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                <title>international news hindi  - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>international news hindi  RSS Feed</description>
                
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                <title>पहले सभ्यता मिटाने की धमकी और फिर ईरान को रिकंस्ट्रक्शन में मदद का वादा, 24 घंटे में ट्रंप के पलटने की पूरी कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महज 24 घंटे पहले ईरान को नेस्तनाबूद करने की धमकी दे रहे थे। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान उनकी बात नहीं मानता, तो “मंगलवार रात पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।“ उनके इस बयान से पूरी दुनिया में दहशत का माहौल बन गया था। लेकिन ट्रंप अब ईरान के पुनर्निर्माण में मदद की बात कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में युद्धविराम समझौते को ‘‘विश्व शांति के लिए एक बड़ा दिन’’ घोषित किया और कहा कि अमेरिका ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के यातायात की भीड़ को कम करने में मदद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175576/first-the-threat-of-destroying-civilization-and-then-the-promise"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/top_news_today_1775567346779_1775567356175.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महज 24 घंटे पहले ईरान को नेस्तनाबूद करने की धमकी दे रहे थे। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान उनकी बात नहीं मानता, तो “मंगलवार रात पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।“ उनके इस बयान से पूरी दुनिया में दहशत का माहौल बन गया था। लेकिन ट्रंप अब ईरान के पुनर्निर्माण में मदद की बात कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में युद्धविराम समझौते को ‘‘विश्व शांति के लिए एक बड़ा दिन’’ घोषित किया और कहा कि अमेरिका ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के यातायात की भीड़ को कम करने में मदद करेगा।’’ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘बहुत सारे सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे!’’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘‘इससे खूब आय होगी। ईरान पुनर्निर्माण प्रक्रिया शुरू कर सकता है। हम हर तरह की आपूर्ति लेकर जाएंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए वहीं मौजूद रहेंगे कि सब कुछ ठीक से चले। मुझे पूरा भरोसा है कि ऐसा ही होगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की ‘ट्रुथ सोशल’ वेबसाइट पर दिए गए संदेश से वाशिंगटन की इस चिंता का संकेत मिलता है कि ईरान फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है, जिससे शांति काल में कुल तेल और प्राकृतिक गैस का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यह यू-टर्न सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि  राजनीतिक भी हो सकता है। अमेरिका में चुनावी माहौल गर्म है और इस जंग के कारण ट्रंप की लोकप्रियता पर असर पड़ा है। ऐसे में शांति का संदेश देना उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। दूसरी तरफ, ईरान भी लगातार दबाव में था। आर्थिक संकट, सैन्य नुकसान और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उसे भी बातचीत का रास्ता अपनाना पड़ा।राजनीतिक विश्लेषण सेवा</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दावा किया कि आज (मंगलवार) रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी। ट्रंप ने ट्रुथ पोस्ट में लिखा कि "आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही ट्रंप ने विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वो इसकी ख्वाहिश नहीं रखते। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन शायद हो जाए।" फिर दावा किया कि अब ईरान में पूर्ण सत्ता परिवर्तन की गुंजाइश है। उनके मुताबिक, इस बदलाव के साथ ही सत्ता पर ज्यादा होशियार और कम रेडिकल सोच वाले लोग काबिज होंगे। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि अगर ऐसा हुआ तो "शायद कुछ बहुत ही शानदार हो जाए।" ट्रंप ने अपनी बातों को विराम देते हुए कहा- आज की रात दुनिया के इतिहास की एक बहुत बड़ी और खास पल साबित हो सकती है। पिछले 47 साल से चल रहे दमन, भ्रष्टाचार और हिंसा का अंत हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 22:04:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच एकजुट हुए 22 देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम एशिया संकट के बीच दुनिया के 22 देशों ने मिलकर ईरान से अपील की है कि वह अपने हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दे। इन देशों में यूएई, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी,  जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया समेत कई बड़े देश शामिल हैं। इन सभी ने एक संयुक्त बयान जारी करके ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। इन देशों का कहना है कि ईरान ने हाल ही में बिना हथियार वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले किए, तेल और गैस से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य को</p>
