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                            <item>
                <title>कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल एथलीट - जसपाल राणा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="sc-780ccd9c-0 bCNfnt">
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<h1 class="sc-a24181f1-0 GJQyw sc-ecba4885-3 uxoFg text--headline1">कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल एथलीट - जसपाल राणा ने कैसे बनाई एक अमिट विरासत</h1>

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<p class="sc-a24181f1-0 cUsHgQ sc-ecba4885-4 bJQXlF text--deck">1994 विक्टोरिया गेम्स से लेकर 2006 मेलबर्न गेम्स तक भारतीय पिस्टल शूटर जसपाल राणा ने राष्ट्रमंडल खेल में ऐसा रिकॉर्ड दर्ज किया, जिसे देश का कोई भी खिलाड़ी अब तक नहीं तोड़ पाया है।</p>
<p class="sc-a24181f1-0 cUsHgQ sc-ecba4885-4 bJQXlF text--deck"><span style="text-decoration:underline;"><em><strong>By- अमित राघव (ब्यूरो चीफ देहरादून)</strong></em></span></p>
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<p><strong>कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल एथलीट -</strong></p>
<p>जसपाल राणा ने कैसे बनाई एक अमिट विरासत<br />1994 विक्टोरिया गेम्स से लेकर 2006 मेलबर्न गेम्स तक भारतीय पिस्टल शूटर जसपाल राणा ने राष्ट्रमंडल खेल में ऐसा रिकॉर्ड दर्ज किया, जिसे देश का कोई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183985/indias-most-successful-athlete-in-commonwealth-games-jaspal-rana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/screenshot_20260723_093252_chrome.jpg" alt=""></a><br /><div class="sc-780ccd9c-0 bCNfnt">
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<h1 class="sc-a24181f1-0 GJQyw sc-ecba4885-3 uxoFg text--headline1">कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल एथलीट - जसपाल राणा ने कैसे बनाई एक अमिट विरासत</h1>

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<p class="sc-a24181f1-0 cUsHgQ sc-ecba4885-4 bJQXlF text--deck">1994 विक्टोरिया गेम्स से लेकर 2006 मेलबर्न गेम्स तक भारतीय पिस्टल शूटर जसपाल राणा ने राष्ट्रमंडल खेल में ऐसा रिकॉर्ड दर्ज किया, जिसे देश का कोई भी खिलाड़ी अब तक नहीं तोड़ पाया है।</p>
<p class="sc-a24181f1-0 cUsHgQ sc-ecba4885-4 bJQXlF text--deck"><span style="text-decoration:underline;"><em><strong>By- अमित राघव (ब्यूरो चीफ देहरादून)</strong></em></span></p>
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<p><strong>कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल एथलीट -</strong></p>
<p>जसपाल राणा ने कैसे बनाई एक अमिट विरासत<br />1994 विक्टोरिया गेम्स से लेकर 2006 मेलबर्न गेम्स तक भारतीय पिस्टल शूटर जसपाल राणा ने राष्ट्रमंडल खेल में ऐसा रिकॉर्ड दर्ज किया, जिसे देश का कोई भी खिलाड़ी अब तक नहीं तोड़ पाया है।</p>
<p>भारत दशकों से कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे मजबूत देशों में से एक रहा है। रेसलिंग, शूटिंग, वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स और कई अन्य खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से अमिट पहचान बनाई है। </p>
<p>लेकिन हर चार साल में होने वाले इस बड़े इवेंट में किसी भी भारतीय एथलीट का करियर महान पिस्टल शूटर जसपाल राणा जितना सफल नहीं रहा है।</p>
<p>जसपाल राणा ने चार बार के कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी शानदार विरासत कायम की। 1994 के विक्टोरिया गेम्स से लेकर 2006 के मेलबर्न गेम्स तक, उन्होंने शूटिंग में 15 पदक अपने नाम किए, जिनमें नौ स्वर्ण पदक शामिल थे। इस शानदार प्रदर्शन के साथ वह <strong>भारत के सबसे सफल कॉमनवेल्थ गेम्स एथलीट बन गए</strong>।</p>
<p>इसके बाद उनके साथी शूटर समरेश जंग का नंबर आता है, जिन्होंने मैनचेस्टर 2002, मेलबर्न 2006 और दिल्ली 2010 गेम्स में कुल 14 पदक अपने नाम किए। इनमें से कई मेडल उन्होंने राणा के साथ मिलकर जीते थे।</p>
<p>टेबल टेनिस के दिग्गज शरत कमल, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के तीन सबसे सफल खिलाड़ियों में एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जो शूटर नहीं हैं। उन्होंने कुल 13 मेडल जीते हैं, जिनमें से सात स्वर्ण हैं।</p>
<p><strong>कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे सफल भारतीय एथलीट</strong></p>
