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                <title>Chief Justice of India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Chief Justice of India RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और न्याय की संवेदना</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत केवल एक न्यायिक संस्था नहीं है, बल्कि संविधान की आत्मा और लोकतंत्र की अंतिम आशा का केंद्र है। जब देश का कोई नागरिक हर स्तर पर न्याय की तलाश में असफल होकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है, तो उसके मन में यही विश्वास होता है कि यहां उसकी बात निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ सुनी जाएगी। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा पूरे न्यायिक तंत्र की आधारशिला मानी जाती है। अदालत की गरिमा बनाए रखना जितना न्यायाधीशों और न्यायिक कर्मचारियों का दायित्व है, उतना ही वहां उपस्थित प्रत्येक अधिवक्ता, याचिकाकर्ता और नागरिक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183200/supreme-courts-sense-of-dignity-and-justice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(3)2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत केवल एक न्यायिक संस्था नहीं है, बल्कि संविधान की आत्मा और लोकतंत्र की अंतिम आशा का केंद्र है। जब देश का कोई नागरिक हर स्तर पर न्याय की तलाश में असफल होकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है, तो उसके मन में यही विश्वास होता है कि यहां उसकी बात निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ सुनी जाएगी। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा पूरे न्यायिक तंत्र की आधारशिला मानी जाती है। अदालत की गरिमा बनाए रखना जितना न्यायाधीशों और न्यायिक कर्मचारियों का दायित्व है, उतना ही वहां उपस्थित प्रत्येक अधिवक्ता, याचिकाकर्ता और नागरिक का भी कर्तव्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता वकील द्वारा न्यायाधीशों के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग करना, कागजात उछालना और मुख्य न्यायाधीश के लिए अपशब्द कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। किसी भी परिस्थिति में न्यायालय के भीतर इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार्य नहीं कहा जा सकता। अदालत तर्क और कानून की भाषा समझती है, आक्रोश और अपमान की नहीं। यदि न्याय की लड़ाई लड़ने वाला स्वयं कानून और शिष्टाचार की सीमाएं लांघने लगे, तो न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर होने का खतरा पैदा हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वकील केवल अपने मुवक्किल का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि वह न्यायालय का भी अधिकारी माना जाता है। उसकी वाणी, उसका आचरण और उसका व्यवहार न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा होता है। इसलिए अधिवक्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे कठिन से कठिन परिस्थिति में भी संयम बनाए रखें। असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन असहमति और अभद्रता के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है। उस रेखा का सम्मान करना ही लोकतांत्रिक संस्कृति और न्यायिक परंपरा की पहचान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अदालत ने वकील की याचिका खारिज कर दी, लेकिन उसके खिलाफ अवमानना की कठोर कार्रवाई नहीं की। न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि वह व्यक्ति संभवतः अत्यधिक तनाव और मानसिक दबाव में है तथा उसकी हताशा स्पष्ट दिखाई दे रही है। यह दृष्टिकोण न्यायपालिका की मानवीय संवेदना को भी सामने लाता है। कानून केवल दंड देने का माध्यम नहीं है, बल्कि परिस्थितियों को समझने और न्याय के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखने की व्यवस्था भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि न्याय की तलाश में अदालत तक पहुंचने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी पीड़ा, संघर्ष या अन्याय का बोझ लेकर आता है। वर्षों तक मुकदमे लड़ने, आर्थिक बोझ उठाने और बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने के बाद जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता, तब कई लोग मानसिक रूप से टूट जाते हैं। यह टूटन कभी-कभी हताशा और असंतुलित व्यवहार के रूप में सामने आती है। इसका अर्थ यह नहीं कि ऐसे व्यवहार को उचित ठहराया जाए, बल्कि यह समझना आवश्यक है कि उसके पीछे पीड़ा और निराशा का एक लंबा इतिहास भी हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता के साथ-साथ उसकी संवेदनशीलता भी है। यदि कोई व्यक्ति अदालत में अत्यधिक