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                <title>Madhya Pradesh Politics - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Madhya Pradesh Politics RSS Feed</description>
                
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                <title>पार्टियों की टूट व टूटता भरोसा: लोकतंत्र में सबसे बड़ा नुकसान यही है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181509/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया जाता है - "सिद्धांतों से समझौता", "जनता के हित में फैसला"। लेकिन नतीजा एक ही निकलता है - वोटर का भरोसा टूटना।</p><p style="text-align:justify;"><br />टूट क्यों रही हैं पार्टियां? इस पर हमारी सोच वही है जो लगभग सभी की होती है। सत्ता और पद का गणित- पार्टी टूटने का 80% कारण विधायकों और सांसदों की टिकट और मंत्री पद की भूख है। जब हाईकमान टिकट काटता है या किसी और को आगे बढ़ाता है, तो नाराज नेता दूसरी पार्टी या नई पार्टी बना लेते हैं। परिवारवाद और हाईकमान कल्चर-<br />कई क्षेत्रीय पार्टियां एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। जब दूसरी पीढ़ी तैयार होती है, तो पुराने नेता खुद को साइडलाइन महसूस करते हैं और बगावत करते हैं।</p><p style="text-align:justify;"><br />विचारधारा का कमजोर होना- पहले पार्टियों की पहचान किसी विचारधारा से होती थी। अब ज्यादातर पार्टियां "पावर ब्लॉक" बन गई हैं। विचारधारा बदलते देर नहीं लगती, क्योंकि एजेंडा सत्ता है। वोटर का भरोसा कैसे टूटता है?- जब तुमने 2019 में किसी पार्टी को वोट दिया था, तुमने उसके घोषणापत्र, नेता और विचारधारा पर भरोसा किया था। 2023 में वही विधायक दूसरी पार्टी में चला जाए और 2024 में तीसरी पार्टी में, तो सवाल उठता है। मैंने वोट किसको दिया था? व्यक्ति को, सिंबल को, या पार्टी को?</p><p style="text-align:justify;"><br />क्या मेरा वोट मायने रखता है? अगर चुनाव के बाद गठबंधन बदल जाए तो जनादेश का मतलब क्या रहा? सब एक जैसे हैं- ये सनक नहीं, टूटे भरोसे की उपज है। 2023 के कर्नाटक और महाराष्ट्र चुनाव के बाद CSDS के सर्वे में 47% लोगों ने कहा कि "दलबदल से लोकतंत्र कमजोर होता है"। इसका असर कहां दिखता है? चुनावी राजनीति पर- लोग अब स्थानीय उम्मीदवार देखने लगे हैं, पार्टी नहीं। "पार्टी कोई भी हो, मेरा काम करे" वाला ट्रेंड बढ़ रहा है। नीति निर्माण पर- सरकारें अस्थिर हो जाती हैं। 5 साल का प्लान 2 साल में बदल जाता है क्योंकि गठबंधन बदल गया। युवा राजनीति से दूर हो रहे हैं- कॉलेज चुनावों में भी भागीदारी घट रही है। युवाओं को लगता है कि राजनीति सिर्फ सौदेबाजी है। नोटा का बढ़ना- 2019 के बाद से कई सीटों पर नोटा को मिले वोट 2-3% तक पहुंच गए हैं। ये विरोध का साइलेंट तरीका है।</p><p style="text-align:justify;"><br />               दलबदल कानून कहां फेल हुआ?- 1985 में 52वां संविधान संशोधन लाकर दलबदल विरोधी कानून बनाया गया। मकसद था कि विधायक पार्टी न बदलें। लेकिन कानून में एक खामी छोड़ दी गई - अगर 2/3 विधायक साथ छोड़ दें तो वो "विलय" कहलाता है और अयोग्यता नहीं लगती। इसी खामी का फायदा लेकर महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश में सरकारें गिरीं। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि स्पीकर का फैसला समय पर नहीं आता, जिससे कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है। क्या हो सकता है समाधान?- 2/3 वाली छूट हटाओ- अगर पार्टी टूटती है तो सबको अयोग्य ठहराओ। फिर जनता के पास जाओ और दोबारा चुनाव लड़ो।</p><p style="text-align:justify;"><br />फंडिंग में पारदर्शिता-  चुनाव आयोग को हर लेन-देन का हिसाब मिले ताकि नेताओं को खरीद-फरोख्त न हो सके। आंतरिक लोकतंत्र-  पार्टियों में चुनाव हों, युवा और कार्यकर्ताओं की सुनवाई हो। जब अंदर लोकतंत्र होगा तो बाहर टूट कम होगी। वोटर एजुकेशन-  लोगों को समझाना होगा कि वोट सिंबल को जाता है, व्यक्ति को नहीं। ये बात स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई जाए। स्थानीय मुद्दों पर वोट-  लोग अब पानी, सड़क, स्कूल को देखकर वोट कर रहे हैं, न कि बड़े नेता के नाम पर। सोशल मीडिया पर जवाबदेही- विधायक अगर पाला बदलता है तो अगले 6 महीने तक ट्रोल होता है। ये डर कुछ हद तक काम कर रहा है। नए विकल्प की तलाश AAP जैसे दल इसी भरोसे के संकट से पैदा हुए। पार्टियों का टूटना लोकतंत्र में स्वाभाविक है, लेकिन जब हर 2 साल में गठबंधन और दल बदल जाएं, तो जनता को लगता है कि उसका वोट सिर्फ सत्ता का सीढ़ी है।