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                <title>भ्रष्टाचार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भ्रष्टाचार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एंटी पेपर लीक विधेयक को मंजूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184373/anti-paper-leak-bill-approved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक मामले पर सीजेपी के आंदोलन के बाद केन्द्र सरकार ने यह निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भर्ती परीक्षाएं और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक की वजह से रद्द करनी पड़ीं। इससे न केवल अभ्यर्थियों का समय और धन बर्बाद हुआ, बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एंटी पेपर लीक विधेयक लाया, जिसे संसद की मंजूरी मिलने के बाद कानून का रूप दिया गया। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। यह कानून संगठित परीक्षा माफियाओं पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है। पेपर लीक क्यों बना राष्ट्रीय चिंता का विषय?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />भारत में हर वर्ष करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए विभिन्न परीक्षाएं देते हैं। कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार अभ्यर्थियों को हुआ, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की थी। पेपर लीक केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास पर हमला है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होते हैं। इस कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं- सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने, खरीदने, बेचने या प्रसारित करने को गंभीर अपराध माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />संगठित गिरोहों और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की कारावास और भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है।इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रश्नपत्र लीक करने वालों पर भी समान रूप से कार्रवाई होगी। जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों की गहन जांच के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। युवाओं को क्या मिलेगा लाभ? यदि कानून का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।<br />परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी कम हो सकती है। परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगेगा। युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होगा। क्या केवल कानून बनाना पर्याप्त है? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून बना देने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके साथ-साथ कई अन्य सुधार भी आवश्यक हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए।</p>
<blockquote class="format2">
<p style="text-align:justify;"><br />डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया जाए। परीक्षा केंद्रों की निगरानी तकनीकी माध्यमों से हो। परीक्षा कर्मचारियों का उचित सत्यापन किया जाए।<br />समयबद्ध जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए। यदि कानून का क्रियान्वयन कमजोर रहा, तो कठोर दंड का भी अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />राज्यों की भूमिका अधिकांश भर्ती परीक्षाएं राज्य सरकारें आयोजित करती हैं। इसलिए राज्यों को भी अपनी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना होगा। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस कानून का पूरा लाभ मिल सकेगा। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि कानून का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो। जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। इसके अलावा, साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।<br />एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद से मंजूरी मिलना देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संदेश देता है कि सरकार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। हालांकि, किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि सरकार, परीक्षा एजेंसियां, जांच संस्थाएं और राज्य प्रशासन मिलकर इस कानून को ईमानदारी से लागू करें, तो लाखों युवाओं का विश्वास बहाल हो सकता है और प्रतियोगी परीक्षाएं वास्तव में निष्पक्ष एवं पारदर्शी बन सकती हैं। अंततः किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्ष चयन प्रणाली होती है, और उसे सुरक्षित रखना सरकार तथा समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 20:12:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अकबरपुर नवीन मंडी प्रशासन की लापरवाही से सांस लेना हुआ दूभर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>​<strong>हरी हरी मण्डी, कचरों से भरी मण्डी:</strong></p>
<p><strong>​अम्बेडकर नगर।</strong></p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img_20260716_223157.jpg" alt="IMG_20260716_223157" width="1200" height="800" /></strong></p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी कागजों पर <strong>"ग्रीन मण्डी क्लीन मण्डी"</strong> का नारा बुलंद करने वाले महकमे की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो अकबरपुर नवीन मंडी का रुख किया जा सकता है। यह मंडी अपने स्लोगन को पूरी तरह धता बताती नजर आ रही है। मंडी का हाल हमेशा से ही बदतर रहा है, लेकिन हाल ही में हुई हल्की फुल्की बारिश की छींटों ने स्थिति को नारकीय बना दिया है। अब यहां पर आने वाले लोगों के लिए पैदल चलना और सांस लेना दोनों दुश्वार हो चुका है।</p>
<p><strong>कार्यालय चमका, व्यापारी और ग्राहक</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183628/akbarpur-naveen-mandi-administrations-negligence-made-breathing-difficult"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img_20260716_223402.jpg" alt=""></a><br /><p>​<strong>हरी हरी मण्डी, कचरों से भरी मण्डी:</strong></p>
<p><strong>​अम्बेडकर नगर।</strong></p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img_20260716_223157.jpg" alt="IMG_20260716_223157" width="1200" height="800"></img></strong></p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी कागजों पर <strong>"ग्रीन मण्डी क्लीन मण्डी"</strong> का नारा बुलंद करने वाले महकमे की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो अकबरपुर नवीन मंडी का रुख किया जा सकता है। यह मंडी अपने स्लोगन को पूरी तरह धता बताती नजर आ रही है। मंडी का हाल हमेशा से ही बदतर रहा है, लेकिन हाल ही में हुई हल्की फुल्की बारिश की छींटों ने स्थिति को नारकीय बना दिया है। अब यहां पर आने वाले लोगों के लिए पैदल चलना और सांस लेना दोनों दुश्वार हो चुका है।</p>
<p><strong>कार्यालय चमका, व्यापारी और ग्राहक बदबू में डूबे</strong></p>
