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                <title>Bharat Ratna - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>जलभराव, अराजकता और भ्रष्टाचार की जकड़ में शहर: घूसखोरी पर चल रहा तांडव</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:small;">बारिश का मौसम आते ही शहरों की चमक-दमक पर एक ऐसा पर्दा पड़ जाता है, जिसके पीछे विकास के दावों की असली तस्वीर दिखाई देने लगती है। सड़कें पानी में डूब जाती हैं, गलियां नालों में बदल जाती हैं, यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है और आम आदमी अपने ही शहर में रास्ता तलाशता नजर आता है। लेकिन सवाल केवल जलभराव का नहीं है। सवाल उस पूरी व्यवस्था का है, जिसमें जलनिकासी से लेकर सड़क निर्माण, नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाने और विकास कार्यों तक हर स्तर पर जवाबदेही का संकट दिखाई देता है। जब बारिश का पानी घंटों और कई</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185937/the-city-is-in-the-grip-of-waterlogging-anarchy-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas9.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:small;">बारिश का मौसम आते ही शहरों की चमक-दमक पर एक ऐसा पर्दा पड़ जाता है, जिसके पीछे विकास के दावों की असली तस्वीर दिखाई देने लगती है। सड़कें पानी में डूब जाती हैं, गलियां नालों में बदल जाती हैं, यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है और आम आदमी अपने ही शहर में रास्ता तलाशता नजर आता है। लेकिन सवाल केवल जलभराव का नहीं है। सवाल उस पूरी व्यवस्था का है, जिसमें जलनिकासी से लेकर सड़क निर्माण, नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाने और विकास कार्यों तक हर स्तर पर जवाबदेही का संकट दिखाई देता है। जब बारिश का पानी घंटों और कई बार दिनों तक सड़कों पर जमा रहता है तो इसे केवल प्राकृतिक आपदा कहकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। बारिश प्रकृति की देन है, लेकिन पानी कहां जमा होगा और कितनी देर में निकलेगा, यह काफी हद तक प्रशासनिक व्यवस्था और शहरी नियोजन पर निर्भर करता है। जिस शहर में हर वर्ष जलभराव होता है, वहां हर वर्ष केवल बारिश को दोष देना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या से आंखें मूंदना है। सबसे चिंताजनक स्थिति तब पैदा होती है जब अव्यवस्था के साथ भ्रष्टाचार और घूसखोरी की शिकायतें भी जुड़ जाती हैं। नालों की सफाई कागजों पर पूरी हो जाती है, लेकिन जमीन पर गंदगी और सिल्ट जस की तस दिखाई देती है। सड़क बनती है, कुछ समय बाद टूट जाती है। नाली बनती है तो उसका पानी मुख्य निकासी व्यवस्था से जुड़ा नहीं होता। कहीं नाली पर अतिक्रमण है तो कहीं प्राकृतिक जलमार्ग ही निर्माण की भेंट चढ़ चुका है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विकास के नाम पर खर्च होने वाला पैसा जमीन पर कितना दिखाई देता है?</span></div>
<div><span style="font-size:small;">कागजों में सफाई, जमीन पर गंदगी शहरों में जलभराव रोकने के लिए वर्षा से पहले नालों की सफाई का अभियान चलाया जाता है। बैठकों में लक्ष्य तय होते हैं, अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं और प्रगति रिपोर्ट तैयार होती है। लेकिन पहली तेज बारिश के बाद जब वही नाले उफनने लगते हैं तो सारी तैयारियों की पोल खुल जाती है। यदि नालों की सफाई वास्तव में हुई थी तो थोड़ी बारिश में ही पानी सड़कों पर क्यों भर जाता है? यदि सफाई के लिए बजट खर्च हुआ तो उसका परिणाम दिखाई क्यों नहीं देता? और यदि किसी कार्य में लापरवाही हुई तो जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? इन सवालों के जवाब केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने चाहिए।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">जलभराव केवल पानी नहीं, व्यवस्था का आईना है</span></div>
<div><span style="font-size:small;">जलभराव के कारण सबसे अधिक परेशानी आम नागरिक को उठानी पड़ती है। घरों में पानी घुसता है, दुकानों का कारोबार प्रभावित होता है, वाहन खराब होते हैं, स्कूल जाने वाले बच्चों को परेशानी होती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सड़क पर गड्ढा हो और उसमें पानी भर जाए तो दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। यह स्थिति शहर की आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित करती है। कुछ घंटों का जलभराव कई छोटे दुकानदारों के पूरे दिन का कारोबार चौपट कर देता है। दिहाड़ी मजदूर काम पर नहीं पहुंच पाता। मरीज अस्पताल तक पहुंचने में परेशान होते हैं। एंबुलेंस तक को रास्ता बदलना पड़ता है। भ्रष्टाचार की जड़ें कहां तक हैं?</span></div>
