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                <title>INDIA Alliance - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>INDIA Alliance RSS Feed</description>
                
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                <title>&quot;महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए बहुमत की तलाश में एनडीए की नई राजनीतिक चाल&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहां संसद के भीतर संख्या बल सबसे बड़ी ताकत बन गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पारित कराना चाहती है। इन दोनों विषयों पर संविधान संशोधन आवश्यक है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए लगातार अपना संख्याबल बढ़ाने में जुटे हैं। इसी रणनीति के तहत अब महाराष्ट्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183677/ndas-new-political-move-in-search-of-majority-for-women"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/women-reservation-bil-final-1776339283956_m.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहां संसद के भीतर संख्या बल सबसे बड़ी ताकत बन गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पारित कराना चाहती है। इन दोनों विषयों पर संविधान संशोधन आवश्यक है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए लगातार अपना संख्याबल बढ़ाने में जुटे हैं। इसी रणनीति के तहत अब महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों को फिर से एक करने और उन्हें एनडीए में शामिल करने की कोशिशों की चर्चा तेज हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भाजपा नेतृत्व ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के बीच समझौते का रास्ता निकालने का सुझाव दिया है। चर्चा यह भी है कि यदि दोनों गुट एक हो जाते हैं और एनडीए का हिस्सा बनते हैं तो केंद्र सरकार में दो कैबिनेट पद देने का प्रस्ताव भी सामने रखा गया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरी कवायद के पीछे सबसे बड़ा कारण संसद में दो तिहाई बहुमत का लक्ष्य है। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता। सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विशेष बहुमत चाहिए। पिछले विशेष सत्र में सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया था जिसके बाद भाजपा ने अपने सहयोगियों का दायरा बढ़ाने और विपक्षी दलों में नए राजनीतिक समीकरण बनाने की रणनीति तेज कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार आज भी सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। पांच दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने राज्य की राजनीति की दिशा कई बार बदली है। वे चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और केंद्र में रक्षा मंत्री तथा कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद भी संभाल चुके हैं। सहकारी क्षेत्र चीनी मिलों कृषि संस्थाओं और ग्रामीण राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। यही वजह है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी राजनीतिक उपयोगिता कम नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना शरद पवार ने 10 जून 1999 को पी ए संगमा और तारिक अनवर के साथ की थी। वर्ष 2023 में पार्टी दो हिस्सों में बंट गई जब उनके भतीजे अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए और बाद में भाजपा तथा शिवसेना शिंदे गुट की सरकार में शामिल हो गए। फरवरी 2024 में चुनाव आयोग ने मूल एनसीपी का नाम और घड़ी चुनाव चिन्ह अजित पवार गुट को दे दिया। इसके बाद शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी का नाम एनसीपी शरदचंद्र पवार रखा गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शरदचंद्र पवार राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा मानी जाती है। महाराष्ट्र में भी यह दल महा विकास अघाड़ी के साथ रहा है जिसमें कांग्रेस और शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट शामिल हैं। हालांकि हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि पार्टी के भीतर भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर अलग अलग राय है। कुछ नेता भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं जबकि कुछ कांग्रेस के साथ और मजबूत संबंध चाहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में शरद पवार की पार्टी के पास फिलहाल 8 सांसद हैं जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में उसके लगभग 10 विधायक हैं। संख्या बहुत बड़ी नहीं है लेकिन संविधान संशोधन जैसे मामलों में हर वोट की अहमियत बढ़ जाती है। यदि शरद पवार का पूरा दल एनडीए के साथ आता है तो लोकसभा और राज्यसभा दोनों में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है। यही वजह है कि भाजपा इस संभावना को गंभीरता से देख रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार भाजपा की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यदि दोनों एनसीपी गुट एक हो जाते हैं तो सत्ता और संगठन में उचित भागीदारी दी जाएगी। वहीं दूसरी ओर शरद पवार गुट के भीतर भी अलग अलग मांगों की चर्चा है। सुप्रिया सुले को बड़ी भूमिका देने की बात हो रही है जबकि कुछ रिपोर्टों में केंद्रीय मंत्री पद और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर भी बातचीत का दावा किया गया है। हालांकि इन सभी बातों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी पक्ष ने नहीं की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम में अजित पवार गुट की भूमिका भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले से ही महाराष्ट्र की एनडीए सरकार का हिस्सा है। यदि दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता और संगठन में संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच पदों और जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद की खबरें भी सामने आई हैं। यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला आरक्षण कानून और परिसीमन दोनों ही ऐसे मुद्दे हैं जिनका सीधा संबंध देश की भविष्य की राजनीतिक संरचना से है। महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित होंगी। वहीं परिसीमन के बाद जनसंख्या के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या तथा सीमाओं में बदलाव हो सकता है। इन दोनों विषयों पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में एनडीए के पास बहुमत तो है लेकिन संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या तक पहुंचने के लिए अभी भी अतिरिक्त समर्थन चाहिए। राज्यसभा में भी स्थिति लगभग यही है। ऐसे में छोटे और क्षेत्रीय दलों का महत्व अचानक बढ़ गया है। यही वजह है कि भाजपा केवल नए सहयोगी जोड़ने पर ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के प्रभावशाली नेताओं से भी संवाद बनाए हुए है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शरद पवार की खासियत यह रही है कि उन्होंने हमेशा परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक फैसले लिए हैं। वे कई बार विरोधी दलों के साथ भी काम कर चुके हैं और अलग अलग विचारधाराओं के नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे माने जाते हैं। इसी अनुभव और प्रभाव के कारण आज भी वे महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि शरद पवार अपनी पार्टी को किस दिशा में ले जाते हैं। यदि वे विपक्षी गठबंधन में बने रहते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति का मौजूदा संतुलन कायम रह सकता है। लेकिन यदि वे किसी नए राजनीतिक समझौते की ओर बढ़ते हैं तो इसका असर केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि संसद में भी सरकार के संख्याबल और राष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल इतना तय है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधेयकों को पारित कराने की कोशिशों ने शरद पवार और उनकी पार्टी को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 22:39:00 +0530</pubDate>
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                <title>पूरे उत्तर प्रदेश में गंगाजल हाथ में लेकर निषाद समाज लेगा संकल्प—'आरक्षण नहीं तो वोटनहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के पार्टी सुप्रीमो एवं बिहार के पूर्व मंत्री श्री मुकेश सहनी ने आज होटल महारानी, बैरिहवा, ब्लॉक रोड, गांधी नगर, बस्ती में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि निषाद समाज को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने की लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।</div>
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<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अब लड़ाई अपने अधिकारों और अपने वास्तविक राजनीतिक विरोधी को पहचानने की है। निषाद समाज को यह समझना होगा कि उसका संघर्ष उस सरकार से है, जिसने वर्षों से निषाद समाज को आरक्षण देने के प्रश्न पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। उन्होंने कहा कि</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183601/nishad-samaj-will-take-a-pledge-with-ganga-water-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260714-wa0071-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के पार्टी सुप्रीमो एवं बिहार के पूर्व मंत्री श्री मुकेश सहनी ने आज होटल महारानी, बैरिहवा, ब्लॉक रोड, गांधी नगर, बस्ती में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि निषाद समाज को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने की लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अब लड़ाई अपने अधिकारों और अपने वास्तविक राजनीतिक विरोधी को पहचानने की है। निषाद समाज को यह समझना होगा कि उसका संघर्ष उस सरकार से है, जिसने वर्षों से निषाद समाज को आरक्षण देने के प्रश्न पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। उन्होंने कहा कि हमारा संघर्ष केंद्र सरकार से है, जिसने आज तक निषाद समाज को आरक्षण नहीं दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुकेश सहनी ने घोषणा की कि अगले महीने से पूरे उत्तर प्रदेश में 'निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा' निकाली जाएगी। इस यात्रा के दौरान गांव-गांव, कस्बों और शहरों में जाकर गंगाजल हाथ में लेकर निषाद समाज के लोगों को यह संकल्प दिलाया जाएगा कि "आरक्षण नहीं तो वोट नहीं।" उन्होंने कहा कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज को आरक्षण मिल जाता है, तो समाज उसका समर्थन करेगा; लेकिन यदि आरक्षण नहीं मिला, तो निषाद समाज लोकतांत्रिक तरीके से मतदान कर केंद्र सरकार के विरुद्ध अपना जनादेश देगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुकेश सहनी ने कहा कि आज पूरा निषाद समाज विकासशील इंसान पार्टी के साथ मजबूती से खड़ा है। समाज अब अपने अधिकारों के लिए जाग चुका है और अपने भविष्य का निर्णय स्वयं करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद को निषाद समाज के मुद्दों पर सार्वजनिक लाइव डिबेट के लिए खुला आमंत्रण