<p style="text-align:justify;">नवीन ​मंडी स्थल अकबरपुर परिसर के भीतर का नजारा बेहद हैरान करने वाला है। केवल प्रशासनिक कार्यालय क्षेत्र को छोड़ दिया जाए— जहां अधिकारी बैठते हैं— तो बाकी पूरा परिसर गंदगी का ढेर बन चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img_20260716_223524.jpg" alt="IMG_20260716_223524" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">​<strong>सड़ती सब्जियां और फल:</strong> जहां व्यापारियों और ग्राहकों का सबसे ज्यादा जमावड़ा लगता है, वहां आलू, टमाटर और अन्य मौसमी सब्जियां सड़कर भयानक बदबू फैला रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">​<strong>सड़े फलों का अंबार:</strong> कई कोनों में यहां तक कि बीच सड़क पर सड़े हुए फलों के अवशेषों का ढेर लगा है, जिससे उठने वाली दुर्गन्ध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।</p>
<p><strong>एसी कमरों से बाहर नहीं निकलते जिम्मेदार</strong></p>
<p style="text-align:justify;">​सबसे ज्यादा आक्रोश मंडी के जिम्मेदार अधिकारियों के रवैये को लेकर है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि मंडी सचिव और निरीक्षकों को अपने वातानुकूलित (एसी) कमरों से बाहर निकलकर इस बदहाली को देखने का न तो समय है और न ही कोई परवाह।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>व्यापारियों का दर्द: </strong>"अधिकारियों को जनता की सहूलियत से कोई सरोकार नहीं है। उनका वेतन तो हर महीने समय पर आ ही जाता है, फिर चाहे मंडी नरक में तब्दील हो जाए या महामारी का केंद्र बने, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।" फिलहाल कोई भी व्यापारी अधिकारियों की कार्यवाही के भय से कैमरे के सामने बोलने की हिम्मत न जुटा सका।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>होगी कार्यवाही या हावी होगी लोगों पर मजबूरी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इस भीषण गंदगी के कारण नवीन मण्डी में न सिर्फ संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है, बल्कि यहां आने वाले ग्राहकों की संख्या पर भी असर पड़ रहा है। अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इस घोर लापरवाही का संज्ञान लेते हैं या व्यापारी और आम जनता इसी तरह सड़न और बदबू के बीच काम करने को मजबूर रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 02:12:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ambedkarnagar Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीडियो की सह परभानपुर में ग्राम प्रधान, सचिव व टीए की मिलीभगत से सरकारी धन का हो रहा लूट</title>
                                    <description><![CDATA[आनलाइन मस्टर रोलपंचायत चुनाव को नजदीक देख ग्राम प्रधान शकुन्तला देवी ने सरकारी धन को लूटने में झोंकी पूरी ताकत सचिव प्रिया शुक्ला, तकनीकी सहायक एस ० के ० सिंह ने भ्रष्टाचार को बढ़ाने में लगाया है पूरी ताकत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182770/video-government-money-is-being-looted-in-parbhanpur-with-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260705-wa0094.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>बस्ती।</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले के विकास खंड हरैया केग्राम पंचायत भानपुर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी / सचिव प्रिया शुक्ला का चयन मंडी समिति में हो गया है लेकिन अभी तक सचिव प्रिया शुक्ला विकासखंड हरैया में कार्यरत हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सचिव प्रिया शुक्ला विकासखंड हरैया से जाते-जाते अपनी साफ सुथरी छवि धूमिल करने पर तुली हुई है यदि सचिव ग्राम प्रधान शकुंतला देवी को सह न देती तो ग्राम प्रधान शकुंतला देवी पानी से भरे तालाब में विकसित भारत की जी राम जी के नाम पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी न लगती । पानी से भरे तालाब में विकसित भारत जी राम जी के नाम पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगने पर सचिव प्रिया शुक्ला के कार्यों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है और तकनीकी सहायक हरि किशन सिंह भी ग्राम पंचायत भानपुर में कमीशन के लालच पानी से भरे तालाब की फर्जी एमबी की तैयारी में जुटे हुए हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   सूत्रों की माने तो तकनीकी सहायक हरि किशन सिंह ने ग्राम पंचायत भानपुर में पूर्व भी कई विकास कार्यों के नाम पर फर्जी एमबी कर चुके हैं और फर्जी एमबी के सहारे ग्राम प्रधान शकुंतला देवी फर्जी भुगतान प्राप्त कर चुकी हैं । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      विकसित भारत जी राम जी के कार्य को पलीता लगाने वाली रोजगार सेवक वर्षा जायसवाल व ग्राम प्रधान शकुंतला देवी के भ्रष्टाचार के आगे खंड विकास अधिकारी हरैया विनय कुमार द्विवेदी नतमस्तक हो चुके हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     मीडिया टीम धरातलीय पड़ताल में ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत भानपुर के राजस्व गांव नागपुर के सभी तालाब एवं गढही में पानी भरा है । सरकारी धन लूटने के उद्देश्य मजदूरों के नाम पर फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बातचीत में ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि ग्राम प्रधान शकुंतला देवी व ब्लॉक हरैया के जिम्मेदार अधिकारियों का कर्मचारियों की मनमानी से 05 वर्षों से ग्राम पंचायत भानपुर तरस रहा है । जब तक ग्राम प्रधान शकुंतला देवी व रोजगार सेवक वर्षा जायसवाल व अन्य भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तब तक ऐसे ही सरकारी धन के लूटने का खेल जारी रहेगा । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      अब देखना यह है कि डीसी मनरेगा संजय शर्मा के द्वारा उक्त प्रकरण में क्या कार्यवाही की जाती है ?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:14:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनपद प्रयागराज के समस्त कृषकों से फार्मर रजिस्ट्री कराने की अपील।</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्व कर्मी आधार के अनुसार खतौनी में नहीं कर रहे संशोधन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182658/appeal-to-all-the-farmers-of-prayagraj-district-to-get"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/pm-kisan-yojana-(19).