तनावग्रस्त दिखाई देता है, तो उसके साथ कानून के अनुसार व्यवहार करते हुए उसकी मानसिक स्थिति को भी समझना चाहिए। न्याय केवल आदेश सुनाने से पूरा नहीं होता, बल्कि यह विश्वास भी पैदा करता है कि अदालत ने व्यक्ति की बात पूरी गंभीरता से सुनी और समझी। यही विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी सच है कि न्याय में विलंब, लंबी कानूनी प्रक्रिया और बढ़ते मुकदमों का बोझ कई लोगों में निराशा पैदा करता है। ऐसे में न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, सरल और समयबद्ध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास आवश्यक हैं। जब लोगों को समय पर न्याय मिलेगा, तो निराशा और असंतोष की स्थितियां भी कम होंगी। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल विवादों का निपटारा नहीं, बल्कि समाज में विश्वास और संतुलन बनाए रखना भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने एक और संदेश दिया है कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखने में सभी की समान जिम्मेदारी है। यदि अदालत में अनुशासन समाप्त हो जाए, तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और इसका नुकसान अंततः आम नागरिक को ही होगा। इसलिए चाहे वह वरिष्ठ अधिवक्ता हों, नए वकील हों या स्वयं पक्षकार, सभी को यह समझना होगा कि अदालत में शब्दों का चयन, व्यवहार की मर्यादा और कानून के प्रति सम्मान सर्वोपरि है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर न्यायपालिका की उदारता भी सराहनीय है। यदि अदालत चाहती तो अवमानना की कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन उसने संयम दिखाया और कठोर दंड देने के बजाय मामले को वहीं समाप्त करना उचित समझा। यह निर्णय बताता है कि न्याय केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि विवेक, धैर्य और करुणा का संतुलित स्वरूप है। हालांकि इस उदारता का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने का साहस करे। कानून का सम्मान हर परिस्थिति में अनिवार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में न्यायपालिका अंतिम आशा होती है। जब प्रशासन, व्यवस्था और अन्य संस्थाओं से निराश व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है, तो उसके मन में उम्मीद की आखिरी किरण बची होती है। इसलिए अदालतों को भी यह ध्यान रखना होगा कि उनके सामने खड़ा हर व्यक्ति केवल एक केस नंबर नहीं, बल्कि अपने जीवन की किसी गहरी समस्या से जूझता हुआ इंसान है। उसकी बात सुनते समय कानून के साथ मानवीय संवेदना भी बनी रहनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना से देश को दो महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं। पहली, अदालत की गरिमा किसी भी कीमत पर भंग नहीं होनी चाहिए। न्यायालय में अपशब्द, आक्रोश और अभद्र व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध हैं। दूसरी, न्याय व्यवस्था को लोगों की पीड़ा, मानसिक तनाव और संघर्ष को भी समझना चाहिए, क्योंकि न्याय केवल निर्णय देने का नाम नहीं, बल्कि समाज में विश्वास बनाए रखने की प्रक्रिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी अदालत है और उसकी प्रतिष्ठा पूरे राष्ट्र की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है। वहीं, अदालत की चौखट पर आने वाला हर व्यक्ति न्याय की उम्मीद लेकर आता है। इसलिए आवश्यक है कि एक ओर अधिवक्ता और पक्षकार अपनी मर्यादा और जिम्मेदारी को समझें, तो दूसरी ओर न्याय व्यवस्था भी हर पीड़ित की व्यथा को महसूस करते हुए कानून और संवेदना के बीच संतुलन बनाए रखे। यही संतुलन भारतीय न्यायपालिका की सबसे बड़ी शक्ति है और यही लोकतंत्र की स्थायी पहचान भी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:12:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जस्टिस सूर्यकांत ने संभाली देश के 53वें CJI की कमान, हरियाणा से बनने वाले पहले चीफ जस्टिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ ली। वह हरियाणा से यह पद संभालने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं। शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित हुआ, जहां राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पद की शपथ दिलाई गई।</p>
<p>समारोह में जस्टिस सूर्यकांत का पूरा परिवार मौजूद रहा। उनके बड़े भाई डॉ. शिवकांत ने बताया कि परिवार एक दिन पहले ही दिल्ली रवाना हो गया था। शपथ कार्यक्रम में तीनों भाई, उनकी पत्नियां, बच्चे, बेटी-दामाद, बहन का परिवार, गांव के लोग और उनके पिता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161450/justice-surya-kant-took-charge-of-the-countrys-53rd-cji"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/justice-suryakant.jpg" alt=""></a><br /><p>देश को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ ली। वह हरियाणा से यह पद संभालने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं। शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित हुआ, जहां राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पद की शपथ दिलाई गई।</p>