<p style="text-align:justify;">एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173881/22-countries-united-amid-west-asia-crisis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/48.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम एशिया संकट के बीच दुनिया के 22 देशों ने मिलकर ईरान से अपील की है कि वह अपने हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दे। इन देशों में यूएई, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया समेत कई बड़े देश शामिल हैं। इन सभी ने एक संयुक्त बयान जारी करके ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। इन देशों का कहना है कि ईरान ने हाल ही में बिना हथियार वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले किए, तेल और गैस से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक संयुक्त बयान में देशों ने कहा कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही की आजादी अंतरराष्ट्रीय कानून का अहम हिस्सा है। ईरान की इन हरकतों का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा, खासकर गरीब और कमजोर देशों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान होगा। जिन 22 देशों ने यह पत्र लिखा है- उसमें संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन, लिथुआनिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का व्यापार होता है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई थी। ईरान के नए सर्वोच्च नेता और अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संदेश में कहा है कि ईरान अपने मारे गए लोगों का बदला जरूर लेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की नीति जारी रहेगी और पड़ोसी देशों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी बंद करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में चल रहे इस संघर्ष में भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, ईरान में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, लेबनान में 1000+ मौतें और लाखों लोग बेघर हुए हैं। वहीं इस्राइल में 15 लोगों की मौत हुई है और अमेरिका में 13 सैनिकों की मौत हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:52:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>US–Israel–Iran War: ग्राउंड ऑपरेशन से इनकार नहीं, रक्षा सचिव बोले– लंबी लड़ाई के लिए तैयार अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी रक्षा सचिव <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Pete Hegseth</span></span> ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईरान की जमीन पर कोई अमेरिकी सैनिक तैनात नहीं है, लेकिन भविष्य के विकल्प खुले हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की घोषणा</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">रक्षा सचिव ने बताया कि राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> के निर्देश पर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू किया गया है। उनके मुताबिक यह अब तक के सबसे सटीक और जटिल हवाई अभियानों में से एक है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी हितों की रक्षा करना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172293/us%E2%80%93israel%E2%80%93iran-war-ground-operation-not-ruled-out-defense-secretary-said"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/iran-attack-sharjah-1772429613.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी रक्षा सचिव <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Pete Hegseth</span></span> ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईरान की जमीन पर कोई अमेरिकी सैनिक तैनात नहीं है, लेकिन भविष्य के विकल्प खुले हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की घोषणा</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">रक्षा सचिव ने बताया कि राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> के निर्देश पर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू किया गया है। उनके मुताबिक यह अब तक के सबसे सटीक और जटिल हवाई अभियानों में से एक है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी हितों की रक्षा करना और ईरान की दशकों पुरानी शत्रुता का जवाब देना है।हेगसेथ ने कहा कि सैन्य रणनीति पहले से सार्वजनिक करना समझदारी नहीं होती। “दुश्मन को यह नहीं पता होना चाहिए कि अमेरिका कब और क्या कदम उठाएगा,” उन्होंने कहा।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>ग्राउंड ऑपरेशन पर क्या बोले?</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका भविष्य में ईरान में जमीनी सेना भेज सकता है, तो उन्होंने साफ किया कि जरूरत पड़ने पर ऐसा कदम उठाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि अमेरिका बिना सोचे-समझे कोई कार्रवाई नहीं करेगा।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>ईरानी जवाबी हमले और अमेरिकी सैनिकों की मौत</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान और उसके सहयोगी समूहों ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में चार अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>47 साल की दुश्मनी का जिक्र</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">हेगसेथ ने कहा कि तेहरान का शासन पिछले 47 वर्षों से अमेरिका के खिलाफ “अप्रत्यक्ष युद्ध” करता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Islamic Revolutionary Guard Corps</span></span> और उसकी कुद्स फोर्स ने विभिन्न हमलों को समर्थन दिया।