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                <title>corruption - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>corruption RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>11.17 करोड़ के खर्च पर सवाल: अभिलेख न देने पर 18 सचिवों का वेतन रोका, जमीनी हकीकत पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173462/questions-raised-on-expenditure-of-rs-1117-crore-salary-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/bhrastachar.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा किया गया, जिसमें कई स्थानों पर संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। समिति ने इसे गंभीर मानते हुए धनराशि के दुरुपयोग की आशंका जताई और रिपोर्ट विभाग को भेजी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />कई बार नोटिस व पत्राचार के बावजूद अभिलेख प्रस्तुत न करने पर डीपीआरओ लालजी दूबे ने 18 सचिवों के मार्च माह के वेतन पर रोक लगा दी है और स्पष्टीकरण मांगा है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इधर, क्षेत्रीय ग्रामीणों ने पूरे मामले को लेकर जमीनी हकीकत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य केवल कागजों में ही दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविकता में मौके पर कार्य अधूरे या न के बराबर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी बिल-वाउचर के जरिए भुगतान दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />विभागीय आंकड़ों के अनुसार खर्च की गई कुल धनराशि 11.17 करोड़ रुपये है, लेकिन अभिलेख प्रस्तुत न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इसमें से कितनी राशि का वास्तविक और सत्यापित हिसाब उपलब्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />स्थानीय स्तर पर अब मामले की निष्पक्ष जांच और जमीनी सत्यापन की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:44:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बड़हरा में 74 मजदूरों के जगह कार्य करते मिले 35 मजदूर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़हरा में मनरेगा के एनएमएमएस पोर्टल पर फर्जी मजदूरों की आनलाईन हाजिरी लगाकर धन निकासी का प्रयास किया जा रहा है। बड़हरा गांव में मनरेगा योजना के तहत हो रहे कुला खुदाई कार्य में मनरेगा के एनएमएमएस पोर्टल पर दर्ज आनलाईन हाजिरी व मौके पर कार्य कर रहे मजदूरों में दो गुना का अंतर है। ऐसे में पोर्टल पर 74 मजदूरों की हाजिरी लगाया गया है जबकि मौके पर सिर्फ 35 मनरेगा मजदूर ही कार्य करते नजर आए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं कार्य कर रहे एक मजदूर ने बताया कि प्रतिदिन 30 से 40 मजदूर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164829/35-laborers-found-working-instead-of-74-laborers-in-badhara"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/00.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़हरा में मनरेगा के एनएमएमएस पोर्टल पर फर्जी मजदूरों की आनलाईन हाजिरी लगाकर धन निकासी का प्रयास किया जा रहा है। बड़हरा गांव में मनरेगा योजना के तहत हो रहे कुला खुदाई कार्य में मनरेगा के एनएमएमएस पोर्टल पर दर्ज आनलाईन हाजिरी व मौके पर कार्य कर रहे मजदूरों में दो गुना का अंतर है। ऐसे में पोर्टल पर 74 मजदूरों की हाजिरी लगाया गया है जबकि मौके पर सिर्फ 35 मनरेगा मजदूर ही कार्य करते नजर आए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं कार्य कर रहे एक मजदूर ने बताया कि प्रतिदिन 30 से 40 मजदूर ही कार्य करने आते हैं लेकिन आनलाईन कितनी हाजिरी लगाई जाती है यह हमें नहीं मालूम है। ऐसे में ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायतों में हो रहे मनरेगा के कार्यों में भारी लूट-खसोट मचा हुआ है लेकिन सब कुछ जानने के बाद भी स्थानीय विभागीय अधिकारी अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। सम्बंधित जिम्मेदार मनरेगा में लूट-खसोट को लेकर अपनी चुप्पी साधे हुए मूकदर्शक बने हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक नौतनवां ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़हरा में मनरेगा योजना के तहत रामचंद्र के खेत से अहिरौली सीवान तक कुला खुदाई कार्य करवाया जा रहा है। इस कार्य में पारदर्शिता को दरकिनार कर जमकर लूट-खसोट किया जा रहा है। मंगलवार को रामचंद्र के खेत से अहिरौली सीवान तक हो रहे कुला खुदाई कार्य में मस्टरोल संख्या 6150 से 6157 तक कुल 8 मस्टरोल जारी कर 74 मनरेगा मजदूरों का आनलाईन हाजिरी लगाया गया। वहीं पत्रकारों के पड़ताल में 74 मजदूरों के बजाय सिर्फ 35 मजदूर ही कार्य करते हुए मौके पर मिले।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे में 39 अन्य मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर मनरेगा योजना में लूट-खसोट किया जा रहा है। इस पूरे सम्बंधित प्रकरण में स्थानीय जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करने के बजाय उन पर मेहरबान हैं। जिम्मेदारों के मेहरबानी के कारण क्षेत्र में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ रहा है। सरकार मनरेगा योजना में पारदर्शिता को लेकर एनएमएमएस पोर्टल चलाया लेकिन इसके जिम्मेदारों ने पारदर्शिता वाले एनएमएमएस पोर्टल में भी सेंध लगा दिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 18:25:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुलायम सिंह का कड़ा अल्टीमेटम: स्टांप विक्रेताओं की मनमानी वसूली पर लगाम वरना आंदोलन और सख्त कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर देहात।