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                <title>National unity - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महती भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180815/important-role-of-rashtriya-swayamsevak-sangh-in-indias-development-journey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/rss-shatabdi-varsh-jan-sampark-abhiyaan-history.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में संघ का योगदान अचरज भरा भी लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान को यह देश कभी भुला नहीं पाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस वक्त को याद कर कल्पना करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ तथाकथित सत्ता-स्वार्थी राजनेताओं की हुक्मरान बनने की चाहत के चलते जिस देश की आजादी धर्म के नाम पर की गई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ कितना खून-खराबा अपनों का अपनों के ही हाथों हुआ होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान के उदय के साथ ही लाहौर से लेकर कराची तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वी-पश्चिमी सीमाओं तक बसने वाले हिंदुओं के कत्लेआम की जो दास्तां देश ने देखी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी कल्पना मात्र से आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी से पहले भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखंड भारत की कल्पना को साकार करने की अलख जगाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहा था। कई मौकों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जन्मदाता और तत्कालीन प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ ने भी देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सभी बड़े तत्कालीन नेताओं से अखंड भारत बनाए रखने की लड़ाई लड़ने की बात कही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन संघ विरोधी मानसिकता वाले कुछ लोगों ने हर बार संघ की बातों को नजरअंदाज करते हुए मुस्लिम लीग के जिन्ना की जिद के आगे नतमस्तक होकर आखिरकार अखंड भारत को धर्म के नाम पर टुकड़ों में बांट दिया था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्ना की मुस्लिम लीग के समर्थक गुंडों और पाकिस्तानी फौजी सिपाहियों ने पाकिस्तान के हर हिस्से में रह रहे हिंदुओं को वहाँ से भागने के लिए उन पर रक्तरंजित अत्याचार ही नहीं किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हिंदू बेटियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहुओं और माताओं की अस्मिता को भी सरेआम लूटकर तार-तार किया था। पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में हिंदुओं की लाशों के ढेर इस बात के सबूत थे कि हिंदुओं के प्रति जिन्ना और उसके गुंडों ने सत्ता की लालच में लोगों के बीच कितना जहर भरा था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस रक्तरंजित दौर में पाकिस्तान में सबसे पहले हिंदू माँ-बहनों और बेटियों की अस्मिता को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ही आगे आए और जिन्ना के गुंडों तथा उसके सिपाहियों से अपनी जान की बाजी लगाकर जितना हो सकता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतने हिंदुओं को बचाने का भरसक प्रयास भी किया था। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विभाजन की त्रासदी से अपनी ही जमीन से बेदखल किए गए हिंदुओं की मदद हेतु जगह-जगह राहत शिविर खोलकर पाकिस्तान से बेदखल और प्रताड़ित किए गए हिंदुओं तथा उनके परिजनों को न केवल सुरक्षा दी</span>,</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयंसेवकों ने बिना सरकारी मदद के अपने दम पर महीनों तक उन हिंदुओं के भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी और स्वास्थ्य की भी व्यवस्था की थी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह तो देश जानता है कि विभाजन के उस कठिन दौर में कैसे आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं को बचाया था। आजादी के दौर के बहुत से लोगों का मानना है कि यदि आजादी के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हिंदुओं को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी नहीं लगाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जिन्ना के गुंडे और गुंडागर्दी पर उतारू उसकी सेना नफरत की आग में पाकिस्तान से समूची हिंदू कौम का ही सर्वनाश कर देते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आजादी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीयों में एकजुटता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस महान उद्देश्य को लेकर बिना प्रचार-प्रसार के अपने कार्यकर्ताओं के बूते अलख जगाए रखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी परिणति यह है कि भारत आज दुनिया की महाशक्तियों को अपने आगे झुकाने वाला देश बन गया है। देश में जब-जब भी विपदाएँ आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब-तब सरकार से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से अपनी जान की परवाह किए बिना विपदाओं में उम्मीदों का सहारा बनकर खड़े हुए हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा किए गए कार्यों की विपक्ष के नेता तक खुले मन से प्रशंसा करते रहे हैं। देश में जब भी कहीं भीषण बाढ़ आई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखा पड़ा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूकंप की त्रासदी हुई हो या फिर कोई गंभीर बीमारी ही क्यों न फैली हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकर्ता देश में आई हर विपदा में सबसे पहले सहारा बनकर खड़ा हो जाता है और बिना जाति-धर्म पूछे अपनी जान की बाजी लगाकर सेवा कार्यों में जुट जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस देश को जोड़ने और मजबूती प्रदान करने वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बिना जाति-धर्म का भेद किए देश के हर वर्ग और समाज के विकास में सहयोग प्रदान करता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस का दायरा समूचा देश और देश में रहने वाले सभी जाति-धर्मों के लोगों के बीच मानवीय प्रेम और राष्ट्रीय एकता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी महान उद्देश्य को लेकर दिन-रात उसके स्वयंसेवक कार्य करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र ऐसा संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने किए गए कार्यों का कभी दिखावा नहीं करता और न कभी अपना बखान करता है। देश की सेहत देखकर ही संघ की सक्रियता समझी जा सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश यदि आज दुनिया में सिरमौर बन रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसमें आरएसएस की भूमिका को भी खुले मन से स्वीकारना होगा। