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                <title>swatantra vichar news hindi - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>swatantra vichar news hindi RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भीड़ का हिस्सा नहीं, संवेदनशील, दायित्ववान एवं अनुशासित सहभागी बनें</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लेखक:प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश, शिक्षाविद् </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और खेल आयोजन हमारी सांस्कृतिक विविधता और सामूहिक उत्साह के प्रतीक हैं। ये आयोजन निरंतर होते रहते हैं, किंतु जब यही उत्सव असंवेदनशीलता, अव्यवस्था और अनुशासनहीनता के कारण त्रासदी का रूप ले लेते हैं, तो एक गंभीर प्रश्न उठता है—क्या हम केवल एक भीड़ हैं या एक जिम्मेदार समाज? क्या भीड़ प्रबंधन केवल शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है? क्या सहभागियों का कोई दायित्व नहीं बनता?</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हमारे देश में भीड़ के अनियंत्रित होने के कारण अनेक त्रासद घटनाएं घट चुकी हैं। 1954 के प्रयागराज कुंभ में हुई भगदड़</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152365/become-a-sensitive-responsible-and-disciplined-partner-not-part-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-06/img-20241207-wa0003.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लेखक:प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश, शिक्षाविद् </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और खेल आयोजन हमारी सांस्कृतिक विविधता और सामूहिक उत्साह के प्रतीक हैं। ये आयोजन निरंतर होते रहते हैं, किंतु जब यही उत्सव असंवेदनशीलता, अव्यवस्था और अनुशासनहीनता के कारण त्रासदी का रूप ले लेते हैं, तो एक गंभीर प्रश्न उठता है—क्या हम केवल एक भीड़ हैं या एक जिम्मेदार समाज? क्या भीड़ प्रबंधन केवल शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है? क्या सहभागियों का कोई दायित्व नहीं बनता?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमारे देश में भीड़ के अनियंत्रित होने के कारण अनेक त्रासद घटनाएं घट चुकी हैं। 1954 के प्रयागराज कुंभ में हुई भगदड़ स्वतंत्र भारत की पहली बड़ी चेतावनी थी, जिसने प्रशासनिक सीमाओं को उजागर किया। इसके बाद 2003 में नासिक कुंभ;</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2008 में नांदेड़ (हुज़ूर साहिब गुरुद्वारा), नैना देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश);2011में पुलुमेदु मकर संक्रांति मेला, केरल;</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2013 में रतनगढ़ मंदिर, दतिया (मध्य प्रदेश);2014 में पटना देवी मंदिर (बिहार), डोमरी गांव (वाराणसी),2014 में दशहरा समारोह, पटना;2015 में पुष्करम उत्सव, राजमुंदरी (आंध्र प्रदेश);2022 में वैष्णो देवी मंदिर;2023 में कुबेरेश्वर धाम, रुद्राक्ष महोत्सव;2024 में हैदराबाद थिएटर हादसा;2024 में हाथरस, सत्संग के बाद भगदड़;2025 में महाकुंभ हादसा, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा, चिन्नास्वामी स्टेडियम (बेंगलुरु) के बाहर आईपीएल विजय का जश्न जैसे आयोजनों में विभिन्न कारणों से भीड़ अनियंत्रित हुई, भगदड़ मची और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन हादसों की जिम्मेदारी किस पर डाली जाए? क्या आयोजनकर्ता पूर्णतः दोषी हैं? क्या प्रशासनिक व्यवस्था ही विफल रही? या फिर क्या भीड़ में शामिल हर व्यक्ति को भी आत्ममंथन नहीं करना चाहिए?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भीड़भाड़ वाले आयोजनों में भाग लेना अनुचित नहीं है, किंतु सहभागी बनने से पहले कुछ मूलभूत प्रश्नों पर विचार करना आवश्यक है:क्या आयोजन को प्रशासन से अनुमति प्राप्त है?;</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजन स्थल की क्षमता और व्यवस्था कैसी है?;क्या यह आयोजन केवल आमंत्रित या पासधारकों के लिए है या सभी के लिए खुला है?;निजी वाहन लेकर वहां जाना कितना उचित है?;</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या भीड़ में मेरी उपस्थिति आवश्यक है या घर से भी इसे देखा जा सकता है?आज के तकनीकी युग में बहुत से आयोजन घर बैठे टीवी या डिजिटल माध्यमों से देखे जा सकते हैं। यदि हर व्यक्ति यह मान ले कि वह केवल दर्शक नहीं, बल्कि आयोजन का सह-व्यवस्थापक  है, तो कई समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हम यह भूल जाते हैं कि लाइन तोड़ने वाला, धक्का देने वाला, गेट पर चिल्लाने वाला,शोर मचाते हुए, झंडा लहराते हुए तेज रफ्तार में दो पहिए वाहन चलाने वाला,अफवाह फैलाने वाला, नियमों की अनदेखी करने वाला व्यक्ति स्वयं अव्यवस्था का हिस्सा बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भीड़ प्रबंधन केवल पुलिस बल, बैरिकेडिंग, स्मार्ट निगरानी प्रणाली, सीसीटीवी, ड्रोन, RFID टैगिंग, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम, मोबाइल ऐप्स, हाईटेक लाउडस्पीकर या वर्चुअल रूट मैपिंग से संभव नहीं। इसका मूल आधार है अनुशासन, संवाद और नागरिक सहयोग।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक जिम्मेदार सहभागी वही होता है जो समय का पालन करे,</div>