उन्होंने यह भी कहा कि “हमने यह युद्ध शुरू नहीं किया, लेकिन हम इसे खत्म करेंगे।” उनके अनुसार, यह सरकार बदलने की औपचारिक लड़ाई नहीं है, बल्कि अमेरिकी नागरिकों और हितों की सुरक्षा का सवाल है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘हम जीतने के लिए लड़ते हैं’</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">रक्षा सचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका “जीतने के लिए लड़ता है” और लंबे समय तक अनिश्चित संघर्ष में उलझने का इरादा नहीं रखता। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी अमेरिकियों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिका बिना हिचकिचाहट जवाब देगा।मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष सीमित हवाई कार्रवाई तक रहेगा या जमीनी अभियान का रूप ले सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 22:05:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bangladesh Election 2026: ऑब्जर्वर लिस्ट से भारत गायब, चीन-पाकिस्तान की मौजूदगी पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><br />बांग्लादेश में 2026 में होने वाले आम चुनावों को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों (International Observers) की सूची ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस सूची में पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन भारत का नाम नदारद है। भारत-बांग्लादेश के लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों के बावजूद यह अनुपस्थिति कूटनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की ओर से जारी सूची के अनुसार, पाकिस्तान से 8, चीन से 3, तुर्किए से 13, श्रीलंका से 11 और जापान, दक्षिण कोरिया, रूस सहित कई देशों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169276/india-missing-from-bangladesh-election-2026-observer-list-questions-raised"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/bangladesh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><br />बांग्लादेश में 2026 में होने वाले आम चुनावों को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों (International Observers) की सूची ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस सूची में पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन भारत का नाम नदारद है। भारत-बांग्लादेश के लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों के बावजूद यह अनुपस्थिति कूटनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की ओर से जारी सूची के अनुसार, पाकिस्तान से 8, चीन से 3, तुर्किए से 13, श्रीलंका से 11 और जापान, दक्षिण कोरिया, रूस सहित कई देशों के प्रतिनिधि ढाका पहुंच रहे हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ का एक विशेष मिशन भी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करेगा। हालांकि, पड़ोसी और प्रमुख सहयोगी देश भारत को इस सूची में जगह नहीं मिली है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>यूनुस सरकार के बाद बदले रिश्ते?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">शेख हसीना सरकार के पतन के बाद गठित यूनुस सरकार के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव देखा गया है। सीमा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग के बावजूद हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने रिश्तों में ठंडापन ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत को ऑब्जर्वर सूची से बाहर रखना इसी बदले हुए समीकरण का संकेत हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>चीन-पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सूची में पाकिस्तान और चीन की मौजूदगी को केवल औपचारिकता नहीं माना जा रहा है। चीन बांग्लादेश का बड़ा निवेशक है, जबकि पाकिस्तान की भागीदारी को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के नजरिए से देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम ढाका की विदेश नीति में संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>राजनीतिक तटस्थता दिखाने की कोशिश?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि पूर्व सरकार भारत के करीब थी। विपक्ष अक्सर “भारत-समर्थक” होने का मुद्दा उठाता रहा है। ऐसे माहौल में भारत को पर्यवेक्षक सूची से बाहर रखना सरकार की ओर से चुनाव प्रक्रिया को “भारत-प्रभाव से मुक्त” दिखाने का प्रयास माना जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कूटनीतिक संकेत या संयोग?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फैसला महज संयोग नहीं हो सकता। दक्षिण एशिया में हर कूटनीतिक कदम का एक संदेश होता है। भारत की अनुपस्थिति यह संकेत दे सकती है कि ढाका अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्वतंत्र पहचान और संतुलित नीति को मजबूत करना चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि भारत को सूची से बाहर रखने पर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया आएगी या नहीं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बयानों से ही यह तय होगा कि यह कदम रणनीतिक बदलाव है या केवल एक अस्थायी राजनीतिक फैसला।