</strong> भ्रष्टाचार एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो शक्ति के दुरुपयोग से लोकतंत्र की जड़ें हिला देती है और समाज में अविश्वास की गहरी खाई पैदा कर देती है। इसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सबको एकजुट होकर कदम उठाने होंगे। इन शब्दों में जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात के अध्यक्ष एडवोकेट मुलायम सिंह यादव ने जिला अधिकारी को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन  अतिरिक्त मजिस्ट्रेट देश दीपक को सौंपा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में उन्होंने स्टांप विक्रेताओं द्वारा जनता से मनमाने ढंग से धन वसूलने की कड़ी निंदा की। एडवोकेट मुलायम सिंह ने चेतावनी दी कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्टांप</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163902/mulayam-singhs-strict-ultimatum-to-stop-arbitrary-recovery-of-stamp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/1001468685-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर देहात।</strong> भ्रष्टाचार एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो शक्ति के दुरुपयोग से लोकतंत्र की जड़ें हिला देती है और समाज में अविश्वास की गहरी खाई पैदा कर देती है। इसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सबको एकजुट होकर कदम उठाने होंगे। इन शब्दों में जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात के अध्यक्ष एडवोकेट मुलायम सिंह यादव ने जिला अधिकारी को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन  अतिरिक्त मजिस्ट्रेट देश दीपक को सौंपा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में उन्होंने स्टांप विक्रेताओं द्वारा जनता से मनमाने ढंग से धन वसूलने की कड़ी निंदा की। एडवोकेट मुलायम सिंह ने चेतावनी दी कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्टांप विक्रेताओं को लोक सेवक का दर्जा दिया है। यदि कोई 10 रुपये का स्टांप 12 रुपये में बेचता है तो यह स्पष्ट भ्रष्टाचार है। इसके तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के अनुसार तत्काल मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जनपद में स्टांप विक्रेताओं पर कड़ी निगरानी बढ़ाई जाए उनकी मनमानी रोकी जाए और प्रभावी जांच के बाद दोषियों पर सख्ती बरती जाए। इस अवसर पर जिला बार एसोसिएशन के महामंत्री घनश्याम सिंह राठौर रमेश चंद सिंह गौर बलराम सिंह सर्वेंद्र सिंह डीके सिंह धर्मेंद्र यादव रोहित शुक्ला जितेन बाबू महेंद्र सिंह उपदेश योगेंद्र कुमार आदि सदस्य उपस्थित रहे। जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई न हुई, तो आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 18:26:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नौतनवा क्षेत्र में मनरेगा योजना चढ़ रहा भ्रष्टाचार का भेंट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र में स्थानीय अधिकारियों व कर्मचारियों के उदासीनता के कारण लगातार मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ रहा है। नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के तमाम ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना में फर्जी मजदूरों की हाजिरी लगाकर धन निकासी का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में कुछ ग्राम पंचायतों में कार्यदाई स्थल पर कार्य पूर्ण होने के बाद भी मजदूरों की हाजिरी लग रही है। ऐसे में परसेंटेज के खेल में स्थानीय जिम्मेदार कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत सेखुआनी में एक सप्ताह से फर्जी हाजिरी लगाकर धन निकासी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163611/mnrega-scheme-is-falling-prey-to-corruption-in-nautanwa-area"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/one.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र में स्थानीय अधिकारियों व कर्मचारियों के उदासीनता के कारण लगातार मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ रहा है। नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के तमाम ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना में फर्जी मजदूरों की हाजिरी लगाकर धन निकासी का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में कुछ ग्राम पंचायतों में कार्यदाई स्थल पर कार्य पूर्ण होने के बाद भी मजदूरों की हाजिरी लग रही है। ऐसे में परसेंटेज के खेल में स्थानीय जिम्मेदार कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत सेखुआनी में एक सप्ताह से फर्जी हाजिरी लगाकर धन निकासी करने का प्रयास किया जा रहा है। सेखुआनी में भोला के खेत से गब्बूलाल के खेत तक बघेला नाले के किनारे बंधे पर फसल सुरक्षा हेतु चकबंध पर मिट्टी कार्य करवाया जा रहा है जिसमें मस्टरोल संख्या 5778 से 5781 तक कुल 32 मनरेगा मजदूरों को कार्यदाई स्थल पर फर्जी तरीके से कार्य करते दिखाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ मनरेगा मजदूरों के मुताबिक यह कार्य पूर्ण हुए एक सप्ताह हो गए बावजूद इसके लगातार गुरूवार तक फर्जी तरीके से मनरेगा मजदूरों की हाजिरी लगाकर धन निकासी किया जा रहा है। नाम की गोपनीयता रखते हुए दो मनरेगा महिलाओं ने बताई कि दस दिनों से हर रोज सुबह कुछ मजदूरों को कार्यदाई स्थल पर बुलाकर उनका फोटो खींचकर हाजिरी लगाया जा रहा है जब कि करीब दस दिनों से कार्य बंद है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 16:58:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उमेश गोस्वामी ने खोली डा० बृजेश शुक्ला व सीएमओ के भ्रष्टाचार की पोल </title>