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उप कृषि निदेशक जनपद प्रयागराज के समस्त कृषक भाइयों एवं बहनों को सूचित किया है कि भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषकों के लिए फार्मर रजिस्ट्री तैयार किए जाने का अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है जिसमें जनपद के 569000 कृषकों की फार्मर आई०डी० बनी है एवं लगभग एक लाख किसान भाइयों जिनकी फार्मर आई०डी० नहीं बनी है उन सभी पात्र कृषकों से अपील है कि वे शीघ्र अपनी फार्मर रजिस्ट्री बनवाकर यूनिक फार्मर आईडी प्राप्त करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फार्मर रजिस्ट्री किसानों की एक प्रमाणित डिजिटल पहचान है, जिसके माध्यम से कृषक की आधार, भूमि अभिलेख एवं अन्य आवश्यक विवरण एकीकृत रूप से उपलब्ध रहते हैं। इससे वास्तविक पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ् प्राप्त करने में सुविधा होगी, जिसमें वर्तमान में महत्वपूर्ण खाद की उपलब्धता हेतु। कृषि विभाग की विभिन्न अनुदान योजनाओं में प्राथमिकता। बीज, उर्वरक, कृषि यंत्र एवं अन्य कृषि आदानों पर उपलब्ध अनुदान का सुगम लाभ। किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा तथा अन्य कृषि सेवाओं में सुविधा। शासन द्वारा भविष्य में संचालित की जाने वाली योजनाओं का त्वरित एवं पारदर्शी लाभ। कृषक की एकल एवं प्रमाणित डिजिटल पहचान (फार्मर आईडी) उपलब्ध होना। पात्र लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित होने से योजनाओं का लाभ सीधे वास्तविक किसानों तक पहुँचना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। विभिन्न कृषि योजनाओं एवं सेवाओं को क्रमिक रूप से फार्मर आईडी से जोड़ा जा रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ केवल सत्यापित एवं पात्र किसानों को ही प्राप्त हो सके। अतः प्रत्येक कृषक भाई के लिए समय रहते फार्मर रजिस्ट्री कराना अत्यंत आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">*फार्मर रजिस्ट्री कराने हेतु आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, बैंक खाता विवरण, भूमि अभिलेख (खतौनी/गाटा विवरण) एवं आवश्यकतानुसार अन्य संबंधित अभिलेख आवश्यक है।*</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कृषक अपनी फार्मर रजिस्ट्री   </strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने निकटतम जन सेवा केन्द्र, ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित विशेष शिविर, कृषि विभाग द्वारा आयोजित पंजीकरण शिविर, अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल माध्यमों से करा सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिन कृषकों की फार्मर आईडी में समस्त गाटों को दर्ज नहीं कराया गया है उनको शीघ्र अतिशीघ्र पोर्टल पर <a href="http://upfr.agristack.gov.in/">upfr.agristack.gov.in</a> पर जाकर स्वयं या जनसुविधा केन्द्र के माध्यम से जुडवा लें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान द्वारा फॉर्मर रजिस्ट्री कराने के बाद भी पेंडिंग रिपोर्ट दिखाई देता है जब की महीनों पहले किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था।इसमें सबसे बड़ा रोड़ा तहसील का राजस्व विभाग बन गया हैजिसमे लेखपाल की भूमिका सर्वाधिक संदिग्ध और काम चोरी की मिली है।इसमें सबसे अधिक फूलपुर तहसील में रिपोर्ट पेंडिंग में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसानों का आरोप है कि 99% खतौनी मैं सरनेम नहीं अकित है  नाम ही दर्जहै। जबकि आधार कार्ड  में नाम के आगे उसकी जाति जैसे त्रिपाठी मिश्राद दुबे  यादव भारतीय विश्व कर्मा आदि दर्ज हैं ।इसे शुद्ध करने की जिम्मेदारी लेखपाल की निर्धारित की गई है लेकिन वह इसकी आड़ में किसानों से भयादोहन और सुविधा शुल्क  की मांग कर रहा है। कहता है कि इसमें पैसा लगेगा और मुकदमा  करना पड़ेगा।जिसके  कारण से रजिस्ट्रेशन  होने के बावजूद रजिस्ट्रेशन पेंडिंग में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्योंकि प्रमाणित करने के लिए लेखपालों के पास लटका है लेकिन इस पर कोई राजस्व अधिकारी ध्यान नहीं देते जबकि कृषि विभाग बार-बार रजिस्ट्रेशन के लिए अपील करता है लेकिन  सरकारी सिस्टम को ठीक करने के लिए कोई दिशा निर्देश नहीं दियाजाताहै।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 21:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>*सरकारी जमीन के लाखों के पेड़ बेचे जाने का आरोप दो प्रधानों समेत नेखपाल पर मुकदमा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिला भ्रष्टाचार की आज में चल रहा है चाहे वह राजस्व विभाग हो चाहे विकास विभाग हो या पुलिस विभाग सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी वन विभाग में हो रहा है मौके पर ग्राम प्रधान द्वारा और हल्का लेखपाल की मिली भगत से कई लाखों के पेड़ बिक्री कर लिए गए जिसकी भनकपन क्षेत्र अधिकारी को नहीं लग पाई जिले पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं कैसे भ्रष्टाचार की आग कब बुझेगी भ्रष्टाचार होता रहा अधिकारी सोते रहे जनता पिसती रही कोई सुनने वाला अधिकारी नहीं बैठा है संबंधित कर्मचारियों अधिकारियों के कान भर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181959/case-filed-against-nekhpal-along-with-two-pradhans-accused-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260622-wa0059.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिला भ्रष्टाचार की आज में चल रहा है चाहे वह राजस्व विभाग हो चाहे विकास विभाग हो या पुलिस विभाग सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी वन विभाग में हो रहा है मौके पर ग्राम प्रधान द्वारा और हल्का लेखपाल की मिली भगत से कई लाखों के पेड़ बिक्री कर लिए गए जिसकी भनकपन क्षेत्र अधिकारी को नहीं लग पाई जिले पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं कैसे भ्रष्टाचार की आग कब बुझेगी भ्रष्टाचार होता रहा अधिकारी सोते रहे जनता पिसती रही कोई सुनने वाला अधिकारी नहीं बैठा है संबंधित कर्मचारियों अधिकारियों के कान भर देते हैं इसलि कार्रवाई नहीं हो पा रही है नहीं संभाल रहा जिला संबंधित अधिकारियों से वन विभाग के अधिकारियों को जिले से लेकर हरैया वनक्षेत्रअधिकारी सहित कर्मचारियों को बर्खास्त करना चाहिए भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगाने में कोई विभाग चूक नहीं रहा है कैसे होगा जिले का विकास भगवान भरोसे छोड़ गया हल्का लेखपाल और प्रधान के खिलाफ वन क्षेत्र अधिकारी द्वारा f i r दर्ज किया गया ता जा मामला परशुरामपुर थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत ककराखुर्द और हरनहवा में सरकारी भूमि पर खड़े लाखों रुपये मूल्य के पेड़ों की अवैध कटान और बिक्री का मामला सामने आरोप है कि दोनों ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने वन विभाग को सूचना दिए  नियमानुसार नीलामी कराए बिना ही कीमती पेड़ों को बेच दिया मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग हरैया ने जांच शुरू करते हुए कड़ी कार्रवाई की प्रथम दृष्टया अनियमितता पाए जाने पर संबंधित प्रधानों एवं नेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया घटना से क्षेत्र में हड़कंप मचा वन क्षेत्राधिकारी शारदानंद त्रिपाठी ने बताया कि सरकारी पेड़ों की कटान और बिक्री की शिकायत प्राप्त हुई जांच में अवैध कटान के तथ्य सामने आए हैं जिसके आधार पर संबंधित लोगों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले प्रधानों और लेखपाल के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगीसरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचता फिलहाल वन विभाग पूरे प्रकरण की गहन जांच में जुटा और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही। क्या इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी लेकिन अब कोई कार्रवाई ब्यौरा नहीं प्राप्त हुआ </div>
