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                <title>protest - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>विवाहिता की मौत पर अंतिम संस्कार के दौरान हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[दो बार बुझाई गई चिता की आग, तीसरी बार में हुआ अंतिम संस्कार ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173320/uproar-during-funeral-over-death-of-married-woman"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1003404172.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लंभुआ, सुलतानपुर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोतवाली चांदा क्षेत्र के शुकुल उमरी गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में विवाहिता की मौत के बाद शनिवार को अंतिम संस्कार के दौरान जमकर हंगामा हो गया। मायके पक्ष के लोगों ने हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज होने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मृतका की पहचान कल्पना के रूप में हुई है। मायके पक्ष ने उसके पति रामबली धुरिया और देवर पर हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को शव गांव पहुंचा, जहां से परिजन अंतिम संस्कार के लिए धोपाप घाट ले गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घाट पर पहुंचने के बाद मायके पक्ष के लोगों ने अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया। मृतका के भाई बृजेश ने आरोप लगाया कि उनकी बहन ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि पति और देवर ने मिलकर उसकी हत्या की है। उन्होंने कहा कि जब तक आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होगा, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूचना मिलने पर चांदा थाना प्रभारी अमित मिश्रा मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस का कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की बात सामने आई है, लेकिन मायके पक्ष इस बात को मानने को तैयार नहीं था। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन मौजूद रहे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालात बिगड़ते देख क्षेत्राधिकारी ऋतिक कपूर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बातचीत कर उनकी तहरीर पर एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान अंतिम संस्कार को लेकर विवाद भी देखने को मिला। मृतका का बड़ा बेटा दाह संस्कार के पक्ष में था, जबकि मायके पक्ष शव को दफनाने की बात पर अड़ा रहा। आरोप है कि कुछ लोगों ने जलती चिता पर पानी डालकर उसे बुझाने की भी कोशिश की, जिससे तीन बार चिता जलाने और बुझाने की स्थिति बनी।</div>
<div style="text-align:justify;">आखिरकार पुलिस की मौजूदगी और समझाइश के बाद मृतका के बड़े बेटे ने मुखाग्नि दी, जिसके बाद अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 22:05:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में कांग्रेस नेता की प्रॉपर्टी पर चला बुलडोजर, स्थिति बनी तनावपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana News: हरियाणा में गुरुग्राम के सेक्टर-68 स्थित परीना मी कासा (Pareena Mi Casa) सोसाइटी के पास प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की टीम ने प्रस्तावित सड़क के रास्ते में आ रहे अवैध निर्माणों को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की, जिसका स्थानीय निवासियों ने कड़ा विरोध किया। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेश यादव के करीब 400 गज के मकान समेत एक दर्जन से अधिक प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चलाया गया।</p>
<p>राजेश यादव की प्रॉपर्टी पर इससे पहले भी पिछले साल कार्रवाई हुई थी, जिसमें करीब आठ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165977/haryana-bulldozer-runs-on-congress-leaders-property-in-haryana-situation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/haryana-news---2026-01-14t141138.621.jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana News: हरियाणा में गुरुग्राम के सेक्टर-68 स्थित परीना मी कासा (Pareena Mi Casa) सोसाइटी के पास प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की टीम ने प्रस्तावित सड़क के रास्ते में आ रहे अवैध निर्माणों को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की, जिसका स्थानीय निवासियों ने कड़ा विरोध किया। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेश यादव के करीब 400 गज के मकान समेत एक दर्जन से अधिक प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चलाया गया।</p>
<p>राजेश यादव की प्रॉपर्टी पर इससे पहले भी पिछले साल कार्रवाई हुई थी, जिसमें करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से बनी इमारत को ध्वस्त कर दिया गया था। इस बार फिर कार्रवाई होने पर उन्होंने आरोप लगाया कि यह उनका दादालाई मकान है और इसे गिराने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि एक बिल्डर के दबाव में प्रशासन आम लोगों के मकान गिरा रहा है।</p>
<h5><strong>भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर हैं राजेश यादव</strong></h5>
<p>कांग्रेस नेता राजेश यादव लंबे समय से भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर रहे हैं। वे स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक जनसमस्याओं को उठाते रहे हैं, जिससे उनके बयान अक्सर सत्तारूढ़ दल और प्रशासन को असहज करते हैं। समर्थकों का आरोप है कि इसी कारण वे अधिकारियों के निशाने पर रहते हैं।</p>
<h5><strong>लोगों ने रोका बुलडोजर</strong></h5>