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इतना तय है कि बांग्लादेश का यह चुनाव केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा भी तय कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 22:22:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बकाया भुगतान को लेकर अडानी ग्रुप का बांग्लादेश को पत्र, बिजली संकट की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका/नई दिल्ली।</strong></p><p style="text-align:justify;"><br />अडानी ग्रुप और बांग्लादेश सरकार के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अडानी पावर लिमिटेड ने बांग्लादेश के पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को करीब <strong>112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक)</strong> के बकाया भुगतान को लेकर चेतावनी भरा पत्र भेजा है। कंपनी ने कहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो देश में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</p><p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 जनवरी को अडानी पावर के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग ने पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर बकाया राशि के तत्काल भुगतान की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168714/adani-groups-letter-to-bangladesh-regarding-payment-of-dues-warning"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/adani.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका/नई दिल्ली।</strong></p><p style="text-align:justify;"><br />अडानी ग्रुप और बांग्लादेश सरकार के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अडानी पावर लिमिटेड ने बांग्लादेश के पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को करीब <strong>112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक)</strong> के बकाया भुगतान को लेकर चेतावनी भरा पत्र भेजा है। कंपनी ने कहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो देश में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</p><p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 जनवरी को अडानी पावर के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग ने पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर बकाया राशि के तत्काल भुगतान की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बिजली संयंत्र के नियमित संचालन के लिए इस राशि का भुगतान अत्यंत आवश्यक है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>बकाया राशि का विवरण</strong></h3><p style="text-align:justify;">पत्र के मुताबिक, कुल बकाया रकम में</p><ul style="text-align:justify;"><li><p><strong>53.2 मिलियन डॉलर</strong> जून तक का पुराना बकाया,</p></li><li><p>जबकि <strong>59.6 मिलियन डॉलर</strong> अक्टूबर तक की बिजली आपूर्ति का भुगतान शामिल है।</p></li></ul><p style="text-align:justify;">कंपनी का कहना है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद अब तक पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>बढ़ता आर्थिक दबाव</strong></h3><p style="text-align:justify;">अडानी ग्रुप ने पत्र में यह भी कहा है कि बढ़ते बकाये के कारण बिजली उत्पादन, रखरखाव और सहयोगी कंपनियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। यदि भुगतान में और देरी हुई, तो बिजली आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।</p><p style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार, आर्थिक संकट की स्थिति में बिजली उत्पादन और वितरण प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>पहले भी हो चुका है विवाद</strong></h3><p style="text-align:justify;">यह विवाद पहले भी सामने आ चुका है। नवंबर 2025 में अडानी ग्रुप ने भुगतान न मिलने पर बिजली सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने करीब <strong>100 मिलियन डॉलर</strong> का भुगतान कर स्थिति को संभाला था।</p><p style="text-align:justify;">हालांकि, दिसंबर के बाद से फिर बकाया बढ़ने लगा और पुराने भुगतान का पूरा निपटारा नहीं हो सका। अब एक बार फिर बिजली संकट की आशंका गहराने लगी है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव से पहले बढ़ी चिंता</strong></h3><p style="text-align:justify;">यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब बांग्लादेश में आगामी <strong>12 फरवरी को संसदीय चुनाव</strong> होने हैं। देश पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। चुनावी माहौल में बिजली संकट की आशंका ने सरकार की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।</p><p style="text-align:justify;">वर्तमान में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार सत्ता में है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध के चलते राजनीतिक हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका</strong></h3><p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विवाद का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो इसका नकारात्मक असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और निवेश पर पड़ सकता है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन और व्यापार गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।