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                <title>Patient Care - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Patient Care RSS Feed</description>
                
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                <title>केंद्रीय चिकित्सालय  रेलवे में की गई एक जटिल सर्जरी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div><br /></div><div><strong>  ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div><br /></div><div>केंद्रीय चिकित्सालय, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज ने आधुनिक सर्कुलर स्टेपलर तकनीक से पहली बार बिना टांके आंतों को जोड़ने (इंटेस्टाइनल एनास्टोमोसिस) का सफल ऑपरेशन करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। </div><div><br /></div><div>दिनांक 24 अगस्त 2026 को लगभग 4 घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन (एंड-टू-एंड कोलोरेक्टल एनास्टोमोसिस) के माध्यम से 31 वर्षीया मरीज ममता मौर्या को राहत प्रदान की गई, जो पिछले तीन महीनों से पेट के रास्ते मल त्याग करने को मजबूर थीं</div><div>। बिना किसी टांके वाली इस अत्याधुनिक तकनीक से आंत की निरंतरता पुनः स्थापित हुई और मरीज ने 27 अगस्त 2026 को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186647/a-complex-surgery-performed-at-the-central-hospital-of-railways"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260828-wa0098.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div><br /></div><div><strong> ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div><br /></div><div>केंद्रीय चिकित्सालय, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज ने आधुनिक सर्कुलर स्टेपलर तकनीक से पहली बार बिना टांके आंतों को जोड़ने (इंटेस्टाइनल एनास्टोमोसिस) का सफल ऑपरेशन करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। </div><div><br /></div><div>दिनांक 24 अगस्त 2026 को लगभग 4 घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन (एंड-टू-एंड कोलोरेक्टल एनास्टोमोसिस) के माध्यम से 31 वर्षीया मरीज ममता मौर्या को राहत प्रदान की गई, जो पिछले तीन महीनों से पेट के रास्ते मल त्याग करने को मजबूर थीं</div><div>। बिना किसी टांके वाली इस अत्याधुनिक तकनीक से आंत की निरंतरता पुनः स्थापित हुई और मरीज ने 27 अगस्त 2026 को सामान्य मार्ग से सफलतापूर्वक मल त्याग किया। मरीज की हालत पूरी तरह स्थिर है और उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी। इस सफल सर्जरी का नेतृत्व मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं ऑनरेरी विजिटिंग कंसल्टेंट सर्जन डॉ. शबी अहमद तथा सेंट्रल हॉस्पिटल के वरिष्ठ रेलवे सर्जन डॉ. संजय कुमार ने संयुक्त रूप से किया। सर्जिकल टीम में हाउस सर्जन डॉ. सौरभ कुमार मौर्य, एनेस्थीसिया टीम के प्रमुख वरिष्ठ एनेस्थेटिस्ट डॉ. आलोक कुमार यादव, चीफ नर्सिंग सुपरिटेंडेंट श्रीमती मंजू सोनकर, सीनियर नर्सिंग सुपरिटेंडेंट श्री हरीश कुमार शर्मा, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट अंशिका, ड्रेसर आरती प्रसाद तथा चिकित्सा सहायक अमित शुक्ला, मनमोहन, श्री मूलचंद, श्रीमती रेखा एवं राजेंद्र तिवारी ने उत्कृष्ट योगदान दिया। चिकित्सा निदेशक डॉ. संजीव कुमार हंडू एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र नाथ ने पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि इस उपलब्धि से रेलवे लाभार्थियों को अपने ही अस्पताल में अत्याधुनिक इलाज मिलेगा, बाहरी अस्पतालों में रेफरल की आवश्यकता कम होगी, रेलवे के चिकित्सा व्यय में बचत होगी तथा अस्पताल की सर्जिकल क्षमताओं का विस्तार होगा।</div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:03:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डेंटल डाक्टर व डेंटल हाईजिनिस्ट दोनों एक साथ डियूटी से गायब, डेंटल कमरे में लटक रहा ताला</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केसीएचसी बहादुरपुर पर कोई जिम्मेदार अधिकारी न होने के कारण डेंटल सुविधाएं पड़ी ठप्पlबहादुरपुरसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरपुर में तैनात डेंटल डाक्टर एवं डेंटल हाईजिनिस्ट एक साथ डियूटी से गायब हैं जिसके चलते डेंटल स्वास्थ्य सुविधाएं ठप्प पड़ी है और डेंटल मरीज इधर उधर इलाज के लिए भटक रहे हैं । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० राजीव निगम की लापरवाही से डेंटल डाक्टर व डेंटल हाईजिनिस्ट डियूटी से गायब रहने में सफल है । मीडिया टीम से पूछताछ में कुछ मरीजों ने बताया कि नियमित रूप से डेंटल सेवाएं नही मिल पा रही है और दांत संबंधी मरीजों को</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184723/dental-doctor-and-dental-hygienist-both-missing-from-duty-lock"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260805-wa0047.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केसीएचसी बहादुरपुर पर कोई जिम्मेदार अधिकारी न होने के कारण डेंटल सुविधाएं पड़ी ठप्पlबहादुरपुरसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरपुर में तैनात डेंटल डाक्टर एवं डेंटल हाईजिनिस्ट एक साथ डियूटी से गायब हैं जिसके चलते डेंटल स्वास्थ्य सुविधाएं ठप्प पड़ी है और डेंटल मरीज इधर उधर इलाज के लिए भटक रहे हैं । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० राजीव निगम की लापरवाही से डेंटल डाक्टर व डेंटल हाईजिनिस्ट डियूटी से गायब रहने में सफल है । मीडिया टीम से पूछताछ में कुछ मरीजों ने बताया कि नियमित रूप से डेंटल सेवाएं नही मिल पा रही है और दांत संबंधी मरीजों को समय पर उपचार न मिलने से कई बार सीएचसी बहादुरपुर का चक्कर लगाना पड़ता है  इससे दूर-दराज से आने वाले मरीजों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरपुर में डेंटल सेवाओं को नियमित और सुचारु रूप से संचालित कराने की मांग की है।आपको बता दें कि पूर्व में भी डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश गुप्ता के डियूटी से गायब रहने के मामले में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हो चुकी है लेकिन सीएमओ कार्यालय में कार्यरत बाबू अभिषेक पाल , डिप्टी सीएमओ डा. ए . के चौधरी व सीएमओ डा. राजीव निगम ने उक्त प्रकरण में कार्यवाही करने के बजाए लेन देन करके मामले को रफा दफा कर दिया था इसीलिए आज तक डेंटल डाक्टर व डेंटल हाईजिनिस्ट ने शासन द्वारा निर्धारित समय से अस्पताल पर डियूटी नही किया है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहले तो सीएचसी बहादुरपुर पर डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश गुप्ता मात्र अकेले थे लेकिन वर्तमान समय में डेंटल डाक्टर की तैनाती हुई है फिर हमेशा दांत विभाग के कमरें में ताला ही लटकता रहता है । सीएचसी बहादुरपुर पर कोई भी जिम्मेदार डाक्टर न होने के कारण डेंटल डाक्टर व डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता को अस्पताल में समय से डियूटी कराने में सफल है अर्थात् इस प्रकार की डियूटी में चल रहे लापरवाही में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मिला हुआ है । अब देखना यह है कि डियूटी से गायब डेंटल डाक्टर व डेंटल हाईजिनिस्ट के खिलाफ कार्रवाई हो पाती है या पहले की तरह लेन देन करके मामले को रफा दफा कर दिया जायेगा ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 18:44:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रयागराज को मिलेगा लखनऊ की तर्ज पर आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने रविवार को प्रयागराज स्थित स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ट्रॉमा सेंटर, इमरजेंसी वार्ड, जनरल वार्ड सहित विभिन्न विभागों का भ्रमण किया और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उनके साथ मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने वार्डों में भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत कर इलाज, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकों की मौजूदगी तथा अन्य</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184547/prayagraj-will-get-a-modern-super-specialty-hospital-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260802-wa0132.