                                    <description><![CDATA[डा० बृजेश शुक्ला के पास नियम विरुद्ध आरसीएच व सीएमएसडी का चार्ज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163196/umesh-goswami-exposed-the-corruption-of-dr-brijesh-shukla-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/img-20251211-wa0282-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले का स्वास्थ्य महकमा इस कदर भ्रष्टाचार के दलदल में उलझा हुआ है कि विभाग के मालदार पदों की खुलेआम बोली लगाकर बिक्री जा रही है । नियम व शासनादेशों को दरकिनार कर  पदों की बोली लगायी जा रही है जिसके परिणाम स्वरूप पात्र डाक्टरों को दरकिनार कर अपात्र डाक्टर व सीएचसी हर्रैया के अधीक्षक डा० बृजेश शुक्ला को नियम विरुद्ध तरीके से मालदार आरसीएच व सीएमएसडी का चार्ज दिया गया है । स्वास्थ्य विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर शिकायतकर्ता  उमेश गोस्वामी ने शपथ - पत्र युक्त शिकायती पत्र  देकर आयुक्त व अपर निदेशक बस्ती मण्डल बस्ती से न्याय की गुहार लगाया है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयुक्त व अपर निदेशक स्वास्थ्य बस्ती मण्डल बस्ती को भेजे शिकायती पत्र में शिकायत कर्ता उमेश ने लिखा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हर्रैया में बतौर अधीक्षक तैनात डाक्टर बृजेश शुक्ला लेवल - 3 के चिकित्सक हैं जो मूलतः बस्ती जनपद के ही निवासी हैं । शासनादेश में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि लेवल - 3 स्तर के चिकित्सक की तैनाती मूल जनपद में जनपद स्तरीय पदों को छोड़कर की जानी चाहिए जबकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा नियमों को दरकिनार करते हुए डाक्टर बृजेश शुक्ला को उनके मूल जनपद में ही आसीएच व सीएमएसडी का जिला स्तरीय चार्ज दिया गया है जो कि शासनादेश का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन है । उमेश ने मण्डलायुक्त व अपर निदेशक स्वास्थ्य से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की माँग किया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 17:21:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोला तहसील तिराहे पर नई पुलिया धंसने से हड़कंप,रातोंरात पैचवर्क कर भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>  ग़ोला बाजार गोरखपुर।</strong> गोला तहसील मुख्यालय तिराहे के पास रामजानकी मार्ग पर बनी नई पुलिया मात्र कुछ ही महीनों में धंस गई। पुलिया धंसने की तस्वीरें सामने आते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना प्रकाश में आते ही निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्था की घबराहट साफ नजर आने लगी। आरोप है कि रविवार देर रात टूटे हिस्से पर आनन-फानन में गिट्टी, सीमेंट डालकर चकत्ते लगाने का खेल शुरू हो गया, जिससे भ्रष्टाचार और घटिया कार्यशैली को छुपाने की कोशिश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने साफ आरोप लगाया कि यह किसी भी तरह की तकनीकी मरम्मत नहीं, बल्कि कागजी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163192/panic-due-to-collapse-of-new-culvert-at-gola-tehsil"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/p--5,,,-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ग़ोला बाजार गोरखपुर।</strong> गोला तहसील मुख्यालय तिराहे के पास रामजानकी मार्ग पर बनी नई पुलिया मात्र कुछ ही महीनों में धंस गई। पुलिया धंसने की तस्वीरें सामने आते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना प्रकाश में आते ही निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्था की घबराहट साफ नजर आने लगी। आरोप है कि रविवार देर रात टूटे हिस्से पर आनन-फानन में गिट्टी, सीमेंट डालकर चकत्ते लगाने का खेल शुरू हो गया, जिससे भ्रष्टाचार और घटिया कार्यशैली को छुपाने की कोशिश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने साफ आरोप लगाया कि यह किसी भी तरह की तकनीकी मरम्मत नहीं, बल्कि कागजी खानापूर्ति और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है। लोगों का कहना है कि रातों-रात किए गए इस पैचवर्क से न तो सुरक्षा बढ़ेगी और न ही पुलिया फिर से टिकाऊ बन पाएगी। दुकानदारों और राहगीरों ने सवाल उठाया कि अगर निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण था, तो कुछ ही महीनों में पुलिया धंसने जैसी गंभीर समस्या कैसे पैदा हो गई?</p>
<p style="text-align:justify;">तहसील मुख्यालय से महज 100 मीटर दूर उदासीनता का नमूना</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिया के धंसने का स्थान तहसील मुख्यालय से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर है, जहां से रोजाना अधिकारी और कर्मचारियों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद पुलिया का इतनी जल्दी जर्जर हो जाना प्रशासनिक लापरवाही, कमजोर मॉनिटरिंग और निर्माण में खुलेआम अनियमितताओं का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के मुताबिक निर्माण के दौरान ही घटिया सामग्री और मनमाने तरीके की शिकायतें उठाई गई थीं, लेकिन उनकी अनदेखी कर दी गई। नतीजा यह हुआ कि पुलिया अभी ठीक से उपयोग में भी नहीं आई और भरभरा कर धंस गई। नागरिकों ने यह भी कहा कि यदि समय-समय पर सही निरीक्षण किया गया होता, तो यह खामी पहले ही पकड़ में आ सकती थी, जिससे बड़ा हादसा टल सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग</strong></p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद लोगों में रोष व्याप्त है। नागरिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक पुलिया का मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों की परियोजनाओं में हो रही मनमानी का संकेत है। उनकी मांग है कि पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों, इंजीनियरों और कार्यदायी संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पुलिया की स्थायी, मानक अनुरूप और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराई जाए ताकि किसी बड़े हादसे की नौबत न आए।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों ने भी प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार और मानकों की अनदेखी का यह परिणाम जनता की जान से खिलवाड़ करने जैसा है, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटना न केवल निर्माण गुणवत्ता की पोल खोलती है, बल्कि सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 17:14:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनरेगा साइड पर अपलोड फर्जी फोटो ने ग्राम पंचायत महेवा कुंवर के भ्रष्टाचार की खोली पोल</title>
