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                <title>Delhi High Court - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Delhi High Court RSS Feed</description>
                
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                <title>विनेश फोगाट को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को फटकार लगाई। डब्ल्यूएफआई ने पहलवान विनेश फोगाट को घरेलू टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह फोगाट का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल बनाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने केंद्र सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि फोगाट को आने वाले एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाजत दी जाए। विनेश मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी करना चाहती हैं। पीठ</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179978/vinesh-phogat-gets-relief-from-delhi-high-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/phogat-1-2026-05-7771d6ada0afc6744afc6b59c7ff8a20.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को फटकार लगाई। डब्ल्यूएफआई ने पहलवान विनेश फोगाट को घरेलू टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह फोगाट का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल बनाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने केंद्र सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि फोगाट को आने वाले एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाजत दी जाए। विनेश मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी करना चाहती हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि डब्ल्यूएफआई का शीर्ष खिलाड़ियों को भाग लेने की अनुमति देने की पूर्व प्रथा पर नहीं चलना ‘बहुत कुछ कहता है’।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि देश में मातृत्व का जश्न मनाया जाता है और संघ को ‘प्रतिशोध’ की भावना से कार्य नहीं करना चाहिए। अदालत ने केंद्र से फोगाट का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल गठित करने को कहा। हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञों से उसकी संभावनाओं का मूल्यांकन करने को कहें। यह सुनिश्चित करें कि वह भाग ले सके।</span>'</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले 18 मई को हाई कोर्ट ने विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डब्ल्यूएफआई ने हाल ही में विनेश को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और जून 2026 तक घरेलू टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित किया था। विनेश ने इस नोटिस को चुनौती दी थी जिस पर हाई कोर्ट में आज सुनवाई हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डब्ल्यूएफआई ने हाल ही में अनुशासनहीनता और डोपिंग विरोधी नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर विनेश को नोटिस भेजा था।इतना ही नहीं विनेश जून 2026 तक घरेलू टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित की गईं क्योंकि उन्होंने यूडब्ल्यूडब्ल्यू के डोपिंग रोधी नियम के तहत संन्यास से वापसी के बाद जरूरी छह महीने का नोटिस पीरियड नहीं दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि विनेश दोबारा कुश्ती में वापसी करना चाहती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्हें आईटीए या इंटरनेशनल फेडरेशन को कम से कम छह महीने पहले सूचना देनी होगी और इस दौरान एंटी-डोपिंग टेस्टिंग के लिए उपलब्ध रहना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">15 पन्नों के नोटिस में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डब्ल्यूएफआई ने आरोप लगाया था कि विनेश के आचरण ने राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा किया है जिससे भारतीय कुश्ती की छवि को नुकसान पहुंचा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डब्ल्यूएफआई ने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि विनेश इस वर्ष 26 जून तक किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पात्र नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें गोंडा में 10 से 12 मई तक होने वाला राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट भी शामिल था।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:24:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली-बॉम्बे हाईकोर्ट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
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<div>दिल्ली हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ दी गई है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को एक ईमेल के जरिए बम की धमकी मिली थी। इस मामले की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस ने अदालत के पूरे परिसर की जांच की और गेट पर अतिरिक्त सुरक्षा बल लगा दिया।</div>
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<div>इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के महापंजीयक को बुधवार को उनके आधिकारिक अकाउंट में ईमेल मिला। बलवंत देसाई नामक व्यक्ति द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154839/68c3fabecab79"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/दिल्ली-बॉम्बे-हाईकोर्ट-को-मिली-बम-से-उड़ाने-की-धमकी,-पुलिस-ने-बढ़ाई-सुरक्षा-व्यवस्था.png" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
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<div>दिल्ली हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ दी गई है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को एक ईमेल के जरिए बम की धमकी मिली थी। इस मामले की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस ने अदालत के पूरे परिसर की जांच की और गेट पर अतिरिक्त सुरक्षा बल लगा दिया।</div>
<div> </div>
<div>इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के महापंजीयक को बुधवार को उनके आधिकारिक अकाउंट में ईमेल मिला। बलवंत देसाई नामक व्यक्ति द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के महापंजीयक को 12 फरवरी को भेजे गए ईमेल में आगाह किया गया है कि बृहस्पतिवार को एक बम धमाका होगा और यह दिल्ली में सबसे बड़ा धमाका होगा। ईमेल में लिखा है, ‘‘यह दिल्ली में सबसे बड़ा विस्फोट होगा। मंत्री को भी फोन करो, सबको उड़ा दिया जाएगा।’’ </div>
<div> </div>