<div style="text-align:justify;">अनुशासन में रहे,अफवाहों से बचे,दूसरों की सुविधा का उतना ही ध्यान रखे जितना अपनी, असहज, असहाय लोगों की मदद करे,प्रशासन का सहयोग करे।यह आचरण किसी कानून या प्रशिक्षण से नहीं आता, बल्कि सामाजिक चेतना और नैतिक अनुशासन से उत्पन्न होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमें यह स्वीकार करना होगा कि हादसे केवल व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदार व्यवहार का भी परिणाम होते हैं। जांच रिपोर्ट, मुआवजा और खेद-प्रकट करना पर्याप्त नहीं। जरूरत है आत्मचिंतन और सक्रिय नागरिक सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब समय आ गया है कि हम आयोजनों को केवल 'उपस्थित रहने' की प्रक्रिया न मानें, बल्कि अपनी भूमिका को रचनात्मक रूप से परिभाषित करें। जब हर नागरिक स्वयं को उत्तरदायी मानेगा, तभी भारत की आयोजन-संस्कृति सुरक्षित, गरिमामय और प्रभावशाली बन सकेगी। अतः भीड़ नहीं—संवेदनशील, दायित्ववान और अनुशासित सहभागी बनना ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jun 2025 14:42:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> पुतिन फिर पांचवीं बार रूस के सर्वे सर्वा। क्या तानाशाही का नया दौर शुरू होगा ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन फिर रूसी सरकार के पांचवें राष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने रूस के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में 33 शब्दों में शपथ ग्रहण की है। उनके पांचवीं बार शपथ ग्रहण लेते ही विश्व में शांति स्थापना के प्रयासों को एक बड़ा झटका लगा है । इस शपथ ग्रहण समारोह का रूस,ब्रिटेन तथा अन्य यूरोपीय देशों ने बहिष्कार कर दिया। 2000 में पहली बार व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री चुने गए थे, उसके बाद 2004 2012 और 2018 में राष्ट्रपति की शपथ ले चुके हैं। व्लादिमीर पुतिन के राष्ट्रपति चुने जाने के साथ ही वैश्विक देश तथा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141024/putin-again-dominates-russia-for-the-fifth-time"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/sfdsf.jpg" alt=""></a><br /><p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन फिर रूसी सरकार के पांचवें राष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने रूस के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में 33 शब्दों में शपथ ग्रहण की है। उनके पांचवीं बार शपथ ग्रहण लेते ही विश्व में शांति स्थापना के प्रयासों को एक बड़ा झटका लगा है । इस शपथ ग्रहण समारोह का रूस,ब्रिटेन तथा अन्य यूरोपीय देशों ने बहिष्कार कर दिया। 2000 में पहली बार व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री चुने गए थे, उसके बाद 2004 2012 और 2018 में राष्ट्रपति की शपथ ले चुके हैं। व्लादिमीर पुतिन के राष्ट्रपति चुने जाने के साथ ही वैश्विक देश तथा अन्य संगठनों के विश्व स्तर पर चलाए जा रहे शांति प्रयासों में निराशा जनक वातावरण तैयार हुआ है।</p>
<p>व्लादिमीर पुतिन को साम्राज्यवादी विचारधारा का बड़ा समर्थक बताया जाता है और इसी विस्तारवादी सनक के चलते उन्होंने यूक्रेन में बड़ा सैनिक हमला किया था, अरबो रुपए के नुकसान तथा जान माल की हानि के बाद भी युद्ध अभी तक जारी है। अभी भी व्लादिमीर पुतिन तथा यूक्रेन के राष्ट्रपति के हौसले लड़ाई के लिए बुलंद देखे जा रहे हैं। रूस में 2000 से लेकर 2024 तक व्लादिमीर पुतिन 5 बार राष्ट्रपति चुने गए हैं इस दौरान अमेरिका में पांच अलग-अलग राष्ट्रपति और ब्रिटेन के सात प्रधानमंत्री बदले जा चुके हैं। शपथ लेने के बाद कांस्टीट्यूशनल कोर्ट के अध्यक्ष वालेरी जरकिन ने स्वागत किया और विक्ट्री शेक हैंड किया।</p>