<p>जैसे ही प्रशासन की टीम प्रस्तावित सड़क के मार्ग में आने वाले निर्माणों को गिराने पहुंची, स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने बुलडोजर के सामने खड़े होकर रास्ता रोक दिया और कार्रवाई को रोकने की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने लोगों को खदेड़कर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन तनाव बना रहा।</p>
<h5><strong>सामान निकालने का भी मौका नहीं देने का आरोप</strong></h5>
<p>प्रभावित लोगों का आरोप है कि एचएसवीपी की टीम ने उन्हें अपने घरों और दुकानों से सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया। परीना मी कासा सोसाइटी के पास से सोहना रोड तक प्रस्तावित सड़क के लिए अवैध स्ट्रक्चर हटाने की कार्रवाई इतनी तेजी से की गई कि लोग हतप्रभ रह गए।</p>
<h5><strong>सोहना रोड संपर्क मार्ग के विस्तार की योजना</strong></h5>
<p>प्रशासन के मुताबिक जिस रास्ते से अतिक्रमण हटाया जा रहा है, वह सीधे सोहना रोड से जुड़ता है। इस सड़क के विस्तार से ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और आवागमन सुगम बनेगा। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही बुलडोजर मौके पर पहुंचे, लोगों ने पहले मुआवजा देने की मांग करते हुए विरोध शुरू कर दिया।</p>
<h5><strong>मुआवजे को लेकर विवाद</strong></h5>
<p>स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिन जमीनों पर पहले मुआवजा दिया जा चुका है, वहां कोई निर्माण नहीं था, जबकि जिन लोगों ने अपनी जमीन पर मकान और दुकानें बना रखी हैं, उन्हें अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। इसी मांग को लेकर लोग कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।</p>
<p>वहीं अधिकारियों का कहना है कि मुआवजे की राशि अदालत में जमा कर दी गई है और प्रभावित लोग वहां से इसे प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे पहले भी नोटिस जारी किए गए थे।</p>
<h5><strong>मौके पर तैनात रहा पुलिस बल</strong></h5>
<p>फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग सड़क पर जमा होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटा है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए एसएचओ समेत पुलिस बल मौके पर तैनात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 14:11:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अधिवक्ता सुरक्षा को लेकर गरजे वकील, किया प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम को लेकर सोमवार को यहां पट्टी तहसील के अधिवक्ताओं ने हुंकार भरी। आल इण्डिया रूरल बार एसोसिएसन के बैनर तले तहसील परिसर में लामबंद हुए सैकड़ो अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानप्रकाश शुक्ल व राष्ट्रीय महासचिव अनिल तिवारी महेश एवं तहसील बार अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह की संयुक्त अगुवाई में विधयेक के समर्थन में नारेबाजी की। इसके पहले तहसील सभागार मे हुई आमसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने कहा कि अधिवक्ता सुरक्षा कानून को लेकर प्रदेश भर में हस्ताक्षर अभियान तेजी से जारी है। उन्होने साथी अधिवक्ताओ को बताया कि अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159729/lawyers-protested-over-advocate-security"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251110-wa0198(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम को लेकर सोमवार को यहां पट्टी तहसील के अधिवक्ताओं ने हुंकार भरी। आल इण्डिया रूरल बार एसोसिएसन के बैनर तले तहसील परिसर में लामबंद हुए सैकड़ो अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानप्रकाश शुक्ल व राष्ट्रीय महासचिव अनिल तिवारी महेश एवं तहसील बार अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह की संयुक्त अगुवाई में विधयेक के समर्थन में नारेबाजी की। इसके पहले तहसील सभागार मे हुई आमसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने कहा कि अधिवक्ता सुरक्षा कानून को लेकर प्रदेश भर में हस्ताक्षर अभियान तेजी से जारी है। उन्होने साथी अधिवक्ताओ को बताया कि अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन को आगामी दिसंबर माह में संसद सत्र के दौरान राष्ट्रपति को साैंपा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय महासचिव अनिल तिवारी महेश ने संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली में रूरल बार एसोसिएसन के होने वाले प्रदर्शन को लेकर जानकारियां प्रदान की। वही अनिल तिवारी महेश ने उत्तर प्रदेश में बार कौंसिल के चुनाव मे अधिवक्ताओ की मांग के अनुरूप सभी पंजीकृत अधिवक्ताओं को मतदान का अधिकार प्रदान करने पर जोर दिया। सभा की अध्यक्षता तहसील बार अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह व संचालन महामंत्री प्रमोद कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में आंदोलन को लेकर संघर्ष करने वाले अधिवक्ताओं को मान पत्र भी प्रदान किया गया। इस मौके पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष के0 रामगौतम, कनिष्ठ उपाध्यक्ष महेश श्रीवास्तव, अशोक श्रीवास्तव, शिवशंकर सिंह, इंद्र प्रताप तिवारी, अजय श्रीवास्तव, अरविंद पाण्डेय, देशराज तिवारी, राकेश श्रीवास्तव, अशोक सिंह, विकास तिवारी, मान सिंह, लोकेश सिंह, विवेक पाठक, संजय मौर्या आदि अधिवक्ता रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Nov 2025 18:37:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीवन पर सवाल बन रही वायु की खराब गुणवत्ता </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">  राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब स्थिति कितनी भयावह हो चुकी है, इसका अंदाजा इस से लगाया जा सकता है कि लोगों को मजबूरी में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। रविवार को इंडिया गेट पर जब नागरिक 'साफ हवा' की मांग लेकर सड़‌कों पर उतरे, तो यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, यह