बीजेपी ने तब 15 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 12 जीती थी। इससे पहले 2004 के चुनाव में जेडीयू ने 24 और बीजेपी ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा था। 2019 के चुनाव में दोनों दल फिर साथ आए और तब बीजेपी-जेडीयू ने बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ा था परन्तु इस बार भाजपा 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) 16 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।</div>
<div> </div>
<div>दोनों ही दलों के बीच देखने में भले ही एक सीट का अंतर है लेकिन अब बीजेपी पहली बार बड़े हिस्सेदार की भूमिका में आई है। चिराग पासवान के रिश्ते नीतीश के साथ तल्ख रहे हैं। जेडीयू की गठबंधन में वापसी के बाद चिराग को 5 सीटें दे अधिक तवज्जो देना और अब सीट शेयरिंग में बीजेपी का अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना इन सब बातों को नीतीश कुमार की घटी ताकत से जोड़ कर देखा जा रहा है। </div>
<div> </div>
<div>साल 2014 के चुनाव में भाजपा अकेले लड़कर 22 सीटें जीती थी और नीतीश की जेडीयू दो सीटों पर सिमट गई थी। 2019 में दोनों दल जब साथ आए नीतीश बीजेपी के बराबर सीटों की मांग पर अड़ गए। बीजेपी को यह मांग माननी पड़ी और अपनी जीती सीटों में से पांच सीटें सहयोगियों के लिए छोड़नी पड़ी थीं। तब दो सांसदों वाली जेडीयू और 22 सांसदों वाली बीजेपी दोनों ही दलों ने चुनाव में 17-17 सीटों पर उम्मीदवार उतारे।</div>
<div> </div>
<div>बीजेपी के साथ सीट शेयरिंग की टेबल पर चिराग पासवान अपनी बात मनवाने में सफल रहे। चिराग पासवान की पार्टी को एनडीए में पांच सीटें मिली हैं। रामविलास पासवान के निधन को अभी एक साल भी नहीं हुआ  था कि पशुपति पारस ने चिराग को पार्टी के अध्यक्ष और अन्य सभी पदों से हटा नाम-निशान पर दावा कर दिया था। एलजेपी के कोर वोटर पासवान समाज में इसका गलत संदेश गया और चिराग को सहानुभूति भी मिली। चिराग  अपनी रैलियों में भीड़ जुटाकर यह संदेश देने में भी सफल रहे कि पासवान समाज उनमें ही रामविलास का वारिस देखता है। बिहार में पासवानों की जनसंख्या 69,43,000 है जो कुल जनसंख्या का 5.311% है। एक भी सीट ना देने पर पशुपति पारस ने इसे अपने और अपनी पार्टी के साथ नाइंसाफी की बताया है।</div>
<div> </div>
<div>पशुपति कुमार पारस ने स्थिति को पहले ही भांपते हुए एनडीए में सीट बंटवारे की घोषणा के 1 दिन पहले भाजपा पर दबाब बनाने के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नहीं माने और आईएनडीआईए गठबंधन से बात करने के लिए पटना चले गए। बुधवार को उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू को खाद्य प्रसंस्करण का भी प्रभार दे दिया गया। पारस की पार्टी को एनडीए ने जहां एक भी सीट नहीं दी है तो वहीं उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी के दलों को एक-एक सीट दे  यह संदेश देने की कोशिश की है कि एनडीए अपने छोटे से छोटे सहयोगी का भी पूरा खयाल रखता है। इस सीट बंटवारे के गणित को देख स्पष्ट लगता है कि एनडीए में नीतीश कुमार का कद पहले जैसा नही रहा। नीतीश की पलटने की आदत को देखते हुए भाजपा खुद को और अपने बफादार छोटे दलों खास कर के एलजेपी को बिहार में ज्यादा मजबूती से खड़ा करना चाहती है।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Mar 2024 15:50:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>“ मैं आज जगतियाल और शिवमोगा में रैलियों को संबोधित करूंगा: PM Modi </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>Nation:</strong> दक्षिण भारत में अपने कई कार्यक्रमों से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दक्षिण भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में असाधारण उत्साह है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी लोकसभा चुनावों में अहम लाभ हासिल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री सोमवार को कर्नाटक के शिवमोगा और तेलंगाना के जगतियाल में रैलियों को संबोधित करेंगे जबकि तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक रोड शो करेंगे। </p>
<p>मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “ मैं आज जगतियाल और शिवमोगा में रैलियों को संबोधित करूंगा। बाद में शाम को कोयंबटूर में रोड शो में</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139518/65f7ed4a80a36"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/pm-modi_large_1251_154.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Nation:</strong> दक्षिण भारत में अपने कई कार्यक्रमों से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दक्षिण भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में असाधारण उत्साह है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी लोकसभा चुनावों में अहम लाभ हासिल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री सोमवार को कर्नाटक के शिवमोगा और तेलंगाना के जगतियाल में रैलियों को संबोधित करेंगे जबकि तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक रोड शो करेंगे। </p>
<p>मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “ मैं आज जगतियाल और शिवमोगा में रैलियों को संबोधित करूंगा। बाद में शाम को कोयंबटूर में रोड शो में शामिल होऊंगा। चाहे तेलंगाना हो, कर्नाटक हो या तमिलनाडु, राजग के पक्ष में असाधारण उत्साह है।” कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य बीएस येदियुरप्पा के गृह क्षेत्र शिवमोगा में प्रधानमंत्री की रैली ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी के असंतुष्ट नेता केएस ईश्वरप्पा ने शिमोगा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की योजना की घोषणा की है, क्योंकि उनके बेटे को हावेरी सीट से पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। </p>