<p><strong>CWG में सबसे सफल भारतीय एथलीट</strong><br />एथलीट                पदक    स्वर्ण    रजत     कांस्य<br />जसपाल राणा        15        9        4           2<br />समरेश जंग            14       7         5           2<br />शरत कमल।          13       7        3।          3</p>
<p><strong>कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन: जानिए कैसा रहा है अब तक का सफर</strong></p>
<p>ऑस्ट्रेलिया की तैराक और कई बार ओलंपिक पदक जीतने वाली एमा मैककॉन, कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 20 (14 गोल्ड, एक सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज) जीतकर सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली एथलीट हैं।</p>
<p>एमा मैककॉन कॉमनवेल्थ गेम्स के अब तक के मेडल टैली में सबसे ऊपर हैं। वहीं भारतीय खेल इतिहास में जसपाल राणा सबसे सफल खिलाड़ी हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के चार संस्करणों में अपनी विरासत गढ़ी, जिसकी शुरुआत 1994 के विक्टोरिया खेलों में अपने यादगार डेब्यू से हुई थी।</p>
<p><strong>विक्टोरिया 1994 राष्ट्रमंडल खेल में जसपाल राणा</strong><br />उन्होंने साल की शुरुआत में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद जसपाल राणा कनाडा के विक्टोरिया में हुए 1994 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे होनहार युवा शूटिंग टैलेंट में से एक के तौर पर शामिल हुए।</p>
<p><strong>सिर्फ 18 साल की उम्र में अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया</strong> और राणा ने चार पदक जीते। उन्होंने 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल और सेंटर-फायर पिस्टल पेयर्स इवेंट में स्वर्ण हासिल किया, जबकि इंडिविजुअल 10 मीटर एयर पिस्टल में रजत और पेयर्स इवेंट में कांस्य पदक जीता।</p>
<p>जसपाल राणा ने बाद में अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय उस माहौल को दिया, जिसने उनके करियर की मजबूत नींव रखी, जो भारतीय खेल इतिहास के सबसे कामयाब करियर में से एक बना।</p>
<p>2022 में स्पोर्टस्टार के साथ एक इंटरव्यू में राणा ने याद करते हुए कहा, "वहां का माहौल बहुत अच्छा था और मैं अपने मेंटर और कोच टिबोर गोंज़ोल के शानदार मार्गदर्शन में अपनी शूटिंग पर ध्यान दे पाया।"</p>
<p><strong>राणा ने अटलांटा 1996 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।</strong></p>
<p>कुआलालंपुर 1998 राष्ट्रमंडल खेल में जसपाल राणा का प्रदर्शन<br />विक्टोरिया गेम्स के चार साल बाद राणा शूटिंग में भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीद के तौर पर कुआलालंपुर पहुंचे।</p>
<p>हालांकि, उनकी तैयारी आसान नहीं थी। दिल्ली के डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में बार-बार बिजली कटौती से इलेक्ट्रॉनिक टारगेट बेकार हो गए थे। साथ ही उपकरणों की दिक्कतों ने भी गेम्स के लिए उनकी तैयारी में काफी मुश्किलें खड़ी कीं।</p>
<p>1998 में इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में, जब उनसे पूछा गया कि कुआलालंपुर जाने से पहले उन्हें सबसे ज्यादा किस चीज की जरूरत है, तो राणा ने बस एक शब्द में जवाब दिया - 'बिजली'।</p>
<p>लेकिन मुकाबला शुरू होने के बाद शुरुआती मुश्किलों का कोई खास असर नहीं पड़ा। राणा ने अपने 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल के इंडिविजुअल और पेयर्स दोनों खिताब सफलतापूर्वक डिफेंड किए। इसके अलावा उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल के  इंडिविजुअल और पेयर्स इवेंट में रजत पदक भी जीते, जिससे कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके कुल पदकों की संख्या आठ हो गई।</p>
<p><strong>मैनचेस्टर 2002 राष्ट्रमंडल खेल में जसपाल राणा</strong><br />मैनचेस्टर में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स राणा के करियर के सबसे शानदार खेल साबित हुए।</p>
<p>उन्होंने मैनचेस्टर में शानदार प्रदर्शन करते हुए छह पदक जीते, जिनमें चार गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल थे। यह पदक उन्होंने 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल, 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल और 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में हासिल किए।</p>
<p>इनमें से एक स्वर्ण पदक उन्होंने समरेश जंग के साथ 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल पेयर्स इवेंट में जीता, जिससे भारतीय शूटिंग की सबसे सफल साझेदारियों में से एक की शुरुआत हुई।</p>
<p>अपने सफर को याद करते हुए राणा का मानते ​​हैं कि भारतीय शूटिंग को आगे बढ़ाने में कॉमनवेल्थ गेम्स ने अहम भूमिका निभाई।</p>