उस शहर की पुकार थी, जो हर साल अपने बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को प्रदूषण की भेंट चढ़ते देख रहा है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटा दिया, लेकिन सवाल यह है कि सरकारें आखिर</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आईटीओ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159601/poor-air-quality-is-putting-life-in-question"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"> राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब स्थिति कितनी भयावह हो चुकी है, इसका अंदाजा इस से लगाया जा सकता है कि लोगों को मजबूरी में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। रविवार को इंडिया गेट पर जब नागरिक 'साफ हवा' की मांग लेकर सड़‌कों पर उतरे, तो यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, यह उस शहर की पुकार थी, जो हर साल अपने बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को प्रदूषण की भेंट चढ़ते देख रहा है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटा दिया, लेकिन सवाल यह है कि सरकारें आखिर कब तक आंखें मूंदे रहेंगी? केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुंच चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आईटीओ जैसे इलाकों में यह 498 तक दर्ज किया गया है, जो 'गंभीर' श्रेणी की सीमा से भी आगे है। वजीरपुर, बवाना, विवेक विहार, रोहिणी और नेहरू नगर में हालात लगभग समान हैं। एनसीआर के शहरों में भी स्थिति बेहतर नहीं है, नोएडा 391, गाजियाबाद 387, गुरुग्राम 252 पर है। इसका मतलब यह है कि दिल्ली-एनसीआर अब गैस चैंबर में तब्दील हो चुका है। इसके बावजूद सरकार ने अब तक ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तीसरे चरण की पाबंदियां लागू नहीं की हैं, यानी निर्माण कार्य, ट्रक प्रवेश और डीजल जेनरेटरों पर प्रतिबंध अब तक टाले जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ पर्यावरणीय संकट नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की आपदा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण अब सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि यह कण शरीर में प्रवेश कर खून के जरिए लीवर, किडनी और अन्य अंगों तक पहुंच रहे हैं। जिन लोगों को पहले से हृदय, अस्थमा, किडनी या लिवर की बीमारी है, उनके लिए यह हवा मौत का फरमान साबित हो सकती है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, अस्थमा, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज के केस तेजी से बढ़े हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में न्यूरो डेवलपमेंट डिसेबिलिटी जैसी समस्याएं भी अब आम होती जा रही हैं। इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के अनुसार, साल 2023 में दिल्ली में करीब 17,188 लोगों की मौत प्रदूषित हवा के कारण हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यानी हर सात में से एक व्यक्ति की मौत का कारण अब वायु प्रदूषण है। यह आंकड़ा 2018 के मुकाबले कहीं अधिक है, जब यह संख्या 15,786 थी। इतना ही नहीं, हाई ब्लड प्रेशर से 14,874 मौतें और मधुमेह (हाई फास्टिंग प्लाज्मा ग्लुकोज) से 10,653 मौतें दर्ज की गई। लेकिन प्रदूषण से होने वाली मौतें इन दोनों से भी ज्यादा हैं, बताता है कि यह सिर्फ एक पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि एक जनस्वास्थ्य संकट बन चुकी है। ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र का कहना है कि वायु प्रदूषण अब दिल्ली के लिए उतना ही बड़ा खतरा है जितना किसी महामारी का प्रकोप। जब तक विज्ञान-आधारित नीतियां लागू नहीं होंगी, तब तक दिल्ली एक गैस चेंबर बनी रहेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतने भयावह हालात के बावजूद सरकार की ओर से ठोस कदमों की कमी दिखती है। जनता के धैर्य की सीमा अब खत्म हो रही है। इसलिए रविवार को जब सैकड़ों नागरिक इंडिया गेट पर इकट्ठा हुए, तो यह केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष था। लोगों ने नारे लगाए 'हमें सांस दो', 'साफ हवा हमारा अधिकार है', 'जीना है तो कुछ करना होगा।' दरअसल दिल्ली का प्रदूषण कई स्रोतों से आता है, पराली जलना, वाहन उत्सर्जन, धूल, औद्योगिक धुआं और निर्माण कार्य। पराली पर हर साल वही बहस दोहराई जाती है, लेकिन व्यावहारिक समाधान अब तक नहीं निकला। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, ई-वाहनों को प्रोत्साहन देने और निर्माण स्थलों पर सख्त निगरानी जैसे कदम अभी भी आधे अधूरे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकारें केंद्र और राज्य में एक-दूसरे पर आरोप लगाती रहती हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि दिल्ली की हवा किसी राजनीतिक सीमा को नहीं मानती। यह पूरे एनसीआर की समस्या है और इसका हल भी सामूहिक जिम्मेदारी से ही निकलेगा। यह समय 'कमेटी बनाने' का नहीं, बल्कि 'कार्रवाई करने' का है। स्कूल बंद करने या दफ्तरों को 'वर्क फ्रॉम होम' पर भेजने से समस्या अस्थायी रूप से टल सकती है, लेकिन खत्म नहीं होती। सरकार को दीर्घकालिक कदम उठाने होंगे, जैसे कि सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण के लिए एयर-कलिटी एक्शन प्लान को सफिय करना, निर्माण स्थलों पर स्वचालित मॉनिटरिंग, डीजल वाहनों पर सख्त नियंत्रण, और पराली प्रबंधन के लिए किसानों को प्रोत्साहन देना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साफ हवा केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानव अधिकार का सवाल है। जब दिल्ली के नागरिकों को हर सांस के साथ अपने स्वास्थ्य की कीमत चुकानी पड़ रही है, तो यह लोकतंत्र के लिए भी शर्म की बात है। दिल्ली की हवा अब एक अदृश्य हत्यारा बन चुकी है, जो धीरे-धीरे, चुपचाप हर घर में दस्तक दे रही