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                <title>पाकिस्तान - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पाकिस्तान RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एक ऑपरेशन जिसने बदल दी युद्ध की तस्वीर: ऑपरेशन सिंदूर और दो सेनाओं के बीच तकनीकी अंतर</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178485/an-operation-that-changed-the-face-of-war-operation-sindoor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-07-at-19.11.42.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों में साफ दिखा कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया और कितना नुकसान हुआ। शाहबाज एयरबेस का हैंगर पूरी तरह तबाह दिखाई दिया, जबकि कई एयरबेस की रनवे और रडार सिस्टम भी क्षतिग्रस्त मिले। इन तस्वीरों ने भारत के दावों को मजबूत प्रमाण दे दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फर्क सिर्फ हमले का नहीं, सोच का था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारत ने अपने हर हमले का प्रमाण दुनिया के सामने रखा। यही सबसे बड़ा अंतर था। आधुनिक युद्ध में केवल हमला करना काफी नहीं होता, यह भी जरूरी है कि दुनिया देख सके कि हमला किस पर हुआ और क्यों हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अलग थी। सीमा पार से भारी गोलाबारी हुई, जिसमें मंदिर, गुरुद्वारे और नागरिक इलाके प्रभावित हुए। पुंछ, राजौरी और कश्मीर के कई इलाकों में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। कई लोगों की जान गई और घर तबाह हुए। इन हमलों का कोई स्पष्ट सैन्य लक्ष्य दिखाई नहीं दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं से दोनों देशों की सैन्य क्षमता और तकनीकी सोच का अंतर साफ हो गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत का युद्ध मॉडल पूरी तरह तकनीक आधारित था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन से पहले भारत की कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया। सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, इंटरसेप्टेड कम्युनिकेशन और रियल टाइम इंटेलिजेंस को एक साथ जोड़कर लक्ष्य तय किए गए। हर जानकारी सीधे सेना और वायुसेना के कमांडरों तक पहुंच रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आधुनिक तकनीक और इंटेलिजेंस का संयुक्त इस्तेमाल था। भारत ने भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि डेटा और सटीक जानकारी के आधार पर कार्रवाई की।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्वदेशी रक्षा तकनीक की ताकत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए कई हथियार और ड्रोन भारत में बने या भारत के सहयोग से विकसित किए गए थे। ब्रह्मोस, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, स्काईस्ट्राइकर और नागास्त्र जैसे सिस्टम भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का उदाहरण बने।</p>
<p style="text-align:justify;">इन हथियारों का सफल इस्तेमाल केवल सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग के लिए भी बड़ी सफलता है। इससे आने वाले समय में रिसर्च और निवेश दोनों बढ़ेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके विपरीत पाकिस्तान का रक्षा ढांचा बड़े पैमाने पर विदेशी हथियारों पर निर्भर है। ऐसे में किसी बड़े नुकसान के बाद उसकी भरपाई आसान नहीं होती।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सैटेलाइट तस्वीरों ने बदल दिया प्रचार का खेल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने नागरिक इलाकों पर हमला किया, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने इन दावों को कमजोर कर दिया। आधुनिक दौर में अब केवल बयान देकर सच नहीं बदला जा सकता। कुछ ही घंटों में सैटेलाइट तस्वीरें पूरी दुनिया के सामने वास्तविक स्थिति ला देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही आधुनिक तकनीक की सबसे बड़ी ताकत है — पारदर्शिता।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>परमाणु हथियारों की रणनीति पर असर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कई वर्षों तक पाकिस्तान की रणनीति यह रही कि परमाणु हथियारों के डर से भारत बड़े सैन्य कदम नहीं उठाएगा। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने यह धारणा बदल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह दिखाया कि सीमित, सटीक और नियंत्रित सैन्य कार्रवाई संभव है, बिना युद्ध को बड़े स्तर तक ले जाए। भारत ने केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाया, न कि पाकिस्तानी सेना या नागरिकों को।