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                <title>Flood Management - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Flood Management RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बाढ़ के खतरे को देखते हुए अलर्ट मोड पर प्रशासन, डीएम-एसपी ने कलवारी तटबंध का किया संयुक्त निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><em><strong>बस्ती।</strong></em> बस्ती जिलेमें नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना और पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने कलवारी क्षेत्र में तटबंधों का संयुक्त निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था और बाढ़ से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से तटबंधों की मजबूती, नदी के जलस्तर, पानी के बहाव और संभावित कटान वाले स्थानों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जाए और संवेदनशील स्थानों पर विशेष</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186085/in-view-of-the-danger-of-flood-the-administration-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260822-wa0075.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><em><strong>बस्ती।</strong></em> बस्ती जिलेमें नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना और पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने कलवारी क्षेत्र में तटबंधों का संयुक्त निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था और बाढ़ से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से तटबंधों की मजबूती, नदी के जलस्तर, पानी के बहाव और संभावित कटान वाले स्थानों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जाए और संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। साथ ही किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटने के लिए आवश्यक मरम्मत सामग्री और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने संबंधित थाना क्षेत्रों के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए और जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में प्रशासन का सहयोग किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक ने यह भी निर्देश दिया कि बाढ़ को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखी जाए और ग्रामीणों को सही एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संयुक्त निरीक्षण का उद्देश्य संभावित बाढ़ की स्थिति में जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और मजबूत करना रहा। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों से अपील की गई है कि तटबंध में कटान, पानी के असामान्य बढ़ाव या किसी अन्य आपात स्थिति की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों, नजदीकी थाने या पुलिस कंट्रोल रूम को दें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 19:04:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियों का जायजा, अपर जिलाधिकारी ने पम्पिंग स्टेशनों का किया निरीक्षण।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में गुरुवार को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनीता सिंह ने शहर के विभिन्न पम्पिंग स्टेशनों एवं स्लुज गेटों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी ने बक्शी बांध स्लुज गेट, अल्लापुर पम्पिंग स्टेशन, मोरीगेट पम्पिंग स्टेशन, यमुना बैंक रोड बांध संख्या-02 स्लुज गेट तथा यमुना बैंक रोड गेट संख्या-09 पम्पिंग स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184011/additional-district-magistrate-inspected-the-pumping-stations-to-review-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260723-wa0150.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में गुरुवार को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनीता सिंह ने शहर के विभिन्न पम्पिंग स्टेशनों एवं स्लुज गेटों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी ने बक्शी बांध स्लुज गेट, अल्लापुर पम्पिंग स्टेशन, मोरीगेट पम्पिंग स्टेशन, यमुना बैंक रोड बांध संख्या-02 स्लुज गेट तथा यमुना बैंक रोड गेट संख्या-09 पम्पिंग स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रत्येक स्थल पर पम्पों की कार्यशीलता, जल निकासी की क्षमता तथा मशीनों के रखरखाव की जानकारी अधिकारियों से प्राप्त की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान तहसीलदार सदर सहित सिंचाई, नगर निगम एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने अपर जिलाधिकारी को पम्पिंग स्टेशनों की वर्तमान स्थिति और बाढ़ से निपटने के लिए की गई तैयारियों की जानकारी भी दी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं लगातार सुनिश्चित की जा रही हैं।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 16:31:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में बुधवार को दो महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित हुईं। पहली बैठक में उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई, जबकि दूसरी बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति पर केंद्रित रही।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>उपचारित जल के पुनः उपयोग पर जोर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने उपविधियों में संशोधन कर उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग के प्रावधान शामिल करने तथा विभागवार पुनः उपयोग योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184003/emphasis-on-timely-implementation-of-schemes-in-chief-secretarys-review"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-22-at-21.56.30.