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                <title>Mallikarjun Kharge - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Mallikarjun Kharge RSS Feed</description>
                
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                <title>वंदे मातरम् पर विवाद: राष्ट्रगीत के सम्मान से बड़ी नहीं हो सकती राजनीत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे समय में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राजनीति में राष्ट्रगीत की भूमिका, उसके सम्मान और दलों के पुराने रवैये पर बहस छेड़ दी है। 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन के समय सोनिया गांधी के कुछ हाव-भाव को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रगीत के गायन</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185453/controversy-over-vande-mataram-politics-cannot-be-bigger-than-respect"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे समय में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राजनीति में राष्ट्रगीत की भूमिका, उसके सम्मान और दलों के पुराने रवैये पर बहस छेड़ दी है। 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन के समय सोनिया गांधी के कुछ हाव-भाव को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रगीत के गायन को रोकने का संकेत दिया। इस आरोप के आधार पर कर्नाटक के मंगलुरु में भाजपा नेता विकास पुत्तूर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई नहीं होने पर कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह मामला अभी आरोप और जांच के स्तर पर है। इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना कानून की प्रक्रिया पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। कांग्रेस की ओर से इस पूरे आरोप को खारिज किया गया है। विवादित दृश्य को लेकर कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी मंच पर लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने का संकेत दे रही थीं, न कि वंदे मातरम् रोकने का। दूसरी ओर भाजपा ने इसे राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ते हुए राजनीतिक और सार्वजनिक सवाल खड़े किए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लेकिन इस विवाद का एक बड़ा पक्ष केवल 15 अगस्त की घटना तक सीमित नहीं है। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और देश की राजनीति में बहस का इतिहास बहुत पुराना है। इसलिए आज जब राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, तब यह समझना भी जरूरी है कि अतीत में कांग्रेस ने वंदे मातरम् के संबंध में क्या रुख अपनाया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि समय के साथ इसके कुछ अंशों और धार्मिक संदर्भों को लेकर मुस्लिम लीग तथा कुछ मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति जताई। 1930 के दशक में यह विषय कांग्रेस के सामने भी आया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1937 में मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर आपत्ति जताई थी। नेहरू अभिलेखागार में दर्ज दस्तावेजों के अनुसार, 17 अक्टूबर 1937 को मुस्लिम लीग ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में थोपने का आरोप लगाया था। इसके बाद कांग्रेस के भीतर भी इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">20 अक्टूबर 1937 को जवाहरलाल नेहरू ने सुभाषचंद्र बोस को लिखे पत्र में वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और उसके कुछ हिस्सों को लेकर चर्चा की। नेहरू ने लिखा कि गीत की ‘आनंदमठ’ वाली पृष्ठभूमि मुसलमानों को असहज कर सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि वंदे मातरम् को लेकर पैदा हुआ विरोध काफी हद तक सांप्रदायिक तत्वों द्वारा निर्मित था। यानी इतिहास को केवल एक पक्ष से देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि उस समय कांग्रेस के भीतर भी गीत को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् के इस्तेमाल पर विचार किया और 1937 में यह निर्णय सामने आया कि गीत के उन शुरुआती अंशों का इस्तेमाल किया जाए जिन पर