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                <title>Religious Festival - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Religious Festival RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>श्रीभूमि जिला के दुल्लभछड़ा बड़ाबाजार में भव्य झूलन यात्रा, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात:</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र झूलन यात्रा को लेकर 28 अगस्त शुक्रवार को श्रीभूमि जिले के दुल्लभछड़ा बड़ाबाजार में उत्सव का माहौल देखने को मिला। वर्ष 1971 से चली आ रही इस पारंपरिक धार्मिक यात्रा में इस बार भी कई नई थीम, आकर्षक सजावट और विशेष आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। झूलन यात्रा का आनंद लेने के लिए सुबह से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं दर्शक बड़ाबाजार पहुंचने लगे। रूपांजलि क्लब के द्वारा आयोजित झूलन यात्रा में इस बार विभिन्न नई थीम और मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किए गए। भगवान</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186713/a-huge-crowd-of-devotees-gathered-for-the-grand-jhulan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001744998.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात:</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र झूलन यात्रा को लेकर 28 अगस्त शुक्रवार को श्रीभूमि जिले के दुल्लभछड़ा बड़ाबाजार में उत्सव का माहौल देखने को मिला। वर्ष 1971 से चली आ रही इस पारंपरिक धार्मिक यात्रा में इस बार भी कई नई थीम, आकर्षक सजावट और विशेष आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। झूलन यात्रा का आनंद लेने के लिए सुबह से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं दर्शक बड़ाबाजार पहुंचने लगे। रूपांजलि क्लब के द्वारा आयोजित झूलन यात्रा में इस बार विभिन्न नई थीम और मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किए गए। भगवान श्रीकृष्ण की झूलन यात्रा के भव्य एवं आकर्षक स्वरूप को देखने के लिए हर आयु वर्ग के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं, स्टार क्लब की ओर से भी विशेष आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि क्लब के सदस्यों ने उत्सव के संचालन तथा भीड़ नियंत्रण में सक्रिय सहयोग किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण बड़ाबाजार क्षेत्र चहल-पहल से भरा रहा। धार्मिक आयोजन के साथ-साथ बड़ाबाजार में मेले जैसा माहौल भी देखने को मिला। क्षेत्र में सुबह से ही खाने-पीने की सामग्री, मिठाई, खिलौने और विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की दुकानें सज गई थीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्सव का भरपूर आनंद लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नई-नई थीम, आकर्षक सजावट और भव्य आयोजन को देखकर श्रद्धालुओं एवं दर्शकों में खासा उत्साह नजर आया। आयोजन समिति के प्रयासों की लोगों ने जमकर सराहना की। उत्सव में उमड़ी भीड़ ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए उत्सव स्थल पर शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजक क्लबों के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं एवं दर्शकों से परिवार के साथ उत्सव में शामिल होकर शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से झूलन यात्रा का आनंद लेने के लिए धन्यवाद ज्ञापन किया। उत्सव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सहयोग के लिए आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं एवं दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए राताबाड़ी और निविया पुलिस प्रशासन तथा सीआरपीएफ जवानों के प्रति भी आयोजक समिति ने धन्यवाद एवं कृतज्ञता व्यक्त की। सुरक्षा व्यवस्था में उनके सहयोग से पूरे आयोजन के दौरान शांति एवं व्यवस्था बनी रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्ष 1971 से चली आ रही जिले के दुल्लभछड़ा बड़ाबाजार की झूलन यात्रा क्षेत्र के प्रमुख पारंपरिक धार्मिक एवं सामाजिक उत्सवों में से एक है। प्रत्येक वर्ष यह आयोजन लोगों के बीच उत्साह और उमंग का संचार करता है। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और भव्य आयोजन के कारण झूलन यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक बड़े जनमिलन समारोह का रूप लेती नजर आई।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 22:59:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर दण्डेश्वर नाथ धाम पहुंचे एसपी अमेठी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>शुकुल बाजार।</strong>    श्रावण मास के अंतिम सोमवार के दृष्टिगत जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अधीक्षक अमेठी सरवणन टी. ने सोमवार को थाना भाले सुल्तान शहीद स्मारक क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध दण्डेश्वर नाथ धाम मंदिर का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया तथा मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक ने श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। एसपी के इस आत्मीय अंदाज से श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने मंदिर परिसर, प्रवेश</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186305/sp-amethi-reached-dandeshwar-nath-dham-on-the-last-monday"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/2-4.