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                <title>Terrorism - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Terrorism RSS Feed</description>
                
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                <title>एक ऑपरेशन जिसने बदल दी युद्ध की तस्वीर: ऑपरेशन सिंदूर और दो सेनाओं के बीच तकनीकी अंतर</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178485/an-operation-that-changed-the-face-of-war-operation-sindoor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-07-at-19.11.42.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों में साफ दिखा कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया और कितना नुकसान हुआ। शाहबाज एयरबेस का हैंगर पूरी तरह तबाह दिखाई दिया, जबकि कई एयरबेस की रनवे और रडार सिस्टम भी क्षतिग्रस्त मिले। इन तस्वीरों ने भारत के दावों को मजबूत प्रमाण दे दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फर्क सिर्फ हमले का नहीं, सोच का था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारत ने अपने हर हमले का प्रमाण दुनिया के सामने रखा। यही सबसे बड़ा अंतर था। आधुनिक युद्ध में केवल हमला करना काफी नहीं होता, यह भी जरूरी है कि दुनिया देख सके कि हमला किस पर हुआ और क्यों हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अलग थी। सीमा पार से भारी गोलाबारी हुई, जिसमें मंदिर, गुरुद्वारे और नागरिक इलाके प्रभावित हुए। पुंछ, राजौरी और कश्मीर के कई इलाकों में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। कई लोगों की जान गई और घर तबाह हुए। इन हमलों का कोई स्पष्ट सैन्य लक्ष्य दिखाई नहीं दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं से दोनों देशों की सैन्य क्षमता और तकनीकी सोच का अंतर साफ हो गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत का युद्ध मॉडल पूरी तरह तकनीक आधारित था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन से पहले भारत की कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया। सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, इंटरसेप्टेड कम्युनिकेशन और रियल टाइम इंटेलिजेंस को एक साथ जोड़कर लक्ष्य तय किए गए। हर जानकारी सीधे सेना और वायुसेना के कमांडरों तक पहुंच रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आधुनिक तकनीक और इंटेलिजेंस का संयुक्त इस्तेमाल था। भारत ने भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि डेटा और सटीक जानकारी के आधार पर कार्रवाई की।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्वदेशी रक्षा तकनीक की ताकत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए कई हथियार और ड्रोन भारत में बने या भारत के सहयोग से विकसित किए गए थे। ब्रह्मोस, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, स्काईस्ट्राइकर और नागास्त्र जैसे सिस्टम भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का उदाहरण बने।</p>
<p style="text-align:justify;">इन हथियारों का सफल इस्तेमाल केवल सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग के लिए भी बड़ी सफलता है। इससे आने वाले समय में रिसर्च और निवेश दोनों बढ़ेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके विपरीत पाकिस्तान का रक्षा ढांचा बड़े पैमाने पर विदेशी हथियारों पर निर्भर है। ऐसे में किसी बड़े नुकसान के बाद उसकी भरपाई आसान नहीं होती।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सैटेलाइट तस्वीरों ने बदल दिया प्रचार का खेल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने नागरिक इलाकों पर हमला किया, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने इन दावों को कमजोर कर दिया। आधुनिक दौर में अब केवल बयान देकर सच नहीं बदला जा सकता। कुछ ही घंटों में सैटेलाइट तस्वीरें पूरी दुनिया के सामने वास्तविक स्थिति ला देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही आधुनिक तकनीक की सबसे बड़ी ताकत है — पारदर्शिता।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>परमाणु हथियारों की रणनीति पर असर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कई वर्षों तक पाकिस्तान की रणनीति यह रही कि परमाणु हथियारों के डर से भारत बड़े सैन्य कदम नहीं उठाएगा। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने यह धारणा बदल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह दिखाया कि सीमित, सटीक और नियंत्रित सैन्य कार्रवाई संभव है, बिना युद्ध को बड़े स्तर तक ले जाए। भारत ने केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाया, न कि पाकिस्तानी सेना या नागरिकों को।