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                <title>International - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>International RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पाकिस्तान  में इमरान खान और शरीफ  ने किया अपनी-अपनी जीत का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International news-</strong></p>
<p>  </p>
<p>जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ने देश के आम चुनाव में शुक्रवार को अपनी जीत का दावा किया और परिणाम में धांधली करने के लिए चुनाव परिणामों की घोषणा में देरी किए जाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज' (पीएमएल-एन) ने भी बृहस्पतिवार को हुए चुनाव में अपनी जीत का दावा किया।</p>
<p>इमरान खान की पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआई) ने एक बयान जारी कर पीएमएल-एन के प्रमुख नवाज शरीफ से अपनी हार स्वीकार करने को कहा। शरीफ को देश की शक्तिशाली सेना का समर्थन प्राप्त है। पीएमएल-एन ने पीटीआई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138627/imran-khan-and-sharif-claimed-their-respective-victories-in-pakistan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/2024_2image_13_39_436549021imran-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International news-</strong></p>
<p> </p>
<p>जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ने देश के आम चुनाव में शुक्रवार को अपनी जीत का दावा किया और परिणाम में धांधली करने के लिए चुनाव परिणामों की घोषणा में देरी किए जाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज' (पीएमएल-एन) ने भी बृहस्पतिवार को हुए चुनाव में अपनी जीत का दावा किया।</p>
<p>इमरान खान की पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआई) ने एक बयान जारी कर पीएमएल-एन के प्रमुख नवाज शरीफ से अपनी हार स्वीकार करने को कहा। शरीफ को देश की शक्तिशाली सेना का समर्थन प्राप्त है। पीएमएल-एन ने पीटीआई की इस मांग को अस्वीकार कर दिया और चुनाव में अपनी जीत का दावा किया। पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ईसीपी) ने धांधली और छिटपुट हिंसा के आरोपों के बीच बृहस्पतिवार को मतदान समाप्त होने के 10 घंटे से भी अधिक समय बाद शुक्रवार देर रात चुनावी परिणामों की घोषणा शुरू की। मतगणना अब भी जारी है। पाकिस्तान में इस चुनाव के लिए दर्जनों दल मैदान में उतरे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला खान की पीटीआई तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) और बिलावल जरदारी भुट्टो की 'पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी' (पीपीपी) के बीच है। </p>
<p><br />पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में हैं और उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध है। खान (71) की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रत्याशी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं क्योंकि देश के उच्चतम न्यायालय ने उनकी पार्टी को उसके चुनाव चिह्न क्रिकेट का 'बल्ला' से वंचित करने के निर्वाचन आयोग के फैसले को बरकरार रखा था। नेशनल असेंबली (एनसी) की 336 सीट में से 266 पर ही मतदान कराया जाता है लेकिन बाजौर में हमले में एक उम्मीदवार की मौत हो जाने के बाद एक सीट पर मतदान स्थगित कर दिया गया था। अन्य 60 सीट महिलाओं के लिए और 10 अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं और ये जीतने वाले दलों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर आवंटित की जाती हैं। नयी सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 265 सीट में से 133 सीट जीतनी होंगी। </p>
<p><br />पीटीआई ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर दावा किया उसने प्रपत्र 45 से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 265 में से 150 से अधिक एनए सीट जीत ली हैं। प्रपत्र 45 निम्नतम स्तर पर चुनाव परिणामों का प्राथमिक स्रोत हैं और ये हर मतदान केंद्र में प्रत्येक उम्मीदवार के मतों को दर्शाते हैं। पार्टी ने कहा कि संघीय, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में भी स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार गठन के लिए उसकी स्थिति मजबूत है। लेकिन देर रात नतीजों में हेरफेर करना पूरी तरह से शर्मनाक है और जनादेश का खुलेआम उल्लंघन है। पाकिस्तान के लोग धांधली वाले नतीजों को पूरी तरह खारिज करते हैं। दुनिया देख रही है।'' </p>
<p><br />उसने निर्वाचन अधिकारियों पर परिणामों में हेरफेर करने का आरोप लगाया। पार्टी ने उन कुछ रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिनमें दावा किया गया है कि पीटीआई के उम्मीदवार अब विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अचानक हार रहे हैं, जबकि वे पहले ही (इन क्षेत्रों में) स्पष्ट बहुमत से जीत चुके थे।'' पीटीआई ने एक और बयान जारी कर शरीफ से अपनी हार स्वीकार करने को कहा। उसने 'एक्स' पर लिखा- नवाज शरीफ थोड़ी गरिमा दिखाए, हार स्वीकार कीजिए। पाकिस्तान की जनता आपको कभी स्वीकार नहीं करेगी। लोकतांत्रिक नेता के रूप में विश्वसनीयता हासिल करने का यह एक सुनहरा अवसर है। दिनदहाड़े डकैती को पाकिस्तान बड़े पैमाने पर खारिज कर देगा।'' पीएमएल-एन ने पीटीआई के जीत के दावे को खारिज किया और अपनी जीत का दावा किया। </p>