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>शुकुल बाजार।</strong>  श्रावण मास के अंतिम सोमवार के दृष्टिगत जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अधीक्षक अमेठी सरवणन टी. ने सोमवार को थाना भाले सुल्तान शहीद स्मारक क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध दण्डेश्वर नाथ धाम मंदिर का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया तथा मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक ने श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। एसपी के इस आत्मीय अंदाज से श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने मंदिर परिसर, प्रवेश एवं निकास मार्ग तथा श्रद्धालुओं की भीड़ को लेकर की गई व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया।एसपी सरवणन टी. ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पुलिसकर्मी पूरी सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी का निर्वहन करें। उन्होंने श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने देने के भी निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान पुलिस अधीक्षक ने मेला प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों एवं मंदिर के पुजारियों से वार्ता कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने मंदिर परिसर में साफ-सफाई, भीड़ प्रबंधन एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।पुलिस अधीक्षक ने कहा कि श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना पुलिस की प्राथमिकता है।इस अवसर पर क्षेत्राधिकारी मुसाफिरखाना अतुल कुमार सिंह सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 20:10:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विहारेश्वर मंदिर से लेकर मारकाडेयश्वर महादेव मंदिर तक भक्तों ने जयकारे लगाए</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतन्त्र प्रभात संबाद दाता</strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>कानपुर ग्रामीण।</strong></div>
<div>  </div>
<div>सजेती जयकारों के बीच भगवान शिव का दूध और गंगा जल से अभिषेक किया, बेलपत्र, धतूरा,शहद, और पुष्प अर्पित कर विधि विधान से पूजा अर्चना की,, ओर परिवार की सुख सम्रद्धि की कामना की , आपको बताते चलें कि निबिया खेड़ा में स्थित बारीश्वर महादेव और कुष्मांडा देवी मंदिर परिसर में स्थित शिवालय,और सिधौल के मारकाडेयश्वर महादेव,सजेती के विहारेशवर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई, मंदिर परिसर में हर हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा,मारकाडेयश्वर महादेव मंदिर की मुख्य पुजारी शिव कली सैनी ने बताया कि बहुत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186265/devotees-cheered-from-vihareshwar-temple-to-markadeyeshwar-mahadev-temple"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002237626.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतन्त्र प्रभात संबाद दाता</strong></div>
<div> </div>
<div><strong>कानपुर ग्रामीण।</strong></div>
<div> </div>
<div>सजेती जयकारों के बीच भगवान शिव का दूध और गंगा जल से अभिषेक किया, बेलपत्र, धतूरा,शहद, और पुष्प अर्पित कर विधि विधान से पूजा अर्चना की,, ओर परिवार की सुख सम्रद्धि की कामना की , आपको बताते चलें कि निबिया खेड़ा में स्थित बारीश्वर महादेव और कुष्मांडा देवी मंदिर परिसर में स्थित शिवालय,और सिधौल के मारकाडेयश्वर महादेव,सजेती के विहारेशवर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई, मंदिर परिसर में हर हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा,मारकाडेयश्वर महादेव मंदिर की मुख्य पुजारी शिव कली सैनी ने बताया कि बहुत दूर दूर से श्रद्धालु आते है और परिवार की सुख सम्रद्धि की कामना करते हैं, और हर हर महादेव के जयकारे लगाते आते-जाते हैं,विहारेश्वर महादेव मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया है मारकाडेयश्वर महादेव मंदिर की आस्था के अनुसार कन्या भोज का आयोजन किया गया है,सजेती के विहारेश्वर महादेव मंदिर कानपुर सागर हाइवे पर स्थित है जहां पर मेले का भी आयोजन किया गया है सजेती पुलिस मंदिर एवं मेले की सुरक्षा व्यवस्था में पूरी निष्ठा के साथ तैनात रही मेले में महिलाओं ने खूब खरीददारी की बच्चों ने मेले का लुत्फ उठाया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 17:29:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सावन के तीसरे सोमवार को बाल्हेश्वर मंदिर में कांवड़ियों पर हुई पुष्पवर्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)।