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                <title>Crowd Control - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Crowd Control RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अपर पुलिस अधीक्षक, अपरजिलाधिकारी,  एवं उपजिलाधिकारी द्वारा चकवा महावीर मेले का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का लिया गया जायजा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>आज दिनांक 25.08.2026 को शुभम अग्रवाल , </strong>अपर पुलिस अधीक्षक भदोही शुभांगी शुक्ला अपर जिला मजिस्ट्रेट भदोही एवं  अरुण दीक्षित, उप जिलाधिकारी द्वारा थाना ज्ञानपुर क्षेत्रांतर्गत स्थित चकवा महावीर मंदिर परिसर में आयोजित सुप्रसिद्ध चकवा महावीर मेले का भ्रमण कर सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया गया। इस दौरान अधिकारियों द्वारा मेला परिसर, प्रमुख प्रवेश एवं निकास मार्गों, श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले स्थानों तथा विभिन्न स्थानों पर तैनात पुलिस बल का निरीक्षण किया गया। साथ ही मेले में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के दृष्टिगत सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण एवं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने हेतु किए गए</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186372/additional-superintendent-of-police-sub-district-magistrate-and-sub-district-magistrate-visited"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260825-wa0029.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>आज दिनांक 25.08.2026 को शुभम अग्रवाल , </strong>अपर पुलिस अधीक्षक भदोही शुभांगी शुक्ला अपर जिला मजिस्ट्रेट भदोही एवं  अरुण दीक्षित, उप जिलाधिकारी द्वारा थाना ज्ञानपुर क्षेत्रांतर्गत स्थित चकवा महावीर मंदिर परिसर में आयोजित सुप्रसिद्ध चकवा महावीर मेले का भ्रमण कर सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया गया। इस दौरान अधिकारियों द्वारा मेला परिसर, प्रमुख प्रवेश एवं निकास मार्गों, श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले स्थानों तथा विभिन्न स्थानों पर तैनात पुलिस बल का निरीक्षण किया गया। साथ ही मेले में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के दृष्टिगत सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण एवं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने हेतु किए गए प्रबंधों की जानकारी ली गई।अधिकारियों द्वारा ड्यूटीरत पुलिसकर्मियों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा का विशेष ध्यान रखते हुए सतर्कता एवं मुस्तैदी के साथ ड्यूटी करने, भीड़ को व्यवस्थित रखने, संदिग्ध व्यक्तियों एवं गतिविधियों पर सतर्क दृष्टि बनाए रखने तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।साथ ही मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भीड़ नियंत्रण, आवश्यकतानुसार त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने तथा किसी भी परिस्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु निर्देशित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों द्वारा मेला क्षेत्र में तैनात पुलिस बल को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक स्थिति पर सतर्क दृष्टि रखने तथा किसी भी प्रकार की समस्या की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भदोही पुलिस एवं जिला प्रशासन द्वारा चकवा महावीर मेले को सकुशल, शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने हेतु पर्याप्त पुलिस बल एवं आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों के साथ लगातार सतर्कता बरती जा रही है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186372/additional-superintendent-of-police-sub-district-magistrate-and-sub-district-magistrate-visited</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 19:05:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मंदिरों में उमड़ती आस्था के बीच बार-बार क्यों टूटती है सुरक्षा की व्यवस्था?