है। डॉक्टर, रिसर्चर और पर्यावरणविद् सभी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले सालों में यह शहर रहने लायक नहीं बचेगा। सरकारों को समझना होगा कि जनता की यह लड़ाई सिर्फ एक दिन की 'प्रोटेस्ट फोटो' नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। आज अगर हम सांस नहीं ले पा रहे, तो कल शायद बोल भी न पाएं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हकिकत यह है कि सरकारें बदलती रहें, नीतिर्या बनती रहें, लेकिन जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक जवाबदेही नहीं होगी, तब तक दिल्ली का आसमान धुएं में डूबा रहेगा। अब वक्त है कि' स्वच्छ हवा' को एक मौलिक अधिकार की तरह लागू किया जाए क्योंकि अगर सांस ही नहीं बची, तो शासन और राजनीति दोनों बेअर्थ हैं। दिल्ली को बचाना अब सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक आपातकालीन जिम्मेदारी है, और यह जिम्मेदारी हर नागरिक, हर नेता, हर संस्थान की है। दिल्ली की हवा अब सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि जीवन-मृत्यु का प्रश्न बन चुकी है। यह लोकतंत्र का दर्पण है, जो हमें बताता है कि अगर नागरिक अपने ही शहर में सांस लेने को मजबूर हों, तो विकास का सारा शोर बेमानी है। इसलिए उम्मीद यही की जानी चाहिए कि अब केंद्र और राज्य मिलकर दिल्ली में ऐसी नीतियां बनायें जिससे लोगों के सांसों पर जो संकट मंडरा रहा है उस से निजात दिलाने में मदद मिले।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 18:06:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीवीसी विस्थापितों के अनिश्चितकालीन धरने का दूसरा दिन, जमीन के बदले रसीद की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>चंदवारा-</strong> डीवीसी विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले उरवां फार्म में जारी अनिश्चितकालीन धरने का दूसरा दिन भी संघर्षपूर्ण रहा। समिति के संयोजक कृष्णा यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक 56 मौजा के विस्थापितों को जमीन के बदले दी गई जमीन की रसीद निर्गत नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर चंदवारा प्रमुख मंजू देवी, जिला परिषद सदस्य महादेव राम, समिति के संयोजक कृष्ण कुमार यादव, सचिव शीतल यादव सहित कई सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।</div>
<div>  </div>
<div>सभी ने डीवीसी (दामोदर वैली कॉरपोरेशन) पर विस्थापितों के साथ छल करने का आरोप</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148317/demand-for-receipt-of-land-in-lieu-of-land-second"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/news-12.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>चंदवारा-</strong> डीवीसी विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले उरवां फार्म में जारी अनिश्चितकालीन धरने का दूसरा दिन भी संघर्षपूर्ण रहा। समिति के संयोजक कृष्णा यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक 56 मौजा के विस्थापितों को जमीन के बदले दी गई जमीन की रसीद निर्गत नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर चंदवारा प्रमुख मंजू देवी, जिला परिषद सदस्य महादेव राम, समिति के संयोजक कृष्ण कुमार यादव, सचिव शीतल यादव सहित कई सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।</div>
<div> </div>
<div>सभी ने डीवीसी (दामोदर वैली कॉरपोरेशन) पर विस्थापितों के साथ छल करने का आरोप लगाया और प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग की। धरने में शामिल नेताओं ने कहा कि 1950 से डीवीसी उरवां, कोटवारडीह और जामुखांडी गांवों के किसानों के साथ अन्याय कर रही है। किसानों की जमीन कम कीमत पर ले ली गई, लेकिन बदले में जो जमीन दी गई, वह अनुपयोगी साबित हो रही है। ना ही इस जमीन की बिक्री हो सकती है और ना ही कोई सरकारी लाभ मिल पा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>विस्थापितों को ना मुआवजा मिला, ना ही जमीन का पर्चा, जिससे वे कानूनी रूप से मालिक भी नहीं बन सके। इसके अलावा, तिलैया जलाशय योजना के तहत सैकड़ों मछुआरे मछली पालन कर अपना जीवनयापन कर रहे हैं, लेकिन डीवीसी प्रबंधन द्वारा यहां सोलर प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है, जो स्थानीय मछुआरों की आजीविका पर संकट खड़ा कर देगा। विस्थापितों की कई प्रमुख मांगें है जिनमें डीवीसी द्वारा दी गई जमीन का रसीद निर्गत किया जाए।</div>
<div> </div>
<div>डीवीसी डैम में मछुआरों और केज उत्पादकों के लिए वित्तीय सहायता दी जाए। प्रभावित गांवों में मुफ्त पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और सिंचाई की व्यवस्था की जाए। विस्थापित रैयतों को बकाया मुआवजा और जमीन का पर्चा दिया जाए। झारखंड सरकार के नियम अनुसार 75% स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए। डीवीसी फार्म क्षेत्र में खेल मैदान और हेल्थ केयर सेंटर का निर्माण किया जाए। उरवां पंचायत में 100 बेड का अस्पताल बनाया जाए। डीवीसी जलाशय तक आम जनता के लिए 25 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण करवाया जाए शामिल है।</div>
<div> </div>
