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                <title>HIgh Court - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>HIgh Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> हाईकोर्ट ने UP Police को NBW के बार-बार निष्पादन में विफलता पर फटकार लगाई, कहा- हमसे खेल मत खेलिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर और हापुड़ ज़िलों में कार्यरत उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कोर्ट द्वारा जारी किए गए गैर-जमानती वारंट (NBW) के बार-बार निष्पादन न किए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई। जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ 2019 की आपराधिक अपील से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक हत्या के दोषी के विरुद्ध जारी NBW लंबे समय से निष्पादित नहीं किया गया। कोर्ट ने पुलिस के अधीनस्थ अधिकारियों और आरोपी के बीच मिलीभगत की आशंका भी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">  <br />  खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “पुलिस बल को बता दीजिए कि</p>
<p style="text-align:justify;"> <br />इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169592/high-court-reprimands-up-police-for-repeated-failure-in-execution"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/allahabad-high-court1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर और हापुड़ ज़िलों में कार्यरत उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कोर्ट द्वारा जारी किए गए गैर-जमानती वारंट (NBW) के बार-बार निष्पादन न किए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई। जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ 2019 की आपराधिक अपील से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक हत्या के दोषी के विरुद्ध जारी NBW लंबे समय से निष्पादित नहीं किया गया। कोर्ट ने पुलिस के अधीनस्थ अधिकारियों और आरोपी के बीच मिलीभगत की आशंका भी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;"> <br /> खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “पुलिस बल को बता दीजिए कि यह कानून का न्यायालय है। हमें कानून और अदालत की कार्यप्रणाली की पूरी समझ है। हो सकता है कि हमें पुलिस की कार्यशैली का पूरा ज्ञान न हो लेकिन हम इतना समझदार ज़रूर हैं कि यह पहचान सकें कि कब पुलिस अदालत को हल्के में ले रही है हमसे खेल मत खेलिए और जनता का भरोसा मत तोड़िए।” इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट और आरोपी के हलफनामे के बीच गंभीर विरोधाभास नोट किया था। जहां पुलिस रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपी का पता सत्यापित नहीं हो सका, वहीं आरोपी ने अपने हलफनामे में दावा किया था कि पुलिस उसके घर आई थी और उसे वारंट की जानकारी दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;"> <br />इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने 4 फरवरी को गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त और हापुड़ के सीनियर पुलिस अधीक्षक (SSP) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया और NBW निष्पादित न करने वाले अधिकारियों से व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित पुलिसकर्मियों का आचरण न केवल सेवा में कदाचार दर्शाता है बल्कि अवमानना की कार्रवाई को भी आमंत्रित कर सकता है। ताज़ा सुनवाई में SSP हापुड़ और DCP गौतम बुद्ध नगर व्यक्तिगत रूप से पेश हुए जबकि गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। पीठ ने आयुक्त की ओर से प्रतिनिधि भेजे जाने पर आपत्ति जताई और स्पष्ट किया कि कोर्ट किसी प्रतिनिधि को नहीं सुनेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> <br />मामले के गुण-दोष पर पीठ ने NBW के चार महीने तक निष्पादित न होने पर कड़ा एतराज़ जताया और कहा, “यह पुलिस का काम है कि वह आरोपी को तलाश करे। यह वारंट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा नहीं बल्कि इस न्यायालय द्वारा जारी किया गया। यह एक स्थायी वारंट है, जिसे लौटाया नहीं जा सकता था। इसे हर हाल में निष्पादित किया जाना चाहिए अदालत द्वारा वारंट जारी किया जाना अब पुलिस के लिए कमाई का ज़रिया बन गया।” अपर एडवोकेट जनरल अनूप त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया कि संबंधित कांस्टेबल, उप-निरीक्षक सहित अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया और पुलिस आयुक्त द्वारा विभागीय जांच शुरू कर दी गई। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आगे से अदालत द्वारा जारी कोई भी NBW समय पर निष्पादित न होने की स्थिति नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"> <br />हालांकि, पीठ इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुई और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, “हम किस तरह की पुलिस व्यवस्था में जी रहे हैं? पद हमेशा के लिए नहीं रहता। अदालत या पुलिस से वारंट मिलने के बाद लोग डर के साए में जीते हैं। जनता का भरोसा कैसे बहाल किया जाए? हमें मालूम है कि विभागीय जांच किस तरह और किन आधारों पर पूरी की जाती है, वर्दीधारी सेवा अब केवल जनता को परेशान करने का माध्यम बनकर रह गई।” जस्टिस सत्यवीर सिंह ने यह भी पूछा कि इस मामले में न्यायिक जांच क्यों नहीं कराई गई और पुलिस आयुक्त द्वारा जारी परिपत्र में मौजूद खामियों की ओर भी इशारा किया। कोर्ट ने राज्य से यह स्पष्ट आश्वासन मांगा कि उसके द्वारा जारी कोई भी वारंट बिना निष्पादन के नहीं रहेगा। यदि ऐसा होता है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाएगी। इस पर अपर एडवोकेट जनरल ने सहमति जताई। मामले में विस्तृत आदेश पारित किया गया और अगली सुनवाई के लिए इसे 23 मार्च को सूचीबद्ध किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 21:38:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sapna Choudhary: हरियाणवी डांसर सपना चौधरी को बड़ी राहत,  हाईकोर्ट ने सुनाया ये फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Sapna Choudhary: हरियाणवी डांसर और कलाकार सपना चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण (Renewal) के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले लखनऊ की ट्रायल कोर्ट ने सपना को एनओसी देने से इनकार कर दिया था।</p>
<h4><strong>ट्रायल कोर्ट ने क्यों किया था इनकार</strong></h4>
<p>ट्रायल कोर्ट का कहना था कि सपना चौधरी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे कब, कहां और किस उद्देश्य से विदेश यात्रा करना चाहती हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब यात्रा से जुड़ा कोई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165908/sapna-choudhary-big-relief-to-haryanvi-dancer-sapna-choudhary-high"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/sapna-choudhary-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>Sapna Choudhary: हरियाणवी डांसर और कलाकार सपना चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण (Renewal) के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले लखनऊ की ट्रायल कोर्ट ने सपना को एनओसी देने से इनकार कर दिया था।</p>