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पाकिस्तान की पुरानी रणनीतिक बढ़त कमजोर पड़ती दिखाई दी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ड्रोन युद्ध का नया दौर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार था जब दो परमाणु संपन्न देशों के बीच इतने बड़े स्तर पर ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। भारत ने सटीक निशाना लगाने वाले ड्रोन इस्तेमाल किए, जबकि पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन भेजकर दबाव बनाने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश ड्रोन को रास्ते में ही रोक दिया। इससे साफ हुआ कि भविष्य के युद्धों में केवल हथियारों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और तकनीकी क्षमता ज्यादा मायने रखेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बदलते युद्ध का नया संदेश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि आने वाले समय में युद्ध केवल ताकत से नहीं, बल्कि तकनीक, सटीकता और जवाबदेही से तय होंगे। भारत ने दुनिया को दिखाया कि आधुनिक युद्ध में पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सैन्य क्षमता।</p>
<p style="text-align:justify;">सैटेलाइट लगातार देख रहे हैं, तकनीक सब रिकॉर्ड कर रही है और अब सच को लंबे समय तक छिपाना आसान नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 19:17:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में आतंकी खतरे की नई परतें और ज़ीरो-टॉलरेंस की राह, आतंक का नया साया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत आज दुनिया के उन चंद देशों में है जहाँ बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार के खतरे एक साथ मौजूद हैं। पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद के तौर-तरीकों, तकनीकी क्षमता, फंडिंग और नेटवर्क की संरचना में बदलाव आया है। इसी परिवर्तित माहौल ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।ड्रोन से हथियारों की तस्करी,आतंकी मॉड्यूल का पुनर्जीवन,सरहदी क्षेत्रों में पाकिस्तान प्रायोजित आतंक, और देश के अंदर गैंगस्टरआतंकी गठजोड़ आदि ये सभी खतरे भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">दिल्ली में हाल का आतंकी हमला और उसके पीछे छिपे मॉड्यूल को बेनकाब करने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161271/new-layers-of-terrorist-threat-in-india-and-the-path"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(4)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत आज दुनिया के उन चंद देशों में है जहाँ बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार के खतरे एक साथ मौजूद हैं। पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद के तौर-तरीकों, तकनीकी क्षमता, फंडिंग और नेटवर्क की संरचना में बदलाव आया है। इसी परिवर्तित माहौल ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।ड्रोन से हथियारों की तस्करी,आतंकी मॉड्यूल का पुनर्जीवन,सरहदी क्षेत्रों में पाकिस्तान प्रायोजित आतंक, और देश के अंदर गैंगस्टरआतंकी गठजोड़ आदि ये सभी खतरे भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">दिल्ली में हाल का आतंकी हमला और उसके पीछे छिपे मॉड्यूल को बेनकाब करने में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत को चुनौती सिर्फ सीमा पर नहीं, बल्कि देश के भीतर भी गहरी है।</div>
<div style="text-align:justify;">आतंकवाद का बदलता चेहरा तकनीक और नेटवर्क का संगम पर गहरी पैठ होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दशकों तक आतंकवाद सीमा-पार प्रशिक्षित आतंकियों, घुसपैठ और हथियारों की पारंपरिक मार्गों से आपूर्ति पर निर्भर रहा। लेकिन आज यह स्थिति बदल चुकी है। ड्रोन तस्करी  खतरनाक तकनीक का दुरुपयोग  हो रहा है।पिछले चार–पाँच वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई है कि पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन रोज़मर्रा की घटनाओं में शामिल हो चुके हैं।इनसे भेजे जा रहे हैं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>AK सीरीज की राइफलें, पिस्तौल ग्रेनेड RDस नकली मुद्रा</strong></div>