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम मंदिर में सोमवार को हुई भगदड़ ने एक बार फिर देश के धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रावण के तीसरे सोमवार को भगवान शिव के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। सुबह करीब साढ़े छह बजे दर्शन की कतार स्टेशन के पास अशोकधाम हॉल्ट तक पहुंच गई थी। इसी दौरान पुरुषों की कतार के पास बिजली का पोल गिरने और करंट फैलने की अफवाह से अचानक अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते महिलाओं की कतार में दबाव बढ़ा और भगदड़ में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185533/why-do-security-arrangements-break-down-again-and-again-amidst"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002168092-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम मंदिर में सोमवार को हुई भगदड़ ने एक बार फिर देश के धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रावण के तीसरे सोमवार को भगवान शिव के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। सुबह करीब साढ़े छह बजे दर्शन की कतार स्टेशन के पास अशोकधाम हॉल्ट तक पहुंच गई थी। इसी दौरान पुरुषों की कतार के पास बिजली का पोल गिरने और करंट फैलने की अफवाह से अचानक अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते महिलाओं की कतार में दबाव बढ़ा और भगदड़ में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया तथा घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अशोकधाम की घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि बिहार में इसी साल कुछ महीने पहले नालंदा के शीतला माता मंदिर में भी ऐसी ही त्रासदी हो चुकी है। 31 मार्च 2026 को चैत्र महीने के अंतिम मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां शीतला के दर्शन के लिए पहुंचे थे। भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से आठ महिलाओं की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद भीड़ वाले प्रमुख धर्मस्थलों पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए व्यवस्थाएं मजबूत करने की जरूरत सामने आई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन सवाल यही है कि हादसे के बाद बनने वाली योजनाएं जमीन पर कितनी उतरती हैं। अशोकधाम की घटना ने इस सवाल को फिर सामने ला दिया है। जब किसी मंदिर में विशेष पर्व, सावन के सोमवार, नवरात्रि, जन्माष्टमी या अन्य धार्मिक अवसर पर सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक श्रद्धालु पहुंचने की संभावना पहले से मालूम होती है, तो उस भीड़ के अनुरूप प्रवेश, निकास, कतार, बैरिकेडिंग, आपातकालीन रास्ते, चिकित्सा सुविधा और अफवाहों से निपटने की व्यवस्था क्यों नहीं हो पाती?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले दो वर्षों के घटनाक्रम को देखें तो देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ का दबाव कई बार जानलेवा साबित हुआ है। 12 अगस्त 2024 को बिहार के जहानाबाद जिले के मखदुमपुर क्षेत्र स्थित बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में सावन सोमवार के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बनी थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु जल चढ़ाने पहुंचे थे। इस हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद मंदिरों में भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद 2024 की सबसे बड़ी धार्मिक भीड़ त्रासदियों में उत्तर प्रदेश का हाथरस हादसा रहा। 2 जुलाई 2024 को हाथरस जिले में एक धार्मिक सत्संग के बाद भगदड़ मच गई। अंतिम आंकड़ा 121 मृतकों तक पहुंचा और मृतकों में बड़ी संख्या महिलाओं तथा बच्चों की थी। यह हादसा मंदिर के भीतर नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजन स्थल पर हुआ था, लेकिन इससे यह साफ हुआ कि बड़ी संख्या में लोगों को एक सीमित क्षेत्र में जुटाने के बाद उनके सुरक्षित आवागमन की योजना कितनी महत्वपूर्ण होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2025 में भी मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में भीड़ से जुड़े हादसे थमे नहीं। 8 जनवरी 2025 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति में वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए टोकन लेने के दौरान भगदड़ मच गई। इस घटना में छह श्रद्धालुओं की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। हजारों श्रद्धालु विशेष दर्शन के लिए जुटे थे और टोकन वितरण केंद्रों के आसपास भीड़ का दबाव बढ़ गया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">29 जनवरी 2025 को प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान संगम क्षेत्र में भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ हुई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार करीब 30 लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में श्रद्धालु घायल हुए। महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में