देते हुए कहा कि वे किसी भी मंच पर आरक्षण, समाज के अधिकार और राजनीतिक भागीदारी के विषय पर खुली बहस के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि डॉ. संजय निषाद वास्तव में निषाद समाज के हितैषी हैं, तो भाजपा छोड़कर 'इंडिया' गठबंधन में आएं। मैं स्वयं राहुल गांधी, अखिलेश यादव एवं गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बातचीत कर उन्हें सम्मानजनक राजनीतिक भागीदारी दिलाने का प्रयास करूंगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि निषाद समाज अब अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेगा और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक समाज को उसका न्यायोचित अधिकार नहीं मिल जाता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता में कार्यक्रम प्रभारी जसपाल निषाद, इंजीनियर राजबहादुर निषाद, डॉ. मिथलेश मझवार (प्रदेश अध्यक्ष, एससी/एसटी प्रकोष्ठ),  पंकज निषाद सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी, कार्यकर्ता, सामाजिक नेता एवं बड़ी संख्या में निषाद समाज के लोग उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 20:47:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टूटती तृणमूल कांग्रेस और ममता: संगठनात्मक कमजोरी और जनविश्वास का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181935/disintegrating-trinamool-congress-and-mamta-organizational-weakness-and-crisis-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(4).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे की कमी को दर्शाता है। नीचे के स्तर पर भी ब्लॉक और पंचायत स्तर पर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है।</p>
<p><br />नियोग, कोयला, गोरू तस्करी और राशन घोटाले जैसे मामलों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए। ED और CBI की कार्रवाई ने संगठन की साख को नुकसान पहुंचाया। आम लोगों में यह धारणा मजबूत हुई है कि सत्ता के साथ भ्रष्टाचार भी जड़ें जमा चुका है। इससे जमीनी कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं और मतदाता का एक हिस्सा विकल्प तलाश रहा है।<br />                  टीएमसी आज भी पूरी तरह ममता बनर्जी के व्यक्तित्व पर टिकी है। पार्टी का ढांचा संस्थागत कम, परिवार और करीबी नेताओं के इर्द-गिर्द ज्यादा केंद्रित है। अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद ने भी पुराने नेताओं में असहजता पैदा की है। जब कोई संगठन एक व्यक्ति पर निर्भर हो जाता है, तो उस व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और राजनीतिक रणनीति ही पार्टी का भविष्य तय करने लगती है। फिलहाल ताजा खबर यह है कि टीएमसी एक और बड़ी टूट की कगार पर खड़ी है और यह निश्चित हो गया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब टीएमसी को उभरने का मौका शायद ही मिल सके। कल सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी उपस्थित नज़र आईं तो वहीं दावा है कि उनकी पार्टी के 20 सांसदो ने बगावत कर दी है। सूचना है कि पार्टी के कई सांसद भाजपा नेताओं से मिलकर बगावत की रणनीति बना रहे थे।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर सोमवार को ही टीएमसी के कई सांसदों ने मुलाकात के बाद अलग गुट बनाने का दावा किया है। पता चला है कि इस बैठक में टीएमसी के पांच सांसद मौजूद रहे। इनमें शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश बसुनिया, कालिपद सोरेन व अनूप चक्रवर्ती शामिल हैं। टीएमसी के लोकसभा में 28 व राज्यसभा में 12 सांसद हैं। सूत्र बताते हैं कि बागी सांसदों ने रविवार को एक बैठक की थी, और उसी वक्त अलग गुट बनाने का ऐलान कर टीएमसी को झटका दिया जाने पर विचार हुआ है।</p>
<p>जब विधायक दल में टूट हुई थी तो सांसदों के बग़ावत की चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया था। ऐसा बताया जा रहा है कि बाग़ी सांसद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भी संपर्क में हैं और बहुत ही जल्द एक नये गुट का ऐलान हो सकता है। टीएमसी की सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि बागी सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है और लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। कोई भी पार्टी जब चुनाव हारती है तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है</p>
<p>अपनी पार्टी को टूट से बचाने की क्यों कि हर कोई सत्ता के लड्डू खाना चाहता है, बेकार में विपक्ष में अब कोई बैठना नहीं चाहता है। इसके लिए केंद्र में कांग्रेस में टूट, दिल्ली में आप में टूट उत्तर प्रदेश में सपा में टूट और महाराष्ट्र का उदाहरण देखा जा सकता है। यही संकट अब इस समय टीएमसी के ऊपर मंडरा रहा है। अब देखना यह है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को टूटने से कितना बचा पातीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंडिया गठबंधन से अब दिल्ली हुई दूर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gmail_attr" dir="ltr"><strong>स्वतंत्र प्रभात। एसडी सेठी।</strong></div>
<div class="gmail_attr" dir="ltr"><strong>  दिल्ली। </strong> शुक्रवार को भाजपा नीत एनडीए गठबंधन ने संसदीय दल की बैठक में सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मोहर लगा दी है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी 9 जून शाम 6:00 बजे  तीसरी बार शपथ ग्रहण करेगें। इससे पहले पुरानी संसद के सेंट्रल हाॅल में एनडीए संसदीय दल के नवनिर्वाचित सांसदों के बीच उपस्थित नरेंद्र मोदी को संसदीय दल के नेता के रूप में सर्व सम्मति से चुना गया। संसदीय दल के नेता के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी  के नाम का प्रस्ताव भाजपा के  राजनाथ सिंह द्वारा पेश किया गया। प्रस्ताव का अनुमोदन गृह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142039/now-delhi-is-away-from-india-alliance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/screenshot_20240607_200754_google.jpg" alt=""></a><br /><div class="gmail_attr" dir="ltr"><strong>स्वतंत्र प्रभात। एसडी सेठी।</strong></div>