<div style="text-align:justify;">देखते हैं इस मामले में जिलाधिकारी क्या एक्शन लेती है क्या इन भ्रष्टाचार्यों पर कार्रवाई होगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 19:12:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निर्माण के नाम पर 1. 25 करोड़ खाते से निकालने में चार के खिलाफ मुकदमा दर्ज </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> शहरों और गांव के विकास के लिए मिलने वाले सरकारी धन को जालसाजी, धोखाधड़ी और कूट रचना के माध्यम से एक राय होकर हड़प करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे ही एक मामले में आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 409 ,419 ,420 ,467,468 ,471,504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर जाने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना जांच शुरू कर दी है। डीआईजी के आदेश पर दर्ज हुई एफ आई आर में लगाए गए आरोपों के मुताबिक 1.25 करोड़ की यह सरकारी धनराशि पूर्व सांसद की अनुशंसा पर 10 ग्राम पंचायतों में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181202/case-filed-against-four-for-withdrawing-rs-125-crore-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002003015.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> शहरों और गांव के विकास के लिए मिलने वाले सरकारी धन को जालसाजी, धोखाधड़ी और कूट रचना के माध्यम से एक राय होकर हड़प करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे ही एक मामले में आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 409 ,419 ,420 ,467,468 ,471,504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर जाने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना जांच शुरू कर दी है। डीआईजी के आदेश पर दर्ज हुई एफ आई आर में लगाए गए आरोपों के मुताबिक 1.25 करोड़ की यह सरकारी धनराशि पूर्व सांसद की अनुशंसा पर 10 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु उपलब्ध कराई गई थी ,जिसे विभिन्न व्यक्तियों के नामों से खातों से निकाल लिया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय को आपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड लालबाग लखनऊ के अध्यक्ष एवं निदेशक पद के लिए भी निर्वाचित रहे जीतेन्द्र कुमार अग्रवाल द्वारा कोतवाली बस्ती में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2018 में पूर्व सासंद हरीश द्विवेदी की अनुशंसा पर वर्ष 2018 में नार्दन कोल्ड फील्ड सिंगरौली से निगमित सामाजिक दायित्व के अन्तर्गत 10 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 1.25 करोड रूपये प्राप्त हुए थे ,जिसे भारतीय को-आपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड बस्ती की बैंक आफ इन्डिया शाखा बस्ती में एकाउन्ट खोलकर जमा किये गए थे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एफ आई आर के अनुसार पवन कुमार पाण्डेय पुत्र गिरीश दत्त पाण्डेय बेलसर जिला गोण्डा, आशीष कुमार पाठक पुत्र मथुरा प्रसाद इस्माइलगंज इण्डस्ट्रीयल एरिया लखनऊ के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित इसी खाते से पवन कुमार पाण्डेय पुत्र गिरीश दत्त पाण्डेय, आशीष कुमार पाठक, शिवेन्द्र प्रताप सिंह, मो0 आमिर आदि द्वारा एक राय होकर मिली भगत करते हुए खाते से भिन्न भिन्न व्यक्तियों के नाम से सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 1.25 करोड रूपये प्राप्त धनराशि खाते से निकाल ली। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोपों के मुताबिक इसके उपरान्त नार्दन कोल्ड फील्ड सिंगरौली के सभी कार्य पूर्ण नहीं होने के बाद भी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र जमा कर दिया गया। जबकि निर्माण कार्यों के पूरा नहीं होने से संबंधित कई शिकायती पत्र ग्राम प्रधान द्वारा पहले ही भेजे जा चुके थे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जान से मारने की धमकी और गाली गलौज करने का भी आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराने वाले अध्यक्ष और निर्वाचित निदेशक भी रहे दहिलामऊ सिविल लाइन प्रतापगढ़ निवासी जीतेन्द्र कुमार अग्रवाल के मुताबिक उपरोक्त सभी ने भारतीय को-आपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड लिमिटेड लालबाग लखनऊ की छवि खराब करने के साथ-साथ जालसाजी कर कूटरचित अभिलेख तैयार करते हुए धनराशि का गबन धोखाधड़ी, अवैध लेनदेन और हेरा फेरी की है। अवगत कराते चलें कि संबंधित मामले में इसके पहले भी दो और मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। फिलहाल पुलिस अग्रिम कार्रवाई के लिए मामले की गहन विवेचना में लगातार जुटी हुई है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181202/case-filed-against-four-for-withdrawing-rs-125-crore-from</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:10:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीजा-साले का ‘चीन कनेक्शन’ उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वेंटीलेटर घोटाला–2</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>📍 <em>लखनऊ | संवाददाता</em></strong></blockquote>
<hr />
<h4 style="text-align:justify;"><strong>  स्थापना का उद्देश्य और वर्तमान स्थिति</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन (UPMSCL) की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं और आधुनिक उपकरण पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराए जा सकें।<br />कारपोरेशन को स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माना गया था, लेकिन हाल के घटनाक्रम इस संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों, आउटसोर्स कर्मचारियों और कथित बिचौलियों के गठजोड़ ने खरीद प्रक्रिया को प्रभावित कर इसे कथित रूप से भ्रष्टाचार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178039/uttar-pradesh-medical-supply-corporation-ventilator-scam-2"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/photo-1.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>📍 <em>लखनऊ | संवाददाता</em></strong></blockquote>
<hr />
<h4 style="text-align:justify;"><strong> स्थापना का उद्देश्य और वर्तमान स्थिति</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन (UPMSCL) की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं और आधुनिक उपकरण पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराए जा सकें।<br />कारपोरेशन को स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माना गया था, लेकिन हाल के घटनाक्रम इस संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों, आउटसोर्स कर्मचारियों और कथित बिचौलियों के गठजोड़ ने खरीद प्रक्रिया को प्रभावित कर इसे कथित रूप से भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया है।</p>
<hr />