व्यापक सहमति थी। नेहरू के अपने वक्तव्य से स्पष्ट है कि कांग्रेस ने इस विषय पर लंबे विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यहीं से आज की राजनीतिक बहस को एक ऐतिहासिक संदर्भ मिलता है। भाजपा इसे कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का उदाहरण बताती है, जबकि कांग्रेस और उसके समर्थक इसे उस समय की सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय बताते हैं। इतिहास में दर्ज तथ्यों को देखते हुए यह कहना अधिक उचित है कि वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के भीतर उस दौर में महत्वपूर्ण राजनीतिक और वैचारिक बहस हुई थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रगीत है, जबकि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान होगा और स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम्’ को भी समान सम्मान दिया जाएगा। इसलिए वंदे मातरम् को केवल एक राजनीतिक दल या विचारधारा से जोड़कर देखना उसके ऐतिहासिक महत्व को छोटा करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राष्ट्रगीत का सम्मान किसी सरकार, पार्टी या नेता की निजी संपत्ति नहीं है। यह स्वतंत्रता आंदोलन की उस विरासत का हिस्सा है जिसमें असंख्य लोगों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। यही कारण है कि इसके गायन के दौरान किसी भी प्रकार की अवमानना का आरोप गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लेकिन उतना ही जरूरी यह भी है कि आरोप को प्रमाण मान लेने के बजाय निष्पक्ष जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भाजपा लंबे समय से कांग्रेस पर तुष्टीकरण और अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति के आरोप लगाती रही है। इसके समर्थन में वह कांग्रेस नेताओं के पुराने बयानों का भी उल्लेख करती है। उदाहरण के लिए 2010 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने ‘सैफ्रन टेररिज्म’ यानी ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस बयान पर बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ। कांग्रेस के तत्कालीन महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बाद में कहा था कि आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता और भगवा रंग को आतंकवाद से जोड़ना उचित नहीं है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2013 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के ‘हिंदू आतंकवाद’ संबंधी बयान पर भी विवाद हुआ। इसके बाद कांग्रेस ने स्वयं को उस शब्दावली से अलग करते हुए कहा था कि आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन घटनाओं से यह जरूर स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के बयान समय-समय पर बड़े राजनीतिक विवादों का कारण बने हैं। हालांकि किसी नेता के बयान को पूरे दल की आधिकारिक विचारधारा मान लेना भी उचित नहीं है। राजनीति में बयान आते हैं, उन पर विवाद होता है और कई बार स्वयं दल को सफाई भी देनी पड़ती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वंदे मातरम् पर वर्तमान विवाद का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक संघर्ष का हथियार बनाने की प्रवृत्ति कब समाप्त होगी। भाजपा कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के प्रति असम्मान का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा पर राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। दोनों दलों की अपनी राजनीतिक दलीलें हैं, लेकिन आम नागरिक के लिए इससे बड़ा प्रश्न राष्ट्रीय सम्मान का है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी के मामले में भी यदि कोई आपत्तिजनक व्यवहार हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो यह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए। लोकतंत्र में न तो किसी नेता को केवल पद के कारण कानून से ऊपर माना जा सकता है और न ही किसी राजनीतिक विरोधी पर बिना प्रमाण आरोप को अंतिम सत्य माना जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">देशभक्ति किसी दल की बपौती नहीं है।