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                <title>Block 8 - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>पार्क प्रकरण में मुख्यमंत्री कार्यालय का हस्तक्षेप, नगर विकास विभाग को भेजा गया मामला</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कानपुर। </strong>गोविंद नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क  में कथित अतिक्रमण, धार्मिक संरचना एवं नवीन निर्माण के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रकरण को नगर विकास तथा नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव को अग्रसारित किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से यह कार्रवाई 18 अगस्त 2026 को की गई है।</div>
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<div>जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता प्रकाश वीर आर्य की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 22 अप्रैल 2026 को सार्वजनिक पार्क को अतिक्रमणमुक्त कर उसके मूल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186418/chief-ministers-offices-intervention-in-park-issue-case-sent-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002244502.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कानपुर। </strong>गोविंद नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क  में कथित अतिक्रमण, धार्मिक संरचना एवं नवीन निर्माण के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रकरण को नगर विकास तथा नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव को अग्रसारित किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से यह कार्रवाई 18 अगस्त 2026 को की गई है।</div>
<div> </div>
<div>जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता प्रकाश वीर आर्य की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 22 अप्रैल 2026 को सार्वजनिक पार्क को अतिक्रमणमुक्त कर उसके मूल स्वरूप में बहाल करने तथा पार्क की भूमि का उपयोग पार्क/खेल मैदान के रूप में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।</div>
<div> </div>
<div>शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद जिलाधिकारी कार्यालय को भेजे गए प्रकरण में उद्यान विभाग द्वारा 21 जुलाई 2026 को ऐसी जांच आख्या प्रस्तुत की गई, जिसमें विवादित निर्माण को ‘पूर्व से निर्मित मंदिर’ बताया गया, जबकि उनके अनुसार निरीक्षण के समय भी संबंधित संरचना पर गुंबद का निर्माण कार्य चल रहा था और नवीन निर्माण के प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद थे।</div>
<div> </div>
<div>शिकायत में जांच आख्या पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि यदि संबंधित भूमि नगर निगम/केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क/ओपन स्पेस के रूप में दर्ज है तो विवादित निर्माण के निर्माण वर्ष, आयु, स्वीकृति, अनुमति तथा वैधानिक अभिलेखों का परीक्षण किया जाना चाहिए था। केवल स्थल का फोटो लेकर किसी निर्माण को ‘पूर्व से निर्मित’ बता देना अभिलेखीय एवं निष्पक्ष जांच का विकल्प नहीं हो सकता।</div>
<div>प्रकाश वीर आर्य ने मुख्यमंत्री कार्यालय से 21 जुलाई की जांच आख्या को निरस्त कर स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी से पुनः जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि विवादित निर्माण को ‘पूर्व से निर्मित मंदिर’ बताने का आधार स्पष्ट किया जाए और यह बताया जाए कि इसके समर्थन में कौन-कौन से सरकारी अभिलेख, स्वीकृति, अनुमति अथवा अन्य वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध हैं।</div>
<div> </div>
<div>शिकायत में पार्क में कथित अतिक्रमण एवं नवीन निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और पूर्व एवं वर्तमान कार्यप्रणाली की भी जांच कर व्यक्तिगत जवाबदेही निर्धारित करने की मांग की गई है।</div>
<div> </div>
<div>शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री कार्यालय से माननीय हाईकोर्ट के 22 अप्रैल 2026 के आदेश का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराने तथा पार्क को सभी अवैध अतिक्रमण एवं नवीन निर्माण से मुक्त कर उसके मूल स्वरूप में बहाल कराने का भी अनुरोध किया है।</div>
<div> </div>
<div>मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा 18 अगस्त को प्रकरण नगर विकास विभाग के उच्च अधिकारियों को अग्रसारित किए जाने के बाद अब इस मामले में शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 17:28:13 +0530</pubDate>
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