</p><p style="text-align:justify;">साथ ही, यह विवाद भारत-बांग्लादेश के व्यापारिक और ऊर्जा सहयोग पर भी असर डाल सकता है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार</strong></h3><p style="text-align:justify;">फिलहाल बांग्लादेश सरकार और पावर डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही अडानी ग्रुप से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करेगी, ताकि चुनाव से पहले किसी बड़े संकट से बचा जा सके।</p><hr /><p style="text-align:justify;">अगर आप चाहें, तो मैं इसे आपके अखबार के नाम के साथ <strong>फ्रंट पेज लीड</strong>, <strong>संक्षिप्त कॉलम</strong>, या <strong>ब्रेकिंग न्यूज फॉर्मेट</strong> में भी तैयार कर दूँ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 19:55:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सरकार ने तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग फर्म सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज की सुरक्षा मंजूरी की रद्द </title>
                                    <description><![CDATA[नवंबर 2022 में सुरक्षा मंजूरी को किया गया था अनुमोदित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151943/government-canceled-security-of-t%C3%BCrkiyes-ground-handling-firm-celebi-airport"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/202505153404231.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरकार ने तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग फर्म सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सुरक्षा मंजूरी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। एक आदेश में, नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में लिया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नवंबर 2022 में सुरक्षा मंजूरी को किया गया था अनुमोदित</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इस कंपनी के लिए सुरक्षा मंजूरी को नवंबर 2022 में BCAS महानिदेशक द्वारा अनुमोदित किया गया था। सेलेबी एविएशन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, गोवा, कोचीन और कन्नूर सहित नौ शहरों के हवाई अड्डों पर यात्री हैंडलिंग, उड़ान संचालन, कार्गो और डाक सेवाओं के साथ-साथ एयरोब्रिज और वेयरहाउस सेवाओं का प्रबंधन प्रदान करता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>IGI ने सेलेबी संस्थाओं के साथ अपने सहयोग को औपचारिक रूप से कर दिया समाप्त </strong></p>
<p style="text-align:justify;">BCAS के निर्देश के अनुपालन में, दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (DIAL) ने इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर ग्राउंड हैंडलिंग और कार्गो संचालन के लिए जिम्मेदार सेलेबी संस्थाओं के साथ अपने सहयोग को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है। निरंतरता और परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, DIAL मौजूदा ग्राउंड हैंडलिंग सेवा प्रदाताओं – AISATS और बर्ड ग्रुप के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये कर्मचारी अपनी मौजूदा शर्तों और रोजगार के नियमों के तहत काम करना रखेंगे जारी </strong></p>
<p style="text-align:justify;">कार्गो संचालन के मामले में, DIAL बिना किसी रुकावट के कार्गो संचालन सुनिश्चित करने के लिए पूर्व-स्वीकृत कार्गो हैंडलर में से किसी एक को नियुक्त करने की दिशा में काम कर रहा है। DIAL ने यह भी आश्वासन दिया है कि IGI एयरपोर्ट पर कार्गो और ग्राउंड हैंडलिंग सेवाओं के लिए वर्तमान में सेलेबी संस्थाओं के रोल पर मौजूद सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नए नियोक्ता के पास स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ये कर्मचारी अपनी मौजूदा शर्तों और रोजगार के नियमों के तहत काम करना जारी रखेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/151943/government-canceled-security-of-t%C3%BCrkiyes-ground-handling-firm-celebi-airport</link>
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                <pubDate>Fri, 16 May 2025 22:21:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मालदीव्स के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) चाहता है भारत : व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मालदीव ने शनिवार को कहा कि भारत ने दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के प्रयास शुरू कर दिए हैं और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विचार-विमर्श जारी है। आर्थिक विकास और व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘वे (भारत) चाहते हैं कि साफ्टा (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौता) के अलावा मालदीव के साथ अलग से एक मुक्त व्यापार समझौता हो।</p>
<p>सईद ने कहा कि मालदीव के राष्ट्रपति ने सभी देशों को यह अवसर दिया है और सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक देशों के साथ समझौते करना है, ताकि व्यापार गतिविधियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141597/india-trade-minister-mohammad-sayeed-wants-free-trade-agreement-fta"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/maldives_large_1205_153.webp" alt=""></a><br /><p>मालदीव ने शनिवार को कहा कि भारत ने दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के प्रयास शुरू कर दिए हैं और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विचार-विमर्श जारी है। आर्थिक विकास और व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘वे (भारत) चाहते हैं कि साफ्टा (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौता) के अलावा मालदीव के साथ अलग से एक मुक्त व्यापार समझौता हो।</p>