<p style="text-align:justify;"><strong> <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/photo-1.jpg" alt="जीजा-साले का ‘चीन कनेक्शन’ उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वेंटीलेटर घोटाला–2" width="614" height="840"></img></strong></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ICU वेंटीलेटर टेंडर में ‘खेल’</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ताजा मामला जेम (GeM) पोर्टल पर जारी टेंडर संख्या <strong>GEM/2025/B/5823357</strong> से जुड़ा है, जिसके तहत प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों के लिए <strong>221 ICU वेंटीलेटर</strong> खरीदे जाने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस टेंडर में कुल 11 कंपनियों ने भाग लिया है। इनमें शामिल <strong>Heidelco Medicore Pvt. Ltd.</strong> पर आरोप है कि यह कंपनी अलग-अलग टेंडरों में अपनी पहचान बदलकर हिस्सा लेती रही है—कभी खुद को निर्माता, तो कभी अधिकृत वितरक बताकर।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार कंपनी ने खुद को <strong>Sysmed Medical Technologies Pvt. Ltd., चंडीगढ़</strong> का अधिकृत वितरक बताया है और जिस वेंटीलेटर मॉडल की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया गया है, वह <strong>Topnotch TV-15</strong> है।</p>
<hr />
<p style="text-align:justify;"><strong> <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/photo-2.jpg" alt="जीजा-साले का ‘चीन कनेक्शन’ उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वेंटीलेटर घोटाला–2" width="634" height="897"></img></strong></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>KGMU की रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान <strong>किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU)</strong> ने पूर्व में एक अन्य टेंडर (<strong>GEM/2026/R/647614</strong>) में इसी मॉडल के वेंटीलेटर को गुणवत्ता और सर्विस से जुड़े कारणों से खारिज कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">KGMU की तकनीकी समिति द्वारा की गई जांच में निम्न बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई थी:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>उपकरण की <strong>परफॉर्मेंस मानकों पर खरा न उतरना</strong></li>
<li><strong>क्लिनिकल उपयोग में विश्वसनीयता की कमी</strong></li>
<li><strong>सर्विस और मेंटेनेंस सपोर्ट कमजोर होना</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इसके बावजूद वही मॉडल दोबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल होना कई सवाल खड़े करता है।</p>
<hr />
<h3 style="text-align:justify;"><strong>‘मेड इन इंडिया’ के नाम पर चीनी उत्पाद?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आरोप यह भी है कि जिस वेंटीलेटर को भारतीय कंपनी के नाम से पेश किया जा रहा है, वह वास्तव में चीन की कंपनी <strong>Shenzhen Mindray Bio-Medical Electronics Co. Ltd.</strong> का उत्पाद है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह न केवल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन भी हो सकता है।</p>
<hr />
<h3 style="text-align:justify;"><strong>GFR 144(XI) की अनदेखी?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार के <strong>GFR 144(XI)</strong> नियम के अनुसार, सुरक्षा कारणों से चीनी कंपनियों और उनसे जुड़े उत्पादों की सरकारी खरीद पर सख्त प्रतिबंध है, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति न ली जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में बिना स्पष्ट खुलासे के चीनी उत्पाद को भारतीय कंपनी के माध्यम से पेश करना नियमों की अवहेलना माना जा सकता है।</p>
<hr />
<p style="text-align:justify;"><strong> <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/photo-3.jpg" alt="जीजा-साले का ‘चीन कनेक्शन’ उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वेंटीलेटर घोटाला–2" width="662" height="468"></img></strong></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>विभागीय जिम्मेदारी और निगरानी पर सवाल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री <strong>ब्रजेश पाठक</strong> के पास है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सूत्रों का दावा है कि:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>एक आउटसोर्स कर्मचारी <strong>उज्ज्वल कुमार</strong> कथित रूप से खरीद प्रक्रिया में प्रभावशाली भूमिका निभा रहा था</li>
<li>टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी जांच को प्रभावित करने के प्रयास हुए</li>
<li>कथित दलालों के साथ मिलकर निर्णयों को प्रभावित किया गया</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।</p>
<hr />
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कारपोरेशन का पक्ष</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के कर्मचारी <strong>देवव्रत कुमार आर्य</strong> ने संवाददाता से बातचीत में कहा:</p>
<blockquote>
<p>“यदि किसी कंपनी द्वारा चीनी उत्पाद को छिपाकर सप्लाई करने का प्रयास किया जाता है, तो उसकी विस्तृत जांच की जाएगी। नियमों के विरुद्ध पाए जाने पर टेंडर तत्काल निरस्त किया जाएगा।”</p>
</blockquote>
<hr />
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बड़े सवाल</strong></h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<blockquote class="format1">
<ul>
<li>क्या पहले से रिजेक्टेड उपकरण को दोबारा टेंडर में शामिल किया जा सकता है?</li>
<li>क्या टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी मानकों से समझौता किया जा रहा है?</li>
<li>क्या ‘मेड इन इंडिया’ के नाम पर विदेशी उत्पादों की आपूर्ति हो रही है?</li>
<li>क्या निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है?</li>
</ul>
</blockquote>
</li>
</ul>
<hr />
<p style="text-align:justify;"><strong>📢 निष्कर्ष</strong><br />यह मामला केवल एक टेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ आर्थिक घोटाला होगा बल्कि मरीजों की जान से भी खिलवाड़ माना जाएगा।</p>
<hr />
<blockquote class="format2">✍️ <strong>(स्वतंत्र प्रभात की खोजी टीम अगले अंक में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासे करेगी…)</strong></blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178039/uttar-pradesh-medical-supply-corporation-ventilator-scam-2</link>
