<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/109760/sonam-wangchuk-hunger-strike" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Sonam Wangchuk Hunger Strike - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/109760/rss</link>
                <description>Sonam Wangchuk Hunger Strike RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वांगचुक को जबरन इलाज, जिम्मेदारी या स्वतंत्रता पर हस्तक्षेप</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाना और उसके बाद शुरू हुआ विवाद केवल एक व्यक्ति के इलाज का मामला नहीं है। इसने भारतीय लोकतंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिक अधिकारों और राज्य की जिम्मेदारियों से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक के स्वास्थ्य की प्रतिदिन सरकारी डॉक्टरों से निगरानी कराई जाए और यदि डॉक्टर आवश्यक समझें तो चिकित्सा हस्तक्षेप किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि</span></p></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183663/forced-treatment-of-wangchuk-as-interference-with-responsibility-or-freedom"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाना और उसके बाद शुरू हुआ विवाद केवल एक व्यक्ति के इलाज का मामला नहीं है। इसने भारतीय लोकतंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिक अधिकारों और राज्य की जिम्मेदारियों से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक के स्वास्थ्य की प्रतिदिन सरकारी डॉक्टरों से निगरानी कराई जाए और यदि डॉक्टर आवश्यक समझें तो चिकित्सा हस्तक्षेप किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि "हर नागरिक का जीवन बहुमूल्य है और उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास होना चाहिए। इसके बाद जब वांगचुक की हालत और बिगड़ी तो दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> पुलिस ने इसे अदालत के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह के अनुरूप उठाया गया कदम बताया। वहीं वांगचुक के समर्थकों और परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल ले जाया गया और बिना सहमति इलाज की कोशिश की गई। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि अदालत ने "जबरन अस्पताल ले जाने" का स्पष्ट आदेश नहीं दिया था। अदालत ने सरकार से कहा था कि स्वास्थ्य की नियमित निगरानी हो और डॉक्टरों की राय के अनुसार आवश्यक चिकित्सा हस्तक्षेप किया जाए। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाद में प्रशासन ने इसी आधार पर अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। क्या चिकित्सा हस्तक्षेप का अर्थ व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में भर्ती करना भी हो सकता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर इसके लिए अलग कानूनी प्रक्रिया और स्पष्ट सहमति आवश्यक है</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय संविधान का अनुच्छेद </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दोनों की रक्षा करता है। यदि कोई व्यक्ति पूरी मानसिक क्षमता में है और स्वयं कोई निर्णय ले रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सामान्य परिस्थितियों में उसकी इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। दूसरी ओर यदि लंबे अनशन के कारण जीवन पर तत्काल खतरा उत्पन्न हो जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो राज्य पर भी नागरिक का जीवन बचाने की जिम्मेदारी होती है। यही वह बिंदु है जहां नैतिक और कानूनी दोनों प्रकार का टकराव उत्पन्न होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या जबरन इलाज उचित है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का कोई सीधा उत्तर नहीं है। जबरन इलाज के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि सरकार किसी नागरिक को मरते हुए नहीं देख सकती। यदि जीवन बचाया जा सकता है तो प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए। अदालत ने भी जीवन की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। वहीं विरोध करने वालों का कहना है कि</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शांतिपूर्ण अनशन लोकतांत्रिक विरोध का संवैधानिक माध्यम है। यदि व्यक्ति मानसिक रूप से सक्षम है तो उसकी इच्छा सर्वोपरि होनी चाहिए। बिना सहमति चिकित्सा हस्तक्षेप व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन माना जा सकता है। परिवार की आपत्ति ने बढ़ाया विवाद वांगचुक की पत्नी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी अनुमति के बिना कोई उपचार न किया जाए। इससे विवाद और गहरा गया क्योंकि अब मामला केवल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि परिवार की सहमति का प्रश्न भी सामने आ गया। इस घटनाक्रम के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ ने इसे जीवन बचाने की आवश्यक कार्रवाई बताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि अन्य ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कहा। अस्पताल ले जाने के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए। लोकतंत्र केवल विरोध का अधिकार नहीं देता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राज्य पर नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी डालता है। इसलिए ऐसे मामलों में संतुलन बनाना सबसे कठिन कार्य होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकार हस्तक्षेप नहीं करती और कोई अप्रिय घटना हो जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसी सरकार पर लापरवाही का आरोप लगता। वहीं हस्तक्षेप करने पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर सवाल उठते हैं। सोनम वांगचुक का मामला केवल एक अनशन या एक अदालत के आदेश तक सीमित नहीं है। इसने यह बहस फिर से जीवित कर दी है कि किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्यक्ति की स्वायत्तता और राज्य की संरक्षणकारी भूमिका के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने नियमित चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा हस्तक्षेप का निर्देश दिया था</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पताल ले जाने और उसके तरीके को लेकर अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183663/forced-treatment-of-wangchuk-as-interference-with-responsibility-or-freedom</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/183663/forced-treatment-of-wangchuk-as-interference-with-responsibility-or-freedom</guid>
                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 21:04:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/hindi-divas6.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वानचुंग को उठाए जाने के खिलाफ़ दिशा छात्र संगठन ने प्रदर्शन किया राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  ब्यूरो प्रयागराज,</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परीक्षाओं में धाँधली और पेपर लीक के खिलाफ़ दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध तरीके से उठाए जाने और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के खिलाफ़ दिशा छात्र संगठन की ओर से इलाहाबाद में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन में बात रखते हुए दिशा छात्र संगठन के संजय ने कहा कि दिल्ली पुलिस लगातार नागरिकों के जनवादी अधिकारों पर हमले कर रही है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रतिरोध हमारा जनवादी अधिकार हैं लेकिन मौजूद सरकार इसको भी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183660/disha-student-organization-demonstrated-against-the-lifting-of-wanchung-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260718-wa0082.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज,</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परीक्षाओं में धाँधली और पेपर लीक के खिलाफ़ दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध तरीके से उठाए जाने और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के खिलाफ़ दिशा छात्र संगठन की ओर से इलाहाबाद में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन में बात रखते हुए दिशा छात्र संगठन के संजय ने कहा कि दिल्ली पुलिस लगातार नागरिकों के जनवादी अधिकारों पर हमले कर रही है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रतिरोध हमारा जनवादी अधिकार हैं लेकिन मौजूद सरकार इसको भी बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोनम वांगचुक को अगवा करने के बाद दिल्ली पुलिस लगातार दिल्ली हाईकोर्ट का हवाला दे रही है। लेकिन सच्चाई यह है की दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक की जान बचाने का निर्देश दिया था न कि अगवा करने का। अगर दिल्ली पुलिस और केंद्र तथा दिल्ली की सरकार सोनम की ज़िंदगी को लेकर इतना ही चिंतित थी तो उसे सोनम से वार्ता करने आना चाहिए। लेकिन वार्ता करने की जगह पर अलोकतांत्रिक तरीके से कार्यकर्ताओं को अलावा करना निंदनीय हैं। हम इसकी भर्त्सना करते हैं और सभी इंसाफपसंद लोगों से अपील करते हैं कि देश में लोकतान्त्रिक मूल्यों की बहाली के लिए आगे आयें। </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन में जय, हर्ष, अमन, धोनी, सुहानी, पूजा, आरती, विंदरेश, प्रेमचंद, अधिवक्ता अनीस सहित दर्जनों छात्र मौजूद रहे। </div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183660/disha-student-organization-demonstrated-against-the-lifting-of-wanchung-and</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/183660/disha-student-organization-demonstrated-against-the-lifting-of-wanchung-and</guid>
                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:17:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img-20260718-wa0082.jpg"                         length="156452"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        