</strong> सावन के तीसरे सोमवार को ऐहार स्थित प्रसिद्ध बाबा बाल्हेश्वर धाम में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर बाबा बाल्हेश्वर के दर्शन किए और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुजारी झिलमिल जी महाराज और सह पुजारी संजीव महाराज ने पूजा-अर्चना व आरती कराई। इसके बाद तड़के करीब चार बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मंगला आरती के बाद दर्शन के लिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185416/flowers-were-showered-on-kanwariyas-in-balheshwar-temple-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260817-wa0293.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)।</strong> सावन के तीसरे सोमवार को ऐहार स्थित प्रसिद्ध बाबा बाल्हेश्वर धाम में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर बाबा बाल्हेश्वर के दर्शन किए और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुजारी झिलमिल जी महाराज और सह पुजारी संजीव महाराज ने पूजा-अर्चना व आरती कराई। इसके बाद तड़के करीब चार बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मंगला आरती के बाद दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। महिला, पुरुष और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में कांवड़िये भी बाबा के दरबार में पहुंचे। कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रद्धालुओं ने बाबा बाल्हेश्वर के शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित कर मन्नतें मांगीं। मंदिर परिसर के बाहर लगा पारंपरिक मेला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। प्रसाद, पूजा सामग्री, श्रृंगार, खिलौने और खान-पान की दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिली। बच्चों ने झूलों का आनंद लिया, जबकि महिलाओं ने श्रृंगार और घरेलू सामान की खरीदारी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए डलमऊ तहसील प्रशासन और लालगंज पुलिस की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर परिसर और प्रवेश मार्गों पर बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं की कतारों को व्यवस्थित किया गया। महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी निगरानी करते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">वहीं, मंदिर समिति के स्वयंसेवकों ने भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने में सहयोग किया। पूरे दिन बाल्हेश्वर धाम हर-हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय बना रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 19:35:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>प्रकृति, पितरों और महादेव की आराधना का पावन संगम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">सावन मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। वर्षा ऋतु में जब धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, खेतों में नई फसलें लहलहाने लगती हैं और पेड़-पौधे नई ऊर्जा से भर उठते हैं, तब आने वाला यह पर्व धर्म और प्रकृति के अनूठे संबंध का संदेश देता है। इस वर्ष हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। उदयातिथि के आधार पर पर्व की तिथि 12 अगस्त मानी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भगवान शिव की आराधना, पितरों के स्मरण, स्नान, दान-पुण्य और पौधारोपण के लिए विशेष शुभ माना जाता है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185109/sacred-confluence-of-worship-of-nature-ancestors-and-mahadev"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002134843.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">सावन मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। वर्षा ऋतु में जब धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, खेतों में नई फसलें लहलहाने लगती हैं और पेड़-पौधे नई ऊर्जा से भर उठते हैं, तब आने वाला यह पर्व धर्म और प्रकृति के अनूठे संबंध का संदेश देता है। इस वर्ष हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। उदयातिथि के आधार पर पर्व की तिथि 12 अगस्त मानी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भगवान शिव की आराधना, पितरों के स्मरण, स्नान, दान-पुण्य और पौधारोपण के लिए विशेष शुभ माना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हरियाली अमावस्या केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। सदियों से इस दिन वृक्ष लगाने, उनकी पूजा करने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की परंपरा रही है। यही कारण है कि देश के अनेक हिस्सों में इसे धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्रकृति उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। विशेष रूप से राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तरप्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कई क्षेत्रों में इस अवसर पर मेले और सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैदिक पंचांग के अनुसार सावन मास की अमावस्या तिथि 11 अगस्त की रात से प्रारंभ होकर 12 अगस्त की रात तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन कई ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ संयोग बनने की बात कही जा रही है। पुष्य नक्षत्र, गौरी योग और गजकेसरी योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी बताया गया है। धार्मिक मान्यता में ऐसे शुभ संयोगों को पूजा, दान, जप, तप और सेवा जैसे कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि अलग-अलग पंचांगों में योग और समय की गणना में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना उचित रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सावन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में सावन की अमावस्या पर शिव आराधना का महत्व और बढ़ जाता है। श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। कई स्थानों पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया जाता है। ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए महादेव से परिवार के सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि सावन में श्रद्धा से की गई शिव आराधना मन को शांति देती है और भक्त को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमावस्या तिथि का संबंध पितरों से भी जोड़ा जाता है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर पूर्वजों का स्मरण, तर्पण और श्रद्धापूर्वक दान करने की परंपरा है। श्रद्धालु पवित्र नदी, सरोवर या अन्य जल स्रोत पर स्नान के बाद पितरों का तर्पण करते हैं। जिन लोगों के लिए विधिवत तर्पण संभव नहीं होता, वे घर पर ही श्रद्धा से पूर्वजों का स्मरण कर उनके नाम से दान-पुण्य कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पितरों के प्रति कृतज्ञता और सेवा भाव से परिवार में सुख-शांति का वातावरण बनता है। इस दिन अन्न, वस्त्र और जरूरत की सामग्री का दान करने की भी परंपरा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हरियाली अमावस्या का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष पौधारोपण माना जाता है। वर्षा ऋतु पौधों के विकास के लिए अनुकूल होती है, इसलिए इस दिन लगाया गया पौधा प्रकृति संरक्षण का प्रतीक बन जाता है। भारतीय परंपरा में पीपल, बरगद, नीम, आंवला, बेल, शमी, कदंब और आम जैसे वृक्षों को विशेष महत्व दिया गया है। धार्मिक मान्यताओं में इन वृक्षों को देवत्व से जोड़ा गया है। पीपल को त्रिदेव से संबंधित माना गया है, जबकि आंवले के वृक्ष को लक्ष्मीनारायण से जोड़े जाने की परंपरा है। इन मान्यताओं के पीछे वृक्षों को सुरक्षित रखने और समाज को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने की भावना भी देखी जा सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति में प्रकृति संरक्षण कोई आधुनिक विचार नहीं है। वेदों और प्राचीन ग्रंथों में पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और वनस्पतियों के संरक्षण का संदेश मिलता है। नदियों और जलाशयों को पवित्र मानना, वृक्षों की पूजा करना और प्राकृतिक संसाधनों को देवत्व से जोड़ना इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा रहा है। हरियाली अमावस्या इसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाला पर्व है। आज जब जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण, घटते वन क्षेत्र और जल संकट जैसी चुनौतियां सामने हैं, तब इस पर्व का पर्यावरणीय संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि लगाए गए पौधे की नियमित देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। हरियाली अमावस्या पर यदि कोई व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसे बड़ा करने का संकल्प लेता है तो यह पर्व के वास्तविक उद्देश्य को सार्थक करने वाला कदम होगा। धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी जुड़ जाए तो एक छोटा-सा प्रयास आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव का आधार बन सकता है। पेड़ केवल हरियाली नहीं देते, बल्कि छाया, फल, पक्षियों को आश्रय और वातावरण को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में हरियाली अमावस्या सामाजिक उत्सव का रूप भी लेती है। गांवों और कस्बों में मेले लगते हैं, लोग परिवार के साथ उत्सव में शामिल होते हैं और पारंपरिक प्रसाद वितरित किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में गेहूं, ज्वार, चना और मक्का जैसे अनाजों की सांकेतिक बुआई की परंपरा भी रही है। इसके माध्यम से आने वाली कृषि ऋतु के बारे में लोक मान्यताओं के आधार पर अनुमान लगाया जाता है। गुड़ और गेहूं की धानी जैसे पारंपरिक प्रसाद भी कई इलाकों में इस पर्व की पहचान हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हरियाली अमावस्या हमें यह भी याद दिलाती है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। सेवा, दान, प्रकृति की रक्षा और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता भी धार्मिक जीवन का हिस्सा हैं। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना, किसी गरीब परिवार की सहायता करना, पक्षियों के लिए पानी रखना या किसी सार्वजनिक स्थान पर पौधा लगाकर उसकी देखभाल करना भी इस पर्व की भावना के अनुरूप माना जा सकता है। दान करते समय दिखावे के बजाय सेवा और संवेदना की भावना को महत्व देना भारतीय परंपरा का मूल संदेश रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार क्रोध, विवाद और कटु वचन से बचने तथा सात्विक जीवन जीने की सलाह दी जाती है। हरे-भरे पेड़ों को नुकसान न पहुंचाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प भी लिया जा सकता है। अमावस्या के दिन आत्मचिंतन और ध्यान के माध्यम से मन को शांत करने की परंपरा भी रही है। इस तरह यह पर्व व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का बोध कराता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हरियाली अमावस्या का संदेश आज के समय में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण दिखाई देता है। एक ओर यह सावन की भक्ति और भगवान शिव की आराधना से जुड़ी है, दूसरी ओर पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का अवसर देती है। इसके साथ ही पौधारोपण के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण बनाने की प्रेरणा मिलती है। धर्म, परंपरा और प्रकृति जब एक साथ आते हैं तो हरियाली अमावस्या केवल एक तिथि नहीं रह जाती, बल्कि जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का पर्व बन जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">12 अगस्त को जब देशभर में श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक करेंगे, पितरों का स्मरण करेंगे और दान-पुण्य करेंगे, तब इस पर्व की वास्तविक सार्थकता तभी होगी जब उसके साथ प्रकृति के संरक्षण का संकल्प भी जुड़ा हो। एक पौधा लगाना, उसे वृक्ष बनते देखना और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी लेना आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे सुंदर उपहार हो सकता है। यही हरियाली अमावस्या का मूल संदेश है कि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो जीवन सुरक्षित रहेगा और जीवन में हरियाली रहेगी तो सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 22:23:36 +0530</pubDate>
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                <title>श्रीभूमि जिले के दुल्लभछड़ा दशभुजा संघ के दुर्गोत्सव की तैयारियां शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि : </strong>10 अगस्त : शारदीय दुर्गोत्सव को लेकर दुल्लभछड़ा दशभुजा संघ की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस वर्ष संघ द्वारा आयोजित सार्वजनिक दुर्गापूजा अपने नवें वर्ष में प्रवेश कर रही है। पूजा को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए कई विशेष तैयारियां की जा रही हैं। आगामी दुर्गोत्सव के सफल आयोजन को लेकर गत 1 अगस्त 2026 को आनंदमयी ड्रग डिस्ट्रीब्यूटर के स्वामी मिथुन शर्मा चौधरी के व्यावसायिक प्रतिष्ठान के कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से पूजा संचालन के लिए 51 सदस्यीय नई आयोजन समिति का गठन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185055/preparations-for-durga-utsav-of-dulabhchhada-dashbhuja-sangh-of-shribhoomi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001695530.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि : </strong>10 अगस्त : शारदीय दुर्गोत्सव को लेकर दुल्लभछड़ा दशभुजा संघ की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस वर्ष संघ द्वारा आयोजित सार्वजनिक दुर्गापूजा अपने नवें वर्ष में प्रवेश कर रही है। पूजा को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए कई विशेष तैयारियां की जा रही हैं। आगामी दुर्गोत्सव के सफल आयोजन को लेकर गत 1 अगस्त 2026 को आनंदमयी ड्रग डिस्ट्रीब्यूटर के स्वामी मिथुन शर्मा चौधरी के व्यावसायिक प्रतिष्ठान के कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से पूजा संचालन के लिए 51 सदस्यीय नई आयोजन समिति का गठन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक की शुरुआत संघ के वरिष्ठ एवं समर्पित सदस्य स्वर्गीय चंदन पाल की स्मृति में एक मिनट का मौन रखकर की गई। सदस्यों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। बैठक में रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक विजय मालाकार को पूजा समिति का संयोजक चुना गया। सलाहकार मंडल में दुल्लभछड़ा जिला परिषद सदस्य एवं दशभुजा संघ के शुभचिंतक प्रणव मुखर्जी, चेरागी जिला परिषद सदस्य पंकज रायशर्मा, लालछड़ा जीपी अध्यक्ष संजय गोस्वामी तथा भेटारबंद जीपी की एपी सदस्य सुप्ता दे सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों को शामिल किया गया है। पूजा समिति के अध्यक्ष शंकर दास, सचिव कार्तिक राय और कोषाध्यक्ष दीपन देव चुने गए हैं। दशभुजा संघ के अन्य सदस्यों को कार्यकारिणी सदस्य के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">80 फीट ऊंचा होगा पंडाल इस वर्ष पूजा का मुख्य आकर्षण करीब 80 फीट ऊंचा और 70 फीट लंबा भव्य पंडाल होगा। पंडाल के अग्रभाग में देवी दुर्गा के नौ रूपों का विशेष प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। इसके अलावा श्रीश्री रामकृष्ण परमहंस और मां शारदा देवी की प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। साधक बामाखेपा और रामप्रसाद सेन की प्रतिमाओं को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पंडाल निर्माण एवं सजावटी रोशनी की जिम्मेदारी त्रिपुरा