<p>समारोह में जस्टिस सूर्यकांत का पूरा परिवार मौजूद रहा। उनके बड़े भाई डॉ. शिवकांत ने बताया कि परिवार एक दिन पहले ही दिल्ली रवाना हो गया था। शपथ कार्यक्रम में तीनों भाई, उनकी पत्नियां, बच्चे, बेटी-दामाद, बहन का परिवार, गांव के लोग और उनके पिता के मित्र शामिल हुए।</p>
<h3><strong>हिसार में खुशी का माहौल</strong></h3>
<p>जस्टिस सूर्यकांत के CJI बनने की खुशी हरियाणा के हिसार में भी देखने को मिली। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने उनके शपथ ग्रहण से पहले विशेष हवन आयोजन किया। हवन के बाद वकीलों ने ढोल की थाप पर जमकर नृत्य कर उत्सव मनाया।</p>
<h3><strong>हिसार से गहरा जुड़ाव—CJI बनने से पहले भी पहुंचे थे पैतृक गांव</strong></h3>
<p>जस्टिस सूर्यकांत का हिसार से विशेष जुड़ाव रहा है। वह दिवाली से ठीक पहले अपने पैतृक गांव पेटवाड़ पहुंचे थे। बिना किसी पूर्व सूचना के वे गांव आए और अपने पुश्तैनी घर में ठहरे। उनका विस्तृत परिवार आज भी गांव में रहता है — चाचा-ताऊ, उनके बेटे और बहुएं वहीं रहते हैं। गांव के बचपन के दोस्त भी उनके बेहद करीब माने जाते हैं।</p>
<h3><strong>हिसार में शुरू किया था करियर</strong></h3>
<p>सूर्यकांत ने अपने वकालत करियर की शुरुआत वर्ष 1984-85 में हिसार जिला न्यायालय से की थी। यहां उन्होंने लगभग छह महीने तक प्रैक्टिस की। वह वरिष्ठ वकील स्वर्गीय आत्माराम बंसल के जूनियर के रूप में काम करते थे। हिसार ने उनकी पेशेवर यात्रा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 10:26:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत आजादी के 75 सालों बाद लगातार तरक्की करने  के पीछे  भारतीय संविधान का  अहम रोल है। मुख्य न्यायाधीश भारत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>शपथ लेने के बाद मेरा सौभाग्य  है कि  पहला ऑफिशियल प्रोग्राम इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मिला। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्रता आंदोलन में चंद्रशेखर आजाद के बलिदान को देश सैल्यूट करता है। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के चीफ जस्टिस भूषण राम गवई ने कहा कि भारत आजादी के 75 सालों बाद लगातार तरक्की कर रहा है।इसके पीछे भारतीय संविधान का अहम रोल है।बाजू के देशों में बड़ी परेशानियां चल रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश गवई 680 करोड़ की लागत से बने इलाहाबादएडवोकेट चैंबर व बहुमंजिला पार्किंग का उद्घाटन करने के बाद एक भव्य समारोह को संबोधित कर रहे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152287/india-is-an-important-role-of-the-indian-constitution-behind"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-06/1001090499.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>शपथ लेने के बाद मेरा सौभाग्य  है कि  पहला ऑफिशियल प्रोग्राम इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मिला। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्रता आंदोलन में चंद्रशेखर आजाद के बलिदान को देश सैल्यूट करता है। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के चीफ जस्टिस भूषण राम गवई ने कहा कि भारत आजादी के 75 सालों बाद लगातार तरक्की कर रहा है।इसके पीछे भारतीय संविधान का अहम रोल है।बाजू के देशों में बड़ी परेशानियां चल रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश गवई 680 करोड़ की लागत से बने इलाहाबादएडवोकेट चैंबर व बहुमंजिला पार्किंग का उद्घाटन करने के बाद एक भव्य समारोह को संबोधित कर रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-06/1001090537.jpg" alt="भारत आजादी के 75 सालों बाद लगातार तरक्की करने  के पीछे  भारतीय संविधान का  अहम रोल है। मुख्य न्यायाधीश भारत।" width="818" height="428"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा किओथ लेने के बाद यह मेरा पहला ऑफिशियल प्रोग्राम इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मिला यह मेरा सौभाग्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> प्रयागराज से मेरा बहुत नजदीक का रिश्ता रहा है। 2019 में जब मैं सवोच्च न्यायालय पहुंचा तो जस्टिस विनीत सरन, जस्टिस कृष्ण मुरारी और बाद में जस्टिस विक्रम नाथ से पारिवारिक रिश्ते बने। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चीफ जस्टिस गवई ने कहा कि योगी जी तो पावरफुल हैं ही, पर इलाहाबाद भी कम पावरफुल लोगों की धरती नहीं है। विक्रम नाथ भी देश के सबसे मजबूत न्यायाधीशों में से एक हैं।उनके निमंत्रण को अस्वीकार करने की मुझमें हिम्मत नहीं थी।लेकिन उन्होंने आज सच नहीं बोला, उनको डिफेंड करने की मुझमें हिम्मत नहीं है. इसलिए कहूंगा कि इलाहाबाद बार बहुत ही अनुशासित बार है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-06/1001090569.jpg" alt="भारत आजादी के 75 सालों बाद लगातार तरक्की करने  के पीछे  भारतीय संविधान का  अहम रोल है। मुख्य न्यायाधीश भारत।" width="707" height="472"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीजेआई ने कहा कि न्याय के क्षेत्र में इलाहाबाद का नाम बड़े ही सम्मान से लिया जाता है।मोतीलाल नेहरू जवाहरलाल नेहरू जैसे अधिवक्ता हुए तो वहीं महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुभद्रा कुमारी चौहान जैसे साहित्यकार भी दिए। स्वतंत्रता आंदोलन में चंद्रशेखर आजाद के वरदान को देश सैल्यूट करता है। आजादी के आंदोलन में चंद्रशेखर आजाद के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> बिना नाम लिए उन्होंने कहा कि हमारे आजू–बाजू के देशों में बड़ी परेशानियां चल रही हैं। भारत आजादी के 75 सालों बाद लगातार तरक्की कर रहा है।इसके पीछे भारतीय संविधान का अहम रोल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीजेआई ने कहा कि अधिवक्ताओं को जो चैंबर और पार्किंग मिली है यह अद्भुत है। इतनी बड़ी और सुविधा युक्त इमारत मेरी जानकारी में पूरी दुनिया में नहीं होगी।इसके लिए मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने न्यायमूर्तियों का ही नहीं वकीलों का ही नहीं, बल्कि आम आदमी का भी ध्यान दिया है। मुख्यमंत्री ने वादकारियों के लिए जो नए भवन के निर्माण की स्वीकृति दी है यह काबिले तारीफ है।यह भी कहा कि बेहतर न्याय व्यवस्था के लिए बार और बेंच का अच्छा तालमेल होना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-06/1001090533.jpg" alt="भारत आजादी के 75 सालों बाद लगातार तरक्की करने  के पीछे  भारतीय संविधान का  अहम रोल है। मुख्य न्यायाधीश भारत।" width="777" height="395"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीजेआई ने कहा कि 1973 से पहले जब मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्यों के बीच में टकराव होता था तो मौलिक अधिकार को वरीयता दी जाती थी। लेकिन 1973 केशवानंद भारती का मामला आया जिसमें बुनियादी संरचना का सिद्धांत दिया गया। इस सिद्धांत का अनुसरण करते हुए 50 साल हो गया है। बार और बेंच को बिना साथ लेकर चले हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं। यह निर्माण कार्य सभी हाईकोर्ट के लिए आदर्श है। इससे प्रेरणा लिया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीजेआई ने कहा कि हमारे देश का संविधान 75 साल में मजबूती की ओर है। भारत प्रगति की ओर बढ़ रहा है। भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति क्या है बताने की जरूरत नहीं है।  देश का नागरिक न्याय के लिए आता है। उसका पूरा ख्याल हाईकोर्ट में रखा जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि  अंबेडकर ने अंतिम ड्राफ्ट सामने रखा और जो भाषण दिया वह देश को एक दिशा देने वाला संबोधन था। कहा था कि आज हम वन पर्सन, वन वोट और वन वैल्यू की ओर जा रहे हैं। बाबा साहब ने चेतावनी दी कि जब तक हम देश में आर्थिक असमानता दूर नहीं कर पाएंगे तब तक देश में लोकशाही स्थापित नहीं कर पाएंगे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्रीय विधि राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल बोले कि यदि जल्दी कार्य करना है तो योगी से सीख सकते हैं।  पूरा देश अहिल्याबाई की त्रिशताब्दी जयंती मना रहा है। न्यायिक व्यवस्था के लिए निर्माण होना चाहिए यह अहिलाबाई का मंत्र है।  संविधान को लागू हुए 75 वर्ष हो गया है। हमारे देश में शासन और प्रशासन की व्यवस्था अच्छी तरह से चल रही है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 21वीं सदी भारत की होगी। प्रयागराज महाकुंभ के लिए पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत ने यूपी सरकार से कहा....हाईकोर्ट की इस बिल्डिंग के तर्ज पर प्रदेश के जिला अदालतों की आधारभूत संरचना पर ध्यान दे। उन्हें भी विकसित करें।सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस सूर्यकांत ने संबोधित किया। इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश ने सभी न्यायाधीशो और अधिवक्ताओं का स्वागत किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Jun 2025 16:45:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