<h4><strong>ट्रायल कोर्ट ने क्यों किया था इनकार</strong></h4>
<p>ट्रायल कोर्ट का कहना था कि सपना चौधरी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे कब, कहां और किस उद्देश्य से विदेश यात्रा करना चाहती हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब यात्रा से जुड़ा कोई ठोस विवरण नहीं दिया गया है, तो एनओसी जारी नहीं की जा सकती, हालांकि सपना के विदेश जाने पर कोई कानूनी रोक नहीं है।</p>
<h4><strong>हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी</strong></h4>
<p>सपना चौधरी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच ने की। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए साफ कहा कि “पासपोर्ट जारी करना और बिना अनुमति देश छोड़ना, ये दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं। केवल आगामी यात्रा से जुड़े दस्तावेज न देने के आधार पर पासपोर्ट के लिए एनओसी रोकी नहीं जा सकती। पासपोर्ट जारी न करना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।”</p>
<h4><strong>2018 के धोखाधड़ी मामले से जुड़ा है विवाद</strong></h4>
<p>गौरतलब है कि सपना चौधरी के खिलाफ वर्ष 2018 में लखनऊ में एक शो रद्द होने के बाद धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। यह मामला फिलहाल लखनऊ की ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है। इसी केस के चलते पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए उन्हें अदालत से एनओसी लेनी थी।</p>
<h4><strong>“मैं दो बच्चों की मां हूं, देश छोड़कर भागने का सवाल नहीं”</strong></h4>
<p>सुनवाई के दौरान सपना चौधरी की ओर से दलील दी गई कि वे दो बच्चों की मां हैं, भारत में उनकी संपत्ति है और उनका पूरा परिवार व करियर यहीं है। ऐसे में उनके देश छोड़कर भागने की कोई संभावना नहीं है। पहले इस मामले में 7 जनवरी को सुनवाई हुई थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने अब एनओसी जारी करने का आदेश दे दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 18:46:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाई कोर्ट के 125वें स्थापना दिवस पर जर्नलिस्ट प्रोटक्शन एसोसिएशन को किया गया आमंत्रित।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="tVu25">
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<div><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में अवध बार एसोसिएशन हाई कोर्ट लखनऊ के महासचिव ललित किशोर त्रिपाठी ने हाई कोर्ट के 125वें स्थापना दिवस एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी मैं जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एसोसिएशन को आमंत्रित किया है। कार्यक्रम 2 नवंबर दिन रविवार को हाई कोर्ट के ऑडिटोरियम लखनऊ में होगा।</div>
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<div>कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली के नयमूर्ति सूर्यकांत एवं विशिष्ट अतिथि उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और उच्च न्यायालय नई दिल्ली के मुख्य न्यायमूर्ति डी0के0 उपाध्याय होंगे। जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एसोसिएशन के प्रबंधक/अध्यक्ष विवेक प्रताप सिंह और मीडिया प्रभारी सत्येंद्र शर्मा ने बताया कि एसोसिएशन अपने सभी सदस्यों के</div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158003/68f8a541856c8"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/hindi-divas14.jpg" alt=""></a><br /><div class="tVu25">
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<div><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में अवध बार एसोसिएशन हाई कोर्ट लखनऊ के महासचिव ललित किशोर त्रिपाठी ने हाई कोर्ट के 125वें स्थापना दिवस एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी मैं जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एसोसिएशन को आमंत्रित किया है। कार्यक्रम 2 नवंबर दिन रविवार को हाई कोर्ट के ऑडिटोरियम लखनऊ में होगा।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली के नयमूर्ति सूर्यकांत एवं विशिष्ट अतिथि उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और उच्च न्यायालय नई दिल्ली के मुख्य न्यायमूर्ति डी0के0 उपाध्याय होंगे। जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एसोसिएशन के प्रबंधक/अध्यक्ष विवेक प्रताप सिंह और मीडिया प्रभारी सत्येंद्र शर्मा ने बताया कि एसोसिएशन अपने सभी सदस्यों के साथ इस ऐतिहासिक अवसर पर शामिल होकर अवध बार एसोसिएशन के सभी पदाधिकारीयों व अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त करेगा।</div>
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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 18:02:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत यादव के 30 वर्ष : न्याय, संघर्ष और सेवा का अद्भुत संगम</title>
                                    <description><![CDATA[<h1>  </h1>
<blockquote class="format1"><strong>राजधानी लखनऊ से विशेष संवाददाता</strong></blockquote>
<h3>  </h3>
<h5><em>"न्याय केवल अदालत की दीवारों तक सीमित नहीं होता,<br />यह समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।"</em><br />— वरिष्ठ अधिवक्ता <strong>अजीत यादव</strong></h5>
<hr />
<h3><strong>न्याय के लिए समर्पित तीन दशक</strong></h3>
<p>उत्तर प्रदेश की राजधानी <strong>लखनऊ</strong> के जिला एवं सत्र न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के गलियारों में न्याय के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता <strong>अजीत यादव</strong> ने अपने पेशेवर जीवन के <strong>30 वर्ष पूर्ण</strong> कर लिए हैं। इस अवसर पर उनके चेंबर में अधिवक्ताओं, शुभचिंतकों और समाजसेवियों का जमावड़ा लगा रहा।</p>
<p>अधिवक्ता जगत के कई वरिष्ठ साथियों ने उन्हें बधाई दी और उनके कार्यों को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155142/senior-advocate-ajit-yadavs-30-years-complete-unique-journey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/whatsapp-image-2025-09-15-at-17.13.05_ba3c3b9d.jpg" alt=""></a><br /><h1> </h1>
<blockquote class="format1"><strong>राजधानी लखनऊ से विशेष संवाददाता</strong></blockquote>
<h3> </h3>
<h5><em>"न्याय केवल अदालत की दीवारों तक सीमित नहीं होता,<br />यह समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।"</em><br />— वरिष्ठ अधिवक्ता <strong>अजीत यादव</strong></h5>
<hr />
<h3><strong>न्याय के लिए समर्पित तीन दशक</strong></h3>
<p>उत्तर प्रदेश की राजधानी <strong>लखनऊ</strong> के जिला एवं सत्र न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के गलियारों में न्याय के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता <strong>अजीत यादव</strong> ने अपने पेशेवर जीवन के <strong>30 वर्ष पूर्ण</strong> कर लिए हैं। इस अवसर पर उनके चेंबर में अधिवक्ताओं, शुभचिंतकों और समाजसेवियों का जमावड़ा लगा रहा।</p>
