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                <title>internet fraud - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>internet fraud RSS Feed</description>
                
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                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>साइबर खतरों से मुकाबला - जागरुकता है जरूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<div><strong>                                              ----       जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
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<div>जब से दुनियां में इंटरनेट का प्रचलन बढ़ा है हम पूरी तरह से इस पर निर्भर हो चुके हैं। निश्चित ही इससे कार्य की गति तो तेज हुई है लेकिन उतने ही खतरे हमारे सामने चुनौती बन कर खड़े हो गए हैं। दरअसल जो फ्राड हमारे साथ हो सकते हैं हमें कैसे इन।से निबटना है उस जानकारी का हमारे पास अभाव है। या फिर हम कभी इस बात को समझ नहीं पाते कि इस तरह से भी फ्राड हो सकता है। हालांकि हमारी सरकारें और प्रशासन इस पर लोगों को बहुत जागरूक कर रहे हैं। और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/137441/combating-cyber-threats-%E2%80%93-awareness-is-important"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-12/10_12_2020-cyber_crime_21151867_93435555.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<div><strong>                       ----       जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
<div> </div>
<div>जब से दुनियां में इंटरनेट का प्रचलन बढ़ा है हम पूरी तरह से इस पर निर्भर हो चुके हैं। निश्चित ही इससे कार्य की गति तो तेज हुई है लेकिन उतने ही खतरे हमारे सामने चुनौती बन कर खड़े हो गए हैं। दरअसल जो फ्राड हमारे साथ हो सकते हैं हमें कैसे इन।से निबटना है उस जानकारी का हमारे पास अभाव है। या फिर हम कभी इस बात को समझ नहीं पाते कि इस तरह से भी फ्राड हो सकता है। हालांकि हमारी सरकारें और प्रशासन इस पर लोगों को बहुत जागरूक कर रहे हैं। और इस पर बहुत ही सराहनीय प्रयास पुलिस प्रशासन के द्वारा किया जा रहा है लेकिन फ्राड करने वालों को हम मुश्किल से पकड़ पा रहे हैं। इसका सबसे मजबूत पक्ष यही है कि हमें इसके प्रति जागरूक होना चाहिए। हम जब कोई भी एप्लिकेशन डाउनलोड करते हैं तो उस एप्लिकेशन को अपने सारे अधिकार और जानकारी दे देते हैं। और जब तक हम उनको सारे अधिकार नहीं देता</div>
<div> </div>
<div>तब तक वह एप्लिकेशन काम नहीं करती। इसलिए इसका चुनाव हमें बहुत ही सोच समझ कर करना चाहिए। यदि वह एप्लिकेशन हमारे लिए अति आवश्यक नहीं है तो हमें कोई भी अधिकार नहीं देना चाहिए। हैकर हमारी हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। इसलिए इंटरनेट का स्तेमाल भी कम से कम केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही करना चाहिए। हमने अपने हम मनोरंजन का सहारा मोबाइल को ही बना लिया है। हम हर एप्लिकेशन को डाउनलोड करने का प्रयास करते हैं। ऐसा करने से हमें बचना होगा। फोन पर अंजान काल से भी बचना होगा। हमारे पास दिन भर कइयों काल्स आतीं हैं जो तमाम आफर हमको प्रोवाइड करते हैं कई बार हम इनके चक्कर में फंस भी जाते हैं। शासन और प्रशासन हमको इसके प्रति बार बार जागरूक करता रहता है लेकिन हम बहुत ही कम लोग इस पर ध्यान देते हैं। </div>
<div> </div>
<div>                           साइबर ठगी के लिए पहले केवल चुनिंदा जगहों पर ही सुनवाई होती थी लेकिन साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए उ.प्र. सरकार ने अब राज्य के 57 जिलों में साइबर थाने खोलने की घोषणा की है। प्रदेश सरकार की यह एक अच्छी पहल है क्योंकि साइबर थाने अपना कार्य बहुत ही उम्दा तरीके से कर रहे हैं। लेकिन काम के अत्यधिक बोझ के कारण इनमें देरी होती थी लेकिन अब थानों की संख्या बढ़ने से वहां स्टाफ की संख्या भी बढ़ेगी और अपराधों को पकड़ने में गति मिलेगी। सरकार ने बताया है कि साइबर अपराधों की संख्या को बढ़ता देख इन थानों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता हो रही थी। उ.प्र. में 75, जिले हैं। उ.प्र. के 18 मंडल के मुख्यालय में पहले से साइबर थाने मौजूद थे लेकिन अब 57 और जिलों में साइबर थाने खुलने से राज्य के हर जिले में साइबर थाने मौजूद होंगे।</div>
<div> </div>
<div>इनकी स्थापना पर 27 करोड़ 24 लाख रुपए के लगभग सरकार पर व्यय भार पड़ने की संभावना है। सरकार तेजी से इसपर कार्य करने जा रही है इससे न केवल साइबर क्राइम पर नजर रखी जा सकेगी बल्कि उस पर प्रभावी कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। उ.प्र. सरकार ने कहा है कि हमारी सजा दिलाने की दर नेशनल साइबर क्राइम की सजा दिलाने की दर से काफी बेहतर है। साइबर क्राइम के मामलों में नेशनल दर 46.5 प्रतिशत है जब कि उ.प्र. में यह 87.8 प्रतिशत है । सरकार का प्रयास सराहनीय है लेकिन हमें भी सजग रहना होगा। इसकी जानकारी ही इसका बचाव है। इसको हमें अच्छी तरह से समझना होगा। क्यों कि हम तब ही समझ पाते हैं जब हमारे साथ फ्राड हो चुका होता है। फिर हम भटकते हैं लेकिन अब हर जिले में साइबर थाने खुल जाने से हमें इसमें अच्छी सफलता हासिल होगी।</div>
<div> </div>
<div>                        दरअसल हम इंटरनेट पर कार्य करना तो जान गए हैं लेकिन उनसे कितने ख़तरे भी है उनसे अभी भी अनजान हैं और साइबर ठग इसी का फायदा उठाते हैं। आपने देखा भी होगा जो लोग फालतू की साइट पर कम ध्यान देते हैं उनके पास फाल्स काल कम आते हैं लेकिन जो लोग तरह तरह की एप्लिकेशन ज्यादा डाउनलोड करते हैं उनके पास काल आने का सिलसिला बढ़ जाता है। सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी पर रोक लगा सके इसके लिए हमारे साइबर एक्सपर्ट भी बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। दरअसल इस ठगी में जितनी जल्द हम अपनी शिकायत पहुंचा सकेंगे उतनी ही हमारे लिए फायदेमंद होता है। क्यों इसमें जितनी देर लगती है ठगी का पता लगाना उतना ही मुश्किल हो जाता है। साइबर ठगी के तरीके भी समय समय पर बदलते रहते हैं क्यों कि इसमें क्वालीफाइड लोग कार्य कर रहे हैं और उनके लिए यह ठगी काफी आसान रहती है। अतः हमको सिर्फ इससे बचाव के लिए जागरूक होने की अत्यधिक आवश्यकता है।</div>
<div> </div>
<div>हमें सरकार के बताए हुए तरीकों के साथ चलना होगा क्योंकि सरकार बराबर यह पता लगा रही है कि साइबर ठग किस किस तरह से लोगों को ठगी का शिकार बना सकते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Dec 2023 16:45:00 +0530</pubDate>
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