<div class="gmail_attr" dir="ltr"><strong> दिल्ली। </strong> शुक्रवार को भाजपा नीत एनडीए गठबंधन ने संसदीय दल की बैठक में सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मोहर लगा दी है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी 9 जून शाम 6:00 बजे  तीसरी बार शपथ ग्रहण करेगें। इससे पहले पुरानी संसद के सेंट्रल हाॅल में एनडीए संसदीय दल के नवनिर्वाचित सांसदों के बीच उपस्थित नरेंद्र मोदी को संसदीय दल के नेता के रूप में सर्व सम्मति से चुना गया। संसदीय दल के नेता के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी  के नाम का प्रस्ताव भाजपा के  राजनाथ सिंह द्वारा पेश किया गया। प्रस्ताव का अनुमोदन गृह मंत्री अमित शाह ने किया। उसके बाद एनडीए के घटक दल टीडीपी के नेता चन्द्रबाबू नायडू द्वारा भी अनुमोदन कर सर्वसम्मति से पास किया गया।</div>
<div class="gmail_attr" dir="ltr"> </div>
<div class="gmail_attr" dir="ltr">जेडीयू के नेता नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी के नाम का समर्थन किया और नरेंद्र मोदी के गले लगकर पैर छुए। शिव सेना के एकनाथ शिंदे,एलएनजेपी के पासवान,समेत तमाम घटक दल के नेताओ ने  भी नरेंद्र मोदी के नाम पर  मोहर लगा दी। एनडीए घटक दलों का समर्थन मिलने के बाद  नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री का रास्ता साफ हो गया है। दूसरी ओर इंडिया गठबंधन ने अब तक अपने पीएम का नाम तक तय ही नहीं कर पाए है। इस बीच गठबंधन से आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से नाता तोड़कर लिया है।आप ने ऐलान कर दिया है कि उसका कांग्रेस से रिश्ता महज लोकसभा चुनाव तक था।</div>
<div>
<div class="gmail_quote">
<div>
<div> </div>
<div>फरवरी 2025  में दिल्ली  विधानसभा के होने वाले चुनाव में  आम आदमी पार्टी एकला चलो पर अमल करेगी। वहीं सूत्रों के मुताबिक शिव सेना उदव ठाकरे के नेता भी एनडीए में आने को तैयार है। जल्द ही वह भी इंडी गठबंधन को ओके बाॅय बाॅय टाटा करने जा रहे है। इसको देखते हुए जाहिर है कि इंडी गठबंधन का जोड खुल गया है। वह बिखरने के कगार पर है।इससे तो लगता है कि इंडिया गठबंधन से अब धीरे-धीरे दिल्ली दूर होती जा रही है।
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/142039/now-delhi-is-away-from-india-alliance</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Jun 2024 17:31:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनता का समर्थन 'इंडिया गठबंधन' के साथ, 140 सीटों पर सिमट जाएगी भाजपा: अखिलेश यादव </title>
                                    <description><![CDATA[<p>समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने आज भाजपा पर एक बार फिर से बड़ा हमला किया है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि पार्टी के बुंदेलखण्ड तक पहुंचते-पहुंचते भाजपा का अहंकार खत्म हो जाएगा। बीजेपी का ग्राफ गिर रहा है और इसकी कोई सीमा नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बीजेपी के प्रति लोगों का गुस्सा भी बढ़ रहा है...किसानों के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं, फसलों की खरीद के लिए कोई व्यवस्था नहीं, राशन के नाम पर यहां धोखा हो रहा है। बुन्देलखण्ड की जनता जानती है कि उनका दुश्मन कौन है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने दावा किया कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141272/bjp-will-be-reduced-to-140-seats-with-public-support"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/akhilesh-yadav_large_1514_8.webp" alt=""></a><br /><p>समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने आज भाजपा पर एक बार फिर से बड़ा हमला किया है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि पार्टी के बुंदेलखण्ड तक पहुंचते-पहुंचते भाजपा का अहंकार खत्म हो जाएगा। बीजेपी का ग्राफ गिर रहा है और इसकी कोई सीमा नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बीजेपी के प्रति लोगों का गुस्सा भी बढ़ रहा है...किसानों के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं, फसलों की खरीद के लिए कोई व्यवस्था नहीं, राशन के नाम पर यहां धोखा हो रहा है। बुन्देलखण्ड की जनता जानती है कि उनका दुश्मन कौन है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने दावा किया कि जनता इंडिया गठबंधन और समाजवादी पार्टी का समर्थन कर रही है। 140 करोड़ जनता बीजेपी को 140 सीटों पर सीमित कर देगी। अब कोई मन की बात नहीं सुनना चाहता, संविधान की बात सुनना चाहता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इंडिया गठबंधन जीतेगा।</p>
<p>जनता इंडिया गठबंधन का समर्थन कर रही है...जो लोग सोचते हैं कि वे धोखे से जीत सकते हैं, जनता उन्हें अपने वोटों से जवाब देगी। लोग भाजपा के काम से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। </p>
<p>यादव ने चौथे चरण के मतदान के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संदेश में कहा, चार चरणों के बाद जनता ने भाजपा के ‘400 पार’ के दावे के आगे से 4 गायब कर दिया है और अब डबल इंजन वालों की संभावना में बस डबल शून्य बचे हैं। भाजपा की सरकार बनाने की संभावना 00फीसदी है।</p>
