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                <title>Eknath Shinde - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>बालासाहेब की विरासत से राजनीतिक संघर्ष तक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं रही, बल्कि वह एक भावनात्मक आंदोलन और मराठी अस्मिता का प्रतीक भी रही है। इस आंदोलन की नींव शिवसेना संस्थापक  बालासाहेब ठाकरे ने रखी थी। उनकी आक्रामक शैली, स्पष्ट विचारधारा और कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ ने शिवसेना को महाराष्ट्र की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्तियों में शामिल कर दिया था। लेकिन समय के साथ राजनीति बदली, परिस्थितियां बदलीं और नेतृत्व भी बदला। आज शिवसेना के वर्तमान प्रमुख  उद्धव ठाकरे ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जिसे उनके राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन समय माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181463/from-balasahebs-legacy-to-political-struggle"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/h89om7is_balasaheb-thackeray-uddhav-and-raj-thackeray_625x300_23_january_26.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं रही, बल्कि वह एक भावनात्मक आंदोलन और मराठी अस्मिता का प्रतीक भी रही है। इस आंदोलन की नींव शिवसेना संस्थापक  बालासाहेब ठाकरे ने रखी थी। उनकी आक्रामक शैली, स्पष्ट विचारधारा और कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ ने शिवसेना को महाराष्ट्र की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्तियों में शामिल कर दिया था। लेकिन समय के साथ राजनीति बदली, परिस्थितियां बदलीं और नेतृत्व भी बदला। आज शिवसेना के वर्तमान प्रमुख  उद्धव ठाकरे ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जिसे उनके राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन समय माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में उद्धव ठाकरे की राजनीतिक स्थिति लगातार कमजोर होती दिखाई दी है। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार बनने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला, लेकिन इसी फैसले ने उनके सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर दीं। भाजपा के साथ दशकों पुराने गठबंधन को छोड़कर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ सरकार बनाने का निर्णय शिवसेना के पारंपरिक समर्थकों के एक बड़े वर्ग को स्वीकार नहीं हुआ। पार्टी के भीतर भी असंतोष धीरे-धीरे बढ़ने लगा। यही असंतोष आगे चलकर बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2022 में शिवसेना को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने बगावत कर दी। यह केवल विधायकों का विद्रोह नहीं था, बल्कि शिवसेना की संगठनात्मक ताकत और नेतृत्व क्षमता पर भी बड़ा सवाल था। शिंदे गुट ने दावा किया कि वह बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर रहा है। इसके बाद चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को मिलने से उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका लगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद उद्धव ठाकरे ने शिवसेना (यूबीटी) के रूप में अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखी। लोकसभा चुनावों में कुछ सफलता मिलने से ऐसा लगा कि पार्टी फिर से मजबूती की ओर बढ़ रही है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने एक बार फिर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी के सांसदों में असंतोष और संभावित टूट की खबरों ने यह संकेत दिया है कि संगठन अभी भी स्थिर नहीं हो पाया है। यदि सांसदों का बड़ा समूह अलग रास्ता चुनता है तो यह शिवसेना (यूबीटी) के लिए एक और बड़ा राजनीतिक आघात साबित हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उद्धव ठाकरे की सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि वे अपने पिता बालासाहेब ठाकरे जैसी जननेता की छवि नहीं बना सके। बालासाहेब कभी चुनाव नहीं लड़े, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी बात अंतिम मानी जाती थी। उनकी सभाओं में हजारों लोग जुटते थे और उनके एक बयान से राजनीतिक माहौल बदल जाता था। वे अपने समर्थकों के लिए एक करिश्माई नेता थे जिनकी पकड़ संगठन पर पूरी तरह बनी रहती थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके विपरीत उद्धव ठाकरे का व्यक्तित्व अपेक्षाकृत शांत और संयमित माना जाता है। वे टकराव की राजनीति की बजाय संवाद और संगठनात्मक प्रबंधन को प्राथमिकता देते रहे हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कामकाज की कई लोगों ने सराहना की, विशेषकर कोविड-19 महामारी के दौरान। लेकिन राजनीति में केवल प्रशासनिक क्षमता ही पर्याप्त नहीं होती। संगठन को एकजुट रखना, कार्यकर्ताओं में उत्साह बनाए रखना