</p><p style="text-align:justify;"><br />लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं है, ये भरोसे का कॉन्ट्रैक्ट है। जब पार्टियां उस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ती हैं, तो नुकसान वोटर को होता है। और एक बार भरोसा टूट जाए, तो उसे दोबारा जोड़ने में 10 साल लग जाते हैं।<br />अगली बार जब कोई नेता पाला बदले, तो सवाल पूछो: "तुम पार्टी बदले, मेरी समस्या बदली क्या?"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:39:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिट्टी के सपूत की अमर जयंती: सहकारिता की अनकही क्रांति</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के बोरावां गांव की धरती </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>1946 <span lang="hi" xml:lang="hi">को एक ऐसे योद्धा को जन्म देने गर्व महसूस कर रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी जड़ें गहरी किसानी में थीं। पिता गंगाराम यादव के कृषक परिवार में पले-बढ़े सुभाष यादव ने बचपन से ही खेतों की मिट्टी को छूते हुए बड़े सपने देखे। उनकी आँखों में हर किसान की पीड़ा झलकती थी और हर खेत उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनता था। मिट्टी उनके जीवन का पहला शिक्षक थी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि विषय में स्नातक होने के बाद उन्होंने अपने गृह गांव में उन्नत खेती के प्रयोग शुरू किए—बीजों को</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174577/amar-jayanti-of-the-son-of-the-soil-untold-revolution"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas19.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के बोरावां गांव की धरती </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>1946 <span lang="hi" xml:lang="hi">को एक ऐसे योद्धा को जन्म देने गर्व महसूस कर रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी जड़ें गहरी किसानी में थीं। पिता गंगाराम यादव के कृषक परिवार में पले-बढ़े सुभाष यादव ने बचपन से ही खेतों की मिट्टी को छूते हुए बड़े सपने देखे। उनकी आँखों में हर किसान की पीड़ा झलकती थी और हर खेत उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनता था। मिट्टी उनके जीवन का पहला शिक्षक थी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि विषय में स्नातक होने के बाद उन्होंने अपने गृह गांव में उन्नत खेती के प्रयोग शुरू किए—बीजों को नई तकनीक से जोड़कर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी और मिट्टी के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए। उस समय गांव की हर कुटिया संघर्ष की कहानियां बयां करती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुभाष जी ने कभी हार नहीं मानी। उनकी आंखों में किसान के उज्ज्वल भविष्य का सपना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो धीरे-धीरे सहकारिता की राह पर बदलने वाला था। यही वह मजबूत नींव थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर बाद में पूरे प्रदेश का कल्याण खड़ा हुआ।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">1971 <span lang="hi" xml:lang="hi">में प्राथमिक सेवा सहकारी समिति बोरावां के सदस्य बनकर सुभाष यादव ने सहकारिता क्षेत्र में प्रवेश किया। हर बैठक में उनकी नजर किसानों के खेतों और घरों की वास्तविक परेशानियों पर टिकी रहती थी। वे केवल निर्णय लेने वाले नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि किसानों की आवाज को नीति में बदलने वाले नेता थे। मात्र तीन वर्ष बाद</span>, 27 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>1974 <span lang="hi" xml:lang="hi">को उन्हें सर्वसम्मति से जिला सहकारी केंद्रीय बैंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरगोन का अध्यक्ष चुना गया। इस पद पर उन्होंने किसानों की आर्थिक स्थिति को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>1980 <span lang="hi" xml:lang="hi">में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने उन्हें मध्य प्रदेश राज्य सहकारी बैंक का अध्यक्ष मनोनीत किया। उन्होंने इस पद पर लगभग </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षों तक विभिन्न कार्यकालों में सेवा दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें </span>2002 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक तीन प्रमुख कार्यकाल शामिल थे। राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी छाप गहरी रही—</span>1983-86 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>1986-89 <span lang="hi" xml:lang="hi">में नेशनल फेडरेशन ऑफ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई के निर्विरोध अध्यक्ष बने। सहकारिता श्री तथा सर्वश्रेष्ठ सहकारिता पुरुष जैसे सम्मानों से सम्मानित वे किसानों की सशक्त आवाज बनकर उभरे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सहकारिता के इस महान योद्धा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रौशन किया। उन्होंने अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया की यात्राएँ कीं और हर यात्रा से नई तकनीक सीधे अपने गांव में लागू की। तकनीक उनके लिए केवल प्रगति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि किसान के खेत में लाभ और आत्मनिर्भरता थी। खरगोन में सूत मिल और अन्य सहकारी उद्यमों को मजबूत करने में उनका योगदान निर्णायक रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे किसानों की आय बढ़ी। इन प्रयासों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त की और निमाड़ क्षेत्र को आत्मनिर्भरता की मिसाल बनाया। सुभाष यादव ने साबित किया कि सहकारिता केवल आंदोलन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि किसान क्रांति का माध्यम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">1980 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>1985 <span lang="hi" xml:lang="hi">में खरगोन लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर दो बार सांसद चुने गए सुभाष यादव ने संसद में किसानों की पीड़ा को मुखर किया। उनकी हर बातचीत में मिट्टी की खुशबू और किसान की मेहनत की सराहना झलकती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे दिल्ली के गलियारों में भी किसानों की आवाज़ गूंजती रही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>1993 <span lang="hi" xml:lang="hi">में कसरावद विधानसभा से विधायक बनकर वे मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में उप मुख्यमंत्री पद तक पहुँचे। दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में </span>14 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिसंबर </span>1993 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">नवंबर </span>1998 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक वे उप मुख्यमंत्री रहे। कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहकारिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने प्रदेश के किसानों के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। हर नीति में गांव की चिंता झलकती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर फैसला सीधे मिट्टी और किसान से जुड़ा होता था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">1998 <span lang="hi" xml:lang="hi">में पुनः कसरावद से विधायक चुने गए सुभाष यादव ने </span>2008 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक लगातार तीन कार्यकालों तक विधानसभा सेवा दी। सोनिया गांधी ने उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां उन्होंने पार्टी को नई दिशा और ऊर्जा दी। मध्य प्रदेश कृषक कल्याण आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने शासन को </span>888 <span lang="hi" xml:lang="hi">महत्वपूर्ण सुझाव दिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज भी किसान नीतियों की मजबूती का आधार बने हुए हैं। भारत कृषक समाज की राज्य इकाई के सभापति और अध्यक्ष के रूप में वे लगातार किसानों के हितों की लड़ाई लड़ते रहे। उनकी राजनीति कभी व्यक्तिगत नहीं थी—यह हमेशा सामूहिक कल्याण की राजनीति थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां हर छोटा किसान बड़े सपने देख सके और उन्हें साकार कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बोरावां में जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना कर सुभाष यादव ने शिक्षा के क्षेत्र में भी नई क्रांति लाई। उनके लिए शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं थी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह खेत और कक्षा दोनों में बच्चों के भविष्य को संवारने का माध्यम थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जवाहरलाल नेहरू चैरिटेबल एजुकेशनल ट्रस्ट के माध्यम से संचालित इस संस्थान ने किसानों और मजदूरों के बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा प्रदान की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सैकड़ों युवा अनुसंधान और रोजगार की राह पर अग्रसर हुए। उनकी पत्नी दमयंती यादव के साथ पाला-पोसा परिवार राजनीति और सेवा का प्रतीक बन गया। दो पुत्र—अरुण सुभाषचंद्र यादव और सचिन सुभाषचंद्र यादव—आज कांग्रेस की मजबूत कड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि चार पुत्रियां परिवार की गरिमा और प्रतिष्ठा बढ़ाती हैं। सुभाष यादव की यह विरासत हर घर में जीवित है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धूप में पसीना बहाने वाले किसान की आत्मा आज भी हमारे बीच गूंजती है। </span>26 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2013 <span lang="hi" xml:lang="hi">को नई दिल्ली ने एक महान व्यक्तित्व खो दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हर साल </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल उनकी जयंती हमें नई प्रेरणा देती है। सुभाष यादव की स्मृति सिखाती है कि किसान की आवाज़ कभी दब नहीं सकती—यह मिट्टी के साथ सांस लेती है और हर बीज में जीवन पाती है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बोरावां की धरती उनके संघर्ष और साहस की कहानी फिर से गुनगुना रही है—वह किसान जिसने उप मुख्यमंत्री का पद संभाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वह नेता जिसने सहकारिता के सिद्धांतों को जीवन बनाया। उनकी जीवन यात्रा सिखाती है कि जब सपनों के बीज को मेहनत की मिट्टी में रोपा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे विशाल पेड़ों में बदल जाते हैं। हम प्रण लेते हैं कि किसान की आवाज़ कभी दबने नहीं पाएगी। उनकी अमर जयंती हमेशा यह याद दिलाती रहेगी—सच्ची विजय संघर्ष से ही मिलती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 19:52:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>गठबंधन साथियों को धोखा देने वाली पार्टी है कांग्रेस: अखिलेश यादव </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Rajniti: </strong>इंडिया गठबंधन में बिखराव का एक और अध्याय सामने आ गया है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मतभेद इतने गहरा गये हैं कि इसका असर लोकसभा चुनावों में दोनों दलों के गठबंधन पर पड़ सकता है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांगेस पर उनकी पार्टी को ‘जातिवादी और वंशवादी’ बताने के लिए निशाना साधते हुए कहा है।</p>
<p>कि कांग्रेस अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जैसी ही भाषा बोल रही है। अखिलेश यादव ने साथ ही यह भी कहा है कि यह तो अच्छा हुआ कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136671/congress-is-the-party-that-betrays-its-alliance-partners-akhilesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/akhilesh-rahul_large_1257_23.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Rajniti: </strong>इंडिया गठबंधन में बिखराव का एक और अध्याय सामने आ गया है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मतभेद इतने गहरा गये हैं कि इसका असर लोकसभा चुनावों में दोनों दलों के गठबंधन पर पड़ सकता है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांगेस पर उनकी पार्टी को ‘जातिवादी और वंशवादी’ बताने के लिए निशाना साधते हुए कहा है।</p>