<p>’’ उन्होंने इसी संदेश में आगे कहा, आगामी तीन चरणों में भी जनता भाजपा को हराने के लिए और ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार बनाने के लिए, चार चरणों से भी उत्साह से वोट डालेगी। यादव ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन को जनता जिता रही है क्योंकि ‘इंडिया’ की जीत में देश की जीत है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 15:47:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तमिलनाडु में गरजे पीएम मोदी, इरादतन 'कांग्रेस और डीएमके करते है हिन्दू धर्म का निरादर </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>National: </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘शक्ति' वाली टिप्पणी को लेकर ‘इंडिया' गठबंधन पर हमला जारी रखते हुए मंगलवार को कहा कि विपक्षी गठबंधन ने इसे नष्ट करने की घोषणा कर अपने ‘बुरे इरादे' का प्रदर्शन किया है। मोदी ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) बार-बार हिंदुत्व का अपमान करते हैं, लेकिन किसी अन्य धर्म को निशाना नहीं बनाते।</p>
<p>कांग्रेस और द्रमुक विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन के अहम घटक हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘इंडिया' गठबंधन के लोग जानबूझकर हिंदू आस्था का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139619/pm-modi-roared-in-tamil-nadu-congress-and-dmk-intentionally"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/2024_3image_15_27_41873569619033-20240319091l-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>National: </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘शक्ति' वाली टिप्पणी को लेकर ‘इंडिया' गठबंधन पर हमला जारी रखते हुए मंगलवार को कहा कि विपक्षी गठबंधन ने इसे नष्ट करने की घोषणा कर अपने ‘बुरे इरादे' का प्रदर्शन किया है। मोदी ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) बार-बार हिंदुत्व का अपमान करते हैं, लेकिन किसी अन्य धर्म को निशाना नहीं बनाते।</p>
<p>कांग्रेस और द्रमुक विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन के अहम घटक हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘इंडिया' गठबंधन के लोग जानबूझकर हिंदू आस्था का अपमान करते हैं और इसके खिलाफ उनके द्वारा हर बयान सोच-समझकर दिया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘‘इंडी' अलायंस वाले लोग बार-बार, जानबूझकर हिंदू धर्म का अपमान करते हैं।</p>
<p>हिंदू धर्म के खिलाफ इनका हर बयान बहुत सोचा समझा हुआ होता है। आप देखिए, और किसी धर्म का अपमान द्रमुक और कांग्रेस का ‘इंडी' अलायंस नहीं करता, किसी और धर्म के खिलाफ इनकी जुबान से एक शब्द नहीं निकलता। लेकिन हिंदू धर्म को गाली देने में ये एक सेकंड नहीं लगाते।'' उन्होंने नारी शक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में शक्ति का अर्थ है ‘मातृ शक्ति और नारी शक्ति'।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस और द्रमुक वाले इंडिया गठबंधन का कहना है कि वे इसे नष्ट कर देंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि शक्ति का अर्थ मरियमन, मदुरै मीनाक्षीअम्मन और कांची कामाक्षीअम्मा जैसे राज्य के विभिन्न देवी-देवताओं से संबंधित है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कवि सुब्रमण्यम भारती ने भारत माता को ‘शक्ति' के रूप में पूजा है। उन्होंने कहा, ‘‘तमिलनाडु उन्हें सजा देगा, जो शक्ति का नाश करने की बात करते हैं। मैं शक्ति उपासक हूं।'' </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139619/pm-modi-roared-in-tamil-nadu-congress-and-dmk-intentionally</link>
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                <pubDate>Tue, 19 Mar 2024 18:23:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इ.डि.या. गठबंधन में ये क्या चल रहा है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<div><strong>                                            -- जितेन्द्र सिंह वरिष्ठ पत्रकार</strong></div>
<div>  </div>
<div>भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जब इंडिया गठबंधन बना तो सबको यह उम्मीद थी कि यह गठबंधन ज़रूर अच्छी टक्कर देगा। लेकिन कुछ मीटिंग के बाद ही घटक दलों के नेता अपना अपना राग अलापने लगे। इधर भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को इतना भव्य बना दिया कि विपक्ष का प्रत्येक नेता कुछ भी बोलने से बच रहा है। और यह सच भी है जब देश की बहुसंख्यक समुदाय रामजन्म भूमि का इतना बड़ा उत्सव मना रहा है तो कोई भी पार्टी बहुसंख्यक समाज के विपरीत जाने का दुस्साहस नहीं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138027/what-is-going-on-in-india-alliance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-01/india_2-sixteen_nine.png" alt=""></a><br /><p> </p>
<div><strong>                      -- जितेन्द्र सिंह वरिष्ठ पत्रकार</strong></div>
<div> </div>