<div>इस ईमेल को गंभीरता से लेते हुए प्राधिकारियों ने सुरक्षा बढ़ा दी है। ईमेल के बाद उच्च न्यायालय के प्राधिकारियों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के सक्षम प्राधिकरण ने मामले को गंभीरता से लिया है और आयुक्त से उच्च न्यायालय परिसर में और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ाने का अनुरोध किया है। उच्च न्यायालय के प्राधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच कराने और जल्द से जल्द एक रिपोर्ट सौंपने की मांग की है। </div>
<div> </div>
<div>दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने कहा कि उच्च न्यायालय के बाहर पहले हुए बम विस्फोट को ध्यान में रखते हुए प्राधिकारी कोई जोखिम नहीं लेना चाहते और सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है। उन्होंने बताया कि अदालत के कामकाज में कोई बाधा नहीं है और बार के सदस्य सहयोग कर रहे हैं। माथुर ने बताया कि अदालत परिसर में आ रहे लोगों के पहचान पत्रों की जांच की जा रही है। बार सदस्यों की पहचान करने के लिए बार एसोसिएशन के कर्मचारी भी प्रवेश द्वार पर खड़े हैं।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली उच्च न्यायालय के बाद, बम की आशंका के बाद बॉम्बे उच्च न्यायालय को खाली कराया गया।यह घटनाक्रम दिल्ली उच्च न्यायालय में बम की धमकी के बाद कार्यवाही अचानक रोक दिए जाने के कुछ ही समय बाद हुआ।बम की आशंका के बाद परिसर खाली कराए जाने के बाद शुक्रवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय में कार्यवाही बाधित रही।</div>
<div> </div>
<div>वकीलों, वादियों और अदालती कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर इमारत छोड़ने के लिए कहा गया और सुरक्षाकर्मियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी। बम निरोधक दस्तों को तुरंत जाँच के लिए तैनात किया गया।</div>
<div>पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तलाशी अभियान शुरू करने के बाद अदालती सुनवाई स्थगित कर दी गई।यह घटनाक्रम शुक्रवार सुबह दिल्ली उच्च न्यायालय में हुई ऐसी ही घटनाओं के तुरंत बाद हुआ है, जब ईमेल के ज़रिए बम की धमकी के बाद कार्यवाही अचानक रोक दी गई थी।</div>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Sep 2025 20:24:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूपयों का पहाड़ घर में छिपाकर रखने वाले जज साहब </title>
                                    <description><![CDATA[<div>दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद भारी मात्रा में नकदी बरामद होने से न्यायपालिका में हड़कंप मच गया। यह मामला इतना गंभीर हो गया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम को उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा साथ ही फिलहाल उन्हें न्यायिक कार्य से विलग कर दिया गया है। </div>
<div>  </div>
<div>आपको बता दें 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई थी. वह शहर से बाहर थे. जज के निजी सचिव ने पीसीआर को बुलाया. इसके बाद आग पर तो काबू</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150327/judge-who-keeps-a-mountain-of-money-in-the-house%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(16)4.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद भारी मात्रा में नकदी बरामद होने से न्यायपालिका में हड़कंप मच गया। यह मामला इतना गंभीर हो गया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम को उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा साथ ही फिलहाल उन्हें न्यायिक कार्य से विलग कर दिया गया है। </div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई थी. वह शहर से बाहर थे. जज के निजी सचिव ने पीसीआर को बुलाया. इसके बाद आग पर तो काबू पा लिया गया लेकिन इस दौरान पुलिस और दमकल कर्मियों को बंगले के अंदर एक कमरे में कई बोरियों में बड़ी मात्रा में नोटों का ढेर दिखा. यह ढेर आधा जलकर खाक हो गया था. यह बात बड़े अधिकारियों तक पहुंची और फिर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंच गया.</div>
<div>जानकारी के अनुसार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने इस मामले में एक्शन लेते हुए फौरन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई जिसमें जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट करने का फैसला लिया गया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी. अब तक जांच में जो कुछ सामने आया है, वह सब सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक डोमेन में उपलब्ध करा दिया है. इसमें नोटों के ढेर की अधजली तस्वीर भी शामिल है।</div>
<div> </div>
<div>14 मार्च की रात जज के निजी सचिव ने आग लगने की सूचना दी.फायर ब्रिगेड को अलग से कॉल नहीं किया गया.दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने 15 मार्च की सुबह मामले की जानकारी दी. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तब लखनऊ में थे.पुलिस कमिश्नर ने अधजले कैश की तस्वीरें और वीडियो भी हाई कोर्ट चीफ जस्टिस को भेजीं.कमिश्नर ने बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को यह भी बताया कि जज के बंगले के एक सिक्युरिटी गार्ड ने उन्हें बताया कि 15 मार्च को कमरे से मलबा साफ किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>इस के बाद मामले को दबाने झुठलाने का सिलसिला शुरू हो गया कभी फायर सर्विस के एक अधिकारी के बयान से कोई नकदी नहीं मिलने की बात कही गई कभी जज साब का स्थानांतरण नियमित प्रक्रिया में होने की बयान आए और मामले पर मिट्टी डाल कर जार जार हो रहे न्याय तंत्र की साख को बचाने की कोशिश की गई लेकिन सोशल मीडिया के जमाने में जज साहब के घर की आग में अधजले नोटों के बोरो की तस्वीर वायरल हो गई और अंततः जिम्मेदार बड़ी अदालत को इस सबको लेकर अपना नजरिया साफ करना पड़ा। </div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने जस्टिस वर्मा से मुलाकात की तो जस्टिस वर्मा ने किसी कैश की जानकारी होने से इनकार किया. यह भी कहा कि वह कमरा सब इस्तेमाल करते हैं.दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने उन्हें वीडियो दिखाया तो उन्होंने इसे साजिश बताया.दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने भारत के मुख्य न्यायधीश को भेजी चिट्ठी में गहराई से जांच की जरूरत बताई है.भारत के मुख्य न्यायधीश के निर्देश पर जस्टिस वर्मा का 6 महीने कॉल रिकॉर्ड निकाला गया है.जस्टिस वर्मा से यह भी कहा गया है कि वह अपने फोन को डिस्पोज न करें, न ही चैट मिटाएं।</div>
<div> </div>