<p>अधिवक्ता जगत के कई वरिष्ठ साथियों ने उन्हें बधाई दी और उनके कार्यों को न्यायिक सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण बताया। अधिवक्ता <strong>आई.पी. सिंह</strong> ने उन्हें विशेष रूप से शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि, <em>“न्याय की साधना करना कोई आसान कार्य नहीं है, लेकिन जिस तरह से अजीत यादव ने तीन दशकों तक इसे तपस्या के रूप में निभाया है, वह सराहनीय है।”</em></p>
<hr />
<h3><strong>उतार-चढ़ाव से भरी लंबी यात्रा</strong></h3>
<p>अजीत यादव ने अपने करियर के शुरुआती दौर में अनेक कठिनाइयों का सामना किया। सीमित संसाधनों और तमाम बाधाओं के बावजूद उन्होंने वकालत के पेशे को केवल पेशा नहीं, बल्कि <strong>जनसेवा का माध्यम</strong> माना।</p>
<p>पिछले तीन दशकों में उन्होंने हजारों मुकदमों की पैरवी करते हुए समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक को न्याय दिलाने की कोशिश की। अधिवक्ताओं के अनुसार, उनका यह सफर केवल पेशेवर उपलब्धि नहीं बल्कि एक <strong>समर्पण की गाथा</strong> है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-09/whatsapp-image-2025-09-15-at-17.13.05_ba3c3b9d.jpg" alt="वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत यादव के 30 वर्ष : न्याय, संघर्ष और सेवा का अद्भुत संगम" width="1280" height="582"></img></p>
<hr />
<h3><strong>अम्बेडकरनगर से राजधानी तक का सफर</strong></h3>
<p>मूल रूप से <strong>अम्बेडकरनगर</strong> निवासी अजीत यादव ने लखनऊ को अपने संघर्ष और कार्यक्षेत्र का केंद्र बनाया। यहाँ आकर उन्होंने न केवल न्यायिक क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई, बल्कि <strong>राजनीति और समाज</strong> की गहरी समझ भी विकसित की।</p>
<p>उनके करीबी मानते हैं कि यादव राजनीति और सत्ता के समीकरणों को गहराई से समझते हैं और यही कारण है कि वे समाजिक मुद्दों पर सटीक दृष्टिकोण रखते हैं।</p>
<hr />
<h3><strong>कानून की जानकारी को जन-जन तक पहुँचाया</strong></h3>
<p>एक अधिवक्ता होने के बावजूद उन्होंने हमेशा आम जनता को उनके <strong>कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक</strong> करने का कार्य भी किया। समय-समय पर विभिन्न सेमिनारों और सभाओं में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि <em>“न्याय केवल अदालतों में सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हर व्यक्ति को अपने अधिकार और कर्तव्य की जानकारी होनी चाहिए।”</em></p>
<hr />
<h3><strong>संघर्ष, मेहनत और जुझारूपन की पहचान</strong></h3>
<p>अधिवक्ता जगत में अजीत यादव को एक <strong>संघर्षशील और जुझारू अधिवक्ता</strong> के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कभी भी चुनौतियों से पीछे हटना नहीं सीखा। उनका मानना है कि बाधाएँ कार्य का हिस्सा हैं और उन्हें पार करना ही सफलता का मार्ग है।</p>
<p>उनकी यह सोच ही उन्हें उनके साथियों से अलग बनाती है। कई अधिवक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि यादव का यह <strong>30 वर्षों का संघर्ष</strong> आने वाली पीढ़ी के अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणा है।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/W1JvgnUexAY" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
<hr />
<h3><strong>लोगों की राय</strong></h3>
<p>इस अवसर पर मौजूद अधिवक्ताओं और बुद्धिजीवियों ने एक स्वर में कहा कि,</p>
<ul>
<li>
<p><em>“तीन दशकों में हजारों लोगों को न्याय दिलाना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।”</em></p>
</li>
<li>
<p><em>“अजीत यादव न केवल एक अधिवक्ता हैं, बल्कि न्याय के प्रहरी और समाज के सजग प्रहरी भी हैं।”</em></p>
</li>
<li>
<p><em>“उनकी ईमानदारी और सादगी ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई है।”</em></p>
</li>
</ul>
<hr />
<ul>
<li>
<p>30 वर्षों से वकालत के क्षेत्र में सक्रिय।</p>
</li>
<li>
<p>हजारों मुकदमों की पैरवी कर दिलाया न्याय।</p>
</li>
<li>
<p>आम जनता को कानून की जानकारी देने का मिशन।</p>
</li>
<li>
<p>राजनीति और समाज पर गहरी पकड़।</p>
</li>
<li>
<p>संघर्ष और मेहनत को सफलता का मूलमंत्र माना।</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 21:06:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीबीआई ने रंगे हाथ रिश्वत लेते आईआरएस अधिकारी को किया गिरफ्तार,।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने शुक्रवार शाम को आईआरएस अधिकारी डॉ. अमित कुमार सिंघल को रंगे हाथ रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी इसलिए हुई क्योंकि फूड फ्रैंचाइजी चेन ला पिनोस के मालिक सनम कूपर ने आईआरएस अधिकारी के खिलाफ रिश्वत के मामले में शिकायत की थी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आईआरएस अधिकारी को उनके दिल्ली स्थित आवास से आयकर नोटिस का मामला खत्म करने के लिए बिचौलिए के जरिए 45 लाख रुपये की रिश्वत मांगने को लेकर सीबीआई की टीम ने गिरफ्तार किया। ला पिनोस के मालिक ने दावा किया कि कारोबारी विवाद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152327/the-cbi-arrested-the-irs-officer-taking-a-red-handed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/cbi-and-high-court.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने शुक्रवार शाम को आईआरएस अधिकारी डॉ. अमित कुमार सिंघल को रंगे हाथ रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी इसलिए हुई क्योंकि फूड फ्रैंचाइजी चेन ला पिनोस के मालिक सनम कूपर ने आईआरएस अधिकारी के खिलाफ रिश्वत के मामले में शिकायत की थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आईआरएस अधिकारी को उनके दिल्ली स्थित आवास से आयकर नोटिस का मामला खत्म करने के लिए बिचौलिए के जरिए 45 लाख रुपये की रिश्वत मांगने को लेकर सीबीआई की टीम ने गिरफ्तार किया। ला पिनोस के मालिक ने दावा किया कि कारोबारी विवाद के बाद उन्हें आधिकारिक नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2017 में सनम कपूर ने मुंबई के व्यवसायी हर्ष कोटक के साथ एक फ़्रैंचाइज़ी समझौता किया था, जो कथित तौर पर इस उद्यम में सिंघल की माँ के साथ साझेदारी कर रहे थे। कपूर के वकील गगनदीप सिंह जम्मू के अनुसार, उत्पीड़न तब शुरू हुआ जब कपूर को पिछले साल पता चला कि कोटक ने अन्य स्रोतों से सस्ते दामों पर कच्चा माल खरीदना शुरू कर दिया है, जो उनके समझौते का उल्लंघन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सनम कपूर के पास फ्रैंचाइज़ी अनुबंध को समाप्त करने का विकल्प था लेकिन कथित तौर पर उन्हें 1.6 करोड़ रुपये में इसे वापस खरीदने के लिए मजबूर किया गया, जो कि 25 लाख रुपये के मूल मूल्य से छह गुना अधिक है। सन कपूर को जल्द ही आयकर और खाद्य सुरक्षा विभागों से कई नोटिस मिलने लगे। जम्मू ने आरोप लगाया कि सिंघल ने आयकर नोटिस को “बंद” करने के लिए 45 लाख रुपये की मांग की। इसके बाद उन्होंने सीबीआई से संपर्क किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">30 मई को कोटक ने चंडीगढ़ में कपूर से मुलाकात की और अगले दिन सिंघल के मोहाली स्थित आवास पर बुलाया। सीबीआई ने जाल बिछाया और 31 मई को कोटक को गिरफ्तार कर लिया, जब उसने कपूर से 25 लाख रुपये लिए।बाद में उसी शाम सीबीआई की एक टीम ने सिंघल को उसके दिल्ली स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया और तलाशी के दौरान 2.5 किलो सोने के आभूषण और 30 लाख रुपये नकद जब्त किए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 14:17:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झुग्गी-झोपड़ियों को ध्वस्‍त करने वाले  डिप्टी कलेक्टर को पदावनत करने का सुप्रीम आदेश </title>