<div style="text-align:justify;">हेरोइन और ड्रग्स ।यह ड्रोन रात के अंधेरे में 5–7 किलो सामान लेकर 20–30 किमी भारत की सीमा तक आ जाते हैं।यह नया तरीका दो खतरों को जन्म देता है आतंकियों को बिना मानव जोखिम के हथियार मिल जाते हैं। इन हथियारों का नेटवर्क गैंगस्टरों, तस्करों और आतंकी संगठनों के गठबंधन को मजबूत करता है।. देश के भीतर का खतरा  गैंगस्टरआतंकी गठजोड़ भारत के लिए आज सबसे खतरनाक पहलू यह है कि आतंक फैलाने वाले कई मॉड्यूल अब अकेले नहीं चलते। वे देश के कुख्यात गैंगस्टरों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> क्यों बढ़ रहा है गैंगस्टरों का प्रभाव?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">जेलों से रिमोट-कंट्रोल की तरह अपराध संचालित करना सोशल मीडिया से भर्ती और धन उगाही विदेशों में बैठे गिरोह सरगनाओं की शरण हथियारों और ड्रग तस्करी से भारी फंडिंग से आंतरिक समस्या बढ़ रही है। इसी कारण कई आतंकी संगठन स्थानीय नेटवर्क को अपने काम में इस्तेमाल करने लगे हैं।  गैंगस्टरआतंकी गठजोड़ के परिणाम खतरनाक आते है। छोटे शहरों और गांवों तक हथियार पहुंचना स्थानीय अपराधियों का आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल धार्मिक और साम्प्रदायिक तनाव पैदा करना मुख्य कारण है। टारगेट किलिंग और फिरौती जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इनका उद्देश्य देश को अस्थिर करना, युवा पीढ़ी को भ्रमित करना और समाज में भय का माहौल बनाना है।</div>
<div style="text-align:justify;">दिल्ली हमला और NIA की जांच में अनेक रहष्य उजागर हुए है।हर पहलू उजागर करता है कि देश के लिए आतंकवाद की चुनौती भरपूर है।इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।दिल्ली में हाल में हुए आतंकी हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया। जांच में सामने आए कई पहलू चौंकाने वाले थे। हथियार ड्रोन से आए</div>
<div style="text-align:justify;">मॉड्यूल में विदेशी फंडिंग के निशान,. स्थानीय गैंगस्टर की भूमिका सोशल मीडिया पर एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन  रेकी करने में युवाओं का इस्तेमाल आदि सभी पुलिस प्रशासन के लिये खतरनाक है। NIA ने पूरे मॉड्यूल को तोड़कर यह साफ किया कि यदि जांच एजेंसियाँ सक्रिय न हों तो आतंकी देश की राजधानी तक को निशाना बना सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बाहरी खतरों से बड़ी चुनौती आंतरिक आतंकवाद</strong></div>
<div style="text-align:justify;">हालाँकि पाकिस्तान, चीन और तालिबान समर्थित तत्वों से बाहरी खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन आज सबसे बड़ी चिंता यह है किभारत के लिए सबसे बड़ा खतरा अब देश के अंदर का आतंकवाद है।यह आतंकवाद दिखने में स्थानीय अपराध लगता है, लेकिन जड़ें अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ी होती हैं। आज यह आंतरिक आतंकवाद तीन स्तरों पर काम कर रहा है। गैंगस्टर  क्रिमिनल नेटवर्क,कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसारऔर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के प्रयास इन तीनों को मिलकर रोकना सबसे कठिन काम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने वर्षों तक आतंकवाद से जंग लड़ी है। लेकिन आज की परिस्थितियों में नई रणनीतियों की आवश्यकता है।  ड्रोन-रोधी तकनीक का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार,सीमा क्षेत्रों में एंटी-ड्रोन गन और जैमिंग सिस्टम और आधुनिक रडार से 2–3 किमी दूर डिटेक्शन आदि समय की मांग है।BSF और सेना के लिए ड्रोन-वारफेयर प्रशिक्षण जरूरी है। गैंगस्टरों पर  जीरो टॉलरेन्स नीति व्यापक और मजबूत दृढ़ शक्ति की जरूरत है।</div>
<div style="text-align:justify;">जेलों से होने वाले संचालन पर डिजिटल नकेल बहुत आवश्यक है। हाई-प्रोफाइल अपराधियों के लिए विशेष निगरानी की आवश्यकता है।विदेशों से चल रहे गैंगस्टर सिंडिकेट पर इंटरपोल की मदद से संपत्ति ज़ब्ती, आर्थिक कार्रवाई, और मनी ट्रेल पर रोक आदि निगरानी आतंकवाद को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाएगा। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग औरकट्टरपंथ फैला रहे खातों की तुरंत ब्लॉकिंग होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं की ब्रेनवाशिंग रोकने के लिए साइबर सेंटर्स और ऑनलाइन फंडिंग पर निगरानी करनी होगी। स्थानीय पुलिस का आधुनिकीकरण और थानों में तकनीकी प्रशिक्षण की पूर्व तैयारी आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जा सकता है। ATS-SOG और NIA जैसी एजेंसियों से समन्वय औऱ शहरी और ग्रामीण इलाकों में विशेष खुफिया नेटवर्क बढ़ाया जाना चाहिए। शिक्षा, जागरूकता और समाज की भूमिका अहम है क्योकि आतंकवाद सिर्फ पुलिस से नहीं रुकता, बल्कि समाज की जागरूकता भी जरूरी है। युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने के लिए काउंसलिंग जरूरी है। सामाजिक सद्भाव के कार्यक्रम शिक्षा और रोजगार के अवसर और धार्मिक संगठनों की सकारात्मक भूमिका आज के परिपेक्ष्य में खास स्थान रखती है। जीरो टॉलरेन्स क्या है और कैसे लागू हो सकती है? जीरो टॉलरेन्सका अर्थ है आतंकी गतिविधि का न तो समर्थन, न सहानुभूति, न अवसर।सिर्फ और सिर्फ कार्रवाई। जीरो टॉलरेन्स के मुख्य तत्व है उस पर अमल जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानून का कठोरतम उपयोग UAPA, NSA, PMLA जैसे कानूनों का सख्त उपयोग औऱ आतंक से जुड़े हर व्यक्ति की गिरफ्तारी आवश्यक होनी चाहिए।