<div>रिपोर्ट के मुताबिक जब आग लगी, उस समय न्यायमूर्ति वर्मा शहर से बाहर थे। उनके परिवार के सदस्यों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के दौरान एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी बरामद की, जिसके बाद इस मामले की आधिकारिक एंट्री दर्ज की गई। स्थानीय पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद यह खबर सरकार के उच्च अधिकारियों तक पहुंची और अंततः सीजेआई को जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही सीजेआई संजीव खन्ना ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई। कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से न्यायमूर्ति वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल हाईकोर्ट, इलाहाबाद स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। न्यायमूर्ति वर्मा को अक्टूबर 2021 में इलाहाबाद से दिल्ली हाईकोर्ट में भेजा गया था।</div>
<div> </div>
<div>कॉलेजियम के कुछ सदस्यों ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि केवल स्थानांतरण कर दिया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की छवि धूमिल होगी और न्याय व्यवस्था से जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है। कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि न्यायमूर्ति वर्मा से इस्तीफा मांगा जाना चाहिए। यदि वे इनकार करते हैं, तो संसद के माध्यम से उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। संविधान के अनुसार, किसी भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार, अनियमितता या कदाचार के आरोपों की जांच के लिए 1999 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन-हाउस प्रक्रिया तैयार की गई थी। इस प्रक्रिया के तहत, सीजेआई पहले संबंधित न्यायाधीश से स्पष्टीकरण मांगते हैं। यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता या मामले में गहन जांच की जरूरत महसूस होती है, तो सीजेआइ सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और दो उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की एक इन-हाउस जांच समिति गठित कर सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div> हालांकि फिलहाल केवल वर्मा के ट्रांसफर का फैसला लिया निलंबन नहीं किया है जांच के बाद जज वर्मा के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करने की बात कही जा रही है। खबर है कुछ जज इस मामले में सिर्फ तबादले की कार्रवाई को ठीक न मानते हुए न्यायमूर्ति वर्मा से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. जजों का कहना है कि अगर वो इस्तीफा देने से मना करें तो सीजेआई उनके खिलाफ 1999 की प्रक्रिया के अनुसाज जांच शुरू कराएं. इस मामले में किसी भी जज के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच कराई जाती है. चलिए जानें कि ऐसे मामलों में कहां और कैसे एक्शन लिया जाता है।</div>
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<div>इस तरीके के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की 1999 में बनाई गई इन-हाउस प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है. जिसकी मांग बाकी के जज कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में न्यायालयों के जजों के खिलाफ गलत काम, अनुचित व्यवहार और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों से निपटा जाता है. इस प्रक्रिया के तहत सीजेआई को किसी जज के खिलाफ शिकायत मिलने पर वह उससे जवाब मांगते हैं. अगर जवाब से सीजेआई संतुष्ट नहीं होते हैं या अगर उनको लगता है कि इस मामले की गंभीर तरीके से जांच की जानी चाहिए तो वह एक इन-हाउस जांच पैनल बनाते हैं. इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और हाई कोर्ट के दो मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं।</div>
<div> </div>
<div>फिर जांच के नतीजों के अनुसार उनका इस्तीफा मांगा जाता है या फिर महाभियोग चलता है.जज के आवास से नकदी की बरामदगी से संबंधित मामला शुक्रवार को राज्यसभा में उठाया गया। सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर एक व्यवस्थित चर्चा बहस कराने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस के जयराम रमेश ने सुबह के सत्र में यह मुद्दा उठाते हुए न्यायिक जवाबदेही पर सभापति से जवाब मांगा और इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ महाभियोग के संबंध में लंबित नोटिस के बारे में याद दिलाया।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया इस पर कुछ टिप्पणियां करें और न्यायिक जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रस्ताव के साथ आने के लिए सरकार को आवश्यक निर्देश दें।’ नकदी की कथित बरामदगी के मुद्दे पर धनखड़ ने कहा कि उन्हें जिस बात की चिंता है वह यह है कि यह घटना हुई लेकिन तत्काल सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना किसी राजनेता, नौकरशाह या उद्योगपति से जुड़ी होती तो संबंधित व्यक्ति तुरंत निशाना बन जाता। उन्होंने ऐसे मामलों में ऐसी प्रणालीगत प्रतिक्रिया की वकालत की जो पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी हो।</div>
<div> </div>
<div>सोचने वाली बात है कि किसी अन्य नौकरी में भ्रष्टाचार उजागर होने पर तुरंत निलंबन और जांच होती है। लेकिन यहाँ न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ताक पर रखकर केवल स्थानांतरण कर दिया गया। क्या जज वर्मा घर से बैंक चला रहे थे? या फिर कोई आर्थिक सेवा दे रहे थे?</div>
<div> </div>
<div>जब ऐसे फैसले लिए जाते हैं, तो न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाज़मी है। अगर चीफ जस्टिस खुद न्यायपालिका की साख को बचाने की चिंता नहीं करेंगे, तो आम जनता किससे उम्मीद करे?</div>
<div>दरअसल देश मे भ्रष्टाचार चरम पर है और कई बार न्यायपालिका के फैसलों और न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली और गतिविधियों पर भी सवाल किए जाते रहे हैं अब इन हालातों में जब रिश्वतखोर न्यायिक अधिकारी पैसे लेकर न्याय की बोली लगाकर फैसले दे रहे हैं तब समाज में कानून व्यवस्था को लेकर अविश्वास का माहौल पनपना स्वाभाविक है।</div>
<div> </div>
<div>और अब तो बाकायदा एक हाइकोर्ट के जज के आवास से नोटों के अधजले बंडल चीख चीख कर कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहराईयों तक पहुच चुकी है।न्याय की कुर्सी पर बैठ कर इस तरह अवैध अकूत संपदा एकत्र करने वाले व्यवस्था के सरमाएदार बने  लोग समाज में कितना गलत संदेश दे रहे हैं यह लोकतांत्रिक देश में न्याय पालिका की गैरजिम्मेदाराना स्थिति को बयान करती है। सरकार को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई सरकारी अधिकारी देश के आम आदमी के विश्वास से खिलवाड़ न करे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/150327/judge-who-keeps-a-mountain-of-money-in-the-house%C2%A0</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 12:50:28 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने नकदी विवाद पर जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong> प्रयागराज। </strong>सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा, जो अपने आधिकारिक परिसर से नकदी बरामद होने के आरोपों पर आंतरिक जांच का सामना कर रहे हैं, को दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की आधिकारिक सिफारिश की है।न्यायमूर्ति वर्मा मूल रूप से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के थे और उन्हें 2021 में दिल्ली लाया गया था।</div>