<div>भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जब इंडिया गठबंधन बना तो सबको यह उम्मीद थी कि यह गठबंधन ज़रूर अच्छी टक्कर देगा। लेकिन कुछ मीटिंग के बाद ही घटक दलों के नेता अपना अपना राग अलापने लगे। इधर भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को इतना भव्य बना दिया कि विपक्ष का प्रत्येक नेता कुछ भी बोलने से बच रहा है। और यह सच भी है जब देश की बहुसंख्यक समुदाय रामजन्म भूमि का इतना बड़ा उत्सव मना रहा है तो कोई भी पार्टी बहुसंख्यक समाज के विपरीत जाने का दुस्साहस नहीं कर सकती। कांग्रेस भले ही इंडिया गठबंधन की मजबूती के तमाम प्रयास कर रही हो लेकिन उनके अपने नेताओं के सुर भी अलग जा रहे हैं।‌ पार्टी के नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन का मानना है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक कांग्रेस ही भारतीय जनता पार्टी को टक्कर दे सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसी को राममंदिर के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए। और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को तो उन्होंने पूरी तरह से ठुकरा दिया। उन्होंने कहा है कि समाजवादी पार्टी पर अयोध्या में राम मंदिर मामले का श्राप लगा है। कांग्रेस को सपा से गठबंधन करके उस श्राप का भागीदार नहीं बनना चाहिए। कांग्रेस आलाकमान कुछ और चाह रहा है जब कि उसके नेता कुछ और। इधर समाजवादी पार्टी भी खामोश नजर आ रही है।</div>
<div> </div>
<div>उलझन में है कि कांग्रेस से गठबंधन किया जाए या नहीं क्योंकि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को जितनी सीट देना चाहती है शायद कांग्रेस इतनी सीटों पर तैयार नहीं होगी। आचार्य प्रमोद कृष्णन का मानना है कि कांग्रेस को उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए। यह सच है कि जब भी गठबंधन होता है तो वहां पार्टी का संगठन कमजोर होता है जिस सीट से दूसरी पार्टी का नेता चुनाव में होता है उस सीट पर अन्य घटक दलों के कार्यकर्ताओं का उत्साह कम हो जाता है। आचार्य प्रमोद कृष्णन पार्टी लाइन से अलग विचार व्यक्त कर रहे हैं। बीच में तो ऐसा संशय हो रहा था कि क्या प्रमोद कृष्णन भारतीय जनता पार्टी में जाने का मन बना रहे हैं। आचार्य का कहना है कि कांग्रेस को अकेले दम पर प्रियंका गांधी के नेतृत्व में चुनाव में उतरना चाहिए। और वैसे भी देखा जाए तो यह मांग पार्टी नेताओं द्वारा काफी समय से हो रही है। कांग्रेस को यदि फिर से पटरी पर आना है तो कुछ बदलाव तो करने होंगे। यह सीख उन्हें भारतीय जनता पार्टी से लेना चाहिए। कि वह समय समय पर परिवर्तन के पक्ष में दिखाई देती है।</div>
<div> </div>
<div>                 यदि उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो अभी हाल ही में राम मंदिर को लेकर सपा काफी सतर्क हो गई है। उनके नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बयानों से जो फजीहत कराई है वह शायद दूसरा कोई नहीं कर सकता। अखिलेश यादव के भी कुछ बयान ग़लत आएं हैं। अयोध्या में जो राम मंदिर का कार्यक्रम हो रहा है वह सर्व मान्य है हम देश की अधिकांश जनता के खिलाफ अपने विचार नहीं थोप सकते। वैसे भी अयोध्या मुद्दे पर राम भक्तों पर गोली चलाने का आरोप समाजवादी पार्टी पर है। वह बात अलग है कि वह कांड किस परिस्थिति में हुआ था। इधर डिंपल यादव के बयान बहुत सोचे समझे आ रहे हैं। सूत्रों से पता चला था कि डिंपल यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को अयोध्या मुद्दे पर शांत रहने की नसीहत दी थी।</div>
<div> </div>
<div>उसके बाद उन्होंने कहा कि हम भी राम जी के भक्त हैं और उनको बहुत मायने हैं। उत्तर प्रदेश में विपक्ष में जो फूट है वह सीधे सीधे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच दिखाई दे रही है और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समाजवादी पार्टी के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 10 सीटों के अंदर सीमित रखना चाहती है। जो कि कांग्रेस नेताओं के गले नहीं उतर रही है। कांग्रेस चाह रही है कि उसको अधिक से अधिक सीटें मिले और समाजवादी पार्टी के सहयोग से वह उत्तर प्रदेश में अपने आप को फिर से स्थापित कर सके। लेकिन अखिलेश यादव पिछले लोकसभा चुनाव को भूले नहीं हैं जब बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन कर सपा को केवल 5 सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी वहीं बहुजन समाज पार्टी के 10 प्रत्याशी जीते थे।‌ जब कि उसके बाद हुऐ विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने अकेले लड़ने का फैसला किया और वह यहां साफ हो गई। बसपा का केवल एक प्रत्याशी विधानसभा में पहुंचा। इसका सीधा कारण है कि लोकसभा चुनाव में सपा का वोट तो बसपा में ट्रांसफर हो गया लेकिन बसपा अपना वोट सपा में ट्रांसफर कराने में नाकामयाब रही।</div>
<div> </div>
<div>                        बिहार में नीतीश कुमार अब पूरी तरह से शांत दिखाई दे रहे हैं जब कि इंडिया गठबंधन के प्रयास नितीश कुमार के द्वारा ही किये गये थे। नितीश का मानना था कि राहुल गांधी की इमेज ठीक नहीं है। और उनको गठबंधन का नेता चुना जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। और नितीश कुमार दिल्ली में हुई बैठक के बाद बिना कुछ बोले शांत तरीके से पटना चले गए। हालांकि बाद में कांग्रेस आलाकमान ने नितीश कुमार को दिल्ली बुलाकर बात चीत की। लेकिन अब वह उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है जो पहले दिखाई दे रहा था। आरजेडी शांत है क्योंकि वह भले ही लोकसभा चुनाव में गठबंधन के साथ हो उसका पूरा ध्यान राज्य की राजनीति में लगा हुआ है। तेजस्वी यादव जानते हैं कि नितीश अब बहुत समय राजनीति नहीं कर सकते तो बिहार की कमान उनके हाथों में आ जाएगी। तेजस्वी यादव बिल्कुल नितीश के भतीजे के रुप में कार्य कर रहे हैं। और उन्हीं की हां में हां मिला रहे हैं। वह जानते हैं कि नितीश कुमार बहुत ही परिपक्व नेता हैं और उनसे विरोध करके या उनके विपरीत जाकर कुछ हासिल नहीं हो सकता। बिहार में भी कांग्रेस सम्मानजनक सीटें चाहती है। कांग्रेस का जो हाल उत्तर प्रदेश में है लगभग वही बिहार में है। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस के पास ऐसे नेता नहीं हैं जो अकेले दम पर एक सीट पर भी विजय हासिल कर सकें। इसलिए कांग्रेस आलाकमान इन दो राज्यों में बिना गठबंधन के चुनाव में नहीं उतरना चाहता है। भले ही उनकी पार्टी के अन्य नेता कुछ भी कहते रहें।</div>