                                    <description><![CDATA[<div>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (9 मई) को आंध्र प्रदेश के एक डिप्टी कलेक्टर को पदावनत करने का निर्देश दिया। डिप्टी कलेक्टर पर आरोप था कि उन्होंने तहसीलदार के रूप में हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की और गुंटूर जिले में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों की झोपड़ियों को जबरन हटा दिया, जिससे वे विस्थापित हो गए। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने आदेश दिया कि आंध्र प्रदेश राज्य याचिकाकर्ता-डिप्टी कलेक्टर को तहसीलदार के पद पर पदावनत करे। साथ ही निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ता 4 सप्ताह के भीतर एक लाख रुपये का जुर्माना जमा कराए।</div>
<div>  </div>
<div>न्यायालय याचिकाकर्ता/डिप्टी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151777/supreme-order-to-demolish-the-deputy-collector-that-destroyed-slums"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/download-(8).jpg" alt=""></a><br /><div>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (9 मई) को आंध्र प्रदेश के एक डिप्टी कलेक्टर को पदावनत करने का निर्देश दिया। डिप्टी कलेक्टर पर आरोप था कि उन्होंने तहसीलदार के रूप में हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की और गुंटूर जिले में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों की झोपड़ियों को जबरन हटा दिया, जिससे वे विस्थापित हो गए। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने आदेश दिया कि आंध्र प्रदेश राज्य याचिकाकर्ता-डिप्टी कलेक्टर को तहसीलदार के पद पर पदावनत करे। साथ ही निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ता 4 सप्ताह के भीतर एक लाख रुपये का जुर्माना जमा कराए।</div>
<div> </div>
<div>न्यायालय याचिकाकर्ता/डिप्टी कलेक्टर की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें उन्हें न्यायालय की अवमानना का दोषी पाया गया था और 2 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी।</div>
<div>यह मानते हुए कि "कानून की महिमा दंड देने में नहीं, बल्कि क्षमा करने में है", आदेश में कहा गया,"हालांकि याचिकाकर्ता किसी भी नरम रुख का हकदार नहीं है, लेकिन हम पाते हैं कि याचिकाकर्ता के अड़ियल और कठोर रवैये के कारण उसके बच्चों और परिवार को कष्ट नहीं दिया जाना चाहिए। अगर उसे दो महीने की सजा होती है, तो उसे अपनी सेवाओं से बर्खास्त कर दिया जाएगा, जिससे उसके परिवार की आजीविका छिन जाएगी।</div>
<div> </div>
<div>इसलिए, हम याचिकाकर्ता की दोषसिद्धि की पुष्टि करने के लिए इच्छुक हैं, लेकिन सजा पर नरम रुख अपनाते हैं। एक संदेश दिया जाना चाहिए... याचिकाकर्ता को उसकी सेवा के पदानुक्रम में एक स्तर कम करने का निर्देश दिया जाता है। आंध्र प्रदेश राज्य को याचिकाकर्ता को तहसीलदार के पद पर पदावनत करने का निर्देश दिया जाता है। आगे पदोन्नति के अवसरों पर विचार किया जाएगा... उसे एक लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा।"</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि जब कोई संवैधानिक कोर्ट या कोई अन्य कोर्ट कोई निर्देश जारी करता है, तो हर अधिकारी, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका पालन करना चाहिए। कोर्ट के आदेश की अवहेलना कानून के शासन की नींव पर हमला है, जिस पर लोकतंत्र आधारित है। </div>
<div> </div>
<div>याचिकाकर्ता की ओर से नरमी बरतने की मांग के संबंध में न्यायालय ने कहा,"वरिष्ठ अधिवक्ता देवाशीष भारुका ने कहा कि याचिकाकर्ता और उनका पूरा परिवार सड़कों पर आ जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि याचिकाकर्ता के 2 बच्चे जो 11वीं और 12वीं कक्षा में शिक्षा ले रहे हैं, वे अपनी शिक्षा जारी रखने की स्थिति में नहीं होंगे और उनका करियर बर्बाद हो जाएगा। हमारा मानना है कि याचिकाकर्ता को इन सब बातों के बारे में तब सोचना चाहिए था जब उसने झुग्गीवासियों के ढांचों को गिरा दिया और उन्हें उनके सामान के साथ सड़क पर फेंक दिया। यदि याचिकाकर्ता मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा करता है, तो उसे अमानवीय तरीके से काम नहीं करना चाहिए था।।</div>
<div> </div>
<div>इससे पहले एक अवसर पर न्यायालय ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि क्या वह जेल जाने से बचने के लिए पदावनत होने को तैयार है। हालांकि, उन्होंने पदावनति स्वीकार करने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट के आदेश का अवमाननापूर्ण उल्लंघन करने के बावजूद बेदाग छूट जाने की उम्मीद करने के लिए न्यायालय की नाराजगी मोल ली। वरिष्ठ अधिवक्ता देवाशीष भारुका द्वारा याचिकाकर्ता को समझाने के लिए समय मांगे जाने पर मामले की सुनवाई आज तक के लिए स्थगित कर दी गई थी। </div>
<div> </div>
<div>गुंटूर जिले में कुछ भूमि पर अपना कब्जा होने का दावा करने वाले चार व्यक्तियों ने भूमि के लिए आवास स्थल पट्टे दिए जाने के लिए राजस्व अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन दायर किया, जिसके बारे में कहा गया था कि वह उनके कब्जे में है। इसके बाद, उन्होंने आंध्र प्रदेश के तत्कालीन हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें तर्क दिया गया कि राजस्व अधिकारी उनके अभ्यावेदन पर विचार किए बिना उनके कब्जे वाले भूखंडों से उन्हें बेदखल करना चाहते हैं।</div>
<div> </div>
<div>13.सितम्बर .2013 के आदेश द्वारा हाईकोर्ट (एकल पीठ) ने रिट याचिका का निपटारा किया, जिसमें तहसीलदार को याचिकाकर्ताओं की पात्रता के अधीन आवास स्थल अनुदान के लिए उनके आवेदन पर विचार करने और दो महीने की अवधि के भीतर लिए गए निर्णय से अवगत कराने का निर्देश दिया गया। यह भी निर्देश दिया गया कि यदि याचिकाकर्ताओं के पास भूमि का कब्जा है, तो तहसीलदार सहित कोई भी प्रतिवादी उनके कब्जे में बाधा नहीं डालेगा। लोगों के एक अन्य समूह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें तर्क दिया गया कि वे 2 साल से गुंटूर जिले में भूमि पर कब्जा किए हुए हैं और आवास स्थल अनुदान के लिए उनके अभ्यावेदन पर विचार किए बिना उन्हें हटाने की मांग की जा रही है।</div>
<div> </div>