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<div>मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एएस ओका वाले कॉलेजियम द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है:सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 20 और 24 मार्च 2025 को आयोजित अपनी बैठकों में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150314/the-supreme-court-collegium-recommended-the-transfer-of-justice-yashwant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(13)3.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> प्रयागराज। </strong>सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा, जो अपने आधिकारिक परिसर से नकदी बरामद होने के आरोपों पर आंतरिक जांच का सामना कर रहे हैं, को दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की आधिकारिक सिफारिश की है।न्यायमूर्ति वर्मा मूल रूप से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के थे और उन्हें 2021 में दिल्ली लाया गया था।</div>
<div> </div>
<div>मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एएस ओका वाले कॉलेजियम द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है:सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 20 और 24 मार्च 2025 को आयोजित अपनी बैठकों में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वापस भेजने की सिफारिश की है।</div>
<div> </div>
<div>न्यायमूर्ति वर्मा 21 मार्च को उस समय विवाद का केंद्र बन गए थे, जब यह खबर प्रकाशित हुई थी कि उनके सरकारी बंगले के बाहरी हिस्से में स्थित एक गोदाम में आग लगने के बाद नकदी से भरी बोरियां मिलीं।शनिवार को सीजेआई संजीव खन्ना ने आंतरिक प्रक्रिया के तहत मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की। यह फैसला दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की रिपोर्ट के बाद लिया गया, जिसमें कहा गया था कि मामले की गहन जांच की जरूरत है।</div>
<div> </div>
<div>शनिवार रात को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट, न्यायमूर्ति वर्मा का जवाब तथा दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा साझा की गई तस्वीरें और वीडियो प्रकाशित किए।आग की यह घटना 14 मार्च को न्यायमूर्ति वर्मा के आवासीय कार्यालय में उस समय घटित हुई जब वे शहर से बाहर थे।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय को 15 मार्च को शाम करीब 4:50 बजे दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा न्यायमूर्ति वर्मा के बंगले में 14 मार्च की रात 11.30 बजे हुई आग के बारे में जानकारी दी गई।न्यायमूर्ति वर्मा ने नकदी रखने की बात से इनकार किया है और दावा किया है कि यह उनके खिलाफ साजिश है। 24 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में न्यायमूर्ति वर्मा से न्यायिक कार्य वापस ले लिया था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/150314/the-supreme-court-collegium-recommended-the-transfer-of-justice-yashwant</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 11:58:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जस्टिस वर्मा विवाद अब  सीबीआई-ईडी से जुड़े केस में  </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong> प्रयागराज। </strong>जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम पहले सीबीआई की एक एफआईआर और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक ईसीआईआर में आया था। उस समय वो 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत होने से पहले एक कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक थे। जस्टिस वर्मा, जो अभी तक दिल्ली हाईकोर्ट में सेवा दे रहे थे, उनके सरकारी आवास से कथित तौर पर कैश बरामद हुआ और उसके बाद सोशल मीडिया पर उनके पर आरोपों की बौछार कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया। उनके खिलाऱ एक आंतरिक जांच भी शुरू हो गई।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150239/justice-verma-dispute-now-in-a-case-related-to-cbi-ed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(4)6.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> प्रयागराज। </strong>जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम पहले सीबीआई की एक एफआईआर और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक ईसीआईआर में आया था। उस समय वो 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत होने से पहले एक कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक थे। जस्टिस वर्मा, जो अभी तक दिल्ली हाईकोर्ट में सेवा दे रहे थे, उनके सरकारी आवास से कथित तौर पर कैश बरामद हुआ और उसके बाद सोशल मीडिया पर उनके पर आरोपों की बौछार कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया। उनके खिलाऱ एक आंतरिक जांच भी शुरू हो गई। </div>
<div> </div>
<div>सीएनएन-न्यूज़18 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने सिम्भावली शुगर्स मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जांच का आदेश देने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था। 2018 में दर्ज की गई सीबीआई एफआईआर में वर्मा को 2012 में सिम्भावली शुगर्स के गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में बताया गया था। उन्हें "आरोपी नंबर 10" के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था।</div>
<div> </div>
<div>फरवरी 2018 में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स द्वारा सिम्भावली शुगर मिल को दिए गए लोन के संबंध में सीबीआई एफआईआर दर्ज की गई थी। कंपनी ने कथित तौर पर किसानों को उनके कृषि उपकरणों और अन्य जरूरतों के लिए वितरित करने के लिए भारी लोन लिया था, लेकिन बाद में इसका दुरुपयोग किया और पैसे को अपने अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया। यह आरोप लगाया गया था कि धन का स्पष्ट रूप से दुरुपयोग हुआ था। एफआईआर में कहा गया कि कंपनी द्वारा प्राप्त धन का इस्तेमाल अलग मकसदों के लिए किया गया था।</div>
<div> </div>