आर्थिक जाल को तोड़ना हवाला नेटवर्क,फर्जी कंपनियाँ ड्रग तस्करी पर लगाम और. फास्ट ट्रैक कोर्ट के परिणाम आदि प्रणाली बहुत मददगार हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और  आतंकी विचारधारा का दमन  के साथ हर समय जांच जरूरी है।सतर्कता ही सुरक्षा बहुत आवश्यक है।भारत जैसे विशाल, विविध और जनसंख्या वाले देश में आतंकवाद को रोकने की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।हर स्तर पर सतर्कता और निरंतर जांच होनी चाहिए। सीमा पर सुरक्षा,हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग और बड़े शहरों में निगरानी भी उतनी ही आवश्यक है।साइबर अपराध की मॉनिटरिंग एवं स्कूल कॉलेजों में जागरूकता होनी ही चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब पूरा तंत्र हर समय सतर्क रहता है, तब आतंकवादियों के लिए कोई रास्ता नहीं बचता। भारत आतंकवाद से लड़ने की लंबी यात्रा तय कर चुका है। लेकिन आज जिस तकनीकी और नेटवर्क आधारित आतंकवाद का उदय हुआ है, वह पारंपरिक आतंकवाद से कहीं अधिक खतरनाक है।ड्रोन का इस्तेमाल,गैंगस्टर–आतंकी गठजोड़,सोशल मीडिया से कट्टरपंथ औ राजधानी तक हमलों की कोशिश करना यह सभी संकेत हैं कि लड़ाई अभी बाकी है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत का सुरक्षा तंत्र, NIA, RAW, IB, BSF और राज्य पुलिस पहले से कहीं अधिक सक्षम, आधुनिक और सतर्क हैं। जीरो टॉलरेन्स ही वह रास्ता है जो भारत को सुरक्षित बना सकता है। इसके लिए सरकार, प्रशासन, समाज और नागरिक सभी को एक साथ खड़ा होना होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 16:53:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक बार फिर जंग के मुहाने पर भारत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर है।  ये युद्ध किसी सीमा विवाद की वजह से नहीं बल्कि उस आतंकवाद के खिलाफ होने की अटकलें हैं जो पाकिस्तान से बाबस्ता है।  कश्मीर घाटी के पहलगाम में 26  लोगों की दिन-दहाड़े नृशंस हत्या की वारदात ने भारत को जबरन युद्धोन्मुख किया है।  आसमान में लड़ाकू विमानों की भाग-दौड़  साफ़ दिखाई देने लगी है। हमारे लड़ाकू विमान भी गरज रहे हैं और देश के नेता भी। अब देखना है कि  दोनों के सुर  कब एक होते हैं और बमों की बरसात  कब शुरू होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत कृषि प्रधान देश है, युद्ध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151397/india-once-again-at-the-mouth-of-war"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/jang1.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर है।  ये युद्ध किसी सीमा विवाद की वजह से नहीं बल्कि उस आतंकवाद के खिलाफ होने की अटकलें हैं जो पाकिस्तान से बाबस्ता है।  कश्मीर घाटी के पहलगाम में 26  लोगों की दिन-दहाड़े नृशंस हत्या की वारदात ने भारत को जबरन युद्धोन्मुख किया है।  आसमान में लड़ाकू विमानों की भाग-दौड़  साफ़ दिखाई देने लगी है। हमारे लड़ाकू विमान भी गरज रहे हैं और देश के नेता भी। अब देखना है कि  दोनों के सुर  कब एक होते हैं और बमों की बरसात  कब शुरू होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत कृषि प्रधान देश है, युद्ध प्रधान नही।  भारत ने अपनी आजादी से लेकर अब तक जितनी भी जंग लड़ी हैं उनमें शायद एक भी युद्ध ऐसा नहीं है जो भारत ने अपनी तरफ से लड़ा हो। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर आज के प्रधानमंत्री प्रात: स्मरणीय श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी भी युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। सबको पता है कि  जंग से कुछ हासिल नहीं होता। जंग से सिर्फ और सिर्फ बर्बादी होती है। हर जंग में मनुष्यता कराहती है,निर्दोष लोग मारे जाते हैं। फिर भी यदि जंग के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता तो भारत जंग से पीछे नहीं हटता। आगे भी शायद ऐसा ही हो। मोदी जी ने तो यूक्रेन और रूस की जंग समाप्त करने कि लिए काफी भाग-दौड़ की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बात कोई  चार दशक पुरानी है ,शायद 1984  की ग्वालियर के कैंसर अस्पताल परिसर में माननीय अटलबिहारी की अध्यक्षता में एक कवि सम्मेलन हो रहा था ।  उस कवि सम्मेलन में मै भी एक नवोदित कवि के रूप में मौजूद था ।  उस कवि सम्मेलन में अटल जी ने अपनी चर्चित कविता' हम जंग न होने देंगे ' पढ़ी थी ।  वे जुंग में थे लेकिन कविता आत्मा से पढ़ रहे थे।  