और नेतृत्व के प्रति अटूट विश्वास कायम रखना भी उतना ही आवश्यक होता है। यही वह क्षेत्र है जहां उद्धव ठाकरे को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच सबसे बड़ा अंतर नेतृत्व शैली का दिखाई देता है। बालासाहेब की राजनीति भावनात्मक जुड़ाव, प्रखर हिंदुत्व और आक्रामक वक्तव्यों पर आधारित थी। वे सीधे कार्यकर्ताओं से संवाद करते थे और पार्टी के भीतर असहमति की गुंजाइश बहुत कम रहती थी। दूसरी ओर उद्धव ठाकरे अपेक्षाकृत सौम्य और संस्थागत शैली के नेता हैं। वे गठबंधन राजनीति में विश्वास रखते हैं और कई मुद्दों पर नरम रुख अपनाते दिखाई दिए हैं। यही कारण है कि शिवसेना के कुछ पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं को लगा कि पार्टी अपनी मूल पहचान से दूर जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा से अलग होने का फैसला उद्धव ठाकरे के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। भाजपा और शिवसेना का गठबंधन दशकों पुराना था और दोनों दलों का मतदाता आधार भी काफी हद तक समान था। जब यह गठबंधन टूटा तो शिवसेना के सामने अपनी नई राजनीतिक पहचान स्थापित करने की चुनौती खड़ी हो गई। कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन ने तत्काल सत्ता तो दिलाई, लेकिन लंबे समय में इस फैसले की राजनीतिक कीमत भी चुकानी पड़ी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज स्थिति यह है कि शिवसेना दो हिस्सों में बंटी हुई दिखाई देती है। एक ओर एकनाथ शिंदे का गुट सत्ता में है और उसके पास संगठन का बड़ा हिस्सा तथा आधिकारिक पार्टी पहचान है। दूसरी ओर उद्धव ठाकरे के पास सहानुभूति, एक समर्पित कार्यकर्ता वर्ग और ठाकरे परिवार की विरासत है। लेकिन केवल विरासत के आधार पर राजनीति लंबे समय तक नहीं चल सकती। इसके लिए मजबूत संगठन, प्रभावी नेतृत्व और लगातार जनसंपर्क की आवश्यकता होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल के दिनों में सांसदों और नेताओं की नाराजगी की खबरें यह बताती हैं कि उद्धव ठाकरे को अभी भी संगठन को मजबूत करने के लिए काफी मेहनत करनी होगी। उन्हें यह साबित करना होगा कि शिवसेना (यूबीटी) केवल एक भावनात्मक मंच नहीं, बल्कि भविष्य की एक मजबूत राजनीतिक शक्ति भी है। यदि वे पार्टी के भीतर विश्वास बहाल करने और नए नेतृत्व को आगे लाने में सफल होते हैं तो राजनीतिक वापसी की संभावना बनी रह सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे नाम आज भी प्रभाव रखता है। लेकिन वर्तमान दौर केवल नाम या विरासत के सहारे नहीं जीता जा सकता। राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और दलों के भीतर भी शक्ति संतुलन लगातार बदल रहा है। ऐसे में उद्धव ठाकरे के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी को एकजुट रखना और जनता के बीच यह विश्वास कायम करना है कि शिवसेना (यूबीटी) भविष्य में भी एक मजबूत विकल्प बन सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बालासाहेब ठाकरे ने जिस शिवसेना को संघर्ष, विचारधारा और संगठनात्मक अनुशासन के आधार पर खड़ा किया था, आज वही पार्टी कई हिस्सों में बंटी हुई दिखाई देती है। यह स्थिति केवल उद्धव ठाकरे के लिए ही नहीं, बल्कि उस राजनीतिक विरासत के लिए भी बड़ी परीक्षा है जिसे बालासाहेब ने दशकों की मेहनत से तैयार किया था। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि उद्धव ठाकरे इस संकट से उबरकर अपनी राजनीतिक जमीन फिर से मजबूत कर पाते हैं या महाराष्ट्र की राजनीति में उनका प्रभाव धीरे-धीरे सीमित होता चला जाएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि वे अपने राजनीतिक जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं और उनके सामने खड़ी चुनौतियां पहले से कहीं अधिक कठिन हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:52:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>अशोक खरात मामले का सामाजिक विश्लेषण</title>
                                    <description><![CDATA[<p align="right" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र के नासिक में खुद को त्रिकालज्ञानी और अवतारी पुरुष बताने वाले कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात उर्फ </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">कैप्टन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की गिरफ्तारी की खबर सामने आई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो पूरे देश में सनसनी फैल गई। यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह अंधविश्वास</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता के दुरुपयोग और महिला शोषण के एक ऐसे गठजोड़ का पर्दाफाश था जिसने समाज की रीढ़ को हिला कर रख दिया। रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अधिकारी से लेकर एक प्रभावशाली ज्योतिषी और आध्यात्मिक गुरु बनने तक का सफर तय करने वाले खरात ने अपने इस रूपांतरण का