<div>बैंक ने सिम्भावली शुगर्स लिमिटेड को 97.85 करोड़ रुपये की राशि के लिए संदिग्ध धोखाधड़ी घोषित किया था। बैंक ने इस बारे में 13.05.2015 को भारतीय रिजर्व बैंक को सूचित भी किया था। सीबीआई ने 12 लोगों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें यशवंत वर्मा का नाम कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में दसवें नंबर पर था। सीबीआई एफआईआर के पांच दिन बाद, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी 27.02.2018 को मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम, 2002 की धारा 3/4 के तहत पुलिस स्टेशन-प्रवर्तन निदेशालय, जिला-लखनऊ में शिकायत दर्ज की थी।</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल कहा था कि इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश देना हाईकोर्ट की गलती थी, क्योंकि कोई जांच जरूरी नहीं थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि धोखाधड़ी के लिए कानून के अनुसार कार्रवाई करने से प्राधिकरणों को रोका नहीं गया है। बहरहाल, एफआईआर दर्ज होने के थोड़े समय बाद सीबीआई ने वर्मा का नाम एफआईआर से हटा दिया था, और एजेंसी ने कोर्ट को सूचित किया था कि उनका नाम हटाया जा रहा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/150239/justice-verma-dispute-now-in-a-case-related-to-cbi-ed</link>
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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 12:14:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली हाईकोर्ट ने एयरसेल-मैक्सिस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पी चिदंबरम के खिलाफ मुकदमे पर लगा दी रोक।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div><strong>ब्यूरो प्रयागराज। जेपी सिंह</strong></div>
<div>दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार (20 नवंबर, 2024) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज एयरसेल-मैक्सिस मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने कहा, "अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्यवाही स्थगित रहेगी। इसे 22 जनवरी को सूचीबद्ध किया जाएगा।" उन्होंने कहा कि वह बाद में विस्तृत आदेश पारित करेंगे।</div>
<div>उच्च न्यायालय ने ईडी को भी नोटिस जारी किया और श्री चिदंबरम की याचिका पर जवाब मांगा , जिसमें उन्होंने धन शोधन मामले में उनके और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146543/delhi-high-court-stays-the-trial-against-p-chidambaram-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/एयरसेल-मैक्सिस-मनी-लॉन्ड्रिंग-मामले-में-पी-चिदंबरम-के-खिलाफ-मुकदमे-पर-लगा-दी-रोक.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>ब्यूरो प्रयागराज। जेपी सिंह</strong></div>
<div>दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार (20 नवंबर, 2024) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज एयरसेल-मैक्सिस मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने कहा, "अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्यवाही स्थगित रहेगी। इसे 22 जनवरी को सूचीबद्ध किया जाएगा।" उन्होंने कहा कि वह बाद में विस्तृत आदेश पारित करेंगे।</div>
<div>उच्च न्यायालय ने ईडी को भी नोटिस जारी किया और श्री चिदंबरम की याचिका पर जवाब मांगा , जिसमें उन्होंने धन शोधन मामले में उनके और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ एजेंसी द्वारा दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है।</div>
<div> </div>
<div>न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने कहा, "नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्यवाही स्थगित रहेगी। मामले की सुनवाई 22 जनवरी को होगी।" उन्होंने कहा कि वह बाद में विस्तृत आदेश पारित करेंगे।  चिदंबरम का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और वकीलों अर्शदीप सिंह खुराना और अक्षत गुप्ता ने दलील दी कि विशेष न्यायाधीश ने पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ अभियोजन के लिए किसी मंजूरी के अभाव में धन शोधन के कथित अपराध के लिए आरोप पत्र पर संज्ञान लिया, जो कथित अपराध के समय लोक सेवक थे।</div>
<div> </div>
<div>ईडी के वकील ने याचिका की स्वीकार्यता पर प्रारंभिक आपत्ति जताई और कहा कि इस मामले में अभियोजन के लिए मंजूरी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आरोप श्री चिदंबरम के उन कार्यों से संबंधित हैं जिनका उनके आधिकारिक कर्तव्यों से कोई लेना-देना नहीं है। अंतरिम राहत के रूप में, श्री चिदंबरम ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगाने की भी मांग की है। निचली अदालत ने 27 नवंबर, 2021 को एयरसेल-मैक्सिस मामले में श्री चिदंबरम और श्री कार्ति के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी द्वारा दायर आरोपपत्रों पर संज्ञान लिया और उन्हें बाद की तारीख पर तलब किया।</div>
<div> </div>
<div>चिदंबरम के वकील ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 197(1) के तहत अभियोजन के लिए मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य है और ईडी ने कांग्रेस नेता के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आज तक मंजूरी प्राप्त नहीं की है।वकील ने कहा कि वर्तमान में आरोपों पर विचार के लिए निचली अदालत के समक्ष कार्यवाही तय है।"धारा 197(1) सीआरपीसी के तहत संरक्षण विषय मामले में याचिकाकर्ता तक विस्तारित है और विशेष न्यायाधीश ने ईडी द्वारा धारा 197(1) सीआरपीसी के तहत पूर्व मंजूरी प्राप्त किए बिना याचिकाकर्ता के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 4 के साथ धारा 3 के तहत अपराध का संज्ञान लेने में गलती की है।</div>
<div> </div>
<div>याचिका में कहा गया है, "इसलिए 13 जून, 2018 और 25 अक्टूबर, 2018 को अभियोजन पक्ष की शिकायत में उल्लिखित अपराधों का संज्ञान लेने वाले आदेश को केवल इसी आधार पर रद्द किया जाना चाहिए और याचिकाकर्ता के लिए इसे खारिज किया जाना चाहिए।"</div>
<div>सीआरपीसी की धारा 197(1) के अनुसार, जब कोई व्यक्ति जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या लोक सेवक है या था, जिसे सरकार की मंजूरी के बिना उसके पद से हटाया नहीं जा सकता, उस पर किसी ऐसे अपराध का आरोप लगाया जाता है जो उसके द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में कार्य करते समय या कार्य करने का प्रकल्पना करते समय किया गया है, तो कोई भी अदालत पूर्व मंजूरी के बिना ऐसे अपराध का संज्ञान नहीं लेगी।</div>
<div> </div>
<div>आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए विशेष न्यायाधीश ने कहा था कि सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार और धन शोधन के मामलों में श्री चिदंबरम और अन्य आरोपियों को तलब करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।</div>
<div>ये मामले एयरसेल-मैक्सिस सौदे में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में कथित अनियमितताओं से संबंधित हैं। यह मंजूरी 2006 में दी गई थी, जब श्री चिदंबरम केंद्रीय वित्त मंत्री थे।सीबीआई और ईडी ने आरोप लगाया है कि वित्त मंत्री के रूप में श्री चिदंबरम ने अपनी क्षमता से परे जाकर इस सौदे को मंजूरी दी, जिससे कुछ व्यक्तियों को लाभ पहुंचा और रिश्वत प्राप्त की।।</div>