<p><br />पार्टी नेता इशाक डार के अनुसार, पीएमएलएन चुनाव प्रकोष्ठ के संकलित आंकड़ों और सार्वजनिक रूप से पहले से ही उपलब्ध परिणामों के आधार पर पीएमएलएन नेशनल असेंबली में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी और पंजाब विधानसभा में स्पष्ट बहुमत वाली पार्टी के रूप में उभरी है। समय से पहले और पक्षपातपूर्ण अटकलों'' से बचना चाहिए क्योंकि ईसीपी ने सभी परिणामों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Feb 2024 11:11:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> पाकिस्तान ने चीन से हाथ फैला के मांगी 2 अरब डॉलर की भिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंटरनेशनल डेस्क.</strong> पाकिस्तान इस समय वित्तीय संकट से जूझ रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवर उल हक काकर ने चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से 2 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मांगी है। काकर की सरकार ने चीनी प्रधान मंत्री ली कियांग से अनुरोध किया है कि 23 मार्च, 2024 को चीन से ऋण के लिए जमा करने का समय पूरा होते ही ऋण को वापस ले लिया जाए।</p>
<p>खबर के अनुसार, अनवर उल हक काकर ने पत्र में आर्थिक संकट में पाकिस्तान की मदद के लिए चीन का आभार जताया। नकदी संकट से जूझ रहे देश को चीन से कुल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138444/pakistan-extended-its-hands-and-asked-for-alms-of-2"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-01/2024_1image_13_09_110314684pakistan-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इंटरनेशनल डेस्क.</strong> पाकिस्तान इस समय वित्तीय संकट से जूझ रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवर उल हक काकर ने चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से 2 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मांगी है। काकर की सरकार ने चीनी प्रधान मंत्री ली कियांग से अनुरोध किया है कि 23 मार्च, 2024 को चीन से ऋण के लिए जमा करने का समय पूरा होते ही ऋण को वापस ले लिया जाए।</p>
<p>खबर के अनुसार, अनवर उल हक काकर ने पत्र में आर्थिक संकट में पाकिस्तान की मदद के लिए चीन का आभार जताया। नकदी संकट से जूझ रहे देश को चीन से कुल चार अरब डॉलर का कर्ज मिला था, जिससे देश पर बाहरी कर्ज भुगतान का दबाव कम हुआ और विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर हुआ। इस महीने के शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान के लिए दो अरब डॉलर का कर्ज रोक दिया था। हालांकि, सऊदी अरब ने पाकिस्तान स्टेट बैंक (एसबीपी) के पास पांच अरब डॉलर जमा कराए हैं। अंतरिम सरकार ने 1.2 अरब डॉलर की अंतिम ऋण किस्त के लिए बातचीत के लिए इस महीने एक नया मिशन भेजने का अनुरोध किया है। यह मिशन आईएमएफ से न केवल कर्ज की अंतिम किस्त लेने के लिए जरूरी है, बल्कि एक नए दीर्घकालिक ऋण कार्यक्रम के लिए बातचीत शुरू करने के लिए भी जरूरी है।</p>
<p>पूर्व वित्त मंत्री इशाक डार ने कहा कि अगर उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) चुनाव जीतती है और सरकार बनाती है, तो नए आईएमएफ कार्यक्रम के बारे में जल्द से जल्द फैसला लिया जाएगा। अगर उनकी पार्टी आईएमएफ के ऋण कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का फैसला करती है, तो वह तुरंत कमर कसने वाले कदम उठाएंगे। </p>
<p><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jan 2024 13:42:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस और जर्मनी समेत कई देशों ने किया प्रदर्शन, गाजा में हो रहे बमबारी को रोकने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पेरिस। </strong>फ्रांस की राजधानी पेरिस, जर्मनी की राजधानी बर्लिन और अन्य यूरोपीय शहरों में फलस्तीनी समर्थक हजारों लोगों ने गाजा में इजराइली बमबारी रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन इजराइल-हमास युद्ध में हताहतों की बढ़ती संख्या और गहराते मानवीय संकट को लेकर यूरोप के खासकर उन देशों में बढ़ रहे असंतोष को दर्शाते हैं, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है। गाजा में हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजराइल-हमास युद्ध में मारे गए फलस्तीनियों की संख्या बढ़कर 9,448 हो गई है।</p>
<p>गाजा में 24,173 और वेस्ट बैंक में 2,200 फलस्तीनी घायल हुए हैं। इजराइल में 1,400 से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136730/many-countries-including-france-and-germany-demonstrated-and-demanded-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/paris_large_1228_80.webp" alt=""></a><br /><p><strong>पेरिस। </strong>फ्रांस की राजधानी पेरिस, जर्मनी की राजधानी बर्लिन और अन्य यूरोपीय शहरों में फलस्तीनी समर्थक हजारों लोगों ने गाजा में इजराइली बमबारी रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन इजराइल-हमास युद्ध में हताहतों की बढ़ती संख्या और गहराते मानवीय संकट को लेकर यूरोप के खासकर उन देशों में बढ़ रहे असंतोष को दर्शाते हैं, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है। गाजा में हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजराइल-हमास युद्ध में मारे गए फलस्तीनियों की संख्या बढ़कर 9,448 हो गई है।</p>
<p>गाजा में 24,173 और वेस्ट बैंक में 2,200 फलस्तीनी घायल हुए हैं। इजराइल में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इनमें से अधिकतर लोगों की मौत सात अक्टूबर को हमास के शुरुआती हमले में हुई। इसी हमले के बाद से यह युद्ध शुरू हुआ है। इन हमलों में करीब 2,50,000 इजराइली और गाजा में 15 लाख से अधिक फलस्तीनी विस्थापित हुए हैं। इसके अलावा गाजा में कम से कम 241 लोगों को बंधक बनाया गया है।</p>