<div><span style="font-size:small;">भ्रष्टाचार का आरोप लगाना आसान है, लेकिन किसी व्यक्ति या विभाग पर बिना प्रमाण आरोप लगाना उचित नहीं। फिर भी व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और ठेकों तथा निर्माण कार्यों की निगरानी का कमजोर होना भ्रष्टाचार की संभावनाओं को बढ़ाता है। जहां काम की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच नहीं होती, वहां कागज और जमीन के बीच अंतर पैदा होने का खतरा रहता है। यदि नाले की सफाई का भुगतान हो गया, लेकिन मौके पर सफाई अधूरी थी, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता का विषय बन सकता है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">इसी तरह सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता का पालन न होने, घटिया सामग्री इस्तेमाल होने या एक ही सड़क की बार-बार मरम्मत पर सरकारी धन खर्च होने के मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके शहर में किस काम के लिए कितना पैसा स्वीकृत हुआ, किस एजेंसी को काम मिला, काम कब पूरा होना था और उसकी गुणवत्ता की जांच किसने की।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">आम आदमी की सबसे बड़ी शिकायत यह होती है कि उसे सरकारी काम के लिए भी व्यवस्था के सामने बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। यदि किसी प्रमाणपत्र, शिकायत, निर्माण अनुमति, सफाई, अतिक्रमण या अन्य नागरिक सुविधा के लिए रिश्वत की मांग की जाती है तो यह केवल एक व्यक्ति का शोषण नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में विश्वास को कमजोर करने वाली घटना है। घूसखोरी का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इससे ईमानदार नागरिक भी निराश होने लगता है। उसे लगने लगता है कि बिना पैसे दिए काम नहीं होगा। यही मानसिकता भ्रष्ट व्यवस्था को मजबूत करती है। इस चक्र को तोड़ने के लिए शिकायतों की स्वतंत्र जांच, डिजिटल ट्रैकिंग, समयबद्ध निस्तारण और दोषी पाए जाने पर वास्तविक कार्रवाई जरूरी है। अराजकता को सामान्य मान लेना सबसे बड़ा खतरा आज समस्या केवल यह नहीं कि सड़क पर पानी भरता है। समस्या यह है कि समाज धीरे-धीरे इस अव्यवस्था को सामान्य मानने लगा है।</span></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 18:58:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न राजीव गांधी  की जयंती मनाई गई।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज ।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">वक्ताओं ने कहा कि राजीव गांधी जी आधुनिक कंप्यूटर युग के जनक थे उन्होंने देश को तकनीकी विकास को नई दिशा दी। साथ ही वे ग़रीबों, दलितों और महिलाओं के हितैषी नेता थे। उन्होंने समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य किया</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">।कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने राजीव गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित करके गोष्ठी का भी आयोजन किया। गोष्ठी की अध्यक्षता शहर कांग्रेस उपाध्यक्ष नयन कुमार कुशवाहा और संचालन महानगर कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश श्रीवास्तव ने किया।कार्यक्रम में सर्वश्री नयन कुमार कुशवाहा, राकेश श्रीवास्तव, विनोद जैकब, राजकुमार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185931/the-birth-anniversary-of-former-prime-minister-of-the-country"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260820-wa01221.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वक्ताओं ने कहा कि राजीव गांधी जी आधुनिक कंप्यूटर युग के जनक थे उन्होंने देश को तकनीकी विकास को नई दिशा दी। साथ ही वे ग़रीबों, दलितों और महिलाओं के हितैषी नेता थे। उन्होंने समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य किया</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">।कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने राजीव गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित करके गोष्ठी का भी आयोजन किया। गोष्ठी की अध्यक्षता शहर कांग्रेस उपाध्यक्ष नयन कुमार कुशवाहा और संचालन महानगर कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश श्रीवास्तव ने किया।कार्यक्रम में सर्वश्री नयन कुमार कुशवाहा, राकेश श्रीवास्तव, विनोद जैकब, राजकुमार कुशवाहा, मुन्ना जाफरी, इंजिनियर विजय कुमार कुशवाहा, सुधीर कुमारआदि लोग शामिल रहें।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
</div>
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                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 18:23:19 +0530</pubDate>
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