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                <title>Healthcare Workers - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Healthcare Workers RSS Feed</description>
                
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                <title>डॉक्टर डे: सफेद कोट में भगवान, धड़कनों के रखवाले को हजार सलाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182495/doctors-day-a-thousand-salutes-to-the-god-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया। राजनीति में आने के बाद भी वो रोज सुबह 4 बजे उठकर मरीज देखते थे। उनके लिए मरीज भगवान था और सेवा धर्म। इसी सोच को सलाम करने के लिए 1991 से 1 जुलाई को डॉक्टर डे घोषित हुआ। सफेद कोट के पीछे छुपी जिंदगी</p>
<p><br />हम डॉक्टर को सिर्फ OPD में 5 मिनट देखते हैं। पर उसके पीछे क्या है? नींद की कुर्बानी: 36 घंटे की ड्यूटी, इमरजेंसी कॉल, रात 2 बजे उठकर ICU दौड़ना। त्योहार, जन्मदिन, शादी सब हॉस्पिटल की ड्यूटी के आगे सेकेंड पर आ जाता है।</p>
<p><br />दिमाग का बोझ: एक गलत दवा, एक छूटा हुआ लक्षण, और किसी की पूरी दुनिया उजड़ सकती है। इसलिए हर केस में 100% दिमाग लगाना पड़ता है। डिप्रेशन और बर्नआउट डॉक्टरों में सबसे ज्यादा है।</p>
<p><br />जोखिम उठाकर सेवा: कोविड-19 में PPE किट पहनकर 12 घंटे काम करना, संक्रामक बीमारियों के बीच खड़े रहना, कभी-कभी मरीजों के परिजनों का गुस्सा झेलना। फिर भी वो भागते नहीं हैं। यही है मानव सेवा। किताबों से नहीं, जिगर से की जाने वाली सेवा। डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते, वो उम्मीद देते हैं। गांव का डॉक्टर : जहां MRI-CT नहीं, वहां स्टेथोस्कोप से बीमारी पकड़ लेता है। 50 रुपये फीस में 1 घंटे समझाता है। सर्जन: 8 घंटे टेबल पर झुका रहता है, ताकि किसी और को जिंदगी मिल जाए। बाल रोग विशेषज्ञ : रोते हुए बच्चे को चॉकलेट देकर इंजेक्शन लगाता है, और मां को हिम्मत देता है।</p>
<p><br />ग्रामीण MBBS डॉक्टर: बाढ़, महामारी, एक्सीडेंट में सबसे पहले वही पहुंचता है, एंबुलेंस से पहले। कोविड से लेकर डेंगू, हार्ट अटैक से लेकर डिलीवरी तक, हर संकट में सबसे आगे वो सफेद कोट ही खड़ा मिला। डॉक्टर भगवान नहीं हैं। वो इंसान हैं। उनसे गलती हो सकती है, वो थक सकते हैं। पर इरादा उनका हमेशा सेवा का ही होता है। भरोसा रखिए, सवाल पूछिए : गूगल डॉक्टर से पहले असली डॉक्टर की सुनिए। इज्जत दीजिए: इमरजेंसी में गाली की जगह धन्यवाद दीजिए। वो भी आपके जैसा इंसान है। सेल्फ-केयर : डॉक्टर को भी आराम, सम्मान और सुरक्षित माहौल चाहिए। हिंसा से उनका मनोबल टूटता है, इलाज नहीं सुधरता। निष्कर्ष: हजार सलाम कम हैं। डॉक्टर वो पुल है जो 'बीमारी' और 'जिंदगी' के बीच बना है। वो रात-रात भर जागकर हमारे अपनों की सांसें गिनते हैं। फीस लेते हैं, पर कई बार उम्मीद फ्री में दे देते हैं। इस 1 जुलाई को अपने फैमिली डॉक्टर, अपने शहर के उस सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर, या उस जूनियर रेजिडेंट को एक मैसेज कर दीजिए। कहिए: "डॉक्टर साहब, आपकी मानव सेवा को हजार सलाम।" क्योंकि जब सब थक जाते हैं, तब भी धड़कन चलती रहती है। और उस धड़कन को चलाने वाला सफेद कोट होता है। लेकिन हम इसे भी नजरंदाज नहीं कर सकते कि चिकित्सा सेवा का व्यवसायीकरण हो चुका है और आम जनता का कहीं कहीं शोषण भी हो रहा है। आज इलाज मानव सेवा न रहकर बेहद महंगा व्यापार बन चुका है। अत्यधिक व्यवसायीकरण के समय में आज कई निजी अस्पताल व नर्सिंग होम लाभ कमाने का केंद्र बन गए हैं। मरीजों को अनावश्यक रूप से महंगी जांचें और दवाइयां लिखी जातीं हैं, जिससे आम आदमी बहुत परेशान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पल्स पोलियो अभियान के दौरान आंगनबाड़ी सेविका की तबीयत बिगड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हिरणपुर, पाकुड़, झारखण्ड:- </strong>हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत घाघरजानी पंचायत के घाघरजानी गांव में पल्स पोलियो अभियान के दौरान आंगनबाड़ी सेविका ललिता मुर्मू की अचानक तबीयत बिगड़ गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिका टुसू एवं निर्मला दीदी ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तत्काल हिरणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार के साथ सलाइन चढ़ाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कई घंटे के उपचार के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार देखा गया। चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुनील कुमार सिंह एवं डॉ. प्रेम मुर्मू ने बताया कि कमजोरी, मानसिक तनाव और चक्कर आने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी थी। फिलहाल उनकी स्थिति में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182350/anganwadi-workers-health-deteriorated-during-pulse-polio-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-21.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हिरणपुर, पाकुड़, झारखण्ड:- </strong>हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत घाघरजानी पंचायत के घाघरजानी गांव में पल्स पोलियो अभियान के दौरान आंगनबाड़ी सेविका ललिता मुर्मू की अचानक तबीयत बिगड़ गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिका टुसू एवं निर्मला दीदी ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तत्काल हिरणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार के साथ सलाइन चढ़ाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई घंटे के उपचार के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार देखा गया। चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुनील कुमार सिंह एवं डॉ. प्रेम मुर्मू ने बताया कि कमजोरी, मानसिक तनाव और चक्कर आने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी थी। फिलहाल उनकी स्थिति में सुधार है और वे खतरे से बाहर हैं। चिकित्सकों ने उम्मीद जताई है कि उचित उपचार एवं आराम से वे शीघ्र पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:14:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को 0 से 5 वर्ष के बालक-बालिकाओं को पिलाई गई 'दो बूंद' पोलियो ड्रॉप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-   </strong>       पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत उपायुक्त पाकुड़ मेघा भारद्वाज के निर्देशन में प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को सभी पोलियो केंद्रों पर शून्य से पांच वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को पोलियो की 'दो बूंद' दवा पिलाई गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो ड्रॉप से कोई भी बालक-बालिका वंचित न रहे, इसके लिए 29 व 30 जून को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 139 पोलियो बूथ तथा पाकुड़िया अस्थायी बस स्टैंड, तालवा सिदो-कान्हू चौक और ग्रामीण क्षेत्रों के हाट में कुल 3 ट्रांजिट बूथ बनाए गए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182347/on-june-28-two-drops-of-polio-drop-were-administered"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/10009258501.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-   </strong>    पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत उपायुक्त पाकुड़ मेघा भारद्वाज के निर्देशन में प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को सभी पोलियो केंद्रों पर शून्य से पांच वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को पोलियो की 'दो बूंद' दवा पिलाई गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो ड्रॉप से कोई भी बालक-बालिका वंचित न रहे, इसके लिए 29 व 30 जून को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 139 पोलियो बूथ तथा पाकुड़िया अस्थायी बस स्टैंड, तालवा सिदो-कान्हू चौक और ग्रामीण क्षेत्रों के हाट में कुल 3 ट्रांजिट बूथ बनाए गए हैं। इनमें आंगनबाड़ी सेविकाओं और मेडिकल स्टाफ सहित कुल 329 कर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं। कार्यक्रम के सघन निरीक्षण के लिए 32 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं, जबकि 13 सब-डिपो भी बनाए गए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुए प्रभात दास ने बताया कि पाकुड़िया प्रखण्ड में कुल 18,065 बालक-बालिकाओं को पोलियो ड्रॉप पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:11:37 +0530</pubDate>
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