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                <title>RK Jain - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>एक कलाकार से कहीं बड़ा बन गया एक नाम — किशोर कुमार</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय बहुत कुछ छीन लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ स्वर उसकी पकड़ से बाहर रह जाते हैं। वे उम्र नहीं गिनते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीढ़ियाँ जोड़ते हैं। जब भी वे सुनाई देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन के बंद दरवाज़े बिना आहट खुलने लगते हैं। किशोर कुमार उसी विरल परंपरा के कलाकार हैं। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">अगस्त </span>1929 <span lang="hi" xml:lang="hi">को खंडवा में जन्मे आभास कुमार गांगुली ने संगीत को केवल मनोरंजन नहीं रहने दिया</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे मनुष्य की निजी स्मृतियों का सबसे विश्वसनीय साथी बना दिया। उनकी जयंती इसलिए याद रहती है क्योंकि यह उस आवाज़ का दिन है जिसने हँसी को भी सुर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184615/a-name-became-bigger-than-an-artist-%E2%80%93-kishore-kumar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/images.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय बहुत कुछ छीन लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ स्वर उसकी पकड़ से बाहर रह जाते हैं। वे उम्र नहीं गिनते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीढ़ियाँ जोड़ते हैं। जब भी वे सुनाई देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन के बंद दरवाज़े बिना आहट खुलने लगते हैं। किशोर कुमार उसी विरल परंपरा के कलाकार हैं। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">अगस्त </span>1929 <span lang="hi" xml:lang="hi">को खंडवा में जन्मे आभास कुमार गांगुली ने संगीत को केवल मनोरंजन नहीं रहने दिया</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे मनुष्य की निजी स्मृतियों का सबसे विश्वसनीय साथी बना दिया। उनकी जयंती इसलिए याद रहती है क्योंकि यह उस आवाज़ का दिन है जिसने हँसी को भी सुर दिया और पीड़ा को भी गरिमा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके स्वर में जीवन के लगभग सभी रंग बसते थे। इसलिए उनका हर गीत सुनते ही बीता हुआ समय अनायास वर्तमान में लौट आता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े कलाकार जन्म से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साधना से पहचान पाते हैं। खंडवा के आभास कुमार गांगुली की यात्रा भी ऐसी ही थी। पिता कुंजीलाल गांगुली वकील थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े भाई अशोक कुमार सिनेमा में स्थापित। उनके बुलावे पर वे मुंबई पहुँचे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">शिकारी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से अभिनय शुरू हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मन गायकी में रमा। संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">सुनना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसात करना और स्वर देना ही उनकी साधना थी। आरंभ में के.एल. सहगल का प्रभाव रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ज़िद्दी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मरने की दुआएँ क्यों माँगूँ</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">पहली बड़ी पहचान बना। फिर </span>1969 <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आराधना</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इतिहास रच दिया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मेरे सपनों की रानी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">रूप तेरा मस्ताना</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सिद्ध किया कि कई बार नायक से पहले उसकी आवाज़ लोगों के दिलों पर राज करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब कोई कलाकार भावनाओं की भाषा बन जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उसके गीत समय की सीमा नहीं मानते। किशोर कुमार के लिए सत्तर का दशक ऐसा ही स्वर्णकाल था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चिंगारी कोई भड़के</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में विरह की आँच है</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">ये शाम मस्तानी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में जीवन की खुली मुस्कान</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">ये जो चिलमन है</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में चंचल शरारत और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ज़िंदगी के सफर में</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में समय का निर्विकार सत्य।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मेरे सामने वाली खिड़की में</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">यह साबित करता है कि हँसी भी उतनी ही गहरी कलात्मक अभिव्यक्ति हो सकती है जितनी करुणा। लगभग सत्ताईस सौ गीतों का उनका संसार केवल उपलब्धि नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय संवेदनाओं का जीवित अभिलेख है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मस्ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आशा और निराशा—मानवीय अनुभव का शायद ही कोई रंग हो जिसे उनकी आवाज़ ने स्पर्श न किया हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बहुत कम आवाज़ें चेहरों नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तित्वों की पहचान बनती हैं। किशोर कुमार का स्वर किसी एक नायक तक सीमित नहीं रहा। राजेश खन्ना की रोमानी आभा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमिताभ बच्चन का तेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देव आनंद की चपलता और धर्मेंद्र की देसी सहजता—हर रूप में सहज ढल गया। आर.