उनकी कविता के कुछ अंश आप देखिये - हम   जंग    न    होने    देंगे विश्व  शांति  के  हम  साधक  है ,  जंग  न  होने  देंगे  ! कभी  न  खेतों  मे  फ़िर  खुनी  खाद  फलेगीं, खलिहानों  मे  नहीं  मौत  कि  फसल  खिलेगी<br />आसमान  फ़िर  कभी  न  अंगारे  उगलेगा, एटम  मे  नागासाकी  फ़िर  नहि  जलेगी, युद्धविहीन  विश्व  का  सपना  भंग  न  होने  देंगे। जंग  न  होने  देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">हथियारों  के  ढ़ेरो  पर  जिनका  है  डेरा, मुँह  में  शांति , बगल  मे  बम, धोके  का  फ़ेरा कफ़न  बेचने  वालों  से  कह  दो  चिल्लाकर दुनियां  जान  गई  है  उनका  असली  चेहरा कामयाब  हो  उनकी  चालें, वह  ढ़ंग  न  होने  देंगे। जंग  न  होने  देंगे। हमें  चाहिए  शांति , ज़िन्दगी  हमको   प्यारी हमें  चाहिए  शांति, सृजन  कि  है  तैयारी हमने  छेड़ी  जंग  भूख  से आगे  आकर हाथ  बँटाए  दूनियां  सारी। हरी - भरी  धरती  को  खुनी  रंग  न  लेने  देन्गे। जंग  न  होने  देंगे। भारत - पाकिस्तान  पडोसी, साथ - साथ रहना  है, प्यार  करे  या  वार  करे , दोनो  को  हि  सहना  है , तीन  बार  लड़  चुके लड़ाई, कितने  महंगा  सौंदा, रुसी  बम  हो  या  अमरीकी , खून  एक  बहना   है जो  हम  पर  गुजरी  बच्चो  के   संग न  होने  देंगे।जंग  न  होने  देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अटल जी को इसके बावजूद जंग का समाना करना पड़ा ।  उनके शांति प्रयासों को तत्कालीन पाकिस्तानी प्रशासन ने धता बता दिया था। अटल जी के प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में पाकिस्तान से जंग हुई और जीती भी गयी।  अटल जी से पहले प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू,लाल बहादुर  शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गाँधी  और पंडित अटल बिहारी बाजपेयी ने भी जंग  लड़ी। जंग में पाकिस्तान टूटा और बांग्लादेश बना। 'जंग में हार-जीत होती रहती है किन्तु देश विकास की दौड़ में पिछड़ जाता है। दरअसल जंग  किसी भी लोकतान्त्रिक सरकार का हथियार नहीं होती। जंग तानाशाही प्रवृत्ति के नेतृत्व  का अमोध अस्त्र होता है। मोदी सरकार की नाकामियों और पाकिस्तान की हठधर्मी भावी जंग की आधारशिला हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जंग के मामले में हम संघ और भाजपा के प्रबल विरोधी होते हुए कविवर पंडित अटल बिहारिके प्रशंसक हैं। अटल जी कवि थे या नहीं ये अलग बात है किन्तु वे बेहतरीन तुकबंद थे और उनका मन कविमन था। लेकिन जब सर पर आगयी तो उनकी सरकार ने भी युद्ध लड़ा ,क्योंकि युद्ध भारत पर थोपा गया था।  इस बार भी युद्ध थोपा जा रहा है। हमारे प्रधानमंत्री  मोदी जी ने भी अटल जी की तर्ज पर पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के लिए कोशिश की थी ,लेकिन उनकी कोशिशें परवान नहीं चढ़ सकीं। वे अटल जी जैसे कवि हृदय नेता नहीं हैं।  उनकी भाषा और कार्य पद्यति अटल जी से भिन्न है। अब उनके सामने भी कोई विकल्प नहीं है जंग का। यदि उन्होंने जंग न लड़ी तो वे राजनीतिक जंग हार जायेंगे। क्योंकि उन्होंने मुसलमानों  के खिलाफ देश में ही नहीं बल्कि  ,दुनिया में भी एक अघोषित ध्रुवीकरण करने की कोशिश की है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई माने या न माने किन्तु  इस समय देश में सरकार के तमाम फैसलों की वजह से मुस्लिम विरोधी वातावरण है। इस वातावरण को तैयार करने में भाजपा और सत्ता प्रतिष्ठान ने बहुत मेहनत की है। इससे देश की समरसता यानि धर्मनिरपेक्षता खतरे में है लेकिन सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है। सरकार की इसी लापरवाही का नतीजा है कि  देश में पुलवामा के बाद पहलगाम हो गया। खैर जो हुआ सो हुआ। अब आगे भी जो हो वो ठीक ही हो। इस समय मोदी जी की किस्मत है कि आतंकवाद के खिलाफ  फन्हें विश्व व्यापी समर्थन मिल रहा है।  अटल जी के साथ ऐसा नहीं था। जंग कि लिए पहले देश को तैयार किया जाये फिर फौज को ।  फ़ौज तो हमेशा तैयार रहती ही है ,लेकिन जनता नही।  जंग के दौरान देश में सब एकजुट हों ,कोई फिरकापरस्ती न हो ,कोई अनबन न हो। कोई हिन्दू-मुसलमान न हो।कालाबाजारी न हो।   अच्छी बात ये है की पहलगाम हत्याकांड के बाद देश का मुसलमान भी आतकवाद के खिलाफ सड़कों पर हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Apr 2025 16:40:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आतंकवाद की घृणित विचारधारा को करना होगा समूल नष्ट।