<p>गाजा में इजराइल की जवाबी कार्रवाई के विरोध में पेरिस की एक रैली में हजारों प्रदर्शनकारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने गाजा में तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया और कुछ लोगों ने ‘‘इजराइल, हत्यारा’’ के नारे लगाए। मध्य लंदन में प्रदर्शनकारियों ने ‘‘संघर्ष विराम अभी करो’’ और ‘‘मुझे विश्वास है कि हम जीतेंगे’’ जैसे नारे लगाते हुए सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। पेरिस में कुछ प्रदर्शनकारियों ने ‘‘गाजा में नरसंहार रोको’’ के बैनर दिखाए और फलस्तीनी झंडे थामे कई लोगों ने ‘‘फलस्तीन जीवित रहेगा, फलस्तीन जीतेगा’’ के नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ‘‘मैक्रों की मिलीभगत’’ के नारे लगाते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर भी निशाना साधा।</p>
<p>पेरिस के पुलिस प्रमुख ने एक निश्चित मार्ग पर प्रदर्शन की अनुमति दी लेकिन साथ ही कहा कि यहूदी विरोधी या आतंकवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाले किसी भी प्रकार के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमास के इजराइल पर सात अक्टूबर को किए गए हमले के बाद से यूरोप में यहूदी विरोधी हमलों में तेजी देखी गई है। बर्लिन में पूर्व में फलस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों के हिंसक हो जाने के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लगभग 1,000 पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया। </p>
<p>जर्मन समाचार एजेंसी ‘डीपीए’ ने बताया कि लगभग 6,000 प्रदर्शनकारियों ने जर्मनी की राजधानी के बीचों-बीच मार्च निकाला। पुलिस ने ऐसे किसी भी प्रकार के सार्वजनिक या लिखित बयानों पर प्रतिबंध लगा दिया जो यहूदी विरोधी या इजराइल विरोधी हों या हिंसा या आतंकवाद का महिमामंडन करते हों। लंदन में सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन करने के बीच मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि उसके अधिकारियों ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट और इटली के मिलान शहर में भी हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/136730/many-countries-including-france-and-germany-demonstrated-and-demanded-to</link>
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                <pubDate>Sun, 05 Nov 2023 13:22:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्लादिमीर पुतिन  के फैसले से बढ़ा  परमाणु हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International news:</strong>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के रूस के अनुसमर्थन को रद्द करने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए। 1996 की संधि परमाणु हथियारों के लाइव परीक्षणों सहित सभी परमाणु विस्फोटों को गैरकानूनी घोषित करती है, हालांकि यह कभी लागू नहीं हुई क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन सहित कुछ प्रमुख देशों ने कभी इसकी पुष्टि नहीं की। पश्चिम ने रूस पर पिछले फरवरी में यूक्रेन पर हमला शुरू करने के बाद से लापरवाह परमाणु बयानबाजी का आरोप लगाया है।</p>
<p><br />पुतिन ने पिछले सप्ताह बैलिस्टिक मिसाइल अभ्यास का निरीक्षण किया था, जिसे रक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136616/vladimir-putins-decision-increases-the-risk-of-nuclear-attack"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/putin_large_1544_19.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International news:</strong>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के रूस के अनुसमर्थन को रद्द करने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए। 1996 की संधि परमाणु हथियारों के लाइव परीक्षणों सहित सभी परमाणु विस्फोटों को गैरकानूनी घोषित करती है, हालांकि यह कभी लागू नहीं हुई क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन सहित कुछ प्रमुख देशों ने कभी इसकी पुष्टि नहीं की। पश्चिम ने रूस पर पिछले फरवरी में यूक्रेन पर हमला शुरू करने के बाद से लापरवाह परमाणु बयानबाजी का आरोप लगाया है।</p>
<p><br />पुतिन ने पिछले सप्ताह बैलिस्टिक मिसाइल अभ्यास का निरीक्षण किया था, जिसे रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने एक अज्ञात दुश्मन के खिलाफ बड़े पैमाने पर जवाबी परमाणु हमले के लिए अभ्यास बताया था। पुतिन ने पिछले महीने यह भी कहा था कि वह "यह कहने के लिए तैयार नहीं हैं" कि रूस लाइव परमाणु परीक्षण करेगा या नहीं। संधि को रद्द करने का विधेयक पिछले महीने फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया में रूस की संसद से पारित हुआ। संसदीय सुनवाई के दौरान, राज्य ड्यूमा के स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोडिन ने कहा कि संधि को रद्द करने का कदम परमाणु हथियारों पर संयुक्त राज्य अमेरिका के संशयवाद और अशिष्ट रवैये की प्रतिक्रिया थी।</p>
<p><br />हालाँकि यह कभी लागू नहीं हुआ, इस समझौते को परमाणु शक्तियों फ्रांस और ब्रिटेन सहित 178 देशों द्वारा अनुमोदित किया गया था, और इसका प्रतीकात्मक मूल्य है। इसके समर्थकों का कहना है कि इसने परमाणु हथियारों के लाइव परीक्षणों के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय मानदंड स्थापित किया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि प्रमुख परमाणु शक्तियों के अनुसमर्थन के बिना समझौते की संभावना अवास्तविक है। पुतिन के पहली बार राष्ट्रपति बनने के छह महीने बाद जून 2000 में रूस की संसद ने समझौते को मंजूरी दे दी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 15:51:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंग है इजराइल-हमास की, तो कैसे 31 पत्रकारों की मौत और कई है गायब </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Israel vs Hamas: </strong>इजराइल-हमास जंग दिन पर दिन खतरनाक रूप लेता जा रहा है. 