<div>धरने में महिलाओं और किसानों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखी गई। स्थानीय ग्रामीणों ने डीवीसी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। इस मौके पर प्रकाश यादव, झारी राणा, हीरामन रविदास, बजरंगी यादव, गीता देवी, सुनीता देवी, रीना देवी, बसंती देवी, मालती देवी, कंचन देवी समेत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे। संघर्ष समिति का कहना है कि जब तक विस्थापितों को उनका हक नहीं मिल जाता, यह आंदोलन अनिश्चितकालीन जारी रहेगा। </div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2025 18:28:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों का फूटा गुस्सा किया पीसीएफ केन्द्र प्रभारी के खिलाफ प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>  शिवगढ़,रायबरेली। </strong>पीसीएफ कृषक सेवा केंद्र रानीखेड़ा के न खुलने नाराज किसानों ने केंद्र प्रभारी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अधिक रेट लेने एवं पहुंच वाले लोगों को खाद देने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर विरोध जताया है। सोमवार की सुबह से लेकर शाम तक जब किसानों को खाद नहीं मिली तो किसान मंगलवार को सुबह 7 बजे से पीसीएफ कृषक सेवा केंद्र रानीखेड़ा पहुंच गए सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक जब केंद्र नहीं खुला तो आक्रोषित किसानों ने नारेबाजी करते हुए केंद्र प्रभारी का जमकर विरोध किया। कृषक रामकरन, मैकूलाल, रामराज, शीतला प्रसाद, हरिकेश, राजनारायण सहित सैकड़ो किसानों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145702/farmers-got-angry-and-demonstrated-against-pcf-center-in-charge"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/0.1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> शिवगढ़,रायबरेली। </strong>पीसीएफ कृषक सेवा केंद्र रानीखेड़ा के न खुलने नाराज किसानों ने केंद्र प्रभारी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अधिक रेट लेने एवं पहुंच वाले लोगों को खाद देने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर विरोध जताया है। सोमवार की सुबह से लेकर शाम तक जब किसानों को खाद नहीं मिली तो किसान मंगलवार को सुबह 7 बजे से पीसीएफ कृषक सेवा केंद्र रानीखेड़ा पहुंच गए सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक जब केंद्र नहीं खुला तो आक्रोषित किसानों ने नारेबाजी करते हुए केंद्र प्रभारी का जमकर विरोध किया। कृषक रामकरन, मैकूलाल, रामराज, शीतला प्रसाद, हरिकेश, राजनारायण सहित सैकड़ो किसानों का आरोप है कि वह लोग सोमवार को सुबह से शाम तक लाइन में लगे रहे केंद्र प्रभारी द्वारा खतौनी जमा करवा ली गई लेकिन शाम को यह कह कर वापस कर दिया गया कि कल आना खाद मिलेगी।</div>
<div> </div>
<div>जबकि अन्दर से पहुंच वाले लोगों को खाद दी जा रहे थी। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि डीएपी खाद 1350 रुपए की जगह 1360 रुपए में व यूरिया 266 की जगह 270रुपए में किसानों को दी जा रही है। पहुंच वाले किसान आते हैं खाद लेकर चले जाते हैं बिना पहुंच वाले किसान लाइन में ही लगे रहते हैं जिनका कहना था कि जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए। एसडीएम महराजगंज रश्मिलता ने बताया कि सभी किसानों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए अधिक पैसा लिया जा रहा है तो जांचकर कार्रवाई की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Oct 2024 16:49:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Kushinagar : मंदिर के पुजारी सहित ग्रामीण किए अवैध अतिक्रमण को लेकर प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर (स्वतंत्र प्रभात)। </strong>जनपद के कोतवाली पडरौना क्षेत्र के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां खिरकिया दुर्गा मंदिर के समीप मुख्य मार्ग पर लोगों ने दबंगई के बल पर कब्जा कर रखा है। इससे श्रद्धालुओं सहित राहगीरों को सड़क पर चलना दुश्वार हो गया है। इससे मंदिर में पूजन अर्चन करने जाने वाले श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दबंगों द्वारा अवैध रूप से किया गया अतिक्रमण से नाराज होकर खिरकिया माता मंदिर के पुजारी देवमुनि एवं गांव के लोगों के नेतृत्व में शनिवार को ग्रामीणों के साथ मंदिर जाने वाली सड़क पर विरोध प्रदर्शन कर कोतवाली पुलिस को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145369/villagers-including-priest-of-kushinagar-temple-protested-against-illegal-encroachment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/img_20241006_093732.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर (स्वतंत्र प्रभात)। </strong>जनपद के कोतवाली पडरौना क्षेत्र के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां खिरकिया दुर्गा मंदिर के समीप मुख्य मार्ग पर लोगों ने दबंगई के बल पर कब्जा कर रखा है। इससे श्रद्धालुओं सहित राहगीरों को सड़क पर चलना दुश्वार हो गया है। इससे मंदिर में पूजन अर्चन करने जाने वाले श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दबंगों द्वारा अवैध रूप से किया गया अतिक्रमण से नाराज होकर खिरकिया माता मंदिर के पुजारी देवमुनि एवं गांव के लोगों के नेतृत्व में शनिवार को ग्रामीणों के साथ मंदिर जाने वाली सड़क पर विरोध प्रदर्शन कर कोतवाली पुलिस को शिकायती पत्र सौंप अतिक्रमण को हटवाने का मांग की।</div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन में धनेश निषाद, रमाशंकर निषाद, बासदेव, राहुल राय, सन्नी यादव, मिन्टू यादव, आजाद निषाद, सुरेन्द्र यादव आदि शामल रहे। एसडीएम पडरौना व्यास नारायण उमराव ने बताया कि मंदिर के समीप अतिक्रमण के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसा हुआ तो अतिक्रमण हटवाया जायेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/145369/villagers-including-priest-of-kushinagar-temple-protested-against-illegal-encroachment</link>
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                <pubDate>Sun, 06 Oct 2024 09:57:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>53 साल पुराना इतिहास, फिर वही घटना, क्यों जल रहा है PoK </title>
                                    <description><![CDATA[<p>पाकिस्तान की हुकूमत नेपो के पर कब्जा करके तो रख लिया है। वहां के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। अब पाकिस्तान के इसी सौतेले व्यवहार के बाद से पीओके पाकिस्तान के हाथ से जा सकता है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं की क्या पाकिस्तान के साथ 2024 में 1971 जैसा इतिहास दोहराया जाएगा।</p>