                                    <description><![CDATA[सचिव व टी ए से दुरंभि संधि करके मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने में महिला मेट ने मारी बाजी
मिट्टी पटाई कार्य के नाम पर पूर्ण आनलाइन फर्जी मस्टर रोल का भुगतान रोकना बीडीओ हरैया के लिए बना चुनौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163078/fake-photo-uploaded-on-mnrega-side-exposes-corruption-of-gram"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/img-20251209-wa0046-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> जिले कीतेज तर्रार जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्सना व मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल के कड़े निर्देश के बाद भी प्रत्येक विकास खण्डों में बढ़चढ़ कर भ्रष्टाचार चल रहा है और भ्रष्टाचार के रख वाले भी भ्रष्टाचार के दलदल में धंसते चले जा जा रहे हैं अर्थात् जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो अवश्य ही भ्रष्टाचार बढ़ेगा और भ्रष्टाचार को खत्म करना प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है । प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का दावा करती है वह दावा पूरी तरह झूठी दिखाई दे रही है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विकासखण्ड हरैया के अन्तर्गत ग्राम पंचायत महेवा कुंवर में महिला ग्राम प्रधान अनामिका सिंह ने मनरेगा कार्य के नाम पर फर्जी आनलाइन मस्टर रोल जारी करवाया फिर महिला मेट को मुह मांगा कमीशन दे कर पुराने फर्जी फोटो के सहारे आनलाइन जारी मस्टर रोल पर मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर फर्जी मस्टर रोल को पूर्ण किया है और अब बिना मनरेगा कार्य कराये ही पूर्ण फर्जी आनलाइन मस्टर रोल के कार्य को तकनीकी सहायक से एम बी कराकर सचिव द्वारा फाइल पर हस्ताक्षर कराकर फर्जी भुगतान कराने की तैयारी चल रही है । टीए व सचिव के द्वारा पूर्ण किये फाइल पर मनरेगा एपीओ हरैया का हस्ताक्षर होगा । अन्त में बीडीओ के हस्ताक्षर के बाद फाइल भुगतान हेतु आनलाइन फीड होगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम प्रधान अनामिका सिंह का मतलब है कि जब सभी को कमीशन ही देना है तो धरातल पर विकास कार्य क्यों करायें ? महिला मेट गौतम देवी अपना हिस्सा कमीशन मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर वाह वाही लूट रही है । महिला मेट का उद्देश्य है कि हमें अपना हिस्सा कमीशन मिल ही रहा है चाहे ग्राम पंचायत में विकास कार्य हो या न हो हमें अपना हिस्सा कमीशन से मतलब रखना है । महिला मेट गौतम देवी ने गर्मी महीने में मनरेगा कार्य में प्रयोग पुराने फर्जी फोटो के सहारे बड़े ही बारीकी से उच्च अधिकारियों के आंख में धूल झोंककर फर्जी मस्टर रोल पूर्ण किया है । महिला मेट के द्वारा मिट्टी कार्य के नाम पर पूर्ण फर्जी मस्टर रोल का भुगतान रोकना खण्ड विकास अधिकारी हरैया के लिए चुनौती बना हुआ है । उक्त प्रकरण में मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल ने जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 19:58:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गांवों को रोशन करने के नाम पर करोड़ों का खेल, स्ट्रीट लाइट खरीद में भारी भ्रष्टाचार का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा। </strong>जनपद की ग्राम पंचायतों में प्रकाश व्यवस्था के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गांवों को रोशन करने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में खंभों पर लगी हैलोजन लाइटों की खरीद-फरोख्त में जमकर घोटाला किया गया है।सूत्रों के अनुसार जनपद के 16 विकास खंडों के 1214 गांवों में सड़क एवं गलियों की रोशनी के लिए लाखों-करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर मानकविहीन और बेहद कम कीमत की लाइटें लगाई गई हैं। आरोप है कि कम दाम की लाइटों को अधिक मूल्य का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163053/allegations-of-huge-corruption-in-the-purchase-of-street-lights"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/whatsapp-image-2024-05-03-at-8.52.14-pm.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा। </strong>जनपद की ग्राम पंचायतों में प्रकाश व्यवस्था के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गांवों को रोशन करने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में खंभों पर लगी हैलोजन लाइटों की खरीद-फरोख्त में जमकर घोटाला किया गया है।सूत्रों के अनुसार जनपद के 16 विकास खंडों के 1214 गांवों में सड़क एवं गलियों की रोशनी के लिए लाखों-करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर मानकविहीन और बेहद कम कीमत की लाइटें लगाई गई हैं। आरोप है कि कम दाम की लाइटों को अधिक मूल्य का दिखाकर भुगतान कराया गया और सरकारी धन की खुलेआम बंदरबांट की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में लगी लाइटें कुछ ही दिनों में खराब हो गईं, जिससे भ्रष्टाचार की पोल खुद ही खुल गई। शिकायत मिलने के बाद यह भी सामने आया है कि खरीद प्रक्रिया में न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न ही निर्धारित मानकों का पालन किया गया।ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत विभागीय अधिकारियों से लेकर उच्च प्रशासन तक की है और निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो फिर गांव आज भी अंधेरे में क्यों डूबे हैं?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> दुकानदार की भूमिका भी संदिग्ध, भ्रष्टाचार में संलिप्तता के आरोप</strong></div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घोटाले में लाइट सप्लाई करने वाले दुकानदार की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकानदार ने जानबूझकर कम गुणवत्ता और बेहद सस्ती हैलोजन लाइटों की आपूर्ति की, जबकि कागजों में महंगे ब्रांड और उच्च गुणवत्ता की लाइटें दर्शाकर बिल लगाए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह खेल केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें दुकानदार की सीधी मिलीभगत भी शामिल है।</div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने मांग की है कि दुकानदार की भी संपत्ति, खरीद बिल, स्टॉक रजिस्टर और भुगतान विवरण की जांच कराई जाए, ताकि पूरे भ्रष्टाचार के नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश कि गई लेकिन पक्ष की जानकारी नहीं हो सकी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 19:42:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुदरहाविकास खण्ड केकड़सरी मिश्र में बड़े पैमाने पर बढ़ रहे भ्रष्टाचार के खेवनहार बने सचिव टी ए व एपीओ</title>
                                    <description><![CDATA[- सूत्रमहिला ग्राम प्रधान शान्ती द्वारा ग्राम पंचायत वासियों के साथ विकास के नाम पर किया जा रहा धोखा सरकारी धन लूट कर आमदनी दुगुना करने में जुटी महिला मेट सुमन देवी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162042/secretary-ta-and-apo-became-the-bearers-of-corruption-increasing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251128-wa0254-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के कुदरहा केखण्ड विकास अधिकारी कुदरहा आलोक कुमार पंकज की शिथिलता के कारण ग्राम पंचायत कड़सरी मिश्र में मनरेगा भ्रष्टाचार बढ़ रहा है अर्थात् खण्ड विकास अधिकारी आलोक कुमार पंकज SIR कार्य में व्यस्त हैं । खण्ड विकास अधिकारी SIR में व्यस्त होने के कारण ग्राम पंचायतों में चल रहे मनरेगा कार्यों सहित अन्य कार्यों की जांच पड़ताल नही कर पा रहे हैं जिसका सीधा फायदा भ्रष्टाचारी रोजगार सेवक , महिला मेट , ग्राम प्रधान , सचिव व तकनीकी सहायक (जे ई ) उठा रहे हैं । खण्ड विकास अधिकारी समेत जिले के उच्च अधिकारियों को गुमराह करके ग्राम प्रधान शान्ती मनरेगा कार्यों के नाम पर सरकारी धन का लूटपाट करने के फिराक में लगी हुई है । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> महिला मेट सुमन देवी अपनी आमदनी दुगना करने के लिए उद्देश्य से मनरेगा एक ही फर्जी फोटो के सहारे प्रतिदिन 66 मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगा रही है और सरकारी खाते में बची धनराशि को खाली करने के लिए पूरी ताकत झोंक दिया है । मनरेगा कार्यों की देख भाल के लिए प्रदेश सरकार ने ब्लाक स्तर पर एपीओ को नियुक्त किया है लेकिन कुदरहा एपीओ भी अपना हिस्सा कमीशन लेकर ग्राम पंचायत कड़सरी मिश्र में चल रहे मनरेगा फर्जीवाड़ा के बारे में अंजान बने हुए हैं । ग्राम पंचायत कड़सरी मिश्र के ग्राम पंचायत वासियों द्वारा यह महसूस किया जा रहा है कि हम लोगों ने गलत ग्राम प्रधान शान्ती का चुनाव किया था अर्थात् ग्राम प्रधान शान्ती को विजयी बनाया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला ग्राम प्रधान शान्ती व महिला मेट सुमन देवी के कारनामों को लेकर जिले में तरह - तरह की चर्चाएं चल रही है । अब देखना यह है कि मामला प्रकाश में आने के बाद खण्ड विकास अधिकारी कुदरहा द्वारा उक्त प्रकरण में क्या कार्यवाही की जाती है । इस सम्बंध में फोन के माध्यम से ग्राम प्रधान, सचिव व खण्ड विकास अधिकारी कुदरहा से जानकारी लेना चाहा तो किसी ने मीडिया के फोन को रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 17:57:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर अधिवक्ता पर सहकारी समितियों का लाखों रुपया का हेराफेरी का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ललितपुर।</strong> जीरो टोलरेंस नीति का हवाला देने वाली भाजपा सरकार के अहम विभाग में जी.एस.टी. के लाखों रुपये गबन का घोटाला सामने आने से हडक़म्प मचा हुआ है। भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हुये एक कर अधिवक्ता पर लाखों रुपये हड़पने का आरोप लगाया जा रहा है। इस सम्बन्ध में उ.प्र.सहकारी समिति कर्मचारी संघ अध्यक्ष व महामंत्री ने उपायुक्त एवं उपनिबंधक सहकारिता झांसी मण्डल को पत्र लिखकर पूरे मामले की समितिवार जांच कर रकम वापस कराने और कर अधिवक्ता का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर कानूनी कार्यवाही किये जाने की मांग उठायी है। लाखों रुपये गबन का मामला चर्चाओं में आने के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161313/tax-lawyer-accused-of-embezzling-lakhs-of-rupees-from-cooperative"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/whatsapp-image-2024-05-03-at-8.52.14-pm4.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ललितपुर।</strong> जीरो टोलरेंस नीति का हवाला देने वाली भाजपा सरकार के अहम विभाग में जी.एस.टी. के लाखों रुपये गबन का घोटाला सामने आने से हडक़म्प मचा हुआ है। भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हुये एक कर अधिवक्ता पर लाखों रुपये हड़पने का आरोप लगाया जा रहा है। इस सम्बन्ध में उ.