<p><strong>राणा ने कहा,</strong> "कॉमनवेल्थ गेम्स के पेयर्स और इंडिविजुअल इवेंट ने हमें एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए अच्छी तरह तैयार किया।" </p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "शूटिंग के लिए सरकार से मिलने वाली सारी मदद की शुरुआत उसी वजह से हुई थी।"</p>
<p><strong>मेलबर्न 2006 राष्ट्रमंडल खेल में जसपाल राणा</strong><br />अपने डेब्यू के बारह साल बाद राणा भारत के सबसे कामयाब और सम्मानित शूटर के तौर पर मेलबर्न में प्रतिस्पर्धा करने पहुंचे।</p>
<p>उन्होंने एक और पदक हासिल किया। यह स्वर्ण पदक उन्होंने समरेश जंग के साथ मेंस 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल पेयर्स इवेंट में जीता और इस तरह कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पजक जीतकर एक दमदार रिकॉर्ड बनाया।</p>
<p>उनके नाम कुल नौ स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य पदक हैं, जो इन गेम्स में भारतीयों के लिए एक बेंचमार्क बना हुआ है।</p>
<p><strong>जसपाल राणा के कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल</strong></p>
<p>जसपाल राणा के CWG मेडल<br /><strong>मेडल      CWG संस्करण            इवेंट       </strong>  <br />स्वर्ण     1994 विक्टोरिया         25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल<br />स्वर्ण     1994 विक्टोरिय          25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल पेयर्स<br />स्वर्ण     1998 कुआलालंपुर      25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल<br />स्वर्ण     1998 कुआलालंपुर.     25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल पेयर्स<br />स्वर्ण     2002 मैनचेस्टर           25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल<br />स्वर्ण     2002 मैनचेस्टर           25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल पेयर्स<br />स्वर्ण     2002 मैनचेस्टर           25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल<br />स्वर्ण     2002 मैनचेस्टर           25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल पेयर्स<br />स्वर्ण     2006 मेलबर्न              25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल पेयर्स<br />रजत।   1994 विक्टोरिया         10 मीटर एयर पिस्टल<br />रजत     1998 कुआलालंपुर      10 मीटर एयर पिस्टल<br />रजत     1998 कुआलालंपुर      10 मीटर एयर पिस्टल पेयर्स<br />रजत     2002 मैनचेस्टर           10 मीटर एयर पिस्टल पेयर्स<br />कांस्य   1994 विक्टोरिया          10 मीटर एयर पिस्टल पेयर्स<br />कांस्य   2002 मैनचेस्टर            10 मीटर एयर पिस्टल</p>
<p><strong>भारतीय शूटिंग में जसपाल राणा की विरासत</strong><br />भारतीय शूटिंग पर राणा का असर उनके प्रतिस्पर्धी करियर के बाद भी कायम रहा। रिटायर होने के बाद उन्होंने कोच की भूमिका निभाई और देश के पिस्टल निशानेबाजों की अगली पीढ़ी को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p><strong>2018 और 2021 के बीच मनु भाकर के साथ काम किया था</strong>। इसके बाद राणा पेरिस 2024 ओलंपिक से पहले फिर से इस स्टार शूटर के साथ जुड़े।</p>
<p><strong>राणा के शानदार नेतृत्व में भाकर ने इतिहास रच दिया</strong>। आजादी के बाद एक ही ओलंपिक खेलों में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में कांस्य पदक हासिल किए।</p>
<p>नेशनल कैंप से अलग राणा ने जसपाल राणा शूटिंग अकादमी के जरिए उभरते हुए निशानेबाजों को गाइड किया और साथ ही भारतीय शूटिंग के हाई-परफॉर्मेंस प्रोग्राम में अहम भूमिका निभाते रहे।</p>
<p>फरवरी 2025 में उन्हें 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए भारत का हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया गया।</p>
<p><strong>राणा का निधन </strong>जून 2026 में 49 साल की उम्र में हुआ। एक महीने बाद नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने खेल में उनके लंबे समय तक दिए गए योगदान का सम्मान किया। जुलाई 2026 की राइफल और पिस्टल प्रतियोगिता का नाम बदलकर 'जसपाल राणा मेमोरियल इंडिया ओपन कॉम्पिटिशन' कर दिया।</p>
<p>यह महान खिलाड़ी के लिए एक उचित सम्मान था, जिसकी विरासत सिर्फ रिकॉर्डतोड़ पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय निशानेबाजी के विकास, नई प्रतिभाओं को निखारने और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने में उनके योगदान में भी दिखाई देती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 10:13:36 +0530</pubDate>
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