<p>दरअसल, पीओके से जैसी तस्वीरें सामने आ रही है उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि 53 साल पहले की कुछ यादों को ताजा कर रहे हैं। 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में पूरी सेना को सरेंडर करना पड़ा था। तब कपड़े</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141217/53-years-old-history-then-why-is-the-same-incident"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/19jm605o_pok-protest_625x300_12_may_24.jpg" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान की हुकूमत नेपो के पर कब्जा करके तो रख लिया है। वहां के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। अब पाकिस्तान के इसी सौतेले व्यवहार के बाद से पीओके पाकिस्तान के हाथ से जा सकता है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं की क्या पाकिस्तान के साथ 2024 में 1971 जैसा इतिहास दोहराया जाएगा।</p>
<p>दरअसल, पीओके से जैसी तस्वीरें सामने आ रही है उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि 53 साल पहले की कुछ यादों को ताजा कर रहे हैं। 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में पूरी सेना को सरेंडर करना पड़ा था। तब कपड़े भी उतारने पड़े थे। पाकिस्तान से टूटकर बांग्लादेश बना था।</p>
<p>अब पीओके में शहबाज की पुलिस को कपड़े उतारने पड़े हैं। वहां की जनता ने विद्रोह कर दिया है। पाकिस्तान सरकार के अत्याचार के खिलाफ पाकिस्तान की जनता सड़कों पर है। वहां अब शाहबाज सरकार की पुलिस को अपनी जान बचाने के लिए सड़कों पर भागना पड़ रहा है। लोग पुलिसवालों की पिटाई कर रहे हैं। उनके कपड़े भी उतरवा रहे हैं। पीओके में बगावत से पूरे पाकिस्तान में टेंशन है।</p>
<p>हालात इतने बिगड़ गए कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को आपात बैठक बुलानी पड़ी। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने भी पीओके के हालात पर चिंता जताई है। पाकिस्तानी जनरल आसिम मुनीर ने तो पीओके में सेना ही भेज दी है।</p>
<p>पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पीओके की जनता तो पुलिस को भगा ही चुकी है। सेना के साथ भी ऐसा कुछ नजारा देखने को मिल सकता है। ऐसा लग रहा है मानो बरसों का अत्याचार सहने वाली पीओके की जनता अब अंतिम लड़ाई के मूड में आ गयी है। पाकिस्तान की हुकूमत पीओके के साथ जैसा दोयम दर्जे का व्यवहार करती आई है अब पीओके उसे बर्दास्त नहीं करने वाला।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 May 2024 16:56:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश के वेतन वृद्धि प्रोटेस्ट में एक महिला की मौत </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Bangladesh:</strong> बांग्लादेश में रेडीमेड परिधान तैयार करने वाले श्रमिकों द्वारा पारिश्रामिक में कम वृद्धि के विरोध में जारी प्रदर्शन के दौरान बुधवार को पुलिस के साथ हुई झड़प में एक महिला श्रमिक की मौत हो गई। बांग्लादेश के प्रशासन ने मंगलवार को ‘रेडीमेड गार्मेंट्स’ (आरएमजी) फैक्टरी कर्मचारियों के वेतन में 56.25 फीसदी का इज़ाफा करने का ऐलान किया है जिसे श्रमिकों ने कम बताया है। इसे लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों के दौरान सात दिन में तीन श्रमिकों की मौत हो चुकी है। </p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि ढाका से 25 किलोमीटर उत्तर में स्थित गाज़ीपुर में विरोध प्रदर्शन के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136956/one-woman-dies-in-salary-hike-protest-in-bangladesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/women-died_large_1219_153.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Bangladesh:</strong> बांग्लादेश में रेडीमेड परिधान तैयार करने वाले श्रमिकों द्वारा पारिश्रामिक में कम वृद्धि के विरोध में जारी प्रदर्शन के दौरान बुधवार को पुलिस के साथ हुई झड़प में एक महिला श्रमिक की मौत हो गई। बांग्लादेश के प्रशासन ने मंगलवार को ‘रेडीमेड गार्मेंट्स’ (आरएमजी) फैक्टरी कर्मचारियों के वेतन में 56.25 फीसदी का इज़ाफा करने का ऐलान किया है जिसे श्रमिकों ने कम बताया है। इसे लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों के दौरान सात दिन में तीन श्रमिकों की मौत हो चुकी है। </p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि ढाका से 25 किलोमीटर उत्तर में स्थित गाज़ीपुर में विरोध प्रदर्शन के लिए चार हजार से अधिक श्रमिक सड़कों पर उतर आए। गाज़ीपुर में रेडीमेड परिधान वाली फैक्ट्रियों का गढ़ है जहां हज़ारों लोग काम करते हैं। इनमें अधिकतर महिलाएं हैं।</p>
<p>महिला प्रदर्शनकारी के सिर में चोट लगी। एक सरकारी अस्पताल में स्थित पुलिस चौकी के प्रमुख बी. मियां ने पत्रकारों को बताया कि महिला को एक घायल पुरुष के साथ ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया था और डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। कपड़ा उद्योग बांग्लादेश की जीडीपी में करीब 16 प्रतिशत का योगदान देता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 13:31:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस और जर्मनी समेत कई देशों ने किया प्रदर्शन, गाजा में हो रहे बमबारी को रोकने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पेरिस। </strong>फ्रांस की राजधानी पेरिस, जर्मनी की राजधानी बर्लिन और अन्य यूरोपीय शहरों में फलस्तीनी समर्थक हजारों लोगों ने गाजा में इजराइली बमबारी रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन इजराइल-हमास युद्ध में हताहतों की बढ़ती संख्या और गहराते मानवीय संकट को लेकर यूरोप के खासकर उन देशों में बढ़ रहे असंतोष को दर्शाते हैं, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है। गाजा में हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजराइल-हमास युद्ध में मारे गए फलस्तीनियों की संख्या बढ़कर 9,448 हो गई है।</p>