करोड़ों लोगों की संभावित मौजूदगी के कारण भीड़ प्रबंधन अपने आप में सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस हादसे ने फिर दिखाया कि लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था के बीच एक छोटी-सी अव्यवस्था भी गंभीर परिणाम दे सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">3 मई 2025 को गोवा के शिरगांव स्थित श्री लैराई देवी मंदिर के वार्षिक उत्सव में भगदड़ ने छह लोगों की जान ले ली और बड़ी संख्या में श्रद्धालु घायल हुए। बाद में सरकार द्वारा गठित जांच समिति ने इसे पूरी तरह रोके जा सकने वाला हादसा बताया और खराब योजना, निर्देशों के पालन में कमी तथा अपर्याप्त बुनियादी सुविधाओं जैसी कमियों को जिम्मेदार ठहराया। यह निष्कर्ष बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि ऐसे हादसे केवल अचानक पैदा हुई अफरा-तफरी का परिणाम नहीं होते, बल्कि पहले से मौजूद व्यवस्थागत कमियां भी उनकी जमीन तैयार करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">29 जून 2025 को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर के पास भगदड़ में तीन श्रद्धालुओं की मौत हुई और 50 से अधिक लोग घायल हुए। हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए जुटे थे। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों पर भी सवाल उठे और राज्य सरकार ने जांच के साथ अधिकारियों पर कार्रवाई की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">27 जुलाई 2025 को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में भीड़ के दबाव ने आठ लोगों की जान ले ली। मंदिर तक पहुंचने वाले संकरे रास्ते और सीढ़ियों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। बिजली के तार से जुड़े खतरे की अफवाह से लोगों में घबराहट बढ़ी और भगदड़ की स्थिति बन गई। यह घटना अशोकधाम हादसे से इसलिए भी जुड़ती नजर आती है क्योंकि दोनों मामलों में बिजली से संबंधित भय या अफवाह ने भीड़ के व्यवहार को अचानक बदल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अगले ही दिन 28 जुलाई 2025 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी स्थित अवसानेश्वर मंदिर में भी बिजली के तार से जुड़ी घटना के बाद भगदड़ जैसी स्थिति बनी। अधिकारियों के अनुसार एक जीवित बिजली का तार टिन की छत पर गिर गया था, जिससे अफरा-तफरी मची। हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत हुई और 32 लोग घायल हुए।इन घटनाओं को एक साथ देखने पर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आती है। कई जगह भीड़ पहले से अनुमानित थी। धार्मिक पर्वों की तारीख पहले से तय थी। मंदिरों की लोकप्रियता और संभावित श्रद्धालुओं की संख्या भी प्रशासन से छिपी नहीं थी। फिर भी प्रवेश और निकास के अलग-अलग रास्ते, नियंत्रित कतारें, भीड़ की घनत्व पर निगरानी, आपातकालीन निकासी और स्पष्ट सूचना व्यवस्था जैसी बुनियादी चीजें कई स्थानों पर पर्याप्त नहीं दिखीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भगदड़ में अक्सर लोगों को नुकसान किसी एक व्यक्ति के धक्का देने से नहीं, बल्कि भीड़ के सामूहिक दबाव से होता है। जब हजारों लोग एक ही दिशा में अचानक आगे बढ़ते हैं और सामने रास्ता संकरा हो, बैरिकेड हो या निकास बंद हो, तो कुछ ही क्षणों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। अफवाह इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। अशोकधाम और मनसा देवी की घटनाओं में बिजली से जुड़े भय ने लोगों के व्यवहार को अचानक प्रभावित किया। ऐसे में अफवाहों को रोकने के लिए तत्काल सार्वजनिक घोषणा और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी भीड़ प्रबंधन का अनिवार्य हिस्सा होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धार्मिक स्थलों की सुरक्षा केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने से सुनिश्चित नहीं होगी। इसके लिए आयोजन से पहले जोखिम का आकलन, संभावित भीड़ का वैज्ञानिक अनुमान, प्रवेश और निकास की क्षमता का परीक्षण, आपातकालीन मार्गों की उपलब्धता, बिजली और अग्नि सुरक्षा की जांच, चिकित्सा दल की तैनाती और लगातार निगरानी जरूरी है। जिस रास्ते से हजारों लोग निकलने वाले हों, वहां किसी भी तरह की रुकावट या विपरीत दिशा से आने वाली भीड़ गंभीर खतरा बन सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे बड़ी जरूरत यह है कि हादसे के बाद जांच और मुआवजे तक व्यवस्था सीमित न रहे। हर बड़े धार्मिक आयोजन के बाद यह देखा जाना चाहिए कि तय सुरक्षा मानकों का पालन वास्तव में हुआ या नहीं। अगर किसी मंदिर में लाखों