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रहित को समर्पित संगठन आरएसएस के करोड़ों कार्यकर्ता बेहद अनुशासित तरीके से अपने सरसंघचालक के हर शब्द को अपना सर्वस्व त्याग कर निस्वार्थ भाव से पूर्ण करते हैं। यह संघ के सरसंघचालक के तपोबल का ही परिणाम है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री मोहन भागवत छठे सरसंघचालक हैं। इससे पूर्व डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुकर दत्तात्रेय देवरस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भैया’ और के. एस. सुदर्शन जी के त्याग और अनुशासन से संघ दुनिया भर के देशों में अपनी जड़ें मजबूती से जमाए हुए मानवीय सेवा के कार्यों हेतु समर्पित है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति के कुछ अवसरवादी सत्ता-स्वार्थी नेताओं ने अपने वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में आरएसएस को देश-विरोधी संगठन बताने से भी गुरेज नहीं किया है। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ राजनीतिक दलों ने सत्ता में आने के बाद जाति-धर्म के वोट बैंक के सहारे सत्ता में बने रहने की चाहत में अपने-अपने राज्यों में आरएसएस पर प्रतिबंध भी लगा दिया था और आरएसएस से संबंध रखने वाले भारतीयों को प्रताड़ित भी किया जाता था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कुछ राज्यों में आज भी आरएसएस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर बंदिशें लगाई गई हैं। वर्तमान में राजनीति से जुड़े कुछ लोगों ने एक विशेष वर्ग के वोट बैंक पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए आरएसएस को केवल हिंदुओं का संगठन बता कर उसके खिलाफ आए दिन जहर उगला है। बेशक आरएसएस एक हिंदुत्ववादी विचारधारा वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका महान उद्देश्य सभी धर्मों और जातियों के लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र को एकजुट और मजबूत बनाना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की विचारधारा के विरोधी जो भी लोग आज राजनीति में मौजूद होकर जात-पात की राजनीति करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जी से सीखना चाहिए कि उन्होंने देशहित के कार्यों में आरएसएस की दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समय-समय पर प्रशंसा भी की है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघचालक श्री मोहन भागवत देश के सभी वर्गों और धर्मों के प्रमुखों के साथ मिलकर संघ के प्रति राजनीतिक दलों द्वारा जो दूषित धारणाएँ फैलाई गई थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें बहुत हद तक दूर कर संघ के सच्चे राष्ट्र हित के उद्देश्य से परिचित करवाकर अन्य धर्मों को भी संघ की विचारधारा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश इस वर्ष विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस की स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के मार्गदर्शन में देशभर में संघ के कार्यों से देश की नई पीढ़ी को अवगत कराने के कार्यक्रम जारी हैं। आरएसएस एक ऐसा सामाजिक संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जाति-धर्म के नाम पर टुकड़ों में बंटे और बिखरे लोगों को एकजुट करता है तथा उनमें अपने राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा के लिए व्यक्ति निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण तक का पाठ सिखाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की स्थापना भी सन </span>1925 <span lang="hi" xml:lang="hi">में विजयादशमी के दिन डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा इसी महान उद्देश्य को लेकर की गई थी। अपने सौ वर्षों के सफर में आरएसएस अपने कार्यकर्ताओं के समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग और अनुशासन के बल पर आज एक वटवृक्ष बनकर दुनिया के अस्सी से ज्यादा देशों में फैल चुका है।</span>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक श्री मोहन भागवत की अगुवाई में संघ अपना सौवां जन्मोत्सव पिछली विजयादशमी को मनाया गया उस ऐतिहासिक पल का समूचा दे साक्षी बना!  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को पूरे वर्ष देशभर में हर्षोल्लास से मनाएगा और कार्यक्रमों के माध्यम से देश के विकास में संघ की भूमिका से उसके त्याग बलिदान और कर्तव्य निष्ठा से नवपीढ़ी को परिचित भी करवाएगा।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:29:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय नवसंवत्सर का स्वर्णिम आरंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति का वह जीवंत प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल समय के परिवर्तन का संकेत नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन के मूल्यों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश भी लेकर आता है। जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह केवल एक तिथि नहीं रहती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई शुरुआत का उद्घोष बन जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार यही वह क्षण है जब एक नए संवत्सर का आरंभ होता है और प्रकृति स्वयं नवजीवन के रंगों से भर उठती है। यह नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173466/golden-beginning-of-indian-new-year"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindu-new-year-2025.