के धर्मनगर स्थित महादेव डेकोरेटर को दी गई है। प्रतिमा निर्माण का कार्य श्रीभूमि जिले के प्रसिद्ध प्रतिमा शिल्पालय द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा काटलीछड़ा के विक्रम लाइट द्वारा दुर्ल्लभछड़ा घोष मिष्ठान्न भंडार के सामने से लेकर दुर्ल्लभछड़ा हरे कृष्ण एमवी स्कूल के सामने तक विशेष विद्युत सज्जा की जाएगी। पूजा के दौरान अगरतला से आने वाले प्रसिद्ध ढाक वादकों का दल भी पारंपरिक ढाक की थाप से उत्सव का माहौल और जीवंत करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">15 अगस्त को होगा खुटी पूजा दुल्लभछड़ा अस्पताल रोड स्थित हरे कृष्ण मध्यबंग विद्यालय के मैदान में इस वर्ष दुर्गापूजा का आयोजन किया जाएगा। पूजा का शुभ खुटी पूजन एवं शुभारंभ कार्यक्रम 15 अगस्त 2026 को आयोजित होगा। दशभुजा संघ की ओर से क्षेत्र के सभी वर्गों के लोगों, शुभचिंतकों, व्यवसायियों, समाजसेवियों और धर्मप्रेमी जनता से पूजा आयोजन में सहयोग की अपील की गई है। समिति के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि सभी के सहयोग, स्नेह और आशीर्वाद से इस वर्ष का दुर्गोत्सव शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य शारदीय उत्सव के रूप में संपन्न होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:24:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फुटहिया चौराहा पर भव्य कांवड़ महोत्सव: भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह को देखने उमड़ा जनसैलाब</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में प्रति वर्ष मां शांति सेवा संस्थान बस्ती के तत्वावधान में फुटहिया चौराहा पर एक भव्य ‘कांवड़ महोत्सव’ का आयोजन किया गया। संस्थान के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाज सेवी तेज प्रताप सिंह (सुड्डू भाई जी) की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भोजपुरी सिनेमा के पावरस्टार और बिहार विधान परिषद (MLC) के माननीय सदस्य पवन सिंह ने शिरकत की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पवन सिंह की झलक पाने को बेताब दिखे प्रशंसक</div><div style="text-align:justify;">भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के आगमन की खबर मिलते ही फुटहिया</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185024/crowd-gathered-to-see-bhojpuri-superstar-pawan-singh-at-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260810-wa0040.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में प्रति वर्ष मां शांति सेवा संस्थान बस्ती के तत्वावधान में फुटहिया चौराहा पर एक भव्य ‘कांवड़ महोत्सव’ का आयोजन किया गया। संस्थान के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाज सेवी तेज प्रताप सिंह (सुड्डू भाई जी) की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भोजपुरी सिनेमा के पावरस्टार और बिहार विधान परिषद (MLC) के माननीय सदस्य पवन सिंह ने शिरकत की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पवन सिंह की झलक पाने को बेताब दिखे प्रशंसक</div><div style="text-align:justify;">भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के आगमन की खबर मिलते ही फुटहिया चौराहा और आसपास का इलाका प्रशंसकों तथा कांवड़ियों की भीड़ से पट गया। पवन सिंह के मंच पर पहुँचते ही हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से पूरा प्रांगण गूंज उठा। पवन सिंह ने उपस्थित जनसमूह और कांवड़ियों का अभिवादन स्वीकार किया और भोलेनाथ के भजनों से माहौल को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                              सुड्डू भाई जी ने किया सम्मानित</strong></div><div style="text-align:justify;">संस्थान के अध्यक्ष तेज प्रताप सिंह ‘सुड्डू भाई ‘ ने मुख्य अतिथि पवन सिंह का भव्य स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। तेज प्रताप सिंह उर्फ सड्डू सिंह ने कहा भगवान शिव के भक्तों और कांवड़ियों की सेवा करना ही मां शांति सेवा संस्थान का मुख्य उद्देश्य है। सुदूर क्षेत्रों से आने वाले देवतुल्य कांवड़ियों की सेवा में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी संस्थान पूरी निष्ठा के साथ समर्पित है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">महोत्सव के दौरान मां शांति सेवा संस्थान की ओर से कांवड़ियों के विश्राम, भोजन, जलपान और चिकित्सा की उत्तम व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 19:10:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>ऐतिहासिक 150वें वर्ष की जनकपुरी भावना एस्टेट रोड पर सजेगी, बाबरपुर का नाम 'जनकपुरी' करने का प्रस्ताव; विधायक ने दिया सकारात्मक आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>आगरा |</strong> की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक जनकपुरी महोत्सव इस वर्ष अपने ऐतिहासिक 150वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस विशेष अवसर पर श्री रामलीला कमेटी, आगरा ने जनकपुरी महोत्सव के आयोजन के लिए सिकंदरा स्थित भावना एस्टेट रोड का चयन किया है। आयोजन स्थल की आधिकारिक घोषणा के साथ ही पूरे सिकंदरा क्षेत्र में