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने रविवार को प्रयागराज स्थित स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ट्रॉमा सेंटर, इमरजेंसी वार्ड, जनरल वार्ड सहित विभिन्न विभागों का भ्रमण किया और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उनके साथ मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने वार्डों में भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत कर इलाज, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकों की मौजूदगी तथा अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत करते हुए बृजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रयागराज की स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज में लखनऊ की तर्ज पर एक आधुनिक एवं बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना की जाएगी, जिससे गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को लखनऊ या अन्य महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे प्रयागराज सहित आसपास के जनपदों के लाखों लोगों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार बेहतर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, बेहतर व्यवस्थाएं और मरीजों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 20:18:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गौर स्वास्थ्य केंद्र पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस कैंप में लापरवाही, भटकती रहीं गर्भवती महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण शासन की महत्वपूर्ण योजना 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस' हवा-हवाई साबित हो रही है। शुक्रवार, 24 जुलाई को निर्धारित दिवस होने के बावजूद सुबह 10 बजे तक कैंप का आयोजन शुरू नहीं हो सका, जिससे अस्पताल पहुंचीं गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुबह करीब 8 बजे ही खुल गया था। इसके बावजूद, मौके पर कोई भी नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला। कैंप में जांच,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184078/pregnant-women-kept-wandering-carelessly-in-prime-minister-matru-vandana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260725-wa0146-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण शासन की महत्वपूर्ण योजना 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस' हवा-हवाई साबित हो रही है। शुक्रवार, 24 जुलाई को निर्धारित दिवस होने के बावजूद सुबह 10 बजे तक कैंप का आयोजन शुरू नहीं हो सका, जिससे अस्पताल पहुंचीं गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुबह करीब 8 बजे ही खुल गया था। इसके बावजूद, मौके पर कोई भी नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला। कैंप में जांच, परामर्श और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर दूर-दराज से आईं दर्जनों गर्भवती महिलाएं और तीमारदार सुबह से ही परिसर में इधर-उधर भटकने को मजबूर दिखे। कई घंटों तक इंतजार करने के बाद भी जब डॉक्टर और स्टाफ नहीं पहुंचे, तो मरीजों का सब्र टूट गया और उन्होंने नाराजगी जाहिर की।बता दें कि CHC गौर में प्रत्येक माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को इस विशेष कैंप का आयोजन अनिवार्य रूप से तय है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से इस मामले की जांच कर लापरवाह स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 20:52:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>गौर स्वास्थ्य केंद्र पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस कैंप में लापरवाही, भटकती रहीं गर्भवती महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण शासन की महत्वपूर्ण योजना 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस' हवा-हवाई साबित हो रही है। शुक्रवार, 24 जुलाई को निर्धारित दिवस होने के बावजूद सुबह 10 बजे तक कैंप का आयोजन शुरू नहीं हो सका, जिससे अस्पताल पहुंचीं गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुबह करीब 8 बजे ही खुल गया था। इसके बावजूद, मौके पर कोई भी नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला। कैंप में जांच,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184076/pregnant-women-kept-wandering-carelessly-in-prime-minister-matru-vandana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260725-wa0146.