</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जम्मू काश्मीर फिर आतंकवाद की ज्वाला से धधक रहा है, कठुआ, हीरानगर ,डोडा में गंभीर आतंकवादी हमला हुआ जिसमें एक सेना का जवान शहीद हो गया। इसके अलावा आतंकवादियों द्वारा धार्मिक यात्रा से लौटते हुए रियासी नामक स्थान पर श्रद्धालुओं पर बेतहाशा गोलियां बरसाई गई बस के पलटने से 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। उधर इटली में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा महात्मा गांधी की मूर्ति को खंडित किया गया जिसका अनावरण G7 समिट में शामिल होने जा रहे प्रधानमंत्री मोदी जी करने वाले थे। आतंकवाद ने न सिर्फ देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाक में दम करके रखा है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142221/the-hateful-ideology-of-terrorism-must-be-completely-destroyed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/dfgdfh.jpg" alt=""></a><br /><p>जम्मू काश्मीर फिर आतंकवाद की ज्वाला से धधक रहा है, कठुआ, हीरानगर ,डोडा में गंभीर आतंकवादी हमला हुआ जिसमें एक सेना का जवान शहीद हो गया। इसके अलावा आतंकवादियों द्वारा धार्मिक यात्रा से लौटते हुए रियासी नामक स्थान पर श्रद्धालुओं पर बेतहाशा गोलियां बरसाई गई बस के पलटने से 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। उधर इटली में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा महात्मा गांधी की मूर्ति को खंडित किया गया जिसका अनावरण G7 समिट में शामिल होने जा रहे प्रधानमंत्री मोदी जी करने वाले थे। आतंकवाद ने न सिर्फ देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाक में दम करके रखा है। अब समय आ गया है कि आतंकवादियों को एक सिरे से कुचल दिया जाए और आतंकवादी विचारधारा को समूल नष्ट किया जाए।आतंकवाद एक मानसिक विकृति की विचारधारा है, जिसके द्वारा हिंसक कार्यों और गतिविधियों से जनमानस अशांति और भय की स्थापना करके अपने लक्ष्य की प्राप्ति का प्रयास करना होता है।</p>
<p>जिससे किसी भी क्षेत्र में आधिपत्य का अधिकार प्राप्त करने के लिए हिंसा और आतंक का सहारा लेकर जनमानस में अशांति का वातावरण निर्मित करने अपने मंसूबे पूरे कर आर्थिक सामाजिक और राजनैतिक विध्वंस का तांडव मचाना होता है। कुछ व्यक्तियों के समूह द्वारा संचालित मानव विरोधी गतिविधियां ही हैं जो कि समाज के विरुद्ध लूट, अपहरण, बम विस्फोट,हत्या जैसे जघन्य अपराधों को जन्म देती है। आतंकवाद मूलतः धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक परिवेश लिए हुए होता है। भारत में आतंकवाद धार्मिक और राजनीतिक ज्यादा परिलक्षित हुआ है। भारत में कश्मीर, लद्दाख, असम मैं विभिन्न अलगाववादी समूह द्वारा हिंसक अपराधिक कृत्य कर लोगों को भयभीत तथा पलायन करने पर मजबूर करने का कृत्य राजनीतिक आतंकवाद ही है।</p>
<p>अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा ,जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन धार्मिक कट्टरता की भावना से अपराध को अंजाम देते हैं। देश में नक्सलवाद ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड ,बिहार और पश्चिम बंगाल में अपना मौत का परचम फेहरा के रखा है। नक्सलवाद मूलतः सामाजिक क्रांतिकारी समूह द्वारा सरकार के विरोध में आमजन तथा आदिवासियों के मध्य अपनी समानांतर सरकार चलाने हेतु हिंसक घटनाएं की हैं। यह आतंकवादी ग्रुप हिंसा के द्वारा अलग अलग तरीके से आतंकवाद फैलाने का प्रयास करते हैं ,यह ज्यादातर भीड़भाड़ वाले इलाकों में जैसे रेलवे स्टेशन बस स्टैंड रेल रेल पटरियों वायुयानो का अपहरण निर्दोष लोगों को बंदी बनाना बैंक में डकैतियां कर समाज में अराजकता तथा वैमनस्यता फैलाने का काम करते हैं। भारत में नक्सलवाद तो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के नक्सल वाली क्षेत्र से पनपा है, जो पूरे भारत में धीरे-धीरे फैल कर हिंसक रूप अपनाए हुए हैं।</p>
<p>आतंकवाद केवल भारत में न होकर उसका साम्राज्य वैश्विक स्तर पर भी दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से फैला हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद ने अनेक घटनाओं को जन्म देकर विश्व शांति सद्भावना की मूल कल्पना को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास किया है। दुनिया के प्रत्येक देश में आतंकवाद किसी न किसी रूप में आज मौजूद है। आतंकवाद कहीं रंगभेद, कहीं भाषा विभेद, कहीं राजनीतिक विचारधाराओं में विरोध और कहीं रंगभेद के कारण ,नस्ली समस्या आतंकवाद का कारण बनी है। यह समस्याएं हथियारों से सुलझाने के प्रयास में अत्यंत हिंसक बन गई हैं।</p>
<p>आतंकवाद को वृहद रूप देने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने भी बड़ा साथ दिया है, आतंकवादियों, नक्सलवादियों और नस्ल वादियों के लिए रसायनिक, नाभिकीय, जैविक मानव बम जैसे आधुनिक हथियार उपलब्ध होने से यह आतंकवादी गतिविधियां और भी खतरनाक हो गई है। इसके अलावा मीडिया में इंटरनेट उपलब्धता से यह सारी सरकारी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त हो जाती है इससे आतंकवादी और ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं। विश्व में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर 11 सितंबर 2001 आतंकवादी हमला मानव इतिहास की सबसे क्रूर तम हमला माना जाता है। पाकिस्तान के पेशावर जिले में आर्मी स्कूल में 150 मासूम बच्चों की निर्मम हत्या भी एक क्रूर आतंकवादी घटना हैl भारत में 1993 में मार्च में श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट इसी तरह दिसंबर 2001 में संसद भवन पर हमलावाराणसी बम विस्फोट, अहमदाबाद में बम विस्फोट, 2008 में मुंबई ताज होटल पर हमला,2016 में पठानकोट एयरबेस हमला, 2017 में अमरनाथ तीर्थयात्रियों हमला, 2019 में पुलवामा हमला आतंकवादी घटनाएं हैं जिससे मानवीय संवेदनाएं, शांति स्थापना की मूल धारणा की धज्जियां उड़ जाती हैl</p>