<div>उनके मामले में 11दिसंबर 2013 के आदेश द्वारा, हाईकोर्ट (एकल पीठ) ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि तहसीलदार जबरन ढांचों को हटाने में लिप्त होकर कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते। याचिकाकर्ता-संघ द्वारा प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों को तब तक कोई भी ढांंचा खड़ा करने से रोक दिया गया जब तक कि उनके आवास स्थल के पट्टे दिए जाने के अभ्यावेदन पर विचार नहीं किया जाता और तहसीलदार ने भविष्य में अपने कृत्यों को न दोहराने की चेतावनी दी।</div>
<div> </div>
<div>इसके बाद, दोनों मामलों में याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद, तहसीलदार ने 06.12.2013 और 08.01.2014 को जबरन उनकी झोपड़ियाँ हटा दीं।यह देखते हुए कि 08.01.2014 को तहसीलदार के अनुरोध पर 88 पुलिसकर्मियों को मौके पर लाया गया था, हाईकोर्ट (एकल पीठ) ने माना कि तहसीलदार ने जानबूझकर न्यायालय के आदेशों की घोर अवज्ञा की और उसे 2 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई तथा 2000/- रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ा।</div>
<div> </div>
<div>इससे व्यथित होकर, तहसीलदार ने अवमानना अपील दायर की। उनका तर्क था कि वे केवल उन अतिक्रमणों को हटाना चाहते थे, जिन्हें रातों-रात तीसरे पक्ष द्वारा खड़ा कर दिया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इसे खारिज कर दिया, यह देखते हुए कि उनका रुख विवरणों से रहित था और बहुत विश्वसनीय नहीं था। इस पृष्ठभूमि में, तहसीलदार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।</div>
<div> </div>
<div>5 मई 25 को, जस्टिस गवई ने उन व्यक्तियों के बारे में पूछताछ की, जिनकी झुग्गियां ध्वस्त की गईं। जवाब में, वरिष्ठ अधिवक्ता भारुका ने प्रस्तुत किया कि तथ्य-खोजी जांच के अनुसार, अवमानना याचिकाकर्ताओं को विषय परिसर में रहते हुए नहीं पाया गया और उनमें से एक को वास्तव में एक योजना के तहत पुनर्वासित किया गया था।</div>
<div> </div>
<div>इसके बाद, न्यायालय ने व्यक्त किया कि वह याचिकाकर्ता को उस पद पर पदावनत करेगा जिस पर उसे शुरू में नियुक्त किया गया था, अर्थात उप तहसीलदार, "ताकि उनकी रोज़ी-रोटी प्रभावित न हो"। जस्टिस गवई ने कहा, "उन्हें एक वचन देने के लिए कहें कि वह उप तहसीलदार के रूप में काम करने के लिए तैयार हैं", जबकि इस बात को रेखांकित किया कि यह एक बहुत ही गंभीर मामला था, क्योंकि याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट की चेतावनी के बावजूद विध्वंस की कार्रवाई की गई थी।</div>
<div>जस्टिस गवई ने कहा, "[वह] गरीब लोगों के घरों को ध्वस्त करने के लिए अपने साथ 80 पुलिसकर्मियों का बेड़ा लेकर गए थे।" जब भारुका ने कार्रवाई का बचाव किए बिना यह समझाने की कोशिश की कि संबंधित समय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच तनाव था, और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा था, तो न्यायाधीश ने याचिका को खारिज करने का आदेश दिया। भरुका ने माफी मांगते हुए कहा कि वह इस कार्रवाई को उचित नहीं ठहराएंगे और याचिकाकर्ता से निर्देश लेने के लिए समय मांगा।</div>
<div> </div>
<div>इस तरह, मामला 6 मई को सूचीबद्ध किया गया, जब भरुका ने याचिकाकर्ता की पदावनति झेलने की अनिच्छा से अवगत कराया। जब न्यायालय याचिकाकर्ता की जिद से नाखुश हुआ और संकेत दिया कि यदि वह नहीं झुकता है, तो वह न केवल याचिका को खारिज कर देगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि याचिकाकर्ता को फिर से बहाल न किया जाए, तो याचिकाकर्ता को मनाने के लिए समय के लिए भरुका के अनुरोध पर मामला फिर से स्थगित कर दिया गया।</div>
<div> </div>
<div>सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई ने मंगलवार को एक याचिकाकर्ता से कहा था  कि आज आप अपने छोटे-छोटे बच्चों की दुहाई दे रहे हैं लेकिन जिनका घर आपने उजाड़ा, उनके भी तो बच्चे थे। दरअसल, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ आंध्र प्रदेश के एक डिप्टी कलेक्टर(DC) की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अधिकारी ने हाई कोर्ट द्वारा अवमानना के मामले में दी गई सजा के खिलाफ अपील की थी।</div>
<div> </div>
<div>आरोपी अधिकारी ने तहसीलदार के पद पर रहते हुए हाई कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की थी और गुंटूर जिले में गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों पर बुलडोजर चलवा दिया था। इस हरकत से नाराज आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने उस अधिकारी को अवमानना का दोषी करार देते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई है। अधिकारी ने उस सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था कि उसे यहां से राहत मिलेगी लेकिन हुआ ठीक उलटा।</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारी की हरकत और रवैये पर नाराजगी जताते हुए उसे पदावनत करने की बात कही तो याचिकाकर्ता ने उसका विरोध किया और कहा कि वह न्यायालय की अवमानना के लिए सजा के रूप में पदावनत को स्वीकार नहीं करेंगे। इस पर पीठ ने एक दिन पहले भी याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता देवाशीष भारुका से पूछा था कि वह अपने मुवक्किल से निर्देश प्राप्त करें कि क्या उसे पदावनत की सजा मंजूर है और वचन देने के लिए तैयार हैं? शीर्ष न्यायालय ने डिप्टी कलेक्टर को पदावनत कर फिर से तहसीलदार बनाने की बात कही थी, जबकि याचिकाकर्ता शीर्ष अदालत से बेदाग छूटने की उम्मीद कर रहा था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 May 2025 17:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी में कोर्ट ने पूर्व एमएलए, दो पूर्व ब्लॉक प्रमुख समेत पांच लोगों को भेजा जेल।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">एमपी – एमएलए कोर्ट ने बस्ती के रुधौली से पूर्व विधायक संजय जायसवाल और दो पूर्व ब्लाक प्रमुख समेत पांच लोगों को जेल भेज दिया है। इन्हें निचले कोर्ट से वर्ष 2003 में एमएलसी  चुनाव के दौरान मतगणना कक्ष में घुसकर मारपीट करने व मतपत्र लूटने के मामले में तीन-तीन वर्ष की सजा मिली है। इस सजा के खिलाफ अपील को अपर कोर्ट ने खारिज किया और उनकी जमानत अर्जी को निरस्त कर जेल भेज दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वर्ष 2003 में बस्ती-सिद्धार्थनगर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र का एमएलसी चुनाव था। इस चुनाव की बस्ती सदर तहसील सभागार में गणना</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151589/in-up-the-court-sent-five-people-including-former-mla"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/upp.