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण शासन की महत्वपूर्ण योजना 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना दिवस' हवा-हवाई साबित हो रही है। शुक्रवार, 24 जुलाई को निर्धारित दिवस होने के बावजूद सुबह 10 बजे तक कैंप का आयोजन शुरू नहीं हो सका, जिससे अस्पताल पहुंचीं गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुबह करीब 8 बजे ही खुल गया था। इसके बावजूद, मौके पर कोई भी नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला। कैंप में जांच, परामर्श और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर दूर-दराज से आईं दर्जनों गर्भवती महिलाएं और तीमारदार सुबह से ही परिसर में इधर-उधर भटकने को मजबूर दिखे। कई घंटों तक इंतजार करने के बाद भी जब डॉक्टर और स्टाफ नहीं पहुंचे, तो मरीजों का सब्र टूट गया और उन्होंने नाराजगी जाहिर की।बता दें कि CHC गौर में प्रत्येक माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को इस विशेष कैंप का आयोजन अनिवार्य रूप से तय है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से इस मामले की जांच कर लापरवाह स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 20:49:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निःशुल्क चिकित्सा एवं जांच शिविर मे 230 लोगों को चश्मे व 300 लोगों को वितरित किए गए छाते</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> स्वर्गीय राजेश दूबे जी की पुण्यतिथि के अवसर पर गांधीनगर स्थित एस.आर.डी. हॉस्पिटल में गुरुवार को विशाल निःशुल्क चिकित्सा एवं जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में किडनी, लीवर, रक्त, कोलेस्ट्रॉल, शुगर, ब्लड प्रेशर तथा थायराइड की निःशुल्क जांच की गई। इसके साथ ही नेत्र रोगियों की जांच कर 230 लोगों को निःशुल्क चश्मे तथा बरसात से बचाव हेतु 300 छाते वितरित किए गए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर का शुभारम्भ एस.पी. ग्रुप के निदेशक आशीष दूबे एवं एस.आर.डी. हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. रोहन दूबे ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने स्व. राजेश दूबे जी के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183040/spectacles-were-distributed-to-230-people-and-umbrellas-to-300"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260709-wa0087.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> स्वर्गीय राजेश दूबे जी की पुण्यतिथि के अवसर पर गांधीनगर स्थित एस.आर.डी. हॉस्पिटल में गुरुवार को विशाल निःशुल्क चिकित्सा एवं जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में किडनी, लीवर, रक्त, कोलेस्ट्रॉल, शुगर, ब्लड प्रेशर तथा थायराइड की निःशुल्क जांच की गई। इसके साथ ही नेत्र रोगियों की जांच कर 230 लोगों को निःशुल्क चश्मे तथा बरसात से बचाव हेतु 300 छाते वितरित किए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर का शुभारम्भ एस.पी. ग्रुप के निदेशक आशीष दूबे एवं एस.आर.डी. हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. रोहन दूबे ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने स्व. राजेश दूबे जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। वक्ताओं ने कहा कि स्व. राजेश दूबे का जीवन समाज सेवा, सरलता और आत्मीयता का प्रतीक था तथा उनकी स्मृति में आयोजित यह शिविर जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर में कुल 1360 मरीजों ने विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क परामर्श प्राप्त किया। इनमें जनरल फिजीशियन डॉ. अश्विनी सिंह, डॉ. अभिनव मिश्र, डॉ. हुसैन, महिला रोग विशेषज्ञ, न्यूरो फिजीशियन डॉ. के.के. दूबे, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित अन्य चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। इस अवसर पर एस.