डी. बर्मन के साथ उनकी जुगलबंदी ने हिंदी फिल्म संगीत को नई ऊँचाइयाँ दीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">दम मारो दम</span>', '<span lang="hi" xml:lang="hi">जाने जाँ ढूँढ़ता फिर रहा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चुरा लिया है तुमने</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ने युवाओं की धड़कनों को नई लय दी। एस.डी. बर्मन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और कल्याणजी-आनंदजी के साथ उन्होंने अनगिनत कालजयी गीत रचे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">हमें तुमसे प्यार कितना</span>', '<span lang="hi" xml:lang="hi">हाय रे वो दिन क्यों न आए</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">खाइके पान बनारस वाला</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">बताते हैं कि उनकी आवाज़ हर भाव की स्वाभाविक अभिव्यक्ति थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लोग अपनी कला से पहचाने जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अपनी कला की सीमाएँ तोड़कर। किशोर कुमार दूसरी श्रेणी के कलाकार थे। गायकी उनकी पहचान अवश्य बनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर अभिनेता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगीतकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गीतकार और फिल्मकार के रूप में भी उन्होंने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">झुमरू</span>', '<span lang="hi" xml:lang="hi">दूर गगन की छाँव में</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">दूर का राही</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी फिल्मों से गहरी मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">दूर गगन की छाँव में</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">आज भी एक सैनिक के मन की सबसे मार्मिक सिनेमाई अभिव्यक्तियों में गिनी जाती है। कला के सम्मान पर समझौता उन्हें स्वीकार नहीं था। पारिश्रमिक न मिलने पर आधा मेकअप लगाकर सेट पर पहुँचना या आधा गीत छोड़ देना इसी स्वाभिमान की मिसाल था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर मधुर स्वर अपने हिस्से की खामोशी भी ढोता है। किशोर कुमार का जीवन भी इससे अछूता नहीं रहा। रुमा गुहा ठाकुरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुबाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगिता बाली और लीना चंदावरकर के साथ उनके चार विवाह हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मधुबाला का साथ हिंदी सिनेमा की सबसे मार्मिक प्रेमकथाओं में गिना जाता है। उनकी बीमारी और असमय निधन ने किशोर कुमार को भीतर तक बदल दिया। उस दर्द की प्रतिध्वनि उनके अनेक दर्दभरे गीतों में महसूस होती है। </span>13 <span lang="hi" xml:lang="hi">अक्टूबर </span>1987 <span lang="hi" xml:lang="hi">को मात्र अट्ठावन वर्ष की आयु में हृदयाघात ने उनकी जीवन-यात्रा थाम दी। अंतिम इच्छा के अनुसार उनका पार्थिव शरीर खंडवा लाया गया। वे लौट तो अपनी जन्मभूमि आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर भारतीय संगीत में जो सन्नाटा छोड़ गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह आज भी वैसा ही गूँजता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकप्रियता समय के साथ धुंधली पड़ सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सच्ची कला हर दौर की कसौटी पर और अधिक उजली होकर लौटती है। किशोर कुमार की आवाज़ इसका जीवंत प्रमाण है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन के सफर में राही</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">आज भी आगे बढ़ने का विश्वास जगाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ तो लोग कहेंगे</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज की रूढ़ मानसिकता पर आज भी उतनी ही पैनी चोट करता है। यही उनकी कला की सबसे बड़ी विजय है कि उनके गीत मनोरंजन की सीमाएँ लाँघकर जीवन-दृष्टि का हिस्सा बन गए। इसलिए उनकी आवाज़ हर पीढ़ी में नए अर्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई आत्मीयता और नई प्रासंगिकता के साथ सुनाई देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय अंततः उसी कला के आगे ठहरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें मनुष्य अपने जीवन का अक्स पहचान ले। किशोर कुमार की विरासत इसी सत्य की साक्षी है। खंडवा से निकला उनका स्वर अमरता तक इसलिए पहुँचा क्योंकि उसमें बनावट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सच्चाई थी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदर्शन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदना थी। उन्होंने सिद्ध किया कि सच्ची कला हर दौर में नए अर्थों के साथ जीवित रहती है। जब तक किसी उत्सव में उनके गीत मुस्कान बनकर गूँजेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी अकेले मन को उनका स्वर संबल देगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी प्रेम में उनकी धुन धड़केगी और जीवन की राह पर कोई मुसाफिर उन्हें गुनगुनाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक किशोर दा स्मृति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनमानस की जीवित धड़कन बने रहेंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 22:03:07 +0530</pubDate>