<p>गाजा में 24,173 और वेस्ट बैंक में 2,200 फलस्तीनी घायल हुए हैं। इजराइल में 1,400 से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136730/many-countries-including-france-and-germany-demonstrated-and-demanded-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/paris_large_1228_80.webp" alt=""></a><br /><p><strong>पेरिस। </strong>फ्रांस की राजधानी पेरिस, जर्मनी की राजधानी बर्लिन और अन्य यूरोपीय शहरों में फलस्तीनी समर्थक हजारों लोगों ने गाजा में इजराइली बमबारी रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन इजराइल-हमास युद्ध में हताहतों की बढ़ती संख्या और गहराते मानवीय संकट को लेकर यूरोप के खासकर उन देशों में बढ़ रहे असंतोष को दर्शाते हैं, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है। गाजा में हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजराइल-हमास युद्ध में मारे गए फलस्तीनियों की संख्या बढ़कर 9,448 हो गई है।</p>
<p>गाजा में 24,173 और वेस्ट बैंक में 2,200 फलस्तीनी घायल हुए हैं। इजराइल में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इनमें से अधिकतर लोगों की मौत सात अक्टूबर को हमास के शुरुआती हमले में हुई। इसी हमले के बाद से यह युद्ध शुरू हुआ है। इन हमलों में करीब 2,50,000 इजराइली और गाजा में 15 लाख से अधिक फलस्तीनी विस्थापित हुए हैं। इसके अलावा गाजा में कम से कम 241 लोगों को बंधक बनाया गया है।</p>
<p>गाजा में इजराइल की जवाबी कार्रवाई के विरोध में पेरिस की एक रैली में हजारों प्रदर्शनकारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने गाजा में तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया और कुछ लोगों ने ‘‘इजराइल, हत्यारा’’ के नारे लगाए। मध्य लंदन में प्रदर्शनकारियों ने ‘‘संघर्ष विराम अभी करो’’ और ‘‘मुझे विश्वास है कि हम जीतेंगे’’ जैसे नारे लगाते हुए सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। पेरिस में कुछ प्रदर्शनकारियों ने ‘‘गाजा में नरसंहार रोको’’ के बैनर दिखाए और फलस्तीनी झंडे थामे कई लोगों ने ‘‘फलस्तीन जीवित रहेगा, फलस्तीन जीतेगा’’ के नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ‘‘मैक्रों की मिलीभगत’’ के नारे लगाते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर भी निशाना साधा।</p>
<p>पेरिस के पुलिस प्रमुख ने एक निश्चित मार्ग पर प्रदर्शन की अनुमति दी लेकिन साथ ही कहा कि यहूदी विरोधी या आतंकवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाले किसी भी प्रकार के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमास के इजराइल पर सात अक्टूबर को किए गए हमले के बाद से यूरोप में यहूदी विरोधी हमलों में तेजी देखी गई है। बर्लिन में पूर्व में फलस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों के हिंसक हो जाने के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लगभग 1,000 पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया। </p>
<p>जर्मन समाचार एजेंसी ‘डीपीए’ ने बताया कि लगभग 6,000 प्रदर्शनकारियों ने जर्मनी की राजधानी के बीचों-बीच मार्च निकाला। पुलिस ने ऐसे किसी भी प्रकार के सार्वजनिक या लिखित बयानों पर प्रतिबंध लगा दिया जो यहूदी विरोधी या इजराइल विरोधी हों या हिंसा या आतंकवाद का महिमामंडन करते हों। लंदन में सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन करने के बीच मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि उसके अधिकारियों ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट और इटली के मिलान शहर में भी हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Nov 2023 13:22:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>HEC के 200 से अधिक कर्मचारियों ने दिया जंतर-मंतर पर धरना </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रांची: (</strong>21 सितंबर) गुरुवार झारखंड की राजधानी रांची स्थित सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी (पीएसयू) हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) के 200 से अधिक कर्मचारियों ने इसके पुनरुद्धार और लंबित वेतन की मांग को लेकर गुरुवार (21 सितंबर) को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया.</p>
<p>धरने में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की राज्यसभा सदस्य महुआ माजी मौजूद थीं. उन्होंने बुधवार (20 सितंबर) को राज्यसभा में एचईसी में 18 महीने से लंबित वेतन का मुद्दा उठाया था. राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने महुआ माजी से अपने बयान साबित करने को कहा. माजी ऐसा करने को तैयार हो गईं.</p>
<p>  महासचिव</p>
<p>सिंह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134943/more-than-200-hec-employees-staged-a-strike-at-jantar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/1689376007_eng.gif" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: (</strong>21 सितंबर) गुरुवार झारखंड की राजधानी रांची स्थित सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी (पीएसयू) हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) के 200 से अधिक कर्मचारियों ने इसके पुनरुद्धार और लंबित वेतन की मांग को लेकर गुरुवार (21 सितंबर) को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया.</p>
<p>धरने में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की राज्यसभा सदस्य महुआ माजी मौजूद थीं. उन्होंने बुधवार (20 सितंबर) को राज्यसभा में एचईसी में 18 महीने से लंबित वेतन का मुद्दा उठाया था. राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने महुआ माजी से अपने बयान साबित करने को कहा. माजी ऐसा करने को तैयार हो गईं.</p>