प्र.सहकारी समिति कर्मचारी संघ अध्यक्ष व महामंत्री ने उपायुक्त एवं उपनिबंधक सहकारिता झांसी मण्डल को पत्र लिखकर पूरे मामले की समितिवार जांच कर रकम वापस कराने और कर अधिवक्ता का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर कानूनी कार्यवाही किये जाने की मांग उठायी है। लाखों रुपये गबन का मामला चर्चाओं में आने के बाद से समिति सचिवों व उच्चाधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उ.प्र.सहकारी समिति कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कमल किशोर बबेले व महामंत्री पंकज सिंह ने संयुक्त रूप से एक पत्र उपायुक्त एवं उपनिबंधक सहकारिता झांसी मण्डल को भेजा है। पत्र में उन्होंने ललितपुर की 30 सहकारी समिति के सचिवों ने बीते पांच वर्षों से जीएसटी रिर्टन भरने के लिए नियुक्त कर अधिवक्ता पर लगभग 19 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुये विभाग से उक्त कर अधिवक्ता का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर एफआईआर दर्ज कराये जाने की मांग उठायी है।</p>
<p style="text-align:justify;">संघ अध्यक्ष ने बताया कि कर अधिवक्ता द्वारा जीएसटी मद से अधिक शुल्क लेने के सम्बन्ध में एक पत्र सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक ललितपुर को पत्र प्रेषित किया गया था। बावजूद इसके कर अधिवक्ता द्वारा समितियों के जीएसटी रिर्टन भरवाने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। बताया कि समितियों द्वारा जो धनराशि कर अधिवक्ता के खाते में स्थानान्तरित की गयी, उतनी जीएसटी मद में जमा न करते हुये कम धनराशि कर अधिवक्ता द्वारा जमा की गयी है, जिससे समितियों को आर्थिक क्षति हुयी है एवं कर अधिवक्ता द्वारा सरकारी धन का दुरुपयोग किये जाने का भी आरोप है।<br /><br /><strong>समितिवार आंकलन करने पर आया मामला सामने</strong><br />संघ अध्यक्ष ने बताया कि जिले की तीस सहकारी समितियों पर कुल 3609254 रुपये की धनराशि कर अधिवक्ता के खाते में जीएसटी मद के लिए ट्रांस्फर की गयी, लेकिन कर अधिवक्ता द्वारा कुल 1646272 रुपये ही जीएसटी मद में जमा की गयी एवं शेष 1962982 रुपये को अपने निजी उपयोग में कर लिया गया। संघ ने कहा कि यदि यह धनराशि समितियों के प्रकीण खातों में वापस ट्रांस्फर हो जाये तो समितियों को अपने विद्युत बिल, कनेक्टिविटी आदि के बिल भुगतान करने में सुगमता होगी। यह भी आरोप है कि समितियों को विधिवत जानकारी न होने के कारण कर अधिवक्ता ने सचिवों को गुमराह कर यह धनराशि अपने खाते में ट्रांस्फर करा ली।<br /><br /><strong>जांच कर कार्यवाही की मांग</strong><br />उ.प्र.सहकारी समिति कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कमल किशोर बबेले व महामंत्री पंकज सिंह ने संयुक्त रूप से उपायुक्त एवं उपनिबंधक सहकारिता को भेजे पत्र में उक्त कर अधिवक्ता का रजिस्ट्रेशन निरस्त कराते हुये इनके खिलाफ आवश्यक कार्यवाही किये जाने की मांग उठायी है।<br /><br /><strong>आयकर विभाग के नोटिस से खुली नींद</strong><br />गेंहू पर शून्य जीएसटी है, जबकि गेंहू क्रय केन्द्रों के लिए तैयार बैलेंस शीट में गलत विवरण दर्ज किया गया। आयकर विभाग ने टर्न ओवर के अनुसार समयाविधि तक ऑडिट न होने पर नोटिस जारी कर दिया। नोटिस विभाग में मानो किसी बम की तरह फट पड़ा। कर अधिवक्ता से समितियों ने जबाव तलब करना शुरू कर दिया। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2024-25 तक रिर्टन दाखिल करने के लिए जिस अधिवक्ता को अधिकृत किया है, उनके द्वारा ही लाखों रुपये का गबन करते हुये घोटाले को अंजाम दे डाला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 20:11:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीमार समाज का इलाज केवल दवा नहीं,व्यवस्था की ईमानदारी से होता जो स्वास्थ्य विभाग में नहीं है</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>जिले के लोकतंत्र में स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार बढ़ते संकट का उदाहरण है स्वास्थ्य स्वास्थ्य नागरिक का मौलिक अधिकार कहा गया है, पर वास्तविकता यह है कि आज सरकारी अस्पताल इलाज नहीं, लाचारी का प्रतीक बनते जा रहे हैं।जिलों के अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक— हर जगह अव्यवस्था, लूट और मिलीभगत की संस्कृति गहराती जा रही है।भ्रष्टाचार की जड़ में तंत्र की संवेदनहीनता,अस्पतालों के नाम पर करोड़ों रुपये के बजट हर साल स्वीकृत होते हैं, लेकिन वह धन मरीजों तक पहुँचने से पहले ही “प्रशासनिक दीवारों” में समा जाता है। भवनों के उच्चीकरण, उपकरणों की खरीद, भोजन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159745/the-treatment-of-the-sick-society-is-not-done-only"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251111-wa0285-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>जिले के लोकतंत्र में स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार बढ़ते संकट का उदाहरण है स्वास्थ्य स्वास्थ्य नागरिक का मौलिक अधिकार कहा गया है, पर वास्तविकता यह है कि आज सरकारी अस्पताल इलाज नहीं, लाचारी का प्रतीक बनते जा रहे हैं।जिलों के अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक— हर जगह अव्यवस्था, लूट और मिलीभगत की संस्कृति गहराती जा रही है।भ्रष्टाचार की जड़ में तंत्र की संवेदनहीनता,अस्पतालों के नाम पर करोड़ों रुपये के बजट हर साल स्वीकृत होते हैं, लेकिन वह धन मरीजों तक पहुँचने से पहले ही “प्रशासनिक दीवारों” में समा जाता है। भवनों के उच्चीकरण, उपकरणों की खरीद, भोजन और दवा आपूर्ति हर योजना में कमीशन का खेल खुला राज़ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो दवाइयाँ मरीजों को मुफ्त मिलनी चाहिए, वे बाहरी दुकानों से खरीदने पर मजबूर कर दी जाती हैं।