7 अक्टूबर से शुरू इस जंग में अब तक कई हजार लोगों की जान जा चुकी है. सबसे ज्यादा लोग गाजा पट्टी में मारे गए हैं. दूसरी ओर से युद्ध में अब तक 31 पत्रकारों की भी मौत हो चुकी है. मारे गए पत्रकारों में 26 फिलिस्तीन के, 4 इजराइल के और 1 लेबनान के बताए जा रहे हैं. ‘द टाइम्स ऑफ इजराइल’ ने ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि 31 पत्रकारों की मौत के अलावा 8 जर्नलिस्टों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136485/there-is-a-war-between-israel-and-hamas-so-how"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/israel-hamas-war-24.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Israel vs Hamas: </strong>इजराइल-हमास जंग दिन पर दिन खतरनाक रूप लेता जा रहा है. 7 अक्टूबर से शुरू इस जंग में अब तक कई हजार लोगों की जान जा चुकी है. सबसे ज्यादा लोग गाजा पट्टी में मारे गए हैं. दूसरी ओर से युद्ध में अब तक 31 पत्रकारों की भी मौत हो चुकी है. मारे गए पत्रकारों में 26 फिलिस्तीन के, 4 इजराइल के और 1 लेबनान के बताए जा रहे हैं. ‘द टाइम्स ऑफ इजराइल’ ने ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि 31 पत्रकारों की मौत के अलावा 8 जर्नलिस्टों के घायल होने की भी खबर है, जबकि 9 लापता हैं या फिर उनको हिरासत में लिया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जंग के दौरान पत्रकारों को लगातार हमलों, गिरफ्तारियों, धमकियों, सेंसरशिप और परिवार के सदस्यों की हत्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है.</p>
<p>‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ के मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम समन्वयक शेरिफ मंसूर ने इस बात पर भी जोर दिया है कि पत्रकार संकट के समय महत्वपूर्ण काम करते हैं और उन्हें युद्ध के दौरान निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. कमेटी ने कहा है कि जंग को कवर करने के लिए पत्रकार बलिदान का काम कर रहे हैं. विशेषकर गाजा में रहने वाले पत्रकारों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है. बता दें कि हमास की ओर से 7 अक्टूबर को इजराइल पर एक साथ 5000 रॉकेट दागे गए थे. इस हमले में इजराइल के कई नागरिकों और जवानों की मौत हो गई थी. हमले से खमखमाए इजराइल ने हमास के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया और गाजा पट्टी में बमबारी शुरू कर दी. इजराइल की सेना की ओर से गाजा पट्टी में लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं. इसके साथ-साथ जमीनी हमला भी शुरू कर दिया गया है.</p>
<p>इजराइली बलों ने मंगलवार को उत्तरी गाजा में हमास के बुनियादी ढांचों पर जमीनी हमला किया. इजराइली सेना का दावा है कि 7 अक्टूबर से शुरू हुए युद्ध के बाद से उत्तरी गाजा से करीब 8 लाख लोग पलायन कर चुके हैं. इजराइली सेना के टैंक, बख्तरबंद वाहन सोमवार को ही गाजा के अंदरूनी इलाके में पहुंच गए थे. गाजा पट्टी में इजराइली सेना की एंट्री के साथ पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने संघर्ष विराम के आह्वान को मानने से इनकार दिया.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Oct 2023 19:32:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीजिंग में सुरक्षा मंच की बैठक में  चीन और रूस ने अमेरिका को बनाया निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>चीनी और रूसी सैन्य प्रमुखों ने सोमवार को बीजिंग में एक सुरक्षा मंच पर आलोचना के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका पर निशाना साधा, जबकि चीन के दूसरे सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर ने वाशिंगटन के साथ रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने की कसम खाई। देशों के बीच तनाव और दक्षिण चीन सागर या ताइवान के पास आकस्मिक झड़प के खतरे के बीच अमेरिका और चीनी सेनाओं के बीच नियमित संचार की कमी वाशिंगटन के लिए लगातार चिंता का विषय रही है।</p>
<p>बीजिंग जियांगशान फोरम, चीन की सैन्य कूटनीति का सबसे बड़ा वार्षिक शो, रविवार को देश के रक्षा मंत्री के बिना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136414/china-and-russia-target-america-at-security-forum-meeting-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/beijing_large_1304_19.webp" alt=""></a><br /><p>चीनी और रूसी सैन्य प्रमुखों ने सोमवार को बीजिंग में एक सुरक्षा मंच पर आलोचना के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका पर निशाना साधा, जबकि चीन के दूसरे सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर ने वाशिंगटन के साथ रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने की कसम खाई। देशों के बीच तनाव और दक्षिण चीन सागर या ताइवान के पास आकस्मिक झड़प के खतरे के बीच अमेरिका और चीनी सेनाओं के बीच नियमित संचार की कमी वाशिंगटन के लिए लगातार चिंता का विषय रही है।</p>