कांग्रेस हो या भाजपा, कोई भी राजनीतिक दल देशभक्ति का प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं रखता। भारत की आजादी किसी एक परिवार, पार्टी या संगठन की देन नहीं है। करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, बलिदान और त्याग से देश स्वतंत्र हुआ। इसलिए ‘हमने देश आजाद कराया’ जैसी राजनीतिक मानसिकता से ऊपर उठना जरूरी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाए जा सकते हैं। 1937 के निर्णयों और उसके पीछे की परिस्थितियों पर राजनीतिक बहस भी हो सकती है। कांग्रेस नेताओं के विवादित बयानों की आलोचना भी लोकतंत्र में स्वाभाविक है। लेकिन इस बहस का अंतिम उद्देश्य किसी दल को देशद्रोही साबित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज जैसे प्रतीकों का सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आज जरूरत इस बात की है कि वंदे मातरम् को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर देश की नई पीढ़ी को उसके इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान के बारे में बताया जाए। जो गीत स्वतंत्रता सेनानियों के भीतर राष्ट्रभावना जगाता रहा, उसके सम्मान में किसी भी प्रकार की कमी देश के लोकतांत्रिक संस्कारों के लिए उचित नहीं हो सकती। लेकिन सम्मान के साथ न्याय और तथ्य भी जरूरी हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत अब जांच का विषय है। पुलिस और जरूरत पड़ने पर न्यायपालिका यह तय करेगी कि लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी व्याख्या करते रहेंगे, लेकिन राष्ट्रगीत किसी दल का नहीं, पूरे राष्ट्र का है। इसलिए वंदे मातरम् का सम्मान राजनीतिक विवाद का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और लोकतांत्रिक मर्यादा का विषय होना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;">        *कांतिलाल मांडोत*</div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 20:08:40 +0530</pubDate>
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                <title>मल्लिकार्जुन खडगे -पीएम मोदी पर भडके ,कहा जिसको गांधी नहीं पता तो संविधान भी नहीं पता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने आज गुरूवार को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित स्पैशल प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सारी दुनियां को ये बताया कि उनको गांधी के  बारे में फिल्म देखने के बाद पता चला।कितना हास्यप्रद है। इसका मतलब है कि वह संविधान के बारे में भी अनभिज्ञ है। गांधी जी को दुनिया जानती है। यूएन से लेकर हर जगह वो है। पर मोदी जी की नजर में वह है ही नहीं।खडगे ने पीएम को सलाह दे डाली कि वह चुनाव बाद एकांत में गांधी जी की किताब पढे।खाली विवेकानंद  भवन में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141818/mallikarjun-kharge-got-angry-at-pm-modi-and-said-that"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/screenshot_20240530_182311_youtube.jpg" alt=""></a><br /><p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने आज गुरूवार को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित स्पैशल प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सारी दुनियां को ये बताया कि उनको गांधी के  बारे में फिल्म देखने के बाद पता चला।कितना हास्यप्रद है। इसका मतलब है कि वह संविधान के बारे में भी अनभिज्ञ है। गांधी जी को दुनिया जानती है। यूएन से लेकर हर जगह वो है। पर मोदी जी की नजर में वह है ही नहीं।खडगे ने पीएम को सलाह दे डाली कि वह चुनाव बाद एकांत में गांधी जी की किताब पढे।खाली विवेकानंद  भवन में जाकर मौन बैठने से क्या होगा? खडगे ने कहा कि ये चुनाव हमेशा याद रखा जाएगा।जाती- धर्म- वर्ग छोडकर पूरा देश संविधान को बचाने के लिए सामने आया है।हमने मुद्दो पर वोट मांगा है।</p>
<p>खडगे ने पीएम मोदी के विवेकानंद  भवन में ध्यान साधना पर जाने का विरोध कर इसे आचार संहिता का घोर उल्लंघन बताया है।  उन्होने कहा कि चुनाव का  आखिरी चरण बकाया होने के बाद भी मोदी का ध्यान साधना में जाना चुनाव को प्रभावित  करने की संज्ञा दी है। इसके लिए  बाकायदा चुनाव आयोग को शिकायत दी है।खडगे ने प्रेस  को संबोधित  करते हुए  कहा कि पीएम मोदी के 15 दिन के भाषण में 232 बार उन्होने कांग्रेस का नाम लिया। 700 बार मोदी का नाम लिया। 573 बार इंडिया गठबंधन का नाम लिया।लेकिन बेरोजगारी,मंहगाई, शब्द  का जिक्र  एक बार भी नहीं किया। पीएम मोदी ने 421 बार मंदिर-मस्जिद बारे में बात की और 224 बार पाकिस्तान, मुस्लिम की बात की।  उन्होने कहा कि पीएम मोदी ने 132 करोड का केस किया।</p>