<p>पुतिन ने शपथ ग्रहण के बाद 21 तोपों की सलामी लेते हुए राष्ट्रगान भी किया इसके बाद उन्होंने अपनी स्पीच में कहा कि हम उन देशों से बात करने सहर्ष तैयार हैं जो हमें परंपरागत दुश्मन समझते हैं। हम अन्य देशों से अपने संबंध बेहतर बनाना चाहते हैं उल्लेखनीय की शपथ ग्रहण समारोह का अमेरिका ब्रिटेन यूरोप के अन्य देशों ने बहिष्कार किया है हालांकि भारत के राजदूत विनय कुमार इस कार्यक्रम में मौजूद थे। दिनांक 15 मार्च से 17 मार्च 24 तक राष्ट्रपति चुनाव आयोजित किए गए थे इसमें व्लादिमीर पुतिन को 88% वोट मिले थे और उनके विरोधी निकोले खरातीनोव केवल 4% वोट ही मिले हैं। वैश्विक स्तर पर इस चुनाव को गैर-पारदर्शी और गैर-निष्पक्ष चुनाव माना गया है क्योंकि इस चुनाव में पुतिन का कोई खास विरोध नहीं किया गया था।</p>
<p>रूस में जोसेफ स्टालिन के बाद व्लादिमीर पुतिन ही सबसे ज्यादा समय से राष्ट्रपति बने हुए हैं रूस की जनता उन्हें कितना पसंद करती है यह तो नहीं मालूम पर वर्ष 2000 से 24 तक व्लादिमीर पुतिन ने रूस में आर्थिक सामरिक तथा सामाजिक परिवर्तन किए हैं एवं लगातार यूरोपीय देशों का विरोध करते आ रहे हैं। पिछले 2 वर्ष से ज्यादा समय से यूक्रेन से साम्राज्यवादी युद्ध की आधारशिला भी व्लादिमीर पुतिन ने ही रखी है एवं अभी भी युद्ध जारी है। यह तो तय है कि वैश्विक स्तर पर बाहुबली अमेरिका, ब्रिटेन,कनाडा, फ्रांस की वैश्विक दादागिरी को रूस व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में चेक एंड बैलेंस करने में कामयाब रहा है। व्हाइट हाउस के पूर्व सुरक्षा सलाहकार फियोना हिल के अनुसार व्लादिमीर पुतिन अपने को रूस के सम्राट की तरह महान समझने लगे और 10 वर्ष पहले से क्रीमिया में कब्जे के बात तथा देश को यूक्रेन के युद्ध में झुकने के बाद काफी नाटकीय परिवर्तन हुए हैं अब व्लादिमीर पुतिन अपने को प्रगतिवादी शासक से बदलकर साम्राज्यवादी नेता के रूप में स्थापित करने के प्रयास में लगे हुए हैं।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पूरे विश्व में चीन के तानाशाह शी जिनपिंग, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी तुलना एक तानाशाह राष्ट्रपति के रूप में की जाती रही है। चीन और उत्तरी कोरिया को जहां वैश्विक शांति के लिए पूरा विश्व खतरा मानता है वही यूक्रेन युद्ध के बाद व्लादिमीर पुतिन भी इसी श्रेणी में आकर खड़े हो गए हैं। रूस की समाचार एजेंसी के अनुसार पुतिन ने अपने शपथ ग्रहण समारोह के भाषण में कहा है कि हम अपने एशियाई साथी दोस्तों के साथ मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर के लिए काम करते रहेंगे उन्होंने यह भी कहा कि हम यूरोपीय देश के साथ खुले दिल से बात करने की तैयार है जो हमेशा हमारे विकास में बड़ा अवरोध बनते रहे हैं एवं रूस के विरुद्ध आक्रामक रवैया अपना कर रखते हैं। अब यह आशा की जानी चाहिए कि व्लादिमीर पुतिन के पांचवीं बार राष्ट्रपति बनने के बाद शायद उनके वैचारिक एवं सामरिक विचारों में परिवर्तन आ जाए।</p>
<p><strong>संजीव ठाकुर, (वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी लेखक,कवि), चिंतक, स्तंभकार,</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 May 2024 16:06:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीपफेक -चरित्र हनन का औजार जिसने प्रधानमंत्री मोदी को भी नहीं छोड़ा  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">पांच नवंबर को अभिनेत्री रश्मिका मंदाना</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">का डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इस वीडियो का विरोध करते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। वहीं अभिनेत्री के समर्थन में अमिताभ बच्चन आए और कानूनी कार्रवाई की मांग की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद इस फेक वीडियो पर रश्मिका की भी प्रतिक्रिया सामने आई थी । दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह वीडियो असल में जारा पटेल का था । अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के डीप फेक वीडियो के बाद हर कोई सकते में था ।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">पर इस मामले में ज्यादा तूल तब पकड़ा जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/137060/deepfake-a-tool-of-character-assassination-which-has-not"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/ashok-bhatia-swatantra-patrakar.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">पांच नवंबर को अभिनेत्री रश्मिका मंदाना</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इस वीडियो का विरोध करते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। वहीं अभिनेत्री के समर्थन में अमिताभ बच्चन आए और कानूनी कार्रवाई की मांग की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद इस फेक वीडियो पर रश्मिका की भी प्रतिक्रिया सामने आई थी । दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह वीडियो असल में जारा पटेल का था । अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के डीप फेक वीडियो के बाद हर कोई सकते में था ।