इस्तेमाल महिलाओं के</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174216/social-analysis-of-ashok-kharat-case"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img_20260325_174829.jpg" alt=""></a><br /><p align="right" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र के नासिक में खुद को त्रिकालज्ञानी और अवतारी पुरुष बताने वाले कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात उर्फ </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">कैप्टन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की गिरफ्तारी की खबर सामने आई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो पूरे देश में सनसनी फैल गई। यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह अंधविश्वास</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता के दुरुपयोग और महिला शोषण के एक ऐसे गठजोड़ का पर्दाफाश था जिसने समाज की रीढ़ को हिला कर रख दिया। रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अधिकारी से लेकर एक प्रभावशाली ज्योतिषी और आध्यात्मिक गुरु बनने तक का सफर तय करने वाले खरात ने अपने इस रूपांतरण का इस्तेमाल महिलाओं के यौन शोषण के लिए एक हथियार की तरह किया। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नाशिक क्राइम ब्रांच ने </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">18 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2026 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को सिन्नर तालुके के मिरगांव स्थित उसके फार्महाउस से उसे गिरफ्तार किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस कार्रवाई के पीछे की कहानी कई साल पुरानी थी। एक पीड़िता ने </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2022 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2025 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तक के दौरान हुए उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद पुलिस की नींद खुली और एक बड़े षड्यंत्र का भंडाफोड़ हुआ। इस मामले ने यह साबित कर दिया कि कैसे आध्यात्मिकता के नाम पर अंधविश्वास का व्यापार किया जाता है और कैसे कमजोर वर्ग</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर महिलाएं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसका शिकार बनती हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खरात का तरीका बेहद सुनियोजित और खतरनाक था। उसने अपने आप को भगवान का अवतार और न्यूमेरोलॉजिस्ट के रूप में स्थापित किया था। श्री ईशानेश्वर महादेव ट्रस्ट का चेयरमैन बनकर उसने न केवल आम लोगों बल्कि सत्ता के गलियारों में भी अपनी पैठ बनाई थी। </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2022 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा ट्रस्ट का दौरा करना और गौशाला के लिए दान देना खरात के प्रभाव का जीवित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उदाहरण था। हाई-प्रोफाइल नेता और व्यापारी हेलीकॉप्टर से उसके पास पहुंचते थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसके कद का अंदाजा लगाता है। लेकिन इस आध्यात्मिक चमक के पीछे एक काला सच छिपा था। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खरात महिलाओं को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">योनि पूजा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">', '</span><span lang="hi" xml:lang="hi">संतान प्राप्ति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पति की रक्षा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे झूठे अनुष्ठानों के नाम पर अपने जाल में फंसाता था। इसका सबसे खतरनाक हथियार था </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओश्नो जल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">। यह कोई पवित्र जल नहीं बल्कि कफ सिरप</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पानी और कुटी हुई वियाग्रा का मिश्रण था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे पीने से महिलाओं में उत्तेजना और लत लग जाती थी। सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने जब इसका राजफाश किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक खरात अपना साम्राज्य खड़ा कर चुका था। पुलिस की जांच में पाया गया कि इस नशीले पेय का इस्तेमाल महिलाओं को बेहोश या उत्तेजित करके उनके साथ शोषण करने के लिए किया जाता था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने जो सबूत बरामद किए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वे चौंकाने वाले थे। मिरगांव फार्महाउस की तलाशी में </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">58 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से लेकर </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">100 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक अश्लील वीडियो क्लिप पेन ड्राइव में मिलीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका इस्तेमाल पीड़िताओं को ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था। हिडन कैमरे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सीसीटीवी फुटेज</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए गए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस बात का सबूत थे कि यह एक संगठित अपराध नेटवर्क था। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अलावा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस को वहां से पिस्तौल और कारतूस भी मिले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो खरात के आपराधिक मनोबल को दर्शाते हैं। सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब संपत्ति के दस्तावेज सामने आए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी कुल कीमत </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">200 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसमें फार्महाउस</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बंगला और जमीन शामिल थी। </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">₹6.5 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लाख नकद भी जब्त किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि अंधविश्वास के नाम पर कमाया गया धन कितना विशाल था और इसका जाल कितना गहरा था। पुलिस ने पाया कि ऑफिस में महिलाओं को मेज पर शोषण के वीडियो भी बनाए गए थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो मानवता को शर्मसार करने वाले थे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कानूनी कार्रवाई के मामले में इस बार पुलिस और प्रशासन सख्त नजर आया। खरात पर महाराष्ट्र ब्लैक मैजिक एक्ट </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2013 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">3(1) </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">3(2) </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत कार्रवाई की गई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो मानव बलि और अमानवीय प्रथाओं को रोकने के लिए बनाया गया है। इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता (</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">BNS) </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">64(1) </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी बलात्कार</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धारा </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">69 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी धोखे से यौन संबंध</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धारा </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">74 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी महिला की गरिमा भंग और धारा </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">351 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी आपराधिक धमकी के तहत मामले दर्ज किए गए। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब तक सरकारवाड़ा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वावी और शिरडी पुलिस स्टेशनों में कुल </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">6 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। नाशिक पुलिस की विशेष जांच टीम (</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">SIT) </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का गठन किया गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका नेतृत्व आईपीएस तेजस्विनी सत्पुते ने किया। एसआईटी ने पीड़िताओं से संपर्क करने के लिए दो हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि डर के मारे चुप बैठी अन्य महिलाएं भी आगे आ सकें। कोर्ट ने खरात की पुलिस कस्टडी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">24 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2026 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तक बढ़ा दी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि गहन पूछताछ की जा सके और नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल मचा दिया। महाराष्ट्र महिला आयोग की चेयरपर्सन रूपाली चाकणकर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एनसीपी से संबद्ध हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस विवाद में घिर गईं। सामने आए एक वीडियो में वे खरात के पैर धोती हुई दिखीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे परिवारिक श्रद्धा बताया गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विपक्ष