<p>कांग्रेस पार्टी के खातों को सीज किया,ताकि हम चुनाव में पीछे हो जाए। हमें संसद में भी चुप करा दिया। संसद सदस्यों को सदन से बाहर करके लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर तानाशाही रवैया अख्तियार किया गया।खडगे ने कहा कि लोगो की राय भी यह ही है कि अगर एक बार फिर मोदी को बतौर पीएम मौका दिया तो लोकतंत्र का खात्मा निश्चित है। मंदिर-मस्जिद के मुद्दे को लेकर पीएम अग्रेसिव हैं इसकी शिकायत बाकायदा चुनाव आयोग से भी की। लेकिन चुनाव आयोग की खामोशी सब कुछ बयां कर रही है। खडगे नें राहुल के हाथ में संविधान की किताब का जिक्र करते हुए खुद भी वहीं संविधान की किताब को प्रदर्शित कर बचाने की हुंकार भरी।गठबंधन का पीएम कौन?  के सवाल पर खडगे ने कहा कि कांग्रेस अगर सीटें ज्यादा लेती है तो सभी दलों की आम राय से पीएम को तय कर लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 May 2024 16:49:24 +0530</pubDate>
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                <title>CM पद से इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार पर भड़की कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नेशनल डेस्क: </strong>नीतीश कुमार के रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने उनकी तुलना ‘‘गिरगिट'' से की और कहा कि राज्य के लोग इस ‘‘विश्वासघात'' के लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल राजेन्द्र वी आर्लेकर को रविवार सुबह अपना इस्तीफा सौंप दिया। वह राज्य में ‘महागठबंधन' से अलग हो गए। कुमार के इस कदम से ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस' (इंडिया) को भी बड़ा झटका लगा है।</p>
<p><strong>गिरगिट से की नीतीश कुमार की तुलना </strong><br />कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नीतीश कुमार के इस कदम की आलोचना करते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138438/congress-angry-at-nitish-kumar-after-resigning-from-the-post"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-01/2024_1image_13_22_018223683nitishkumar-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नेशनल डेस्क: </strong>नीतीश कुमार के रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने उनकी तुलना ‘‘गिरगिट'' से की और कहा कि राज्य के लोग इस ‘‘विश्वासघात'' के लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल राजेन्द्र वी आर्लेकर को रविवार सुबह अपना इस्तीफा सौंप दिया। वह राज्य में ‘महागठबंधन' से अलग हो गए। कुमार के इस कदम से ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस' (इंडिया) को भी बड़ा झटका लगा है।</p>
<p><strong>गिरगिट से की नीतीश कुमार की तुलना </strong><br />कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नीतीश कुमार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह साफ है कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा' से ध्यान भटकाने के लिए यह ‘‘राजनीतिक नाटक'' किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जल्द ही बिहार में प्रवेश करने वाली राहुल गांधी की यात्रा से ‘‘घबराए हुए'' हैं। रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘बार-बार राजनीतिक साझेदार बदलने वाले नीतीश कुमार रंग बदलने में गिरगिटों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।''</p>
<p><strong>जनता कभी माफ नहीं करेगी </strong><br />उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ‘‘विश्वासघात महारथी'' और उन्हें इशारों पर नचाने वालों को माफ नहीं करेगी। रमेश ने कहा, ‘‘बिलकुल साफ है कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा से प्रधानमंत्री और भाजपा घबराए हुए हैं और उससे ध्यान हटाने के लिए यह राजनीतिक नाटक रचा गया है।'' राज्यपाल ने नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और नयी सरकार के गठन तक उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है। सूत्रों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से शाम तक नयी सरकार के गठन की संभावना है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jan 2024 15:17:36 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी नहीं चाहते की आम जनता या गरीबो को शक्ति मिले: खड़गे </title>