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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 07:00:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एडीओ पंचायत ने अपने सुविधा के अनुसार कुछ सफाईकर्मियों के कार्य क्षेत्र में किया बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong>बस्ती जिले के कप्तानगंज विकासखंड के सहायक विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत ) सुशील कुमार श्रीवास्तव ने अपने सुविधा शुल्क के अनुसार कुछ सफाईकर्मियों के कार्य क्षेत्र में बदलाव किया है ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ पंचायत ने ग्राम पंचायत महुआ लखनपुर में 02 राजस्व गांवो में 06 सफाईकर्मियों की तैनाती किया था जिसको लेकर कई बार सम्मानित समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई थी सोशल मीडिया पर वायरल खबरों का संज्ञान लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर ने महुआ लखनपुर में राजस्व गांवों से अधिक सफाईकामियों को स्थांतरित करने का निर्देश दिया था लेकिन एडीओ पंचायत ने डीपीआरओ के निर्देश को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177699/ado-panchayat-changed-the-work-area-of-some-sweepers-as"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260430-wa0051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong>बस्ती जिले के कप्तानगंज विकासखंड के सहायक विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत ) सुशील कुमार श्रीवास्तव ने अपने सुविधा शुल्क के अनुसार कुछ सफाईकर्मियों के कार्य क्षेत्र में बदलाव किया है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ पंचायत ने ग्राम पंचायत महुआ लखनपुर में 02 राजस्व गांवो में 06 सफाईकर्मियों की तैनाती किया था जिसको लेकर कई बार सम्मानित समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई थी सोशल मीडिया पर वायरल खबरों का संज्ञान लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर ने महुआ लखनपुर में राजस्व गांवों से अधिक सफाईकामियों को स्थांतरित करने का निर्देश दिया था लेकिन एडीओ पंचायत ने डीपीआरओ के निर्देश को दरकिनार करके 04 सफाईकर्मियों का स्थानांतरण करने के बजाए मात्र 01 सफाई कर्मी का स्थानांतरण किया है जिस सफाई कर्मी का स्थानांतरण हुआ है वही सफाईकर्मी निरन्तर डियूटी करता था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानांतरित सफाईकर्मी का स्थानांतरण इसीलिए एडीओ पंचायत ने किया है कि जब सभी सफाईकर्मी डियूटी पर नही आते हैं तो एक सफाईकर्मी का डियूटी पर आने से कोई मतलब नहीं है क्योंकि प्रतिदिन डियूटी पर आने वाला सफाईकर्मी अन्य डियूटी से गायब सफाईकर्मियों की पोल खोल देगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों की माने तो सरकारी शासनादेश के अनुसार एक राजस्व गांव में एक ही सफाई कर्मी की नियुक्ति होनी चाहिए । ग्राम पंचायत महुआ लखनपुर में 02 राजस्व गांवो में 06 सफाईकर्मियों की तैनाती करना ही एडीओ पंचायत के बड़े भ्रष्टाचार का संकेतक है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">    ग्राम पंचायत महुआ लखनपुर समेत अन्य लगभग एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में सफाईकर्मियों की तैनाती में बड़ा खेल किया है । कुछ ग्राम पंचायतों में राजस्व गांव अधिक है वहां राजस्व गांवों की अपेक्षा सफाईकर्मियों की तैनाती कम है और जहां राजस्व गांव कम है वहां सफाईकर्मियों की तैनाती ज्यादा है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> सूत्रों की माने तो कप्तानंगज में एक दर्जन से अधिक सफाईकर्मियों को नेतागिरी करने की छूट दी गई है चाहे वह सफाई घर पर बैठकर , जिला मुख्यालय पर बैठकर, सरकारी कार्यालयों में बैठकर नेतागिरी करता हो । एडीओ पंचायत सुशील कुमार श्रीवास्तव के लापरवाही / मनमानी से सफाई कर्मियों की तैनाती व डियूटी में बड़ा खेल चल रहा है और ग्राम पंचायतों में साफ सफाई की व्यवस्था पूरी तरह चौपट होती जा रही है लेकिन एडीओ पंचायत को मात्र अपने जेब भरने की चिन्ता सता रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ पंचायत सुशील कुमार श्रीवास्तव के भ्रष्टाचार को लेकर जल्द ही उच्च अधिकरियों से शिकायत करने की तैयारी चल रही है क्योंकि जब तक एडीओ पंचायत के कारनामों को उजागर नहीं किया जायेगा तब तक ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मी नियमित डियूटी नही करेंगे और न ही ग्राम पंचायतों में साफ सफाई की व्यवस्था ठीक होगी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त प्रकरण में जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर से फोन के माध्यम से जानकारी लेना चाहा तो जिला पंचायत राज अधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177699/ado-panchayat-changed-the-work-area-of-some-sweepers-as</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:00:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिले में भ्रष्टाचार चरम पर कोई ऐसा विभाग नहीं बचा है कि जहां पर भ्रष्टाचार ना हो रहा हो</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के कोई ऐसा विभागन नहीं है जहां भ्रष्टाचार न हो रहा है जिले की कानून व्यवस्था से लेकर राजस्व विभाग तथा विकास विभाग या आपूर्ति विभाग जैसे डाक विभाग भ्रष्टाचार चरम पर है जिम्मेदार अधिकारी अपनी झोली भरने में बेस्ट रहते हैं ग्रामीण जनता की सुनवाई न होना जिला प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है जिला अधिकारी महोदय मामले को संज्ञान कभी नहीं लेती है ऐसे अधिकारियों द्वारा सरकार को बदनाम किया जा रहा है इन पर कार्रवाई न होना कर्मचारियों पर शिकंज ना कसना खुलीछूट दे रखी है कैसे जनता को न्याय मिलेगा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177406/corruption-is-at-its-peak-in-the-district-there-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0009.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के कोई ऐसा विभागन नहीं है जहां भ्रष्टाचार न हो रहा है जिले की कानून व्यवस्था से लेकर राजस्व विभाग तथा विकास विभाग या आपूर्ति विभाग जैसे डाक विभाग भ्रष्टाचार चरम पर है जिम्मेदार अधिकारी अपनी झोली भरने में बेस्ट रहते हैं ग्रामीण जनता की सुनवाई न होना जिला प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है जिला अधिकारी महोदय मामले को संज्ञान कभी नहीं लेती है ऐसे अधिकारियों द्वारा सरकार को बदनाम किया जा रहा है इन पर कार्रवाई न होना कर्मचारियों पर शिकंज ना कसना खुलीछूट दे रखी है कैसे जनता को न्याय मिलेगा</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कलवारी उपडाकघर में ग्राहक परेशान, अपने ही पैसे के लिए महीनों से भटक रहा मजदूर बस्ती जिले के कलवारी थाना क्षेत्र स्थित उपडाकघर में ग्राहकों के उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यहां लोगों को अपने ही खाते से पैसा निकालने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।ग्राम बेलवाडाड़ निवासी सोनू का आरोप है कि वह अपने खाते से ₹14,000 निकालने के लिए पिछले कई महीनों से उपडाकघर कलवारी के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित के मुताबिक, उपडाकघर में तैनात कैशियर “मशीन खराब” होने का हवाला देकर उसे वापस कर देता है। इतना ही नहीं, उसका विड्रॉल फॉर्म तक स्वीकार नहीं किया गया।