<p>बीजिंग जियांगशान फोरम, चीन की सैन्य कूटनीति का सबसे बड़ा वार्षिक शो, रविवार को देश के रक्षा मंत्री के बिना शुरू हुआ, जो आम तौर पर इस कार्यक्रम की मेजबानी करते हैं, लेकिन बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच इसमें एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी शामिल था। रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने पश्चिम को चेतावनी दी कि यूक्रेन युद्ध में उसकी भागीदारी से गंभीर खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p>रूस की TASS राज्य समाचार एजेंसी ने फोरम में शोइगु के हवाले से कहा कि रूस के साथ संघर्ष की पश्चिमी रेखा में लगातार वृद्धि से परमाणु शक्तियों के बीच सीधे सैन्य टकराव का खतरा है, जो विनाशकारी परिणामों से भरा है। चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उपाध्यक्ष झांग यूक्सिया ने "कुछ देशों" पर सरकार को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों की परोक्ष आलोचना की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 13:53:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को कब मिलेगी आज़ादी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Qatar: </strong>कतर में भारतीय नौसेना के जिन 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई है. आज विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनके परिवार वालों से मुलाकात की है. विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इसकी जानकारी दी है. जयशंकर ने बताया है कि आज सुबह मैंने कतर में हिरासत में लिए गए 8 भारतीयों के परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि सरकार सभी भारतीयों की रिहाई के लिए कोशिशें जारी रखेगी.</p>
<p>एस जयशंकर ने कहा, ”8 भारतीयों के परिवारवालों से मिलकर मैंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार इस मामले को सर्वोच्च महत्व देती</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136410/when-will-8-former-officers-of-the-indian-navy-get"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/eam-dr-s-jaishankar.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Qatar: </strong>कतर में भारतीय नौसेना के जिन 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई है. आज विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनके परिवार वालों से मुलाकात की है. विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इसकी जानकारी दी है. जयशंकर ने बताया है कि आज सुबह मैंने कतर में हिरासत में लिए गए 8 भारतीयों के परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि सरकार सभी भारतीयों की रिहाई के लिए कोशिशें जारी रखेगी.</p>
<p>एस जयशंकर ने कहा, ”8 भारतीयों के परिवारवालों से मिलकर मैंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार इस मामले को सर्वोच्च महत्व देती है और पीड़ित परिवारों की चिंताओं और दर्द को पूरी तरह से समझती है. सरकार सभी भारतीयों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सभी कोशिश करना जारी रखेगी. हम उस संबंध में परिवारों के साथ निकटता से समन्वय करेंगे.”</p>
<p>बता दें कि कतर की कोर्ट से भारतीयों को सजा-ए-मौत मिलने पर भारत ने हैरानी जताई थी और कहा था कि हम कतरी कोर्ट के इस फैसले का विरोध करेंगे. पिछले साल अगस्त में कतर अधिकारियों ने इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में इन भारतीयों को गिरफ्तार किया था और बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया. भारत सरकार तभी से उनको राजनयिक पहुंच प्रदान कर रही है.</p>
<p><strong>8 भारतीय, जिनको मिली सजा-ए-मौत</strong></p>
<p><strong>1- पूर्व कैप्टन नवतेज सिंह गिल</strong></p>
<p><strong>2- पूर्व कैप्टन सौरभ वशिष्ठ</strong></p>
<p><strong>3- पूर्व कमांडर पूर्णेंदु तिवारी</strong></p>
<p><strong>4- पूर्व कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्माॉ</strong></p>
<p><strong>5- पूर्व कमांडर सुगुनाकर पकाला</strong></p>
<p><strong>6- पूर्व कमांडर संजीव गुप्ता</strong></p>
<p><strong>7- पूर्व कमांडर अमित नागपाल</strong></p>
<p><strong>8- और पूर्व नाविक रागेश हैं.</strong></p>
<p>गौरतलब है कि आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया गया है कि इन 8 भारतीयों को किस मामले में सजा मिली है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी पर इजराइल के लिए जासूसी करने का आरोप है. कतर में यह लोग दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टिंग सर्विसेज में काम करते थे, जो एक निजी कंपनी है. यह कंपनी कतर की रक्षा और सुरक्षा एजेंसियों को ट्रेनिंग और अन्य सर्विस प्रदान करती है.</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 13:31:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका के दबाव पर पाकिस्तान ने छठवीं बार की गैस पाइपलाइन के ढांचे में फेरबदल </title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान ने स्ट्रीम गैस पाइपलाइन परियोजना के ढांचे में फिर बदलाव किया है। इसे लेकर रूस नाराज है। दरअसल पाकिस्तानी अधिकारी दीर्घकालिक तेल समझौते पर चर्चा के लिए 10 अक्तूबर को रूस गए थे, जहां गैस पाइपलाइन परियोजना पर भी चर्चा हुई। लेकिन रूस से लौटने पर कराची से लाहौर के बीच एलपीजी पाइपलाइन का ढांचा उसने बदल दिया। यह काम रूस को दिया गया है। प्रारंभ में  रूस ने परियोजना को पूरा करने के लिए आरटी ग्लोबल को नामित किया था, जबकि पाकिस्तान ने राज्य के स्वामित्व वाली इंटर स्टेट गैस सिस्टम्स (आईएसजीएस) को नामित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136366/due-to-us-pressure-pakistan-changed-the-structure-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/2023_10image_13_41_026388654gaspipeline-ll.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान ने स्ट्रीम गैस पाइपलाइन परियोजना के ढांचे में फिर बदलाव किया है। इसे लेकर रूस नाराज है। दरअसल पाकिस्तानी अधिकारी दीर्घकालिक तेल समझौते पर चर्चा के लिए 10 अक्तूबर को रूस गए थे, जहां गैस पाइपलाइन परियोजना पर भी चर्चा हुई। लेकिन रूस से लौटने पर कराची से लाहौर के बीच एलपीजी पाइपलाइन का ढांचा उसने बदल दिया। यह काम रूस को दिया गया है। प्रारंभ में  रूस ने परियोजना को पूरा करने के लिए आरटी ग्लोबल को नामित किया था, जबकि पाकिस्तान ने राज्य के स्वामित्व वाली इंटर स्टेट गैस सिस्टम्स (आईएसजीएस) को नामित किया था।</p>