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एमपी – एमएलए कोर्ट ने बस्ती के रुधौली से पूर्व विधायक संजय जायसवाल और दो पूर्व ब्लाक प्रमुख समेत पांच लोगों को जेल भेज दिया है। इन्हें निचले कोर्ट से वर्ष 2003 में एमएलसी  चुनाव के दौरान मतगणना कक्ष में घुसकर मारपीट करने व मतपत्र लूटने के मामले में तीन-तीन वर्ष की सजा मिली है। इस सजा के खिलाफ अपील को अपर कोर्ट ने खारिज किया और उनकी जमानत अर्जी को निरस्त कर जेल भेज दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्ष 2003 में बस्ती-सिद्धार्थनगर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र का एमएलसी चुनाव था। इस चुनाव की बस्ती सदर तहसील सभागार में गणना तीन दिसंबर 2003 को हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मतगणना में 124 वोटों से भाजपा प्रत्याशी मनीष जायसवाल के जीतने की घोषणा हुई। आरोप था कि इसी दौरान सपा प्रत्याशी कंचना सिंह, उनके पति आदित्य विक्रम सिंह, मो. इरफान, बृजभूषण सिंह, त्रयंबक पाठक, अशोक सिंह, संजय जायसवाल और महेश सिंह अपने दर्जनों समर्थकों के साथ मतगणना स्थल पर आए और ड्यूटी पर तैनात सीओ को धक्का देकर मतगणना कक्ष में घुस गए। और कक्ष में बवाल मचाते हुए कई मतपत्र भी उठा ले गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले में आरओ की ओर से कोतवाली पुलिस ने पांच आईपीसी, 7 सीएलए व लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में आठ नामजद सहित 50 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था। मुकदमे में कुल 10 गवाह बनाए गए। गवाही और चार्जशीट के आधार पर एसीजेएम  द्वितीय की अदालत ने तीन-तीन वर्ष के कारावास व दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोवर कोर्ट की सजा के खिलाफ कंचना सिंह ने 20 मई 2023 को ADJ/MP, MLA कोर्ट में अपील की। 29 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। सभी आठ आरोपियों में से कंचना सिंह और बृजभूषण सिंह की मौत हो चुकी है। एक आरोपी पूर्व विधायक आदित्य विक्रम सिंह बीमार चल रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पांच आरोपी पूर्व विधायक संजय जायसवाल, पूर्व प्रमुख त्रयंबक पाठक, पूर्व प्रमुख महेश सिंह, अशोक कुमार सिंह व मो. इरफान की जमानत याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने जेल भेज दिया। मंगलवार शाम सभी को जिला कारागार में निरुद्ध करा दिया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 May 2025 21:40:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> उच्च न्यायालय के आदेशों को ताक पर रखकर किया जा रहा अवैध अतिक्रमण  </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>लखीमपुर खीरी- </strong>नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष की मेहरबानी से माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 16 जनवरी 2025 का हो रहा अतिक्रमण अतिक्रमण हटाने के बजाय अध्यक्ष मोहम्मदी के द्वारा अतिक्रमण कराया जा रहा है इनकी मनसा है कि अतिक्रमण कितना हो उतना ही उनके लिए अच्छा है और जो अभी नाले का निर्माण कराया गया है उसमें जल भरा वी शुरू हो गया है पानी का निकास किधर भी नहीं है पानी नाली तोड़कर रोड़ों पर आ रहा है ना तो नगर पालिका के ठेकेदार को दिखाई दे रहा है और ना ही अध्यक्ष नगर पालिका परिषद को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149399/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/photo-07-..--.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लखीमपुर खीरी- </strong>नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष की मेहरबानी से माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 16 जनवरी 2025 का हो रहा अतिक्रमण अतिक्रमण हटाने के बजाय अध्यक्ष मोहम्मदी के द्वारा अतिक्रमण कराया जा रहा है इनकी मनसा है कि अतिक्रमण कितना हो उतना ही उनके लिए अच्छा है और जो अभी नाले का निर्माण कराया गया है उसमें जल भरा वी शुरू हो गया है पानी का निकास किधर भी नहीं है पानी नाली तोड़कर रोड़ों पर आ रहा है ना तो नगर पालिका के ठेकेदार को दिखाई दे रहा है और ना ही अध्यक्ष नगर पालिका परिषद को दिखाई दे रहा है। </div>
<div> </div>
<div>माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अब मानना सीधे हो रही है अब माननीय उच्च न्यायालय में कंटेंप्ट आफ कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने जा रही है फिर देखते हैं की अध्यक्ष नगर पालिका परिषद या अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद माननीय न्यायालय के समक्ष अपना कौन सा जवाब दाखिल करेंगे धन्यवाद विनोद तिवारी जिला अध्यक्ष न्यू प्रेस क्लब लखीमपुर खीरी मोहम्मदी से एवं अध्यक्ष उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंस्था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 14:21:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने माधबी बुच पर एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगायी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच समेत 6 अधिकारियों पर FIR दर्ज करने के स्पेशल कोर्ट के आदेश पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज यानी, मंगलवार (4 मार्च) को रोक लगा दी। बुच ने स्पेशल कोर्ट के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर जस्टिस एसजी डिगे ने सुनवाई की।</div>
<div>  </div>
<div>हाईकोर्ट ने कहा- "शिकायतकर्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। सभी पक्षों को सुनने के बाद, ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायाधीश ने डिटेल्स में जाए बिना और आवेदकों को उनकी भूमिका बताए बिना आदेश पारित कर दिया है। इसलिए, आदेश पर रोक लगा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149359/the-high-court-stayed-the-fir-on-madhabi-buch-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(12).jpg" alt=""></a><br /><div>सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच समेत 6 अधिकारियों पर FIR दर्ज करने के स्पेशल कोर्ट के आदेश पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज यानी, मंगलवार (4 मार्च) को रोक लगा दी। बुच ने स्पेशल कोर्ट के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर जस्टिस एसजी डिगे ने सुनवाई की।</div>
<div> </div>
<div>हाईकोर्ट ने कहा- "शिकायतकर्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। सभी पक्षों को सुनने के बाद, ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायाधीश ने डिटेल्स में जाए बिना और आवेदकों को उनकी भूमिका बताए बिना आदेश पारित कर दिया है। इसलिए, आदेश पर रोक लगा दी गई है।"</div>
<div> </div>
<div>मुंबई के एक स्पेशल एंटी-करप्शन कोर्ट ने शनिवार (1 मार्च 2025) को शेयर फ्रॉड से जुड़े मामले में FIR का आदेश दिया था। यह आदेश स्पेशल जज एसई बांगर ने ठाणे बेस्ड जर्नलिस्ट सपन श्रीवास्तव की ओर से दायर याचिका पर दिया था। सपन ने स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी की लिस्टिंग में बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल फ्रॉड और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।</div>
<div> </div>
<div>शिकायतकर्ता श्रीवास्तव ने दावा किया कि उन्होंने और उनके परिवार ने 13 दिसंबर 1994 को कैल्स रिफाइनरीज लिमिटेड के शेयरों में निवेश किया था, जिसमें उन्हें भारी नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सेबी और BSE ने कंपनी के अपराधों की अनदेखी की।</div>
<div> </div>
