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                <title>School Conditions - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>बदहाल स्कूलों के वीडियो बनाने पर 8 ज़िलों में FIR, मेरठ में 2 गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति को वीडियो के जरिए सामने लाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मामला सामने आया है। प्रदेश के कम से कम आठ जिलों में ऐसे वीडियो बनाए जाने और सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद FIR दर्ज की गई हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मेरठ में सरकारी स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाने वाले दो लोगों को जेल भी भेजा गया है। वहीं, कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने बाहरी लोगों, YouTubers और सोशल मीडिया यूजर्स के स्कूल परिसर में बिना अनुमति प्रवेश कर फोटो-वीडियो</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186505/fir-in-8-districts-2-arrested-in-meerut-for-making"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/meerut-syam-mirja-1787568790219_m.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति को वीडियो के जरिए सामने लाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मामला सामने आया है। प्रदेश के कम से कम आठ जिलों में ऐसे वीडियो बनाए जाने और सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद FIR दर्ज की गई हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मेरठ में सरकारी स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाने वाले दो लोगों को जेल भी भेजा गया है। वहीं, कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने बाहरी लोगों, YouTubers और सोशल मीडिया यूजर्स के स्कूल परिसर में बिना अनुमति प्रवेश कर फोटो-वीडियो बनाने पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। हाथरस, बुलंदशहर, देवरिया, मेरठ, नोएडा, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर और वाराणसी में सरकारी स्कूलों की स्थिति से संबंधित वीडियो सामने आने के बाद मामले दर्ज किए गए हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसी बीच कई जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने स्कूल परिसरों में बिना अनुमति बाहरी लोगों के प्रवेश और फोटो या वीडियो बनाने को लेकर आदेश जारी किए हैं। योगी सरकार इस समय इस जिस बात से सबसे ज्यादा परेशान है, वो है करीब 10 साल से यूपी में बीजेपी सरकार है और उसकी नाकामी इस तरह सामने आ रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अधिकारियों ने इन प्रतिबंधों के पीछे विद्यार्थियों की सुरक्षा, पढ़ाई में व्यवधान और स्कूल के आधिकारिक रिकॉर्ड तक अनधिकृत पहुंच जैसी वजहें बताई हैं। फर्रुखाबाद के बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 17 अप्रैल को ऐसा पहला सर्कुलर जारी किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग पत्रकार बनकर सरकारी स्कूलों में प्रवेश कर रहे हैं, रिकॉर्ड देख रहे हैं और बच्चों तथा स्कूल की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। इसके बाद शामली, अयोध्या, बलरामपुर, आगरा, हापुड़ और बिजनौर समेत अन्य जिलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन घटनाओं को लेकर विवाद तब और बढ़ा जब CJP ने 15 अगस्त से 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू किया। अभियान के तहत अभिजीत दिपके ने स्वयंसेवकों से सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की स्थिति रिकॉर्ड करने और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील की थी। इसके बाद अलग-अलग जिलों से FIR की खबरें सामने आने लगीं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की इमारतों, शौचालयों, पेयजल, पढ़ाई की सामग्री और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सार्वजनिक करना बताया गया है। दूसरी ओर, प्रशासन और शिक्षा विभाग का कहना है कि स्कूल परिसरों में बिना अनुमति प्रवेश करना और बच्चों या रिकॉर्ड की वीडियो बनाना नियमों का उल्लंघन हो सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">विवाद के बीच कुछ सरकारी स्कूल शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि समस्या केवल जर्जर भवनों, शौचालयों या अन्य बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है। पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री को लेकर भी समस्याएं हैं। एक शिक्षक ने बताया कि अगस्त का महीना खत्म होने के करीब होने के बावजूद पूरा अध्ययन-सामग्री सेट उपलब्ध नहीं हुआ था। उदाहरण के तौर पर कक्षा 11 की इतिहास की तीन पुस्तकों में से पहली पुस्तक के उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। शिक्षक ने यह भी कहा कि वे खुलकर शिकायत नहीं कर सकते और बाहर की किताबों का इस्तेमाल करने पर शिक्षा अधिकारियों की ओर से कार्रवाई का डर रहता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले में फिलहाल दर्ज FIR और लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। सरकार ने आधिकारिक रूप से इस व्यापक कार्रवाई को आलोचना दबाने की कार्रवाई नहीं बताया है। लेकिन एक साथ कई जिलों में स्कूलों के वीडियो बनाने वालों के खिलाफ FIR और बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध के निर्देशों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक संस्थानों की पारदर्शिता और सरकारी स्कूलों की निगरानी को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 21:16:20 +0530</pubDate>
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