<p> हालाँकि, जैसे ही रूस ने आरटी ग्लोबल को नामांकित किया, अमेरिका ने उस पर प्रतिबंध लगा दिए, जिसके कारण उसे परियोजना छोड़नी पड़ी और इसलिए उत्तर-दक्षिण गैस पाइपलाइन परियोजना में विकास किया गया। तब से, पाकिस्तान और रूस लगभग छह बार पाइपलाइन की संरचना बदल चुके हैं, लेकिन इसे पूरा करने का कोई रास्ता नहीं ढूंढ पाए। </p>
<p>जुलाई 2021 में, पाकिस्तान और रूस ने परियोजना की संरचना में बदलाव किया और निर्णय लिया कि पाकिस्तान की राज्य के स्वामित्व वाली गैस कंपनियों के पास आवश्यक कुल फंडिंग का 74 प्रतिशत हिस्सा होगा, जबकि रूसी कंपनियों के पास 26 प्रतिशत शेयर होंगे। बाद में, पाकिस्तान और रूस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकाल के दौरान मई 2021 में पाइपलाइन परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू करने के लिए एक संशोधित अंतर सरकारी समझौते (आईजीए) पर हस्ताक्षर किए।</p>
<p>रूस में तत्कालीन पाकिस्तानी राजदूत शफकत अली खान ने उस देश के ऊर्जा मंत्री निकोलाई शुल्गिनोव के साथ आईजीए के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। एक संशोधित सौदे के तहत, यह निर्णय लिया गया कि परियोजना को लागू करने के लिए इस हस्ताक्षर के 60 दिनों के भीतर पाकिस्तान स्ट्रीम गैस पाइपलाइन विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) भी स्थापित किया जाएगा।</p>
<p>पाक ने इस ढांचे में  छठी बार बदलाव किया है इस पर रूस ने नाराजी जताई है। इससे पहले आर्थिक तंगहाली से परेशान पाकिस्तान अब अमेरिका के दबाव में ईरान के साथ गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट को छोड़ दिया था। इस प्रोजेक्ट के तहत पाकिस्तान को सस्ते दाम पर बिजली हासिल होने वाली थी। पहले भारत भी ईरान और पाकिस्तान के साथ इस गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट का सदस्य था। जो पहले ही इससे बाहर हो चुका है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Oct 2023 14:10:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति Mike Pence नहीं लड़ेंगे राष्ट्रपति का चुनाव </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>न्यूयॉर्क। </strong>अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए अपनी दावेदारी छोड़ने की घोषणा की है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए धन जुटाने और इसके लिए आवश्यक लोकप्रियता हासिल करने में विफल रहने के बाद पेंस ने व्हाइट हाउस के लिए अपना अभियान समाप्त कर दिया। </p>
<p>माइक पेंस ने लास वेगास में रिपब्लिकन यहूदी गठबंधन की सभा में कहा, ‘‘बहुत विचार-विमर्श के बाद, मैंने राष्ट्रपति पद के लिए अपना अभियान आज से प्रभावी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया है। हम हमेशा से ही जानते थे कि यह एक कठिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136364/former-us-vice-president-mike-pence-will-not-contest-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/mikepence-1698566917.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>न्यूयॉर्क। </strong>अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए अपनी दावेदारी छोड़ने की घोषणा की है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए धन जुटाने और इसके लिए आवश्यक लोकप्रियता हासिल करने में विफल रहने के बाद पेंस ने व्हाइट हाउस के लिए अपना अभियान समाप्त कर दिया। </p>
<p>माइक पेंस ने लास वेगास में रिपब्लिकन यहूदी गठबंधन की सभा में कहा, ‘‘बहुत विचार-विमर्श के बाद, मैंने राष्ट्रपति पद के लिए अपना अभियान आज से प्रभावी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया है। हम हमेशा से ही जानते थे कि यह एक कठिन लड़ाई होगी, लेकिन मुझे इसे लेकर कोई पछतावा नहीं है।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Oct 2023 13:58:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत को आया कनाडा पर रहम, बहल की वीज़ा सर्विस </title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत ने कनाडा में एक महीने से ज्यादा समय से बंद पड़ी केजा सेवाओं को कुछ कैटिगरी में फिर से शुरू करने का ऐलान किया। एंट्री वीजा, मेडिकल वैजा, कॉन्फ्रेस वीजा और विजनेस बजा कैटिगरी में सेवाएं शुरू होगी। ओटावा में भारतीय हाई कमीशन ने एक बयान में कहा कि सुरक्षा हालात का आकलन करने और हाल ही में इस संबंध में कनाडा द्वारा उठाए गए कदमों के मदनेजर चार कैटिगरी की वीजा सेवाओं को बहाल करने का फैसला लिया गया है। इमरजेंसी मामलों को हाई कमीशन और कौन्सुलेट्स जनरल देखेंगे। भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा के मरेनजर भारत ने 21</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136214/canada-got-visa-service-thanks-to-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/canada_large_1423_19.webp" alt=""></a><br /><p>भारत ने कनाडा में एक महीने से ज्यादा समय से बंद पड़ी केजा सेवाओं को कुछ कैटिगरी में फिर से शुरू करने का ऐलान किया। एंट्री वीजा, मेडिकल वैजा, कॉन्फ्रेस वीजा और विजनेस बजा कैटिगरी में सेवाएं शुरू होगी। ओटावा में भारतीय हाई कमीशन ने एक बयान में कहा कि सुरक्षा हालात का आकलन करने और हाल ही में इस संबंध में कनाडा द्वारा उठाए गए कदमों के मदनेजर चार कैटिगरी की वीजा सेवाओं को बहाल करने का फैसला लिया गया है। इमरजेंसी मामलों को हाई कमीशन और कौन्सुलेट्स जनरल देखेंगे। भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा के मरेनजर भारत ने 21 सितंबर को सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी थी। </p>