<div>इसे कानून के खिलाफ लिस्ट किया और निवेशकों के हितों की रक्षा करने में विफल रहे। कैल्स रिफाइनरीज़ को 1994 में लिस्टिंग की अनुमति दी गई थी और अगस्त 2017 में ट्रेडिंग से सस्पेंड कर दिया गया था। ये शेयर आज तक सस्पेंडेड है। शिकायतकर्ता के तीन तर्क...सेबी के अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्य में विफल रहे। बाजार में हेराफेरी करने दी गई, इससे निवेशकों को नुकसान हुआ। नियमों को पूरा नहीं करने वाली कंपनी की लिस्टिंग की अनुमति दी।</div>
<div> </div>
<div><strong>सेबी के तीन तर्क..</strong></div>
<div>. बुच और तीनों होलटाइम मेंबर्स उस समय (1994) अपने संबंधित पदों पर नहीं थे। अदालत ने सेबी को तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने का मौका दिए बिना आदेश पारित किया।आवेदक आदतन वादी है। पिछले आवेदनों को अदालत ने खारिज कर दिया था।</div>
<div> </div>
<div>स्पेशल कोर्ट के जज बांगर ने मुंबई के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB), भारतीय दंड संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत ने ACB को 30 दिनों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को भी कहा था।</div>
<div> </div>
<div>जज ने स्पष्ट किया कि उन्होंने शिकायत में बताए गए "अपराध की गंभीरता" पर विचार किया। इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत जांच का आदेश दिया गया।कोर्ट ने कहा था,"प्रथम दृष्टया नियामक चूक और मिलीभगत के सबूत हैं, जिसके लिए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। कानून प्रवर्तन और SEBI की निष्क्रियता के कारण धारा 156(3) CrPC के तहत न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।"</div>
<div> </div>
<div>बुच ने अपना करियर 1989 में ICICI बैंक से शुरू किया था। 2007 से 2009 तक ICICI बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थीं। वे फरवरी 2009 से मई 2011 तक ICICI सिक्योरिटीज की मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO थीं।2011 में सिंगापुर चली गईं और वहां उन्होंने ग्रेटर पैसिफिक कैपिटल में काम किया। माधबी के पास फाइनेंशियल सेक्टर में 30 साल का लंबा अनुभव है। 2022 में उन्हें सेबी का चेयरपर्सन बनाया गया था।</div>
<div>अमेरिकी कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने दावा किया था कि माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की अडाणी ग्रुप से जुड़ी ऑफशोर कंपनी में हिस्सेदारी है। SEBI चीफ पर कांग्रेस पार्टी ने भी आरोप लगाए थे। कांग्रेस ने SEBI से जुड़े होने के दौरान ICICI बैंक समेत 3 जगहों से सैलरी लेने का आरोप लगाया था।</div>
<div> </div>
<div>माधबी पुरी बुच 28 फरवरी को सेबी चीफ के पद से रिटायर हुई हैं। उनकी जगह केंद्र सरकार ने वित्त सचिव तुहिन कांत पांडे को अगला SEBI प्रमुख नियुक्त किया है। तुहिन अगले 3 साल के लिए इस पद पर रहेंगे।तुहिन कांत पांडे ओडिशा कैडर के 1987 बैच के IAS अधिकारी हैं। वे मोदी 3.0 सरकार में भारत के सबसे व्यस्त सचिवों में से एक हैं। वे फिलहाल केंद्र सरकार में चार महत्वपूर्ण विभागों को संभाल रहे हैं। उन्हें 7 सितंबर 2024 को वित्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 12:13:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रिश्वत लेते समय पकड़े गए न.प.प के लिपीक टी.एन सिंह की जमानत हाई कोर्ट से खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>जौनपुर।</strong> इलाहाबाद उच्य न्यायलय ने नगर पालिका परिषद में रिश्वत लेते समय रंगे हाथ पकड़े गए लिपीक की जमानत अरजी खारिज कर दिया है। मूल शिकायतकर्ता द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार अभियोजन का मामला यह है कि वह आनन्द कंस्ट्रक्शन नामक अपनी कम्पनी के माध्यम से निर्माण कार्य में संलिप्त है। उसने नगर पालिका की विभिन्न परियोजनाओं को पूर्ण कराया है जिसके लिए उसका जून 2022 से जनवरी, 2023 तक का बिल लगभग रू0 50,00,000/- लंबित है।</div>
<div>  </div>
<div>जिसके लिए उसने दिनांक 03.04.2024 को पवन कुमार, अधिशासी अभियंता, नगर पालिका परिषद से सम्पर्क कर भुगतान के सम्बन्ध में जानकारी ली</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148589/lipkik-tn-singhs-bail-rejected-from-high-court-while-taking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(3)2.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>जौनपुर।</strong> इलाहाबाद उच्य न्यायलय ने नगर पालिका परिषद में रिश्वत लेते समय रंगे हाथ पकड़े गए लिपीक की जमानत अरजी खारिज कर दिया है। मूल शिकायतकर्ता द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार अभियोजन का मामला यह है कि वह आनन्द कंस्ट्रक्शन नामक अपनी कम्पनी के माध्यम से निर्माण कार्य में संलिप्त है। उसने नगर पालिका की विभिन्न परियोजनाओं को पूर्ण कराया है जिसके लिए उसका जून 2022 से जनवरी, 2023 तक का बिल लगभग रू0 50,00,000/- लंबित है।</div>
<div> </div>
<div>जिसके लिए उसने दिनांक 03.04.2024 को पवन कुमार, अधिशासी अभियंता, नगर पालिका परिषद से सम्पर्क कर भुगतान के सम्बन्ध में जानकारी ली जिस पर उसे बताया गया कि रू0 10,00,000/- का भुगतान किया जाएगा, जिसके लिए उसे तारकेश्वर नाथ सिंह उर्फ टी.एन. सिंह, लेखाकार (आवेदक) को 16.5% की दर से रू0 1,65,000/- कमीशन देना होगा जिसके पश्चात धनराशि स्वीकृत होकर उसके खाते में आ जाएगी। इसके बाद वह अकाउंटेंट से मिला जिसने भी उसे इस बारे में बताया और कहा कि जब वह पैसे देगा तो उसका बिल प्रोसेस करके ई.ओ. को दे दिया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>जब वह लाचार हो गया तो उसने पैसे का इंतजाम किया और अकाउंटेंट ने कहा कि वह उसे इस बारे में बताए जिस पर वह उसे आकर पैसे देने की तारीख, समय और जगह बताएगा। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह रिश्वत के पैसे नहीं देना चाहता और चाहता है कि आरोपी व्यक्ति रिश्वत के पैसे दे दें।</div>
<div> </div>
<div>रिश्वत के पैसे लेते समय गिरफ्तार किया जाना है। उसकी शिकायत पर प्री-ट्रैप कार्यवाही शुरू की गई। लेखाकार ने उसे 05.04.2024 को मिलने के लिए कहा। 05.04.2024 को वह लेखाकार से मिलने गया और उसके पीछे ट्रैप टीम के सदस्य भी आ गए। संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के तहत दो स्वतंत्र गवाहों को गवाह बनने का निर्देश दिया गया। 05.04.2024 को दिए गए स्थान पर आरोपी तारकेश्वर नाथ सिंह उर्फ टी.एन. सिंह, लेखाकार ने मूल शिकायतकर्ता को पैसे सनि वाल्मीकि को सौंपने के लिए कहा, जो वहां खड़े थे, जिस पर, उन्हें 1,65,000 / - रुपये दिए गए, जिसके बाद, ट्रैप टीम ने जाल बिछाया और उन्हें उक्त पैसे के साथ गिरफ्तार कर लिया। </div>
<div> </div>
<div>और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं और फिर वसूली ज्ञापन और गिरफ्तारी इनमो तैयार किया गया और वर्तमान प्रथम सूचना रिपोर्ट 5.04.2024 को 20:09 बजे पुलिस स्टेशन- लाइन बाजार, जिला- जौनपुर में नीरज कुमार सिंह, ट्रैप टीम प्रभारी द्वारा अभियुक्तों, तारकेश्वर नाथ सिंह (लेखाकार), सनि वाल्मीकि (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) और पवन कुमार (ई.ओ.) के खिलाफ दर्ज कराई गई थी।</div>
<div> </div>