ने इसे संरक्षण का सबूत माना। चाकणकर ने खरात के अपराधों से अपनी अनभिज्ञता जताई और व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">19-20 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2026 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर यह इस्तीफा स्वीकार किया गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विपक्ष</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर शिवसेना (यूबीटी) और सुषमा अंधारे ने इस पर सवाल उठाए। उन्होंने खरात को संरक्षण देने</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पीड़िताओं की दलाली करने और तंत्र-मंत्र के व्यापार में शामिल होने के आरोप लगाए तथा नार्को टेस्ट की मांग की। यह राजनीतिक विवाद इस बात का संकेत है कि कैसे ऐसे गॉडमैन राजनीतिक पार्टियों के लिए वोट बैंक या प्रभाव का साधन बन जाते हैं और जब पर्दा उठता है तो बड़े नेताओं की कुर्सी भी डगमगा जाती है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे कांड का एक और संवेदनशील पहलू पितृत्व और डीएनए टेस्ट से जुड़ा है। खरात ने कई परिवारों को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">संतान प्राप्ति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का झूठा वादा दिया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कई बच्चों के जन्म हुए। अब सवाल यह है कि इन बच्चों का वास्तविक पिता कौन है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">116 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत विवाहकालीन पैदा हुआ बच्चा पति का माना जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक कि गैर-पहुंच साबित न हो। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2025 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में इवान रथिनम बनाम मिलन जोसेफ मामले में स्पष्ट किया है कि डीएनए टेस्ट रूटीन नहीं हो सकता। इसके लिए मजबूत प्राइमा फेसी सबूत जैसे धोखा या शोषण के सबूत होने चाहिए और कोर्ट के आदेश के बिना पति द्वारा टेस्ट कराना गोपनीयता के उल्लंघन के समान हो सकता है। इससे कानूनी पेचदांनियां खड़ी होती हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि एक तरफ न्याय की मांग है तो दूसरी तरफ बच्चे की पहचान और मानसिक स्थिरता का सवाल। पैटरनिटी फ्रॉड से बच्चों और माताओं में डिप्रेशन और आइडेंटिटी क्राइसिस पैदा हो सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए कोर्ट को काउंसलिंग को अनिवार्य करने की आवश्यकता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक स्तर पर देखें तो यह मामला महाराष्ट्र में अंधविश्वास की जड़ों को उजागर करता है। खरात जैसे गॉडमैन पैसे और पावर के बल पर फलते-फूलते हैं। </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओश्नो जल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे नशीले पदार्थों का इस्तेमाल केवल शारीरिक उत्तेजना के लिए नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मानसिक अधीनता के लिए किया जाता था। महिलाओं को पति की मृत्यु का भय दिखाकर या हिप्नोसिस के जरिए शोषित किया गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उन्हें पीटीएसडी जैसी मानसिक चोटें लगीं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> अंजली दमानिया जैसे कार्यकर्ताओं की मेहनत से यह राज खुला</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह सिस्टम की कमजोरी भी दिखाता है कि इतने बड़े पैमाने पर अपराध होते रहे और पुलिस या प्रशासन की आंखें क्यों खुलीं। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सभी दोषियों को सजा का वादा किया है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल खरात को सजा मिलने से काम चल जाएगा या इसके पीछे के गिरोह और संरक्षणकर्ताओं तक भी जांच पहुंचेगी।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्कैंडल महाराष्ट्र के लिए एक कलंक बनकर उभरा है। बाबा गिरफ्तार हुआ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चेयरपर्सन ने इस्तीफा दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है। सैकड़ों पीड़िताएं अभी भी डर के मारे चुप हैं। एसआईटी को सख्ती बरतनी होगी ताकि न्याय मिल सके। सरकार को पीड़िताओं के लिए काउंसलिंग सेंटर और कानूनी सहायता प्रदान करनी चाहिए। समाज को भी अंधविश्वास छोड़कर विज्ञान और तर्क को अपनाना होगा। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डीएनए और कानून की जटिलताओं के बीच संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है ताकि पीड़ितों पर दोबारा अत्याचार न हो। सच कड़वा हो सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके बिना न्याय असंभव है। यदि समाज को बचाना है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो ऐसे संगठित अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलानी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि आध्यात्मिकता के नाम पर किसी का शोषण न हो। खरात का मामला एक चेतावनी है कि सत्ता और अंधविश्वास का गठजोड़ कितना विनाशकारी हो सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और इसे तोड़ने के लिए कानून</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समाज और प्रशासन को एकजुट होना होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 18:08:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> एक विदूषक से घबड़ाती राजसत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>क्या जमाना आ गया है कि राजसत्ता एक अदने से विदूषक से घबड़ाने लगी है। मुंबई में कुणाल कामरा नाम के एक विदूषक की पैरोडी के बाद एक वर्णसंकर  सियासी दल के कार्यकर्ताओं ने कुणाल के दफ्तर में जिस तरह से तबाही मचाई उसे देखकर लगता है कि  राजसत्ता कितनी कमजोर और असहिष्णु है। कुणाल ने किसी का नाम नहीं लिया । किसी को गाली नहीं दी ,लेकिन कहते हैं न कि-' चोर की दाढ़ी में तिनका ' होता है ,सो चोरों ने कुणाल को निशाने पर ले लिये। अब महाराष्ट्र की पूरी राजसत्ता कुणाल के खिलाफ राजदंड लिए खड़ी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150312/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/kunal-1.jpg" alt=""></a><br /><p>क्या जमाना आ गया है कि राजसत्ता एक अदने से विदूषक से घबड़ाने लगी है। मुंबई में कुणाल कामरा नाम के एक विदूषक की पैरोडी के बाद एक वर्णसंकर  सियासी दल के कार्यकर्ताओं ने कुणाल के दफ्तर में जिस तरह से तबाही मचाई उसे देखकर लगता है कि  राजसत्ता कितनी कमजोर और असहिष्णु है। कुणाल ने किसी का नाम नहीं लिया । किसी को गाली नहीं दी ,लेकिन कहते हैं न कि-' चोर की दाढ़ी में तिनका ' होता है ,सो चोरों ने कुणाल को निशाने पर ले लिये। अब महाराष्ट्र की पूरी राजसत्ता कुणाल के खिलाफ राजदंड लिए खड़ी है।</p>
<p>कोई माने या न माने किन्तु ये कटु सत्य है कि  भाजपा जब से सत्ता में आयी है तभी से देश में असहिष्णुता ,साम्प्रदायिकता,संकीर्णता और बेसब्री सीमा से ज्यादा बढ़ गयी है।  भाजपा सनातन की बात करती है ,भारतीय शिक्षा और संस्कारों की बात करती है लेकिन इसके बारे में शायद जानती कुछ भी नहीं है ।  यदि जानती होती तो कुणाल कामरा के शो को लेकर तालिबानों की तरह उसके ऊपर टूट न पड़ती। कामरा के शो को लेकर बवाल शिव सेना [एकनाथ शिंदे ]ने किया है। शिंदे के बारे में कुणाल ने जो कहा वो कटु सत्य है कि  शिंदे ने न सिर्फ मूल शिव सेना से गद्दारी की बल्कि अपना सियासी बल्दियत भी बदली। बस यही वो दुखती रग थी जिसके ऊपर हाथ रखने से एकनाथ के कार्यकर्ता गुंडई पर उतर ए और उन्होंने कुणाल को सजा देने का दुस्साहस दिखा दिया।</p>
<p>शिवसेना हो या भाजपा या कांग्रेस जब भी सत्ता में आते हैं तब उनका चरित्र लगभग एक जैसा हो जाता है। कांग्रेस चूंकि लम्बे समय तक सत्ता में रही इसलिए इसने सब्र करना भी सीखा और हास्य बोध   भी पैदा किया ,अन्यथा कांग्रेस के राज में लक्ष्मण, शंकर, सुधीर तैलंग  या काक जैसे मशहूर व्यंग्य चित्रकार पनप न पाते।  न राग दरबारी लिखी जा सकती थी और न हरिशंकर परसाई जैसे लेखक जीवित रह पाते ।  परसाई जी को भी संघियों ने मारने की कोशिश की थी लेकिन वे अपनी कमर टूटने के बाद भी दशकों तक अपना काम करते रहे। शिवसेना को शायद ये पता नहीं है कि  शिवसेना का ट्रीटमेंट हो   या  संघ का ट्रीटमेंट, किसी विदूषक को,किसी व्यंग्यकार को किसी हास्य कलाकार को उसका काम करने से रोक नहीं सकता।</p>
<p>भारतीय ज्ञान परमपरा की वक़ालत करने वाले संघी और शिवसैनिक शायद भारतीय ज्ञान परंपरा को जानते ही नहीं है।  उन्हें पता  ही नहीं है कि  साहित्यमें ,नाटक में कितने रस होते हैं ? वे यदि ये सब जानते तो खुद अपने पुरखों की कला का सम्मान करते ।  शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे खुद  एक व्यग्यकार यानि विदूषकों की बिरादरी से आते थे।  व्यंग्य के लिए कलम हो,कूची हो या मंच हो एक सशक्त माध्यम होता है। हास्य कलाकर हिंदुस्तान में भी होते हैं और पाकिस्तान में भी।</p>
<p>इंग्लैंड  में भी होते हैं और अमरीका में भी। जीवन में यदि हास्य और व्यंग्य न हो तो जीवन न सिर्फ नीरस हो बल्कि नर्क बन जाये ।  हास्य-व्यंग्य कलाकार या लेख जीवन को सरस् बनाता है। कटु सत्य को शक्कर में पागकर आपके सामने पेश करता है और ऐसा करना दुनिया के किसी भी मुल्क में अपराध नहीं है । केवल तालिबानी संस्कृति में हसने,व्यंग्य करने पर स्थाई रोक होती है।</p>
<p>भारत की राजनीती में हास्य बोध   लगभग मर चुका है ,हमारे नेता अब व्यंग्य करने वले को,व्यंग्य लिखने वाले को अपना दुश्मन मानने लगे हैं यही वजह है कि  पिछले एक दशक में कुणाल कामरा हों या कीकू सभी को धमकियों का समाना करना पड़ता है ,जेल जाना पड़ता है। लेकिन परसाई के वंशज कभी हार नहीं मानते ।  कुणाल ने भी हार नहीं मानी है। उसे हार मानना भी  नहीं चाहिए। भाजपाई और शिवसेना के कार्यकर्ता शायद न चार्ली चैप्लिन को जानते   हैं और न हमारे यहां के बीरबल को ।</p>
