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                <title>सोनिया गांधी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सोनिया गांधी RSS Feed</description>
                
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                <title>सोनिया गांधी और एनएसी को लेकर ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी से सियासी विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े माने जाने वाले मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ के ताजा संपादकीय में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) को लेकर की गई टिप्पणी से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। संपादकीय में एनएसी के कार्यकाल और उससे जुड़े राजनीतिक-सामाजिक समूहों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं तथा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संपादकीय में दावा किया गया है कि अलग-अलग किसान, छात्र और अन्य आंदोलनों के पीछे इस्लामवादी, माओवादी, मिशनरी, सामाजिक कार्यकर्ता, गैर सरकारी संगठन, कुछ बुद्धिजीवी, कानूनी पेशेवर, फिल्म जगत और मीडिया के कुछ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186690/political-controversy-over-mindful-naxal-comment-regarding-sonia-gandhi-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/untitled_design_5_1-sixteen_nine.webp" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े माने जाने वाले मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ के ताजा संपादकीय में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) को लेकर की गई टिप्पणी से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। संपादकीय में एनएसी के कार्यकाल और उससे जुड़े राजनीतिक-सामाजिक समूहों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं तथा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संपादकीय में दावा किया गया है कि अलग-अलग किसान, छात्र और अन्य आंदोलनों के पीछे इस्लामवादी, माओवादी, मिशनरी, सामाजिक कार्यकर्ता, गैर सरकारी संगठन, कुछ बुद्धिजीवी, कानूनी पेशेवर, फिल्म जगत और मीडिया के कुछ हिस्सों का गठजोड़ काम कर रहा है। संपादकीय में इन समूहों की गतिविधियों को हिंदुत्व के खिलाफ व्यापक अभियान से जोड़ने का प्रयास किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस टिप्पणी के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस शब्द के इस्तेमाल के बाद विपक्ष की ओर से भी सवाल उठाए गए थे कि इसका इस्तेमाल किन लोगों के लिए किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विपक्ष के सवालों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा है। रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच पर इस शब्द की अपनी व्याख्या देते हुए कहा था कि इसमें वे लोग शामिल हैं जो माओवादियों का समर्थन करते हैं, संविधान को नहीं मानते, अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं या अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं तथा कथित तौर पर पूर्वोत्तर को देश से अलग करने की कोशिश करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">‘ऑर्गनाइजर’ के संपादकीय में एनएसी के संदर्भ में की गई टिप्पणी ने इस बहस को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द की राजनीतिक और वैचारिक परिभाषा क्या है तथा इसके दायरे में किन विचारों और समूहों को रखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनएसी का गठन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में हुआ था और सोनिया गांधी इसकी अध्यक्ष थीं। संपादकीय में एनएसी की भूमिका और उससे जुड़े राजनीतिक प्रभावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, संपादकीय में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 20:58:08 +0530</pubDate>
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