सोनू ने बताया कि उसे पैसों की सख्त जरूरत है, लेकिन इसके बावजूद उसे भीषण गर्मी में अपनी मजदूरी छोड़कर बार-बार पोस्ट ऑफिस आना पड़ रहा है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित ने इस मामले की शिकायत प्रधान डाकघर के हेड पोस्टमास्टर से पीजी ग्रिवांस पोर्टल के माध्यम से की है और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस तरह की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आम जनता का सरकारी सेवाओं से भरोसा उठ सकता है। अब देखना यह होगा कि डाक विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित को उसका पैसा कब तक मिल पाता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:50:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दल बदल की राजनीति और जनविश्वास का प्रश्न ईमानदारी से चलने वाले दल की निरंतर उन्नति और भ्रष्टाचार में डूबे दल की अनिवार्य गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उसकी बहुदलीय व्यवस्था है जहां अनेक विचारधाराएं अनेक नेतृत्व और अनेक सामाजिक आकांक्षाएं एक साथ विकसित होती हैं, परंतु पिछले कुछ वर्षों में एक अलग ही प्रवृत्ति तेजी से उभरती दिखाई दी है जिसे आम भाषा में दल बदल या राजनीतिक टूटफूट कहा जाता है ।यह केवल व्यक्तियों का एक दल से दूसरे दल में जाना भर नहीं है ,बल्कि यह उस गहरे राजनीतिक और नैतिक संकट का संकेत भी है जो कई दलों के भीतर पनप रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जब हम देश के विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर हुए घटनाक्रमों को देखते हैं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177280/politics-of-defection-and-the-question-of-public-trust-continuous"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/thumb_9083_1024_768_0_0_crop.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उसकी बहुदलीय व्यवस्था है जहां अनेक विचारधाराएं अनेक नेतृत्व और अनेक सामाजिक आकांक्षाएं एक साथ विकसित होती हैं, परंतु पिछले कुछ वर्षों में एक अलग ही प्रवृत्ति तेजी से उभरती दिखाई दी है जिसे आम भाषा में दल बदल या राजनीतिक टूटफूट कहा जाता है ।यह केवल व्यक्तियों का एक दल से दूसरे दल में जाना भर नहीं है ,बल्कि यह उस गहरे राजनीतिक और नैतिक संकट का संकेत भी है जो कई दलों के भीतर पनप रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जब हम देश के विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर हुए घटनाक्रमों को देखते हैं तो एक पैटर्न स्पष्ट दिखाई देता है ।कई क्षेत्रीय दल और राष्ट्रीय दल अपने ही नेताओं और विधायकों को संभालने में असफल रहे हैं। जिसके परिणामस्वरूप उनके भीतर असंतोष बढ़ा और वह असंतोष अंततः टूट के रूप में सामने आया ।इस प्रक्रिया में एक दल मजबूत होता गया और अन्य दल कमजोर होते गए यह केवल संख्या का खेल नहीं है, बल्कि यह भरोसे और विश्वसनीयता का प्रश्न भी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में जनता केवल नारों या वादों पर भरोसा नहीं करती बल्कि वह यह भी देखती है कि कोई दल अपने सिद्धांतों पर कितना टिकता है और अपने नेताओं को कितनी ईमानदारी से आगे बढ़ाता है जब किसी दल के भीतर पारदर्शिता की कमी होती है या नेतृत्व अपने स्वार्थ में उलझ जाता है तो वहां असंतोष जन्म लेता है। यही असंतोष धीरे धीरे विद्रोह में बदलता है और अंततः दल टूट जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पिछले वर्षों में कई राज्यों में हुए राजनीतिक घटनाक्रम इस बात के उदाहरण हैं जहां विधायकों और सांसदों ने अपने ही दल को छोड़कर दूसरे दल का दामन थाम लिया। इन घटनाओं के पीछे केवल सत्ता का आकर्षण नहीं था बल्कि कई बार यह आरोप भी लगे कि मूल विचारधारा से भटकाव हुआ है और नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं और जनता के विश्वास को तोड़ा है। जब ऐसी स्थिति बनती है तो दल के भीतर का ढांचा कमजोर पड़ जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी सत्य है कि जिस दल ने अपने संगठन को मजबूत रखा अनुशासन बनाए रखा और कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास कायम किया वह लगातार आगे बढ़ता गया संगठन की मजबूती किसी भी राजनीतिक दल की रीढ़ होती है। जब यह रीढ़ मजबूत होती है तो बाहरी आघात भी उसे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाते इसके विपरीत जब संगठन भीतर से ही खोखला हो जाता है तो छोटी सी चुनौती भी उसे हिला देती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजनीतिक दलों की सफलता केवल चुनाव जीतने में नहीं होती बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि वे जनता के बीच कितनी विश्वसनीयता बनाए रखते हैं ।यदि कोई दल ईमानदारी से काम करता है पारदर्शिता रखता है और अपने वादों को निभाने का प्रयास करता है तो जनता उसे बार बार अवसर देती है यह प्रक्रिया धीरे धीरे उस दल को और मजबूत बनाती है और उसकी उन्नति निरंतर होती रहती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसके विपरीत यदि कोई दल भ्रष्टाचार में डूब जाता है नेताओं पर आरोप लगते हैं और जनता के मुद्दों से दूरी बढ़ती जाती है तो उसकी गिरावट निश्चित हो जाती है ।इतिहास इस बात का गवाह है कि ऐसे दल चाहे कुछ समय के लिए सत्ता में रहे हों लेकिन अंततः उन्हें जनता ने नकार दिया जनता की नजर में विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होती है और जब यह पूंजी खत्म हो जाती है तो कोई भी रणनीति उस दल को बचा नहीं सकती।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में यह भी देखने को मिला है कि जब किसी दल के कई नेता एक साथ इस्तीफा देते हैं या दूसरे दल में शामिल होते हैं तो वह केवल संख्या का नुकसान नहीं होता बल्कि वह उस दल की साख पर भी चोट होती है ।जनता के मन में यह प्रश्न उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतने बड़े स्तर पर असंतोष पैदा हो जाता है।उस दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजनीति में विचारधारा का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जब कोई दल अपनी मूल विचारधारा से भटकता है और केवल सत्ता प्राप्ति को लक्ष्य बना लेता है तो उसके भीतर की एकता कमजोर पड़ने लगती है कार्यकर्ता स्वयं को असहज महसूस करते हैं और धीरे धीरे दूरी बनाने लगते हैं यही दूरी आगे चलकर टूट का कारण बनती है। इसलिए यह आवश्यक है कि हर दल अपने मूल सिद्धांतों पर कायम रहे और समय समय पर आत्ममंथन करता रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">संगठन में लोकतंत्र भी उतना ही जरूरी है यदि निर्णय लेने की प्रक्रिया में केवल कुछ लोगों का वर्चस्व हो और अन्य नेताओं को नजरअंदाज किया जाए तो असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। एक स्वस्थ दल वही होता है जहां संवाद होता है जहां असहमति को भी स्थान मिलता है और जहां सभी को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है ऐसे दल लंबे समय तक टिके रहते हैं और निरंतर प्रगति करते हैं</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में जनता भी पहले से अधिक जागरूक हो चुकी है वह केवल चुनावी वादों से प्रभावित नहीं होती बल्कि वह यह भी देखती है कि कौन सा दल वास्तव में उसके हित में काम कर रहा है कौन सा दल केवल दिखावे की राजनीति कर रहा है और कौन सा दल ईमानदारी से शासन चला रहा है। यह जागरूकता लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे राजनीतिक दलों