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में बुधवार को दो महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित हुईं। पहली बैठक में उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई, जबकि दूसरी बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति पर केंद्रित रही।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>उपचारित जल के पुनः उपयोग पर जोर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने उपविधियों में संशोधन कर उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग के प्रावधान शामिल करने तथा विभागवार पुनः उपयोग योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और जल उपयोग केंद्रों का जीआईएस आधारित मानचित्रण कराने पर बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों के लिए शहर स्तर की पुनः उपयोग कार्ययोजना तैयार करने का अनुरोध करने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य स्तर पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति, तकनीकी समिति, जिला स्तरीय पुनः उपयोग समिति तथा विवाद समाधान समिति गठित करने का भी प्रस्ताव रखा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में नोएडा, मथुरा, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी सहित विभिन्न शहरों में उपचारित जल के सफल उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत किए गए। लखनऊ और वाराणसी में प्रस्तावित पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्कों के लिए एसटीपी के उपचारित जल के उपयोग की प्रगति की भी समीक्षा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने कहा कि उपचारित जल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि औद्योगिक एवं अन्य उपयोगकर्ताओं का विश्वास बढ़े और जल संरक्षण को बढ़ावा मिले।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>26 जुलाई से शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का औपचारिक शुभारंभ 26 जुलाई को आगरा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इसके साथ ही सभी जिलों में भी जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि सहायता प्राप्त एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के अधिकतम शिक्षकों को योजना से जोड़ा जाए तथा प्रत्येक जिले में कम से कम 20 लाभार्थियों को कैशलेस कार्ड वितरित किए जाएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>31 जुलाई तक जनगणना कर्मियों का मानदेय</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जनगणना-2027 के प्रथम चरण में कार्यरत सभी एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर एवं अन्य कार्मिकों का मानदेय और प्रशिक्षण भत्ता 31 जुलाई तक उनके खातों में अनिवार्य रूप से हस्तांतरित किया जाए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गोसंरक्षण और उर्वरक उपलब्धता पर निर्देश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बैठक में गोसंरक्षण की समीक्षा करते हुए 100 से कम गोवंश वाले गोआश्रय स्थलों के पशुओं को बड़े गोसंरक्षण केंद्रों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गोवंश की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त शेड, चबूतरे, जल निकासी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी उर्वरक केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया एवं फॉस्फेटिक उर्वरक उपलब्ध रहें तथा किसी भी केंद्र पर शून्य स्टॉक की स्थिति न बनने पाए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>किसान क्रेडिट कार्ड और छात्रवृत्ति पर फोकस</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने वंचित किसानों की पहचान कर उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने तथा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षित युवाओं को मुख्यमंत्री युवा योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">छात्रवृत्ति योजना की समीक्षा में कहा गया कि 5 अगस्त तक मास्टर डाटाबेस लॉक हो जाएगा। इसलिए सभी विद्यालयों का विवरण समय पर पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि कोई भी पात्र छात्र छात्रवृत्ति से वंचित न रहे।</p>
<blockquote class="format2">
<h4 style="text-align:justify;"><strong>डॉ. आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने डॉ. आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना के तहत सभी जिलाधिकारियों को 31 अगस्त 2026 तक निविदा आमंत्रण सहित सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में समाज सुधारकों एवं महापुरुषों की प्रतिमाओं के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी तथा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
</blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 21:40:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पर्याप्त संसाधनों के बाद भी बाढ़ (अतिवृष्टि) और सूखे(अनावृष्टि) स्थिति हर वर्ष क्यों</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत भौगोलिक तौर पर बड़ा विशाल का देश है। जहां एक ओर हमारे पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक संस्थान, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, उपग्रह तकनीक, विशाल प्रशासनिक तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए अलग मंत्रालय है, तो दूसरी ओर हर वर्ष भीषण गर्मी, सूखा, अतिवृष्टि और बाढ़ लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर देते हैं। जब संसाधनों की कमी नहीं है, तब तैयारी में कमी और इतनी जानमाल का नुकसान क्यों क्यों दिखाई देता है?</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या किसी एक शहर, राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के अनेक हिस्से भीषण लू और सूखे से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182832/floods-excessive-rainfall-and-droughts-despite-adequate-resources"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/drought_and_flood_750_1563354640_749x421.