<p> महासचिव अजय सिंह ने गुरुवार को कहा, ‘वह (महुआ माजी) सुबह आईं और एचईसी कर्मचारियों की मांगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की. हमने उन्हें 2022 में राज्यसभा की संसदीय समिति की सिफारिश और 2017-18 में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के दस्तावेजी साक्ष्य प्रदान किए. उन्होंने इसे बाद में राज्यसभा सचिवालय को सौंप दिया.’</p>
<p>सिंह ने आगे कहा कि संसदीय समिति ने पिछले साल सिफारिश की थी कि मंत्रालय एचईसी की स्थिति में सुधार के लिए ठोस प्रयास करे और जरूरत पड़ने पर इसके लिए अतिरिक्त फंड मांगे. इस प्रदर्शन में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के कई नेता मौजूद थे.</p>
<p>एचईसी के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने दावा किया है कि उन्होंने इसरो के दूसरे लॉन्चिंग पैड के कई हिस्सों का निर्माण किया है, जिसका इस्तेमाल चंद्रयान-3 के लिए किया गया था.</p>
<p>एचईसी के इंजीनियरों ने 400/60 ईओटी (इलेक्ट्रिक ओवरहेड ट्रैवलिंग) क्रेन, 200/30टी ईओटी क्रेन, 10 टन हैमरहेड टावर क्रेन, एफसीवीआरपी (फोल्डिंग कम वर्टिकल रिपोजिशनेबल प्लेटफॉर्म), क्षैतिज स्लाइडिंग दरवाजा और इसरो के मोबाइल लॉन्चिंग पेडस्टल का निर्माण किया था.<br />जुलाई महीने में भी चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण के ठीक बाद हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) के इंजीनियरों को वेतन न दिए जाने का मुद्दा उठाया था. रांची के धुर्वा इलाके में स्थित एचईसी भारी उद्योग मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है.</p>
<p>करीब 2,700 कर्मचारियों और 450 अधिकारियों को पिछले 14 महीनों से वेतन नहीं मिला है. कंपनी के अधिकारियों को पूरे साल और कर्मचारियों को आठ-नौ महीने से वेतन नहीं मिला है.</p>
<p>इसमें कहा गया था कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, रक्षा मंत्रालय, रेलवे, कोल इंडिया और इस्पात क्षेत्र से 1,500 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिलने के बावजूद 80 फीसदी काम धन की कमी के कारण लंबित है.</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 17:44:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> पाकिस्तान सिंध में कारोबार बंद कर हिंदू व्यापारियों के अपहरण का कड़ा विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>व्यापार </strong>पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू व्यापारियों  के अपहरण के बढ़ते मामलों के विरोध में रोष बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सिंध के शिकारपुर और काश्मोर जिलों में कारोबार पूरी तरह से बंद रहा।  अपने हिंदू व्यापारियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए मुस्लिम व्यापारियों ने भी अपने कारोबार बंद रखे। इस बीच  समुदाय के साथ हो रही वारदातों के खिलाफ सोमवार से शुरू प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहे।अपहरण और अपराधियों को गिरफ्तार करने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की विफलता की निंदा करने के लिए काशमोर में हिंदू और मुस्लिम व्यापारियों द्वारा एक बड़ी विरोध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134399/pakistan-strongly-protests-against-kidnapping-of-hindu-businessmen-by-closing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/762297-ani-20230905083204.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>व्यापार </strong>पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू व्यापारियों  के अपहरण के बढ़ते मामलों के विरोध में रोष बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सिंध के शिकारपुर और काश्मोर जिलों में कारोबार पूरी तरह से बंद रहा।  अपने हिंदू व्यापारियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए मुस्लिम व्यापारियों ने भी अपने कारोबार बंद रखे। इस बीच  समुदाय के साथ हो रही वारदातों के खिलाफ सोमवार से शुरू प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहे।अपहरण और अपराधियों को गिरफ्तार करने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की विफलता की निंदा करने के लिए काशमोर में हिंदू और मुस्लिम व्यापारियों द्वारा एक बड़ी विरोध रैली भी निकाली गई। </p>
<p>पाकिस्तान की सड़कों पर बिजली बिलों  के विरोध को  उतरे लोग<br />इसके अलावा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट जिला स्थित हजीरा क्षेत्र में सैकड़ों लोग बढ़े हुए बिजली बिलों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया तथा अन्यायपूर्ण कर वृद्धि, बिजली कटौती के बावजूद बिलों में अभूतपूर्व वृद्धि और क्षेत्र में आवश्यक सेवाओं के राज्य-निर्मित संकट के खिलाफ निराशा व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों के पूर्ण बंद के चलते क्षेत्र ठप हो गया। इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों ने पीओके और गिलगित बाल्टिस्तान के लगभग पूरे क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में व्यापारी जगदीश कुमार खींची (65) और सागर कुमार (25) पुत्र इंदर लाल के वीडियो उनके परिवार के सदस्यों को मिले। दोनों वीडियो में, पीड़ितों को उनके सिर पर हमला करने वाले हथियारों से पीटा जा रहा था। डाकुओं ने उनकी रिहाई के लिए 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपयों की मांग की थी। काशमोर में दबाव बढ़ने पर पुलिस ने तीन अपहृत लोगों की बरामदगी की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Sep 2023 15:12:51 +0530</pubDate>
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