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                <title>रूपयों का पहाड़ घर में छिपाकर रखने वाले जज साहब </title>
                                    <description><![CDATA[<div>दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद भारी मात्रा में नकदी बरामद होने से न्यायपालिका में हड़कंप मच गया। यह मामला इतना गंभीर हो गया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम को उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा साथ ही फिलहाल उन्हें न्यायिक कार्य से विलग कर दिया गया है। </div>
<div>  </div>
<div>आपको बता दें 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई थी. वह शहर से बाहर थे. जज के निजी सचिव ने पीसीआर को बुलाया. इसके बाद आग पर तो काबू</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150327/judge-who-keeps-a-mountain-of-money-in-the-house%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(16)4.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद भारी मात्रा में नकदी बरामद होने से न्यायपालिका में हड़कंप मच गया। यह मामला इतना गंभीर हो गया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम को उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा साथ ही फिलहाल उन्हें न्यायिक कार्य से विलग कर दिया गया है। </div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई थी. वह शहर से बाहर थे. जज के निजी सचिव ने पीसीआर को बुलाया. इसके बाद आग पर तो काबू पा लिया गया लेकिन इस दौरान पुलिस और दमकल कर्मियों को बंगले के अंदर एक कमरे में कई बोरियों में बड़ी मात्रा में नोटों का ढेर दिखा. यह ढेर आधा जलकर खाक हो गया था. यह बात बड़े अधिकारियों तक पहुंची और फिर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंच गया.</div>
<div>जानकारी के अनुसार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने इस मामले में एक्शन लेते हुए फौरन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई जिसमें जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट करने का फैसला लिया गया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी. अब तक जांच में जो कुछ सामने आया है, वह सब सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक डोमेन में उपलब्ध करा दिया है. इसमें नोटों के ढेर की अधजली तस्वीर भी शामिल है।</div>
<div> </div>
<div>14 मार्च की रात जज के निजी सचिव ने आग लगने की सूचना दी.फायर ब्रिगेड को अलग से कॉल नहीं किया गया.दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने 15 मार्च की सुबह मामले की जानकारी दी. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तब लखनऊ में थे.पुलिस कमिश्नर ने अधजले कैश की तस्वीरें और वीडियो भी हाई कोर्ट चीफ जस्टिस को भेजीं.कमिश्नर ने बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को यह भी बताया कि जज के बंगले के एक सिक्युरिटी गार्ड ने उन्हें बताया कि 15 मार्च को कमरे से मलबा साफ किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>इस के बाद मामले को दबाने झुठलाने का सिलसिला शुरू हो गया कभी फायर सर्विस के एक अधिकारी के बयान से कोई नकदी नहीं मिलने की बात कही गई कभी जज साब का स्थानांतरण नियमित प्रक्रिया में होने की बयान आए और मामले पर मिट्टी डाल कर जार जार हो रहे न्याय तंत्र की साख को बचाने की कोशिश की गई लेकिन सोशल मीडिया के जमाने में जज साहब के घर की आग में अधजले नोटों के बोरो की तस्वीर वायरल हो गई और अंततः जिम्मेदार बड़ी अदालत को इस सबको लेकर अपना नजरिया साफ करना पड़ा। </div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने जस्टिस वर्मा से मुलाकात की तो जस्टिस वर्मा ने किसी कैश की जानकारी होने से इनकार किया. यह भी कहा कि वह कमरा सब इस्तेमाल करते हैं.दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने उन्हें वीडियो दिखाया तो उन्होंने इसे साजिश बताया.दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने भारत के मुख्य न्यायधीश को भेजी चिट्ठी में गहराई से जांच की जरूरत बताई है.भारत के मुख्य न्यायधीश के निर्देश पर जस्टिस वर्मा का 6 महीने कॉल रिकॉर्ड निकाला गया है.जस्टिस वर्मा से यह भी कहा गया है कि वह अपने फोन को डिस्पोज न करें, न ही चैट मिटाएं।</div>
<div> </div>