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पाकिस्तान की पुरानी रणनीतिक बढ़त कमजोर पड़ती दिखाई दी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ड्रोन युद्ध का नया दौर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार था जब दो परमाणु संपन्न देशों के बीच इतने बड़े स्तर पर ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। भारत ने सटीक निशाना लगाने वाले ड्रोन इस्तेमाल किए, जबकि पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन भेजकर दबाव बनाने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश ड्रोन को रास्ते में ही रोक दिया। इससे साफ हुआ कि भविष्य के युद्धों में केवल हथियारों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और तकनीकी क्षमता ज्यादा मायने रखेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बदलते युद्ध का नया संदेश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि आने वाले समय में युद्ध केवल ताकत से नहीं, बल्कि तकनीक, सटीकता और जवाबदेही से तय होंगे। भारत ने दुनिया को दिखाया कि आधुनिक युद्ध में पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सैन्य क्षमता।</p>
<p style="text-align:justify;">सैटेलाइट लगातार देख रहे हैं, तकनीक सब रिकॉर्ड कर रही है और अब सच को लंबे समय तक छिपाना आसान नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 19:17:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन,पाकिस्तान और बांग्लादेश की त्रिकोणीय जुगलबंदी, भारत के लिए उभरती सन्निकट चुनौतियाँ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने इस समय में अनेक जटिल चुनौतियाँ खड़ी हैं,इनमें सबसे गंभीर चुनौती पड़ोसी देशों के साथ बिगड़ते समीकरण और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़ी है। भारत देश का पुराना अनुभव रहा है कि परंपरागत रूप से चीन और पाकिस्तान भारत विरोध की धुरी रहे हैं, और अब जिस प्रकार बांग्लादेश के कुछ घटनाक्रम इस धुरी से जुड़ते प्रतीत हो रहे हैं उसने भारत की सामरिक, कूटनीतिक और मानवीय चिंताओं को और गहरा कर दिया है। यह स्थिति केवल सीमा विवाद या कूटनीतिक तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध क्षेत्रीय शांति,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166515/the-triangular-alliance-between-china-pakistan-and-bangladesh-is-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने इस समय में अनेक जटिल चुनौतियाँ खड़ी हैं,इनमें सबसे गंभीर चुनौती पड़ोसी देशों के साथ बिगड़ते समीकरण और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़ी है। भारत देश का पुराना अनुभव रहा है कि परंपरागत रूप से चीन और पाकिस्तान भारत विरोध की धुरी रहे हैं, और अब जिस प्रकार बांग्लादेश के कुछ घटनाक्रम इस धुरी से जुड़ते प्रतीत हो रहे हैं उसने भारत की सामरिक, कूटनीतिक और मानवीय चिंताओं को और गहरा कर दिया है। यह स्थिति केवल सीमा विवाद या कूटनीतिक तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध क्षेत्रीय शांति, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक स्थिरता से  भी गहरे जुड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की विस्तारवादी नीति के कारण भारत की सीमा पर  हमेशा दबाव महसूस किया जाता रहा है।<br />चीन के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ वर्षों से लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सेना की गतिविधियाँ, बुनियादी ढांचे का आक्रामक विस्तार और बार-बार होने वाले सैन्य आमने-सामने के घटनाक्रम इस बात के संकेत हैं कि चीन भारत के प्रति पारंपरिक “शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व” के सिद्धांत से हटकर व्यवहार कर रहा है। पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक, चीन की रणनीति धीरे-धीरे यथास्थिति बदलने की रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की यह नीति केवल भूभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत को सामरिक रूप से घेरने की कोशिश भी कर रहा है। नेपाल, श्रीलंका, मालदीव और म्यांमार जैसे देशों में चीनी प्रभाव का बढ़ना इसी रणनीति का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में चीन पर आवश्यकता से अधिक भरोसा करना भारत के लिए दीर्घकालिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पाकिस्तान में भारी अस्थिरता के बीच भी भारत का विरोध बदस्तूर जारी है</strong><br />पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति चाहे जितनी भी कमजोर क्यों न हो, भारत