डॉक्टर निजी अस्पतालों के ‘साइलेंट पार्टनर’कई सरकारी चिकित्सक सरकारी वेतन पाकर भी निजी अस्पतालों में सक्रिय हैं।मरीजों को सरकारी अस्पताल से निजी क्लिनिक की ओर मोड़ना अब गुप्त नहीं रहा। यह सब स्वास्थ्य विभाग की जानकारी में होते हुए भी ‘मौन स्वीकृति’ की तरह चलता हैग्रामीण क्षेत्र में मौत बन गया इलाज,ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महज नाम के रह गए हैं।कई केंद्रों पर डॉक्टर महीनों अनुपस्थित रहते हैं,और झोलाछाप चिकित्सक खुलेआम जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।कानून और प्रशासन दोनों ही आंखें मूँदे हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिस्टम की मिलीभगत का चेहरा : टेंडर और ठेके की लूट,खाद्य आपूर्ति, सफाई, एम्बुलेंस सेवा— सभी का ठेका चुनिंदा फर्मों को सालों से मिलता जा रहा है।न तो प्रतिस्पर्धा बची है, न पारदर्शिता।परिणामस्वरूप अस्पतालों में गंदगी, मरीजों के लिए घटिया भोजन, और साधनों की किल्लत सामान्य हो चुकी है।सरकारें बदलती हैं, पर बीमारी वही रहती है,यह समस्या किसी एक दल या काल की नहीं — यह पूरे प्रशासनिक संस्कार की बीमारी है।जब तक ईमानदार निगरानी, लोक–भागीदारी और डिजिटल पारदर्शिता नहीं बढ़ेगी,सरकारी अस्पताल सिर्फ “भवन” रह जाएंगे,भरोसा नहीं बन पाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब जवाबदेही तय होनी चाहिए,अब जरूरत है कि—हर सरकारी चिकित्सक की डिजिटल उपस्थिति और कार्य-रिकॉर्ड सार्वजनिक हो,अस्पताल प्रबंधन समितियों में स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी शामिल हों,और सबसे ज़रूरी स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार पर शून्य सहिष्णुता नीति लागू की जाए। बीमार समाज का इलाज केवल दवा नहीं,व्यवस्था की ईमानदारी से होता ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Nov 2025 19:07:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नौकरशाही जेब भर कर निकाल रही है सुशासन का जनाज़ा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश भर में सरकारी लोकसेवकों दोनों हाथों से अपने पद और रुतबे का मनमाना दुरूपयोग कर अथाह धन संपत्ति बटोर रहें हैं मामूली क्लर्क के घरों में भी छापे में करोड़ों की अकूत संपत्ति बाहर आ रही है लगता है कि नौकरशाही ने सरकार की तमाम कोशिशों को नाकाम कर जमकर चूसने का कोई मौका नहीं छोड़ा है। आपको बता दें कि अभी तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है. तेलंगाना के एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक असिस्टेंट डिविजनल इंजीनियर को गिरफ्तार कर लिया  और उसके पास से तलाशी के दौरान 2.18 करोड़ रुपये नकद जब्त कर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155683/the-bureaucracy-is-taking-out-the-pocket-of-good-governance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/hindi-divas22.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश भर में सरकारी लोकसेवकों दोनों हाथों से अपने पद और रुतबे का मनमाना दुरूपयोग कर अथाह धन संपत्ति बटोर रहें हैं मामूली क्लर्क के घरों में भी छापे में करोड़ों की अकूत संपत्ति बाहर आ रही है लगता है कि नौकरशाही ने सरकार की तमाम कोशिशों को नाकाम कर जमकर चूसने का कोई मौका नहीं छोड़ा है। आपको बता दें कि अभी तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है. तेलंगाना के एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक असिस्टेंट डिविजनल इंजीनियर को गिरफ्तार कर लिया  और उसके पास से तलाशी के दौरान 2.18 करोड़ रुपये नकद जब्त कर लिए गए. इसी तरह  असम में सिविल सेवा देने वाली अधिकारी नूपुर बोरा को पुलिस ने कथित तौर आय स अधिक संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है। असम में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के तहत मुख्यमंत्री विशेष सतर्कता सेल ने नूपुर बोरा के गुवाहाटी स्थिति आवास पर छापा मारा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां से 92 लाख रुपये नगद बरामद हुए और करीब 1 करोड़ रुपये के आभूषण जब्त किए गए। इतना ही नहीं बारपोटा स्थिति उनके किराए के घर पर छापेमारी के दौरान 10 लाख रुपये नगद बरामद किए गए।नूपुर बोरा असम के गोलाघाट की रहने वाली हैं। बोरा साल 2019 में असम सिविल सेवा में भर्ती हुईं थीं। मौजूदा समय में वो कामरूप जिले के गोरोइमारी में सर्कल ऑफिसर के पद पर तैनात थी। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि विवादास्पद भूमि संबंधी मुद्दों में कथित संलिप्तता की शिकायतों के बाद पिछले छह महीनों से उन पर निगरानी रखी जा रही थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि नूपुर जब बारपेटा राजस्व मडल में तैनात थीं, तब उन्होंने पैसों के बदले हिंदुओं की जमीन संदिग्ध लोगों को ट्रांसफर कर दिया था। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। सरमा ने कहा कि अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों में राजस्व मंडलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया है। इतना ही नहीं विशेष सतर्कता सेलने नूपुर के सहयोगियों के ठिकानों पर भी छापा मारा है। ये वही लोग हैं, जो बारपेटा में राजस्व सर्कल ऑफिस में काम करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उधर छोटे से राज्य तेलंगाना में भ्रष्टाचार के बड़े मामले पकड़ में आ रहे हैं तेलंगाना दक्षिणी विद्युत वितरण कंपनी के असिस्टेंट डिविजनल इंजीनियर (ऑपरेशंस) के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया गया है. उन पर अपनी सेवा के दौरान कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियों और संदिग्ध तरीकों से संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगा हुआ है.