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                <title>Judicial News - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Judicial News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह वित्तीय सहायता योजना के तहत वकीलों के आश्रितों के लिए मुआवज़ा बढ़ाए</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह दिवंगत वकीलों के आश्रितों को दिए जाने वाले मुआवज़े की राशि बढ़ाने पर विचार करे [ज्योतिमा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 2 अन्य]। जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीज़न बेंच ने गौर किया कि 'वकीलों के लिए वित्तीय सहायता योजना' के तहत मुआवज़े की रकम 2015 में ₹5 लाख तय की गई थी और तब से, इस योजना का फंड ₹20 करोड़ से बढ़कर ₹330 करोड़ हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, कोर्ट ने देखा कि मुआवज़े की रकम अभी भी ₹5 लाख ही है। इसलिए, कोर्ट ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186514/allahabad-high-court-has-asked-the-state-government-to-increase"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह दिवंगत वकीलों के आश्रितों को दिए जाने वाले मुआवज़े की राशि बढ़ाने पर विचार करे [ज्योतिमा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 2 अन्य]। जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीज़न बेंच ने गौर किया कि 'वकीलों के लिए वित्तीय सहायता योजना' के तहत मुआवज़े की रकम 2015 में ₹5 लाख तय की गई थी और तब से, इस योजना का फंड ₹20 करोड़ से बढ़कर ₹330 करोड़ हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, कोर्ट ने देखा कि मुआवज़े की रकम अभी भी ₹5 लाख ही है। इसलिए, कोर्ट ने सरकार से मुआवज़े की रकम बढ़ाने पर विचार करने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिया, "सरकार एक हलफनामा (affidavit) पेश करे कि वह वित्तीय सहायता योजना के तहत मुआवज़े की रकम में कितनी बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव रखती है; हम यह फैसला राज्य सरकार की समझदारी पर छोड़ते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर अगली तारीख तक इस मामले में सही हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो कोर्ट को इस मामले पर सख़्त रुख अपनाना पड़ेगा।" कोर्ट एक वकील की विधवा की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उन्होंने ₹5 लाख के मुआवज़े के लिए अपनी अर्ज़ी पर फ़ैसला होने में हुई देरी के कारण ब्याज की मांग की थी। उन्होंने 2020 में मुआवज़े के लिए अर्ज़ी दी थी, लेकिन भुगतान 2025 में हुआ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 21:22:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की लखनऊ में वकीलों के चैंबर गिराने के खिलाफ याचिका, कहा- अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में वकीलों के चैंबर गिराने के खिलाफ याचिका, खारिज करदी।  कहा- अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं।   कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें सार्वजनिक जमीन पर कथित अतिक्रमण कर और सड़कों को बाधित करके बनाए गए चैंबरों के संबंध में ध्वस्तीकरण नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।  जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ की याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उस पर वकीलों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186503/supreme-court-rejects-petition-against-demolition-of-lawyers-chambers-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/supream-court1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में वकीलों के चैंबर गिराने के खिलाफ याचिका, खारिज करदी।  कहा- अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं।   कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें सार्वजनिक जमीन पर कथित अतिक्रमण कर और सड़कों को बाधित करके बनाए गए चैंबरों के संबंध में ध्वस्तीकरण नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।  जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ की याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उस पर वकीलों का कब्जा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने निर्माण की जगह को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, "यह निर्माण कहां स्थित है पहले यह बताइए। मुख्य सड़क पर क्यों?" जस्टिस नाथ ने कहा कि किसी बार एसोसिएशन के निर्वाचित पदाधिकारी होने के आधार पर भी अनधिकृत निर्माण को बनाए रखने का अधिकार नहीं मिल जाता।  उन्होंने कहा, "आप अवैध निर्माण करते हैं और फिर कहते हैं कि मैं एसोसिएशन का निर्वाचित अध्यक्ष हूं और संचालन समिति का सदस्य हूं, इसलिए मुझे इसे जारी रखने का अधिकार है? नहीं, सभी अवैध निर्माण हटाए जाने चाहिए।" </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस नाथ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ जस्टिस के रूप में अपने कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद अदालत परिसर के आसपास की स्थिति देखी है और उन्हें पता है कि किस तरह सड़कों पर निर्माण करके यातायात बाधित किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के 6 अगस्त के आदेश से जुड़ा है। हाईकोर्ट के सामने करीब 72 कथित अतिक्रमणकर्ताओं का मामला था जिनमें ज्यादातर अधिवक्ता बताए गए हैं। आरोप था कि लखनऊ जिला अदालत परिसर के आसपास सार्वजनिक रास्तों या सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर चैंबर और अन्य निर्माण किए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने लखनऊ नगर निगम को संबंधित कब्जाधारियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था। उन्हें निर्माण खाली करने या जमीन और निर्माण पर अपना वैध अधिकार साबित करने का अवसर दिया गया था। ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में निर्माण गिराने का निर्देश दिया गया था। ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। प्रस्तावित कार्रवाई 30 अगस्त को किए जाने की बात सामने आई थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में  मंगलवार की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट आदिश अग्रवाला ने प्रभावित वकीलों को वैकल्पिक जगह दिए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजने की संभावना भी रखी। हालांकि, जस्टिस नाथ इस सुझाव से सहमत नजर नहीं आए। उन्होंने सवाल किया, "वकीलों के साथ मध्यस्थता?" पीठ ने अदालत परिसरों को अतिक्रमण से बचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। जस्टिस नाथ ने कहा कि अगर अदालत परिसर पर ही अतिक्रमण हो जाए तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 21:12:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मदरसों की ATS जांच पर रोक से इनकार, टीचर्स एसोसिएशन की याचिका खारिज।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div>  </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा की जा रही जांच के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ATS की जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।</div>
<div>  </div>
<div>याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश के विभिन्न मदरसों में ATS द्वारा की जा रही जांच से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182665/big-decision-of-allahabad-high-court-refusal-to-ban-ats"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/ald.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा की जा रही जांच के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ATS की जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।</div>
<div> </div>
<div>याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश के विभिन्न मदरसों में ATS द्वारा की जा रही जांच से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, डिवीजन बेंच ने मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए याचिका को ही खारिज कर दिया।</div>
<div> </div>
<div>अदालत के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में मदरसों को लेकर ATS की ओर से चल रही जांच पर फिलहाल कोई न्यायिक रोक नहीं रहेगी और जांच एजेंसी अपनी कार्रवाई जारी रख सकेगी।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 21:41:53 +0530</pubDate>
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