विरोध उसकी विदेश नीति का स्थायी स्तम्भ बना हुआ है। आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान भारत के खिलाफ छद्म युद्ध और आतंकवाद को रणनीतिक औज़ार के रूप में इस्तेमाल करता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के वर्षों में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं और सिखों के खिलाफ हिंसा, जबरन धर्मांतरण और हत्याओं की घटनाएँ भारत के लिए गंभीर मानवीय चिंता का विषय हैं। यह केवल मानवाधिकार का प्रश्न नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय अस्थिरता का भी संकेत है, जिसका प्रभाव अंततः भारत पर ही पड़ता है,चाहे वह शरणार्थी संकट हो या सीमा पार तनाव।</p>
<p style="text-align:justify;">बांग्लादेश के बदलते संकेत ने भारत के लिए नई आशंकाएँ बाधा दी हैं भारत और बांग्लादेश के संबंध लंबे समय तक सौहार्दपूर्ण और सहयोगपूर्ण रहे हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम से लेकर आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग तक, दोनों देशों के बीच एक मजबूत आधार रहा है। किंतु हाल के समय में बांग्लादेश के भीतर कुछ घटनाक्रम विशेषकर हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, मंदिरों पर हमले और सामाजिक असुरक्षा भारत के लिए चिंता का कारण बने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन घटनाओं के पीछे कट्टरपंथी ताकतों का उभार और बाहरी प्रभावों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि बांग्लादेश में भारत विरोधी या कट्टरपंथी शक्तियाँ मजबूत होती हैं और उन्हें चीन या पाकिस्तान का अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता है, तो यह भारत के पूर्वी सीमांत के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>त्रिकोणीय दबाव की रणनीति</strong><br />चीन,पाकिस्तान की मित्रता कोई नई बात नहीं है। चीन,पाकिस्तान आर्थिक गलियारा इस गठजोड़ का ठोस उदाहरण है, जो भारत की संप्रभुता से जुड़े क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यदि इस समीकरण में बांग्लादेश का किसी भी रूप में सामरिक या वैचारिक झुकाव जुड़ता है, तो भारत के लिए यह स्थिति और जटिल हो सकती है।<br />यह त्रिकोणीय दबाव केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक भी हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को घेरने की कोशिश, क्षेत्रीय संगठनों में संतुलन बदलने का प्रयास और आंतरिक अस्थिरता को हवा देना, भारत के लिए ये सभी संभावित रणनीतियों के खिलाफ एक नया समीकरण तैयार करने की आवश्यकता होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इन परिस्थितियों में भारत को अत्यंत सतर्क, संतुलित और दीर्घदर्शी नीति अपनाने की आवश्यकता है। एक ओर जहां सीमाओं की सुरक्षा और सैन्य तैयारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक संवाद के रास्ते खुले रखना भी आवश्यक है। भारत को बांग्लादेश के साथ अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहिए, ताकि कट्टरपंथी ताकतों के लिए जगह न बचे। पाकिस्तान के संदर्भ में सख्ती और स्पष्टता आवश्यक है, जबकि चीन के मामले में रणनीतिक धैर्य के साथ राष्ट्रीय हितों की दृढ़ रक्षा करनी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निष्कर्ष</strong><br />चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बदलते समीकरण भारत के लिए केवल एक तात्कालिक चुनौती नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक परीक्षा भी हैं। इतिहास साक्षी है कि भारत ने हर कठिन परिस्थिति में संयम, साहस और विवेक का परिचय दिया है। वर्तमान समय में भी आवश्यकता इसी बात की है कि भारत अपनी आंतरिक एकता, कूटनीतिक समझदारी और सामरिक क्षमता के बल पर इन चुनौतियों का सामना करे।<br />यदि समय रहते सही निर्णय लिए गए, तो यह त्रिकोणीय दबाव भारत को कमजोर करने के बजाय और अधिक मजबूत, सतर्क और आत्मनिर्भर बना सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 18:01:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान के  जनता पर एक और विपत, बढ़ेंगे पेट्रोल के दाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>नकदी संकट से जूझ रही पाकिस्तान सरकार पेट्रोल की कीमतों में 10-14 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी करने जा रही है। इससे पहले से ही आसमान छूती महंगाई से त्रस्त जनता पर और बोझ पड़ेगा। 'द न्यूज इंटरनेशनल' ने उद्योग जगत के सूत्रों के हवाले से पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ने की आशंका जताई है। इसके मुताबिक, “संघीय सरकार वैश्विक बाजारों में बढ़ती तेल कीमतों का हवाला देते हुए पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढा सकती है।</p>