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">पर इस मामले में ज्यादा तूल तब पकड़ा जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को इस बारे में चेतावनी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> दी। मोदी ने कहा कि एक तरफ नई-नई टैक्नोलॉजी जिंदगी को जहां आसान बना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं नई टैक्नोलॉजी के अपने खतरे भी हैं। ऐसे खतरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो किसी की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिंदगी बर्बाद कर सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक ताने-बाने को खराब कर सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में तनाव पैदा कर सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इससे सावधान रहने की ज़रूरत है। मोदी ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कहा कि आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस के आने के बाद अब जागरूकता जरूरी है क्योंकि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आर्टिफीशियल इंटैलीजेंस असली-नकली का फर्क खत्म कर देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पता ही नहीं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चलता कि क्या सच्चा है और क्या नकली। मोदी ने फेक वीडियो की बात की। कहा कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आजकल सबके हाथ में फोन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर फोन में तमाम तरह के एप हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबमें सोशल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया एप हैं और अगर एक फेक वीडियो आता है तो वो कुछ ही मिनटों में सोशल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग उसे सही समझ लेते हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे किसी व्यक्ति या समाज का बड़ा नुकसान हो सकता है।</span> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पत्रकारों के साथ एक दीपावली मिलन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि कैसे एक नकली वीडियो में उन्हें महिलाओं के साथ गरबा डांस करते हुए दिखाया गया। मोदी ने बताया कि स्कूल के दिनों के बाद से उन्होंने कभी गरबा डांस किया ही नहीं। लेकिन इस वीडियो को देखकर कोई नहीं कह सकता कि वीडियो में जो व्यक्ति गरबा कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो प्रधानमंत्री नहीं। ये एक डीप फेक वीडियो है। चूंकि टैकनोलॉजी इतनी आगे बढ़ गई है कि किसी भी व्यक्ति को कुछ भी करते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हुए दिखाया जा सकता है। चेहरा भी उसी का होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवाज़ भी उसी की होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सब नकली। और क्या असली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या नकली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसकी पुष्टि करने के लिए आम लोगों के पास कोई ज़रिया नहीं है। इसलिए जो दिखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग उसी पर भरोसा कर लेते हैं। मोदी ने कहा कि अभी भले समझ में न आए लेकिन आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस का खतरा भविष्य में बड़ी परेशानियां पैदा कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसके प्रति लोगों को सावधान करने की जरूरत है।</span> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">फेक वीडियो का कैसे दुरूपयोग हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका उदाहरण मध्य प्रदेश के चुनाव में हुआ। चुनाव के दौरान फेक वीडियो का खूब इस्तेमाल हुआ। कांग्रेस और बीजेपी ने इसको लेकर चुनाव आयोग में एक दूसरे के खिलाफ खूब शिकायतें कीं। शुक्रवार को</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">वोटिंग खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान नकली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झूठे वीडियो दिखाए और जनता को गुमराह करने की कोशिश की। दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी ने झूठे प्रचार और गलत तरीकों से प्रचार के करीब दो दर्जन शिकायतें की हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इनमें ज्यादातर शिकायतें उन वीडियो की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दूसरे वीडियो पर नकली आवाज़ और ग्राफिक्स सुपरइंपोज करके बनाए गए हैं। इस तरह के कई वीडियो मध्य प्रदेश में सोशल मीडिया के जरिए खूब फैलाए गए। एक वीडियो में दिखाया गया कि शिवराज सिंह कैबिनेट की मीटिंग के दौरान मंत्रियों और अफसरों से कह रहे है कि ‘जनता बहुत नाराज है.।