पर भी दबाव बनता है कि वे बेहतर काम करें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दल बदल की राजनीति को केवल नकारात्मक दृष्टि से देखना भी पूरी तरह उचित नहीं है कई बार यह बदलाव उन नेताओं के लिए एक अवसर भी होता है जो अपने पुराने दल में उपेक्षित महसूस कर रहे थे या जिनकी विचारधारा को वहां स्थान नहीं मिल रहा था लेकिन जब यह प्रक्रिया बहुत अधिक होने लगे और बार बार होने लगे तो यह लोकतंत्र की स्थिरता के लिए चुनौती बन जाती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी जरूरी है कि राजनीतिक दल अपने भीतर नैतिक मूल्यों को मजबूत करें भ्रष्टाचार के आरोप किसी भी दल के लिए सबसे बड़ा खतरा होते हैं क्योंकि ये आरोप सीधे जनता के विश्वास को प्रभावित करते हैं यदि कोई दल पारदर्शिता बनाए रखता है और गलत कार्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता है तो वह अपने विश्वास को बनाए रख सकता है इसके विपरीत यदि आरोपों को नजरअंदाज किया जाए या उन्हें दबाने का प्रयास किया जाए तो स्थिति और खराब हो जाती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंत में यह कहा जा सकता है कि राजनीति में स्थायी सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें ईमानदारी अनुशासन पारदर्शिता और जनता के प्रति समर्पण की आवश्यकता होती है, जो दल इन मूल्यों को अपनाते हैं वे धीरे धीरे मजबूत होते जाते हैं और उनकी उन्नति निरंतर होती रहती है वहीं जो दल इन मूल्यों से दूर हो जाते हैं और भ्रष्टाचार में डूब जाते हैं उनकी गिरावट तय होती है</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसलिए आज के समय में हर राजनीतिक दल के लिए यह आवश्यक है कि वह आत्ममंथन करे अपने संगठन को मजबूत बनाए और जनता के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे क्योंकि अंततः लोकतंत्र में वही दल सफल होता है जो जनता के दिल में जगह बनाता है और यह स्थान केवल ईमानदारी और सेवा भाव से ही प्राप्त किया जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सैफई  आयुर्विज्ञान  संस्थान मॉनिटर घोटाला-2 !</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण जनता की भलाई के लिए और उसकी बीमारी में अच्छे इलाज के लिए सैफई आयुर्विजान संस्थान की स्थापना की गयी थी परन्तु चिकित्सा शिक्षा विभाग के शातिर दलालों और भ्र्ष्ट अधिकारीयों की मिलीभगत ने उक्त संसथान को लूट का अड्डा बना दिया है और जेम पोर्टल को लूट का हथियार, घटिया से घटिया चीनी उपकरण महँगी दरों पर खरीद करके लगातार स्थापित किये जा रहे है शातिर दलालों की कंपनियों के द्वारा, भ्र्ष्ट अधिकारीयों द्वारा जेम पोर्टल के माध्यम से सीटिंग करके टेंडर किये जा रहे है</p>
<h5 style="text-align:justify;">  <br /><strong>LOW END मॉनिटर की बिड में फेल और HIGH END मॉनिटर की</strong></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173772/saifai-institute-of-medical-sciences-monitor-scam-2"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/photo-41.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण जनता की भलाई के लिए और उसकी बीमारी में अच्छे इलाज के लिए सैफई आयुर्विजान संस्थान की स्थापना की गयी थी परन्तु चिकित्सा शिक्षा विभाग के शातिर दलालों और भ्र्ष्ट अधिकारीयों की मिलीभगत ने उक्त संसथान को लूट का अड्डा बना दिया है और जेम पोर्टल को लूट का हथियार, घटिया से घटिया चीनी उपकरण महँगी दरों पर खरीद करके लगातार स्थापित किये जा रहे है शातिर दलालों की कंपनियों के द्वारा, भ्र्ष्ट अधिकारीयों द्वारा जेम पोर्टल के माध्यम से सीटिंग करके टेंडर किये जा रहे है</p>
<h5 style="text-align:justify;"> <br /><strong>LOW END मॉनिटर की बिड में फेल और HIGH END मॉनिटर की बिड में पास </strong></h5>
<p style="text-align:justify;">ताजा प्रकरण के अनुसार जेम पोर्टल की बिड संख्या में  GEM/2025/B/6713344 DATED के माध्यम से संस्थान के ICU में स्थापित करने के लिए की आवश्यकता दिखाते हुए 50 QTY HIGH END MONITOR की खरीद के लिए टेंडर निकाला गया था, जिसमे कंपनियों ने प्रतिभाग किया और भ्र्ष्ट अधिकारीयों ने शातिर दलालों से मिलकर केवल 03 कंपनियों को पास किया और बाकि 09 कंपनियों की निविदा को टेक्निकल   बिड में ही रिजेक्ट कर दिया, और सेटिंग के अनुसार शातिर दलाल की सेटिंग वाली कंपनी HIMACHAL PHARMACEUTICALS को QTY 50, HIGH END MONITOR के लिए क्रय आदेश जारी कर दिया गया, MAKE-CLARITY, MODEL-SPECTRA GOLD, VALUE RS. – 22400000/- <br /> <br />M/s CLARITY की चोरी पकड़ी गयी.</p>
<p style="text-align:justify;">इसी संसथान के भ्र्ष्ट अधिकारीयों द्वारा जेम पोर्टल की निविदा संख्या GEM/2025/B/6752797 के माध्यम से मरीजों के इलाज के लिए QTY 200 LOW END MONITOR खरीदे, उक्त निविदा में 17 कंपनियों ने प्रतिभाग किया था और 16 कंपनियों की निविदा को टेक्निकल बिड में निरस्त करके सिंगल  निविदा दाता M/s SMITH MEDICARE, LUCKNOW क्रय आदेश जारी कर दिया  MAKE-MEASTROS, MODEL-VITAL TRACK, QTY- 200, VALUE-RS. 13500000/- , अब सवाल यह उठता है जो कंपनी M/s. CLARITY LOW END MONITOR की टेक्निकल बिड में रिजेक्ट थी उसके घटिया उत्पाद को HIGH END MONITOR की बिड में कैसे पास कर दिया गया??????</p>
<h5 style="text-align:justify;"><br /><strong>फर्ज़ीवाड़े के लिए कुख्यात कंपनी M/s CLARITY </strong></h5>
<p style="text-align:justify;">M/s CLARITY COMPANY फर्ज़ीवाड़े के लिए कुख्यात है , M/s CLARITY COMPANY द्वारा राजस्थान सरकार के जेके लोन अस्पताल और महिला अस्पताल जयपुर में HIGH END MONITOR QTY 1140, RATE RS. 77040 प्रत्येक की दर से, परन्तु सारे मॉनिटर घटियाचीनी मॉनिटर निकले, उसपर मेक इन इंडिया का स्टिकर और क्लैरिटी का स्टिकर लगा कर सप्लाई कर दिया था, NELCORE AND MASIMO टेक्नोलॉजी के SPO2 की बजाय घटिया चीनी SPO2 प्लेट लगा रखी थी और उस पर भी मेक इन इंडिया का स्टिकर और क्लैरिटी का स्टिकर लगा दिया था, ऐसी फ़र्ज़ी कंपनियों के साथ मिलकर भ्र्ष्ट अधिकारी संस्थान को लूट रहे है और अपनी जेबें भरकर उत्तर प्रदेश की गरीब जनता को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं<br />इस निविदा  में भी ब्लैकलिस्टेड रही कंपनी SS MEDICALS SYSTEM (I) PVT LTD ने भी प्रतिभाग किया हैं</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>लूट पर संसथान का गोल मोल जवाब</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस सम्बन्ध में जब संवादाता द्वारा संसथान के क्रय अधिकारी से बात की गयी तो स्पष्ट जवाब देने के बजाय वो टाल मटोल करने लगे और कहने लगे की सब वीसी साहब और संयुक्त निदेशक के आदेश से होता है, वीसी और जेडी से सम्पर्की किया गया तो उनका फ़ोन ही नहीं उठा</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173772/saifai-institute-of-medical-sciences-monitor-scam-2</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 01:56:32 +0530</pubDate>
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                            </item>

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