<div> </div>
<div>अभियोजन पक्ष का कहना है कि 3,500 करोड़ रुपये के एयरसेल-मैक्सिस सौदे के समय चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति ने सौदे के लिए एफआईपीबी मंजूरी सुनिश्चित करने के लिए कुछ रिश्वत ली थी।जुलाई 2018 में सीबीआई और ईडी दोनों ने मामले में अपने-अपने आरोप-पत्र और शिकायतें दायर कीं।</div>
<div>उल्लेखनीय है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि ईडी को भी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत लोक सेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 197 के तहत मंजूरी लेनी होगी।</div>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2024 17:21:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को आप पार्टी को दफ्तर के लिए जगह दिए जाने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में अपने पार्टी कार्यालय के लिए सामान्य पूल से अस्थायी आधार पर एक आवास इकाई आवंटित करने के आम आदमी पार्टी (आप) के अनुरोध पर निर्णय लेने के लिए केंद्र को 25 जुलाई तक का समय दिया। 4 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आप को राउज़ एवेन्यू में अपना कार्यालय 15 जून तक खाली करने के लिए कहा क्योंकि विचाराधीन भूमि न्यायिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए आवंटित की गई थी। 5 जून को उच्च न्यायालय ने केंद्र को छह सप्ताह के भीतर अस्थायी आवास के लिए पार्टी के अनुरोध पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143244/delhi-high-court-orders-center-to-give-office-space-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/ दिल्ली-हाई-कोर्ट-ने-केंद्र-को-आप-पार्टी-को-दफ्तर-के-लिए-जगह-दिए-जाने-का-आदेश.jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में अपने पार्टी कार्यालय के लिए सामान्य पूल से अस्थायी आधार पर एक आवास इकाई आवंटित करने के आम आदमी पार्टी (आप) के अनुरोध पर निर्णय लेने के लिए केंद्र को 25 जुलाई तक का समय दिया। 4 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आप को राउज़ एवेन्यू में अपना कार्यालय 15 जून तक खाली करने के लिए कहा क्योंकि विचाराधीन भूमि न्यायिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए आवंटित की गई थी। 5 जून को उच्च न्यायालय ने केंद्र को छह सप्ताह के भीतर अस्थायी आवास के लिए पार्टी के अनुरोध पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।</p>
<p><strong>केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालय से मांगा समय </strong></p>
<p><br />केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के संपदा निदेशालय ने उच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन दायर कर अदालत द्वारा 5 जून के आदेश में पारित निर्देशों का पालन करने के लिए चार सप्ताह का समय बढ़ाने की मांग की। पक्ष और केंद्र द्वारा की गई दलीलों को सुनने के बाद, न्यायमूर्ति संजीव नरूला की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, चूंकि अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए आवेदक (संपदा निदेशालय) को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है, चार सप्ताह का समय बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता. हालाँकि, समग्र तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए समय अवधि 25 जुलाई तक बढ़ा दी गई है।</p>
<p>संपदा निदेशालय की ओर से पेश होते हुए, केंद्र सरकार के स्थायी वकील कीर्तिमान सिंह ने कहा कि यह संसद के विभिन्न सदस्यों के लिए सामान्य पूल से आवास आवंटित करने की प्रक्रिया में व्यस्त था, जो एक बहुत बड़ा काम था और इसलिए अदालत के निर्देशों के अनुपालन में देरी हुई थी।</p>
<h6><strong>अंतिम समय में आने का क्या तुक है?</strong></h6>
<p>वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, कि कल आदेश का अनुपालन करने के लिए दी गई छह सप्ताह की समय सीमा का अंतिम दिन है...आप इस अदालत के सामने पहले नहीं आए। अंतिम समय में आने का क्या तुक है? यदि आप देना नहीं चाहते तो उन्हें तर्कसंगत आदेश देने से कौन रोक रहा है। जस्टिस संजीव नरुला ने कहा कि प्राधिकारियों को कार्यालय के लिए भूमि आवंटित करने के लिए 'पर्याप्त समय' दिया गया था एवं इसलिए और चार सप्ताह का समय नहीं दिया जा सकता।</p>
<p><strong>केंद्र 6 सप्ताह के भीतर फैसला ले </strong></p>
<p><br />अदालत ने कहा, ''लेकिन सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के लिए समयसीमा 25 जुलाई 2024 तक बढ़ाई जाती है। इस अदालत को उम्मीद है कि आवेदनकर्ता की ओर से समय सीमा बढ़ाने के लिए भविष्य में अब कोई अनुरोध नहीं किया जाएगा।' अदालत ने कहा कि अन्य राष्ट्रीय दलों की तरह 'आप' यहां कार्यालय बनाने कह अर्हता रखती है और केंद्र से कहा कि इस मामले में छह सप्ताह के भीतर फैसला करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jul 2024 17:08:47 +0530</pubDate>
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                <title>केजरीवाल पर BJP ने बोला धावा, आम जन को लूटने का देना पड़ेगा हिसाब </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>DHC:</strong> दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा शराब नीति मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल को ईडी की गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद भाजपा केजरीवाल पर हमलावर हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि अब दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है और कहा है कि वह अरविंद केजरीवाल को कोई राहत नहीं देगा।</p>
<p>एक तरह से, आपके सभी पीड़ित कार्ड, सभी बहाने जो आप बना रहे हैं, कि सम्मन अवैध हैं, कि यह पूरा शराब घोटाला मौजूद नहीं है, उन सभी को एक तरफ रख दिया गया है। दरअसल, कोर्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139723/bjp-attacked-kejriwal-and-said-that-he-will-have-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/shehzad-poonawala_large_1745_8.webp" alt=""></a><br /><p><strong>DHC:</strong> दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा शराब नीति मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल को ईडी की गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद भाजपा केजरीवाल पर हमलावर हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि अब दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है और कहा है कि वह अरविंद केजरीवाल को कोई राहत नहीं देगा।</p>
<p>एक तरह से, आपके सभी पीड़ित कार्ड, सभी बहाने जो आप बना रहे हैं, कि सम्मन अवैध हैं, कि यह पूरा शराब घोटाला मौजूद नहीं है, उन सभी को एक तरफ रख दिया गया है। दरअसल, कोर्ट ने केजरीवाल से यहां तक ​​पूछ लिया कि आप एजेंसियों के सामने पेश क्यों नहीं होते? तुम क्यों भाग रहे हो? </p>