श्रद्धालु पहुंचने की संभावना है तो वहां केवल धार्मिक आयोजन की तैयारी नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन की भी उतनी ही गंभीर तैयारी होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में आस्था की शक्ति बहुत बड़ी है। मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर उमड़ने वाली भीड़ इसी आस्था की अभिव्यक्ति है। श्रद्धालु दर्शन के लिए घर से निकलता है तो उसके मन में विश्वास होता है कि वह सुरक्षित लौटेगा। इसलिए प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और आयोजन समितियों की पहली जिम्मेदारी यही है कि आस्था को अव्यवस्था में न बदलने दिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अशोकधाम की घटना ने एक बार फिर चेतावनी दी है। हादसे के बाद संवेदना, जांच और मुआवजा जरूरी हैं, लेकिन उनसे भी अधिक जरूरी है कि अगली भीड़ जुटने से पहले व्यवस्था दुरुस्त हो। यदि हर त्रासदी के बाद वही सवाल उठते रहें और अगली धार्मिक भीड़ में वही कमियां दोहराई जाती रहें, तो जांच और घोषणाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। अब समय है कि मंदिरों और बड़े धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा को व्यवस्था का वैकल्पिक हिस्सा नहीं, बल्कि आयोजन की पहली अनिवार्यता माना जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 20:46:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुश्तैनी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक हुआ अबान अहमद, तीनों भाइयों ने दिया जनाज़े को कंधा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद को शनिवार को प्रयागराज स्थित उनके पुश्तैनी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। अबान की अंतिम यात्रा के दौरान उनके दोनों बड़े भाइयों अली अहमद और उमर अहमद ने भी शिरकत की। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों भाइयों को पुलिस वैन से कब्रिस्तान तक लाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अंतिम दीदार के लिए जुटे रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कब्रिस्तान पहुंचने पर जैसे ही पुलिस वैन से अली और उमर अहमद नीचे उतरे, दोनों भाई भावुक हो गए और एक-दूसरे से गले मिले। इसके बाद दोनों ने अबान के जनाज़े को कंधा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184944/aban-ahmed-was-laid-to-rest-in-the-ancestral-graveyard"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260808-wa0189.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद को शनिवार को प्रयागराज स्थित उनके पुश्तैनी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। अबान की अंतिम यात्रा के दौरान उनके दोनों बड़े भाइयों अली अहमद और उमर अहमद ने भी शिरकत की। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों भाइयों को पुलिस वैन से कब्रिस्तान तक लाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अंतिम दीदार के लिए जुटे रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कब्रिस्तान पहुंचने पर जैसे ही पुलिस वैन से अली और उमर अहमद नीचे उतरे, दोनों भाई भावुक हो गए और एक-दूसरे से गले मिले। इसके बाद दोनों ने अबान के जनाज़े को कंधा दिया। तीनों भाइयों के इस भावुक क्षण को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। अंतिम रस्मों के दौरान अली और उमर ने अबान को मिट्टी भी दी और उनकी आखिरी विदाई में शामिल हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अबान के जनाज़े के कब्रिस्तान पहुंचने की सूचना मिलते ही आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। देखते ही देखते कब्रिस्तान के आसपास भीड़ बढ़ गई। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने पहले लोगों को पीछे हटने की अपील की। भीड़ अधिक बढ़ने पर कुछ देर के लिए अफरातफरी की स्थिति भी बनी, जिसके बाद पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर लोगों को नियंत्रित करना पड़ा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कड़ी सुरक्षा के बीच हुई अंतिम विदाई</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अबान की अंतिम विदाई को लेकर पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। कब्रिस्तान के आसपास पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। अली और उमर को भी सुरक्षा घेरे में कब्रिस्तान तक लाया गया। पुलिस अधिकारियों की निगरानी में अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई। अंतिम रस्में पूरी होने के बाद पुलिस सुरक्षा के बीच अली और उमर को वापस ले जाया गया। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी गई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 22:10:34 +0530</pubDate>