<div> </div>
<div>                      दक्षिण भारत और राजस्थान छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में कांग्रेस की स्थिति ठीक है वह वहां अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। वहां किसी अन्य पार्टी का हस्तक्षेप भी नहीं है। कांग्रेस को इन राज्यों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वाकी के राज्यों को अपने सहयोगी दलों के लिए छोड़ देना चाहिए तब ही विपक्ष भारतीय जनता पार्टी का सामना कर सकता है। नहीं तो वही हाल होने हैं जो अब तक चुनाव दर चुनाव होते आए हैं। दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और वह लोकसभा में कैसा प्रदर्शन करती है यह आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन केजरीवाल के लिए यह अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगी। क्यों कि दिल्ली के विधानसभा चुनाव भी दूर नहीं हैं। दिल्ली की जनता का मूड अलग तरह का रहता है। दिल्ली की जनता विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को प्रचंड बहुमत देती है वहीं लोकसभा के लिए एक भी सीट नहीं देती है। पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला चुनाव है और अब यह देखना होगा कि पंजाब की जनता आम आदमी पार्टी से खुश है कि नहीं। महाराष्ट्र में एनसीपी और शिव सेना अपने आप से ही जूझ रही है। दोनों पार्टियां टूट चुकी हैं। और टूटे हुए घटक सरकार में शामिल हैं। वहां शरद पवार और उद्धव ठाकरे के लिए यह परीक्षा का समय होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jan 2024 19:06:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गठबंधन साथियों को धोखा देने वाली पार्टी है कांग्रेस: अखिलेश यादव </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Rajniti: </strong>इंडिया गठबंधन में बिखराव का एक और अध्याय सामने आ गया है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मतभेद इतने गहरा गये हैं कि इसका असर लोकसभा चुनावों में दोनों दलों के गठबंधन पर पड़ सकता है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांगेस पर उनकी पार्टी को ‘जातिवादी और वंशवादी’ बताने के लिए निशाना साधते हुए कहा है।</p>
<p>कि कांग्रेस अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जैसी ही भाषा बोल रही है। अखिलेश यादव ने साथ ही यह भी कहा है कि यह तो अच्छा हुआ कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136671/congress-is-the-party-that-betrays-its-alliance-partners-akhilesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/akhilesh-rahul_large_1257_23.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Rajniti: </strong>इंडिया गठबंधन में बिखराव का एक और अध्याय सामने आ गया है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मतभेद इतने गहरा गये हैं कि इसका असर लोकसभा चुनावों में दोनों दलों के गठबंधन पर पड़ सकता है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांगेस पर उनकी पार्टी को ‘जातिवादी और वंशवादी’ बताने के लिए निशाना साधते हुए कहा है।</p>
<p>कि कांग्रेस अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जैसी ही भाषा बोल रही है। अखिलेश यादव ने साथ ही यह भी कहा है कि यह तो अच्छा हुआ कि हमें पहले ही कांग्रेस की मंशा का पता चल गया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस का इतिहास गठबंधन साथियों को धोखा देने वाले का रहा है। अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी में कांग्रेस की ओर से सेंध लगाये जाने पर भी नाराजगी जताई।</p>
<p>हम आपको बता दें कि अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए सपा का प्रचार करते हुए छतरपुर जिले के चंदला में कहा, ‘‘यह कांग्रेस ही थी जिसने मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सपा के साथ गठबंधन करने से इंकार कर दिया।’’ यादव ने कहा, ''कांग्रेस कहती है कि सपा ‘जातिवादी और वंशवादी’ पार्टी है, तो फिर उसमें और भाजपा में क्या अंतर है? वे दोनों एक ही भाषा बोलते हैं।’’ अखिलेश यादव ने कहा कि वंशवादी राजनीति हर पार्टी में मौजूद है। उन्होंने कहा कि जो भी सामाजिक न्याय की बात करेगा उसे जातिवादी होने का आरोप झेलना पड़ेगा।</p>
<p>राज्य में कांग्रेस द्वारा सपा उम्मीदवारों की खरीद-फरोख्त पर यादव ने कहा, ‘‘यह उनके इरादों को दर्शाता है...उन्हें ऐसा करने दीजिए। मध्य प्रदेश के लोगों ने देखा है कि यह कांग्रेस ही थी जिसने गठबंधन को खारिज कर दिया था।'' हम आपको बता दें कि अखिलेश यादव चंदला में पार्टी प्रत्याशी पुष्पेंद्र अहिरवार के समर्थन में एक आमसभा को संबोधित करने आये थे।</p>
<p>जनसभा को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि कुछ दल सपा को जातिवादी कह रहे हैं, लेकिन "समाजवादी कभी भी जातिवादी नहीं हो सकते क्योंकि वे सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास करते हैं।" उन्होंने आश्वासन दिया कि जब भी सपा सत्ता में आएगी या उसके समर्थन से राज्य में सरकार बनेगी, तो सबसे पहले जातीय जनगणना कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि चंदला की जनता ने दो बार सपा प्रत्याशियों को आशीर्वाद दिया है और इस बार भी वह उसकी जीत सुनिश्चित करेगी।</p>