<p> वे मुल्ला नसरुद्दीन को भी नहीं जानते उन्होंने मुंगेरीलाल के बारे में भी पढ़ा और सुना नहीं है। वे तो यदि कुछ सीखे हैं तो तालिबानियों से सीखे हैं / भाजपा को मुसलमानों से नफरत   है तो शिवसेना को बिहारियों और गैर मराठियों से। दोनों कानून को अपने हाथ में लेने में कोई संकोच नहीं करते,खासतौर पर वहां ,जहां उनकी अपनी सरकार हो। कुणाल कि हाथ में संविधान की प्रति देख उन्हें लगा की मंच पर कुणालंहिं राहुल गाँधी खड़े हैं।</p>
<p>हमारे यहां जो तमाम शब्द लोकभाषा में प्रचलित और स्वीकार्य शब्द थे उन्हें भाजपा ने सत्ता में आते ही असंसदीय घोषित कर दिया। अर्थात आप उनका इस्तेमाल संसद के भीतर नहीं करसकते,किन्तु संसद  के बाहर सड़क या किसी और मंच पर इनका इस्तेमाल न अपराध है और न इन्हें प्रतिबंधित किया गया है।  कुणाल ने जिस ' गद्दार ' शब्द का इस्तेमाल अपने गीत में किया वो भी सरकार की नजर में असंसदीय है ।</p>
<p> संसद  की बुकलेट में ‘गद्दार’, ‘घड़ियाली आंसू’, ‘जयचंद’, ‘शकुनी’, ‘जुमलाजीवी’, ‘शर्मिंदा’, ‘धोखा’, ‘भ्रष्ट’, ‘नाटक’, ‘पाखंड’, ‘लॉलीपॉप’, ‘चाण्डाल चौकड़ी’, ‘अक्षम’, ‘गुल खिलाए’ और ‘पिठ्ठू’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल अब लोकसभा और राज्यसभा में अब असंसदीय माना गया है। मेरा तो एक उपन्यास ही ' गद्दार ' नाम से है।गनीमत है की कांग्रेस से भाजपाई हो चुके सिंधिया समर्थकों ने इस पर कोई बखेड़ा खड़ा नहीं किया। वैसे भी  राजनीति में गद्दारी और बाप बदलना एक आम मुहावरा है।  इसे सुनकर यदि कोई बमकता है तो उसे राजनीति छोड़ देना चाहिए।</p>
<p>कुणाल कामरा कोई साहित्यकार नहीं है।  वे एक स्टेंडअप कॉमेडियन हैं। ये उनका व्यवसाय है।  ये व्यवसाय गैर कानूनी नहीं है ,इसलिए उनके ऊपर हुए हमले की ,उन्हें दी जाने वाली धमकियों की घोर निंदा की जाना चाहिए। हमारे यहां तो निंदकों तक को नियरे रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि वे स्वभाव को बिना पानी-साबुन कि निर्मल करने का माद्दा रखते हैं। एक सभ्य समाज में यदि हास्य-व्यंग्य को लेकर सरकार की और से असहिष्णुता का प्रदर्शन किया जायेगा, कलाकारों को धमकाया जायेगा ,उन्हें जेलों में डाला जाएगा    तो लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता। हास्य-व्यंग्य कोई गाली नहीं हैं।</p>
<p>ये अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है ठीक उसी तरह जिस तरह की टीवी है,रेडियो है सोशल मीडिया है। इन सभी माध्यमों की सुरक्षा अनिवार्य है। इस मामले में देश की सरकार को ही नहीं बल्कि देश की सर्वोच्च न्यायपीठ को भी हस्तक्षेप करना चाहिए और कुणाल को ही नहीं  बल्कि हरिशंकर परसाई परम्परा को सांरक्षण देन चाहिए। अन्यथा वो दिन दूर नहीं जबआपको ताश के 52  पत्तों में से जोकर गायब नजर आये ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 11:49:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदर्शनकारियों को कौन भड़का रहा है हमें सब पता है: फडणवीस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर पिछले कई दिनों से जारी आंदोलन ने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया है. आंदोलनकारियों ने सड़क पर उतरकर जमकर उत्पात मचाया और बीड के दो विधायकों के घरों में आग लगा दी. आंदोलनकारियों ने एनसीपी के दफ्तर में भी आग लगाई और कई वाहनों को फूंक डाला. उग्र प्रदर्शन को देखते हुए बीड और धाराशिव जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है. हालांकि महाराष्ट्र में जारी हिंसा के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है.</p>
<p>फडवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार मराठा आरक्षण देने के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136486/fadnavis-we-know-everything-who-is-provoking-the-protesters"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/maratha-protest-1280-720-31-2023.webp" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर पिछले कई दिनों से जारी आंदोलन ने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया है. आंदोलनकारियों ने सड़क पर उतरकर जमकर उत्पात मचाया और बीड के दो विधायकों के घरों में आग लगा दी. आंदोलनकारियों ने एनसीपी के दफ्तर में भी आग लगाई और कई वाहनों को फूंक डाला. उग्र प्रदर्शन को देखते हुए बीड और धाराशिव जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है. हालांकि महाराष्ट्र में जारी हिंसा के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है.</p>
<p>फडवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार मराठा आरक्षण देने के लिए सकारात्मक है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग मराठा आरक्षण की आड़ में राज्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे है. आगजनी कर रहे हैं और लोगों के घरों में ताड़फोड़ कर रहे हैं. यहां तक कि जो वीडियो फुटेज सामने आया है उसमें देखा जा सकता है कि उग्र प्रदर्शनकारियों की भीड़ आम लोगों के घरों में हैं आगजनी की गई है.</p>