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                <title>100 फीट ऊंचे बीएसएनएल टावर पर 19 घंटे तक डटा रहा युवक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर-शाहजहांपुर। </strong>कछियानीखेड़ा स्थित डिग्री कॉलेज परिसर में लगे बीएसएनएल के करीब 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़े युवक ने 19 घंटे तक पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी। गुरुवार रात शुरू हुआ हाई-वोल्टेज घटनाक्रम शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे खत्म हुआ, जब अधिकारियों की लंबी समझाइश और कड़ी मशक्कत के बाद युवक को सकुशल नीचे उतारा जा सका। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस, प्रशासन और परिजनों की सांसें अटकी रहीं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गुरुवार रात करीब आठ बजे मीरानपुर कटरा थाना क्षेत्र के रामनगर कॉलोनी निवासी आकाश यादव अचानक मंदिर के पास स्थित बीएसएनएल टावर पर चढ़ गया। सूचना मिलते ही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183113/young-man-stood-on-100-feet-high-bsnl-tower-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260710-wa0091-(4).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर-शाहजहांपुर। </strong>कछियानीखेड़ा स्थित डिग्री कॉलेज परिसर में लगे बीएसएनएल के करीब 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़े युवक ने 19 घंटे तक पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी। गुरुवार रात शुरू हुआ हाई-वोल्टेज घटनाक्रम शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे खत्म हुआ, जब अधिकारियों की लंबी समझाइश और कड़ी मशक्कत के बाद युवक को सकुशल नीचे उतारा जा सका। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस, प्रशासन और परिजनों की सांसें अटकी रहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुरुवार रात करीब आठ बजे मीरानपुर कटरा थाना क्षेत्र के रामनगर कॉलोनी निवासी आकाश यादव अचानक मंदिर के पास स्थित बीएसएनएल टावर पर चढ़ गया। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर क्राइम सुनील यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। रातभर पुलिस मोबाइल फोन के जरिए युवक से बातचीत करती रही, लेकिन वह नीचे उतरने को तैयार नहीं हुआ। युवक लगातार खुद को पुलिस प्रताड़ना का शिकार बताते हुए कार्रवाई की मांग करता रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शुक्रवार सुबह उसके पिता गुड्डू और मां अनीता को मौके पर बुलाया गया। मामला बढ़ता देख एडीएम अरविंद कुमार, एसडीएम जीत सिंह राय, तहसीलदार अजहर अंसारी, ग्रामीण एसपी दीक्षा भंवरे, सीओ इशिका सिंह, प्रभारी निरीक्षक प्रिंस शर्मा समेत पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी मौके पर डेरा डाले रहे। बातचीत के दौरान युवक ने आरोप लगाया कि कटरा थाने में दर्ज मुकदमों के बाद उसे लगातार प्रताड़ित किया गया। उसने हरियाणा में नौकरी के दौरान 50 हजार रुपये की साइबर ठगी और फैक्ट्री ठेकेदार द्वारा शोषण का भी आरोप लगाया। युवक का कहना था कि कहीं भी उसकी सुनवाई नहीं हुई, जिससे उसका व्यवस्था पर भरोसा खत्म हो गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब युवक ने अपने पास सल्फास की गोलियां और खाने-पीने का सामान होने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती। घंटों तक चली मान-मनौव्वल के बावजूद युवक सीबीआई या सेना के अधिकारियों से बात कराने और सेना में नौकरी दिलाने की मांग पर अड़ा रहा। आखिरकार एडीएम अरविंद कुमार ने धैर्यपूर्वक बातचीत कर उसे भरोसा दिलाया। इसके बाद पुलिस टीम टावर पर चढ़ी और सुरक्षा उपायों के बीच युवक को सकुशल नीचे उतार लिया। नीचे उतरते ही पुलिस उसे अपने साथ थाने ले गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मानसिक स्थिति की होगी जांच</strong></div>
<div style="text-align:justify;">सीओ इशिका सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया युवक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लग रही है। उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर उसे बरेली स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान रेफर किया जाएगा</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:36:23 +0530</pubDate>
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