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                <title>हर बच्चा भविष्य का पृष्ठ : लेकिन हम पन्ने भर रहे हैं या लिख रहे हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर जन्म नई संभावना लेकर आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हर संभावना उपलब्धि में नहीं बदलती। यही प्रश्न विश्व जनसंख्या दिवस हमारे सामने खड़ा करता है। किसी भी राष्ट्र का भविष्य जनगणना की तालिकाओं में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन चेहरों में लिखा होता है जिन्हें हम अक्सर केवल संख्या मान लेते हैं। एक नवजात शिशु किसी परिवार का नया सदस्य भर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देश के भविष्य का पहला पृष्ठ होता है। विडंबना यह है कि उस पृष्ठ पर भविष्य लिखने की तैयारी किए बिना हम हर वर्ष नई प्रतियां जोड़ते जा रहे हैं। इसलिए सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं कि</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183101/every-child-is-a-page-of-the-future-but-we"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/world-population-day.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर जन्म नई संभावना लेकर आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हर संभावना उपलब्धि में नहीं बदलती। यही प्रश्न विश्व जनसंख्या दिवस हमारे सामने खड़ा करता है। किसी भी राष्ट्र का भविष्य जनगणना की तालिकाओं में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन चेहरों में लिखा होता है जिन्हें हम अक्सर केवल संख्या मान लेते हैं। एक नवजात शिशु किसी परिवार का नया सदस्य भर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देश के भविष्य का पहला पृष्ठ होता है। विडंबना यह है कि उस पृष्ठ पर भविष्य लिखने की तैयारी किए बिना हम हर वर्ष नई प्रतियां जोड़ते जा रहे हैं। इसलिए सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं कि भारत में कितने लोग हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि उनमें कितनी संभावनाओं को अवसर मिला और कितनों को परिस्थितियों के भरोसे छोड़ दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज भारत </span>1.47 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब से अधिक लोगों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा जनसमूह है। इसे केवल भीड़ कहना उतनी ही बड़ी भूल होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितनी बिना तैयारी के इसे शक्ति मान लेना। संख्या न वरदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अभिशाप</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह केवल संभावनाओं का भंडार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मूल्य इस बात से तय होता है कि राष्ट्र उसकी ऊर्जा को किस दिशा में ले जाता है। भारत की लगभग </span>65 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत आबादी </span>35 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष से कम आयु की है। अनेक विकसित देश घटती जन्म दर और वृद्ध होती आबादी की चुनौती से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि हमारे पास युवा शक्ति का अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इतिहास बार-बार नहीं देता। किंतु अवसर तभी उपलब्धि बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसके पीछे दूरदर्शी व्यवस्था हो। केवल युवाओं की संख्या से राष्ट्र समृद्ध नहीं होता</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौशल और रोजगार का सुदृढ़ आधार भी उतना ही आवश्यक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहीं सबसे बड़ी विडंबना है। युवाओं की ऊर्जा प्रचुर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसे दिशा देने वाली व्यवस्था अब भी अपेक्षाओं से पीछे है। शिक्षा डिग्री दे रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दक्षता नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर समान नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अवसर उसी गति से नहीं। परिणामस्वरूप युवा निराशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असुरक्षा और दिशाहीनता के बीच अपने महत्वपूर्ण वर्ष गंवा देते हैं। यह केवल व्यक्तिगत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय हानि है। जिस ऊर्जा से नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसंधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और सामाजिक परिवर्तन संभव थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पलायन और असंतोष में बदल जाती है। जनसंख्या का वास्तविक संकट यहीं से प्रारंभ होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय है कि बहस जनसंख्या नियंत्रण से आगे बढ़कर जनसंख्या की गुणवत्ता पर केंद्रित हो। किसी बच्चे का जन्म केवल जैविक घटना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। उसे स्वस्थ शरीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुणवत्तापूर्ण शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक कौशल और सम्मानजनक अवसर देना ही वास्तविक