बीजेपी भारी अंतर से हार सकती है...इसलिए कुछ भी करो...हर गांव में जाओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बूथ पर जाओ...जो करना है करो...अभी वक्त है...सब ठीक करो...मैनेज करो...’</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">असली वीडियो चुनाव के एलान से पहले शिवराज सिंह चौहान की आखिरी कैबिनेट मीटिंग का है। वीडियो असली था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसमें आवाज शिवराज सिंह चौहान की नहीं है। चौहान की आवाज की हुबहू नकल करके इसे वीडियो पर सुपर इंपोज किया गया। इस वीडियो को जिन व्हॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए फैलाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी शिकायत पुलिस से की गई। पुलिस ने जांच करके इस तरह के वीडियो को तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटवाया। इस तरह के वीडियो कांग्रेस से जुड़े लोगों की तरफ से सर्कुलेट किए गए। ऐसे दर्जनों वीडियो बनाए गए ।</span></p>
<p>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">कौन बनेगा करोड़पति’ की ओरिजनल क्लिप से छेड़छाड़ की गई। होस्ट और कंटेस्टेंट की आवाज़ बदलकर सारा कटेंट बदल दिया गया। इस वीडियो से ये मैसेज देने की कोशिश की गई कि शिवराज सिंह सिर्फ घोषणाएं करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन पर अमल नहीं करते। कौन बनेगा करोड़पति शो के होस्ट अमिताभ बच्चन थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आवाज सबकी नकली थी। आवाज सुपरइंपोज करके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्राफिक्स डालकर ऐसा दिखाने की कोशिश की गई जैसे वाकई में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में सवाल पूछा गया और शिवराज सिंह चौहान को घोषणा मुख्यमंत्री बताया गया। कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे मध्य प्रदेश में खूब सर्कुलेट किया। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कौन बनेगा करोड़पति</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">को टेलीकास्ट करने वाली कंपनी सोनी टीवी को सफाई देनी पड़ी जिसमें कहा गया कि ये नकली वीडियो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">होस्ट और कंटेस्टेंट्स की आवाज़ से छेड़छाड़ की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर क्राइम सेल में शिकायत की गई है। सोनी टीवी ने लोगों से अपील की कि इस तरह के वीडियो शेयर न करें। इसी तरह मशहूर एक्टर कार्तिक आर्यन को भी इस तरह के गुमराह करने वाले एक नकली कैम्पेन में लपेट लिया गया। कांग्रेस के ब्लू टिक वाले किसी समर्थक ने कार्तिक आर्यन का एक वीडियो शेयर कर दिया और उसके साथ कैप्शन लिखा कि अब तो कार्तिक आर्यन भी कांग्रेस का समर्थन करने लगे हैं। चूंकि कार्तिक आर्यन मध्यप्रदेश के ही रहने वाले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए जानबूझकर उनका वीडियो इस फर्जी</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">कैम्पेन के लिए इस्तेमाल किया गया। इस वीडियो की खास बात ये थी कि इसमें कांग्रेस का चुनाव निशान पंजा भी लगाया गया था। कार्तिक आर्यन ने अगले ही दिन स्पष्टीकरण जारी कर दिया और कहा कि जिस वीडियो से छेड़छाड़ कर सियासत की जा रही है वो तो एक </span>OTT <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लेटफॉर्म का एड है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे डॉक्टर्ड करके कांग्रेस का विज्ञापन बना दिया गया <a></a>।</span> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">दुष्प्रचार और अफवाहें किस कदर खतरनाक हो सकती हैं इससे हम सब वाकिफ हैं।ये झुंझलाहट पैदा करती है तो इनसे दुनिया में जंग तक की नौबत आ सकती है।कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जब इनकी वजह से समाज में फूट पड़ी और बड़े पैमाने पर कलह- झगड़ा हुआ है।ये झूठी होने के बाद भी इस कदर मजबूत होती हैं कि चुनावों के नतीजों तक असर डालने का दम रखती हैं ।</span> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया के दौर में ये खतरा बेहद बढ़ा हुआ है।जब भू-राजनीतिक आकांक्षाओं वाले साइबर हैकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी विचारधारा को पागलपन की हद तक मानने वाले लोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसक चरमपंथियों और पैसे लेकर खतरों पर खेलने वाले लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने गलत मकसद के लिए करते हैं।