<p>सईद ने कहा कि मालदीव के राष्ट्रपति ने सभी देशों को यह अवसर दिया है और सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक देशों के साथ समझौते करना है, ताकि व्यापार गतिविधियों में सुगमता प्रदान की जा सके। मालदीव के साथ एफटीए की मांग को लेकर भारत का कथित प्रयास पिछले साल नवंबर से दोनों देशों के बीच चल रहे राजनयिक विवाद की पृष्ठभूमि में आया है। अपने चीन समर्थक रुख के कारण चर्चित राष्ट्रपति मुइज्जू ने पिछले साल नवम्बर में पद की शपथ ली थी।</p>
<p>भारत और मालदीव के बीच 1981 का व्यापार समझौता आवश्यक वस्तुओं के निर्यात का प्रावधान करता है। भारतीय उच्चायोग के रिकॉर्ड के अनुसार, मामूली शुरुआत से बढ़ते हुए, भारत-मालदीव द्विपक्षीय व्यापार 2021 में पहली बार 30 करोड़ डॉलर डालर को पार कर गया था, जो 2022 में 50 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/141597/india-trade-minister-mohammad-sayeed-wants-free-trade-agreement-fta</link>
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                <pubDate>Sun, 26 May 2024 15:49:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाटो और रूस के बीच टकराव से क्या छिड़ सकता है तीसरा विश्व युद्ध </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International:</strong> रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिम को चेतावनी दी कि उनके देश और अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो सैन्य गठबंधन के बीच सीधे संघर्ष का मतलब होगा कि ग्रह तीसरे विश्व युद्ध से एक कदम दूर है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि शायद ही कोई ऐसा परिदृश्य चाहता हो।नाटो और रूस के बीच टकराव होता है तो तीसरा विश्व युद्ध छिड़ सकता है। इसको लेकर लगातार चर्चा हो रही है कि नाटो और रूस के बीच टकराव के मोर्च को ही यूक्रेन के अंदर रूस के जंग की बड़ी वजह बताया जाता रहा है।</p>
<p>साथ ही युद्ध करने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139517/could-a-conflict-between-nato-and-russia-lead-to-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/putin_large_1224_19.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International:</strong> रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिम को चेतावनी दी कि उनके देश और अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो सैन्य गठबंधन के बीच सीधे संघर्ष का मतलब होगा कि ग्रह तीसरे विश्व युद्ध से एक कदम दूर है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि शायद ही कोई ऐसा परिदृश्य चाहता हो।नाटो और रूस के बीच टकराव होता है तो तीसरा विश्व युद्ध छिड़ सकता है। इसको लेकर लगातार चर्चा हो रही है कि नाटो और रूस के बीच टकराव के मोर्च को ही यूक्रेन के अंदर रूस के जंग की बड़ी वजह बताया जाता रहा है।</p>
<p>साथ ही युद्ध करने वालों की भी पहचान कर गद्दाऱों को नहीं बख्शने की बात कही गई है। इसके साथ ही पुतिन ने हथियारों की रेस बढ़ने के संकेत दिए हैं। पुतिन की इस वॉर्निंग के साथ ही इस बात की चिंताएं भी बढ़ गई हैं, जिस तरीके से नाटो का दायरा भी बढ़ा है। फिनलैंड और स्वीडन इसमें शामिल हुए हैं। </p>
<p>15-17 मार्च को रूसी राष्ट्रपति चुनाव से पहले, यूक्रेन ने रूस के खिलाफ हमले तेज कर दिए, सीमावर्ती क्षेत्रों पर गोलाबारी की और यहां तक ​​कि रूस की सीमाओं को भेदने की कोशिश करने के लिए प्रॉक्सी का उपयोग भी किया। यह पूछे जाने पर कि क्या वह यूक्रेन के खार्किव क्षेत्र को लेना आवश्यक मानते हैं, पुतिन ने कहा कि यदि हमले जारी रहे, तो रूस रूसी क्षेत्र की रक्षा के लिए अधिक यूक्रेनी क्षेत्र से एक बफर जोन बनाएगा।</p>
<p>पुतिन ने कहा कि मैं इस बात से इनकार नहीं करता कि, आज होने वाली दुखद घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, हमें किसी बिंदु पर, जब हम उचित समझेंगे, कीव शासन के तहत आज के क्षेत्रों में एक निश्चित 'स्वच्छता क्षेत्र' बनाने के लिए मजबूर किया जाएगा।</p>
<p>पुतिन ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण का आदेश दिया, जिससे पूर्वी यूक्रेन में एक तरफ यूक्रेनी सेना और दूसरी तरफ रूसी समर्थक यूक्रेनियन और रूसी प्रॉक्सी के बीच आठ साल के संघर्ष के बाद एक बड़ा यूरोपीय युद्ध शुरू हो गया। पुतिन ने कहा कि वह चाहते हैं कि मैक्रॉन यूक्रेन में युद्ध को बढ़ाने की कोशिश करना बंद कर दें, लेकिन शांति स्थापित करने में भूमिका निभाएं: ऐसा लगता है कि फ्रांस एक भूमिका निभा सकता है। अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Mar 2024 12:59:04 +0530</pubDate>