<p>विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि सुरक्षा में प्रगति होगी तो बजा सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। यह निर्णय नई दिल्ली द्वारा कनाडा में और दुनिया भर में कनाडाई नागरिकों के लिए सेवाओं को निलंबित करने के एक महीने बाद आया है। पिछले महीने 18 जून को निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संभावित संलिप्तता के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। भारत ने 2020 में निज्जर को आतंकवादी घोषित कि</p>
<p>नई दिल्ली ने प्रवेश वीजा, बिजनेस वीजा, मेडिकल वीजा और कॉन्फ्रेंस वीजा जैसी सेवाएं फिर से शुरू कर दी हैं। एक अधिकारी ने बताया कि कनाडाई अधिकारियों द्वारा अपने राजनयिक परिसरों और कर्मियों की सुरक्षा पर नई दिल्ली की चिंताओं के प्रति "अधिक प्रतिक्रिया" दिखाने के बाद भारत ने वीजा सेवाएं फिर से शुरू कीं। यह 10 दिनों तक चली कई स्तरों पर चर्चा के बाद आया। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Oct 2023 15:27:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या हमास आतंकी संगठनों का बेताज बादशाह है, इजराइल ने सभी देशों से माँगा सुझाव </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Israel vs Hamas: </strong>हमास<strong> </strong>आतंकी संगठन है या नहीं, एक बार फिर इसका मुद्दा उठा है. तुर्की ने हमास को आतंकी समूह मानने से इंकार कर दिया है. इस बयान के बाद एक बार फिर बहस छिड़ गई है. दुनिया के कई देश इसे आतंकी संगठन मानते हैं और कुछ इसे अपनी आजादी के लिए लड़ने वाला संगठन कहते हैं. इजराइल भी इसे आतंकी संगठन मानता है. हालिया हमले के बाद भारत में इजराइल के राजदूत नाओर गिलोन ने कहा है, अब वो समय आ गया कि कई दूसरे देशों की तरह भारत भी हमास को आतंकी संगठन घोषित करे.</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136211/is-hamas-the-uncrowned-king-of-terrorist-organizations-israel-asked"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/countries-who-officially-announced-hamas-a-terrorists-organization-and-who-consider-its-a-military-organization2.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Israel vs Hamas: </strong>हमास<strong> </strong>आतंकी संगठन है या नहीं, एक बार फिर इसका मुद्दा उठा है. तुर्की ने हमास को आतंकी समूह मानने से इंकार कर दिया है. इस बयान के बाद एक बार फिर बहस छिड़ गई है. दुनिया के कई देश इसे आतंकी संगठन मानते हैं और कुछ इसे अपनी आजादी के लिए लड़ने वाला संगठन कहते हैं. इजराइल भी इसे आतंकी संगठन मानता है. हालिया हमले के बाद भारत में इजराइल के राजदूत नाओर गिलोन ने कहा है, अब वो समय आ गया कि कई दूसरे देशों की तरह भारत भी हमास को आतंकी संगठन घोषित करे. उसने आतंक के खिलाफ अभियान चलाने में इजराइल की मदद करने के लिए भारत का धन्यवाद अदा किया.</p>
<p>इजराइल की इस अपील पर फिलहाल ने कोई जवाब नहीं दिया है. ऐसे में सवाल है कि वो कौन से देश हैं जो हमास को आतंकी संगठन मानते हैं, वो कौन से मुल्क हैं जो हमास को आतंकी समूह नहीं मानते और इसके लिए क्या क्या तर्क देते हैं. अमेरिका, ब्रिटेन, इजराइल, ऑस्ट्रेलिया, जापान और यूरोपियन देश, ये वो मुल्क हैं जिन्होंने हमास को आधिकारिक तौर पर आतंकी समूह घोषित किया हुआ है. इसके अलावा इन देशों के रीजनल ब्लॉक भी हमास को लेकर यही सोच रखते हैं. इन देशों के नेताओं में समय-समय पर हमास को लेकर अपना रुख भी साफ किया है.</p>
<p>UK के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा हाल में कहा, जो लोग हमास को सपोर्ट करते हैं वो इस हमले के लिए भी जिम्मेदार हैं. वो फ्रीडम फाइटर नहीं हैं. वो आतंकवादी हैं. ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग ने 11 अक्टूबर को दिए अपने भाषण कहा, ऑस्ट्रेलिया आतंकवाद के खिलाफ है. हम इजराइल के साथ हैं. हम साफतौर पर हमास के हमले की निंदा करते हैं. उन्होंने अंधाधुंध रॉकेट फायरिंग की, नागरिकों को निशाना बनाया और बंधक बनाया.</p>
<p>कई ऐसे अहम देश हैं जो हमास को आतंकी संगठन नहीं मानते. इनमें चीन, तुर्की, मिस्र, कतर, रूस, सीरिया, ब्राजील और ईरान शामिल हैं. उनका मानना है कि ये आतंकी संगठन नहीं बल्कि सैनिकों का एक ग्रुप है. इजराइल और हमास की जंग के बीच तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने बयान दिया है</p>
<p>कि हमास कोई आतंकी संगठन नहीं, एक मुक्ति संगठन है. जो अपनी जमीन हासिल करने के लिए रक्षा कर रहा है. उनका कहना है कि मुस्लिम देशों को युद्धविराम की कोशिश करनी चाहिए. उन्हें कहा, सबको मिलकर मुस्लिम देशों में शांति लाने की कोशिश करनी चाहिए. इसके साथ ही विश्वशक्तियों से गाजा पर होने वाले इजराइल के हमले रोकने की अपील की.</p>
<p>हमास आतंकी समूह है या नहीं, इस मुद्दे पर दुनिया के कई देशों की सोच बंटी हुई है. इसकी वजह है हमास की मांग. जिसे कुछ देश सपोर्ट करते हैं. हमास इजराइल के वजूद को नकारता है, यही वजह है कि वह हमेशा वहां कब्जा करने की कोशिश करता रहता है. कुछ देश मानते हैं</p>
<p>कि वो अपने हक और जमीन की लड़ाई लड़ रहा है. वहीं हमास के काम करने, तबाही मचाने और बेगुनाहों का खून बहाने के तरीके के कारण कई देश इसे आतंकी समूह घोषित कर चुके हैं. अब इसकी कमान इस्माइल हानियेह के हाथों में जिसे इस संगठन को टॉप लीडर कहा जाता है. इस्माइल ने गाजा की इस्लामिक यूनिवर्सिटी से स्नातक किया और फिलिस्तीन का पीएम रहा है. 2017 से वह हमास के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख के तौर काम कर रहा है.</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Oct 2023 14:57:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भूटान और चीन ने किया समझौते पर हस्ताक्षर, भारत के लिए चिंताजनक </title>