परिवार नियोजन है। शहरों में महंगाई और करियर की चुनौतियों ने बच्चों का पालन-पोषण महंगी जिम्मेदारी बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं गांवों में अवसरों का अभाव युवाओं को शहरों की ओर धकेल रहा है। परिणामस्वरूप गांव खाली हो रहे हैं और शहर अनियोजित विस्तार व भीड़ के दबाव से जूझ रहे हैं। इसलिए जनसंख्या नीति का संबंध केवल जन्म दर से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौशल विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और संतुलित क्षेत्रीय विकास से होना चाहिए। तभी हर नया नागरिक देश की संपत्ति बनेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बोझ नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का युवा जीवित रहने के लिए नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सम्मानजनक और सार्थक जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है। उसकी आकांक्षाओं में अच्छी नौकरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित भविष्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ पर्यावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समान अवसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवाचार और व्यक्तिगत विकास शामिल हैं। यदि ये अपेक्षाएं अधूरी रहीं तो आने वाले वर्षों में जन्म दर स्वाभाविक रूप से प्रभावित होगी और हमारे सामने भी वही स्थिति आ सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आज कई विकसित राष्ट्र गुजर रहे हैं। इसलिए विश्व जनसंख्या दिवस का संदेश परिवार नियोजन तक सीमित नहीं रह सकता। इसे युवा सशक्तिकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लैंगिक समानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य सुरक्षा और सतत विकास के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ना होगा। जब प्रत्येक युवा अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी जनसंख्या राष्ट्रीय संपदा बनेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण और संसाधनों को लेकर हमारी सोच भी बदलनी होगी। यह कहना आसान है कि बढ़ती आबादी संसाधनों पर दबाव बढ़ा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु यह आधा सत्य है। वास्तविक प्रश्न यह है कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कैसे हो रहा है। असंतुलित उपभोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपव्यय और विकास की असमान शैली कई बार जनसंख्या से अधिक नुकसान पहुंचाती है। यदि तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवीकरणीय ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट शहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक कृषि और संसाधनों के विवेकपूर्ण प्रबंधन को प्राथमिकता मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बड़ी आबादी भी सतत विकास की साझेदार बन सकती है। केवल जनसंख्या को दोष देकर नीतिगत कमजोरियों और सामाजिक जिम्मेदारियों से मुक्ति नहीं मिल सकती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत जैसा विविधताओं से भरा देश एक जैसी नीति से नहीं चल सकता। अलग-अलग राज्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षेत्रों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृतियों और आर्थिक परिस्थितियों की अपनी चुनौतियां हैं। इसलिए जनसंख्या प्रबंधन स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लचीला होना चाहिए। शिक्षा में निवेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला सशक्तिकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौशल विकास और रोजगार सृजन—यही भविष्य के भारत के आधार स्तंभ हैं। इतिहास साक्षी है कि जब भी भारतीय मानव संसाधन को सही दिशा मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने असंभव को संभव बनाया। स्वतंत्रता आंदोलन से सूचना प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप क्रांति तक हर उपलब्धि के पीछे संख्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रशिक्षित और प्रेरित मानव शक्ति ही निर्णायक रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व जनसंख्या दिवस हमें नई दृष्टि अपनाने का अवसर देता है। हमें लोगों की गिनती से आगे बढ़कर उनमें छिपी संभावनाओं को पहचानना होगा। देश की सबसे बड़ी पूंजी उसके खनिज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इमारतें या बजट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके नागरिक होते हैं। यदि हर बच्चे की शिक्षा में निवेश होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर युवा को अवसर मिलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर महिला सुरक्षित और सशक्त होगी तथा हर क्षेत्र संतुलित विकास का सहभागी बनेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भारत केवल दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला राष्ट्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सक्षम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्ध और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में पहचाना जाएगा। तब विश्व जनसंख्या दिवस केवल औपचारिक तिथि नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बनेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें हर जन्म को बढ़ती संख्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य की संभावना माना जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:23:39 +0530</pubDate>
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