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                <title>अभिषेक बनर्जी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>अभिषेक बनर्जी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ममता बनर्जी का दावा- भाजपा की ज्यादतियों से जल्द सत्ता में लौटेगी तृणमूल</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दावा किया कि भाजपा सरकार की कथित ज्यादतियां आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी का रास्ता साफ करेंगी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस बहुत जल्द पश्चिम बंगाल में फिर से सत्ता में आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने मध्य कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के छात्र संगठन तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के स्थापना दिवस समारोह के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावों को प्रभावित करने के लिए चुनाव आयोग का दुरुपयोग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186692/mamata-banerjees-claim-trinamool-will-soon-return-to-power"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/28_08_2026_15_03_47_mam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दावा किया कि भाजपा सरकार की कथित ज्यादतियां आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी का रास्ता साफ करेंगी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस बहुत जल्द पश्चिम बंगाल में फिर से सत्ता में आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने मध्य कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के छात्र संगठन तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के स्थापना दिवस समारोह के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावों को प्रभावित करने के लिए चुनाव आयोग का दुरुपयोग किया और मतदाता सूची से लाखों नाम हटाकर ‘वोट लूटने’ के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने कोलकाता में रेहड़ी-पटरी वालों के बेदखली का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार हटाए गए फेरीवालों का पुनर्वास नहीं कर सकती तो उन्हें हर महीने 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>पुलिस पर राजनीतिक दबाव का आरोप</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने भाजपा पर राजनीतिक प्रतिशोध के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस तृणमूल कांग्रेस को सभाएं और रैलियां आयोजित करने की अनुमति नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही जिलों का दौरा कर राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करेंगी। यदि पुलिस अनुमति नहीं देती है तो वह जनता की अनुमति से कार्यक्रम करेंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अब वह राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट से अनुमति नहीं लेंगी और अदालत का समय बर्बाद नहीं करेंगी। ममता ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह मीलों पैदल चलकर भी लोगों के बीच पहुंचेंगी।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>अभिषेक बनर्जी ने बागी गुट पर साधा निशाना</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी संबोधित किया। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले ‘बागी लेकिन बहुसंख्यक’ गुट और हाल में राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी (एनसीपीआई) में शामिल हुए पूर्व तृणमूल सांसदों को निशाने पर लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिषेक बनर्जी ने इन नेताओं को ‘गद्दार’ बताते हुए कहा कि वह पार्टी की सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी से आग्रह करेंगे कि भविष्य में ऐसे लोगों को तृणमूल कांग्रेस में वापस नहीं लिया जाए। उन्होंने मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय से बिलबोर्ड हटाए जाने को लेकर भी भाजपा और राज्य प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से पार्टी को निशाना बनाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 21:04:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>टूटती तृणमूल कांग्रेस और ममता: संगठनात्मक कमजोरी और जनविश्वास का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181935/disintegrating-trinamool-congress-and-mamta-organizational-weakness-and-crisis-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(4).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे की कमी को दर्शाता है। नीचे के स्तर पर भी ब्लॉक और पंचायत स्तर पर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है।</p>
<p><br />नियोग, कोयला, गोरू तस्करी और राशन घोटाले जैसे मामलों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए। ED और CBI की कार्रवाई ने संगठन की साख को नुकसान पहुंचाया। आम लोगों में यह धारणा मजबूत हुई है कि सत्ता के साथ भ्रष्टाचार भी जड़ें जमा चुका है। इससे जमीनी कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं और मतदाता का एक हिस्सा विकल्प तलाश रहा है।<br />                  टीएमसी आज भी पूरी तरह ममता बनर्जी के व्यक्तित्व पर टिकी है। पार्टी का ढांचा संस्थागत कम, परिवार और करीबी नेताओं के इर्द-गिर्द ज्यादा केंद्रित है। अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद ने भी पुराने नेताओं में असहजता पैदा की है। जब कोई संगठन एक व्यक्ति पर निर्भर हो जाता है, तो उस व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और राजनीतिक रणनीति ही पार्टी का भविष्य तय करने लगती है। फिलहाल ताजा खबर यह है कि टीएमसी एक और बड़ी टूट की कगार पर खड़ी है और यह निश्चित हो गया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब टीएमसी को उभरने का मौका शायद ही मिल सके। कल सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी उपस्थित नज़र आईं तो वहीं दावा है कि उनकी पार्टी के 20 सांसदो ने बगावत कर दी है। सूचना है कि पार्टी के कई सांसद भाजपा नेताओं से मिलकर बगावत की रणनीति बना रहे थे।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर सोमवार को ही टीएमसी के कई सांसदों ने मुलाकात के बाद अलग गुट बनाने का दावा किया है। पता चला है कि इस बैठक में टीएमसी के पांच सांसद मौजूद रहे। इनमें शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश बसुनिया, कालिपद सोरेन व अनूप चक्रवर्ती शामिल हैं। टीएमसी के लोकसभा में 28 व राज्यसभा में 12 सांसद हैं। सूत्र बताते हैं कि बागी सांसदों ने रविवार को एक बैठक की थी, और उसी वक्त अलग गुट बनाने का ऐलान कर टीएमसी को झटका दिया जाने पर विचार हुआ है।</p>
<p>जब विधायक दल में टूट हुई थी तो सांसदों के बग़ावत की चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया था। ऐसा बताया जा रहा है कि बाग़ी सांसद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भी संपर्क में हैं और बहुत ही जल्द एक नये गुट का ऐलान हो सकता है। टीएमसी की सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि बागी सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है और लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। कोई भी पार्टी जब चुनाव हारती है तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है</p>
<p>अपनी पार्टी को टूट से बचाने की क्यों कि हर कोई सत्ता के लड्डू खाना चाहता है, बेकार में विपक्ष में अब कोई बैठना नहीं चाहता है। इसके लिए केंद्र में कांग्रेस में टूट, दिल्ली में आप में टूट उत्तर प्रदेश में सपा में टूट और महाराष्ट्र का उदाहरण देखा जा सकता है। यही संकट अब इस समय टीएमसी के ऊपर मंडरा रहा है। अब देखना यह है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को टूटने से कितना बचा पातीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:45:53 +0530</pubDate>
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