<p>भाजपा नेता ने साफ तौर पर कहा कि इसका मतलब है कि केजरीवाल जी अपने कार्यों से यह साबित कर रहे हैं कि शराब घोटाले में उनके पास छिपाने के लिए कुछ है और वे खुद ही इसके सरगना हैं।</p>
<p>दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि हम सब मानते हैं कि शराब घोटाला अरविंद केजरीवाल की सहमति से हुआ है, यह जांच का विषय है और उन्हें जांच एजेंसी के सामने पेश होना चाहिए। उन्होंने ककहा कि केजरीवाल ने जिस निर्लज्जता से शराब घोटाला, जल बोर्ड घोटाला किया उसी निर्लज्जता से कानून का उल्लंघन करने की कोशिश की।</p>
<p>कानून सबके लिए बराबर है चाहे वो आम व्यक्ति हो या दिल्ली का भ्रष्ट मुख्यमंत्री। कब तक भागोगे केजरीवाल? उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता को लूटने का आपको पूरा हिसाब देना पड़ेगा, केजरीवाल। जो भी आपने घोटाले किए हैं आपको उसका जवाब देना होगा।</p>
<p>बीजेपी नेता शाजिया इल्मी ने कहा कि सवाल ये है कि आखिर अरविंद केजरीवाल डरते क्यों हैं? वह यह भी जानते हैं कि इतने बड़े घोटाले में न केवल दिल्ली जल बोर्ड बल्कि जिस कंपनी को उन्होंने टेंडर दिया था, उसमें भी उनकी पूरी संलिप्तता रही है और उनका मजबूत हाथ है। उसमें भी घोटाला है।</p>
<p>भाजपा नेत्री ने कहा कि अरविंद केजरीवाल जानते हैं कि ये सारे घोटाले उनकी निगरानी में और उन्हीं के द्वारा हुए हैं, इसीलिए वे डरे हुए हैं और इसीलिए जब समन पेश किया जा रहा है तो वे बहाने बना रहे हैं। अब वे बहाना बना रहे हैं कि उन्हें राहत चाहिए।</p>
<p>उन्हें इतना यकीन क्यों है कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वह जानते है कि वह इसमें शामिल है और इसी डर के कारण वह ऐसा कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह सहानुभूति पाना चाहते हैं। उसके मन में क्या चल रहा है? उनका मानना ​​है कि लोग समझ नहीं सकते लेकिन सब जानते हैं कि ये सारा ड्रामा क्यों हो रहा है। </p>
<p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले में दंडात्मक कार्रवाई से कोई संरक्षण देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने संरक्षण के अनुरोध संबंधी आम आदमी पार्टी (आप) नेता केजरीवाल के आवेदन को 22 अप्रैल को आगे के विचार के लिए सूचीबद्ध किया है।</p>
<p>समन को चुनौती देने वाली उनकी मुख्य याचिका पर भी उसी दिन (22 अप्रैल) सुनवाई होगी। पीठ ने कहा, ‘‘हमने दोनों पक्षों को सुना है और हम इस स्तर पर (संरक्षण देने के लिए) इच्छुक नहीं हैं। प्रतिवादी जवाब दाखिल करने के लिए स्वतंत्र है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
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                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Mar 2024 18:46:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अरेस्ट से प्रोटेक्शन चाहिए, दिल्ली हाई कोर्ट के सवाल का केजरीवाल ने दिया जवाब </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>DHC: </strong>दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से उसका रुख पूछा, जिसमें उन्होंने आबकारी नीति 'घोटाले' से जुड़े धनशोधन के मामले में अपने खिलाफ जारी समन को चुनौती दी है। प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। याचिका में धन शोधन निवारण अधिनियम के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है।</p><p>न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए ईडी को दो सप्ताह का समय दिया है। केजरीवाल ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139656/kejriwal-answered-delhi-high-courts-question-on-needing-protection-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/download-(3).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>DHC: </strong>दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से उसका रुख पूछा, जिसमें उन्होंने आबकारी नीति 'घोटाले' से जुड़े धनशोधन के मामले में अपने खिलाफ जारी समन को चुनौती दी है। प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। याचिका में धन शोधन निवारण अधिनियम के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है।</p><p>न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए ईडी को दो सप्ताह का समय दिया है। केजरीवाल ने हाल में मिले ईडी के समनों के मद्देनजर अदालत का रुख किया है, ईडी द्वारा जारी नौवें समन में उनसे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत पूछताछ के लिए 21 मार्च को पेश होने के लिए कहा गया है।</p><p>केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि याचिका में कई मुद्दे उठाए गए हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि क्या कोई राजनीतिक दल धन शोधन रोधी कानून के दायरे में आता है। अदालत ने आप नेता से यह भी पूछा कि वह समन की अनुपालना में पेश क्यों नहीं हो रहे हैं।</p><p><br />याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने कहा कि इस मामले में दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की आवश्यकता है क्योंकि चुनाव नजदीक होने पर उन्हें (केजरीवाल को) पकड़ने की एजेंसी की मंशा स्पष्ट है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी। मुख्यमंत्री ने ईडी के समन को अवैध बताते हुए एजेंसी के समक्ष पेश होने से लगातार इनकार किया है।</p><p>यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति को तैयार करने और क्रियान्वित करने में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है। इस विवादित नीति को बाद में रद्द कर दिया गया था। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की सिफारिश के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी दर्ज की और इसके आधार पर ईडी ने धनशोधन के आरोप की जांच शुरू की।</p><p>दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में समन पर पेश न होने को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज करायी दो शिकायतों के मामले में केजरीवाल को शनिवार को जमानत दे दी थी। अदालत ने ईडी को केजरीवाल को शिकायतों से जुड़े दस्तावेज भी सौंपने का निर्देश दिया था। ईडी ने मजिस्ट्रेट अदालत में दो शिकायतें दर्ज कराते हुए इस मामले में केजरीवाल को कई समन जारी होने के बावजूद पेश न होने के लिए उन पर अभियोग चलाने का अनुरोध किया था। </p><p><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Mar 2024 16:40:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ED ने अरविन्द केजरीवाल को भेजा समन, 16 मार्च को होंगे पेश </title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली कीराउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को समन भेजा है। यह समन ईडी की अर्जी पर भेजा गया है। कोर्ट ने केजरीवाल को 16 मार्च को उसके सामने पेश होने को कहा है। इससे पहले ईडी सीएम केजरीवाल को 8 समन भेज चुकी है।</p>