इस तरह से भ्रामक और झूठे तरीकों से गलत सूचनाओं को फैलाने वाले लोगों के हाथ डीपफेक के तौर पर अब एक नया हथियार लगा है  ।</span> </p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आखिर ये डीपफेक है क्या है </span></strong><strong>?<span lang="hi" xml:lang="hi">यह जानना भी जरूरी है । दरअस</span></strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ल </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक का मतलब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- एआई के जरिए डिजिटल मीडिया में हेरफेर करना है।एआई के इस्तेमाल से शरारती तत्व वीडियो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑडियो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और फोटोज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर हेरफेर यानी मनिप्युलेशन और एडिटिंग को अंजाम देते हैं।एक तरह से देखा जाए तो ये बेहद वास्तविक लगना वाला डिजिटल फर्जीवाड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे डीपफेक नाम दिया गया है ।</span> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से पैदा किया गया सिंथेटिक मीडिया या डीपफेक कुछ क्षेत्रों में बेहद फायदेमंद साबित होता है।उदाहरण के लिए शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिल्म निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपराधिक फोरेंसिक और कलात्मक अभिव्यक्ति में ये बहुत काम की चीज है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मतलब एक मशीन में इंसान की तरह सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना है ।</span> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">यही वजह है कि इसे कंप्यूटर साइंस में सबसे बेहतरीन और टॉप माना जाता है।इसमें कंप्यूटर को इस तरह से तैयार किया जाता है कि वो बिल्कुल इंसान की तरह से सोच कर काम कर सकें।इस सबके साथ इसका बहुत बड़ा नुकसान भी है।जैसे-जैसे सिंथेटिक मीडिया में टेक्नोलॉजी का दखल बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे-वैसे इसके जरिए शोषण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।रोबोट्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंप्यूटर्स से लेकर मोबाइल एप्लीकेशन में एल्गोरिदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस्तेमाल में लाई जाती है। इतना ही नहीं यह बड़े पैमाने और रफ्तार से हो सकता है।इसमें माइक्रो टारगेटिंग के जरिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन डेटा इकट्ठा किया जा सकता है।इसके जरिए आसानी से डिजिटल मीडिया में कोई भी बदलाव लाया जा सकता है ।</span> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">इतना सब घट जाने के बाद केंद्र सरकार भी अब कड़ाई से हरकत में आई है । केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को चेतावनी दी कि सूचना और प्रौद्योगिकी अधिनियम  में ‘सुरक्षित बंदरगाह’ खंड  के तहत उन्हें जो छूट प्राप्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह लागू नहीं होगी यदि वे डीपफेक  को हटाने के लिए कदम नहीं उठाते हैं।धारा के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उपयोगकर्ताओं द्वारा उस पर पोस्ट की गई सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में सभी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया है और उनसे डीपफेक की पहचान करने और सामग्री को हटाने के लिए कदम उठाने को कहा है।उन्होंने कहा कि प्लेटफार्मों ने प्रतिक्रिया दी और वे कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">हमने सभी प्लेटफाॉर्मों से इस दिशा में और अधिक आक्रामक होने के लिए कहा है.” वैष्णव ने कहा कि सरकार ने हाल ही में डीपफेक मुद्दे पर कंपनियों को नोटिस जारी किया था और प्लेटफार्मों ने जवाब भी दिया।उन्होंने कहा कि लेकिन कंपनियों को ऐसी सामग्री पर कार्रवाई करने में अधिक आक्रामक होना होगा।वैष्णव ने कहा है कि  वे कदम उठा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हमें लगता है कि कई और कदम उठाने होंगे ।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक भाटिया</span>,</strong></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार </span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">लेखक</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">एवं टिप्पणीकार</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Nov 2023 20:31:56 +0530</pubDate>
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