<p>पाकिस्तान सरकार हर पखवाड़े पेट्रोलियम कीमतों की समीक्षा करती है। पिछली समीक्षा के विपरीत यदि सरकार विनिमय दर घाटे को भी समायोजित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/128863/petrol-prices-will-rise-another-disaster-on-the-people-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-04/54365387.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>नकदी संकट से जूझ रही पाकिस्तान सरकार पेट्रोल की कीमतों में 10-14 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी करने जा रही है। इससे पहले से ही आसमान छूती महंगाई से त्रस्त जनता पर और बोझ पड़ेगा। 'द न्यूज इंटरनेशनल' ने उद्योग जगत के सूत्रों के हवाले से पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ने की आशंका जताई है। इसके मुताबिक, “संघीय सरकार वैश्विक बाजारों में बढ़ती तेल कीमतों का हवाला देते हुए पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढा सकती है।</p>
<p>पाकिस्तान सरकार हर पखवाड़े पेट्रोलियम कीमतों की समीक्षा करती है। पिछली समीक्षा के विपरीत यदि सरकार विनिमय दर घाटे को भी समायोजित करती है तो यह बढ़ोत्तरी 14 रुपये प्रति लीटर तक हो सकती है। पिछली बार सरकार ने डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये के कमजोर होने का बोझ जनता पर नहीं डाला था। पाकिस्तान में पेट्रोल की तेल डिपो पर मौजूदा कीमत 272 रुपए प्रति लीटर है।</p>
<p>अगर सरकार ने तेल की वैश्विक मूल्य वृद्धि का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला तो यह कीमत 286.77 रुपये प्रति लीटर तक हो सकती है। सरकार पेट्रोल पर शून्य सामान्य बिक्री कर के साथ 50 रुपये प्रति लीटर का उपकर भी लगाती है। हालांकि हाई-स्पीड डीजल के दाम में कोई बदलाव होने की संभावना कम है। अगर सरकार विनिमय दर घाटे को समायोजित नहीं करती है तो डीजल की कीमत में 15 रुपये प्रति लीटर तक की गिरावट हो सकती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Apr 2023 19:09:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>ब्रिटिश की 'डेली मेल' ने भ्रष्टाचार के झूठे आरोप के लिए प्रधानमंत्री शहबाज से मांगी माफी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>एक प्रमुख ब्रिटिश प्रकाशन और समाचार वेबसाइट ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से 2019 में प्रकाशित एक लेख में ‘त्रुटि’ के लिए माफी मांगी है, जिसमें उसने प्रधानमंत्री पर ‘ब्रिटिश विदेश सहायता धनराशि चुराने’ का आरोप लगाया था। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। ब्रिटिश प्रकाशन ‘द मेल ऑन संडे’ और समाचार साइट ‘मेल ऑनलाइन’ ने बृहस्पतिवार को शहबाज से माफी मांगी।</p>
<p>खोजी पत्रकार डेविड रोज द्वारा लिखित उक्त समाचार को अब प्रकाशन की वेबसाइट और अन्य मंचों से हटा दिया गया है। ‘डॉन’ अखबार ने बताया कि 14 जुलाई, 2019 को प्रकाशित लेख में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126184/britishs-daily-mail-apologizes-to-prime-minister-shehbaz-for-false"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/5.webp" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>एक प्रमुख ब्रिटिश प्रकाशन और समाचार वेबसाइट ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से 2019 में प्रकाशित एक लेख में ‘त्रुटि’ के लिए माफी मांगी है, जिसमें उसने प्रधानमंत्री पर ‘ब्रिटिश विदेश सहायता धनराशि चुराने’ का आरोप लगाया था। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। ब्रिटिश प्रकाशन ‘द मेल ऑन संडे’ और समाचार साइट ‘मेल ऑनलाइन’ ने बृहस्पतिवार को शहबाज से माफी मांगी।</p>
<p>खोजी पत्रकार डेविड रोज द्वारा लिखित उक्त समाचार को अब प्रकाशन की वेबसाइट और अन्य मंचों से हटा दिया गया है। ‘डॉन’ अखबार ने बताया कि 14 जुलाई, 2019 को प्रकाशित लेख में दावा किया गया था कि शहबाज ने 2005 के भूकंप के बाद लोगों के पुनर्वास के लिए ब्रिटेन के डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी) द्वारा प्रदान किए गए धन का गबन किया था, जब वह पंजाब के मुख्यमंत्री थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/126184/britishs-daily-mail-apologizes-to-prime-minister-shehbaz-for-false</link>
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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 12:45:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>

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