बिजली विभाग के आरोपी इंजीनियर के घर और उसके तथा उसके रिश्तेदारों के 10 अन्य ठिकानों पर तलाशी ली गई. तलाशी के दौरान, एक फ्लैट, एक भूतल और पांच मंजिला इमारत, 10 एकड़ जमीन पर एक कंपनी, छह आवासीय ओपन प्लॉट, एक खेती योग्य जमीन, 2 कार, सोने के आभूषण और बैंक जमा सहित कई तरह की संपत्तियां मिलीं.इसके अलावा, अधिकारी की एक संदिग्ध बेनामी संपत्ति के घर से 2.18 करोड़ रुपये कैश भी बरामद किए गए. जांच एजेंसी एसीबी के अनुसार एजेंसी की तलाशी के दौरान पता चला कि बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करके भारी मात्रा में चल-अचल संपत्तियां अर्जित की थीं. तलाशी अभियान अभी भी जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एसीबी ने इंजीनियर और उनके रिश्तेदारों से जुड़े कई स्थानों पर तलाशी ली और माधापुर तथा गाचीबोवली सहित हैदराबाद में करीब 15 टीमें तैनात कीं.फिलहाल इन संपत्तियों का बाजार मूल्य आधिकारिक मूल्य से कहीं अधिक होने की उम्मीद है. भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है. एसीबी का कहना है कि आगे की जांच जारी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभी हाल ही में रंगारेड्डी जिले के नरसिंगी नगरपालिका कार्यालय में मंगलवार, 9 सितंबर 2025 को, तेलंगाना भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो  ने टाउन प्लानिंग अधिकारी, एस मणिहरिका को ₹4 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने मंचिरेवुला निवासी विनोद से नियमित स्कीम के तहत प्लॉट की स्वीकृति के लिए ₹10 लाख की मांग की थी, जिसमें ₹4 लाख अग्रिम के रूप में प्राप्त किए गए थे। शिकायत मिलने पर भ्रष्टाचार निवारक ब्यूरो ने एक जाल बिछाया और लेनदेन की कार्रवाई के दौरान अधिकारी को पकड़ लिया। इससे पहले 19 अगस्त को एसीबी ने एक तहसीलदार के यहां भी छापा मारा था. छापे के दौरान 5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का पता चला था. अधिकारियों ने वारंगल जिले के वारंगल फोर्ट मंडल के तहसीलदार बांदी नागेश्वर राव से जुड़े सात स्थानों पर तलाशी ली थी।</div>
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<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि एसीबी ने अकेले जुलाई 2025 माह में कुल 22 मामले दर्ज किए, जिनमें 13 ट्रेप केस एक आय से अधिक संपत्ति का मामला, एक आपराधिक कदाचार का मामला, एक नियमित जांच और छह औचक निरीक्षण शामिल हैं।जनवरी से जुलाई तक, सात महीने की इस अवधि में , ब्यूरो ने 148 मामले दर्ज किए, जिनमें 93 ट्रैप मामले, नौ आय से अधिक संपत्ति के मामले, 15 आपराधिक कदाचार के मामले, 11 नियमित पूछताछ, 17 औचक निरीक्षण और तीन गोपनीय पूछताछ शामिल हैं। दस आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों सहित कुल 145 लोक सेवकों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया। इस दौरान ब्यूरो ने ट्रैप मामलों में ₹30.32 लाख जब्त किए और ₹39.16 करोड़ से अधिक की आय से अधिक संपत्ति का पता लगाया।</div>
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<div style="text-align:justify;">आप को याद होगा इस से पहले भी 12 जून 2025 को तेलंगाना के ही एक इंजीनियर पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था . छापेमारी में इतनी संपत्ति मिली , जिसे देखकर जांच ऐजेंसी भी हैरान रह गयी. सवाल यही कि आखिर तेलंगाना में सिंचाई विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पास इतना पैसा आया कहां से. उसने अपने बेटे की थाईलैंड में डेस्टिनेशन वेडिंग की, जिसमें कथित तौर पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए. संपत्ति की अगर बात करें को उसके पास एक विला, तीन इंडिपेंडेंट बिल्डिंग्स, 19 प्राइम रेजिडेंशियल प्लॉट्स, करीब 4 फ्लैट और कई होटलों में हिस्सेदारी है. वह पेशे से तो सिंचाई विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर है, लेकिन लाइफस्टाइल ऐसा जैसे कोई रईस व्यापारी हो।</div>
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<div style="text-align:justify;">एंटी करप्शन ब्यूरो ने  एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नुने श्रीधर से जुड़े 13 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान ऐसी संपत्तियां बरामद की, जिससे पता चलता है कि ये सब उसकी कमाई से कहीं ज्यादा है. प्रॉपर्टी की लिस्ट में हैदराबाद के शेखपेट में स्काई हाई नाम के एक आलीशान रेंजिडेंशियल आवासीय परिसर में 4,500 वर्ग फुट का फ्लैट और करीमनगर में कम से कम तीन अन्य फ्लैट शामिल हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">ये मामले तो सिर्फ बानगी मात्र है देश भर में कमोबेश यही हालात बने हैं सरकारी कर्मचारी हो या अधिकारी बिना सुविधा शुल्क के कोई फाइल टस से मस करने को तैयार नहीं है। स्थिति यह है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी बेहिसाब अवैध ढंग से आय से सौ सौ गुना संपत्ति बटोर बैठे हैं आपको बता दें कि यूपी की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव और चीफ इंजीनियर यादव सिंह  कभी भ्रष्टाचार के पर्याय बने थे लेकिन अब हर प्रदेश में नीरा यादव और यादव सिंह जैसे सरकारी अधिकारी लाखों करोड़ो की संपति बटोर कर कुंडली मार कर बैठे हैं ऐसे समय में जब पडोसी देश नैपाल के जैनजी युवा भ्रष्टाचार के कारण ही आंदोलित होकर सड़कों पर उतरे और सत्ता परिवर्तन कर दिया हमारी सरकारों को भी सरकारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस पालिसी लागू कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि आम आदमी सुशासन के नारों को धरातल पर महसूस करे।</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 18:21:12 +0530</pubDate>
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