पी. ग्रुप के निदेशक अखिलेश दूबे, धीरेंद्र शुक्ल, विनय शुक्ल, सत्यदेव शुक्ल, भोलानाथ चौधरी, कृष्णमणि त्रिपाठी, ओमप्रकाश दूबे, मनीष सिंह, देवव्रत शुक्ल, विष्णु शुक्ल, रामचन्द्र यादव, ओमप्रकाश आर्या, गरुणध्वज पाण्डेय, प्रदीप दूबे, डॉ. के.के. सिंह, एम.पी. दूबे, गोपेश्वर त्रिपाठी, कैलाशनाथ दूबे, सुशील मिश्र, अनुराग शुक्ल, प्रभुप्रीत सिंह, संतोष दूबे, अभिषेक त्रिपाठी, सुनील सिंह, वीरेन्द्र उर्फ बंकू, रामानन्द उर्फ नन्हे सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में अखिलेश दूबे ने सभी चिकित्सकों, सहयोगियों एवं उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुफ्त दवा योजना पर संकट नहीं समाधान की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लाखों मरीजों की उम्मीद का सबसे बड़ा केंद्र है। हर दिन हजारों मरीज दूर-दराज के गांवों और कस्बों से यहां इस विश्वास के साथ पहुंचते हैं कि उन्हें बेहतर इलाज के साथ सरकार की निशुल्क दवा योजना का लाभ मिलेगा। लेकिन जब इलाज के बाद डॉक्टर की लिखी दवाएं अस्पताल के काउंटर पर उपलब्ध नहीं होतीं तो मरीज और उसके परिजनों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। हाल के दिनों में जीवनरक्षक दवाओं सहित बड़ी संख्या में दवाओं की अनुपलब्धता की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182978/free-medicine-scheme-is-not-a-crisis-but-a-solution"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/medicines_1534214900_1732846876853.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लाखों मरीजों की उम्मीद का सबसे बड़ा केंद्र है। हर दिन हजारों मरीज दूर-दराज के गांवों और कस्बों से यहां इस विश्वास के साथ पहुंचते हैं कि उन्हें बेहतर इलाज के साथ सरकार की निशुल्क दवा योजना का लाभ मिलेगा। लेकिन जब इलाज के बाद डॉक्टर की लिखी दवाएं अस्पताल के काउंटर पर उपलब्ध नहीं होतीं तो मरीज और उसके परिजनों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। हाल के दिनों में जीवनरक्षक दवाओं सहित बड़ी संख्या में दवाओं की अनुपलब्धता की खबरें सामने आई हैं। यह स्थिति निश्चित रूप से चिंता का विषय है और इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गरीब और मध्यम वर्ग का बड़ा हिस्सा सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहता है। निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदना हर परिवार के लिए आसान नहीं होता। विशेष रूप से कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए नियमित दवाएं जीवन का आधार होती हैं। यदि ऐसी दवाएं समय पर नहीं मिलें तो बीमारी बढ़ सकती है और आर्थिक बोझ भी कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि निशुल्क दवा योजना को राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं में गिना जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयपुर के एसएमएस अस्पताल में जिन मरीजों को एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक भेजा गया, कई दिनों बाद आने के लिए कहा गया या फिर बाहर से दवा खरीदने की सलाह दी गई, उनकी परेशानी को सहज रूप से समझा जा सकता है। जो मरीज सैकड़ों किलोमीटर दूर से किराया खर्च करके अस्पताल पहुंचता है, उसके लिए केवल दवा ही नहीं बल्कि दोबारा आने-जाने का खर्च भी बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे मरीजों के सामने यह प्रश्न खड़ा हो जाता है कि वह इलाज कराए या परिवार का खर्च चलाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी सच है कि यह समस्या केवल जयपुर तक सीमित नहीं दिखाई देती। प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में समय-समय पर कुछ दवाओं की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं सप्लाई में देरी होती है तो कहीं खरीद प्रक्रिया पूरी होने तक मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। इससे सरकार की अच्छी योजनाओं की छवि प्रभावित होती है। जनता यह नहीं देखती कि कमी किस स्तर पर हुई है। उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि अस्पताल पहुंचने पर दवा मिलनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि इस पूरे विषय को केवल आलोचना के दृष्टिकोण से देखना भी उचित नहीं होगा। राजस्थान सरकार ने पिछले कई वर्षों में चिकित्सा सुविधाओं का उल्लेखनीय विस्तार किया है। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, जिला अस्पतालों का सुदृढ़ीकरण, मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना और निशुल्क जांच योजना जैसी पहल ने लाखों गरीब परिवारों को राहत दी है। यदि ये योजनाएं नहीं होतीं तो गरीब मरीजों का इलाज और भी कठिन हो जाता। इसलिए यह कहना उचित होगा कि योजना में कमी नहीं है बल्कि उसके क्रियान्वयन के कुछ हिस्सों में सुधार की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अस्पताल प्रशासन का यह कहना भी महत्वपूर्ण है कि कुछ दवाएं राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड से उपलब्ध नहीं हो पातीं तो स्थानीय स्तर पर खरीद की जाती है। कई बार आपूर्ति करने वाली कंपनियों की ओर से विलंब होने के कारण अस्थायी समस्या उत्पन्न हो जाती है। यदि वास्तव में ऐसा है तो इसका समाधान भी प्रशासनिक स्तर पर संभव है। दवाओं की उपलब्धता का नियमित आकलन, समय रहते नई खरीद प्रक्रिया और वैकल्पिक व्यवस्था से इस प्रकार की कठिनाइयों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य व्यवस्था जितनी बड़ी होती है, चुनौतियां भी उतनी ही अधिक होती हैं। राजस्थान जैसे विशाल राज्य में करोड़ों लोगों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना आसान कार्य नहीं है। दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और कई बार अनुमान से अधिक मरीज आने के कारण स्टॉक जल्दी समाप्त हो जाता है। इसलिए इस समस्या को केवल लापरवाही कह देना भी पूरी तस्वीर नहीं दर्शाता। आवश्यकता इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल प्रशासन और दवा आपूर्ति एजेंसियां मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करें जिससे आवश्यक दवाओं का भंडार हमेशा सुरक्षित रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तकनीक का बेहतर उपयोग भी इस दिशा में बड़ा समाधान बन सकता है। यदि सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं का ऑनलाइन स्टॉक रियल टाइम अपडेट हो तो यह पहले ही पता चल जाएगा कि कौन सी दवा कितनी मात्रा में बची है और कब नई खेप की आवश्यकता होगी। इससे आपूर्ति में होने वाली देरी को काफी हद तक रोका जा सकता है। मरीजों को भी मोबाइल या हेल्पलाइन के माध्यम से यह जानकारी मिल सके कि संबंधित दवा किस अस्पताल में उपलब्ध है। इससे उन्हें अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">साथ ही अस्पतालों में मरीजों के साथ संवाद की व्यवस्था भी बेहतर होनी चाहिए। यदि किसी दवा की अस्थायी कमी है तो मरीज को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि दवा कब तक उपलब्ध होगी या उसका सुरक्षित विकल्प क्या है। कई बार जानकारी के अभाव में मरीज अधिक परेशान हो जाता है। संवेदनशील व्यवहार और स्पष्ट सूचना भी आधी समस्या का समाधान कर देती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस विषय में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की भी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्हें केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर समस्याओं की जानकारी सरकार तक पहुंचानी चाहिए। जहां भी दवा की कमी हो, वहां तत्काल समाधान के लिए प्रयास होने चाहिए। स्वास्थ्य सेवा राजनीति का नहीं बल्कि मानवता का विषय है। इसलिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सरकार के सामने यह अवसर भी है कि वह इस घटना को एक चेतावनी के रूप में लेकर पूरे प्रदेश में दवा आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करे। जिन अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की कमी है वहां तत्काल अतिरिक्त स्टॉक भेजा जाए। खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा तेज बनाया जाए। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है, वहां जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। इससे जनता का विश्वास और मजबूत होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंततः किसी भी कल्याणकारी सरकार की पहचान केवल योजनाएं बनाने से नहीं बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने से होती है। राजस्थान की निशुल्क दवा योजना लाखों लोगों के लिए वरदान रही है और इसे और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। यदि दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित हो जाए तो गरीब मरीजों को न तो जेब से खर्च करना पड़ेगा और न ही इलाज अधूरा छोड़ने की मजबूरी होगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक सकारात्मक कदम उठाए हैं और उनका लाभ भी समाज को मिला है। अब आवश्यकता इस बात की है कि दवा आपूर्ति से जुड़ी कमियों को शीघ्र दूर किया जाए ताकि कोई भी मरीज केवल दवा की अनुपलब्धता के कारण पीड़ा न झेले। एक संवेदनशील और उत्तरदायी स्वास्थ्य व्यवस्था ही विकसित राजस्थान की पहचान बनेगी, जहां इलाज के साथ भरोसा भी हर मरीज को समान रूप से प्राप्त हो।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:22:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> हेल्थ मिनिस्टर ने पटियाला में रोबोटिक-असिस्टेड ऑर्थोपेडिक सर्जरी टेक्नोलॉजी लॉन्च की</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला-</strong> पंजाब सरकार की तरफ से राज्य के लोगों को वर्ल्ड-क्लास हेल्थकेयर सर्विस देने की दिशा में एक और अहम कदम उठाते हुए, पंजाब के हेल्थ और फैमिली वेलफेयर मिनिस्टर डॉ. बलबीर सिंह ने आज पटियाला में ऑर्थोपेडिक इलाज के लिए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी टेक्नोलॉजी लॉन्च की। इस मौके पर सिविल सर्जन पटियाला डॉ. शैली जेटली भी खास तौर पर मौजूद थीं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर बोलते हुए, डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार लोगों को मॉडर्न, क्वालिटी और सस्ती हेल्थकेयर सर्विस देने के लिए पूरी तरह से कमिटेड है। उन्होंने कहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182735/social-worker-vinod-mishra-passes-away"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1000931303-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला-</strong> पंजाब सरकार की तरफ से राज्य के लोगों को वर्ल्ड-क्लास हेल्थकेयर सर्विस देने की दिशा में एक और अहम कदम उठाते हुए, पंजाब के हेल्थ और फैमिली वेलफेयर मिनिस्टर डॉ. बलबीर सिंह ने आज पटियाला में ऑर्थोपेडिक इलाज के लिए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी टेक्नोलॉजी लॉन्च की। इस मौके पर सिविल सर्जन पटियाला डॉ. शैली जेटली भी खास तौर पर मौजूद थीं।</div>
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<div style="text-align:justify;">इस मौके पर बोलते हुए, डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार लोगों को मॉडर्न, क्वालिटी और सस्ती हेल्थकेयर सर्विस देने के लिए पूरी तरह से कमिटेड है। उन्होंने कहा कि हेल्थ सेक्टर में नई टेक्नोलॉजी अपनाना समय की ज़रूरत है और रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी इस दिशा में एक बड़ी कामयाबी है।</div>
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<div style="text-align:justify;">हेल्थ मिनिस्टर ने कहा कि रोबोटिक टेक्नोलॉजी की मदद से की जाने वाली ऑर्थोपेडिक सर्जरी पहले के मुकाबले ज़्यादा सटीकता, सुरक्षा और कामयाबी के साथ की जा सकती हैं। इस टेक्नोलॉजी से ऑपरेशन के बाद मरीज़ को दर्द भी कम होता है। साथ ही, मरीज़ जल्दी ठीक होता है, जिससे वह जल्दी नॉर्मल ज़िंदगी में लौट सकता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">हेल्थ मिनिस्टर ने कहा कि लोगों में यह सोच है कि रोबोटिक सर्जरी बहुत महंगी होती है, लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं है। इस टेक्नोलॉजी का मकसद मरीज़ों को बेहतर इलाज और तेज़ी से रिकवरी देना है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस सुविधा से पटियाला और आस-पास के इलाकों के लोगों को बहुत फ़ायदा होगा और उन्हें ऐसे इलाज के लिए दूसरे बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पटियाला हेल्थ सर्विसेज़ का एक अहम सेंटर बन रहा है और इस नई सुविधा से हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और आस-पास के दूसरे राज्यों के मरीज़ों को भी हाई-क्वालिटी इलाज का फ़ायदा मिलेगा। इससे न सिर्फ़ इलाके का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत होगा, बल्कि पंजाब मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाएगा।इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. शैली जेटली ने कहा कि रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी टेक्नोलॉजी हेल्थ सेक्टर में एक नया चैप्टर साबित होगी। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 22:59:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>डॉक्टर डे: सफेद कोट में भगवान, धड़कनों के रखवाले को हजार सलाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182495/doctors-day-a-thousand-salutes-to-the-god-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया। राजनीति में आने के बाद भी वो रोज सुबह 4 बजे उठकर मरीज देखते थे। उनके लिए मरीज भगवान था और सेवा धर्म। इसी सोच को सलाम करने के लिए 1991 से 1 जुलाई को डॉक्टर डे घोषित हुआ। सफेद कोट के पीछे छुपी जिंदगी</p>
<p><br />हम डॉक्टर को सिर्फ OPD में 5 मिनट देखते हैं। पर उसके पीछे क्या है? नींद की कुर्बानी: 36 घंटे की ड्यूटी, इमरजेंसी कॉल, रात 2 बजे उठकर ICU दौड़ना। त्योहार, जन्मदिन, शादी सब हॉस्पिटल की ड्यूटी के आगे सेकेंड पर आ जाता है।</p>
<p><br />दिमाग का बोझ: एक गलत दवा, एक छूटा हुआ लक्षण, और किसी की पूरी दुनिया उजड़ सकती है। इसलिए हर केस में 100% दिमाग लगाना पड़ता है। डिप्रेशन और बर्नआउट डॉक्टरों में सबसे ज्यादा है।</p>
<p><br />जोखिम उठाकर सेवा: कोविड-19 में PPE किट पहनकर 12 घंटे काम करना, संक्रामक बीमारियों के बीच खड़े रहना, कभी-कभी मरीजों के परिजनों का गुस्सा झेलना। फिर भी वो भागते नहीं हैं। यही है मानव सेवा। किताबों से नहीं, जिगर से की जाने वाली सेवा। डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते, वो उम्मीद देते हैं। गांव का डॉक्टर : जहां MRI-CT नहीं, वहां स्टेथोस्कोप से बीमारी पकड़ लेता है। 50 रुपये फीस में 1 घंटे समझाता है। सर्जन: 8 घंटे टेबल पर झुका रहता है, ताकि किसी और को जिंदगी मिल जाए। बाल रोग विशेषज्ञ : रोते हुए बच्चे को चॉकलेट देकर इंजेक्शन लगाता है, और मां को हिम्मत देता है।</p>
<p><br />ग्रामीण MBBS डॉक्टर: बाढ़, महामारी, एक्सीडेंट में सबसे पहले वही पहुंचता है, एंबुलेंस से पहले। कोविड से लेकर डेंगू, हार्ट अटैक से लेकर डिलीवरी तक, हर संकट में सबसे आगे वो सफेद कोट ही खड़ा मिला। डॉक्टर भगवान नहीं हैं। वो इंसान हैं। उनसे गलती हो सकती है, वो थक सकते हैं। पर इरादा उनका हमेशा सेवा का ही होता है। भरोसा रखिए, सवाल पूछिए : गूगल डॉक्टर से पहले असली डॉक्टर की सुनिए। इज्जत दीजिए: इमरजेंसी में गाली की जगह धन्यवाद दीजिए। वो भी आपके जैसा इंसान है। सेल्फ-केयर : डॉक्टर को भी आराम, सम्मान और सुरक्षित माहौल चाहिए। हिंसा से उनका मनोबल टूटता है, इलाज नहीं सुधरता। निष्कर्ष: हजार सलाम कम हैं। डॉक्टर वो पुल है जो 'बीमारी' और 'जिंदगी' के बीच बना है। वो रात-रात भर जागकर हमारे अपनों की सांसें गिनते हैं। फीस लेते हैं, पर कई बार उम्मीद फ्री में दे देते हैं। इस 1 जुलाई को अपने फैमिली डॉक्टर, अपने शहर के उस सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर, या उस जूनियर रेजिडेंट को एक मैसेज कर दीजिए। कहिए: "डॉक्टर साहब, आपकी मानव सेवा को हजार सलाम।" क्योंकि जब सब थक जाते हैं, तब भी धड़कन चलती रहती है। और उस धड़कन को चलाने वाला सफेद कोट होता है। लेकिन हम इसे भी नजरंदाज नहीं कर सकते कि चिकित्सा सेवा का व्यवसायीकरण हो चुका है और आम जनता का कहीं कहीं शोषण भी हो रहा है। आज इलाज मानव सेवा न रहकर बेहद महंगा व्यापार बन चुका है। अत्यधिक व्यवसायीकरण के समय में आज कई निजी अस्पताल व नर्सिंग होम लाभ कमाने का केंद्र बन गए हैं। मरीजों को अनावश्यक रूप से महंगी जांचें और दवाइयां लिखी जातीं हैं, जिससे आम आदमी बहुत परेशान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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