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत भौगोलिक तौर पर बड़ा विशाल का देश है। जहां एक ओर हमारे पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक संस्थान, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, उपग्रह तकनीक, विशाल प्रशासनिक तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए अलग मंत्रालय है, तो दूसरी ओर हर वर्ष भीषण गर्मी, सूखा, अतिवृष्टि और बाढ़ लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर देते हैं। जब संसाधनों की कमी नहीं है, तब तैयारी में कमी और इतनी जानमाल का नुकसान क्यों क्यों दिखाई देता है?</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या किसी एक शहर, राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के अनेक हिस्से भीषण लू और सूखे से जूझते हैं, वहीं असम, बिहार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल तथा महानगरों में कुछ घंटों की बारिश भी बाढ़ का रूप ले लेती है। हाल के दिनों में हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने सड़कें, पुल और गांवों को भारी नुकसान पहुँचाया। इसी समय देश के कई भागों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप भी देखने को मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी विकास नीति, प्रशासनिक तैयारी और दीर्घकालिक योजना की परीक्षा भी है जब मौसम विभाग कई दिन पहले भारी वर्षा, लू और चक्रवात की चेतावनी जारी करता रहता है, तब स्थानीय प्रशासन समय रहते पर्याप्त तैयारी में क्यों नहीं जुट पाता है? अक्सर राहत कार्य आपदा आने के बाद शुरू होते हैं। यदि पहले से जल निकासी की व्यवस्था, सुरक्षित आश्रय, पेयजल, चिकित्सा दल और आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी जाए, तो जन-धन की हानि काफी कम की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी बड़ी समस्या हमारी अनियोजित शहरीकरण की है। शहरों के तालाब, नाले और जलग्रहण क्षेत्र पाटकर भवन खड़े कर दिए गए। नदियों के प्राकृतिक मार्ग पर अतिक्रमण हुआ परिणामस्वरूप कुछ घंटों की तेज बारिश भी शहरों को जलमग्न कर देती है। दूसरी ओर वर्षा का वही पानी भूजल में नहीं समा पाता और कुछ ही महीनों बाद वही क्षेत्र जल संकट से जूझने लगता है। विडंबना यह है कि जिस पानी को बाढ़ के समय हम अभिशाप मानते हैं, उसी पानी की एक-एक बूंद के लिए गर्मियों में तरसते हैं। यदि बड़े पैमाने पर वर्षा जल संचयन, छोटे बाँध, तालाबों का पुनर्जीवन, चेक डैम और जल संरक्षण के कार्य निरंतर किए जाएँ तो बाढ़ का पानी भी भविष्य का अमृत बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब वर्षा कम दिनों में अधिक तीव्रता से होती है और गर्मी की अवधि अधिक लंबी तथा अधिक प्रचंड होती जा रही है। यही कारण है कि कभी तापमान 48 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है तो कहीं कुछ ही घंटों में महीनों जितनी वर्षा हो जाती है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि चरम मौसम की घटनाएँ अब नई सामान्य स्थिति बनती जा रही हैं।इसके बावजूद हमारी अधिकांश योजनाएँ अभी भी पुराने मौसम चक्र को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। शहरों की जल निकासी व्यवस्था दशकों पुरानी है, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के कार्य पर्याप्त नहीं हैं और नदी तटों पर निर्माण आज भी जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल राहत सामग्री बाँटना नहीं है। वास्तविक आपदा प्रबंधन वह है जिसमें आपदा आने से पहले जोखिम कम कर दिया जाए। विकसित देशों में पूर्व चेतावनी, सामुदायिक प्रशिक्षण, नियमित मॉक ड्रिल, आधुनिक संचार व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय प्रणाली पर विशेष बल दिया जाता है। भारत में भी इन व्यवस्थाओं को गाँव-गाँव और वार्ड स्तर तक पहुँचाने की आवश्यकता है। सरकारों की जवाबदेही जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही समाज की भी। जल स्रोतों को बचाना, वृक्षारोपण करना, प्लास्टिक और कचरे से नालियाँ न भरना, वर्षा जल संचयन अपनाना तथा स्थानीय जलाशयों का संरक्षण करना नागरिकों का भी कर्तव्य है। यदि समाज और शासन मिलकर कार्य करें, तभी स्थायी समाधान संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञ बार-बार यह भी कहते हैं कि हर जिले का अलग जलवायु अनुकूलन योजना तैयार होना चाहिए। जिन क्षेत्रों में सूखा अधिक पड़ता है वहाँ जल संरक्षण और सूखा-रोधी खेती को बढ़ावा मिले, जबकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नदी प्रबंधन, तटबंधों का वैज्ञानिक रखरखाव, जल निकासी और सुरक्षित पुनर्वास की स्थायी व्यवस्था हो।हाल के वर्षों में यह भी स्पष्ट हुआ है कि केवल राहत कोष बढ़ाने से समस्या समाप्त नहीं होगी। आवश्यकता ऐसी विकास नीति की है जिसमें सड़क, पुल, भवन, कॉलोनियाँ और औद्योगिक क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को ध्यान में रखकर बनाए जाएँ। अस्पताल, विद्यालय, बिजली व्यवस्था और संचार तंत्र भी आपदा सहनशील होने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अंततः प्रश्न संसाधनों का नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन का है। यदि हम हर वर्ष बाढ़ और सूखे के बाद केवल नुकसान का आकलन करते रहेंगे, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और विकराल होगा। लेकिन यदि हम आज से जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक योजना, स्थानीय भागीदारी और पूर्व तैयारी को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना लें, तो आपदाओं की विभीषिका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।प्रकृति हमें हर वर्ष चेतावनी दे रही है। अब निर्णय हमें करना है कि हम केवल राहत बाँटने वाला राष्ट्र बनना चाहते हैं या आपदाओं से पहले तैयारी करने वाला दूरदर्शी राष्ट्र। समय की यही सबसे बड़ी पुकार है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 21:56:27 +0530</pubDate>
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