<div>माननीय उच्य न्यायलय ने रंगे हाथ रिश्वत लेते समय पकड़े गए आरोपी तारकेश्वर नाथ सिंह उर्फ टीएन सिंह की जमानत प्रर्थाना पत्र इस बिनाह पर खारिज कर दिया कि वह जमानत पर रिहा होकर साक्ष्य और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। जबकि न्यायलय ने दूसरे आरोपी शनि बाल्मिकी की जमानत पहले ही खारिज कर चुकी है। इसी मामले में आरोपी रहे पवन कुमार अधिसाशी अधिकारी नगर पालिका अग्रिम जमानत पर चल रहें थें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 19:30:22 +0530</pubDate>
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                <title>हाई कोर्ट ने सब रजिस्ट्रार और दो बाबू किये बहाल </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gmail_quote"><strong>मथुरा- </strong> सदर के तहसील के रजिस्ट्री कार्यालय में बैनामा देरी से देने के आरोप में सस्पेंड किए गये सब रजिस्ट्रार और दो बाबुओं को हाई कोर्ट से बड़ी राहत के मिली है। हाई कोर्ट इलाहाबाद ने तीनों के निलंबन आदेश को स्थगित करते हुए पुनः जॉइन करने का आदेश दिया है।</div>
<div class="gmail_quote">  </div>
<div class="gmail_quote">तीन दिसम्बर को मथुरा उप निबंधक कार्यालय में एक बैनामा हुआ था। रमेशचंद्र लोकवानी के गवाह साधुराम तोरानी ने स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल से की शिकायत में कहा था कि 3 दिसंबर की सुबह 11 बजे मथुरा सदर में उप निबंधक कार्यालय में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148038/high-court-reinstated-sub-registrar-and-two-babus%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/download9.jpg" alt=""></a><br /><div class="gmail_quote"><strong>मथुरा- </strong> सदर के तहसील के रजिस्ट्री कार्यालय में बैनामा देरी से देने के आरोप में सस्पेंड किए गये सब रजिस्ट्रार और दो बाबुओं को हाई कोर्ट से बड़ी राहत के मिली है। हाई कोर्ट इलाहाबाद ने तीनों के निलंबन आदेश को स्थगित करते हुए पुनः जॉइन करने का आदेश दिया है।</div>
<div class="gmail_quote"> </div>
<div class="gmail_quote">तीन दिसम्बर को मथुरा उप निबंधक कार्यालय में एक बैनामा हुआ था। रमेशचंद्र लोकवानी के गवाह साधुराम तोरानी ने स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल से की शिकायत में कहा था कि 3 दिसंबर की सुबह 11 बजे मथुरा सदर में उप निबंधक कार्यालय में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण से आवंटित 75 लाख रुपये के फ्लैट की रजिस्ट्री कराई थी।</div>
<div class="gmail_quote"> </div>
<div class="gmail_quote">फ्लैट की रजिस्ट्री के एवज में लगभग 5.70 लाख रुपये का स्टांप व निबंधन शुल्क जमा किया। रजिस्ट्री के बाद भी तीन दिसंबर की शाम तक मूल डीड वापस नहीं दी गई, जबकि रजिस्ट्री •के तत्काल बाद मूल डीड देने का नियम है। शिकायत का संज्ञान लेकर मंत्री रविंद्र जायसवाल ने उप निबंधक कार्यालय</div>
<div class="gmail_quote"> </div>
<div class="gmail_quote">मथुरा सदर में कार्यरत सब रजिस्ट्रार सदर प्रथम अजय कुमार त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से कार्यालय उप निबन्धक, मड़िहान जनपद मिर्जापुर से सम्बद्ध करते हुए कनिष्ठ सहायक (निबंधन) सदर प्रथम प्रदीप उपाध्याय को जनपद महोबा एवं कनिष्ठ सहायक (निबन्धन) सदर प्रथम सतीश कुमार चौधरी को जनपद ललितपुर से सम्बद्ध कर दिया गया।</div>
<div class="gmail_quote"> </div>
<div class="gmail_quote">प्रकरण की जांच के लिए निरंजन कुमार, उप महानिरीक्षक (निबंधन) अयोध्या मंडल तथा अविनाश पाण्डेय नव प्रोन्नत उप महानिरीक्षक (निबंधन) को जांच अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जांच के बाद महानिरीक्षक स्टाम्प व निबंधन डा. रुपेश कुमार ने तीनों को निलंबित कर दिया गया और कैलाश नाथ को मथुरा उप निबंधन कार्यालय सदर प्रथम का उप निबंधक नियुक्ति दे दी गई।</div>
<div class="gmail_quote"> </div>
<div class="gmail_quote">इसके बाद तीनों निलंबित कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय की शरण ली। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के कोर्ट संख्या 6 के न्याय मूर्ति नीरज तिवारी ने मामले में सुनवाई की। सुनवाई के दौरान तीनों ने अपने पक्ष रखें, तीनों पक्षकारों को सुनने के बाद कोर्ट ने ड्यूटी ज्वाइन करने का आदेश कर दिया</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 18:36:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उच्च न्यायालय का आदेश: एसडीएम खजनी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>गोरखपुर -</strong> इलाहाबाद: उच्च न्यायालय ने खजनी के उपजिलाधिकारी को एक बटवारा मामले में समय सीमा के भीतर निस्तारण न करने के आरोप में व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है।</div>
<div>बेलड़ाड् निवासी मुस्ताक अहमद ने खजनी के उपजिलाधिकारी के न्यायालय में मुस्ताक बनाम मैननु निशा वगैरह का एक बटवारा वाद दायर किया था। उच्च न्यायालय ने पहले ही उपजिलाधिकारी को इस मामले का समय सीमा के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया था।</div>
<div>  </div>
<div>लेकिन उपजिलाधिकारी इस आदेश का पालन करने में विफल रहे। इस कारण उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी, 2025 को उपजिलाधिकारी को व्यक्तिगत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147620/high-court-orders-sdm-khajani-to-appear-personally"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/p--1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>गोरखपुर -</strong> इलाहाबाद: उच्च न्यायालय ने खजनी के उपजिलाधिकारी को एक बटवारा मामले में समय सीमा के भीतर निस्तारण न करने के आरोप में व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है।</div>
<div>बेलड़ाड् निवासी मुस्ताक अहमद ने खजनी के उपजिलाधिकारी के न्यायालय में मुस्ताक बनाम मैननु निशा वगैरह का एक बटवारा वाद दायर किया था। उच्च न्यायालय ने पहले ही उपजिलाधिकारी को इस मामले का समय सीमा के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया था।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन उपजिलाधिकारी इस आदेश का पालन करने में विफल रहे। इस कारण उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी, 2025 को उपजिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है। उन्हें इस मामले की फाइल भी साथ लाने को कहा गया है।</div>
<div> </div>
<div>यह आदेश उच्च न्यायालय द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में देरी और आदेशों का पालन न करने को गंभीरता से लेने का एक संकेत है। उच्च न्यायालय ने खजनी के उपजिलाधिकारी कुँवर सचिन सिंह  को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।  कारण बटवारा मामले में समय सीमा के भीतर निस्तारण न करना  है ।</div>
<div>तारीख: 27 जनवरी, 2025 स्थान: इलाहाबाद उच्च न्यायालय उपस्थित होना है , न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक कदम है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2025 17:39:49 +0530</pubDate>
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