<p>भाजपा ने येदियुरप्पा के बड़े बेटे बी.वाई राघवेंद्र को शिमोगा से मैदान में उतारा है। मोदी की तेलंगाना में निजामाबाद लोकसभा क्षेत्र के जगतियाल में होने वाली रैली का असर पड़ोसी करीमनगर लोकसभा सीट पर भी पड़ सकता है। निवर्तमान लोकसभा में निजामाबाद और करीमनगर दोनों सीटों पर भाजपा का ही कब्जा है। भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में तेलंगाना की 17 लोकसभा सीट में से चार पर जीत हासिल की थी। </p>
<p>कोयंबटूर में मोदी का रोड शो मद्रास उच्च न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद हो रहा है। पुलिस ने ‘सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील’ इलाका होने और परीक्षाओं होने का कारण बताकर रोड शो की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। जिले ने अतीत में भाजपा का समर्थन किया है। यहां से 1990 के दशक में सीपी राधाकृष्णन भाजपा के टिकट पर दो बार लोकसभा पहुंचे थे जो फिलहाल झारखंड के राज्यपाल हैं। वहीं, 2021 के तमिलनाडु विधानसभा पार्टी की महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वी.श्रीनिवासन ने जीत दर्ज की थी। </p>
<p>प्रधानमंत्री के तीन कार्यक्रम संकेत करते हैं कि भाजपा लोकसभा चुनाव में 400 सीटें जीतने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक तौर पर पैठ बनाने की कोशिश में है। पार्टी का लक्ष्य पांच दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के अलावा केंद्र शासित पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी अच्छी बढ़त हासिल करना है। निवर्तमान सदन में, भाजपा का केरल और तमिलनाडु से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जहां क्रमशः 20 और 39 लोकसभा सीट हैं।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Mar 2024 13:04:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> BJP  को भारी पड़ सकता है नीतीश को  NDA में शामिल करना-  प्रशांत किशोर का बड़ा बयान</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>Bihar Politics: </strong>बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के इस्तीफे देने के बाद देश की राजनीति में खलबली मच गई है। जहां एक तरफ भाजपा के नेता नीतीश कुमार को बधाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन के नेता उनपर लगातार हमलावर हैं। इसी बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर  (Prashant Kishore) का भी बयान सामने आया है। </p>
<p><strong>"आज सभी का पलटू राम आया सामने"</strong><br />प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के द्वारा सीएम पद से इस्तीफा देने पर कहा कि आज जो घटना क्रम हुआ है वह हम पहले से कह रहे थे कि</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138437/including-nitish-in-nda-may-prove-costly-for-bjp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-01/2024_1image_14_30_415539614djdj-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Bihar Politics: </strong>बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के इस्तीफे देने के बाद देश की राजनीति में खलबली मच गई है। जहां एक तरफ भाजपा के नेता नीतीश कुमार को बधाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन के नेता उनपर लगातार हमलावर हैं। इसी बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर  (Prashant Kishore) का भी बयान सामने आया है। </p>
<p><strong>"आज सभी का पलटू राम आया सामने"</strong><br />प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के द्वारा सीएम पद से इस्तीफा देने पर कहा कि आज जो घटना क्रम हुआ है वह हम पहले से कह रहे थे कि यह होगा। नीतीश कुमार पलटू राम थे यह पूरी दुनिया जानती थी लेकिन आज के घटना क्रम में सभी का पलटू राम सामने आया है। नीतीश कुमार के साथ भाजपा और राजद भी पलटू राम है। जो भाजपा नीतीश कुमार को गाली दे रहे थे अब उनको सुशासन दिखेगा और राजद के लोग अब नीतीश को गाली देंगे। उन्होंने कहा कि एनडीए में नीतीश के शामिल होने पर भाजपा को लोकसभा चुनाव में जरूर फायदा होगा लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान होगा यह लिखकर रख लिजिए। </p>
<p><strong>2022 में BJP से नाता तोड़ने के बाद महागठबंधन में शामिल हुए थे नीतीश </strong><br />गौरतलब हो कि अगस्त 2022 में भाजपा से नाता तोड़ने के बाद नीतीश कुमार लालू प्रसाद की पार्टी राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल हो गए थे। उस वक्त नीतीश ने भाजपा पर जद(यू) में विभाजन की कोशिश करने का आरोप लगाया था। नीतीश कुमार ने भाजपा को केंद्र में सत्ता से उखाड फेंकने के लिए देश भर में सभी विपक्षी दलों को एक साथ लाने का अभियान शुरू किया जिसकी परिणति विपक्षी गठबंधन ‘‘इंडिया'' के गठन के रूप में हुई। वहीं अब नीतीश के राजग में लौटने से विपक्षी गठबंधन को भी बड़ा झटका लगेगा। नीतीश ने एक तरह से तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए यह घोषणा की थी कि राजद नेता 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का नेतृत्व करेंगे। नीतीश की इस घोषणा के बाद जद(यू) में नाराजगी फैल गई जिसके कारण उपेन्द्र कुशवाहा जैसे उनके करीबी सहयोगी को पार्टी छोड़नी पड़ी। </p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jan 2024 15:13:10 +0530</pubDate>
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