<p>भारत में तो नक्सलवाद भी आतंकवाद का एक वृहद रूप ले चुका हैl आतंकवाद का सबसे भयानक रूप यह है की कोई भी देश यह नहीं जानता कि आतंकवाद का अगला निशाना कौन सा देश और कौन सी इमारत, रेलवे स्टेशन, वायुयान और कौन सा धार्मिक स्थल होगाl वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ असुरक्षा की भावना पूरी तरह व्याप्त हो चुकी हैl आतंकवाद का सबसे विस्तृत और भयानक रूप अफगानिस्तान में सरकार का तख्तापलट का ही हैl वहां तालिबानी आतंकवादियों द्वारा सरकार को गिरा कर अफगानिस्तान देश पर जाकर वहां शासन स्थापित कर लिया था, और पूरी दुनिया तमाशबीन बनी रही। रूस यूक्रेन युद्ध मैं भी लाखों लोगों की आक्रमण कर हिंसक हत्या तानाशाही तथा मानसिक आतंकवाद का ही एक भयानक रूप है।</p>
<p>पूरे विश्व में आतंकवाद के खिलाफ भारत सहित अनेक कानून बनाए गए एवं उन पर अमल भी किया जा रहा है। पर आतंकवाद को समूल नष्ट करने के लिए आतंकवादी विचारधारा को ही समूल रूप से नष्ट करना होगा, क्योंकि आतंकवाद कोई तात्कालिक कारणों से पैदा नहीं होता,यह एक घिनौनी, हिंसक आतंक पैदा करने वाली विचारधारा है। अशांति की इस विचारधारा में जन समुदाय में रोश तथा खौफ पैदा कर दिया है और यह मानवता के लिए अभिशाप की तरह व्याप्त हो गया है। जिससे विश्वव्यापी वैश्विक शांति की अवधारणा को नष्ट कर दिया है। वैसे तो पूरे विश्व में आतंकवाद के खिलाफ प्रयास किए जा रहे हैं पर हर देश के हर नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि इस विचारधारा और इनकी गतिविधियों पर नजर रख इसे समूल नष्ट करने का प्रयास किया जाना चाहिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jun 2024 17:04:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आतंक के खिलाफ भारत के एक्शन को वैश्विक स्तर पर सराहा, US ने की मोदी सरकार की तारीफ</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आतंकवादियों के खिलाफ देश में चल रहे अभियान की तारीफ अब वैश्विक स्तर पर होने लगी है। अमेरिका की एक रिपोर्ट में पीएम मोदी की जमकर तारीफ की गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे भारत सरकार ने आतंकवादियों को मिटाने के लिए जरूरी कोशिशें की हैं।</p>
<p>यूएस ब्यूरो ऑफ काउंटर टेररिज्म (US Bureau of Counter Terrorism) की ‘कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म 2021: इंडिया’ (Country Reports on Terrorism 2021: India) के मुताबिक, भारत सरकार ने आतंकवादी संगठनों के संचालन का पता लगाने उन्हें नाकाम करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127657/indias-action-against-terror-is-appreciated-globally-us-praises-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/1548.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आतंकवादियों के खिलाफ देश में चल रहे अभियान की तारीफ अब वैश्विक स्तर पर होने लगी है। अमेरिका की एक रिपोर्ट में पीएम मोदी की जमकर तारीफ की गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे भारत सरकार ने आतंकवादियों को मिटाने के लिए जरूरी कोशिशें की हैं।</p>
<p>यूएस ब्यूरो ऑफ काउंटर टेररिज्म (US Bureau of Counter Terrorism) की ‘कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म 2021: इंडिया’ (Country Reports on Terrorism 2021: India) के मुताबिक, भारत सरकार ने आतंकवादी संगठनों के संचालन का पता लगाने उन्हें नाकाम करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में, आतंकवाद ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और मध्य भारत के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया। इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन, ISIS, अल-कायदा, जमात-उल-मुजाहिदीन और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश, भारत में सक्रिय आतंकवादी समूह हैं।</p>
<p>2021 में आतंकी गतिविधियां बढ़ीं</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में आतंकवादियों की रणनीति में एक बदलाव आया। आतंकियों ने नागरिकों पर बड़ी संख्या में हमले किए और IED का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिसमें एक वायु सेना अड्डे पर ड्रोन का उपयोग करके एक विस्फोटक हमला भी शामिल है। अक्तूबर 2021 में अमेरिका, भारत ने काउंटर टेररिज्म ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की 18वीं बैठक की और नवंबर 2021 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ दूसरे क्वाड काउंटर टेररिज्म मीटिंग की मेजबानी की।</p>