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                <title>इजराइल-हमास की जंग को लेकर अमेरिका के बदले राग </title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राज्य अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक गाजा युद्ध में मानवीय विराम के लिए पश्चिम एशियाई देश पर दबाव डालने के लिए इज़राइल में हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन ने एक महीने में पश्चिम एशिया की अपनी दूसरी यात्रा पर 3 नवंबर को तेल अवीव में इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। उनकी यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा हाल ही में कहे जाने के बाद हो रही है कि हमास के साथ इजरायल के युद्ध में मानवीय विराम होना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने मिनेसोटा में एक धन संचयन कार्यक्रम में कहा कि एक विराम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136664/americas-revenge-on-israel-hamas-war"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/israel-hamas-war_large_1237_19.webp" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राज्य अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक गाजा युद्ध में मानवीय विराम के लिए पश्चिम एशियाई देश पर दबाव डालने के लिए इज़राइल में हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन ने एक महीने में पश्चिम एशिया की अपनी दूसरी यात्रा पर 3 नवंबर को तेल अवीव में इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। उनकी यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा हाल ही में कहे जाने के बाद हो रही है कि हमास के साथ इजरायल के युद्ध में मानवीय विराम होना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने मिनेसोटा में एक धन संचयन कार्यक्रम में कहा कि एक विराम का मतलब कैदियों को बाहर निकालने के लिए समय देना है।</p>
<p>इज़राइल की अपनी यात्रा से पहले ब्लिंकन ने कहा कि वह संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदमों पर चर्चा करेंगे। एनबीसी न्यूज ने उनके हवाले से कहा कि हमने हाल के दिनों में देखा है कि फिलिस्तीनी नागरिकों को इस कार्रवाई का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है और यह महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राज्य अमेरिका यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जाए। ब्लिंकन इज़राइल को लड़ाई में विराम के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं, इजरायली सैनिकों ने गाजा शहर को घेर लिया है, जिसे पश्चिम एशियाई राष्ट्र हमास के सैन्य बुनियादी ढांचे का केंद्र कहते हैं। इसके अलावा, युद्ध के शुरुआती दिनों में इज़राइल को अपना निर्बाध समर्थन देने के बाद, अमेरिका ने अब अपना सुर क्यों बदल लिया है? </p>
<p>7 अक्टूबर को पश्चिम एशियाई राष्ट्र पर हमास के आश्चर्यजनक हमले के बाद अमेरिका ने इज़राइल के अपनी रक्षा के अधिकार पर जोर दिया। बाइडेन ने उस समय कहा कि हम इज़राइल के साथ खड़े हैं। और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इजराइल के पास अपने नागरिकों की देखभाल करने, अपनी रक्षा करने और इस हमले का जवाब देने के लिए वह सब कुछ है जो उसे चाहिए। दूसरी ओर, संघर्ष में फिलिस्तीनी नागरिकों की रक्षा के लिए उनका आह्वान मौन था।</p>
<p>अमेरिका ने यह भी कहा कि वह इज़राइल को अपना सैन्य समर्थन बढ़ा रहा है, यहूदी राष्ट्र को वायु रक्षा क्षमताएं और युद्ध सामग्री प्रदान कर रहा है। पश्चिम एशिया में अन्य देशों या उग्रवादी समूहों को युद्ध में शामिल होने से रोकने के लिए अमेरिका ने गाइडेड-मिसाइल क्रूजर से लैस एक विमानवाहक पोत को इज़राइल के निकट जल क्षेत्र में भेजा। जैसे ही इज़राइल द्वारा लगातार जवाबी हवाई हमलों के कारण गाजा में हताहतों की संख्या बढ़ी, अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने मारे गए फिलिस्तीनियों की कथित संख्या पर भी संदेह जताया।</p>
<p>अरब अमेरिकी मतदाताओं ने इज़राइल के लिए बिडेन के निरंकुश समर्थन की आलोचना की है। फॉरेन पॉलिसी ने एक हालिया सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि बिडेन को 2020 में लगभग 59 प्रतिशत अरब अमेरिकियों का समर्थन मिला, जो अब घटकर सिर्फ 17 प्रतिशत रह गया है। लेकिन इस पर बाद में और अधिक जानकारी। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के दक्षिण फ्लोरिडा में रब्बी और यहूदी नेता समुदाय के सदस्यों को इजराइल का भरपूर समर्थन करने के लिए सांसदों को बुलाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, क्योंकि यह अपना आक्रामक रुख बढ़ा रहा है।</p>
<p>पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रम्प ने 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में फ्लोरिडा में जीत हासिल की। एपी वोटकास्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर, 30 प्रतिशत यहूदी मतदाताओं ने ट्रम्प का समर्थन किया, फ्लोरिडा के लगभग 43 प्रतिशत यहूदी मतदाताओं ने उनका समर्थन किया। एपी के अनुसार कि अगर फ्लोरिडा को एक बारहमासी प्रतिस्पर्धी राज्य के रूप में अपनी स्थिति फिर से हासिल करनी है, तो यहूदी मतदाता बिडेन के इज़राइल-हमास युद्ध से निपटने को किस तरह से देखते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा।</p>
<p>2020 में बाइडेन की व्हाइट हाउस जीत सुनिश्चित करने वाले प्रमुख राज्यों में से एक था। 2024 के राष्ट्रपति चुनावों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भी एक चुनावी चिंता का विषय है। मिशिगन में डेमोक्रेट्स ने व्हाइट हाउस को चेतावनी दी है कि इजरायल-हमास युद्ध से निपटने के कारण बिडेन महत्वपूर्ण अरब अमेरिकी समुदाय के भीतर उनके समर्थन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 12:47:12 +0530</pubDate>
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