                                    <description><![CDATA[<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम नहीं चाहते कि गरीबों को कोई शक्ति मिले। उन्होंने छत्तीसगढ़ के सुकमा में जनसभा में भाषण के दौरान पीएम मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी नहीं चाहते कि गरीबों को कोई ताकत मिले।</p>
<p>वह कहते रहते हैं कि वह एक गरीब आदमी हैं और लोग (कांग्रेस नेता) यह सहन नहीं कर सकते कि वह एक प्रधानमंत्री हैं। वह ऐसे बयान देते रहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या भूपेश बघेल ने कभी कहा कि वे पिछड़ा वर्ग से हैं? क्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136549/pm-modi-does-not-want-the-general-public-or-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/kharge-chhattisgarh_large_1613_8.webp" alt=""></a><br /><p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम नहीं चाहते कि गरीबों को कोई शक्ति मिले। उन्होंने छत्तीसगढ़ के सुकमा में जनसभा में भाषण के दौरान पीएम मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी नहीं चाहते कि गरीबों को कोई ताकत मिले।</p>
<p>वह कहते रहते हैं कि वह एक गरीब आदमी हैं और लोग (कांग्रेस नेता) यह सहन नहीं कर सकते कि वह एक प्रधानमंत्री हैं। वह ऐसे बयान देते रहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या भूपेश बघेल ने कभी कहा कि वे पिछड़ा वर्ग से हैं? क्या उन्होंने कहा कि बीजेपी उनसे बर्दाश्त नहीं कर रही है? भूपेश बघेल ने कभी भी ऐसा कोई बयान नहीं दिया। </p>
<p>खड़गे ने कहा कि वह (पीएम मोदी) गांधी परिवार को गाली देते रहते हैं। क्या राहुल गांधी कभी पीएम रहे हैं? क्या प्रियंका गांधी वाद्रा कभी पीएम रही हैं? क्या सोनिया गांधी ने स्वीकार किया पीएम पद? उन्होंने कहा कि उस सदन के आखिरी पीएम राजीव गांधी थे। अब 40 साल से उनके घर से कोई भी किसी पद पर नहीं है।</p>
<p>कोई मंत्री नहीं, कोई सीएम नहीं, कोई केंद्रीय मंत्री नहीं और कोई पीएम नहीं। वह (पीएम मोदी) आए ​​दिन ऐसे लोगों को गाली देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों को जीवित रखना है। कांग्रेस ने आपकी और आपके बच्चों की सुरक्षा के लिए कई कानून बनाए, जिससे आप लोग सुरक्षित रहें।</p>
<p>मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोगों से कहा कि कांग्रेस ने आपके लिए जो भी काम किए, भाजपा उसे खत्म कर रही है। भाजपा सरकार में अमीर और अमीर बन रहा है, गरीब और गरीब हो रहा है। इसलिए हमें कांग्रेस को वोट देना है, कांग्रेस को जितना है। उन्होंने कहा कि मैं मोदी सरकार से पूछना चाहता हूं- जिस तरह से छत्तीसगढ़ सरकार लोगों की मदद कर रही है, क्या BJP सरकार भी गुजरात में ऐसा कर रही है? भाजपा को बस झूठ बोलना आता है, लेकिन काम करना नहीं आता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आप सभी हाथ के निशान पर वोट दें। हाथ को मजबूत बनाएंगे तो सब मजबूत बन जाएगा। हमारे हाथ काम करने वाले हाथ हैं... सिर्फ फूल पकड़ने वाले नहीं। उन्होंने कहा कि आज हर जरूरी चीज महंगी होती जा रही है। पेट्रोल-डीजल, दाल, प्याज, बीज, खाद सभी के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हमें महंगाई बढ़ाने वाली ऐसी सरकार नहीं चाहि। </p>
<p>इसके बाद उन्होंने संवाददताओं से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि उन्हें जो कहना है कहने दीजिए, हम 75 (सीटें) पार करेंगे, उससे कम नहीं। हम बच्चों को प्राइमरी से पोस्ट-ग्रेजुएशन तक मुफ्त शिक्षा देंगे, महिलाओं को सिलेंडर देंगे। सीएम को लेकर उन्होंने कहा कि चुनाव बाद निर्वाचित विधायक तय करेंगे कि कौन सीएम होंगे। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Nov 2023 16:39:32 +0530</pubDate>
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