                                    <description><![CDATA[<p>चीन और भूटान के बीच 25वें दौर की बातचीत काफी सफल रही है। द हिन्दू, फाइनेंशियल एक्सप्रेस और इकोनॉमिक टाइम्स की खबर है कि बातचीत के बाद, चीन और भूटान ने एक महत्वपूर्ण "सहयोग समझौते" पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता बॉर्डर निर्धारण और परिसीमन के संबंध में है। इस संबंध में दोनों देशों की संयुक्त तकनीकी टीम (जेटीटी) आगे की बातचीत कर रही है।</p>
<p>भूटान के विदेश मंत्री थांडी दोरजी ने मंगलवार को बीजिंग में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की थी। इससे पहले सोमवार को उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। बैक-टू-बैक दोनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136189/bhutan-and-china-signed-agreement-worrying-for-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/6538c4fd42932.jpg" alt=""></a><br /><p>चीन और भूटान के बीच 25वें दौर की बातचीत काफी सफल रही है। द हिन्दू, फाइनेंशियल एक्सप्रेस और इकोनॉमिक टाइम्स की खबर है कि बातचीत के बाद, चीन और भूटान ने एक महत्वपूर्ण "सहयोग समझौते" पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता बॉर्डर निर्धारण और परिसीमन के संबंध में है। इस संबंध में दोनों देशों की संयुक्त तकनीकी टीम (जेटीटी) आगे की बातचीत कर रही है।</p>
<p>भूटान के विदेश मंत्री थांडी दोरजी ने मंगलवार को बीजिंग में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की थी। इससे पहले सोमवार को उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। बैक-टू-बैक दोनों बैठकें भूटान और चीन के बीच सीमा के सीमांकन और दोनों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित करने पर केंद्रित थीं।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि भूटान-चीन सीमा वार्ता पर भारत नजर रख रहा है और उम्मीद है कि बीजिंग के साथ राजनयिक संबंध स्थापित होने से पहले भूटान उसे विश्वास में लेगा। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन का भूटान पर कितना दबाव है। </p>
<p>बहरहाल, चीनी सरकार ने एक बयान में दोरजी के हवाले से कहा- "दोनों पक्षों ने (सीमा का) सीमांकन पूरा करने और जल्द से जल्द राजनयिक संबंध स्थापित करने की गंभीर इच्छा और दृढ़ संकल्प दिखाया है। चीन के साथ भूटान विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की अच्छी गति बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों के अधिक से अधिक विकास को बढ़ावा देने का इच्छुक है।"</p>
<p>चीन के मंत्री हान ने दोरजी से कहा कि बीजिंग हमेशा की तरह, भूटान की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेगा। बता दें कि चीन पर हिमालय क्षेत्र के छोटे-छोटे देशों की सीमा पर अतिक्रमण की खबरें आती रहती हैं। जिनमें भूटान, नेपाल शामिल है। तिब्बत उसके कब्जे में पहले से ही है। पड़ोसी भारत से उसका सीमा विवाद कई मोर्चों पर चल रहा है।</p>
<p>भारत की चिन्ता क्या हैः भारत इस संभावना से चिंतित है कि समझौता होने के बाद, नजदीकी बढ़ने पर पश्चिमी भूटान में डोकलाम के आसपास के क्षेत्रों पर भूटान अपना दावा छोड़ देगा या शांगरी-ला के उत्तर-मध्य क्षेत्र में अपने क्षेत्रीय दावों को कम कर देगा। यदि चीन ट्राइ-जंक्शन बिंदु के अलावा पूरे डोकलाम और आसपास के इलाकों पर नियंत्रण हासिल कर लेता है, तो उसे भारत के खिलाफ रणनीतिक लाभ मिलेगा। चीनी पीएलए के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक सैन्य युद्धाभ्यास करना आसान हो जाएगा। वो जब चाहेगा इस कॉरिडोर को बंद कर देगा। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<p>चीन और भूटान के औपचारिक राजनयिक संबंध अभी तक नहीं बन पाए हैं। लेकिन दोनों देशों के बीच आधिकारिक यात्राओं के जरिए नियमित संपर्क रहता है। चीन के साथ भूटान के सीमा विवादों को अभी तक औपचारिक रूप से सुलझाया नहीं जा सका है। ऐसे में अब भूटान के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने के चीन के प्रयास और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं लेकिन भारत के नजरिए से ठीक नहीं हैं।</p>
<p>2017 में डोकलाम इलाके में चीन ने सड़क बनाने की कोशिश की। लेकिन भारत ने इसका जबरदस्त विरोध किया। दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए। दोनों पड़ोसियों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। हालाँकि, यह मुद्दा तब हल हो गया जब चीन ने अपनी सड़क निर्माण योजना को छोड़ दिया।</p>
<p>2020 में, चीन ने ग्लोबल पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) परिषद में भूटान के सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य पर दावा किया। इस पर भूटान ने भारत में चीनी दूतावास को चेतावनी जारी की। कहा जा रहा है कि चीन ने बुनियादी ढांचे के विकास और इससे संबंधित नीतियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत, भूटान और नेपाल के साथ अपनी सीमाओं पर तमाम गांवों को विकसित करने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं।</p>
<p>चीन और भूटान लंबे समय से करीब आने की कोशिश कर रहे हैं। अगस्त में बीजिंग में आयोजित भूटान-चीन सीमा मुद्दों पर 13वीं विशेषज्ञ समूह की बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। उसके बाद यह ताजा बैठक चीन के लिए और भी खास साबित हो गई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2023 14:28:45 +0530</pubDate>
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