<div>रिपोर्ट के मुताबिक जब आग लगी, उस समय न्यायमूर्ति वर्मा शहर से बाहर थे। उनके परिवार के सदस्यों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के दौरान एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी बरामद की, जिसके बाद इस मामले की आधिकारिक एंट्री दर्ज की गई। स्थानीय पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद यह खबर सरकार के उच्च अधिकारियों तक पहुंची और अंततः सीजेआई को जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही सीजेआई संजीव खन्ना ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई। कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से न्यायमूर्ति वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल हाईकोर्ट, इलाहाबाद स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। न्यायमूर्ति वर्मा को अक्टूबर 2021 में इलाहाबाद से दिल्ली हाईकोर्ट में भेजा गया था।</div>
<div> </div>
<div>कॉलेजियम के कुछ सदस्यों ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि केवल स्थानांतरण कर दिया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की छवि धूमिल होगी और न्याय व्यवस्था से जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है। कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि न्यायमूर्ति वर्मा से इस्तीफा मांगा जाना चाहिए। यदि वे इनकार करते हैं, तो संसद के माध्यम से उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। संविधान के अनुसार, किसी भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार, अनियमितता या कदाचार के आरोपों की जांच के लिए 1999 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन-हाउस प्रक्रिया तैयार की गई थी। इस प्रक्रिया के तहत, सीजेआई पहले संबंधित न्यायाधीश से स्पष्टीकरण मांगते हैं। यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता या मामले में गहन जांच की जरूरत महसूस होती है, तो सीजेआइ सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और दो उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की एक इन-हाउस जांच समिति गठित कर सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div> हालांकि फिलहाल केवल वर्मा के ट्रांसफर का फैसला लिया निलंबन नहीं किया है जांच के बाद जज वर्मा के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करने की बात कही जा रही है। खबर है कुछ जज इस मामले में सिर्फ तबादले की कार्रवाई को ठीक न मानते हुए न्यायमूर्ति वर्मा से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. जजों का कहना है कि अगर वो इस्तीफा देने से मना करें तो सीजेआई उनके खिलाफ 1999 की प्रक्रिया के अनुसाज जांच शुरू कराएं. इस मामले में किसी भी जज के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच कराई जाती है. चलिए जानें कि ऐसे मामलों में कहां और कैसे एक्शन लिया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>इस तरीके के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की 1999 में बनाई गई इन-हाउस प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है. जिसकी मांग बाकी के जज कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में न्यायालयों के जजों के खिलाफ गलत काम, अनुचित व्यवहार और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों से निपटा जाता है. इस प्रक्रिया के तहत सीजेआई को किसी जज के खिलाफ शिकायत मिलने पर वह उससे जवाब मांगते हैं. अगर जवाब से सीजेआई संतुष्ट नहीं होते हैं या अगर उनको लगता है कि इस मामले की गंभीर तरीके से जांच की जानी चाहिए तो वह एक इन-हाउस जांच पैनल बनाते हैं. इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और हाई कोर्ट के दो मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं।</div>
<div> </div>
<div>फिर जांच के नतीजों के अनुसार उनका इस्तीफा मांगा जाता है या फिर महाभियोग चलता है.जज के आवास से नकदी की बरामदगी से संबंधित मामला शुक्रवार को राज्यसभा में उठाया गया। सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर एक व्यवस्थित चर्चा बहस कराने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस के जयराम रमेश ने सुबह के सत्र में यह मुद्दा उठाते हुए न्यायिक जवाबदेही पर सभापति से जवाब मांगा और इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ महाभियोग के संबंध में लंबित नोटिस के बारे में याद दिलाया।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया इस पर कुछ टिप्पणियां करें और न्यायिक जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रस्ताव के साथ आने के लिए सरकार को आवश्यक निर्देश दें।’ नकदी की कथित बरामदगी के मुद्दे पर धनखड़ ने कहा कि उन्हें जिस बात की चिंता है वह यह है कि यह घटना हुई लेकिन तत्काल सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना किसी राजनेता, नौकरशाह या उद्योगपति से जुड़ी होती तो संबंधित व्यक्ति तुरंत निशाना बन जाता। उन्होंने ऐसे मामलों में ऐसी प्रणालीगत प्रतिक्रिया की वकालत की जो पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी हो।</div>
<div> </div>
