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                <title>Judicial Reform - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Judicial Reform RSS Feed</description>
                
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                <title>क्या वास्तविक स्वतंत्रता पा ली है हमने</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal">15<span lang="hi" xml:lang="hi">  अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi">  को भारत ने विदेशी शासन की बेड़ियां तोड़ी थीं। वह दिन केवल सत्ता हस्तांतरण का दिन नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए एक ऐसे भविष्य का सपना था जिसमें देश का शासन जनता की इच्छा से चलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और हर व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन जी सकेगा। आज स्वतंत्रता के </span>79<span lang="hi" xml:lang="hi">  वर्ष पूरे होने के अवसर पर तिरंगा पहले से अधिक ऊंचा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है और विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल व्यवस्था तथा आधारभूत ढांचे में देश ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186147/have-we-achieved-real-freedom"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas12.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal">15<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> को भारत ने विदेशी शासन की बेड़ियां तोड़ी थीं। वह दिन केवल सत्ता हस्तांतरण का दिन नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए एक ऐसे भविष्य का सपना था जिसमें देश का शासन जनता की इच्छा से चलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और हर व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन जी सकेगा। आज स्वतंत्रता के </span>79<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष पूरे होने के अवसर पर तिरंगा पहले से अधिक ऊंचा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है और विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल व्यवस्था तथा आधारभूत ढांचे में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। लेकिन इस उपलब्धि के बीच एक असहज सवाल खड़ा होता है—क्या हमने वास्तविक स्वतंत्रता भी हासिल कर ली है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का उत्तर न तो केवल उत्सव में छिपा है और न ही केवल आलोचना में। स्वतंत्रता का मूल्यांकन भावनाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस आम नागरिक की जिंदगी से होना चाहिए जिसके नाम पर लोकतंत्र और गणराज्य की पूरी व्यवस्था खड़ी है। भारत सरकार के राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार संविधान के चार प्रमुख लोकतांत्रिक मूल्य—न्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समानता और बंधुत्व—हमारे लोकतंत्र के आधार हैं।  इसलिए वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नागरिक को भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भेदभाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभाव और अन्याय से मुक्त वातावरण देना भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशी शासन गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन क्या हर तरह की गुलामी गई</span>? 1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> में राजनीतिक स्वतंत्रता मिली। आज भारत अपने फैसले स्वयं करता है। हमारी संसद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्वाचित सरकारें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र न्यायपालिका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान है और नागरिकों को मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। यह किसी भी दृष्टि से छोटी उपलब्धि नहीं है। लेकिन स्वतंत्रता की अगली सीढ़ी सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता है। जिस व्यक्ति के पास शिक्षा का अवसर नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके लिए स्वतंत्रता अधूरी है। जिस युवा के सामने योग्यता होने के बावजूद रोजगार का संकट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी स्वतंत्रता सीमित है। जिस किसान को अपनी मेहनत का उचित मूल्य पाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके लिए स्वतंत्रता का अर्थ अलग है। जिस गरीब परिवार के लिए बीमारी पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके लिए स्वतंत्रता केवल संविधान की किताब में लिखी हुई अवधारणा बनकर रह सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए आज हमें यह पूछना होगा कि क्या देश की आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसी गति से पहुंच रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक विकास जरूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पर्याप्त नहीं। भारत ने पिछले दशकों में आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। डिजिटल भुगतान से लेकर अंतरिक्ष कार्यक्रम तक देश ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। लेकिन विकास का असली पैमाना केवल जीडीपी या बड़े निर्माण कार्य नहीं हो सकते। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अनुसार मानव विकास को केवल आर्थिक वृद्धि से नहीं मापा जाना चाहिए। स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और सम्मानजनक जीवन स्तर भी विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> की मानव विकास रिपोर्ट में भारत का </span>HDI 2023<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>0.685<span lang="hi" xml:lang="hi"> रहा और भारत </span>193<span lang="hi" xml:lang="hi"> देशों में </span>130<span lang="hi" xml:lang="hi">वें स्थान पर था। यह प्रगति का संकेत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि मानव विकास की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी भारत आगे बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सवाल यह है कि क्या हर भारतीय उसी गति से आगे बढ़ रहा है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा: स्वतंत्रता की पहली सीढ़ी किसी भी समाज की वास्तविक स्वतंत्रता उसकी शिक्षा व्यवस्था से पहचानी जा सकती है। शिक्षित नागरिक अपने अधिकारों को समझता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सवाल पूछता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता से जवाब मांगता है और अपने भविष्य के निर्णय स्वयं लेने की क्षमता विकसित करता है। भारत में शिक्षा का विस्तार हुआ है। स्कूल और विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ी है। डिजिटल शिक्षा ने नए अवसर खोले हैं। लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार से उसका संबंध और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच अभी भी गंभीर प्रश्न हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज बड़ी संख्या में युवा डिग्री लेकर निकलते हैं और फिर रोजगार की तलाश में वर्षों भटकते हैं। यह स्थिति हमें सोचने के लिए मजबूर करती है कि क्या केवल डिग्री हासिल कर लेना ही स्वतंत्रता है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक स्वतंत्रता तब होगी जब युवा अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार और उद्यम का अवसर हासिल कर सके। भूख से मजबूर व्यक्ति और बेरोजगारी से परेशान युवा के लिए राजनीतिक अधिकारों का महत्व कम नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनकी प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं। एक युवा जब वर्षों की पढ़ाई के बाद भी स्थायी और सम्मानजनक रोजगार नहीं पा पाता तो उसके भीतर व्यवस्था के प्रति निराशा पैदा होती है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की अनिश्चितता भी बड़ा प्रश्न है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए आजादी के </span>79<span lang="hi" xml:lang="hi">वें वर्ष में रोजगार को केवल आर्थिक विषय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वतंत्रता और सम्मान का विषय मानना होगा। क्या हम भय से पूरी तरह मुक्त हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण अर्थ भय से मुक्ति भी है। एक लोकतांत्रिक समाज में नागरिक को अपनी बात कहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सवाल पूछने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार होना चाहिए। असहमति लोकतंत्र की कमजोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी ताकत है। लेकिन यह जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नफरत या झूठ फैलाने के लिए न हो। आज सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का मंच दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी के साथ अफवाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुष्प्रचार और डिजिटल भीड़ की समस्या भी सामने आई है। इसलिए वास्तविक स्वतंत्रता का मतलब बोलने की आजादी के साथ जिम्मेदारी की संस्कृति भी है। क्या जाति और भेदभाव से मुक्ति मिली</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत ने संविधान के माध्यम से समानता का महान आदर्श स्थापित किया। कानून की नजर में नागरिकों की समानता लोकतांत्रिक भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी सामाजिक जीवन में जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिंग और आर्थिक स्थिति के आधार पर असमानता के प्रश्न पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। जब किसी व्यक्ति की पहचान उसकी प्रतिभा से पहले उसकी जाति या आर्थिक स्थिति से होने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब स्वतंत्रता का सपना अधूरा दिखाई देता है। स्वतंत्रता दिवस केवल यह याद करने का अवसर नहीं है कि अंग्रेज चले गए। यह याद करने का अवसर भी है कि हमारे समाज के भीतर मौजूद अन्याय की दीवारें कितनी टूटी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं की स्वतंत्रता भी राष्ट्र की स्वतंत्रता है</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी देश की प्रगति का सही आकलन उसकी महिलाओं की स्थिति से किया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं ने शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और प्रशासन सहित हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। लेकिन सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समान अवसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक भागीदारी और सामाजिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल अभी भी महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी महिला को अपने कपड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करियर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा या जीवन के निर्णयों के लिए समाज के अनावश्यक दबाव का सामना करना पड़े तो हमें यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्रता अभी अधूरी है। जिस समाज में आधी आबादी पूरी स्वतंत्रता के साथ आगे नहीं बढ़ सकती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह पूर्ण स्वतंत्र समाज नहीं कहा जा सकता। न्याय में देरी भी स्वतंत्रता को कमजोर करती है- लोकतंत्र में नागरिक का अंतिम भरोसा न्याय व्यवस्था पर होता है। यदि किसी व्यक्ति को न्याय पाने में वर्षों लग जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके लिए न्याय की प्रक्रिया स्वयं एक कठिन परीक्षा बन जाती है। न्याय केवल अदालत का फैसला नहीं है। न्याय का अर्थ समय पर न्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुलभ न्याय और ऐसा न्याय है जिस पर आम नागरिक भरोसा कर सके। इसलिए न्याय व्यवस्था को मजबूत करना केवल प्रशासनिक सुधार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वतंत्रता की रक्षा का हिस्सा है। राजनीति में नागरिक कहां है</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र में चुनाव जनता को सत्ता बदलने का अधिकार देते हैं। यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। लेकिन लोकतंत्र केवल चुनाव के दिन वोट डालने का नाम नहीं है। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब नागरिक सरकार से सवाल पूछता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष अपनी भूमिका निभाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया सत्ता और विपक्ष दोनों से सवाल करता है और संस्थाएं अपने संवैधानिक दायित्वों का स्वतंत्र रूप से पालन करती हैं। राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष लोकतंत्र का हिस्सा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब राजनीतिक बहस में रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला सुरक्षा और न्याय जैसे मुद्दे पीछे छूट जाएं तो जनता को यह पूछना चाहिए कि राजनीति आखिर किसके लिए है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के समय सूचना का माध्यम सीमित था। आज एक मोबाइल फोन दुनिया की पूरी सूचना आपके हाथ में पहुंचा सकता है। यह अभूतपूर्व स्वतंत्रता है। लेकिन इसके साथ एक नई चुनौती भी है—डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निजता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खबर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव की।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:38:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बराक घाटी में स्थायी हाईकोर्ट बेंच की मांग को मिला जनसमर्थन, श्रीभूमि में 300 से अधिक लोगों ने किए हस्ताक्षर।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1"><strong>श्रीभूमि असम संवाददाता स्वतंत्र प्रभात : </strong></blockquote>
</div>
<div>  </div>
<div>असम के गुवाहाटी हाईकोर्ट की एक स्थायी बेंच बराक घाटी के किसी उपयुक्त स्थान पर स्थापित किए जाने की मांग के समर्थन में आज 27 जून शनिवार को श्रीभूमि जिले के बिपिन पाल स्मृति भवन में एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता सभा आयोजित की गई। रवींद्र सदन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सब्यसाची राय की पहल पर आयोजित इस बैठक में बराक घाटी में स्थायी हाईकोर्ट बेंच की संवैधानिक आवश्यकता, न्याय तक समान पहुंच तथा इस मांग को एक संगठित जनआंदोलन का रूप देने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।</div>
<div>  </div>
<div>बैठक की शुरुआत हाईकोर्ट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182175/the-demand-for-a-permanent-high-court-bench-in-barak"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001579962-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1"><strong>श्रीभूमि असम संवाददाता स्वतंत्र प्रभात : </strong></blockquote>
</div>
<div> </div>
<div>असम के गुवाहाटी हाईकोर्ट की एक स्थायी बेंच बराक घाटी के किसी उपयुक्त स्थान पर स्थापित किए जाने की मांग के समर्थन में आज 27 जून शनिवार को श्रीभूमि जिले के बिपिन पाल स्मृति भवन में एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता सभा आयोजित की गई। रवींद्र सदन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सब्यसाची राय की पहल पर आयोजित इस बैठक में बराक घाटी में स्थायी हाईकोर्ट बेंच की संवैधानिक आवश्यकता, न्याय तक समान पहुंच तथा इस मांग को एक संगठित जनआंदोलन का रूप देने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।</div>
<div> </div>
<div>बैठक की शुरुआत हाईकोर्ट बेंच मांग कार्यान्वयन समिति के महासचिव निखिल पाल के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए डॉ. सब्यसाची राय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बराक घाटी के लोगों की लंबे समय से चली आ रही इस न्यायसंगत मांग को पूरा करने के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जागरूकता सभाएं जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</div>
<div> </div>
<div>सभा में पूर्व सांसद मिशन रंजन दास, करीमगंज महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य राधिका रंजन चक्रवर्ती, बंग साहित्य एवं संस्कृति सम्मेलन की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष सतु राय, सांस्कृतिक हस्ती सुलेखा दत्त चौधरी, प्रोफेसर विश्वतोष चौधरी, शिक्षाविद विभाष देव, महासचिव निखिल पाल, रसराज दास, धर्मानंद देव, अधिवक्ता देवोमिता चक्रवर्ती, अधिवक्ता तुहिना शर्मा, अधिवक्ता दुर्गा पुरकायस्थ, अधिवक्ता अर्चना दत्त सहित जिले के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और नाट्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी चर्चा में भाग लिया।</div>
<div> </div>
<div>वक्ताओं ने कहा कि बराक घाटी के लाखों लोगों को न्याय के लिए गुवाहाटी तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जो अत्यंत महंगा, समय लेने वाला और कठिन है। आर्थिक तथा भौगोलिक बाधाओं के कारण अनेक लोग प्रभावी रूप से न्याय प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं। इसलिए बराक घाटी के किसी उपयुक्त स्थान पर गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच की स्थापना समय की मांग है और यह संविधान में निहित समानता एवं न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक न्याय के अधिकार को सुनिश्चित करने की एक उचित मांग है। इस मांग को बराक घाटी के सभी वर्गों का व्यापक समर्थन प्राप्त है और सरकार तथा संबंधित अधिकारियों से इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक कदम उठाने की अपील की गई।</div>
<div> </div>
<div>सभा के अंत में गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच की स्थापना के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसमें लगभग 300 से अधिक नागरिकों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दर्ज कराया। यह इस मांग के प्रति जनता के व्यापक समर्थन का प्रमाण माना गया।</div>
<div> </div>
<div>बैठक में सर्वसम्मति से बराक घाटी में शीघ्र स्थायी हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग दोहराई गई तथा समाज के सभी वर्गों से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से इस जनआंदोलन को और मजबूत बनाने का आह्वान किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 22:03:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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