<p>भारत आतंकवाद की जांच से संबंधित जानकारी के लिए अमेरिकी अनुरोधों का ना सिर्फ तुरंत जवाब देता है, बल्कि अमेरिकी सूचना के जवाब में खतरों को कम करने की कोशिश भी करता है। आतंकवादी समूहों को खत्म करने के लिए सहयोगात्मक प्रयास जारी हैं और संयुक्त राज्य अमेरिका में संभावित खतरों व अमेरिकी हितों के खिलाफ अमेरिकी अधिकारियों को अलर्ट जारी किए जाते हैं।</p>
<p>2021 में जम्मू-कश्मीर में हुए इतने हमले</p>
<p>2021 में जम्मू-कश्मीर में 153 आतंकवादी हमले हुए, इन हमलों में 274 लोगों की मौत हुई जिसमें 45 सुरक्षाकर्मी, 36 नागरिक और 193 आतंकवादी शामिल थे। मणिपुर में 1 नवंबर को हुआ एक हमला शामिल था, जिसमें मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और नागा पीपुल्स फ्रंट ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में एक भारतीय सेना अधिकारी और उसकी पत्नी व नाबालिग बेटे सहित सात लोग मारे गए थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Feb 2023 10:43:20 +0530</pubDate>
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                <title>जय शंकर ने दिया पाक को मुहतोड़ जवाब, तो तिलमिला उठे पाक मंत्री भुट्टो </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br /><br /></p>
<p><strong>आतंकवाद</strong> को बढ़ावा देने वाला पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से कभी बाज नहीं आ सकता। आतंकी गतिविधियों में सामिल होने के बाद भी पाकिस्तान अपने आप को हमेशा मासूम बताता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहानुभूति बटोरता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल जरदारी भुट्टो अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को सही ठहराने के चक्कर में हद पार कर दी। पाकिस्तान के मंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमला बोलते हुए कहा, 'मैं भारत को बताना चाहता हूं कि ओसामा बिन लादेन तो मर चुका है, लेकिन 'गुजरात का कसाई' अभी जिंदा है और भारत का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126391/jai-shankar-gave-a-befitting-reply-to-pakistan-then-pak"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/27.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br /><br /></p>
<p><strong>आतंकवाद</strong> को बढ़ावा देने वाला पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से कभी बाज नहीं आ सकता। आतंकी गतिविधियों में सामिल होने के बाद भी पाकिस्तान अपने आप को हमेशा मासूम बताता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहानुभूति बटोरता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल जरदारी भुट्टो अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को सही ठहराने के चक्कर में हद पार कर दी। पाकिस्तान के मंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमला बोलते हुए कहा, 'मैं भारत को बताना चाहता हूं कि ओसामा बिन लादेन तो मर चुका है, लेकिन 'गुजरात का कसाई' अभी जिंदा है और भारत का प्रधानमंत्री है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे भुट्टो ने एस जयशंकर पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले अमेरिका ने उनकी एंट्री पर बैन लगा दिया था। पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर पर आरोप लगाते हुए भुट्टो ने कहा कि दोनों भारत के नहीं, RSS के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री हैं। भारत के विदेश मंत्री ने 9/11 के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पनाह देने वाली टिप्पणी की थी जिस पर बिलावल जरदारी भुट्टो को मिर्ची लग गई और वह पीएम मोदी पर बदतमीजी भरी टिप्पणी करने पर उतर आए।</p>
<p>बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन में कश्मीर मुद्दे को उठाने पर पाकिस्तान को फटकार लगाई थी। पाकिस्तान को नसीहत देते हुए जयशंकर ने कहा था कि जिस देश ने अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादी को पनाह दी हो और अपने पड़ोसी देश की संसद पर हमला किया हो, उसे उपदेश नहीं देना चाहिए। पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए जयशंकर ने कहा था कि जो दुनिया के लिए अस्वीकार है, उसे सही ठहराने का सवाल ही नहीं उठना चाहिए। जयशंकर की इसी टिप्पणी पर बिलावल जरदारी भुट्टो को मिर्ची लगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Dec 2022 10:50:59 +0530</pubDate>
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