<p>बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के बारे में सपा प्रमुख यादव ने कहा कि इस पर लोकसभा चुनाव के समय चर्चा की जाएगी, क्योंकि केवल "पीडीए" (पिछड़ा, दलित और आदिवासी) की ताकत ही भाजपा को हरा सकेगी। उन्होंने एक प्रश्न पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कमलनाथ "बुजुर्ग" हैं, लेकिन सत्तारुढ़ भाजपा के पास मध्य प्रदेश में संभागों की संख्या से अधिक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।</p>
<p>चुनाव के बाद किसी पार्टी को समर्थन देने पर यादव ने कहा कि वह केवल उसी पार्टी को समर्थन देने पर विचार करेंगे जो जातीय जनगणना कराएगी। हालाँकि, यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस बयान पर टिप्पणी करने से परहेज किया कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में कुछ भी नहीं हो रहा है, उन्होंने कहा कि वह इस बारे में बाद में बात करेंगे। सपा प्रमुख यादव ने कहा, ‘‘भाजपा भी अब पिछड़े वर्गों को अधिक टिकट देने की बात कर रही है।</p>
<p>यह मानसिकता में बड़े बदलाव को दर्शाता है। यहां तक कि कांग्रेस, जिसने आजादी के बाद जातीय जनगणना कराना बंद कर दिया था, अब इसके बारे में बात कर रही है...इसका मतलब है कि उन्हें पीडीए की ताकत का एहसास हो रहा है।’’ दलित या पिछड़े वर्ग के किसी सदस्य को मुख्यमंत्री बनाने के चुनावी वादे के बारे में पूछे जाने पर यादव ने दावा किया कि कांग्रेस और भाजपा दोनों कभी भी दलितों और पिछड़े वर्गों के पक्ष में निर्णय नहीं लेंगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 13:30:02 +0530</pubDate>
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                <title>देश के 'भावी प्रधानमंत्री' अखिलेश यादव, राजधानी लखनऊ की सड़कों पर लगे पोस्टर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं. खासतौर पर इंडिया गठबंधन में उनके टशन को लेकर, जहां मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर वह दो-दो हाथ करने उतर आए. उनका सख्त रूप भी सामने आया जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस चीफ अजय राय को ‘चिरकुट’ बता दिया. साथ ही उन्होंने यूपी में कांग्रेस को ‘सबक सिखाने’ की कसम खाई. इस बीच लखनऊ में उनके आवास के आसपास की कुछ दिलचस्प तस्वीरें आई हैं जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाने की कवायद तेज कर दी है.</p>
<p>उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136148/countrys-future-prime-minister-akhilesh-yadav-posters-on-the-streets"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/whatsapp-image-2023-10-23-at-3.15.10-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p>समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं. खासतौर पर इंडिया गठबंधन में उनके टशन को लेकर, जहां मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर वह दो-दो हाथ करने उतर आए. उनका सख्त रूप भी सामने आया जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस चीफ अजय राय को ‘चिरकुट’ बता दिया. साथ ही उन्होंने यूपी में कांग्रेस को ‘सबक सिखाने’ की कसम खाई. इस बीच लखनऊ में उनके आवास के आसपास की कुछ दिलचस्प तस्वीरें आई हैं जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाने की कवायद तेज कर दी है.</p>
<p>उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा चीफ अखिलेश यादव का लखनऊ में एक पोस्टर देखा गया जिसमें उन्हें “देश का भावी प्रधानमंत्री” बताया गया है. पोस्टर कहा जा रहा है कि पार्टी नेता फखरुल हसन चांद ने लगवाई है. यह पोस्टर लखनऊ में पार्टी ऑफिस के बाहर लगाई गई है. प्रधानमंत्री की दावेदारी पर अखिलेश यादव ने तो कभी ऐसी टिप्पणी नहीं की लेकिन उनके कार्यकर्ता गाहेबगाहे इस मुद्दे को हवा देते रहे हैं. अखिलेश लेकिन जरूर चाहते हैं कि कोई उत्तर प्रदेश का नेता प्रधानमंत्री बने तो उन्हें खुशी होगी.</p>
<p><strong>“बदला है यूपी बदलेंगे देश” लखनऊ में लगे पोस्टर</strong></p>
<p>अखिलेश यादव को पार्टी नेता फखरुल चांद ने जन्मदिन की बधाई भी दी है, लेकिन अखिलेश का जन्मदिन 1 जुलाई को मनाया जाता है. फखरुल ने बताया कि ये पार्टी कार्यकर्ताओं का प्यार है कि वे अखिलेश यादव का जन्मदिन कई बार मनाते हैं. एक पोस्टर में वह खुद भी अखिश के साथ नजर आ रहे हैं. पोस्टर में अखिलेश यादव के कामों की सराहना की गई है. एक पोस्टर में कहा गया है, “बदला है यूपी बदलेंगे देश.” फखरुल चांद बीते विधानसभा चुनाव में संतकबीरनगर से पार्टी के उम्मीदवार थे लेकिन वह हार गए थे. पोस्टर में उन्होंने अपने आपको “पूर्व प्रत्याशी” बताया है और विधासभा क्षेत्र का पता भी दिया है.</p>
<p><strong>होर्डिंग में लोकसभा चुनाव की झलक </strong></p>
<p>होर्डिंग में फखरुल चांद ने अखिलेश यादव की जमकर तारीफ की है. होर्डिंग में लोकसभा चुनाव की झलक दिख रही है. कांग्रेस के साथ टशन के बीच समाजवादी पार्टी की तरफ से इस तरह के पोस्टर रिलीज किया जाना कई सवालों को जन्म देता है. मसलन, अखिलेश यादव ने अभी आधिकारिक रूप से इंडिया गठबंधन की रूपरेखा पर कुछ नहीं कहा है और ऐसा कोई संकेत भी फिलहाल नहीं दिया है जिससे लगे की वह गठबंधन से अलग होने की मंशा रखते हैं. कांग्रेस पार्टी माना जा रहा है कि इस बीच डैमेज कंट्रोल में लगी है, पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि परिवार में वाद-विवाद होता ही है. सबकुछ ठीक है.</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Oct 2023 15:15:59 +0530</pubDate>
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