<p>लेकिन केजरीवाल ने हर बार समन को गैरकानूनी बताते हुए इसे नजर अंदाज कर दिया। उन्होंने कहा था कि ये समन गैरकानूनी हैं लेकिन फिर भी वह ईडी के सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने ईडी से 12 मार्च के बाद की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139172/ed-sent-summons-to-arvind-kejriwal-he-will-appear-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/2024_3image_10_29_421226656kejriwal-ll.jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली कीराउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को समन भेजा है। यह समन ईडी की अर्जी पर भेजा गया है। कोर्ट ने केजरीवाल को 16 मार्च को उसके सामने पेश होने को कहा है। इससे पहले ईडी सीएम केजरीवाल को 8 समन भेज चुकी है।</p>
<p>लेकिन केजरीवाल ने हर बार समन को गैरकानूनी बताते हुए इसे नजर अंदाज कर दिया। उन्होंने कहा था कि ये समन गैरकानूनी हैं लेकिन फिर भी वह ईडी के सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने ईडी से 12 मार्च के बाद की कोई तारीख मांगी थी। केजरीवाल ने कहा था कि वह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सवालों के जवाब देंगे।</p>
<p>केजरीवाल को बार-बार ईडी की ओर से समन भेजे जाने पर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाया था कि आखिरी ईडी किस आधार पर ये समन भेज रही है। जब ED खुद इस मामले को लेकर कोर्ट गई है तो इंतजार क्यों नही कर सकती। ED सिर्फ अरविंद केजरीवाल को डराना चाहती है।</p>
<p>पार्टी का कहना है कि चंडीगढ़ में सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से फैसला सुनाया है, उसी का बदला अरविंद केजरीवाल से लिया जा रहा है। अगर ये सिर्फ लीगल मामला होता तो ED कोर्ट के फैसले का इंतजार करती। आम आदमी पार्टी इससे डरने वाली नहीं है। </p>
<p>22 मार्च 2021 को मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में नई शराब नीति का ऐलान किया था। 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति यानी एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लागू कर दी गई। नई नीति आने के बाद सरकार शराब के कारोबार से बाहर आ गई, जिसके बाद शराब पूरी दुकानें निजी हाथों में चली गई।</p>
<p>इस नीति को लाने के पीछे सरकार का तर्क था कि इससे माफिया राज खत्म होगा और सरकार के रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी। हालांकि, नई नीति शुरू से ही विवादों में रही। जब बवाल ज्यादा बढ़ तो 28 जुलाई 2022 को सरकार ने नई शराब नीति रद्द कर फिर पुरानी पॉलिसी लागू कर दिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Mar 2024 12:41:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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                <title>अधिकारी के अश्लील वीडियो पर बिना मोबाइल नंबर के कोई एक्शन संभव नहीं: व्हाट्सप्प ने दिल्ली हाई कोर्ट को दिया जवाब </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया</strong> मंच व्हाट्सएप ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह न्यायिक अधिकारी के महिला के साथ कथित ‘यौन कृत्य’ वाले वीडियो के प्रसारण के खिलाफ विनिर्दिष्ट मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए जाने और उचित आदेश पारित किए जाने बिना कार्रवाई नहीं कर सकता।</p>
<p>न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की अदालत एक पीड़ित पक्ष की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसकी पहचान गुप्त रखने की अनुमति अदालत ने दी है। इसी मामले में व्हाट्सएप ने अपना पक्ष रखा। याचिका में ‘9 मार्च 2022 के कथित’ वीडियो के प्रसार और प्रसारण पर स्थायी रोक लगाने का अनुरोध किया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126238/no-action-possible-without-mobile-number-on-officers-obscene-video"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/14.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया</strong> मंच व्हाट्सएप ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह न्यायिक अधिकारी के महिला के साथ कथित ‘यौन कृत्य’ वाले वीडियो के प्रसारण के खिलाफ विनिर्दिष्ट मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए जाने और उचित आदेश पारित किए जाने बिना कार्रवाई नहीं कर सकता।</p>
<p>न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की अदालत एक पीड़ित पक्ष की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसकी पहचान गुप्त रखने की अनुमति अदालत ने दी है। इसी मामले में व्हाट्सएप ने अपना पक्ष रखा। याचिका में ‘9 मार्च 2022 के कथित’ वीडियो के प्रसार और प्रसारण पर स्थायी रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। उक्त वीडियो 29 नवंबर को सामने आया था। अदालत ने 30 नवंबर को वीडियो के साझा करने और 'पोस्ट' करने पर रोक लगा दी थी और ऑनलाइन मंच से हटाने को कहा था।</p>
<p>व्हाट्सएप का पक्ष रखने के लिए शुक्रवार को पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि  वे हमसे वह उम्मीद कर रहे हैं जो हम करने की स्थिति में नहीं हैं। इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय ने भी कहा है कि हम तबतक ऐसा नहीं कर सकते जबतक कि फोन नंबर...अदालत द्वारा ऐसा करने का आदेश न मिले। वे अदालत को (फोन नंबर)दें और उसके बाद अदालत आदेश पारित कर सकती है।</p>
<p>निजी एक्सचेंज में यूआरएल या वेब लिंक नहीं होते हैं जिसपर गौर करते हुए न्यायमूर्ति वर्मा ने वादी के वकील को वह फोन नंबर देने के लिए समय दिया जिससे वीडियो साझा किया गया। केंद्र सरकार की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता अजय दिगपाल ने सूचित किया कि ‘‘अनुपालन हलफनामा’’ दाखिल किया गया है और फेसबुक और ट्विटर जैसे मंचों द्वारा कार्रवाई की गई है। वादी ने अदालत से कहा कि पिछले आदेश के तहत पक्षकारों द्वारा उपचारात्मक कार्रवाई की गई। अदालत ने वादी को उन यूआरएल की जानकारी देने की अनुमति दे दी जिनपर अब भी वीडियो है।</p>
<p>यूट्यूब के स्वामित्व वाले गूगल ने कहा कि जानकारी मिलने पर आपत्तिजनक सामग्री वाले नए यूआरएल को भी हटाया जाएगा। वादी के पक्ष को अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने रखा। अंतरिम आदेश पारित करते हुए अदालत ने कहा कि वीडियो का प्रसारण कई कानूनों का उल्लंघन है और साथ ही वादी के निजता के अधिकार को नुकसान पहुंचाता है, ऐसे में एकपक्षीय निषेध का आदेश वांछित है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Dec 2022 10:33:10 +0530</pubDate>
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