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति का वह जीवंत प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल समय के परिवर्तन का संकेत नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन के मूल्यों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश भी लेकर आता है। जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह केवल एक तिथि नहीं रहती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई शुरुआत का उद्घोष बन जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार यही वह क्षण है जब एक नए संवत्सर का आरंभ होता है और प्रकृति स्वयं नवजीवन के रंगों से भर उठती है। यह नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह केवल गणनात्मक नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रकृति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खगोल और मानव जीवन के गहरे संबंधों पर आधारित है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का आधार विक्रम संवत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक प्राचीन कालगणना प्रणाली है और आज भी भारत तथा नेपाल के कई भागों में प्रचलित है। यह पंचांग चंद्र और सूर्य दोनों की गति पर आधारित होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे लूनी सोलर कैलेंडर कहा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए समय-समय पर अतिरिक्त माह अर्थात अधिमास को भी जोड़ता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ऋतुओं और पर्वों का संतुलन बना रहे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण दर्शाता है कि भारतीय ऋषियों ने समय की गणना को केवल गणित नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन और प्रकृति के समन्वय के रूप में देखा था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह दिन सृष्टि के आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यही कारण है कि हिन्दू नववर्ष को केवल सामाजिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन मनुष्य को अपने जीवन की दिशा पर पुनर्विचार करने</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने और आत्मशुद्धि का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2026 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में हिन्दू नववर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">19 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को प्रारंभ होकर विक्रम संवत </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2083 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का आरंभ करता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक विशेष वर्ष भी माना जा रहा है क्योंकि इसमें अधिमास के कारण </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">13 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महीने होंगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह तथ्य इस बात को और भी रोचक बनाता है कि भारतीय कालगणना कितनी सूक्ष्म और वैज्ञानिक रही है। यह नववर्ष वसंत ऋतु के आगमन के साथ आता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब प्रकृति में नवपल्लव फूटते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फूल खिलते हैं और वातावरण में एक नई ताजगी का संचार होता है। यह दृश्य स्वयं इस बात का प्रतीक है कि जीवन में परिवर्तन और नवाचार अनिवार्य हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की सांस्कृतिक विविधता इस पर्व में अत्यंत सुंदर रूप से झलकती है। देश के विभिन्न भागों में इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बंगाल में पोइला बैसाख और सिंधी समाज में चेती चांद।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नाम भले ही अलग हों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु सभी में एक ही भावना निहित है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="font-family:'Times New Roman', serif;"> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई शुरुआत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का स्वागत। यही विविधता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एकता में अनेकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को भी सुदृढ़ करता है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नए वस्त्र धारण करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार के साथ मिलकर विशेष भोजन का आनंद लेते हैं। घरों को फूलों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आम के पत्तों और रंगोली से सजाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो समृद्धि और शुभता का प्रतीक होता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सब केवल परंपरा नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया भी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो व्यक्ति को पुराने नकारात्मक अनुभवों को छोड़कर नए सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर्व का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका आध्यात्मिक स्वरूप है। चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी इसी दिन से होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। यह साधना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आत्म-अनुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संयम और आत्मबल को विकसित करने का माध्यम है। उपवास</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान और जप के माध्यम से व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित करना सीखता है और जीवन के गहरे अर्थ को समझने का प्रयास करता है। इस प्रकार हिन्दू नववर्ष केवल बाहरी उत्सव नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आंतरिक परिवर्तन का भी अवसर है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत होता है। बीते हुए वर्ष की गलतियों और अनुभवों से सीख लेकर हम नए वर्ष में बेहतर निर्णय ले सकते हैं। यह पर्व हमें आशा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और सकारात्मकता का संदेश देता है। यह हमें यह याद दिलाता है कि समय चक्र निरंतर चलता रहता है और हर नया वर्ष हमें स्वयं को सुधारने और आगे बढ़ने का अवसर देता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक समय में जब वैश्वीकरण और पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है और हमारी पहचान को मजबूत करता है। यह युवा पीढ़ी को यह समझने का अवसर देता है कि हमारी परंपराएं केवल अतीत की धरोहर नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके साथ ही</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की प्रेरणा देता है। वसंत ऋतु में शरीर और मन दोनों में एक नई ऊर्जा का संचार होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस समय वातावरण शुद्ध होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सूर्य की किरणें शरीर को ऊर्जा प्रदान करती हैं और जीवन में संतुलन स्थापित करने का अवसर मिलता है। इस प्रकार हिन्दू नववर्ष केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज के डिजिटल युग में भी हिन्दू नववर्ष अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह पर्व नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है और लोग इसे नए उत्साह के साथ मना रहे हैं। यह परंपरा और आधुनिकता के सुंदर समन्वय का उदाहरण है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां प्राचीन मूल्य आधुनिक साधनों के माध्यम से आगे बढ़ रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः हिन्दू नववर्ष एक ऐसा पर्व है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें जीवन के मूल सिद्धांतों की याद दिलाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">—</span><span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संयम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मकता और निरंतर विकास। यह केवल एक तिथि का परिवर्तन नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर है। जब हम इस दिन नए संकल्प लेते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह केवल व्यक्तिगत नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति की दिशा में भी एक कदम होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस नववर्ष पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी संस्कृति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और मूल्यों को संजोकर रखेंगे और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएंगे। यही हिन्दू नववर्ष का वास्तविक संदेश है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="font-family:'Times New Roman', serif;"> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">नवीनता के साथ परंपरा का सम्मान और जीवन में संतुलन का मार्ग। यही वह सवेरा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल एक वर्ष का नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे जीवन का मार्गदर्शन करता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173466/golden-beginning-of-indian-new-year</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:55:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयन्ती पर रक्तदान शिविर का आज होगा आयोजन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><strong>अंबेडकरनगर। </strong>राष्ट्रीय एकता के महानायक भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 148 वीं जयन्ती राष्ट्रीय एकता दिवस पर भाजपा  आज प्रातः 10 बजे अम्बेडकर नगर मुख्यालय के पटेल नगर स्थिति सरदार पटेल की प्रतिमा के निकट रक्तदान शिविर आयोजित किया है।</p>
<p>रक्तदान शिविर के आयोजक पूर्व जिलाध्यक्ष पूर्व प्रत्याशी विधानसभा टाण्डा कपिल देव वर्मा ने बताया कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की 148वीं जयंती के अवसर पर आयोजित रक्तदान शिविर के उद्घाटन के मुख्य अतिथि जिले के प्रभारी मंत्री खेल एवम युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष त्रयंबक तिवारी रहेंगे।</p>
<p>कार्यक्रम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136424/blood-donation-camp-will-be-organized-today-on-the-birth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/screenshot_2023-10-31-06-37-04-63_680d03679600f7af0b4c700c6b270fe7.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><strong>अंबेडकरनगर। </strong>राष्ट्रीय एकता के महानायक भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 148 वीं जयन्ती राष्ट्रीय एकता दिवस पर भाजपा  आज प्रातः 10 बजे अम्बेडकर नगर मुख्यालय के पटेल नगर स्थिति सरदार पटेल की प्रतिमा के निकट रक्तदान शिविर आयोजित किया है।</p>
<p>रक्तदान शिविर के आयोजक पूर्व जिलाध्यक्ष पूर्व प्रत्याशी विधानसभा टाण्डा कपिल देव वर्मा ने बताया कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की 148वीं जयंती के अवसर पर आयोजित रक्तदान शिविर के उद्घाटन के मुख्य अतिथि जिले के प्रभारी मंत्री खेल एवम युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष त्रयंबक तिवारी रहेंगे।</p>
<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ भाजपा नेता पारस नाथ चौधरी द्वारा किया जाएगा।आयोजक कपिल देव वर्मा ने बताया कि सरदार पटेल की जयंती पर भारी संख्या में सैकड़ों युवाओं द्वारा रक्तदान किया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/136424/blood-donation-camp-will-be-organized-today-on-the-birth</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Oct 2023 06:40:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

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