<p>कि कांग्रेस अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जैसी ही भाषा बोल रही है। अखिलेश यादव ने साथ ही यह भी कहा है कि यह तो अच्छा हुआ कि हमें पहले ही कांग्रेस की मंशा का पता चल गया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस का इतिहास गठबंधन साथियों को धोखा देने वाले का रहा है। अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी में कांग्रेस की ओर से सेंध लगाये जाने पर भी नाराजगी जताई।</p>
<p>हम आपको बता दें कि अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए सपा का प्रचार करते हुए छतरपुर जिले के चंदला में कहा, ‘‘यह कांग्रेस ही थी जिसने मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सपा के साथ गठबंधन करने से इंकार कर दिया।’’ यादव ने कहा, ''कांग्रेस कहती है कि सपा ‘जातिवादी और वंशवादी’ पार्टी है, तो फिर उसमें और भाजपा में क्या अंतर है? वे दोनों एक ही भाषा बोलते हैं।’’ अखिलेश यादव ने कहा कि वंशवादी राजनीति हर पार्टी में मौजूद है। उन्होंने कहा कि जो भी सामाजिक न्याय की बात करेगा उसे जातिवादी होने का आरोप झेलना पड़ेगा।</p>
<p>राज्य में कांग्रेस द्वारा सपा उम्मीदवारों की खरीद-फरोख्त पर यादव ने कहा, ‘‘यह उनके इरादों को दर्शाता है...उन्हें ऐसा करने दीजिए। मध्य प्रदेश के लोगों ने देखा है कि यह कांग्रेस ही थी जिसने गठबंधन को खारिज कर दिया था।'' हम आपको बता दें कि अखिलेश यादव चंदला में पार्टी प्रत्याशी पुष्पेंद्र अहिरवार के समर्थन में एक आमसभा को संबोधित करने आये थे।</p>
<p>जनसभा को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि कुछ दल सपा को जातिवादी कह रहे हैं, लेकिन "समाजवादी कभी भी जातिवादी नहीं हो सकते क्योंकि वे सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास करते हैं।" उन्होंने आश्वासन दिया कि जब भी सपा सत्ता में आएगी या उसके समर्थन से राज्य में सरकार बनेगी, तो सबसे पहले जातीय जनगणना कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि चंदला की जनता ने दो बार सपा प्रत्याशियों को आशीर्वाद दिया है और इस बार भी वह उसकी जीत सुनिश्चित करेगी।</p>
<p>बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के बारे में सपा प्रमुख यादव ने कहा कि इस पर लोकसभा चुनाव के समय चर्चा की जाएगी, क्योंकि केवल "पीडीए" (पिछड़ा, दलित और आदिवासी) की ताकत ही भाजपा को हरा सकेगी। उन्होंने एक प्रश्न पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कमलनाथ "बुजुर्ग" हैं, लेकिन सत्तारुढ़ भाजपा के पास मध्य प्रदेश में संभागों की संख्या से अधिक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।</p>
<p>चुनाव के बाद किसी पार्टी को समर्थन देने पर यादव ने कहा कि वह केवल उसी पार्टी को समर्थन देने पर विचार करेंगे जो जातीय जनगणना कराएगी। हालाँकि, यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस बयान पर टिप्पणी करने से परहेज किया कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में कुछ भी नहीं हो रहा है, उन्होंने कहा कि वह इस बारे में बाद में बात करेंगे। सपा प्रमुख यादव ने कहा, ‘‘भाजपा भी अब पिछड़े वर्गों को अधिक टिकट देने की बात कर रही है।</p>
<p>यह मानसिकता में बड़े बदलाव को दर्शाता है। यहां तक कि कांग्रेस, जिसने आजादी के बाद जातीय जनगणना कराना बंद कर दिया था, अब इसके बारे में बात कर रही है...इसका मतलब है कि उन्हें पीडीए की ताकत का एहसास हो रहा है।’’ दलित या पिछड़े वर्ग के किसी सदस्य को मुख्यमंत्री बनाने के चुनावी वादे के बारे में पूछे जाने पर यादव ने दावा किया कि कांग्रेस और भाजपा दोनों कभी भी दलितों और पिछड़े वर्गों के पक्ष में निर्णय नहीं लेंगी।</p>
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                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 13:30:02 +0530</pubDate>
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