<div>सोचने वाली बात है कि किसी अन्य नौकरी में भ्रष्टाचार उजागर होने पर तुरंत निलंबन और जांच होती है। लेकिन यहाँ न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ताक पर रखकर केवल स्थानांतरण कर दिया गया। क्या जज वर्मा घर से बैंक चला रहे थे? या फिर कोई आर्थिक सेवा दे रहे थे?</div>
<div> </div>
<div>जब ऐसे फैसले लिए जाते हैं, तो न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाज़मी है। अगर चीफ जस्टिस खुद न्यायपालिका की साख को बचाने की चिंता नहीं करेंगे, तो आम जनता किससे उम्मीद करे?</div>
<div>दरअसल देश मे भ्रष्टाचार चरम पर है और कई बार न्यायपालिका के फैसलों और न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली और गतिविधियों पर भी सवाल किए जाते रहे हैं अब इन हालातों में जब रिश्वतखोर न्यायिक अधिकारी पैसे लेकर न्याय की बोली लगाकर फैसले दे रहे हैं तब समाज में कानून व्यवस्था को लेकर अविश्वास का माहौल पनपना स्वाभाविक है।</div>
<div> </div>
<div>और अब तो बाकायदा एक हाइकोर्ट के जज के आवास से नोटों के अधजले बंडल चीख चीख कर कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहराईयों तक पहुच चुकी है।न्याय की कुर्सी पर बैठ कर इस तरह अवैध अकूत संपदा एकत्र करने वाले व्यवस्था के सरमाएदार बने  लोग समाज में कितना गलत संदेश दे रहे हैं यह लोकतांत्रिक देश में न्याय पालिका की गैरजिम्मेदाराना स्थिति को बयान करती है। सरकार को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई सरकारी अधिकारी देश के आम आदमी के विश्वास से खिलवाड़ न करे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 12:50:28 +0530</pubDate>
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                <title>सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों पर जल्द से जल्द कार्यवाही: सुप्रीम कोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सुप्रीम</strong> कोर्ट ने गुरुवार को विधान सभाओं और संसद के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी लाते हुए देश भर के उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया कि वे ऐसे मुकदमों की निगरानी के लिए अपने स्तर पर मामले दर्ज करें और उन मामलों को प्राथमिकता दें जिनमें अधिकतम मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा हो। हत्या के मामलों में दोषी पाए जाने पर दोषियों को या तो मौत की सज़ा या आजीवन कारावास की सज़ा होती है। </p>
<p>यहां तक ​​कि भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सांसदों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136957/supreme-court-to-take-action-on-pending-cases-against-mps"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/supreme-court_large_1327_19.webp" alt=""></a><br /><p><strong>सुप्रीम</strong> कोर्ट ने गुरुवार को विधान सभाओं और संसद के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी लाते हुए देश भर के उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया कि वे ऐसे मुकदमों की निगरानी के लिए अपने स्तर पर मामले दर्ज करें और उन मामलों को प्राथमिकता दें जिनमें अधिकतम मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा हो। हत्या के मामलों में दोषी पाए जाने पर दोषियों को या तो मौत की सज़ा या आजीवन कारावास की सज़ा होती है। </p>
<p>यहां तक ​​कि भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमों के निपटारे के लिए एक विशिष्ट समयसीमा निर्धारित करने के लिए कोई समान निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है, इसने कहा कि सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को स्वत: संज्ञान लेना होगा। अपने अधिकार क्षेत्र में लंबित मुकदमों की प्रभावी निगरानी और निपटान के लिए कार्यवाही को प्रेरित करें।</p>
<p>विशेष पीठ आवश्यकतानुसार मामले को नियमित अंतराल पर सूचीबद्ध कर सकती है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मामलों के शीघ्र और प्रभावी निपटान के लिए आवश्यक आदेश और निर्देश जारी कर सकते हैं, ”पीठ ने कहा, जिसमें न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और मनोज मिश्रा भी शामिल हैं, विशेष पीठ का नेतृत्व या तो एचसी के मुख्य न्यायाधीशों द्वारा किया जा सकता है। </p>
<p>इसमें आगे कहा गया है कि मौत की सजा या आजीवन कारावास वाले मामलों के बाद, पांच साल से अधिक की जेल की सजा वाले मामलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय उन मामलों को भी सूचीबद्ध करेंगे जहां मुकदमों पर रोक लगा दी गई है और ऐसे मुकदमों में तेजी लाने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 13:38:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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