<p>ऐसे लोगों से सरकार सख्ती से निपटेगी और उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा. वहीं जो लोग शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, उनसे सरकार बातचीत करेगी. कुछ राजनीतिक पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी वीडियो फुटेज में हंगामा करते देखे गए हैं, उनके ऊपर भी कार्रवाई की जाएगी. यही नहीं जिन जगहों पर OBC नेताओ को धमकियां मिल रही हैं, पुलिस उन आरोपियों को नहीं बख्शेगी.</p>
<p>वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठा आंदोलन के दौरान हिंसा करने वालों को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि सकल मराठा समाज जानता है कि जिस समय ये मुद्दा आया था उस वक्त सरकार में कौन था और किन लोगों ने मराठा समाज के आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में गंवाया है. हमारी कोशिश है कि राज्य में किसी भी तरह का हिंसक प्रदर्शन न हो. मराठा समाज बहुत ही शांतिप्रिय तरीके से आंदोलन करता है. हमें पता है कि इस आंदोलन को कौन भड़का रहा है और इसके पीछे किन लोगों का हाथ है. सरकार का ध्यान इस पर है.</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Oct 2023 19:48:21 +0530</pubDate>
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                <title>मराठा रिजर्वेशन प्रदर्शनकारियों ने मचाया आतंक, NCP विधायक के घर में लगाई आग</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="heading1 my-3"><strong>Maratha Reservation: </strong>महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मामला उस समय हिंसक स्थिति में पहुंच गया जब प्रदर्शनकारियों ने बीड जिले के माजलगैन स्थित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायक प्रकाश सोलंके के आवास को निशाना बनाया। प्रदर्शनकारियों ने एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके के बंगले समेत उनकी महंगी कारों को आग लगा दी।</p>
<p>उनके घर पर भी हमला हुआ और प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें गुस्साए प्रदर्शनकारियों को विधायक के घर पर पथराव करते हुए दिखाया गया है। इसके अलावा, भीड़ ने अपने विरोध के तहत वाहनों को आग लगा दी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136413/maratha-reservation-protesters-created-terror-and-set-fire-to-ncp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/110.jpg" alt=""></a><br /><p class="heading1 my-3"><strong>Maratha Reservation: </strong>महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मामला उस समय हिंसक स्थिति में पहुंच गया जब प्रदर्शनकारियों ने बीड जिले के माजलगैन स्थित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायक प्रकाश सोलंके के आवास को निशाना बनाया। प्रदर्शनकारियों ने एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके के बंगले समेत उनकी महंगी कारों को आग लगा दी।</p>
<p>उनके घर पर भी हमला हुआ और प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें गुस्साए प्रदर्शनकारियों को विधायक के घर पर पथराव करते हुए दिखाया गया है। इसके अलावा, भीड़ ने अपने विरोध के तहत वाहनों को आग लगा दी।</p>
<p>घटना पर प्रकाश सोलंके कहा कि जब हमला हुआ तब मैं अपने घर के अंदर था। सौभाग्य से, मेरे परिवार का कोई भी सदस्य या कर्मचारी घायल नहीं हुआ। हम सभी सुरक्षित हैं लेकिन एक आग के कारण संपत्ति का भारी नुकसान हुआ। प्रकाश सोलंके के बीड आवास पर हमले पर सीएम एकनाथ शिंदे का कहा की मनोज जरांगे पाटिल (मराठा आरक्षण कार्यकर्ता) को इस तथ्य पर ध्यान देना चाहिए कि यह विरोध क्या मोड़ ले रहा है।</p>
<p>यह गलत दिशा में जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए बनी जस्टिस शिंदे कमेटी ने अपनी पहली रिपोर्ट हमें सौंप दी है. समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए दो महीने का विस्तार दिया गया है। </p>
<p>शिंदे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट मराठा आरक्षण के मुद्दे पर हमारी सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। उन्होंने कहा कि लोगों से मेरी गंभीर अपील है कि वे कोई भी अतिवादी कदम न उठाएं, हम मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आज कैबिनेट बैठक में मराठा आरक्षण प्रदान करने पर न्यायमूर्ति शिंदे समिति की रिपोर्ट को औपचारिक रूप से स्वीकार करेंगे और राजस्व विभाग द्वारा कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश जारी किए जाएंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>महाराष्ट्र/गोवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 13:44:14 +0530</pubDate>
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