उत्साह, उल्लास और धार्मिक वातावरण देखने को मिला। स्थानीय नागरिकों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताते हुए आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प व्यक्त किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आगरा किला स्थित श्री रामलीला मैदान में आयोजित बैठक में श्री रामलीला कमेटी के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183373/the-historic-150th-year-janakpuri-bhavana-estate-road-will-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001102756-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>आगरा |</strong> की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक जनकपुरी महोत्सव इस वर्ष अपने ऐतिहासिक 150वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस विशेष अवसर पर श्री रामलीला कमेटी, आगरा ने जनकपुरी महोत्सव के आयोजन के लिए सिकंदरा स्थित भावना एस्टेट रोड का चयन किया है। आयोजन स्थल की आधिकारिक घोषणा के साथ ही पूरे सिकंदरा क्षेत्र में उत्साह, उल्लास और धार्मिक वातावरण देखने को मिला। स्थानीय नागरिकों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताते हुए आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प व्यक्त किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आगरा किला स्थित श्री रामलीला मैदान में आयोजित बैठक में श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने सिकंदरा अपार्टमेंट्स एसोसिएशन (SAA) के अध्यक्ष डॉ. जी.पी. अग्रवाल तथा चैम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों संजय गोयल और मनोज बंसल को जनकपुरी महोत्सव आयोजन का आधिकारिक स्वीकृति पत्र सौंपकर इसकी औपचारिक घोषणा की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सिकंदरा अपार्टमेंट्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ठाकुर राजा सिंह चौहान सहित वरिष्ठ सदस्य विश्वनाथ जुनेजा, अंकुश मित्तल, निशांत, राणा सुशील सिंह, अवनीत कुमार अवस्थी, अशोक कुमार गुप्ता (एडवोकेट), अनुज गुप्ता, अरुण गुप्ता, संतोष कटारा, धीरज अग्रवाल, प्रशांत बेरी, तिलक राज अरोड़ा सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं क्षेत्रीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बाबरपुर का नाम 'जनकपुरी' करने का प्रस्ताव</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान सिकंदरा अपार्टमेंट्स एसोसिएशन के सदस्यों ने क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को स्थायी स्वरूप देने के उद्देश्य से बाबरपुर का नाम बदलकर "जनकपुरी" किए जाने का प्रस्ताव विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल के समक्ष रखा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">प्रस्ताव पर विधायक ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि यदि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सहमति रहती है तो इसे नगर निगम की प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रीय पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी को निर्देश दिए कि प्रस्ताव को नगर निगम की आगामी हाउस बैठक में प्रस्तुत कराया जाए। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रस्ताव के पारित होने तक वह स्वयं इसकी निगरानी करेंगे और आवश्यक स्तर पर पूरा सहयोग देंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">150वां वर्ष बनेगा ऐतिहासिक</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">श्री रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि जनकपुरी महोत्सव का 150वां वर्ष होने के कारण इस बार आयोजन को विशेष रूप से भव्य और आकर्षक बनाया जाएगा। भावना एस्टेट रोड को मिथिला की सांस्कृतिक झलक के अनुरूप सजाया जाएगा। आकर्षक विद्युत सज्जा, विशाल स्वागत द्वार, धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियां, पारंपरिक अलंकरण, भक्ति संगीत और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जाएंगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आयोजन में शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए यातायात, सुरक्षा, पार्किंग, स्वच्छता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया आयाम</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जनकपुरी महोत्सव भगवान श्रीराम और माता सीता के दिव्य विवाह प्रसंग पर आधारित उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। पिछले डेढ़ शताब्दी से यह आयोजन आगरा की पहचान बना हुआ है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस वर्ष सिकंदरा में आयोजित होने वाला 150वां जनकपुरी महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। वहीं, बाबरपुर का नाम बदलकर "जनकपुरी" किए जाने का प्रस्ताव भी चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। यदि नगर निगम में यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो यह क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ सकता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 20:14:03 +0530</pubDate>
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